उत्साह / अट नहीं रही है
Himachal Pradesh Board · Class 10 · Hindi
NCERT Solutions for उत्साह / अट नहीं रही है — Himachal Pradesh Board Class 10 Hindi.
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Get startedउत्साह
1कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर 'गरजने' के लिए कहता है, क्यों?Show solution
उत्तर:
कवि बादल से गरजने के लिए इसलिए कहता है क्योंकि —
1. सामाजिक संदर्भ में: समाज में चारों ओर निराशा, शोषण और पीड़ा व्याप्त है। लोगों के मन 'प्यासे' हैं — अर्थात् वे क्रांति और परिवर्तन के लिए तरस रहे हैं। केवल फुहार या रिमझिम से यह प्यास नहीं बुझेगी।
2. क्रांति का आह्वान: कवि चाहता है कि बादल (क्रांतिदूत) अपनी गर्जना से सोए हुए, निराश और उदासीन लोगों को जगाए, उनमें नई चेतना और उत्साह का संचार करे।
3. नवनिर्माण की आवश्यकता: गरजना विध्वंस और पुनर्निर्माण का प्रतीक है। पुरानी व्यवस्था को तोड़कर नई व्यवस्था लाने के लिए तीव्र और प्रचंड शक्ति की आवश्यकता है, जो केवल गर्जना से ही संभव है।
निष्कर्ष: इस प्रकार कवि बादल को क्रांति के प्रतीक के रूप में देखता है और उससे प्रचंड गर्जना का आह्वान करता है ताकि समाज में नई ऊर्जा और चेतना का उदय हो।
2कविता का शीर्षक 'उत्साह' क्यों रखा गया है?Show solution
उत्तर:
कविता का शीर्षक 'उत्साह' अत्यंत सार्थक है, क्योंकि —
1. कवि का उत्साह: कवि स्वयं बादल को देखकर उत्साहित हो उठता है और उसे गरजने के लिए प्रेरित करता है।
2. बादल में उत्साह: बादल स्वयं उत्साह और ऊर्जा का प्रतीक है। वह उमड़-घुमड़कर आता है और अपनी शक्ति का प्रदर्शन करता है।
3. जन-जागरण का उत्साह: कवि चाहता है कि बादल की गर्जना से समाज के निराश और पीड़ित लोगों में नया उत्साह जागे, वे क्रांति के लिए प्रेरित हों।
4. प्रकृति और मानव दोनों में उत्साह: कविता में प्रकृति (बादल) और मानव (कवि तथा समाज) दोनों में उत्साह का भाव विद्यमान है।
निष्कर्ष: इस प्रकार 'उत्साह' शीर्षक कविता के केंद्रीय भाव — ऊर्जा, जोश, क्रांति-चेतना और नवनिर्माण की प्रेरणा — को पूर्णतः व्यक्त करता है।
3कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?Show solution
उत्तर:
कविता में बादल निम्नलिखित अर्थों की ओर संकेत करता है —
1. प्राकृतिक बादल: सबसे पहले बादल अपने सामान्य अर्थ में है — वर्षा लाने वाला, गर्जना करने वाला, जल से भरा बादल जो धरती की प्यास बुझाता है।
2. क्रांतिदूत का प्रतीक: बादल क्रांति लाने वाले उस नायक का प्रतीक है जो समाज की पुरानी, जर्जर व्यवस्था को तोड़कर नई व्यवस्था स्थापित करता है।
3. कवि-कल्पना का प्रतीक: बादल कवि की उस उर्वर कल्पना-शक्ति का प्रतीक है जो उमड़-घुमड़कर काव्य-सृजन करती है।
4. आशा और नवजीवन का प्रतीक: जिस प्रकार बादल सूखी धरती को जल देकर नया जीवन देता है, उसी प्रकार वह निराश समाज में नई आशा और उत्साह का संचार करता है।
5. विध्वंसक और निर्माणकारी शक्ति: बादल की गर्जना विध्वंस का और उसकी वर्षा नवनिर्माण का प्रतीक है।
निष्कर्ष: इस प्रकार बादल कविता में बहुआयामी प्रतीक के रूप में प्रयुक्त हुआ है।
4शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। 'उत्साह' कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।Show solution
अवधारणा: नाद-सौंदर्य वह ध्वन्यात्मक प्रभाव है जो शब्दों के उच्चारण से उत्पन्न होता है और कविता के भाव को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।
'उत्साह' कविता में नाद-सौंदर्य से युक्त शब्द:
| शब्द/पद | नाद-सौंदर्य का प्रभाव |
|---|---|
| गरजो | 'ग' और 'र' की ध्वनि से गर्जना का आभास |
| घेर-घेर | पुनरुक्ति से घिरने का ध्वन्यात्मक प्रभाव |
| घोर | भारी, गहरी ध्वनि से भयंकरता का बोध |
| ललित | कोमल ध्वनि से सौंदर्य का बोध |
| विद्युत-छवि | 'व' और 'च' की ध्वनि से चमक का आभास |
| बाँधो | दृढ़ता का ध्वन्यात्मक प्रभाव |
| धाराधर | 'ध' की आवृत्ति से जल-प्रवाह का बोध |
निष्कर्ष: इन शब्दों के उच्चारण से बादल की गर्जना, बिजली की चमक और वर्षा के प्रवाह का जीवंत ध्वन्यात्मक चित्र उभरता है, जो कविता के नाद-सौंदर्य को समृद्ध बनाता है।
रचना और अभिव्यक्ति (उत्साह)
5जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।Show solution
नमूना कविता: नदी
बहती चली जाती है नदी,
पत्थरों से टकराकर भी,
रुकती नहीं, झुकती नहीं,
आगे बढ़ती जाती है नदी।
कभी शांत, कभी उफनती,
कभी गीत गाती, कभी गरजती,
जीवन का संदेश सुनाती,
बहती चली जाती है नदी।
दो किनारों के बीच बँधकर भी,
अपनी राह खुद बनाती है,
सागर से मिलने की चाह में,
बहती चली जाती है नदी।
निर्देश: विद्यार्थी किसी भी प्राकृतिक दृश्य — सूर्योदय, पर्वत, वन, झरना आदि — को देखकर अपनी मौलिक कविता लिख सकते हैं।
अट नहीं रही है
1छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।Show solution
उत्तर:
निम्नलिखित पंक्तियाँ इस धारणा को पुष्ट करती हैं —
पंक्तियाँ:
तथा —
व्याख्या:
1. पहली पंक्तियों में कवि का अंतर्मन फागुन की सुंदरता से इतना अभिभूत है कि वह आँख हटाना चाहते हुए भी हटा नहीं पाता — यह अंतर्मन और बाहरी प्रकृति का सामंजस्य है।
2. दूसरी पंक्तियों में फागुन की शोभा इतनी व्यापक है कि वह किसी सीमा में नहीं समाती — यह बाहरी प्रकृति की विशालता और कवि के भीतर के असीम आनंद का सामंजस्य दर्शाता है।
निष्कर्ष: इन पंक्तियों में कवि का आंतरिक आनंद और फागुन की बाहरी सुंदरता एकाकार हो जाते हैं, जो छायावाद की मूल विशेषता है।
2कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?Show solution
उत्तर:
कवि की आँख फागुन की सुंदरता से इसलिए नहीं हट रही है क्योंकि —
1. प्रकृति का अपूर्व सौंदर्य: फागुन में प्रकृति अपने पूर्ण यौवन पर होती है। चारों ओर फूल खिले हैं, हरियाली छाई है, वातावरण सुगंधित है।
2. सर्वव्यापी शोभा: फागुन की शोभा इतनी व्यापक है कि वह 'पाट-पाट' (जगह-जगह) फैली हुई है — पेड़, पत्ते, फूल, आकाश सब उसमें रंगे हुए हैं।
3. आभा और चमक: फागुन की एक विशेष आभा (चमक) है जो कवि को मंत्रमुग्ध कर देती है।
4. मन की तरंगें: फागुन का सौंदर्य केवल आँखों को नहीं, बल्कि मन को भी आनंदित करता है। कवि का अंतर्मन इस सौंदर्य में इतना डूब जाता है कि वह उससे अलग नहीं हो पाता।
5. उड़ान की अनुभूति: फागुन की सुंदरता कवि को ऐसा अनुभव कराती है जैसे वह पंख लगाकर उड़ना चाहता हो।
निष्कर्ष: फागुन की सर्वव्यापी, मनमोहक और अलौकिक सुंदरता के कारण कवि की दृष्टि उससे हट नहीं पाती।
3प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?Show solution
उत्तर:
कवि निराला ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन निम्नलिखित रूपों में किया है —
1. फागुन की सर्वव्यापकता: फागुन की शोभा इतनी विशाल है कि वह किसी सीमा में नहीं समाती — *"पाट-पाट शोभा-श्री / पट नहीं रही है"* — अर्थात् जगह-जगह सौंदर्य बिखरा पड़ा है।
2. वायुमंडल में व्याप्तता: फागुन की सुगंध और आभा वायुमंडल में चारों ओर फैली हुई है।
3. वनस्पति जगत में: पेड़-पौधों पर नए पत्ते और फूल आ गए हैं, जो प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक हैं।
4. आकाश तक विस्तार: प्रकृति की सुंदरता धरती से आकाश तक फैली है — *"उड़ने को नभ में तुम / पर-पर कर देते हो"* — यह आकाश तक की व्यापकता को दर्शाता है।
5. कवि के मन में व्याप्तता: फागुन की आभा केवल बाहर नहीं, बल्कि कवि के अंतर्मन में भी समा गई है — यह प्रकृति की आंतरिक व्यापकता है।
निष्कर्ष: इस प्रकार कवि ने फागुन की प्रकृति को धरती, आकाश, वायु और मानव-मन — सभी में व्याप्त दिखाया है।
4फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?Show solution
उत्तर:
फागुन (फाल्गुन) में निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं जो उसे अन्य ऋतुओं से भिन्न बनाती हैं —
1. प्रकृति का पूर्ण यौवन: फागुन में प्रकृति अपने पूर्ण सौंदर्य पर होती है। चारों ओर फूल खिलते हैं, नए पत्ते आते हैं और हरियाली छा जाती है।
2. रंगों की बहार: फागुन होली का महीना है। इस समय प्रकृति भी रंग-बिरंगी हो जाती है — लाल, पीले, गुलाबी फूल चारों ओर खिल उठते हैं।
3. सुगंध का प्रसार: फागुन में फूलों की सुगंध वातावरण को महका देती है, जो अन्य ऋतुओं में इतनी व्यापक नहीं होती।
4. उल्लास और उमंग: फागुन में मनुष्य और प्रकृति दोनों में असाधारण उल्लास और उमंग होती है। यह आनंद और उत्सव का महीना है।
5. शोभा की अधिकता: फागुन की शोभा इतनी अधिक होती है कि वह 'अट नहीं रही' — अर्थात् किसी सीमा में नहीं समाती, जो अन्य ऋतुओं में नहीं होता।
6. मादकता: फागुन में एक विशेष मादकता होती है जो मन को बेचैन और आनंदित करती है।
निष्कर्ष: इन सभी विशेषताओं के कारण फागुन अन्य सभी ऋतुओं से अलग और विशेष है।
5इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।Show solution
उत्तर:
निराला के काव्य-शिल्प की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं —
1. मुक्त छंद का प्रयोग:
निराला हिंदी में मुक्त छंद के प्रवर्तक माने जाते हैं। इन कविताओं में भी वे परंपरागत छंद-बंधन से मुक्त हैं, फिर भी कविता में लय और प्रवाह बना रहता है।
2. प्रतीकात्मकता:
'उत्साह' में बादल क्रांति का प्रतीक है। प्रतीकों के माध्यम से गहरे अर्थ व्यक्त करना निराला की विशेषता है।
3. प्रकृति-चित्रण:
दोनों कविताओं में प्रकृति का सजीव और मनोरम चित्रण है। 'अट नहीं रही है' में फागुन का अत्यंत सुंदर वर्णन है।
4. छायावादी शैली:
अंतर्मन के भावों का बाहरी प्रकृति से सामंजस्य, सूक्ष्म भावों की अभिव्यक्ति — ये छायावादी विशेषताएँ दोनों कविताओं में स्पष्ट हैं।
5. नाद-सौंदर्य:
'गरजो', 'घेर-घेर', 'घोर' जैसे शब्दों से ध्वन्यात्मक प्रभाव उत्पन्न होता है।
6. सामाजिक चेतना:
'उत्साह' में निराला केवल प्रकृति-वर्णन नहीं करते, बल्कि सामाजिक क्रांति का आह्वान भी करते हैं।
7. भाषा की सरलता और प्रभावशीलता:
निराला की भाषा सरल, प्रवाहमयी और भावानुकूल है। तत्सम और तद्भव शब्दों का सुंदर समन्वय है।
8. बिंब-योजना:
दोनों कविताओं में दृश्य-बिंब अत्यंत प्रभावशाली हैं — बादल का उमड़ना, फागुन की शोभा का पाट-पाट फैलना आदि।
निष्कर्ष: निराला का काव्य-शिल्प परंपरा और नवीनता का अद्भुत संगम है जो उन्हें हिंदी साहित्य में अद्वितीय स्थान दिलाता है।
रचना और अभिव्यक्ति (अट नहीं रही है)
6होली के आसपास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें लिखिए।Show solution
उत्तर:
होली के आसपास (फाल्गुन-चैत्र माह में) प्रकृति में निम्नलिखित परिवर्तन दिखाई देते हैं —
1. वनस्पति में परिवर्तन:
- पेड़-पौधों पर नए, कोमल और हरे पत्ते आ जाते हैं।
- पलाश (टेसू) के पेड़ लाल-नारंगी फूलों से भर जाते हैं।
- आम के पेड़ों पर बौर (मंजरी) आ जाती है जिससे मधुर सुगंध फैलती है।
- सरसों के पीले फूल खेतों को पीला कर देते हैं।
2. वातावरण में परिवर्तन:
- ठंड कम होने लगती है और मौसम सुहाना हो जाता है।
- हवा में फूलों की सुगंध घुल जाती है।
- वातावरण में एक विशेष मादकता और उल्लास छा जाता है।
3. पशु-पक्षियों में परिवर्तन:
- कोयल की मधुर कूक सुनाई देने लगती है।
- भँवरे फूलों पर मँडराने लगते हैं।
- पक्षी अधिक चहचहाते हैं।
4. रंगों का उत्सव:
- प्रकृति स्वयं रंग-बिरंगी हो जाती है — लाल, पीले, गुलाबी, सफेद फूल चारों ओर खिल उठते हैं।
5. दिन-रात में परिवर्तन:
- दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।
- धूप सुहानी और मनभावन लगती है।
निष्कर्ष: होली के आसपास प्रकृति अपने पूर्ण यौवन पर होती है और चारों ओर सौंदर्य, सुगंध और उल्लास का वातावरण बन जाता है।
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