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Chapter 18 of 38
NCERT Solutions

बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला')

Chhattisgarh Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') — Chhattisgarh Board Class 12 Hindi.

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यह इन्फोग्राफिक सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के काव्य व्यक्तित्व के द्वंद्व को दर्शाता है, जिसमें संघर्ष और जीवन, क्रांति और निर्माण, ओज और माधुर्य, आशा और निराशा, उल्लास-शोक, राग-विराग, उत्थान-पतन, अं
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कविता के साथ

1अस्थिर सुख पर दुख की छाया पंक्ति में दुख की छाया किसे कहा गया है और क्यों?Show solution
पंक्ति में दुख की छाया से तात्पर्य विप्लव/क्रांति की छाया से है। कवि ने अस्थिर सुख के ऊपर दुख की छाया इसलिए कही है क्योंकि संसार का सुख स्थायी नहीं है; उसके भीतर संघर्ष, पीड़ा और परिवर्तन छिपे रहते हैं। बादल के आगमन से यह सुख-व्यवस्था हिलती है और दुख/विप्लव का संकेत मिलता है।

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2अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर पंक्ति में किसकी ओर संकेत किया गया है?Show solution
इस पंक्ति में अशनि-पात से आहत, परंतु फिर भी अडिग खड़े वीरों की ओर संकेत किया गया है। कविता के संदर्भ में यह उन क्रांतिकारी, संघर्षशील और दमन से पीड़ित लोगों का प्रतीक है जो बार-बार चोट खाकर भी हार नहीं मानते।

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3विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते पंक्ति में विप्लव-रव से क्या तात्पर्य है? छोटे ही हैं शोभा पाते ऐसा क्यों कहा गया है?Show solution
विप्लव-रव से तात्पर्य क्रांति की गर्जना/क्रांतिकारी आवाज़ से है। छोटे ही हैं शोभा पाते इसलिए कहा गया है क्योंकि कविता में लघुमानव, किसान, मजदूर, छोटे पौधे और वंचित लोग ही क्रांति से लाभ पाते हैं; वही नई आशा, नई हरियाली और नए निर्माण के असली आधार हैं।

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4बादलों के आगमन से प्रकृति में होने वाले किन-किन परिवर्तनों को कविता रेखांकित करती है?Show solution
बादलों के आगमन से कविता में ये परिवर्तन रेखांकित हैं: सूखी, तपती धरती पर राहत आना; मुरझाई प्रकृति का फिर से सजना; अंकुरों का सिर उठाना; छोटे पौधों का हिल-हिलकर खिलखिलाना; शस्य/हरियाली का फैलना; और किसान-मजदूरों में नई आशा का जागना।

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व्याख्या कीजिए

1तिरती है समीर-सागर पर
अस्थिर सुख पर दुख की छाया—
जग के दग्ध हृदय पर
निर्दय विप्लव की प्लावित माया—
Show solution
इन पंक्तियों में कवि ने बादल को समीर-सागर पर तैरती हुई रण-तरी के रूप में, और उसके भीतर निर्दय विप्लव की शक्ति के रूप में चित्रित किया है। यह बादल दुख और संघर्ष से भरे संसार पर क्रांति और परिवर्तन की छाया डालता है।

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2अट्टालिका नहीं है रे
आतंक-भवन
सदा पंक पर ही होता
जल-विप्लव-प्लावन
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इन पंक्तियों में अट्टालिका और आतंक-भवन से बड़े, ऊँचे और धनिकों के भवनों का संकेत है। कवि कहना चाहता है कि ऐसी ऊँची इमारतें भी अंततः जल-विप्लव के सामने टिक नहीं पातीं; पंक यानी कीचड़ पर ही बाढ़ का असर अधिक होता है, इसलिए यह पंक्तियाँ असमानता और परिवर्तन की सच्चाई दिखाती हैं।

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कला की बात

1पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। आपको प्रकृति का कौन-सा मानवीय रूप पसंद आया और क्यों?
2कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है? संबंधित वाक्यांश को छाँटकर लिखिए।
3इस कविता में बादल के लिए ऐ विप्लव के वीर!, ऐ जीवन के पारावार! जैसे संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। बादल राग कविता के शेष पाँच खंडों में भी कई संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। जैसे- अरे वर्ष के हर्ष!, मेरे पागल बादल!, ऐ निर्बंध!, ऐ स्वच्छंद!, ऐ उद्गम!, ऐ सम्राट!, ऐ विप्लव के प्लावन!, ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार! उपर्युक्त संबोधनों की व्याख्या करें तथा बताएँ कि बादल के लिए इन संबोधनों का क्या औचित्य है?
4कवि बादलों को किस रूप में देखता है? कालिदास ने मेघदूत काव्य में मेघों को दूत के रूप में देखा। आप अपना कोई काल्पनिक बिंब दीजिए।
5कविता को प्रभावी बनाने के लिए कवि विशेषणों का सायास प्रयोग करता है जैसे- अस्थिर सुखसुख के साथ अस्थिर विशेषण के प्रयोग ने सुख के अर्थ में विशेष प्रभाव पैदा कर दिया है। ऐसे अन्य विशेषणों को कविता से छाँटकर लिखें तथा बताएँ कि ऐसे शब्द-पदों के प्रयोग से कविता के अर्थ में क्या विशेष प्रभाव पैदा हुआ है?

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