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Chapter 11 of 15
NCERT Solutions

रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत)

Himachal Pradesh Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत) — Himachal Pradesh Board Class 10 Hindi.

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Exercises

1खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे?Show solution
बालगोबिन भगत गृहस्थ होते हुए भी साधु इसलिए कहलाते थे क्योंकि वे कबीर को ‘साहब’ मानते थे, उन्हीं के गीत गाते थे और उन्हीं के आदेशों पर चलते थे। वे सत्य बोलते, खरा व्यवहार रखते, किसी से झूठ नहीं बोलते, दूसरों की चीज नहीं छूते और बिना पूछे किसी वस्तु का उपयोग नहीं करते। उनके जीवन में निष्कपटता, संयम, नियमपालन, और मानवीय सरोकार थे, इसलिए वे साधु कहलाते थे।

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2भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?Show solution
भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले इसलिए नहीं छोड़ना चाहती थी क्योंकि वह समझती थी कि बुढ़ापे में उनके लिए भोजन कौन बनाएगा, और बीमार पड़ने पर पानी कौन देगा। वह उनका सहारा बनकर रहना चाहती थी। उसका भाव मोह और कर्तव्य से भरा था।

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3भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त कीं?Show solution
बेटे की मृत्यु पर बालगोबिन भगत ने रोकर या विलाप करके अपनी भावनाएँ नहीं व्यक्त कीं, बल्कि गीत गाकर। उन्होंने बेटे के शव के सामने भी वही पुराना स्वर और तल्लीनता बनाए रखी। वे पतोहू को भी रोने के बदले उत्सव मनाने को कहते रहे, क्योंकि उनके अनुसार आत्मा परमात्मा के पास चली गई थी और मृत्यु विरह नहीं, आनंद का अवसर है।

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4भगत के व्यक्तित्व और उनकी वेशभूषा का अपने शब्दों में चित्र प्रस्तुत कीजिए।Show solution
बालगोबिन भगत मँझोले कद के गोरे-चिट्ठे, साठ वर्ष से ऊपर के लगने वाले व्यक्ति थे। उनके बाल सफ़ेद थे, चेहरा सफ़ेद बालों से जगमगाता रहता था। वे बहुत कम कपड़े पहनते—कमर में लंगोटी, सिर पर कबीरपंथियों-सी कनफटी टोपी, जाड़े में ऊपर से काली कमली। माथे पर रामानंदी चंदन और गले में तुलसी की जड़ों की माला रहती थी। बाह्य रूप से वे साधारण लगते थे, पर भीतर से अत्यंत संयमी, श्रद्धालु, सरल और संगीत-प्रेमी थे।

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5बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?Show solution
उनकी दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण इसलिए थी कि वे रोज़ भोर में उठकर नदी-स्नान करते, फिर खँजड़ी लेकर प्रभाती गाते, दिन में खेतीबारी करते और शाम को संझा में भजन-गायन करते। वे मौसम और कठिनाइयों की परवाह किए बिना अपने नियम, साधना और संगीत में लीन रहते थे। इसी कारण लोग उनके जीवन को असाधारण मानते थे।

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6पाठ के आधार पर बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए।Show solution
बालगोबिन भगत का गायन मधुर, तल्लीन, प्रभावशाली और जादुई था। वे कबीर के सीधे-सादे पदों को गाते थे। उनके स्वर में ऐसी शक्ति थी कि खेतों में काम करते लोग, बच्चे, औरतें, हलवाहे—सब प्रभावित हो जाते थे। उनका गाना केवल सुनाई नहीं देता था, बल्कि मन को ऊपर उठाता, लोगों को गुनगुनाने और झूमने पर मजबूर कर देता था।

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7कुछ मार्मिक प्रसंगों के आधार पर यह दिखाई देता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे। पाठ के आधार पर उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए।Show solution
पाठ में कई प्रसंग दिखाते हैं कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे। जैसे—

- वे पुत्र की मृत्यु पर रोए नहीं, बल्कि गीत गाते रहे
- उन्होंने पतोहू का दूसरी शादी करवा दी, जबकि वह उनके साथ रहना चाहती थी।
- वे श्राद्ध, मृत्यु और शोक को सामाजिक रीति से अलग ढंग से देखते थे।
- वे साधु-संन्यास को बाहरी वेशभूषा से नहीं, बल्कि जीवन की पवित्रता से जोड़ते थे।
- वे हर वर्ष गंगा-स्नान भी आडंबर की तरह नहीं, बल्कि संत-समागम और लोक-दर्शन के लिए करते थे।

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8धान की रोपाई के समय समूचे माहौल को भगत की स्वर लहरियाँ किस तरह चमत्कृत कर देती थीं? उस माहौल का शब्द-चित्र प्रस्तुत कीजिए।Show solution
धान की रोपाई के समय समूचा वातावरण जीवन्त और संगीतमय हो उठता था। आसाढ़ की रिमझिम, ठंडी पुरवाई, बादलों से घिरा आकाश, पानी-भरे खेत, बच्चों की उछल-कूद, मेंड़ों पर बैठी औरतें, हल चलाते और रोपनी करते लोग—सब एक ग्रामीण दृश्य रचते थे। उसी बीच बालगोबिन भगत का स्वर हवा में फैलकर मंत्र-मुग्ध कर देता था। बच्चे झूम उठते, औरतें गुनगुनाने लगतीं, हलवाहों के पैर ताल में उठने लगते और रोपाई करने वालों की उँगलियाँ भी संगीत की लय पकड़ लेतीं।

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रचना और अभिव्यक्ति

1पाठ के आधार पर बताएँ कि बालगोबिन भगत की कबीर पर श्रद्धा किन-किन रूपों में प्रकट हुई है?Show solution
बालगोबिन भगत की कबीर पर श्रद्धा इन रूपों में प्रकट हुई है—

- वे कबीर को ‘साहब’ मानते थे।
- वे कबीर के पद गाते थे।
- वे उन्हीं के आदेशों पर चलते थे।
- उनका जीवन सत्य, सरलता और खरा व्यवहार पर आधारित था, जो कबीर की शिक्षाओं के अनुरूप था।
- वे अपनी उपज पहले कबीरपंथी मठ में ले जाकर भेंट करते और फिर प्रसाद रूप में पाकर घर लाते थे।

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2आपकी दृष्टि में भगत की कबीर पर अगाध श्रद्धा के क्या कारण रहे होंगे?
3गाँव का सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश आपाद चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता है?
4“ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे।” क्या ‘साधु’ की पहचान पहनावे के आधार पर की जानी चाहिए? आप किन आधारों पर यह सुनिश्चित करेंगे कि अमुक व्यक्ति ‘साधु’ है?
5मोह और प्रेम में अंतर होता है। भगत के जीवन की किस घटना के आधार पर इस कथन का सच सिद्ध करेंगे?

भाषा-अध्ययन

1इस पाठ में आए कोई दस क्रियाविशेषण छाँटकर लिखिए और उनके भेद भी बताइए।

पाठेतर सक्रियता

1पाठ में ऋतुओं के बहुत ही सुंदर शब्द-चित्र उकेरे गए हैं। बदलते हुए मौसम को दर्शाते हुए चित्र/फोटो का संग्रह कर एक अलबन तैयार कीजिए।
2पाठ में आषाढ़, भादो, माघ आदि में विक्रम संवत कलेंडर के मासों के नाम आए हैं। यह कलेंडर किस माह से आरंभ होता है? महीनों की सूची तैयार कीजिए।
3कार्तिक के आते ही भगत 'प्रभाती' गाया करते थे। प्रभाती प्रातःकाल गाए जाने वाले गीतों को कहते हैं। प्रभाती गायन का संकलन कीजिए और उसकी संगीतमय प्रस्तुति कीजिए।
4इस पाठ में जो ग्राम्य संस्कृति की झलक मिलती है वह आपके आसपास के वातावरण से कैसे भिन्न है?

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Frequently Asked Questions

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Key topics in रामवृक्ष बेनीपुरी (बालगोबिन भगत) include बालगोबिन भगत — व्यक्तित्व के प्रमुख पहलू, बालगोबिन भगत — व्यक्तित्व के आयाम, बालगोबिन भगत - समग्र संकल्पना मानचित्र. These are the concepts Himachal Pradesh Board Class 10 examiners draw on most — study them first, then practise related questions.
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Sources & Official References

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