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Chapter 24 of 32
NCERT Solutions

डायरी का एक पन्ना

Bihar Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for डायरी का एक पन्ना — Bihar Board Class 10 Hindi.

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A timeline illustrating key events in Sitaram Seksaria's life, including his birth, involvement in the freedom movement, association with prominent leaders, jail terms, role in Azad Hind Fauj, and rec
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27 Questions Solved · 7 Sections

मौखिक

1कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था?Show solution
26 जनवरी 1931 का दिन कलकत्तावासियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इस दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जाना था। मोनुमेंट के नीचे झंडा फहराकर स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जानी थी। यह दिन राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता आंदोलन के प्रति समर्पण का प्रतीक था।
2सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?Show solution
सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था। उन्होंने जुलूस के सारे प्रबंध पहले से ही कर लिए थे।
3विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रिया हुई?Show solution
विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने जैसे ही झंडा गाड़ा, पुलिस ने तुरंत उन्हें पकड़ लिया। इस घटना से लोगों में उत्तेजना फैल गई और आंदोलन और तेज हो गया।
4लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेत देना चाहते थे?Show solution
लोग राष्ट्रीय झंडा फहराकर यह संकेत देना चाहते थे कि वे स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। वे अंग्रेजी शासन को यह बताना चाहते थे कि भारतीय जनता पूर्ण स्वराज्य की माँग करती है और इसके लिए हर बलिदान देने को तैयार है।
5पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों तथा मैदानों को क्यों घेर लिया था?Show solution
पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों तथा मैदानों को इसलिए घेर लिया था ताकि लोग वहाँ एकत्रित होकर सभा न कर सकें और स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम न मना सकें। अंग्रेज सरकार इस आंदोलन को दबाना चाहती थी।

लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर

126 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गईं?Show solution
26 जनवरी 1931 को अमर बनाने के लिए निम्नलिखित तैयारियाँ की गईं:
- केवल प्रचार में दो हजार रुपये खर्च किए गए।
- कलकत्ते के प्रत्येक भाग में झंडे लगाए गए।
- बड़े बाजार के अधिकांश मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहराया गया।
- मोनुमेंट के नीचे झंडा फहराने और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ने का कार्यक्रम तय किया गया।
- स्वयंसेवकों को संगठित किया गया और जुलूस की पूरी व्यवस्था पूर्णोदास को सौंपी गई।
2'आज जो बात थी वह निराली थी'—किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।Show solution
आज का दिन इसलिए निराला था क्योंकि:
- बड़े बाजार के प्रायः सभी मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहरा रहा था।
- स्त्रियाँ भी बड़ी संख्या में जुलूस में शामिल हुईं।
- पुलिस की कड़ी निगरानी और दमन के बावजूद लोग डरे नहीं।
- हजारों लोग मैदान में एकत्रित हुए और खुलेआम अंग्रेज सरकार को चुनौती दी गई।
इन सब बातों से स्पष्ट था कि यह दिन वास्तव में निराला था।
3पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?Show solution
पुलिस कमिश्नर के नोटिस में यह चेतावनी दी गई थी कि 26 जनवरी को कोई जुलूस नहीं निकाला जाए और न ही कोई सभा की जाए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई होगी। इसके विपरीत, कौंसिल के नोटिस में लोगों को मोनुमेंट के नीचे एकत्रित होकर झंडा फहराने और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। एक नोटिस दमन का था तो दूसरा आह्वान का।
4धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?Show solution
धर्मतल्ले के मोड़ पर पुलिस ने जुलूस पर लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने बेरहमी से लोगों को मारा जिससे अनेक लोग घायल हो गए। इस अचानक हुए लाठीचार्ज और पुलिस की कड़ी कार्रवाई के कारण जुलूस टूट गया और लोग तितर-बितर हो गए।
5डॉ. दासगुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख तो कर ही रहे थे, उनके फ़ोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फ़ोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।Show solution
डॉ. दासगुप्ता घायल लोगों के फ़ोटो इसलिए उतरवा रहे थे ताकि:
- पुलिस के अत्याचार और दमन का प्रमाण एकत्रित किया जा सके।
- इन फ़ोटो को समाचार-पत्रों में प्रकाशित करके अंग्रेज सरकार की क्रूरता को जनता के सामने उजागर किया जा सके।
- यह साक्ष्य न्यायालय में या अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जा सके।
इस प्रकार फ़ोटो आंदोलन को और अधिक प्रभावशाली बनाने का साधन थे।

लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर

1सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?Show solution
सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और साहसपूर्ण थी। बड़ी संख्या में महिलाएँ जुलूस में शामिल हुईं। उन्होंने पुलिस की लाठियाँ खाईं, फिर भी पीछे नहीं हटीं। अनेक महिलाएँ गिरफ्तार हुईं और जेल गईं। जानकीदेवी जैसी महिलाओं ने नेतृत्व किया। स्त्रियों ने झंडा उठाकर जुलूस को आगे बढ़ाया। उनकी भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि स्वतंत्रता संग्राम में महिलाएँ पुरुषों से किसी भी प्रकार कम नहीं हैं। उनके साहस और बलिदान ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी।
2जुलूस के लालबाजार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?Show solution
जुलूस के लालबाजार आने पर पुलिस ने सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया। लगभग दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाजार गया और वहाँ सभी गिरफ्तार हो गए। लॉकअप में इतनी भीड़ हो गई कि लोगों को बैठने तक की जगह नहीं थी। बहुत से लोग घायल थे। स्त्रियाँ भी जेल भेजी गईं। इतनी कठिनाइयों के बावजूद लोगों के मनोबल में कोई कमी नहीं आई और वे देश के लिए बलिदान देने को तत्पर रहे।
3'जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।' यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।Show solution
यहाँ अंग्रेज सरकार द्वारा लागू उस कानून को भंग करने की बात कही गई है जिसके अंतर्गत सार्वजनिक सभाएँ करना, जुलूस निकालना और राष्ट्रीय झंडा फहराना प्रतिबंधित था। पुलिस कमिश्नर ने नोटिस जारी करके इन गतिविधियों पर रोक लगाई थी।

पाठ के संदर्भ में यह कानून भंग करना पूरी तरह उचित था क्योंकि:
- यह कानून भारतीयों की स्वतंत्रता की भावना को कुचलने के लिए बनाया गया था।
- अन्यायपूर्ण कानून का विरोध करना नागरिक का अधिकार है।
- महात्मा गांधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन के तहत ऐसे कानूनों को तोड़ना आंदोलन की रणनीति का हिस्सा था।
- इस प्रकार के सामूहिक प्रतिरोध से ही अंग्रेज सरकार पर दबाव बनाया जा सकता था।
अतः यह कानून भंग करना न केवल उचित था, बल्कि देशभक्ति का प्रतीक भी था।
4बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
यह दिन अपूर्व इसलिए था क्योंकि इतने दमन और अत्याचार के बावजूद भारतीयों का मनोबल नहीं टूटा। लोगों ने पुलिस की लाठियाँ खाईं, घायल हुए, जेल गए, फिर भी झंडा उठाने और प्रतिज्ञा लेने से नहीं रुके। स्त्रियों ने भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का एकजुट होकर खुलेआम अंग्रेज सरकार को चुनौती देना अभूतपूर्व था। बंगाल पर जो कलंक था कि वहाँ आंदोलन नहीं हो रहा, वह इस दिन धुल गया। यह दिन त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम का अद्वितीय उदाहरण बन गया, इसीलिए इसे अपूर्व कहा गया।

लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए

1आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया।Show solution
इस कथन का आशय यह है कि स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में बंगाल और कलकत्ता पर यह आरोप लगाया जाता था कि यहाँ के लोग आंदोलन में सक्रिय भागीदारी नहीं कर रहे हैं। परंतु 26 जनवरी 1931 को कलकत्तावासियों ने इस कलंक को मिटा दिया। हजारों लोगों ने पुलिस के दमन की परवाह किए बिना जुलूस में भाग लिया, झंडा फहराया और गिरफ्तारियाँ दीं। स्त्री-पुरुष सभी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अभूतपूर्व जन-जागरण ने सिद्ध कर दिया कि बंगाल और कलकत्ता के लोग भी स्वतंत्रता के लिए उतने ही समर्पित हैं जितने देश के अन्य भागों के लोग।
2खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी।Show solution
इस कथन का आशय यह है कि इससे पहले स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कभी भी इतने खुले और साहसिक तरीके से अंग्रेज सरकार को चुनौती नहीं दी गई थी। कौंसिल ने पुलिस कमिश्नर के प्रतिबंधात्मक नोटिस के जवाब में अपना नोटिस जारी करके लोगों को मोनुमेंट के नीचे एकत्रित होने का आह्वान किया। यह एक प्रकार का खुला युद्ध था जिसमें बिना किसी भय के सरकार की आँखों में आँखें डालकर उसके कानून को तोड़ा गया। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का खुलेआम एकत्रित होना और सरकारी दमन की परवाह न करना — यह साहस और निर्भयता का अभूतपूर्व प्रदर्शन था।

भाषा अध्ययन

1-Iनिम्नलिखित वाक्यों को सरल वाक्यों में बदलिए— (क) दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाजार गया और वहाँ पर गिरफ़्तार हो गया। (ख) मैदान में हजारों आदमियों की भीड़ होने लगी और लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे। (ग) सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लालबाजार लॉकअप में भेज दिया गया।Show solution
(क) सरल वाक्य: दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाजार जाकर गिरफ्तार हो गया।

(ख) सरल वाक्य: मैदान में हजारों आदमियों की भीड़ टोलियाँ बना-बनाकर घूमने लगी।

(ग) सरल वाक्य: सुभाष बाबू को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर लालबाजार लॉकअप भेज दिया गया।
1-II'बड़े भाई साहब' पाठ में से भी दो-दो सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य छाँटकर लिखिए।Show solution
सरल वाक्य:
1. मैं छोटा था, वह बड़े थे।
2. वह हमेशा किताब खोले बैठे रहते थे।

संयुक्त वाक्य:
1. मैं खेलना चाहता था, परंतु भाई साहब ने रोक दिया।
2. वह पढ़ते थे और मुझे भी पढ़ने की सलाह देते थे।

मिश्र वाक्य:
1. जब मैं खेलने जाता था तब भाई साहब डाँटते थे।
2. उन्होंने कहा कि परीक्षा में पास होना जरूरी है।

*(नोट: ये वाक्य 'बड़े भाई साहब' पाठ की भावना के अनुरूप उदाहरण के रूप में दिए गए हैं। विद्यार्थी पाठ से सीधे वाक्य भी छाँट सकते हैं।)*
2निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं को ध्यान से पढ़िए और समझिए कि जाना, रहना और चुकना क्रियाओं का प्रयोग किस प्रकार किया गया है।Show solution
'जाना' क्रिया का प्रयोग (भूतकालिक कर्मवाच्य में):
- 'कई मकान सजाए गए थे' — यहाँ 'गए थे' से पता चलता है कि क्रिया पहले पूरी हो चुकी थी और उसका प्रभाव बना हुआ था।
- 'कलकत्ते के प्रत्येक भाग में झंडे लगाए गए थे' — यहाँ भी 'गए थे' कर्मवाच्य में भूतकाल दर्शाता है।

'रहना' क्रिया का प्रयोग (अपूर्ण वर्तमान/भूत में):
- 'बड़े बाजार के प्रायः मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहरा रहा था' — 'रहा था' से क्रिया की निरंतरता का बोध होता है।
- 'कितनी ही लारियाँ शहर में घुमाई जा रही थीं' — यहाँ भी 'जा रही थीं' से चल रही क्रिया का बोध होता है।
- 'पुलिस भी अपनी पूरी ताकत से शहर में गश्त देकर प्रदर्शन कर रही थी' — 'रही थी' से निरंतर क्रिया का बोध।

'चुकना' क्रिया का प्रयोग (पूर्ण भूतकाल में):
- 'वह प्रबंध कर चुका था' — 'चुका था' से यह स्पष्ट होता है कि क्रिया पूरी तरह संपन्न हो चुकी थी।
- 'पुलिस कमिश्नर का नोटिस निकल चुका था' — यहाँ भी 'चुका था' से क्रिया की पूर्णता का बोध होता है।
3नीचे दिए गए शब्दों की संधि कीजिए— 1. श्रद्धा + आनंद 2. प्रति + एक 3. पुरुष + उत्तम 4. झंडा + उत्सव 5. पुनः + आवृत्ति 6. ज्योतिः + मयShow solution
संधि के नियम लागू करते हुए:

1. श्रद्धा + आनंद = श्रद्धानंद (आ + आ = आ, दीर्घ स्वर संधि)

2. प्रति + एक = प्रत्येक (इ + ए = ये, यण संधि)

3. पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम (अ + उ = ओ, गुण संधि)

4. झंडा + उत्सव = झंडोत्सव (आ + उ = ओ, गुण संधि)

5. पुनः + आवृत्ति = पुनरावृत्ति (विसर्ग संधि — विसर्ग के बाद स्वर आने पर विसर्ग 'र' में बदल जाता है)

6. ज्योतिः + मय = ज्योतिर्मय (विसर्ग संधि — विसर्ग के बाद 'म' आने पर विसर्ग 'र' में बदल जाता है)

योग्यता विस्तार

126 जनवरी को स्वाधीनता दिवस और गणतंत्र दिवस के रूप में मनाने के बारे में जानकारी दी गई है। इसे पढ़िए।Show solution
दिसंबर 1929 में लाहौर में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ जिसके सभापति जवाहरलाल नेहरू थे। इसमें 'पूर्ण स्वराज्य' का प्रस्ताव पास किया गया। 26 जनवरी 1930 को देशवासियों ने पूर्ण स्वतंत्रता के लिए प्रतिज्ञा ली। तब से आजादी मिलने तक प्रतिवर्ष 26 जनवरी को स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिलने के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ और तब से यह दिन गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
2डायरी विधा के बारे में बताइए और अपनी दैनिक जीवन की घटनाओं को डायरी में लिखने का अभ्यास करें।Show solution
डायरी लेखन:
डायरी गद्य की एक महत्वपूर्ण विधा है। इसमें लेखक अपने दैनिक जीवन की घटनाओं, अनुभवों, विचारों और भावनाओं को तिथिवार लिखता है। डायरी लेखन की विशेषताएँ:
- इसमें तिथि, दिन और समय का उल्लेख होता है।
- भाषा सरल, स्वाभाविक और व्यक्तिगत होती है।
- यह आत्मकथात्मक शैली में लिखी जाती है।
- इसमें लेखक की भावनाएँ और विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त होते हैं।

उदाहरण:
15 अगस्त, 20XX
आज स्वतंत्रता दिवस है। विद्यालय में ध्वजारोहण समारोह हुआ। प्रधानाचार्य जी ने देशभक्तों के बलिदान की याद दिलाई। मन में देश के प्रति गर्व और कृतज्ञता का भाव जागा।
3जमना लाल बजाज महात्मा गांधी के पाँचवें पुत्र के रूप में क्यों जाने जाते हैं?Show solution
जमना लाल बजाज एक प्रसिद्ध उद्योगपति और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे महात्मा गांधी के विचारों से इतने प्रभावित थे और उनके इतने समर्पित अनुयायी थे कि उन्होंने गांधी जी को अपना आध्यात्मिक पिता मान लिया था। गांधी जी ने भी उन्हें पुत्रवत स्नेह दिया। इसी कारण उन्हें महात्मा गांधी के पाँचवें पुत्र के रूप में जाना जाता है। (विस्तृत जानकारी के लिए अध्यापक से संपर्क करें।)

परियोजना कार्य

1स्वतंत्रता आंदोलन में निम्नलिखित महिलाओं के योगदान के बारे में संक्षिप्त जानकारी लिखिए— (क) सरोजिनी नायडू (ख) अरुणा आसफ अली (ग) कस्तूरबा गांधीShow solution
(क) सरोजिनी नायडू:
सरोजिनी नायडू को 'भारत कोकिला' कहा जाता है। वे एक महान कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी थीं। उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। वे कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। आजादी के बाद वे उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल बनीं।

(ख) अरुणा आसफ अली:
अरुणा आसफ अली को 'भारत छोड़ो आंदोलन की नायिका' कहा जाता है। 9 अगस्त 1942 को उन्होंने मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में कांग्रेस का झंडा फहराया। वे भूमिगत रहकर आंदोलन चलाती रहीं। उन्हें 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

(ग) कस्तूरबा गांधी:
कस्तूरबा गांधी महात्मा गांधी की पत्नी थीं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत तक हर आंदोलन में गांधी जी का साथ दिया। उन्होंने सत्याग्रह, असहयोग और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। 1942 में गिरफ्तार होने के बाद पुणे की आगा खाँ जेल में 22 फरवरी 1944 को उनका निधन हो गया। वे 'बा' के नाम से प्रसिद्ध थीं।
2इस पाठ के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में कलकत्ता (कोलकाता) के योगदान का चित्र स्पष्ट होता है। आजादी के आंदोलन में आपके क्षेत्र का भी किसी न किसी प्रकार का योगदान रहा होगा। पुस्तकालय, अपने परिचितों या फिर किसी दूसरे स्रोत से इस संबंध में जानकारी हासिल कर लिखिए।Show solution
यह एक परियोजना कार्य है। विद्यार्थी अपने क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान की जानकारी निम्नलिखित स्रोतों से प्राप्त करें:
- स्थानीय पुस्तकालय
- वृद्ध परिचितों या परिवार के बुजुर्गों से
- स्थानीय इतिहास की पुस्तकें
- इंटरनेट

जानकारी में निम्नलिखित बिंदु शामिल करें:
- क्षेत्र के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों के नाम
- उनके द्वारा किए गए आंदोलन
- स्थानीय घटनाएँ जो स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी हों
- क्षेत्र के लोगों के बलिदान की कहानियाँ
3'केवल प्रचार में दो हजार रुपया खर्च किया गया था।' तत्कालीन समय को मद्देनजर रखते हुए अनुमान लगाइए कि प्रचार-प्रसार के लिए किन माध्यमों का उपयोग किया गया होगा?Show solution
1931 के समय में रेडियो, टेलीविजन और इंटरनेट जैसे आधुनिक माध्यम उपलब्ध नहीं थे। अतः प्रचार के लिए निम्नलिखित माध्यमों का उपयोग किया गया होगा:

1. समाचार-पत्र और पत्रिकाएँ — उस समय अनेक राष्ट्रवादी समाचार-पत्र प्रकाशित होते थे जिनमें कार्यक्रम की सूचना दी गई होगी।
2. पर्चे और पोस्टर — हाथ से लिखे या छापे गए पर्चे घर-घर बाँटे गए होंगे।
3. सार्वजनिक घोषणाएँ — मोहल्लों और बाजारों में जाकर मुनादी की गई होगी।
4. सभाएँ और बैठकें — छोटी-छोटी सभाओं में लोगों को जानकारी दी गई होगी।
5. स्वयंसेवक — स्वयंसेवक घर-घर जाकर लोगों को सूचित करते थे।
6. दीवार लेखन — दीवारों पर नारे और सूचनाएँ लिखी जाती थीं।
4आपको अपने विद्यालय में लगने वाले पल्स पोलियो केंद्र की सूचना पूरे मोहल्ले को देनी है। आप इस बात का प्रचार बिना पैसे के कैसे कर पाएँगे? उदाहरण के साथ लिखिए।Show solution
बिना पैसे के पल्स पोलियो केंद्र का प्रचार निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है:

1. मुँह-जबानी प्रचार — अपने मित्रों, पड़ोसियों और परिचितों को व्यक्तिगत रूप से बताएँ।

2. हाथ से लिखे पोस्टर — पुरानी कॉपी के पन्नों पर हाथ से पोस्टर बनाकर मोहल्ले में लगाएँ।
उदाहरण: 'आइए, अपने बच्चों को पोलियो से बचाएँ। पल्स पोलियो केंद्र — दिनांक: _____, स्थान: हमारा विद्यालय'

3. सोशल मीडिया — व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक आदि पर संदेश भेजें।

4. मोहल्ले की बैठक — शाम को मोहल्ले में एकत्रित होकर सूचना दें।

5. विद्यालय के छात्रों के माध्यम से — सभी छात्र अपने-अपने घर जाकर माता-पिता को सूचित करें।

6. स्थानीय मंदिर/मस्जिद/गुरुद्वारे में घोषणा — धार्मिक स्थलों पर घोषणा करवाएँ।

इस प्रकार बिना किसी खर्च के पूरे मोहल्ले में प्रचार किया जा सकता है।

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