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Chapter 13 of 38
NCERT Solutions

बनारस / दिशा (केदारनाथ सिंह)

Tripura Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for बनारस / दिशा (केदारनाथ सिंह) — Tripura Board Class 12 Hindi.

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एक इन्फोग्राफिक जो बनारस के प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक तत्वों को दर्शाता है, जैसे गंगा नदी, घाट, मंदिर, आरती, चितागिन, और मोक्ष की अवधारणा।
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15 Questions Solved · 3 Sections

बनारस — प्रश्न-अभ्यास

1बनारस में वसंत का आगमन कैसे होता है और उसका क्या प्रभाव इस शहर पर पड़ता है?Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'बनारस' — केदारनाथ सिंह

उत्तर:
बनारस में वसंत का आगमन अत्यंत धीमे और अनोखे ढंग से होता है। यहाँ वसंत किसी भव्य उत्सव की तरह नहीं, बल्कि चुपचाप, धीरे-धीरे उतरता है। वह पहले इस शहर की गलियों, घाटों और मंदिरों में प्रवेश करता है। भिखारियों के 'खाली कटोरों' में भी वसंत उतरता है, अर्थात् वसंत की बहार यहाँ के निर्धनतम जीवन को भी स्पर्श करती है।

इस शहर पर वसंत का प्रभाव यह होता है कि पूरा बनारस एक नई चेतना और स्फूर्ति से भर उठता है। पचखियाँ (अंकुरण) फूटने लगती हैं, जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। वसंत यहाँ के जड़-चेतन सभी को प्रभावित करता है — घाट, गलियाँ, मंदिर और यहाँ के निवासी सभी इस ऋतु की लय में बँध जाते हैं।

निष्कर्ष: बनारस में वसंत का आगमन इस शहर की अपनी विशिष्ट लय के अनुसार — धीरे-धीरे और गहराई से — होता है।
2'खाली कटोरों में वसंत का उतरना' से क्या आशय है?Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'बनारस' — केदारनाथ सिंह

उत्तर:
'खाली कटोरों में वसंत का उतरना' एक अत्यंत सार्थक बिम्ब है। यहाँ 'खाली कटोरे' उन भिखारियों और निर्धन लोगों के प्रतीक हैं जो बनारस की गलियों और घाटों पर भीख माँगते हैं। उनके कटोरे रिक्त हैं — वे अभाव और दरिद्रता के प्रतीक हैं।

इस पंक्ति का आशय यह है कि वसंत की सुंदरता और उल्लास किसी भेदभाव के बिना सबके जीवन में उतरता है — चाहे वह धनी हो या निर्धन। वसंत की बहार उन खाली कटोरों में भी झाँकती है जो जीवन की रिक्तता के प्रतीक हैं। इसमें एक करुण व्यंग्य भी है — जहाँ एक ओर वसंत की सुंदरता है, वहीं दूसरी ओर मानव-जीवन की विपन्नता भी है।

निष्कर्ष: यह पंक्ति बनारस की उस विशेषता को उजागर करती है जहाँ वैभव और दरिद्रता, पूर्णता और रिक्तता साथ-साथ विद्यमान हैं।
3बनारस की पूर्णता और रिक्तता को कवि ने किस प्रकार दिखाया है?Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'बनारस' — केदारनाथ सिंह

उत्तर:
कवि केदारनाथ सिंह ने बनारस की पूर्णता और रिक्तता को एक साथ, विरोधाभासी बिम्बों के माध्यम से प्रस्तुत किया है:

पूर्णता के संदर्भ:
- बनारस एक ऐसा शहर है जो सदियों से जीवित है, जहाँ संस्कृति, धर्म, परंपरा और जीवन की पूर्णता है।
- यहाँ के घाट, मंदिर, गंगा — सब मिलकर एक परिपूर्ण सांस्कृतिक चित्र बनाते हैं।
- कवि कहता है — 'यह शहर इसी तरह खुलता है' — अर्थात् इसमें एक संपूर्णता है।

रिक्तता के संदर्भ:
- 'खाली कटोरे' निर्धनता और रिक्तता के प्रतीक हैं।
- 'अगर ध्यान से देखो तो यह शहर आधा है और आधा नहीं है' — यह पंक्ति बनारस की अधूरेपन और पूर्णता दोनों को एक साथ व्यक्त करती है।

निष्कर्ष: कवि ने बनारस को एक ऐसे शहर के रूप में चित्रित किया है जो एक साथ पूर्ण भी है और अपूर्ण भी — जहाँ जीवन और मृत्यु, वैभव और दरिद्रता, भरापन और खालीपन साथ-साथ चलते हैं।
4बनारस में धीरे-धीरे क्या-क्या होता है? 'धीरे-धीरे' से कवि इस शहर के बारे में क्या कहना चाहता है?Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'बनारस' — केदारनाथ सिंह

उत्तर:
बनारस में धीरे-धीरे होने वाली क्रियाएँ:
- धीरे-धीरे वसंत का आना
- धीरे-धीरे सुबह का होना
- धीरे-धीरे घाटों पर जीवन का जागना
- धीरे-धीरे नावों का चलना
- धीरे-धीरे पूजा-अर्चना का होना
- धीरे-धीरे इस शहर का खुलना और बंद होना

'धीरे-धीरे' का अभिप्राय:
'धीरे-धीरे' शब्द के माध्यम से कवि बनारस की उस विशिष्ट लय और गति को व्यक्त करना चाहता है जो इसे अन्य शहरों से अलग बनाती है। बनारस आधुनिक भागदौड़ की दुनिया से परे अपनी एक शाश्वत, धीमी, लेकिन निरंतर चलने वाली लय में जीता है। यह धीमापन आलस्य नहीं, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक चेतना और सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक है।

निष्कर्ष: 'धीरे-धीरे' बनारस की आत्मा है — यह शहर समय की अपनी एक अलग धारा में बहता है जो न बहुत तेज़ है, न रुकती है।
5धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय में क्या-क्या बँधा है?Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'बनारस' — केदारनाथ सिंह

उत्तर:
धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय में बनारस का समूचा जीवन बँधा है। इस लय में निम्नलिखित तत्त्व सम्मिलित हैं:

1. प्रकृति — वसंत का आना, सुबह का उगना, साँझ का ढलना।
2. धार्मिक जीवन — घाटों पर पूजा-अर्चना, अर्घ्य देना, स्नान करना।
3. सामाजिक जीवन — गलियों में चलना-फिरना, नावों का चलना।
4. आर्थिक जीवन — भिखारियों के खाली कटोरे, दुकानों का खुलना-बंद होना।
5. सांस्कृतिक जीवन — मंदिरों की घंटियाँ, शंख-ध्वनि, मंत्रोच्चार।
6. समूचा शहर — कवि कहता है कि यह धीरे-धीरे होना 'समूचे शहर को' अपनी लय में बाँधे रखता है।

निष्कर्ष: बनारस की यह सामूहिक लय उसे एक जीवंत, शाश्वत और अनूठी सत्ता बनाती है जिसमें जड़-चेतन, मनुष्य-प्रकृति, धर्म-जीवन सब एक साथ बँधे हैं।
6'सई साँझ' में घुसने पर बनारस की किन-किन विशेषताओं का पता चलता है?Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'बनारस' — केदारनाथ सिंह

उत्तर:
'सई साँझ' अर्थात् शाम की शुरुआत में बनारस में प्रवेश करने पर इस शहर की निम्नलिखित विशेषताओं का पता चलता है:

1. आध्यात्मिक वातावरण: साँझ के समय घाटों पर दीप जलते हैं, आरती होती है, मंत्रोच्चार गूँजता है — यह बनारस की धार्मिक आत्मा को प्रकट करता है।

2. जीवन और मृत्यु का सह-अस्तित्व: साँझ के समय एक ओर आरती की रोशनी है, दूसरी ओर मणिकर्णिका घाट पर चिताएँ जलती हैं — जीवन और मृत्यु यहाँ साथ-साथ चलते हैं।

3. शहर की अपनी लय: साँझ होते ही बनारस अपनी विशेष लय में आ जाता है — घाट, गलियाँ, मंदिर सब एक विशेष रंग में रँग जाते हैं।

4. अलक्षित (अज्ञात) सौंदर्य: साँझ के धुँधलके में बनारस का एक अनदेखा, रहस्यमय सौंदर्य उभरता है जो दिन के उजाले में नहीं दिखता।

5. सामूहिक चेतना: साँझ के समय लोग घाटों पर एकत्र होते हैं — यह बनारस की सामूहिक सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।

निष्कर्ष: 'सई साँझ' में बनारस अपने सबसे प्रामाणिक और जीवंत रूप में दिखता है।
7बनारस शहर के लिए जो मानवीय क्रियाएँ इस कविता में आई हैं, उनका व्यंजनार्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'बनारस' — केदारनाथ सिंह

उत्तर:
कवि ने बनारस शहर को एक जीवित मनुष्य की तरह चित्रित किया है और उसके लिए अनेक मानवीय क्रियाओं का प्रयोग किया है। यह मानवीकरण (Personification) का अलंकार है। इन क्रियाओं का व्यंजनार्थ इस प्रकार है:

| मानवीय क्रिया | व्यंजनार्थ |
|---|---|
| शहर का खुलना | बनारस का प्रतिदिन नई चेतना के साथ जागना, जीवन का नवीनीकरण |
| शहर का सुगबुगाना | बनारस की आंतरिक जीवन-शक्ति का जागरण, उसकी सजीवता |
| एक टाँग पर खड़े रहना | बनारस की अडिग, एकनिष्ठ और ध्यानमग्न स्थिति — जैसे कोई योगी एकाग्र हो |
| बेखबर रहना | बनारस का आधुनिक परिवर्तनों से निर्लिप्त रहना, अपनी परंपरा में मग्न रहना |

निष्कर्ष: इन मानवीय क्रियाओं के माध्यम से कवि यह व्यंजित करना चाहता है कि बनारस केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि एक जीवंत, चेतन और व्यक्तित्वसंपन्न सत्ता है जो सदियों से अपनी लय में जी रही है।
8(क)शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए — 'यह धीरे-धीरे होना ………… समूचे शहर को'Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'बनारस' — केदारनाथ सिंह

शिल्प-सौंदर्य:

1. पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार: 'धीरे-धीरे' में एक ही शब्द की पुनरावृत्ति से बनारस की मंथर, निरंतर और शाश्वत गति का बोध होता है।

2. मानवीकरण (Personification): 'धीरे-धीरे होना' — शहर को एक जीवित प्राणी की तरह चित्रित किया गया है जो अपनी लय में चलता है।

3. बिम्ब-योजना: 'समूचे शहर को' — यह बिम्ब बनारस की समग्रता और उसकी सामूहिक लय को एक चित्र में प्रस्तुत करता है।

4. लय और प्रवाह: पंक्तियों में एक धीमी, संगीतात्मक लय है जो बनारस की गति के अनुरूप है।

5. भाषा: सरल, सहज खड़ी बोली में गहरी बात कही गई है। शब्द-चयन अत्यंत सटीक है।

निष्कर्ष: यह पंक्ति बनारस की उस विशिष्ट सामूहिक लय को व्यक्त करती है जिसमें पूरा शहर बँधा हुआ है।
8(ख)शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए — 'अगर ध्यान से देखो ………… और आधा नहीं है'Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'बनारस' — केदारनाथ सिंह

शिल्प-सौंदर्य:

1. विरोधाभास अलंकार (Paradox): 'यह शहर आधा है और आधा नहीं है' — यह विरोधाभासी कथन बनारस की जटिल, रहस्यमय और द्वंद्वात्मक प्रकृति को व्यक्त करता है। यह शहर एक साथ पूर्ण भी है और अपूर्ण भी।

2. दार्शनिक गहराई: इस पंक्ति में एक गहरा दार्शनिक भाव है — बनारस जीवन और मृत्यु, भौतिक और आध्यात्मिक, दृश्य और अदृश्य के बीच स्थित है।

3. पाठक को आमंत्रण: 'अगर ध्यान से देखो' — कवि पाठक को सतही दृष्टि से नहीं, बल्कि गहरी अंतर्दृष्टि से देखने का आमंत्रण देता है।

4. सरल भाषा में गूढ़ अर्थ: अत्यंत सरल शब्दों में एक गहरी बात कही गई है — यह केदारनाथ सिंह की काव्य-शैली की विशेषता है।

निष्कर्ष: यह पंक्ति बनारस के उस रहस्यमय स्वभाव को उजागर करती है जो उसे अन्य शहरों से अलग और अद्वितीय बनाता है।
8(ग)शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए — 'अपनी एक टाँग पर ………… बेखबर'Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'बनारस' — केदारनाथ सिंह

शिल्प-सौंदर्य:

1. मानवीकरण अलंकार: बनारस शहर को एक ऐसे व्यक्ति की तरह चित्रित किया गया है जो एक टाँग पर खड़ा है — यह योगी की एकाग्रता और ध्यान की मुद्रा का बोध कराता है।

2. प्रतीकात्मकता: 'एक टाँग पर खड़े रहना' — यह बनारस की उस अडिग, एकनिष्ठ और स्थिर प्रकृति का प्रतीक है जो सदियों से अपरिवर्तित है। यह योगी की तपस्या का भी प्रतीक है।

3. 'बेखबर' शब्द की व्यंजना: 'बेखबर' शब्द बनारस की उस निर्लिप्तता को व्यक्त करता है जो आधुनिक परिवर्तनों, राजनीतिक उथल-पुथल और समय के बदलावों से अप्रभावित रहती है।

4. दृश्य-बिम्ब: यह पंक्ति एक स्पष्ट दृश्य-बिम्ब (Visual Image) प्रस्तुत करती है — एक टाँग पर खड़े बगुले या योगी की छवि मन में उभरती है।

5. व्यंग्य: 'बेखबर' में एक हल्का व्यंग्य भी है — बनारस दुनिया की परवाह नहीं करता, वह अपनी ही दुनिया में मस्त है।

निष्कर्ष: यह पंक्ति बनारस के योगी-स्वभाव और उसकी शाश्वत निर्लिप्तता को अत्यंत सजीव और प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करती है।

दिशा — प्रश्न-अभ्यास

1बच्चे का उधर-उधर कहना क्या प्रकट करता है?Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'दिशा' — केदारनाथ सिंह

उत्तर:
बच्चे का 'उधर-उधर' कहना अनेक महत्त्वपूर्ण बातें प्रकट करता है:

1. बाल-सहजता और निश्छलता: बच्चा किसी भौगोलिक ज्ञान या दिशा-ज्ञान से नहीं, बल्कि अपनी सहज अनुभूति से उत्तर देता है। वह जिस दिशा में अपनी पतंग को जाते देखता है, उसी दिशा को हिमालय की दिशा बता देता है।

2. सहज ज्ञान की श्रेष्ठता: बच्चे का यह उत्तर यह प्रकट करता है कि सच्चा ज्ञान पुस्तकों या बौद्धिक तर्क से नहीं, बल्कि सहज अनुभव और प्रकृति से जुड़ाव से मिलता है। पतंग हवा की दिशा में उड़ती है और हवा हिमालय से आती है — बच्चे का उत्तर अनजाने में ही सही था।

3. निर्दोष दृष्टि की शक्ति: बच्चे की आँखें किसी पूर्वाग्रह से मुक्त हैं। वह जो देखता है, वही कहता है — यह निर्दोष दृष्टि वयस्कों की जटिल, बौद्धिक दृष्टि से अधिक सटीक हो सकती है।

4. जीवन-दर्शन: 'उधर-उधर' कहना यह भी प्रकट करता है कि जीवन में दिशा का ज्ञान किताबों से नहीं, बल्कि जीवंत अनुभव से मिलता है।

निष्कर्ष: बच्चे का 'उधर-उधर' कहना बाल-सहजता, निश्छलता और सहज ज्ञान की शक्ति को प्रकट करता है।
2'मैं स्वीकार करूँ मैंने पहली बार जाना हिमालय किधर है' — प्रस्तुत पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया संदर्भ: कविता 'दिशा' — केदारनाथ सिंह

उत्तर:
इन पंक्तियों में कवि एक गहरे आत्म-स्वीकृति के भाव को व्यक्त करता है। इनका भाव निम्नलिखित है:

1. बौद्धिक विनम्रता:
कवि स्वीकार करता है कि एक छोटे बच्चे ने उसे वह ज्ञान दिया जो वह अपनी सारी शिक्षा और अनुभव के बावजूद नहीं जानता था। यह बौद्धिक विनम्रता और आत्म-स्वीकृति का भाव है।

2. सहज ज्ञान की महत्ता:
कवि यह मानता है कि बच्चे की सहज, निश्छल दृष्टि ने उसे हिमालय की वास्तविक दिशा का बोध कराया। पुस्तकीय ज्ञान से नहीं, बल्कि जीवंत अनुभव से सच्चा ज्ञान मिलता है।

3. 'पहली बार जाना' का महत्त्व:
'पहली बार' शब्द यह व्यंजित करता है कि इससे पहले कवि हिमालय की दिशा को केवल नक्शे या किताबों में जानता था — वह ज्ञान सतही था। बच्चे के माध्यम से उसे पहली बार वास्तविक, जीवंत और अनुभव-जन्य ज्ञान प्राप्त हुआ।

4. व्यापक जीवन-दर्शन:
ये पंक्तियाँ यह भी कहती हैं कि जीवन में सच्ची दिशा का ज्ञान अक्सर उन लोगों से मिलता है जिन्हें हम छोटा या कम ज्ञानी समझते हैं। बच्चे, किसान, प्रकृति — ये सब हमें वह ज्ञान दे सकते हैं जो बड़े-बड़े विद्वान नहीं दे पाते।

निष्कर्ष: ये पंक्तियाँ सहज ज्ञान की श्रेष्ठता, बौद्धिक विनम्रता और जीवंत अनुभव के महत्त्व को रेखांकित करती हैं। कवि यह स्वीकार करता है कि एक बच्चे की निश्छल दृष्टि ने उसे वह दिशा-ज्ञान दिया जो उसे पहले कभी नहीं मिला था।

योग्यता-विस्तार

1आप बनारस के बारे में क्या जानते हैं? लिखिए।Show solution
बनारस (वाराणसी) के बारे में:

बनारस, जिसे वाराणसी या काशी भी कहते हैं, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह विश्व के प्राचीनतम जीवित नगरों में से एक है।

ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्त्व:
- यह हिंदुओं का सबसे पवित्र तीर्थस्थल है।
- यहाँ काशी विश्वनाथ मंदिर (भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर) स्थित है।
- मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार होते हैं — मान्यता है कि यहाँ मृत्यु होने पर मोक्ष मिलता है।
- दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन भव्य गंगा आरती होती है।

सांस्कृतिक महत्त्व:
- बनारस शास्त्रीय संगीत, नृत्य, साहित्य और दर्शन का केंद्र रहा है।
- बनारसी साड़ी विश्वप्रसिद्ध है।
- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) यहाँ का प्रमुख शिक्षण संस्थान है।
- संत कबीर, तुलसीदास, रविदास जैसे महान संतों की यह कर्मभूमि रही है।

निष्कर्ष: बनारस केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिकता का जीवंत प्रतीक है।
2बनारस के चित्र इकट्ठे कीजिए।Show solution
निर्देश (गतिविधि-आधारित प्रश्न):

यह एक परियोजना-कार्य (Project Work) है। विद्यार्थी निम्नलिखित स्रोतों से बनारस के चित्र एकत्र कर सकते हैं:

1. पत्र-पत्रिकाओं से — राष्ट्रीय भौगोलिक, इंडिया टुडे आदि से बनारस के घाटों, मंदिरों और गलियों के चित्र।
2. इंटरनेट से — गंगा आरती, काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट, बनारसी साड़ी बुनाई के चित्र।
3. पर्यटन विभाग के ब्रोशर से — उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के प्रकाशनों से।

चित्रों को एक स्क्रैपबुक में चिपकाकर उनके नीचे संक्षिप्त विवरण लिखें।

*(यह गतिविधि विद्यार्थी स्वयं करें।)*
3बनारस शहर की विशेषताएँ जानिए।Show solution
बनारस शहर की प्रमुख विशेषताएँ:

1. प्राचीनता:
बनारस विश्व के सबसे प्राचीन जीवित नगरों में से एक है। इसका इतिहास लगभग 3000 वर्ष से भी अधिक पुराना है।

2. धार्मिक विशेषता:
- 84 घाट गंगा के तट पर स्थित हैं।
- काशी विश्वनाथ, दुर्गा मंदिर, संकट मोचन जैसे प्रसिद्ध मंदिर।
- हिंदू, बौद्ध और जैन — तीनों धर्मों का पवित्र स्थल।
- बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र सारनाथ यहीं के पास है।

3. सांस्कृतिक विशेषता:
- शास्त्रीय संगीत की बनारस घराना परंपरा।
- बनारसी पान, बनारसी साड़ी, बनारसी ठंडाई विश्वप्रसिद्ध।
- काशी हिंदू विश्वविद्यालय — एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय।

4. साहित्यिक विशेषता:
- तुलसीदास ने यहीं रामचरितमानस की रचना की।
- कबीर, रविदास, प्रेमचंद जैसे महान साहित्यकारों की यह कर्मभूमि रही है।

5. जीवन-शैली की विशेषता:
- बनारस की अपनी एक विशिष्ट, धीमी और आनंदमयी जीवन-शैली है।
- यहाँ के लोग 'बनारसीपन' के लिए प्रसिद्ध हैं — मस्त, निश्चिंत और जीवन का आनंद लेने वाले।

निष्कर्ष: बनारस भारतीय सभ्यता का सजीव संग्रहालय है जहाँ अतीत और वर्तमान, धर्म और संस्कृति, जीवन और मृत्यु — सब एक साथ विद्यमान हैं।

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Frequently Asked Questions

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