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Chapter 31 of 32
NCERT Solutions

पतझर में टूटी पत्तियाँ : (I) गिन्नी का सोना (II) झेन की देन

Bihar Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for पतझर में टूटी पत्तियाँ : (I) गिन्नी का सोना (II) झेन की देन — Bihar Board Class 10 Hindi.

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रवींद्र केलेकर के जीवन की प्रमुख घटनाओं और साहित्यिक योगदान को दर्शाने वाली एक समयरेखा, जिसमें उनके जन्म, गोवा मुक्ति आंदोलन में भागीदारी, गांधीवादी विचारधारा, प्रमुख कृतियाँ और पुरस्कार शामिल हैं।
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30 Questions Solved · 6 Sections

मौखिक प्रश्न (एक-दो पंक्तियों में उत्तर)

I-1शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?Show solution
शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है जिसमें किसी अन्य धातु की मिलावट नहीं होती, जबकि गिन्नी के सोने में थोड़ा ताँबा मिलाया जाता है। ताँबे की मिलावट से सोना अधिक मजबूत और व्यावहारिक उपयोग के योग्य हो जाता है, इसीलिए दोनों अलग होते हैं।
I-2प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?Show solution
जो व्यक्ति आदर्शों को व्यावहारिकता के साथ जोड़कर चलते हैं, अर्थात् जो अपने उच्च आदर्शों में थोड़ी व्यावहारिकता का पुट देकर समाज में सफलतापूर्वक कार्य करते हैं, उन्हें 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' कहते हैं।
I-3पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?Show solution
पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श वह है जिसमें किसी प्रकार की व्यावहारिकता की मिलावट न हो। जैसे शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है, उसी प्रकार शुद्ध आदर्श में स्वार्थ, लोभ या व्यावहारिक सुविधा का कोई स्थान नहीं होता।
II-4लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड' का इंजन लगने की बात क्यों कही है?Show solution
लेखक ने यह बात इसलिए कही क्योंकि जापानी लोग अत्यंत तेज गति से काम करते हैं। वे हर काम में जल्दी करते हैं, दौड़ते हैं, बकते हैं और हमेशा व्यस्त रहते हैं। इस अत्यधिक गति के कारण वे मानसिक तनाव के शिकार हो जाते हैं।
II-5जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?Show solution
जापानी में चाय पीने की विशेष विधि को 'चा-नो-यू' कहते हैं। अंग्रेजी में इसे 'टी-सेरेमनी' कहा जाता है।
II-6जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?Show solution
जापान में चाय पिलाने का स्थान एक छोटी-सी पर्णकुटी जैसा होता है। वहाँ का वातावरण अत्यंत शांत और सादगीपूर्ण होता है। बाहर एक बेढब-सा मिट्टी का बरतन रखा होता है जिसमें पानी भरा रहता है। भीतर दाप्ती (लकड़ी की खोखली दीवार) पर सुंदर चित्रकारी होती है और एक ताज़ा फूल रखा होता है।

लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर

I-1शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?Show solution
शुद्ध सोना अत्यंत मूल्यवान किंतु कोमल होता है, उसी प्रकार शुद्ध आदर्श भी उच्च और मूल्यवान होते हैं परंतु व्यावहारिक जीवन में उन्हें अपनाना कठिन होता है। ताँबा सस्ता किंतु मजबूत होता है, उसी प्रकार व्यावहारिकता जीवन को टिकाऊ और उपयोगी बनाती है। दोनों के मिश्रण से जीवन सुंदर और उपयोगी बनता है।
I-2चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?Show solution
चाजीन ने अँगीठी सुलगाई, उस पर चायदानी रखी, बगल के कमरे से बरतन लाया, तौलिये से बरतन साफ़ किए, चाय तैयार की और प्यालों में भरकर अतिथियों के सामने रख दी। ये सभी क्रियाएँ उसने इतने गरिमापूर्ण और शांत ढंग से कीं मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।
I-3'टी-सेरेमनी' में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?Show solution
'टी-सेरेमनी' में केवल तीन आदमियों को प्रवेश दिया जाता था। इसका कारण यह था कि वहाँ का वातावरण शांत और एकाग्र रहे। अधिक लोगों के आने से शोर होता और उस ध्यानमग्न, शांतिपूर्ण वातावरण का नाश हो जाता। कम लोगों से मन की शांति और एकाग्रता बनी रहती है।
I-4चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?Show solution
चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि उसके दिमाग की रफ़्तार धीमी हो गई है। मन की भागदौड़ और बेचैनी समाप्त हो गई। वह वर्तमान क्षण में जीने लगा। उसे लगा कि जो कुछ था वह केवल वर्तमान था और उसी में जीना सच्चा जीवन है।

लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर

I-1गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।Show solution
गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। वे शुद्ध आदर्शों को व्यावहारिकता के साथ जोड़कर चलते थे। उन्होंने सत्य और अहिंसा जैसे शाश्वत आदर्शों को अपनाया और साथ ही जन-आंदोलन चलाकर उन्हें व्यावहारिक रूप दिया। उनके नेतृत्व में लाखों लोग स्वतंत्रता संग्राम में जुड़े। दांडी मार्च इसका सर्वोत्तम उदाहरण है जहाँ उन्होंने नमक जैसे साधारण विषय को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया। वे 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण थे।
I-2आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।Show solution
सत्य, अहिंसा, करुणा, ईमानदारी, परोपकार और न्याय ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं। ये मूल्य हर युग में, हर समाज में प्रासंगिक रहे हैं। वर्तमान समय में जब चारों ओर भ्रष्टाचार, हिंसा और स्वार्थ का बोलबाला है, तब इन मूल्यों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। सत्य और ईमानदारी से समाज में विश्वास बनता है, करुणा से मानवता जीवित रहती है। ये मूल्य समाज को टिकाऊ और सुखी बनाते हैं।
I-3अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब— (1) शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो। (2) शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।Show solution
(1) एक बार परीक्षा में मेरे मित्र ने नकल करने को कहा, परंतु मैंने ईमानदारी के आदर्श पर चलते हुए मना कर दिया। उस समय मुझे कम अंक मिले और मित्र अधिक अंक ले गया — यह तात्कालिक हानि थी। किंतु दीर्घकाल में मेरी ईमानदारी की प्रतिष्ठा बनी — यह लाभ था।

(2) एक बार मुझे किसी जरूरतमंद की मदद करनी थी किंतु मेरे पास पर्याप्त धन नहीं था। शुद्ध आदर्श था कि सब कुछ दे दूँ, परंतु व्यावहारिकता अपनाते हुए मैंने अपनी सीमा में रहकर सहायता की। इससे न मुझे हानि हुई और न उसे निराशा मिली — दोनों को लाभ हुआ।
I-4'शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना', गांधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।Show solution
गांधीजी के जीवन में शुद्ध सोने (आदर्श) में ताँबे (व्यावहारिकता) की मिलावट थी, न कि ताँबे में सोने की। अर्थात् उनका मूल आधार आदर्श था और उसमें व्यावहारिकता का पुट था। उन्होंने सत्य, अहिंसा जैसे शाश्वत आदर्शों को कभी नहीं छोड़ा, परंतु उन्हें जन-आंदोलनों, सत्याग्रह और रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से व्यावहारिक रूप दिया। इस प्रकार उनके जीवन में आदर्श प्रमुख था और व्यावहारिकता उसकी सेवा में थी।
I-5'गिरगिट' कहानी के संदर्भ में 'आदर्शवादिता' और 'व्यावहारिकता' — इनमें से जीवन में किसका महत्व है?Show solution
'गिरगिट' कहानी में ओचुमेलोव अवसर देखकर अपना व्यवहार बदलता रहता है — यह केवल स्वार्थपूर्ण व्यावहारिकता है, जो निंदनीय है। 'गिन्नी का सोना' पाठ बताता है कि शुद्ध आदर्शवादिता और व्यावहारिकता दोनों का संतुलन आवश्यक है। केवल आदर्शवादिता जीवन को अव्यावहारिक बना देती है और केवल व्यावहारिकता मनुष्य को स्वार्थी। अतः जीवन में आदर्श को प्रमुखता देते हुए उसमें व्यावहारिकता का उचित समावेश करना चाहिए। गांधीजी इसके आदर्श उदाहरण हैं।
II-6लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?Show solution
लेखक के मित्र (डॉक्टर) ने बताया कि जापान में मानसिक रोग के मुख्य कारण हैं — अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, जीवन की तेज रफ़्तार, भूत की चिंता और भविष्य की फ़िक्र में वर्तमान को भूल जाना। लोग न भूतकाल को भूल पाते हैं, न भविष्य की चिंता छोड़ पाते हैं, जिससे मन बेचैन रहता है।

मैं इन कारणों से पूरी तरह सहमत हूँ। आज भारत में भी यही स्थिति है। परीक्षा का तनाव, नौकरी की होड़ और सोशल मीडिया की भागदौड़ ने युवाओं को मानसिक रोगी बना दिया है। वर्तमान में जीना ही मानसिक शांति का सबसे बड़ा उपाय है।
II-7लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।Show solution
लेखक ने यह बात इसलिए कही क्योंकि भूतकाल बीत चुका है और भविष्य अभी आया नहीं है। केवल वर्तमान क्षण ही वास्तविक और सत्य है। जो लोग बीती बातों का पछतावा करते रहते हैं या आने वाले कल की चिंता में डूबे रहते हैं, वे वर्तमान के सुख और शांति को खो देते हैं। टी-सेरेमनी के अनुभव के बाद लेखक को यह अनुभूति हुई कि जब मन वर्तमान में स्थिर होता है तो अपार शांति मिलती है। इसीलिए उन्होंने कहा कि सत्य केवल वर्तमान है।

लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए

I-1समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है तो वह आदर्शवादी लोगों का ही दिया हुआ है।Show solution
इस कथन का आशय यह है कि समाज में जो भी नैतिक मूल्य, सिद्धांत और आदर्श प्रचलित हैं — जैसे सत्य, अहिंसा, करुणा, न्याय — ये सब उन महान आदर्शवादी व्यक्तियों की देन हैं जिन्होंने अपने जीवन में इन्हें अपनाया और समाज को दिशा दी। व्यावहारिक लोग केवल अपना काम चलाते हैं, परंतु आदर्शवादी लोग समाज को स्थायी मूल्य देते हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहते हैं।
I-2जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है तब 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्टों' के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यावहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है।Show solution
इस कथन का आशय यह है कि जो लोग आदर्श और व्यावहारिकता दोनों को साथ लेकर चलते हैं, जब उनकी व्यावहारिक सफलता की प्रशंसा होने लगती है तो वे धीरे-धीरे अपने आदर्शों को भूलने लगते हैं। व्यावहारिकता की प्रशंसा उन्हें आदर्शों से दूर कर देती है। अंततः वे केवल व्यावहारिक रह जाते हैं और उनके आदर्श पृष्ठभूमि में चले जाते हैं। यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है।
II-3हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।Show solution
इस कथन का आशय यह है कि आधुनिक जीवन में मनुष्य इतना व्यस्त और तनावग्रस्त हो गया है कि उसके पास शांति से बैठने का समय नहीं है। वह हर काम जल्दी-जल्दी करता है। बातचीत में भी संयम नहीं रहा — लोग सोच-समझकर नहीं, बल्कि बेतरतीब बोलते हैं। अकेले होने पर भी मन में विचारों का शोर बना रहता है। यह मानसिक अशांति और तनाव का प्रतीक है।
II-4सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवती के सुर गूँज रहे हों।Show solution
इस कथन का आशय यह है कि चाजीन ने चाय बनाने और परोसने की हर क्रिया — अँगीठी सुलगाना, बरतन साफ़ करना, चाय डालना — इतनी शांति, सुंदरता और गरिमा के साथ की कि वह एक कला-प्रदर्शन जैसी लग रही थी। जयजयवंती एक मधुर और गंभीर राग है। लेखक कहना चाहते हैं कि चाजीन की हर मुद्रा में एक संगीतात्मक लय और सौंदर्य था जो मन को शांत और प्रसन्न कर रहा था।

भाषा अध्ययन

1नीचे दिए गए शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए — व्यावहारिकता, आदर्श, सूझबूझ, विलक्षण, शाश्वतShow solution
1. व्यावहारिकता — जीवन में केवल आदर्श नहीं, व्यावहारिकता भी आवश्यक है।
2. आदर्श — गांधीजी हमारे लिए एक आदर्श नेता थे।
3. सूझबूझ — संकट के समय उसकी सूझबूझ ने सबको बचा लिया।
4. विलक्षण — उस बच्चे की विलक्षण प्रतिभा देखकर सभी दंग रह गए।
5. शाश्वत — सत्य और अहिंसा शाश्वत मूल्य हैं जो कभी पुराने नहीं पड़ते।
2नीचे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए — (क) माता-पिता (ख) पाप-पुण्य (ग) सुख-दुख (घ) रात-दिन (ङ) अन्न-जल (च) घर-बाहर (छ) देश-विदेशShow solution
(क) माता-पिता = माता और पिता
(ख) पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
(ग) सुख-दुख = सुख और दुख
(घ) रात-दिन = रात और दिन
(ङ) अन्न-जल = अन्न और जल
(च) घर-बाहर = घर और बाहर
(छ) देश-विदेश = देश और विदेश
3नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए — (क) सफल (ख) विलक्षण (ग) व्यावहारिक (घ) सजग (ङ) आदर्शवादी (च) शुद्धShow solution
(क) सफल → सफलता
(ख) विलक्षण → विलक्षणता
(ग) व्यावहारिक → व्यावहारिकता
(घ) सजग → सजगता
(ङ) आदर्शवादी → आदर्शवादिता
(च) शुद्ध → शुद्धता
4नीचे दिए गए अनेकार्थी शब्दों का वाक्यों में भिन्न-भिन्न अर्थों में प्रयोग कीजिए — उत्तर, कर, अंक, नगShow solution
उत्तर:
1. (दिशा) — हिमालय भारत के उत्तर में स्थित है।
2. (जवाब) — परीक्षा में सभी प्रश्नों के उत्तर लिखो।

कर:
1. (हाथ) — उसने अपने कर से पुष्प अर्पित किए।
2. (टैक्स) — सरकार ने नया कर लगाया।
3. (करना क्रिया) — यह काम तुम कर सकते हो।

अंक:
1. (नंबर/गोद) — माँ ने बच्चे को अपने अंक में ले लिया।
2. (परीक्षा में नंबर) — उसे परीक्षा में पूरे अंक मिले।
3. (नाटक का भाग) — इस नाटक में पाँच अंक हैं।

नग:
1. (पहाड़) — हिमालय एक विशाल नग है।
2. (रत्न/पत्थर) — इस अँगूठी में सुंदर नग जड़ा है।
5नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए।Show solution
(क) अँगीठी सुलगाई और उस पर चायदानी रखी।

(ख) चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी।

(ग) बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया और तौलिये से बरतन साफ़ किए।
6नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए।Show solution
(क) जापानी में चाय पीने की जो विधि है उसे चा-नो-यू कहते हैं।

(ख) बाहर एक बेढब-सा मिट्टी का बरतन था जिसमें पानी भरा हुआ था।

(ग) जब चाय तैयार हुई तब उसने वह प्यालों में भरी और फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।

योग्यता विस्तार एवं परियोजना कार्य

I-1गांधीजी के आदर्शों पर आधारित पुस्तकें पढ़िए।Show solution
यह एक स्व-अध्ययन गतिविधि है। छात्र निम्नलिखित पुस्तकें पढ़ें:
1. सत्य के प्रयोग — महात्मा गांधी द्वारा रचित आत्मकथा जिसमें उन्होंने अपने जीवन के सत्य-प्रयोगों का वर्णन किया है।
2. गिरमिटिया — गिरिराज किशोर द्वारा रचित उपन्यास जो गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका प्रवास पर आधारित है।
इन पुस्तकों से गांधीजी के आदर्शों और व्यावहारिक जीवन की गहरी समझ मिलेगी।
II-2पाठ में वर्णित 'टी-सेरेमनी' का शब्द चित्र प्रस्तुत कीजिए।Show solution
टी-सेरेमनी का शब्द चित्र:

जापान की एक छोटी-सी पर्णकुटी। बाहर एक बेढब-सा मिट्टी का बरतन जिसमें स्वच्छ जल भरा है। भीतर प्रवेश करते ही एक अद्भुत शांति का अनुभव। दाप्ती पर सुंदर चित्रकारी और एक ताज़ा फूल। तीन अतिथि चुपचाप बैठे हैं। चाजीन धीरे-धीरे, गरिमापूर्ण ढंग से अँगीठी सुलगाता है, चायदानी रखता है, बरतन साफ़ करता है। कोई शोर नहीं, कोई जल्दी नहीं। चाय तैयार होती है, प्यालों में भरी जाती है और अतिथियों के सामने रख दी जाती है। हर क्रिया में एक संगीत है, एक लय है। चाय पीते-पीते मन की सारी उलझनें दूर हो जाती हैं और केवल वर्तमान क्षण शेष रह जाता है।
P-1भारत के नक्शे पर वे स्थान अंकित कीजिए जहाँ चाय की पैदावार होती है।Show solution
भारत में चाय उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र:

1. असम — भारत का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य। यहाँ की चाय मजबूत और गहरे रंग की होती है।
2. दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) — विश्व प्रसिद्ध दार्जिलिंग चाय यहाँ उगती है। इसकी सुगंध अनोखी होती है।
3. नीलगिरि (तमिलनाडु) — दक्षिण भारत की प्रमुख चाय पट्टी। यहाँ की चाय सुगंधित होती है।
4. केरल — मुन्नार क्षेत्र में उत्तम चाय उगाई जाती है।
5. हिमाचल प्रदेश — कांगड़ा घाटी की चाय प्रसिद्ध है।
6. उत्तराखंड — कुमाऊँ क्षेत्र में भी चाय उगाई जाती है।

भौगोलिक विशेषताएँ: चाय के लिए उष्ण-आर्द्र जलवायु, पहाड़ी ढलान, अच्छी वर्षा और अम्लीय मिट्टी आवश्यक है। छात्र भारत के मानचित्र पर इन स्थानों को चिह्नित करें और परियोजना पुस्तिका में विस्तार से लिखें।

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in पतझर में टूटी पत्तियाँ : (I) गिन्नी का सोना (II) झेन की देन for Bihar Board Class 10 Hindi?
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Sources & Official References

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