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Chapter 23 of 38
NCERT Solutions

कवित्त (घनानंद) — NCERT Solutions

Manipur Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for कवित्त (घनानंद), Manipur Board Class 12 Hindi: 9 textbook questions solved step by step. Covers प्रश्न-अभ्यास and योग्यता-विस्तार.

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घनानंद के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाने वाली एक समयरेखा, जिसमें उनके जन्म, दिल्ली दरबार में मीर मुंशी का पद, सुजान से प्रेम, दरबार से निष्कासन, वृंदावन गमन, निंबार्क संप्रदाय में दीक्षा और मृत्
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9 Questions Solved · 2 Sections

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प्रश्न-अभ्यास

1कवि ने 'चाहत चलन ये संदेसो ले सुजान को' क्यों कहा है?Show solution

दिया गया है: घनानंद का कवित्त जिसमें कवि अपनी प्रेमिका सुजान के प्रति अपनी विरह-व्यथा व्यक्त करता है।

आशय एवं उत्तर:
कवि घनानंद अपनी प्रेमिका सुजान की झूठी बातों और आनाकानी से अत्यंत उदास और निराश हो गए हैं। सुजान ने बार-बार मिलने का वादा किया, परंतु कभी नहीं आई। उसकी झूठी बातों पर विश्वास करते-करते कवि थक गया है। अब उसे सुजान के पास स्वयं जाने की इच्छा नहीं रही, क्योंकि वह जानता है कि सुजान उसकी परवाह नहीं करती।

इसीलिए कवि कहता है कि अब उसका मन (हृदय) स्वयं ही सुजान के पास संदेश लेकर चलना चाहता है — अर्थात् कवि का हृदय इतना व्याकुल हो उठा है कि वह स्वयं ही सुजान तक पहुँचकर अपनी विरह-वेदना सुनाना चाहता है। यह पंक्ति कवि की गहरी विरह-पीड़ा और प्रेम की तीव्रता को व्यक्त करती है।

2कवि मौन होकर प्रेमिका के कौन से प्रण पालन को देखना चाहता है?Show solution

दिया गया है: कवि घनानंद और उनकी प्रेमिका सुजान के बीच का प्रेम-संबंध।

उत्तर:
कवि घनानंद अपनी प्रेमिका सुजान से बहुत दिनों से मिलने की प्रतीक्षा कर रहा है। सुजान ने प्रेम का प्रण (वचन) लिया है, परंतु वह उसे निभा नहीं रही। कवि सोचता है कि वह मौन रहकर — अर्थात् बिना कुछ कहे, बिना पुकारे — यह देखेगा कि सुजान अपने प्रेम के प्रण को कितने दिनों तक निभा पाती है।

कवि का भाव यह है कि यदि वह चुप रहेगा और कोई पुकार नहीं करेगा, तो सुजान की 'पुकार-भरी मूकता' (मौन में भी पुकार) स्वयं बोल उठेगी — अर्थात् सुजान का अपना प्रेम उसे विवश करेगा और वह स्वयं बोल उठेगी। इस प्रकार कवि सुजान के प्रेम-प्रण की परीक्षा लेना चाहता है।

3कवि ने किस प्रकार की पुकार से 'कान खोलि है' की बात कही है?Show solution

दिया गया है: घनानंद के कवित्त की अंतिम पंक्तियाँ।

उत्तर:
कवि घनानंद कहते हैं कि उनकी और सुजान के बीच एक प्रकार की 'पैज' (बहस/होड़) लगी हुई है। सुजान बहरेपन का नाटक करती है — वह कवि की पुकार सुनकर भी अनसुना कर देती है। परंतु कवि को विश्वास है कि एक दिन उसकी सच्ची, हृदय से निकली विरह-पुकार इतनी तीव्र और मार्मिक होगी कि सुजान को अपने कान खोलने पड़ेंगे — अर्थात् वह उसकी पुकार को अनसुना नहीं कर पाएगी।

यह पुकार केवल शब्दों की नहीं, बल्कि प्रेम की गहरी विरह-वेदना से उत्पन्न आत्मिक पुकार है। कवि का विश्वास है कि सच्चे प्रेम की यह करुण पुकार अंततः सुजान के हृदय को स्पर्श करेगी और वह उसकी बात सुनने पर विवश होगी।

4घनानंद की रचनाओं की भाषिक विशेषताओं को अपने शब्दों में लिखिए।Show solution

घनानंद की भाषिक विशेषताएँ:

1. ब्रजभाषा का प्रयोग:
घनानंद ने अपनी रचनाओं में परिष्कृत एवं साहित्यिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है। उनकी भाषा अत्यंत मधुर, कोमल और संगीतात्मक है।

2. संगीतात्मकता एवं लय:
उनके कवित्तों में ध्वनि-सौंदर्य और लय की अद्भुत योजना है। शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि पढ़ते समय एक संगीतात्मक प्रवाह उत्पन्न होता है।

3. अनुप्रास अलंकार की बहुलता:
घनानंद की भाषा में अनुप्रास अलंकार का विशेष प्रयोग मिलता है, जैसे — 'गाहि गाहि', 'दैं दैं', 'खरे अरबरनि' आदि।

4. विरोधाभास एवं वक्रोक्ति:
'कूकभरी मूकता' जैसे प्रयोग विरोधाभास अलंकार के सुंदर उदाहरण हैं।

5. भावानुकूल शब्द-चयन:
कवि ने विरह की तीव्रता को व्यक्त करने के लिए ऐसे शब्दों का चयन किया है जो भाव के अनुकूल हैं और पाठक के हृदय को सीधे स्पर्श करते हैं।

6. लाक्षणिकता:
घनानंद की भाषा में लक्षणा शक्ति का प्रयोग अधिक है। शब्दों के सीधे अर्थ से परे गहरे भाव छिपे रहते हैं।

7. रीतिमुक्त काव्य की भाषा:
घनानंद रीतिमुक्त कवि हैं, अतः उनकी भाषा में कृत्रिमता नहीं है। उनका प्रेम स्वाभाविक और हृदय से उत्पन्न है, जो भाषा में भी झलकता है।

5निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों की पहचान कीजिए।
(क) कही कही आवन छबीले मनभावन को, गाहि गाहि राखति ही दैं दैं सनमान को।
(ख) कूक भरी मूकता बुलाय आप बोलि है।
(ग) अब न घिरत घन आनंद निदान को।
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(क) कही कही आवन छबीले मनभावन को, गाहि गाहि राखति ही दैं दैं सनमान को।

अलंकार: पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार (Repetition)

कारण: यहाँ 'कही कही', 'गाहि गाहि' और 'दैं दैं' — इन शब्दों की पुनरावृत्ति हुई है। जब एक ही शब्द दो बार आए और उससे भाव में विशेष बल या जोर उत्पन्न हो, तो वहाँ पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार होता है। इसके साथ ही 'कही कही', 'गाहि गाहि' में अनुप्रास अलंकार भी है क्योंकि एक ही वर्ण की आवृत्ति है।


(ख) कूक भरी मूकता बुलाय आप बोलि है।

अलंकार: विरोधाभास अलंकार

कारण: 'कूकभरी मूकता' में विरोधाभास है — 'कूक' (पुकार/शोर) और 'मूकता' (मौन/चुप्पी) परस्पर विरोधी शब्द हैं, परंतु दोनों एक साथ प्रयुक्त हुए हैं। इससे एक विचित्र किंतु सार्थक भाव उत्पन्न होता है — मौन में भी पुकार भरी है। यही विरोधाभास अलंकार की विशेषता है।

इसके अतिरिक्त 'बुलाय आप बोलि है' में अनुप्रास अलंकार भी है ('ब' वर्ण की आवृत्ति)।


(ग) अब न घिरत घन आनंद निदान को।

अलंकार: श्लेष अलंकार एवं अनुप्रास अलंकार

कारण:

  • श्लेष: 'घन' शब्द के दो अर्थ हैं — (i) बादल और (ii) कवि का नाम 'घनानंद'। एक ही शब्द से दो अर्थ निकलते हैं, अतः यहाँ श्लेष अलंकार है।
  • अनुप्रास: 'घिरत घन' में 'घ' वर्ण की आवृत्ति होने से अनुप्रास अलंकार है।
6निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए—
(क) बहुत दिनान को अवधि आसपास परे / खरे अरबरनि भरे हैं उठि जान को
(ख) मौन हू सौं देखिहाँ कितेक पन पालिहाँ जू / कूकभरी मूकता बुलाय आप बोलिहैं।

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7संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए—
(क) झूठी बतियानि की पत्यानि ते उदास है, कै ……… चाहत चलन ये संदेसो लै सुजान को।
(ख) जान घनआनंद यों मोहिं तुम्हैं पैज परी ……… कबहूँ तौ मेरियै पुकार कान खोलि है।

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योग्यता-विस्तार

1निम्नलिखित कवियों के तीन-तीन कवित एकत्रित कर याद कीजिए— तुलसीदास, रसखान, पद्माकर, सेनापति

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2पठित अंश में से अनुप्रास अलंकार की पहचान कर एक सूची तैयार कीजिए।

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4 more solved questions in कवित्त (घनानंद)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in कवित्त (घनानंद) for Manipur Board Class 12 Hindi?
Key topics in कवित्त (घनानंद) include कवि-परिचय और साहित्यिक स्थान, दोनों कवित्तों का भावार्थ, भाषा, शैली और काव्य-विशेषताएँ, महत्वपूर्ण शब्दार्थ. Study these first, then practise questions on each for the Manipur Board Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for कवित्त (घनानंद) free?
The first 5 of the 9 solutions on this page are open to read. The other 4 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise कवित्त (घनानंद) for the Manipur Board Class 12 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 44 practice questions on कवित्त (घनानंद). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

For serious students

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