मैं क्यों लिखता हूँ?
Himachal Pradesh Board · Class 10 · Hindi
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See them allमैं क्यों लिखता हूँ? — अभ्यास प्रश्न
1लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में कहीं अधिक मदद करती है, क्यों?Show solution
लेखक (अज्ञेय) के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव केवल बाहरी घटना का ज्ञान कराता है — वह आँखों से देखा और कानों से सुना हुआ होता है। उससे बुद्धि तो प्रभावित होती है, किंतु हृदय की गहराइयाँ नहीं हिलतीं।
इसके विपरीत अनुभूति वह अवस्था है जब बाहरी घटना भीतर उतरकर संवेदना का हिस्सा बन जाती है — लेखक स्वयं उस पीड़ा या आनंद का भोक्ता बन जाता है। जब कोई बात केवल जानी नहीं जाती, बल्कि महसूस की जाती है, तभी वह रचना में सच्चाई और प्रामाणिकता ला सकती है।
लेखक ने हिरोशिमा का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया है कि जापान में विस्फोट-स्थल देखने पर भी उन्हें कविता नहीं सूझी, क्योंकि वह केवल प्रत्यक्ष अनुभव था। जब भारत लौटकर एक झुलसी हुई पत्थर की छाया देखकर वह पीड़ा उनके भीतर उतरी — अनुभूति बनी — तभी कविता फूटी। इसीलिए लेखक के लिए अनुभूति, प्रत्यक्ष अनुभव से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है।
2लेखक ने अपने आपको हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता कब और किस तरह महसूस किया?Show solution
कब: लेखक ने स्वयं को हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता तब महसूस किया जब वे जापान से लौटने के बाद भारत में एक अस्पताल के सामने से गुज़र रहे थे। वहाँ उन्होंने एक व्यक्ति की झुलसी हुई छाया पत्थर पर अंकित देखी — जो हिरोशिमा के विस्फोट में किसी मनुष्य के भाप बन जाने का प्रमाण थी।
किस तरह: उस छाया को देखते ही लेखक को जैसे एक थप्पड़-सा लगा। उस एक क्षण में अणु-विस्फोट की भयावहता उनकी अनुभूति-प्रत्यक्ष में आ गई। इतिहास की वह घटना अचानक उनके भीतर एक जलते हुए सूर्य की तरह उग आई। वे बौद्धिक स्तर से आगे बढ़कर संवेदनात्मक स्तर पर उस पीड़ा के भोक्ता बन गए — अर्थात् उन्होंने उस विस्फोट की पीड़ा को भीतर से जिया। इसी आंतरिक आकुलता और विवशता से प्रेरित होकर उन्होंने रेलगाड़ी में बैठे-बैठे हिरोशिमा पर कविता लिखी।
3मैं क्यों लिखता हूँ? के आधार पर बताइए कि—
(क) लेखक को कौन-सी बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं?
(ख) किसी रचनाकार के प्रेरणा स्रोत किसी दूसरे को कुछ भी रचने के लिए किस तरह उत्साहित कर सकते हैं?Show solution
(क) लेखक को लिखने के लिए प्रेरित करने वाली बातें:
लेखक के अनुसार उन्हें मुख्यतः दो प्रकार की बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं —
1. आंतरिक विवशता (अंतः दबाव): जब भीतर कोई बात इतनी तीव्रता से उठती है कि उसे बाहर निकाले बिना चैन नहीं मिलता। यह अनुभूति-जन्य आकुलता ही लेखक की सबसे बड़ी प्रेरणा है। जब कोई घटना या संवेदना बुद्धि के क्षेत्र से बढ़कर हृदय के क्षेत्र में आ जाती है, तब लिखना अनिवार्य हो जाता है।
2. बाह्य दबाव: प्रकाशकों की माँग, पाठकों की अपेक्षा, आर्थिक आवश्यकता आदि भी कभी-कभी लेखन के लिए प्रेरित करते हैं। यद्यपि लेखक इसे कम महत्त्व देते हैं, पर इसे नकारते भी नहीं।
(ख) रचनाकार के प्रेरणा स्रोत दूसरों को कैसे उत्साहित कर सकते हैं:
जब कोई रचनाकार अपनी रचना-प्रक्रिया और प्रेरणा के स्रोत ईमानदारी से साझा करता है, तो पाठक या अन्य कलाकार यह समझ पाते हैं कि —
- रचना केवल प्रतिभा का नहीं, गहरी अनुभूति का परिणाम है।
- साधारण जीवन की घटनाएँ भी रचना का आधार बन सकती हैं।
- अपनी पीड़ा, संवेदना और विचारों को कला के माध्यम से अभिव्यक्त किया जा सकता है।
इस प्रकार एक रचनाकार की प्रेरणा-कथा दूसरों के भीतर सोई हुई संवेदनशीलता को जगाकर उन्हें सृजन के लिए प्रेरित करती है।
4कुछ रचनाकारों के लिए आत्मानुभूति/स्वयं के अनुभव के साथ-साथ बाह्य दबाव भी महत्वपूर्ण होता है। ये बाह्य दबाव कौन-कौन से हो सकते हैं?Show solution
रचनाकारों पर पड़ने वाले प्रमुख बाह्य दबाव निम्नलिखित हो सकते हैं —
1. प्रकाशकों का दबाव: प्रकाशक समय-सीमा के भीतर रचना माँगते हैं, जिससे लेखक को लिखना पड़ता है।
2. आर्थिक आवश्यकता: जीविकोपार्जन के लिए लिखना पड़ता है। पत्र-पत्रिकाओं के लिए नियमित लेखन इसी श्रेणी में आता है।
3. पाठकों की माँग और अपेक्षाएँ: पाठक किसी लेखक की अगली रचना की प्रतीक्षा करते हैं, जो लेखक पर एक सकारात्मक दबाव बनाता है।
4. सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियाँ: समाज में व्याप्त अन्याय, अत्याचार, युद्ध आदि रचनाकार को लिखने के लिए बाध्य करते हैं।
5. संपादकों का आग्रह: पत्रिकाओं के संपादक विशेष विषयों पर लिखने का अनुरोध करते हैं।
6. पुरस्कार एवं प्रतिष्ठा की चाह: कभी-कभी सामाजिक मान्यता और पुरस्कार पाने की इच्छा भी लेखन को प्रेरित करती है।
इन बाह्य दबावों के कारण लिखी गई रचनाएँ भी महत्त्वपूर्ण हो सकती हैं, यदि उनमें अनुभूति की सच्चाई हो।
5क्या बाह्य दबाव केवल लेखन से जुड़े रचनाकारों को ही प्रभावित करते हैं या अन्य क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों को भी प्रभावित करते हैं, कैसे?Show solution
बाह्य दबाव केवल लेखकों को ही नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों के कलाकारों को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए —
1. चित्रकार: किसी चित्रकार को प्रदर्शनी की समय-सीमा, ग्राहक की पसंद या बाज़ार की माँग के अनुसार चित्र बनाने पड़ते हैं।
2. संगीतकार: फ़िल्म-निर्माता की माँग, एल्बम की डेडलाइन या दर्शकों की रुचि के अनुसार संगीत रचना करनी पड़ती है।
3. अभिनेता: निर्देशक के निर्देश, दर्शकों की अपेक्षाएँ और व्यावसायिक सफलता का दबाव अभिनेता को प्रभावित करता है।
4. मूर्तिकार/शिल्पकार: सरकारी या निजी आयोग, समय-सीमा और बजट का दबाव उनकी कला को प्रभावित करता है।
5. नृत्यकार: मंच-प्रदर्शन की तिथि, दर्शकों की रुचि और आयोजकों की अपेक्षाएँ उन पर दबाव डालती हैं।
निष्कर्ष: बाह्य दबाव सार्वभौमिक हैं। हर कलाकार को आंतरिक प्रेरणा और बाह्य दबाव के बीच संतुलन बनाकर अपनी कला को प्रामाणिक बनाए रखना पड़ता है।
6हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक के अंतः व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है यह आप कैसे कह सकते हैं?Show solution
हिरोशिमा पर लिखी कविता वास्तव में लेखक के अंतः (आंतरिक) और बाह्य (बाहरी) दोनों दबावों का परिणाम है —
बाह्य दबाव:
- लेखक ने जापान में हिरोशिमा का विस्फोट-स्थल प्रत्यक्ष देखा — यह एक बाहरी घटना थी।
- उन्होंने झुलसे हुए पत्थर पर मानव-छाया देखी — यह भी एक बाहरी दृश्य था।
- हिरोशिमा की ऐतिहासिक त्रासदी और उसके प्रति विश्व-समुदाय की चिंता भी एक बाहरी प्रेरणा थी।
आंतरिक दबाव (अंतः दबाव):
- उस झुलसी छाया को देखकर लेखक के भीतर एक गहरी आकुलता जागी।
- वह पीड़ा बुद्धि के क्षेत्र से बढ़कर संवेदना के क्षेत्र में आ गई।
- लेखक स्वयं उस विस्फोट के भोक्ता बन गए — यह शुद्ध आंतरिक अनुभूति थी।
- इस भीतरी विवशता और आकुलता ने उन्हें लिखने के लिए बाध्य किया।
निष्कर्ष: बाहरी दृश्य (झुलसी छाया) ने निमित्त का काम किया और भीतरी संवेदना ने रचना को जन्म दिया। इसीलिए यह कविता दोनों दबावों का सम्मिलित परिणाम है।
7हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरुपयोग है। आपकी दृष्टि में विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ-कहाँ और किस तरह से हो रहा है।Show solution
हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराना निःसंदेह विज्ञान का सबसे भयावह दुरुपयोग था। आज भी विज्ञान का दुरुपयोग अनेक क्षेत्रों में हो रहा है —
1. परमाणु और जैविक हथियार: विभिन्न देश परमाणु बम, रासायनिक हथियार और जैविक अस्त्र बना रहे हैं जो मानवता के लिए खतरा हैं।
2. पर्यावरण प्रदूषण: औद्योगिक विकास के नाम पर कारखानों से निकलने वाले ज़हरीले धुएँ और रसायनों से वायु, जल और भूमि प्रदूषित हो रही है।
3. साइबर अपराध: इंटरनेट और तकनीक का उपयोग हैकिंग, धोखाधड़ी, डेटा चोरी और आतंकवाद के लिए किया जा रहा है।
4. नशीले पदार्थों का निर्माण: रासायनिक विज्ञान का उपयोग कर नशीली दवाएँ बनाई जा रही हैं।
5. सोशल मीडिया और AI का दुरुपयोग: फ़र्ज़ी खबरें फैलाने, डीपफेक वीडियो बनाने और मनोवैज्ञानिक हेरफेर के लिए तकनीक का दुरुपयोग हो रहा है।
6. कृषि में हानिकारक रसायन: अत्यधिक कीटनाशकों और रासायनिक खादों के प्रयोग से मिट्टी और मानव स्वास्थ्य को नुकसान हो रहा है।
निष्कर्ष: विज्ञान स्वयं न अच्छा है न बुरा — उसका उपयोग करने वाला मनुष्य ही उसे वरदान या अभिशाप बनाता है।
8एक संवेदनशील युवा नागरिक की हैसियत से विज्ञान का दुरुपयोग रोकने में आपकी क्या भूमिका है?Show solution
एक संवेदनशील युवा नागरिक के रूप में विज्ञान के दुरुपयोग को रोकने में मेरी भूमिका निम्नलिखित हो सकती है —
1. जागरूकता फैलाना: विज्ञान के दुरुपयोग के खतरों के बारे में अपने मित्रों, परिवार और समाज को जागरूक करना।
2. सोशल मीडिया का सदुपयोग: फ़र्ज़ी खबरों को न फैलाना, तथ्यों की जाँच करके ही जानकारी साझा करना।
3. पर्यावरण संरक्षण: प्लास्टिक का उपयोग कम करना, ऊर्जा की बचत करना और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों का विरोध करना।
4. नैतिक तकनीकी उपयोग: साइबर अपराध में भाग न लेना और दूसरों को भी इससे रोकना।
5. शांति का समर्थन: युद्ध और हथियारों की होड़ के विरुद्ध शांति-आंदोलनों का समर्थन करना।
6. वैज्ञानिक सोच विकसित करना: विज्ञान को मानवता की सेवा के लिए उपयोग करने की मानसिकता अपनाना और दूसरों में भी यह भावना जगाना।
7. कानूनी जागरूकता: विज्ञान के दुरुपयोग से संबंधित कानूनों की जानकारी रखना और उनका पालन करना।
निष्कर्ष: युवा पीढ़ी ही भविष्य की निर्माता है। यदि हम आज सचेत और संवेदनशील रहें, तो विज्ञान को विनाश का नहीं, निर्माण का साधन बना सकते हैं।
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