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Chapter 25 of 38
NCERT Solutions

प्रेमघन की छाया-स्मृति (रामचंद्र शुक्ल)

Jammu & Kashmir Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for प्रेमघन की छाया-स्मृति (रामचंद्र शुक्ल) — Jammu & Kashmir Board Class 12 Hindi.

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रामचंद्र शुक्ल के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों, जन्म, शिक्षा, प्रमुख कार्यस्थलों (मिर्जापुर, काशी नागरी प्रचारिणी सभा, काशी हिंदू विश्वविद्यालय), और निधन को दर्शाने वाली एक समयरेखा.
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17 Questions Solved · 3 Sections

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प्रश्न-अभ्यास

1लेखक ने अपने पिता जी की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख किया है?Show solution
लेखक ने अपने पिता जी के बारे में बताया है कि वे फ़ारसी के अच्छे ज्ञाता थे और पुरानी हिंदी कविता के बड़े प्रेमी थे। उन्हें फ़ारसी कवियों की उक्तियों को हिंदी कवियों की उक्तियों के साथ मिलाने में आनंद आता था। वे रात को घर के सब लोगों को एकत्र करके रामचरितमानस और रामचंद्रिका बड़े चित्ताकर्षक ढंग से पढ़ते थे। साथ ही वे भारतेंदु जी के नाटक भी बहुत पसंद करते थे और कभी-कभी उन्हें सुनाते थे।

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2बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु जी के संबंध में कैसी भावना जगी रहती थी?Show solution
बचपन में लेखक के मन में भारतेंदु जी के बारे में एक अपूर्व मधुर भावना जगी रहती थी। ‘सत्य हरिश्चंद्र’ के नायक राजा हरिश्चंद्र और कवि हरिश्चंद्र को वे बाल-बुद्धि में अलग नहीं कर पाते थे। ‘हरिश्चंद्र’ शब्द से ही उनके मन में एक मिलीजुली, मधुर और आकर्षक भावना पैदा होती थी।

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3उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' की पहली झलक लेखक ने किस प्रकार देखी?Show solution
लेखक ने प्रेमघन की पहली झलक इस प्रकार देखी कि बालकों की मंडली के साथ वे चौधरी साहब के मकान पर पहुँचे। नीचे का बरामदा खाली था और ऊपर का बरामदा सघन लताओं के जाल से ढका था। कुछ देर बाद एक लड़के ने ऊपर की ओर इशारा किया। लताप्रतान के बीच एक व्यक्ति खड़े दिखाई पड़े—कंधों तक बाल बिखरे हुए, एक हाथ खंभे पर टिकाए हुए। देखते ही देखते वह मूर्ति-सी आकृति आँखों से ओझल हो गई। यही उनकी पहली झलक थी।

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4लेखक का हिंदी साहित्य के प्रति झुकाव किस तरह बढ़ता गया?Show solution
ज्यों-ज्यों लेखक सयाना होता गया, त्यों-त्यों उसका झुकाव हिंदी के नूतन साहित्य की ओर बढ़ता गया। क्वीन्स कालेज में पढ़ते समय उसके पिता के सहपाठी बा. रामकृष्ण वर्मा थे, जिनकी भारत जीवन प्रेस की पुस्तकें घर आती थीं। बाद में पिता ने वे पुस्तकें छिपाकर रखनी शुरू कर दीं, फिर भी लेखक पं. केदारनाथ जी पाठक के हिंदी पुस्तकालय से पुस्तकें लाकर पढ़ता रहा। फिर काशी में भारतेंदु जी के मकान को देखकर उसकी साहित्य-भावना और भी प्रबल हुई। इस तरह पढ़ने, मंडली बनने और साहित्यिक संपर्कों से उसका हिंदी साहित्य-प्रेम लगातार बढ़ता गया।

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5'निस्संदेह' शब्द को लेकर लेखक ने किस प्रसंग का जिक्र किया है?Show solution
लेखक ने ‘निस्संदेह’ शब्द को लेकर अपने मित्र-मंडली के प्रसंग का उल्लेख किया है। वे लोग आपस में लिखने-पढ़ने की हिंदी में बातचीत करते थे, जिसमें ‘निस्संदेह’ जैसे शब्द बहुत आते थे। जिस स्थान पर लेखक रहता था, वहाँ के वकीलों, मुख्तारों और कचहरी के अफसरों को उनकी यह भाषा अजीब लगती थी। इसलिए उन्होंने लेखक और उसके साथियों को मजाक में ‘निस्संदेह’ लोग नाम दे दिया था।

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6पाठ में कुछ रोचक घटनाओं का उल्लेख है। ऐसी तीन घटनाएँ चुनकर उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
पाठ की तीन रोचक घटनाएँ इस प्रकार लिखी जा सकती हैं—

1. प्रेमघन की पहली झलक: लेखक और बालकों की मंडली चौधरी साहब के मकान पर पहुँची। लताओं के बीच से उनका धुंधला-सा दृश्य मिला और वह क्षण लेखक के लिए बहुत रोमांचकारी था।
2. लैम्प वाली घटना: चौधरी साहब के पास लैम्प की बत्ती भभकने लगी। सब लोग देख रहे थे, लेखक बत्ती गिराना चाहता था, पर मित्र ने रोक लिया। अंत में चिमनी ग्लोब सहित टूट गई, लेकिन चौधरी साहब ने हाथ तक नहीं बढ़ाया।
3. ‘घनचक्कर’ का अर्थ पूछना: एक पड़ोसी से चौधरी साहब ने घनचक्कर का अर्थ पूछा। पड़ोसी ने मजाक में उसका ऐसा अर्थ बताया कि जो भी काम दिनभर किए हों, उन्हें लिखकर पढ़ लिया जाए। यह प्रसंग बहुत विनोदी है।

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7"इस पुरातत्व की दृष्टि में प्रेम और कुतूहल का अद्भुत मिश्रण रहता था।" यह कथन किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों? स्पष्ट कीजिए।Show solution
यह कथन उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ के संदर्भ में कहा गया है। लेखक उन्हें एक पुरानी चीज़ या पुरातत्व की तरह मानता था, क्योंकि उनके व्यक्तित्व में पुराने समय की रईसी, बातों की वक्रता, नवाबी ठाठ, और अलग ढंग की बातचीत थी। साथ ही लेखक के मन में उनके प्रति प्रेम भी था और उन्हें देखने-समझने की कुतूहल-भरी उत्कंठा भी। इसलिए उनके बारे में प्रेम और जिज्ञासा का अद्भुत मिश्रण कहा गया है।

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8प्रस्तुत संस्मरण में लेखक ने चौधरी साहब के व्यक्तित्व के किन-किन पहलुओं को उजागर किया है?Show solution
इस संस्मरण में चौधरी साहब के व्यक्तित्व के कई पहलू उजागर हुए हैं—

- वे हिंदुस्तानी रईस थे।
- उनके यहाँ वसंत पंचमी, होली आदि पर नाच-रंग और उत्सव होते थे।
- उनकी हर अदा से रियासत और तबीयतदारी झलकती थी।
- उनकी बातचीत में वक्रता और विनोद था।
- वे नौकरों से भी मजेदार ढंग से बात करते थे।
- वे लोगों को बनाने में माहिर थे, लेकिन दूसरे लोग भी उन्हें बनाने की कोशिश करते थे।
- वे नागरी भाषा के पक्षधर थे और हिंदी-नागरी को लेकर अपने विचार रखते थे।

इस तरह उनका व्यक्तित्व रोचक, हँसमुख, व्यंग्यपूर्ण, आत्मविश्वासी और विशिष्ट दिखाई देता है।

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9समयवशक हिंदी प्रेमियों की मंडली में कौन-कौन से लेखक मुख्य थे?Show solution
समवयस्क हिंदी-प्रेमियों की मंडली में मुख्य लेखक/व्यक्ति थे— काशीप्रसाद जी जायसवाल, बा. भगवानदास जी हालना, पं. बदरीनाथ गौड़ और पं. उमाशंकर द्विवेदी

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10'भारतेंदु जी के मकान के नीचे का यह हृदय-परिचय बहुत शीघ्र गहरी मैत्री में परिणत हो गया।' कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

भाषा-शिल्प

1हिंदी-उर्दू के विषय में लेखक के विचारों को देखिए। आप इन दोनों को एक ही भाषा की दो शैलियाँ मानते हैं या भिन्न भाषाएँ?
2चौधरी जी के व्यक्तित्व को बताने के लिए पाठ में कुछ मजेदार वाक्य आए हैं—उन्हें छाँटकर उनका संदर्भ लिखिए।
3पाठ की शैली की रोचकता पर टिप्पणी कीजिए।

योग्यता-विस्तार

1भारतेंदु मंडल के प्रमुख लेखकों के नाम और उनकी प्रमुख रचनाओं की सूची बनाकर स्पष्ट कीजिए कि आधुनिक हिंदी गद्य के विकास में इन लेखकों का क्या योगदान रहा?
2आपको जिस व्यक्ति ने सर्वाधिक प्रभावित किया है, उसके व्यक्तित्व की विशेषताओं को लिखिए।
3यदि आपको किसी साहित्यकार से मिलने का अवसर मिले तो आप उनसे क्या-क्या पूछना चाहेंगे और क्यों?
4संस्मरण साहित्य क्या है? इसके बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए।

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Frequently Asked Questions

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