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Chapter 3 of 32
NCERT Solutions

हरिहर काका

Jharkhand Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for हरिहर काका — Jharkhand Board Class 10 Hindi.

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यह चित्र हरिहर काका और कथावाचक के बीच गहरे भावनात्मक संबंध को दर्शाता है। कथावाचक बचपन में हरिहर काका के कंधे पर बैठे हुए, और बड़े होने पर दोनों को मित्रवत बातचीत करते हुए दिखाया गया है।
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10 Questions Solved · 1 Section

बोध-प्रश्न — हरिहर काका (संचयन-2, कक्षा 10)

1कथावाचक और हरिहर काका के बीच क्या संबंध है और इसके क्या कारण हैं?Show solution
दिया गया है: कहानी 'हरिहर काका' मिथिलेश्वर द्वारा लिखित है जिसमें एक कथावाचक है जो हरिहर काका को जानता है।

संबंध एवं कारण:

कथावाचक और हरिहर काका के बीच घनिष्ठ मित्रता एवं आत्मीयता का संबंध है। यद्यपि दोनों में उम्र का काफी अंतर है, फिर भी दोनों के बीच एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

1. एकाकीपन: हरिहर काका की कोई संतान नहीं थी और उनकी पत्नी का देहांत हो चुका था। ऐसे में कथावाचक उनका एकमात्र विश्वासपात्र बन गया।
2. निकटता: दोनों एक ही गाँव में रहते थे, इसलिए स्वाभाविक रूप से मेल-जोल बढ़ा।
3. सहानुभूति: कथावाचक हरिहर काका की पीड़ा को समझता था और उनसे सच्ची सहानुभूति रखता था।
4. विश्वास: हरिहर काका को लगता था कि कथावाचक उनकी बात को बिना किसी स्वार्थ के सुनता और समझता है।

निष्कर्ष: इस प्रकार दोनों के बीच का संबंध स्वार्थरहित, आत्मीय और विश्वास पर आधारित था।
2हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी के क्यों लगने लगे?Show solution
दिया गया है: हरिहर काका के पास पंद्रह बीघे जमीन है। महंत और उनके भाई दोनों उस जमीन को हथियाना चाहते हैं।

कारण:

हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी के इसलिए लगने लगे क्योंकि दोनों का उद्देश्य एक ही था — हरिहर काका की जमीन पर कब्जा करना। दोनों के व्यवहार में समानता थी:

1. स्वार्थपरता: भाइयों ने पहले हरिहर काका की खूब सेवा की, उन्हें प्रेम दिखाया, परंतु जब काका ने जमीन लिखने से मना किया तो उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगे। इसी प्रकार महंत ने भी धर्म और भक्ति का लालच देकर जमीन हड़पने की कोशिश की।
2. जबरदस्ती: भाइयों ने काका को जबरन बंधक बनाकर अँगूठा लगवाने की कोशिश की, तो महंत ने भी उन्हें ठाकुरबारी में जबरन उठवा लिया।
3. दिखावटी प्रेम: दोनों का प्रेम केवल जमीन तक सीमित था, काका की भलाई से किसी को कोई मतलब नहीं था।

निष्कर्ष: इस प्रकार हरिहर काका को अनुभव हुआ कि चाहे सगे भाई हों या धर्म के ठेकेदार महंत — जब बात जमीन-जायदाद की आती है तो सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं।
3ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं उससे उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है?Show solution
दिया गया है: गाँव में ठाकुरबारी (मंदिर) के प्रति लोगों में अगाध श्रद्धा है और महंत का बड़ा प्रभाव है।

मनोवृत्ति का विश्लेषण:

ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों की अपार श्रद्धा से उनकी निम्नलिखित मनोवृत्तियों का पता चलता है:

1. अंधविश्वास: गाँव वाले बिना सोचे-समझे धर्म और मंदिर के नाम पर किसी भी बात को सच मान लेते हैं। वे महंत के हर कार्य को धर्मसम्मत मानते हैं।
2. भय और अज्ञान: लोग ईश्वर के भय से और अज्ञानता के कारण धर्म के नाम पर होने वाले अन्याय को भी सहन कर लेते हैं।
3. धर्म का शोषण: महंत इस श्रद्धा का फायदा उठाकर लोगों को भावनात्मक रूप से नियंत्रित करता है और अपने स्वार्थ की पूर्ति करता है।
4. सामूहिक सोच का अभाव: गाँव वाले व्यक्तिगत रूप से सोचने की बजाय भीड़ की मानसिकता से चलते हैं।

निष्कर्ष: इस प्रकार यह मनोवृत्ति दर्शाती है कि धर्म के नाम पर भोले-भाले लोगों का शोषण किस प्रकार होता है और अशिक्षा तथा अंधविश्वास समाज को कमजोर बनाते हैं।
4अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं? कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया है: हरिहर काका अनपढ़ हैं, परंतु जीवन के अनुभव से उन्होंने बहुत कुछ सीखा है।

स्पष्टीकरण:

हरिहर काका भले ही पढ़े-लिखे नहीं हैं, किंतु उनकी व्यावहारिक समझ बहुत गहरी है। इसके प्रमाण कहानी में निम्नलिखित रूप में मिलते हैं:

1. स्वार्थ की पहचान: काका ने बहुत जल्दी समझ लिया कि उनके भाइयों का प्रेम और महंत की भक्ति दोनों केवल उनकी जमीन के लिए हैं। उन्होंने किसी के बहकावे में आकर जमीन नहीं लिखी।
2. जमीन का महत्त्व: काका जानते थे कि जब तक जमीन उनके नाम है, तब तक उनका अस्तित्व है। जमीन जाते ही उनकी कोई कद्र नहीं रहेगी।
3. रिश्तों की सच्चाई: उन्होंने यह भी समझा कि बिना संतान के और बुढ़ापे में रिश्तेदार केवल स्वार्थ के लिए पास आते हैं।
4. मृत्यु का भय न होना: काका ने जीवन के कटु अनुभवों से यह ज्ञान प्राप्त किया कि मृत्यु से डरने की बजाय सच्चाई के साथ जीना बेहतर है।

निष्कर्ष: इस प्रकार हरिहर काका की अनुभव-जनित समझ किसी पढ़े-लिखे व्यक्ति से कम नहीं थी। उनका जीवन-अनुभव ही उनकी सबसे बड़ी शिक्षा थी।
5हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे? उन्होंने उनके साथ कैसा बर्ताव किया?Show solution
दिया गया है: कहानी में दो बार हरिहर काका को जबरन उठाया जाता है।

जबरन उठाने वाले और उनका बर्ताव:

पहली बार — महंत के आदमी:
महंत के शिष्यों और सेवकों ने रात के अँधेरे में हरिहर काका को उनके घर से जबरन उठाकर ठाकुरबारी ले गए। वहाँ उन पर दबाव डाला गया कि वे अपनी जमीन ठाकुरबारी के नाम लिख दें। उनके साथ मारपीट की गई, उन्हें बंधक बनाया गया और जबरदस्ती कागजों पर अँगूठे का निशान लगवाने की कोशिश की गई। धर्म और ईश्वर का भय दिखाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

दूसरी बार — भाइयों के आदमी:
हरिहर काका के भाइयों ने भी अपने लोगों की मदद से उन्हें जबरन घर में बंद कर दिया। उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें भूखा-प्यासा रखा गया। जमीन अपने नाम लिखवाने के लिए उन पर शारीरिक और मानसिक अत्याचार किए गए।

निष्कर्ष: दोनों ही पक्षों ने हरिहर काका के साथ अत्यंत क्रूर और अमानवीय व्यवहार किया। उनकी जमीन के लालच में न तो धर्म का ध्यान रहा और न ही खून के रिश्ते का।
6हरिहर काका के मामले में गाँव वालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे?Show solution
दिया गया है: हरिहर काका की जमीन को लेकर महंत और उनके भाइयों में विवाद है और गाँव वाले इस पर अपनी-अपनी राय रखते हैं।

गाँव वालों की राय:

गाँव वाले दो वर्गों में बँटे हुए थे:

1. महंत के समर्थक: एक वर्ग का मानना था कि हरिहर काका को अपनी जमीन ठाकुरबारी के नाम लिख देनी चाहिए क्योंकि इससे उनका परलोक सुधरेगा और उन्हें मोक्ष मिलेगा। ये लोग धर्म के नाम पर महंत का पक्ष लेते थे।
2. भाइयों के समर्थक: दूसरे वर्ग का मानना था कि जमीन परिवार में ही रहनी चाहिए। उनके अनुसार भाइयों का हक बनता है।

कारण:
1. स्वार्थ: अधिकांश गाँव वाले अपने-अपने संबंधों और स्वार्थ के आधार पर राय देते थे।
2. अज्ञानता: धर्म के नाम पर लोग सही-गलत का विवेक खो देते थे।
3. तटस्थता का अभाव: कोई भी व्यक्ति निष्पक्ष होकर हरिहर काका के हित की बात नहीं करता था।

निष्कर्ष: गाँव वालों की राय हरिहर काका के हित में नहीं, बल्कि अपने-अपने पूर्वाग्रहों और स्वार्थों पर आधारित थी।
7कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा, "अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है।"Show solution
दिया गया है: लेखक ने उपर्युक्त कथन हरिहर काका के जीवन-अनुभव के संदर्भ में कहा है।

स्पष्टीकरण:

यह कथन हरिहर काका के जीवन-दर्शन को व्यक्त करता है। इसे निम्न प्रकार समझा जा सकता है:

अज्ञान और मृत्यु का भय:
जब मनुष्य को जीवन की वास्तविकता का ज्ञान नहीं होता, तब वह मृत्यु से डरता है। इसी भय का फायदा उठाकर महंत जैसे लोग कहते हैं — "जमीन दान करो, नहीं तो नरक मिलेगा।" अज्ञानी व्यक्ति इस भय से जमीन दान कर देता है।

ज्ञान और मृत्यु की स्वीकृति:
हरिहर काका ने जब यह जान लिया कि उनके अपने भाई और महंत — दोनों केवल उनकी जमीन चाहते हैं और उनके जीवन से किसी को कोई मतलब नहीं — तब उन्हें जीवन का सच्चा ज्ञान हो गया। इस ज्ञान के बाद उन्हें मृत्यु का भय नहीं रहा। वे समझ गए कि ऐसे जीवन से मृत्यु बेहतर है जहाँ केवल शोषण हो।

कहानी से प्रमाण:
काका ने जमीन लिखने से इनकार किया, चाहे उन्हें कितनी भी यातना दी जाए। यह उनकी मृत्यु-भय से मुक्ति का प्रमाण है।

निष्कर्ष: लेखक का यह कथन बताता है कि सच्चा ज्ञान मनुष्य को भय से मुक्त करता है और वह सत्य के लिए मृत्यु को भी स्वीकार करने में नहीं हिचकता।
8समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।Show solution
विषय: समाज में रिश्तों की अहमियत

विचार:

समाज की नींव रिश्तों पर टिकी होती है। रिश्ते ही मनुष्य को मनुष्य से जोड़ते हैं और जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं।

रिश्तों का महत्त्व:
1. भावनात्मक सहारा: सुख-दुख में रिश्तेदार ही काम आते हैं। वे हमें अकेलेपन से बचाते हैं।
2. सामाजिक ढाँचा: परिवार और रिश्ते समाज की बुनियादी इकाई हैं। इनके बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।
3. नैतिक जिम्मेदारी: रिश्ते हमें जिम्मेदार बनाते हैं और हमारे आचरण को नियंत्रित करते हैं।

'हरिहर काका' कहानी का संदर्भ:
हरिहर काका की कहानी बताती है कि जब रिश्ते स्वार्थ से भर जाते हैं तो वे बोझ बन जाते हैं। काका के भाइयों ने जमीन के लालच में रिश्ते की गरिमा को नष्ट कर दिया। यह दर्शाता है कि रिश्तों में निःस्वार्थता और सच्चाई होनी चाहिए।

मेरे विचार:
रिश्ते तभी सार्थक होते हैं जब वे प्रेम, विश्वास और त्याग पर आधारित हों। स्वार्थ से भरे रिश्ते समाज को कमजोर करते हैं। हमें चाहिए कि हम अपने रिश्तों को सच्चे मन से निभाएँ और बुजुर्गों का सम्मान करें।

निष्कर्ष: समाज में रिश्तों की अहमियत अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, परंतु इन्हें स्वार्थ से मुक्त रखना आवश्यक है।
9यदि आपके आसपास हरिहर काका जैसी हालत में कोई हो तो आप उसकी किस प्रकार मदद करेंगे?Show solution
विषय: हरिहर काका जैसी स्थिति में किसी की मदद करना

मेरी मदद के तरीके:

यदि मेरे आसपास कोई हरिहर काका जैसी स्थिति में हो — अर्थात् बुजुर्ग, अकेला, और परिवार या धर्म के नाम पर शोषित हो रहा हो — तो मैं निम्नलिखित कदम उठाऊँगा:

1. भावनात्मक सहारा देना: सबसे पहले मैं उनके पास जाकर उनकी बात सुनूँगा और उन्हें यह एहसास दिलाऊँगा कि वे अकेले नहीं हैं।

2. कानूनी सहायता: मैं उन्हें बताऊँगा कि उनकी संपत्ति पर उनका पूरा अधिकार है। यदि कोई जबरदस्ती करे तो पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने में मदद करूँगा।

3. सामाजिक जागरूकता: गाँव या मोहल्ले के जिम्मेदार लोगों को इस बारे में बताऊँगा ताकि सामाजिक दबाव से शोषण रुके।

4. मीडिया और NGO की मदद: यदि स्थिति गंभीर हो तो स्थानीय मीडिया या वृद्धजन कल्याण संस्थाओं से संपर्क करूँगा।

5. नियमित देखभाल: उनसे नियमित मिलता रहूँगा ताकि वे मानसिक रूप से मजबूत रहें।

निष्कर्ष: समाज में बुजुर्गों की रक्षा करना हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। हमें उनके अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए।
10हरिहर काका के गाँव में यदि मीडिया की पहुँच होती तो उनकी क्या स्थिति होती? अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
विषय: मीडिया की पहुँच और हरिहर काका की स्थिति

यदि मीडिया की पहुँच होती:

यदि हरिहर काका के गाँव में मीडिया की पहुँच होती तो उनकी स्थिति निश्चित रूप से बेहतर होती। इसे निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता है:

1. शोषण का पर्दाफाश: मीडिया महंत और भाइयों के स्वार्थी षड्यंत्र को सबके सामने उजागर कर देती। जनता के सामने आने पर दोनों पक्षों को अपने कुकृत्यों से पीछे हटना पड़ता।

2. कानूनी कार्रवाई में तेजी: मीडिया की रिपोर्टिंग से पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनता और हरिहर काका को समय पर न्याय मिलता।

3. सामाजिक जागरूकता: मीडिया के माध्यम से गाँव के लोगों को यह समझ आती कि धर्म के नाम पर शोषण गलत है और बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।

4. हरिहर काका को सुरक्षा: मीडिया की नजर रहने से कोई भी उन्हें जबरन उठाने या प्रताड़ित करने की हिम्मत नहीं करता।

5. राष्ट्रीय बहस: यह मामला एक बड़े सामाजिक मुद्दे — बुजुर्गों के शोषण — पर राष्ट्रीय बहस छेड़ सकता था।

निष्कर्ष: मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। उसकी उपस्थिति से हरिहर काका को समय पर न्याय मिलता और वे इतनी यातना से बच जाते। मीडिया की पहुँच समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही लाती है।

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Sources & Official References

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