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Chapter 30 of 38
NCERT Solutions

काले मेघा पानी दे-(धर्मवीर भारती) (Part 2) — NCERT Solutions

Tripura Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for काले मेघा पानी दे-(धर्मवीर भारती) (Part 2), Tripura Board Class 12 Hindi: 15 textbook questions solved step by step.

45 questions30 flashcards5 concepts

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धर्मवीर भारती के जन्म, निधन, प्रमुख रचनाओं (कविता संग्रह, कहानी-संग्रह, उपन्यास, गीतिनाट्य, निबंध-संग्रह) और प्रमुख सम्मानों को दर्शाने वाला एक इन्फोग्राफिक।
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15 Questions Solved · 4 Sections

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पाठ के साथ

1लोगों ने लड़कों की टोली को मेडक-मंडली नाम किस आधार पर दिया? यह टोली अपने आपको इंदर सेना कहकर क्यों बुलाती थी?Show solution

दिया गया संदर्भ: पाठ 'काले मेघा पानी दे' में लेखक धर्मवीर भारती ने बचपन की उस टोली का वर्णन किया है जो वर्षा के लिए इंद्र देवता को मनाने निकलती थी।

मेडक-मंडली नाम का आधार:
लड़कों की यह टोली वर्षा ऋतु में पूरी तरह भीगते हुए, कीचड़ में लोटते-पोटते, गाते-चिल्लाते हुए गली-गली घूमती थी। उनकी यह हालत देखकर — भीगे, कीचड़ से सने, उछलते-कूदते — लोगों को वे मेंढकों जैसे लगते थे। मेंढक को ही 'मेडक' कहते हैं, इसलिए लोगों ने उन्हें 'मेडक-मंडली' कह कर पुकारना शुरू कर दिया।

इंदर सेना नाम का कारण:
यह टोली इंद्र देवता (वर्षा के देवता) को प्रसन्न करने के लिए निकलती थी। वे इंद्र देवता के सैनिकों की तरह उनके लिए काम करते थे — उनकी स्तुति करते, उनसे पानी माँगते और लोगों से जल-दान लेकर इंद्र देवता को अर्पित करते थे। चूँकि वे इंद्र (इंदर) की सेना की तरह कार्य करते थे, इसलिए वे स्वयं को 'इंदर सेना' कहते थे।

निष्कर्ष: मेडक-मंडली नाम बाहरी रूप-रंग (मेंढक जैसी दशा) पर आधारित था, जबकि इंदर सेना नाम उनके उद्देश्य और कार्य पर आधारित था।

2जीजी ने इंदर सेना पर पानी फेंके जाने को किस तरह सही ठहराया?Show solution

दिया गया संदर्भ: लेखक को इंदर सेना पर पानी फेंकना अनुचित लगता था। वे सोचते थे कि जब पानी की इतनी कमी है, तो इन बच्चों पर पानी क्यों बर्बाद किया जाए? लेखक ने यह बात अपनी जीजी से कही।

जीजी का तर्क:
जीजी ने इसे 'देने' और 'पाने' के सिद्धांत से समझाया। उन्होंने कहा —

  1. त्याग का महत्व: जो चीज़ हमें सबसे अधिक प्रिय हो, उसी का त्याग करने से फल मिलता है। जब पानी की सबसे अधिक ज़रूरत हो, तभी उसे दान करने से इंद्र देवता प्रसन्न होते हैं।
  1. माँगने से पहले देना होगा: जीजी ने समझाया कि यदि हम चाहते हैं कि मेघ बरसें और हमें पानी मिले, तो पहले हमें पानी देना होगा। यह 'पहले दो, फिर पाओ' का सिद्धांत है।
  1. लोक-विश्वास: यह एक पुरानी परंपरा और लोक-विश्वास है। इंदर सेना के बच्चे इंद्र देवता के प्रतीक हैं। उन पर पानी डालना अर्थात् इंद्र देवता को जल अर्पित करना है।
  1. आस्था और श्रद्धा: जीजी का मानना था कि यह केवल पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि एक धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठान है जो वर्षा को आमंत्रित करता है।

निष्कर्ष: जीजी ने त्याग, आस्था और लोक-परंपरा के आधार पर इंदर सेना पर पानी फेंकने को उचित ठहराया।

3'पानी दे, गुड़धानी दे' — मेघों से पानी के साथ-साथ गुड़धानी की माँग क्यों की जा रही है?Show solution

दिया गया संदर्भ: इंदर सेना के गीत में मेघों से केवल पानी ही नहीं, बल्कि गुड़धानी (गुड़ और चने से बना लड्डू) भी माँगी जा रही है।

गुड़धानी माँगने के कारण:

  1. कृषि-समाज की आवश्यकता: यह गीत एक कृषि-प्रधान समाज का गीत है। किसान के लिए वर्षा का अर्थ केवल पानी नहीं, बल्कि अच्छी फसल भी है। गुड़धानी फसल की समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है।
  1. संपूर्ण समृद्धि की कामना: पानी जीवन की मूलभूत आवश्यकता है, जबकि गुड़धानी खाद्य-समृद्धि का प्रतीक है। दोनों को एक साथ माँगना यह दर्शाता है कि लोग केवल जीवित रहने के लिए नहीं, बल्कि सुखी और समृद्ध जीवन के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
  1. बच्चों की स्वाभाविक इच्छा: इंदर सेना में बच्चे हैं। बच्चों के लिए गुड़धानी एक प्रिय मिठाई है। इस माँग में बच्चों की स्वाभाविक इच्छा भी झलकती है।
  1. लोक-परंपरा: गाँवों में वर्षा के बाद उत्सव मनाया जाता था और गुड़धानी बाँटी जाती थी। यह माँग उस उत्सव की परंपरा से जुड़ी है।

निष्कर्ष: गुड़धानी की माँग वास्तव में जीवन की संपूर्ण खुशहाली, फसल की समृद्धि और उत्सव की कामना का प्रतीक है।

4'गगरी फूटी बैल पियासा' — इंदर सेना के इस खेलगीत में बैलों के प्यासा रहने की बात क्यों मुखरित हुई है?Show solution

दिया गया संदर्भ: इंदर सेना के गीत की पंक्ति 'गगरी फूटी बैल पियासा' में एक विशेष सामाजिक-आर्थिक स्थिति का चित्रण है।

बैलों के प्यासे रहने का कारण:

  1. कृषि-जीवन की वास्तविकता: भारतीय कृषि-समाज में बैल किसान की जीवन-रेखा है। खेत जोतने, फसल ढोने — सब कार्यों में बैल की भूमिका अनिवार्य है। यदि बैल प्यासा रहे तो खेती का काम रुक जाता है।
  1. सूखे की भयावहता: जब वर्षा नहीं होती, तो नदी-तालाब सूख जाते हैं। ऐसे में पानी लाने के लिए गगरी (मिट्टी का घड़ा) लेकर दूर जाना पड़ता है। यदि गगरी रास्ते में फूट जाए, तो बैलों को पानी नहीं मिल पाता।
  1. किसान की विवशता: गगरी का फूटना किसान की उस विवशता का प्रतीक है जब वह अपने पशुओं को भी पानी नहीं पिला पाता। यह दृश्य सूखे की त्रासदी को मार्मिक रूप से प्रस्तुत करता है।
  1. पशु-मानव का साझा दुख: इस पंक्ति में यह भाव भी है कि सूखे में केवल मनुष्य ही नहीं, पशु भी पीड़ित होते हैं। बैल का प्यासा रहना पूरे कृषि-समाज की पीड़ा का प्रतीक है।

निष्कर्ष: यह पंक्ति सूखे की विभीषिका, किसान की बेबसी और पशु-मानव के साझे दुख को एक साथ व्यक्त करती है।

5इंदर सेना सबसे पहले गंगा मैया की जय क्यों बोलती है? नदियों का भारतीय सामाजिक, सांस्कृतिक परिवेश में क्या महत्व है?Show solution

दिया गया संदर्भ: इंदर सेना अपने जुलूस की शुरुआत 'गंगा मैया की जय' के उद्घोष से करती है।

गंगा मैया की जय सबसे पहले बोलने के कारण:

  1. जल का स्रोत: गंगा भारत की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदी है। वर्षा का जल अंततः नदियों में ही जाता है। इसलिए वर्षा की कामना करते समय नदियों की, विशेषकर गंगा की, जय बोलना स्वाभाविक है।
  1. माँ का दर्जा: गंगा को 'मैया' (माँ) कहा जाता है। माँ से ही जीवन मिलता है। वर्षा माँगते समय जीवनदायिनी माँ का स्मरण करना भारतीय परंपरा है।
  1. धार्मिक आस्था: गंगा को मोक्षदायिनी माना जाता है। उसकी जय बोलकर अनुष्ठान की शुरुआत करना शुभ माना जाता है।

नदियों का भारतीय सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व:

पक्षमहत्व
सामाजिकनदियों के किनारे सभ्यताएँ विकसित हुईं; लोगों की आजीविका नदियों पर निर्भर है
कृषिसिंचाई के लिए नदियाँ अनिवार्य हैं
धार्मिकगंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा आदि पवित्र मानी जाती हैं; तीर्थस्थल नदियों के किनारे हैं
सांस्कृतिकनदियों से जुड़े त्योहार, गीत, लोककथाएँ भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग हैं
पर्यावरणीयनदियाँ जल-चक्र को बनाए रखती हैं और जैव-विविधता की रक्षा करती हैं

निष्कर्ष: नदियाँ भारतीय जीवन, संस्कृति और आस्था की आधारशिला हैं। इसीलिए इंदर सेना सबसे पहले गंगा मैया की जय बोलती है।

6'रिश्तों में हमारी भावना-शक्ति का बँट जाना विश्वासों के जंगल में सत्य की राह खोजती हमारी बुद्धि की शक्ति को कमजोर करती है।' पाठ में जीजी के प्रति लेखक की भावना के संदर्भ में इस कथन के औचित्य की समीक्षा कीजिए।Show solution

दिया गया संदर्भ: लेखक धर्मवीर भारती अपनी जीजी से गहरा भावनात्मक लगाव रखते थे। जीजी लोक-विश्वासों और परंपराओं में आस्था रखती थीं।

कथन का अर्थ:
इस कथन का अर्थ है कि जब हम किसी प्रिय व्यक्ति से गहरा भावनात्मक लगाव रखते हैं, तो उनकी बातों को तर्क की कसौटी पर कसने की हमारी क्षमता कमज़ोर पड़ जाती है। प्रेम और श्रद्धा के कारण हम उनके विश्वासों को बिना प्रश्न किए स्वीकार कर लेते हैं।

पाठ के संदर्भ में समीक्षा:

  1. लेखक की तर्कशीलता: लेखक स्वयं तर्कशील और प्रगतिशील विचारों के थे। उन्हें इंदर सेना पर पानी फेंकना अंधविश्वास लगता था। वे सोचते थे कि सूखे में पानी बर्बाद करना अनुचित है।
  1. जीजी के प्रति भावना: लेकिन जीजी के प्रति उनका गहरा प्रेम और श्रद्धा थी। जीजी ने जब त्याग और आस्था का तर्क दिया, तो लेखक उसे पूरी तरह नकार नहीं सके।
  1. भावना और बुद्धि का द्वंद्व: लेखक के मन में यह द्वंद्व स्पष्ट दिखता है — एक ओर उनकी बुद्धि कहती है कि यह अंधविश्वास है, दूसरी ओर जीजी के प्रति प्रेम उन्हें उनके विश्वासों का सम्मान करने पर विवश करता है।
  1. कथन की सार्थकता: यह कथन आंशिक रूप से सही है। जीजी के प्रति भावना के कारण लेखक उनके विश्वासों को पूरी तरह अस्वीकार नहीं कर पाते। परंतु —
  1. कथन की सीमा: यह कथन पूर्णतः सही नहीं है। लेखक ने स्वयं माना है कि जीजी के विश्वासों में एक गहरी सामाजिक सच्चाई थी — त्याग से ही प्राप्ति होती है। यह केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन भी है।

निष्कर्ष: रिश्तों की भावना बुद्धि को कभी-कभी कमज़ोर करती है, यह सत्य है। परंतु कभी-कभी भावना हमें उस सत्य तक भी पहुँचाती है जो केवल तर्क से नहीं मिलता। जीजी और लेखक का संबंध इसी का उदाहरण है।

पाठ के आसपास

1क्या इंदर सेना आज के युवा वर्ग का प्रेरणास्रोत हो सकती है? क्या आपके स्मृति-कोश में ऐसा कोई अनुभव है जब युवाओं ने संगठित होकर समाजोपयोगी रचनात्मक कार्य किया हो, उल्लेख करें।Show solution

इंदर सेना और आज का युवा वर्ग:

हाँ, इंदर सेना आज के युवा वर्ग के लिए निश्चित रूप से प्रेरणास्रोत हो सकती है। इंदर सेना की विशेषताएँ थीं —

  • संगठित प्रयास: बच्चों ने मिलकर एक सामूहिक लक्ष्य के लिए काम किया।
  • निःस्वार्थ भावना: उन्होंने समाज की भलाई के लिए स्वयं कष्ट उठाया।
  • सामाजिक चेतना: उन्होंने पर्यावरण और समाज की समस्या को पहचाना और उसके समाधान का प्रयास किया।

आज के युवाओं के लिए प्रेरणा:
आज के युवा भी इसी तरह संगठित होकर —

  • वृक्षारोपण अभियान चला सकते हैं।
  • जल-संरक्षण के लिए जागरूकता फैला सकते हैं।
  • स्वच्छता अभियान में भाग ले सकते हैं।
  • किसानों और ज़रूरतमंदों की सहायता कर सकते हैं।

व्यक्तिगत अनुभव (उदाहरण):
हमारे विद्यालय में एक बार भीषण गर्मी में पास के गाँव में पानी का संकट आ गया। हमारे विद्यालय के छात्रों ने मिलकर एक 'जल-सेवा दल' बनाया। हम प्रतिदिन साइकिल पर पानी के कनस्तर लेकर उस गाँव में जाते और लोगों को पानी पहुँचाते। यह अनुभव हमें इंदर सेना की याद दिलाता है — संगठित युवा शक्ति से बड़ी-से-बड़ी समस्या का समाधान संभव है।

निष्कर्ष: इंदर सेना का संदेश है — समाज की समस्याओं के प्रति सजग रहो और मिलकर उनका समाधान खोजो।

2तकनीकी विकास के दौर में भी भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर निर्भर है। कृषि-समाज में चैत्र, वैशाख सभी माह बहुत महत्वपूर्ण हैं पर आषाढ़ का चढ़ना उनमें उल्लास क्यों भर देता है?Show solution

भारत की कृषि-निर्भरता:
भारत की लगभग 60% जनसंख्या आज भी कृषि पर निर्भर है। तकनीकी विकास के बावजूद मानसून और वर्षा का महत्व कम नहीं हुआ है।

चैत्र-वैशाख का महत्व:

  • चैत्र में रबी की फसल (गेहूँ, सरसों) पकती और कटती है।
  • वैशाख में खलिहान भरे होते हैं — यह समृद्धि का महीना है।
  • इन महीनों में किसान परिश्रम करता है और फसल का इंतज़ार करता है।

आषाढ़ का विशेष उल्लास:
आषाढ़ (जून-जुलाई) में मानसून आता है। इस महीने के आने पर विशेष उल्लास के कारण —

  1. नई फसल की शुरुआत: आषाढ़ में वर्षा होने पर खरीफ की फसल (धान, मक्का, ज्वार) की बुआई होती है। यह नए कृषि-चक्र की शुरुआत है।
  1. जल-संकट का अंत: ग्रीष्म ऋतु की भीषण गर्मी और सूखे के बाद वर्षा का आना राहत और खुशी लाता है।
  1. पशुओं के लिए चारा: वर्षा से हरी घास उगती है जो पशुओं के लिए चारे का काम करती है।
  1. मनोवैज्ञानिक राहत: लंबे इंतज़ार के बाद मेघों का आना मन में उत्साह और उमंग भर देता है।
  1. लोक-उत्सव: आषाढ़ से जुड़े अनेक लोकगीत, त्योहार और परंपराएँ हैं जो सामूहिक उल्लास को बढ़ाती हैं।

निष्कर्ष: आषाढ़ का आना केवल एक ऋतु-परिवर्तन नहीं, बल्कि कृषि-समाज के लिए नई आशा, नई ऊर्जा और नए जीवन का संदेश है।

3पाठ के संदर्भ में इसी पुस्तक में दी गई निराला की कविता 'बादल-राग' पर विचार कीजिए और बताइए कि आपके जीवन में बादलों की क्या भूमिका है?

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4'त्याग तो वह होता... उसी का फल मिलता है।' अपने जीवन के किसी प्रसंग से इस सूक्ति की सार्थकता समझाइए।

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5पानी का संकट वर्तमान स्थिति में भी बहुत गहराया हुआ है। इसी तरह के पर्यावरण से संबद्ध अन्य संकटों के बारे में लिखिए।

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6आपकी दादी-नानी किस तरह के विश्वासों की बात करती हैं? ऐसी स्थिति में उनके प्रति आपका रवैया क्या होता है? लिखिए।

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चर्चा करें

1बादलों से संबंधित अपने-अपने क्षेत्र में प्रचलित गीतों का संकलन करें तथा कक्षा में चर्चा करें।

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2पिछले 15-20 सालों में पर्यावरण से छेड़-छाड़ के कारण भी प्रकृति-चक्र में बदलाव आया है। वर्तमान बाड़मेर (राजस्थान) में आई बाढ़, मुंबई की बाढ़ तथा महाराष्ट्र का भूकंप या फिर सुनामी भी इसी का नतीजा है। इस प्रकार की घटनाओं से जुड़ी सूचनाओं, चित्रों का संकलन कीजिए और एक प्रदर्शनी का आयोजन कीजिए।

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विज्ञापन की दुनिया

1'पानी बचाओ' से जुड़े विज्ञापनों को एकत्र कीजिए। इस संकट के प्रति चेतावनी बरतने के लिए आप किस प्रकार का विज्ञापन बनाना चाहेंगे?

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7 more solved questions in काले मेघा पानी दे-(धर्मवीर भारती)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in काले मेघा पानी दे-(धर्मवीर भारती) for Tripura Board Class 12 Hindi?
Key topics in काले मेघा पानी दे-(धर्मवीर भारती) include १. रचनाकार और विधा, २. पाठ का केंद्रीय विचार, ३. पात्र-चित्रण, ४. महत्वपूर्ण प्रसंग और घटनाक्रम. Study these first, then practise questions on each for the Tripura Board Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for काले मेघा पानी दे-(धर्मवीर भारती) free?
The first 8 of the 15 solutions on this page are open to read. The other 7 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise काले मेघा पानी दे-(धर्मवीर भारती) for the Tripura Board Class 12 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 45 practice questions on काले मेघा पानी दे-(धर्मवीर भारती). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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