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Chapter 13 of 15
NCERT Solutions

मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी)

Haryana Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी) — Haryana Board Class 10 Hindi.

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EXERCISES

1लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?Show solution
लेखिका के व्यक्तित्व पर पिताजी, माँ और शीला अग्रवाल का विशेष प्रभाव पड़ा।

- पिताजी से उन्हें विचारों की दुनिया, राजनीति, साहित्यिक वातावरण और विशिष्ट बनने की प्रेरणा मिली। साथ ही उनके शक्की स्वभाव, अहं, और उपलब्धियों को लेकर बनी ग्रंथियों की छाप भी लेखिका के भीतर दिखती है।
- माँ के धैर्य, सहनशक्ति और त्याग का प्रभाव भी उनके जीवन पर पड़ा, यद्यपि वे उसे आदर्श नहीं मान सकीं।
- शीला अग्रवाल ने उन्हें साहित्य की दुनिया से परिचित कराया, पढ़ने की सही दिशा दी और उन्हें घर की चारदीवारी से निकालकर सक्रिय सामाजिक भागीदारी की ओर मोड़ा।

इस प्रकार, पिता से व्यक्तित्व-निर्माण के अंतर्विरोध, माँ से सहनशीलता और शीला अग्रवाल से साहित्यिक व वैचारिक जागृति मिली।

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2इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?Show solution
पिता जी रसोई को 'भटियारखाना' इसलिए कहते थे क्योंकि उनके अनुसार रसोई में समय बिताना या वहाँ बंध जाना अपनी क्षमता और प्रतिभा को भट्टी में झोंक देना था। वे चाहते थे कि लड़की केवल गृहकार्य तक सीमित न रहे, बल्कि पढ़े-लिखे, समझे और समाज में अपनी भूमिका निभाए। इसलिए रसोई को उन्होंने स्त्री-जीवन की सीमित, परंपरागत और प्रतिभा-नाशक जगह के रूप में देखा और उसे यह नाम दिया।

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3वह कौन-सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?Show solution
यह घटना थी कि कॉलेज की प्रिंसिपल का पत्र आया, जिसमें पिता जी को बुलाकर बताया गया था कि लेखिका की गतिविधियों के कारण उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। जब पिता जी लौटकर आए तो उन्होंने गर्व से बताया कि सारी कॉलेज की लड़कियाँ उनके घर के इशारे पर चल रही हैं और लेखिका की गतिविधियों से कॉलेज वालों को मुश्किल हो रही है। यह सुनकर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हुआ, न अपने कानों पर, क्योंकि जिसे पिता जी पहले डाँटने और शर्मिंदा होने गए थे, उसी पर वे गर्व करने लगे थे।

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4लेखिका को अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
लेखिका और उनके पिता के बीच वैचारिक टकराहट का मुख्य कारण यह था कि दोनों की सोच एक-दूसरे से बहुत भिन्न थी। पिता जी एक ओर बेटी को पढ़ा-लिखाकर विशिष्ट और समाज में प्रतिष्ठित देखना चाहते थे, लेकिन दूसरी ओर उसकी आजादी की सीमा भी तय करना चाहते थे। वे चाहते थे कि वह घर की मर्यादा और अपनी बनाई हुई सीमाओं में रहे।

इसके विपरीत लेखिका को शीला अग्रवाल, राजनीतिक घटनाओं और स्वतंत्रता आंदोलन ने सक्रिय, निर्भीक और भागीदार बनाया। वह हड़तालों, जुलूसों, भाषणों और छात्र-आंदोलनों में हिस्सा लेती थी। इस तरह पिता के लिए अनुशासन, सामाजिक छवि और प्रतिष्ठा महत्वपूर्ण थी, जबकि लेखिका के लिए स्वतंत्रता, भागीदारी और विरोध का अधिकार। यही कारण था कि दोनों के बीच लगातार टकराव चलता रहा।

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5इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।Show solution
इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन का परिदृश्य बहुत जीवंत दिखाई देता है। देश में प्रभात-फेरियाँ, हड़तालें, जुलूस, भाषण, कॉलेजों और बाजारों में आंदोलनों का वातावरण था। आजाद हिंद फ़ौज के मुकदमे और स्वतंत्रता की चेतना ने पूरे शहर को आंदोलित कर रखा था। 1946-47 के दिनों में युवाओं में जोश, उत्साह और राष्ट्रभक्ति उफान पर थी।

इस परिदृश्य में मन्नू भंडारी की भूमिका एक सक्रिय युवा कार्यकर्ता की थी। वे नारे लगाती थीं, हड़तालें करवाती थीं, लड़कों के साथ शहर की सड़कों पर निकलती थीं और कॉलेज की छात्राओं को भी आंदोलन से जोड़ती थीं। उनकी जोशीली भागीदारी से स्पष्ट होता है कि वे केवल दर्शक नहीं थीं, बल्कि स्वाधीनता आंदोलन की सहभागी और प्रेरक शक्ति थीं।

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रचना और अभिव्यक्ति

1लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।
2मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्व होता है। परंतु महानगरों में रहने वाले लोग प्रायः 'पड़ोस कल्चर' से वंचित रह जाते हैं। इस बारे में अपने विचार लिखिए।
3लेखिका द्वारा पढ़े गए उपन्यासों की सूची बनाइए और उन उपन्यासों को अपने पुस्तकालय में खोजिए।
4आप भी अपने दैनिक अनुभवों को डायरी में लिखिए।

भाषा-अध्ययन

10इस आत्मकथ्य में मुहावरों का प्रयोग करके लेखिका ने रचना को रोचक बनाया है। रेखांकित मुहावरों को ध्यान में रखकर कुछ और वाक्य बनाएँ—

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