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Chapter 24 of 38
NCERT Solutions

छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी) (Part 2) — NCERT Solutions

Tripura Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी) (Part 2), Tripura Board Class 12 Hindi: 8 textbook questions solved step by step.

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यह इमेज 'छोटा मेरा खेत' कविता में कवि-कर्म (लेखन प्रक्रिया) और कृषि-कर्म के बीच समानता को एक फ्लोचार्ट के माध्यम से दर्शाती है। इसमें कागज के पन्ने को खेत, भावनात्मक आंधी को बीज बोने वाला, कल्पना को र
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One of 3 illustrations for छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी) in Super Tutor — alongside flashcards, concept maps and practice questions.

8 Questions Solved · 3 Sections

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कविता के साथ — छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख

1छोटे चौकोने खेत को कागज का पन्ना कहने में क्या अर्थ निहित है?Show solution

दिया गया है: कवि उमाशंकर जोशी ने कागज के पन्ने को छोटे चौकोने खेत की संज्ञा दी है।

अर्थ एवं व्याख्या:

कवि ने कागज के पन्ने और खेत के बीच एक सार्थक रूपक स्थापित किया है। दोनों की आकृति चौकोनी होती है और दोनों में कुछ-न-कुछ उगाया जाता है —

  • जिस प्रकार खेत में बीज बोए जाते हैं और फसल उगती है, उसी प्रकार कागज के पन्ने पर विचार-बीज बोए जाते हैं और रचना रूपी फसल तैयार होती है।
  • खेत सीमित आकार का होता है, परंतु उसमें असीमित अन्न उत्पन्न होने की क्षमता होती है। उसी प्रकार कागज का पन्ना भले ही छोटा हो, किंतु उस पर लिखी रचना असीमित भावों और अर्थों को समेट सकती है।
  • यह रूपक सृजन-प्रक्रिया को कृषि-कर्म से जोड़ता है — दोनों में श्रम, धैर्य और प्रतीक्षा की आवश्यकता होती है।

निष्कर्ष: इस प्रयोग में कवि यह बताना चाहता है कि जैसे खेत में बीज से फसल उगती है, वैसे ही कागज पर विचार-बीज से साहित्यिक रचना जन्म लेती है। दोनों का उद्देश्य मानव-जीवन को पोषित करना है।

2रचना के संदर्भ में अंधड़ और बीज क्या हैं?Show solution

दिया गया है: कवि ने रचना-प्रक्रिया को खेती से जोड़ते हुए 'अंधड़' और 'बीज' का प्रयोग किया है।

अंधड़ (आँधी) का अर्थ:
रचना के संदर्भ में अंधड़ उस भावनात्मक आवेग या प्रेरणा का प्रतीक है जो कवि के मन में अचानक उठती है। जिस प्रकार आँधी अप्रत्याशित रूप से आती है और सब कुछ हिला देती है, उसी प्रकार कवि के मन में कोई तीव्र अनुभव, संवेदना या विचार का झोंका आता है जो उसे रचना के लिए प्रेरित करता है।

बीज का अर्थ:
रचना के संदर्भ में बीज उस मूल भाव, विचार या कल्पना का प्रतीक है जो उस आवेग (अंधड़) के कारण कवि के मन में अंकुरित होता है। यही बीज-भाव आगे चलकर शब्दों का रूप लेता है और एक पूर्ण रचना बनता है।

निष्कर्ष: अंधड़ = रचना की प्रेरणा/भावनात्मक आवेग; बीज = वह मूल विचार या भाव जो उस प्रेरणा से जन्म लेता है और जिससे कविता/रचना का विकास होता है।

3रस का अक्षयपात्र से कवि ने रचनाकर्म की किन विशेषताओं की ओर इंगित किया है?Show solution

दिया गया है: कवि ने रचना को 'रस का अक्षयपात्र' कहा है।

अक्षयपात्र का अर्थ: अक्षयपात्र वह पात्र है जो कभी रिक्त नहीं होता — जितना लिया जाए, उतना ही भरा रहता है।

रचनाकर्म की विशेषताएँ जिनकी ओर संकेत है:

  1. अनंत आनंद का स्रोत: एक श्रेष्ठ रचना पाठकों को बार-बार पढ़ने पर भी नया आनंद देती है। उसका रस कभी समाप्त नहीं होता।
  1. कालजयिता: रचना एक बार लिखी जाती है, परंतु युगों-युगों तक पाठकों को रस प्रदान करती रहती है। समय के साथ उसका महत्त्व घटता नहीं, बल्कि बढ़ता है।
  1. असीमित प्रभाव: जितने अधिक पाठक उसे पढ़ते हैं, रचना का रस उतना ही अधिक फैलता है — वह कभी कम नहीं होता।
  1. रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की: रचना का सृजन एक क्षण में होता है, परंतु उससे मिलने वाला आनंद अनंत काल तक चलता रहता है।

निष्कर्ष: 'रस का अक्षयपात्र' के माध्यम से कवि यह बताना चाहता है कि सच्ची साहित्यिक रचना अमर होती है — वह जितनी बार पढ़ी जाए, उतना ही नया रस देती है और कभी रिक्त नहीं होती।

4(i)व्याख्या करें — शब्द के अंकुर फूटे, पल्लव-पुण्यों से नमित हुआ विशेष।Show solution

प्रसंग: ये पंक्तियाँ उमाशंकर जोशी की कविता 'छोटा मेरा खेत' से ली गई हैं। कवि रचना-प्रक्रिया का वर्णन कर रहा है।

शब्दार्थ:

  • अंकुर फूटे = विचार/भाव का प्रस्फुटन होना
  • पल्लव = पत्तियाँ (यहाँ रचना के विकसित भाव/शब्द)
  • पुण्यों से नमित = पुण्य (श्रेष्ठ कर्म) के भार से झुका हुआ
  • विशेष = कविता/रचना

व्याख्या:
जब कवि के मन में भावनात्मक आवेग (अंधड़) आता है और उससे विचार-बीज का जन्म होता है, तो धीरे-धीरे उस बीज से शब्दों के अंकुर फूटते हैं — अर्थात् कवि के मन में शब्द और भाव उगने लगते हैं। जैसे-जैसे रचना विकसित होती है, उसमें पल्लव (नए-नए भाव, विचार, शब्द-सौंदर्य) आते हैं। ये पल्लव इतने पुण्यमय (श्रेष्ठ, सुंदर और अर्थपूर्ण) होते हैं कि उनके भार से रचना (विशेष) नमित हो जाती है — अर्थात् रचना अपने ही सौंदर्य और गुणों के बोझ से झुक जाती है, जैसे फलों से लदी डाली झुक जाती है।

काव्य-सौंदर्य: यहाँ रचना-प्रक्रिया की तुलना पौधे के विकास से की गई है। रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग है।

भाव: श्रेष्ठ रचना अपने ही गुणों के कारण विनम्र और गरिमामयी होती है।

4(ii)व्याख्या करें — रोपाई क्षण की, कटाई अनंतता की लुटते रहने से जरा भी नहीं कम होती।

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4 more solved questions in छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी) for Tripura Board Class 12 Hindi?
Key topics in छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी) include कवि परिचय और साहित्यिक महत्व, ‘छोटा मेरा खेत’ : मुख्य भाव और रूपक, ‘छोटा मेरा खेत’ : काव्य-भाषा और शैली, ‘बगुलों के पंख’ : मुख्य भाव और दृश्य-चित्रण. Study these first, then practise questions on each for the Tripura Board Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी) free?
The first 4 of the 8 solutions on this page are open to read. The other 4 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी) for the Tripura Board Class 12 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 45 practice questions on छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख-( उमाशंकर जोशी). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

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