घर में वापसी (धूमिल)
Chhattisgarh Board · Class 11 · Hindi
NCERT Solutions for घर में वापसी (धूमिल) — Chhattisgarh Board Class 11 Hindi.
Interactive on Super Tutor
Studying घर में वापसी (धूमिल)? Get the full interactive chapter.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for ncert solutions and more.
1,000+ Class 11 students started this chapter today
प्रश्न-अभ्यास — घर में वापसी (धूमिल)
1घर एक परिवार है, परिवार में पाँच सदस्य हैं, किंतु कवि पाँच सदस्य नहीं उन्हें पाँच जोड़ी आँखें क्यों मानता है?Show solution
व्याख्या एवं उत्तर:
कवि परिवार के सदस्यों को 'पाँच जोड़ी आँखें' इसलिए कहता है क्योंकि उनके बीच संवाद और भावनात्मक संबंध लगभग समाप्त हो चुके हैं। परिवार के सदस्य एक ही छत के नीचे रहते हैं, किंतु उनके बीच कोई वास्तविक आत्मीय संपर्क नहीं है। वे एक-दूसरे को केवल देखते हैं — बोलते नहीं, छूते नहीं, महसूस नहीं करते। आँखें देखने का माध्यम हैं, अर्थात् परिवार के सदस्य एक-दूसरे के अस्तित्व से परिचित तो हैं, परंतु उनके बीच कोई गहरा भावनात्मक जुड़ाव नहीं है।
आर्थिक तंगी, सामाजिक दबाव और जीवन की कठिनाइयों ने परिवार को भावनात्मक रूप से इतना जड़ बना दिया है कि सदस्य केवल एक-दूसरे को निहारते रह जाते हैं — प्रेम, संवाद और अपनापन व्यक्त नहीं कर पाते। इसीलिए कवि उन्हें 'पाँच सदस्य' न कहकर 'पाँच जोड़ी आँखें' कहता है — जो देख सकती हैं, पर बोल नहीं सकतीं।
निष्कर्ष: कवि यह बताना चाहता है कि आधुनिक जीवन की विवशताओं ने पारिवारिक रिश्तों को केवल दृष्टि-संबंध तक सीमित कर दिया है।
2'पत्नी की आँखें आँखें नहीं हाथ हैं, जो मुझे थामे हुए हैं' से कवि का क्या अभिप्राय है?Show solution
व्याख्या एवं अभिप्राय:
कवि यहाँ पत्नी और अन्य परिवार के सदस्यों में एक महत्त्वपूर्ण अंतर स्थापित करता है। माँ, पिता और बेटी की आँखें निष्क्रिय हैं — वे केवल देखती हैं, सहारा नहीं देतीं। किंतु पत्नी की आँखें 'हाथ' हैं — अर्थात् वे केवल देखती नहीं, बल्कि थामती भी हैं।
इस पंक्ति का अभिप्राय यह है कि:
- पत्नी कवि की सबसे बड़ी शक्ति और सहारा है।
- जीवन की तमाम कठिनाइयों, आर्थिक संकटों और सामाजिक संघर्षों में पत्नी ही उसे टूटने से बचाती है।
- पत्नी की दृष्टि में केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि सक्रिय प्रेम और सहयोग है।
- 'हाथ' शब्द सक्रियता, सहारे और आत्मीयता का प्रतीक है।
कवि ने यहाँ 'रूपक अलंकार' का सुंदर प्रयोग किया है — आँखों को हाथ कहकर पत्नी के प्रेम की सक्रियता और गहराई को व्यक्त किया गया है।
निष्कर्ष: पत्नी परिवार में एकमात्र ऐसी सदस्य है जो कवि को भावनात्मक आधार और जीने की शक्ति प्रदान करती है।
3'वैसे हम स्वजन हैं, करीब हैं'...क्योंकि हम पेशेवर गरीब हैं' से कवि का क्या आशय है? अगर अमीर होते तो क्या स्वजन और करीब नहीं होते?Show solution
व्याख्या एवं आशय:
कवि का आशय यह है कि उसके परिवार और स्वजनों के बीच जो निकटता और अपनापन है, वह वास्तविक प्रेम पर आधारित नहीं, बल्कि साझा गरीबी पर आधारित है। 'पेशेवर गरीब' से तात्पर्य है कि गरीबी उनके जीवन का एक स्थायी और व्यावसायिक हिस्सा बन गई है — वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी गरीब हैं।
एक ही आर्थिक स्तर पर होने के कारण वे एक-दूसरे के करीब हैं — उनकी पीड़ा, संघर्ष और विवशताएँ एक जैसी हैं। यह निकटता प्रेम से नहीं, बल्कि समान दुर्दशा से उत्पन्न है।
यदि अमीर होते तो क्या स्वजन नहीं होते?
कवि व्यंग्यात्मक रूप से यह संकेत देता है कि यदि वे अमीर होते, तो शायद यह निकटता न रहती। धन आने पर:
- स्वार्थ और अहंकार बढ़ जाता है।
- रिश्तों में दूरी आ जाती है।
- हर सदस्य अपनी अलग दुनिया बना लेता है।
यह एक कटु सामाजिक सत्य है कि गरीबी लोगों को एक-दूसरे पर निर्भर बनाती है और इसी निर्भरता को 'अपनापन' समझ लिया जाता है।
निष्कर्ष: कवि समाज की उस विडंबना पर व्यंग्य करता है जहाँ रिश्तों की नींव प्रेम नहीं, बल्कि साझा आर्थिक विवशता है।
4'रिश्ते हैं; लेकिन खुलते नहीं' – कवि के सामने ऐसी कौन सी विवशता है जिससे आपसी रिश्ते भी नहीं खुलते हैं?Show solution
विवशताओं का विश्लेषण:
कवि के सामने निम्नलिखित विवशताएँ हैं जो रिश्तों को खुलने नहीं देतीं:
आर्थिक विवशता: परिवार की गरीबी इतनी गहरी है कि जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति में ही सारी ऊर्जा खर्च हो जाती है। भावनाओं को व्यक्त करने का न समय है, न साधन।
भाषा की सीमा: कवि कहता है कि 'भाषा भुना-सी ताले' की तरह जटिल है। अपनी भावनाओं को शब्दों में ढालना कठिन है। रिश्तों को व्यक्त करने की भाषा ही नहीं मिलती।
भावनात्मक जड़ता: जीवन की कठिनाइयों ने परिवार के सदस्यों को इतना संवेदनहीन बना दिया है कि वे प्रेम और अपनापन व्यक्त करना भूल गए हैं।
सामाजिक दबाव: समाज में पुरुष के लिए भावनाएँ व्यक्त करना कमज़ोरी माना जाता है, जिससे रिश्ते बंद रहते हैं।
आत्मविश्वास की कमी: कवि कहता है कि 'हम अपने खून में इतना भी लोहा नहीं पाते' — अर्थात् उनमें इतनी हिम्मत नहीं कि वे रिश्तों को खोलें, घर को अपना कहें।
निष्कर्ष: आर्थिक तंगी, भाषाई असमर्थता और भावनात्मक जड़ता मिलकर एक ऐसा ताला बना देती हैं जिसे खोलने की चाबी परिवार के पास नहीं है।
5निम्नलिखित का काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –
(क) माँ की आँखें पड़ाव से पहले ही तीर्थ-यात्रा की बस के दो पंचर पहिए हैं।
(ख) पिता की आँखें लोहसाँय की ठंडी शलाखें हैं।Show solution
भाव सौंदर्य:
कवि माँ की आँखों की तुलना 'तीर्थ-यात्रा की बस के दो पंचर पहियों' से करता है। इसका अर्थ है कि माँ की आँखें थकी हुई, निराश और जीवन की यात्रा में बीच रास्ते ही रुक गई हैं। माँ अपने जीवन का लक्ष्य (पड़ाव/तीर्थ) पाने से पहले ही टूट चुकी है। उसकी आँखों में न उत्साह है, न आशा — वे निष्प्राण और थकी हुई हैं। गरीबी और जीवन के संघर्षों ने माँ को असमय बूढ़ा और निराश कर दिया है।
काव्य सौंदर्य:
- अलंकार: रूपक अलंकार — माँ की आँखों को 'पंचर पहिए' कहा गया है।
- बिंब: यांत्रिक बिंब का प्रयोग — आधुनिक जीवन की यांत्रिकता को दर्शाता है।
- प्रतीक: 'तीर्थ-यात्रा' जीवन के लक्ष्य का प्रतीक है; 'पंचर पहिए' असफलता और थकान के।
- भाषा: सहज बोलचाल की भाषा में गहरी बात कही गई है।
- व्यंग्य: माँ की दुर्दशा पर मार्मिक व्यंग्य है।
---
(ख) पिता की आँखें लोहसाँय की ठंडी शलाखें हैं।
भाव सौंदर्य:
कवि पिता की आँखों की तुलना 'लोहसाँय की ठंडी शलाखों' से करता है। लोहसाँय वह भट्टी है जहाँ लोहे को गलाकर औजार बनाए जाते हैं। गर्म लोहे की शलाखें जब ठंडी हो जाती हैं तो वे कठोर, निर्जीव और भावहीन हो जाती हैं। इसी प्रकार पिता की आँखें भी कठोर, ठंडी और भावशून्य हैं। जीवन भर परिश्रम और संघर्ष करते-करते पिता की संवेदनाएँ जड़ हो गई हैं — उनमें न प्रेम की गर्माहट है, न भावनाओं की कोमलता।
काव्य सौंदर्य:
- अलंकार: रूपक अलंकार — पिता की आँखों को 'ठंडी शलाखें' कहा गया है।
- बिंब: श्रम और कठोरता का बिंब — मेहनतकश वर्ग की पीड़ा को दर्शाता है।
- प्रतीक: 'ठंडी शलाखें' भावनात्मक शीतलता और कठोरता का प्रतीक हैं।
- भाषा: लोक-जीवन से जुड़े शब्दों ('लोहसाँय', 'शलाखें') का प्रयोग कविता को यथार्थवादी बनाता है।
- विशेषता: 'ठंडी' विशेषण विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है — यह पिता की भावनात्मक निष्क्रियता को रेखांकित करता है।
योग्यता-विस्तार — घर में वापसी (धूमिल)
1घर में रहनेवालों से ही घर, घर कहलाता है। पारिवारिक रिश्ते खून के रिश्ते हैं फिर भी उन रिश्तों को न खोल पाना कैसी विवशता है! अपनी राय लिखिए।Show solution
यह सत्य है कि घर केवल ईंट-पत्थर की दीवारों से नहीं बनता — घर वहाँ होता है जहाँ अपने लोग हों, जहाँ प्रेम हो, संवाद हो और अपनापन हो। परिवार के सदस्यों के बीच खून का रिश्ता सबसे गहरा और पवित्र माना जाता है।
किंतु आज के जीवन में एक विचित्र विडंबना है — खून के रिश्ते होते हुए भी लोग एक-दूसरे से दूर हैं। इसके कारण हैं:
- आर्थिक दबाव: गरीबी या अत्यधिक व्यस्तता मनुष्य को भावनाओं से दूर कर देती है।
- संवादहीनता: आधुनिक जीवन में लोग एक-दूसरे से बात करना भूल गए हैं।
- अहंकार और स्वार्थ: धन और सामाजिक प्रतिष्ठा की दौड़ में रिश्ते पीछे छूट जाते हैं।
- भावनात्मक असमर्थता: कई बार मनुष्य अपनी भावनाएँ व्यक्त करना नहीं जानता।
यह विवशता अत्यंत दुखद है। रिश्तों को खोलने के लिए साहस, संवाद और सहानुभूति की आवश्यकता है। हमें चाहिए कि हम अपने परिवार के साथ समय बिताएँ, एक-दूसरे की बात सुनें और प्रेम को शब्दों में व्यक्त करें। तभी घर वास्तव में 'घर' बन सकता है।
2आप अपने पारिवारिक रिश्तों-संबंधों के बारे में एक निबंध लिखिए।Show solution
परिवार मनुष्य की प्रथम पाठशाला है। यहीं से हम प्रेम, त्याग, सहयोग और जीवन के मूल्य सीखते हैं। पारिवारिक रिश्ते जीवन की सबसे बड़ी पूँजी हैं।
माता-पिता का रिश्ता: माता-पिता का प्रेम निःस्वार्थ और असीमित होता है। माँ की ममता और पिता का अनुशासन मिलकर हमें जीवन के लिए तैयार करते हैं। उनका आशीर्वाद हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।
भाई-बहन का रिश्ता: यह रिश्ता मित्रता और प्रतिस्पर्धा का अद्भुत मिश्रण है। भाई-बहन एक-दूसरे के सबसे पहले मित्र और आलोचक होते हैं।
पति-पत्नी का रिश्ता: यह जीवन की सबसे महत्त्वपूर्ण साझेदारी है। सुख-दुख में साथ निभाना इस रिश्ते की पहचान है।
आधुनिक चुनौतियाँ: आज व्यस्त जीवनशैली, मोबाइल और सोशल मीडिया ने पारिवारिक संवाद को कम कर दिया है। हमें इन रिश्तों को सींचते रहना चाहिए।
निष्कर्ष: पारिवारिक रिश्ते जीवन की नींव हैं। इन्हें प्रेम, विश्वास और संवाद से मजबूत बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।
3'यह मेरा घर है' के आधार पर सिद्ध कीजिए कि आपका अपना घर है।Show solution
कवि धूमिल की कविता में 'यह मेरा घर है' कहना केवल एक भौतिक दावा नहीं, बल्कि एक भावनात्मक साहस है। कवि कहता है कि 'हम थोड़ा जोखिम उठाते, दीवार पर हाथ रखते और कहते — यह मेरा घर है।'
मेरा घर इसलिए मेरा है क्योंकि:
यहाँ मेरे अपने हैं — माँ, पिता, भाई-बहन और परिवार के सदस्य यहाँ रहते हैं। उनकी उपस्थिति इसे घर बनाती है।
यहाँ मेरी यादें हैं — बचपन की खेल-कूद, त्योहारों की खुशियाँ, दुख के क्षण — सब इसी घर की दीवारों में समाए हैं।
यहाँ मुझे सुरक्षा मिलती है — बाहर की दुनिया की थकान और संघर्ष के बाद घर ही वह स्थान है जहाँ मैं निश्चिंत हो सकता हूँ।
यहाँ प्रेम है — परिवार का प्रेम, माँ का स्नेह, पिता का आशीर्वाद — यही घर को घर बनाते हैं।
यहाँ मेरी पहचान है — इस घर से मेरा नाम, मेरी जड़ें और मेरा अस्तित्व जुड़ा है।
निष्कर्ष: घर केवल चार दीवारें नहीं होतीं — घर वह होता है जहाँ अपनापन हो, प्रेम हो और जहाँ हम स्वयं को सुरक्षित महसूस करें। इसीलिए मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूँ — 'यह मेरा घर है।'
Stuck on a step?
Ask Super Tutor AI to explain any solution on this page in a simpler way — free, 24x7.
Ask a Doubt FreeFrequently Asked Questions
What are the important topics in घर में वापसी (धूमिल) for Chhattisgarh Board Class 11 Hindi?
How to score full marks in घर में वापसी (धूमिल) — Chhattisgarh Board Class 11 Hindi?
Where can I get free NCERT Solutions for घर में वापसी (धूमिल) Class 11 Hindi?
Sources & Official References
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
More resources for घर में वापसी (धूमिल)
Important Questions
Practice with board exam-style questions
Syllabus
What topics to cover
Revision Notes
Key points for last-minute revision
Study Plan
Step-by-step plan to ace this chapter
Flashcards
Quick-fire cards for active recall
Formula Sheet
All formulas in one place
Chapter Summary
Understand the chapter at a glance
Practice Quiz
Test yourself with a quick quiz
Concept Maps
See how topics connect visually
For serious students
Get the full घर में वापसी (धूमिल) chapter — for free.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan for Chhattisgarh Board Class 11 Hindi.