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Chapter 8 of 32
NCERT Solutions

पद

Haryana Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for पद — Haryana Board Class 10 Hindi.

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मीराबाई के जीवन की प्रमुख घटनाओं को दर्शाने वाली एक समयरेखा, जिसमें उनका जन्म, विवाह, परिवार के सदस्यों का देहांत, और वृंदावन प्रस्थान शामिल है।
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13 Questions Solved · 5 Sections

प्रश्न-अभ्यास — (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?Show solution
उत्तर:

पहले पद में मीराबाई ने श्रीकृष्ण (हरि) से अपनी पीड़ा हरने की विनती अत्यंत विनम्र और भक्तिपूर्ण भाव से की है। वे कहती हैं — "हरि आप हरो जन री भीर" अर्थात् हे हरि! आप स्वयं अपने भक्तों की पीड़ा दूर करें।

मीरा अपनी विनती को बलवती बनाने के लिए श्रीकृष्ण के पूर्व के उपकारों का स्मरण कराती हैं:
- द्रौपदी की लाज: जब दु:शासन ने द्रौपदी का चीरहरण करना चाहा, तब श्रीकृष्ण ने उनका चीर बढ़ाकर उनकी लाज रखी।
- प्रह्लाद की रक्षा: भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह (नरहरि) का रूप धारण किया।
- गजराज की रक्षा: डूबते हुए हाथी (गजराज) को मगरमच्छ के मुँह से बचाया।

इन उदाहरणों के माध्यम से मीरा कहती हैं कि जैसे आपने अपने भक्तों की पीड़ा हरी है, वैसे ही मेरी (दासी मीरा की) पीड़ा भी हरें। इस प्रकार उन्होंने भक्ति, विनम्रता और ऐतिहासिक प्रसंगों के सहारे अपनी विनती की है।
2दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।Show solution
उत्तर:

दूसरे पद में मीराबाई श्रीकृष्ण (श्याम) की चाकरी (सेवा) इसलिए करना चाहती हैं क्योंकि उन्हें इस चाकरी से तीन अमूल्य लाभ प्राप्त होंगे:

1. दर्शन की प्राप्ति: चाकरी करने से उन्हें श्रीकृष्ण के दर्शन निकट से होंगे। वे उनके रूप-सौंदर्य को निहार सकेंगी।

2. स्मरण रूपी खर्ची: चाकरी करते हुए वे निरंतर श्रीकृष्ण का स्मरण (सुमरण) करती रहेंगी, जो उनके जीवन की पूँजी (खर्ची) बन जाएगी।

3. भाव-भक्ति रूपी जागीर: इस सेवा से उन्हें भाव और भक्ति की जागीर (साम्राज्य) मिलेगी, जो सबसे बड़ी संपत्ति है।

इस प्रकार मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी को साधारण नौकरी नहीं, बल्कि भक्ति, दर्शन और स्मरण का माध्यम मानती हैं। वे वृंदावन की कुंजगलियों में विचरण करना चाहती हैं और श्रीकृष्ण के प्रेम में पूर्णतः समर्पित हो जाना चाहती हैं।
3मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?Show solution
उत्तर:

मीराबाई ने दूसरे पद में श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया है:

- पीतांबर: श्रीकृष्ण पीले वस्त्र (पीतांबर) धारण करते हैं जो उनके श्याम वर्ण पर अत्यंत सुंदर लगते हैं।
- बैजंती माला: उनके गले में बैजंती के फूलों की माला सुशोभित होती है।
- मोर-मुकुट: उनके सिर पर मोर के पंखों का मुकुट है जो उनकी शोभा को और बढ़ाता है।
- कुसुम्बी रंग: मीरा कुसुम्बी (केसरिया/लाल) रंग की साड़ी पहनकर श्रीकृष्ण के साथ रहना चाहती हैं।
- यमुना तट पर लीला: वे श्रीकृष्ण को यमुना के तट पर विविध लीलाएँ करते हुए देखना चाहती हैं।

इस प्रकार मीरा ने श्रीकृष्ण के वस्त्र, आभूषण, मुकुट और लीला-स्थल का सजीव एवं भावपूर्ण चित्रण किया है।
4मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।Show solution
उत्तर:

मीराबाई की भाषा शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

1. राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा: मीरा की भाषा मुख्यतः ब्रजभाषा है, परंतु उसमें राजस्थानी भाषा के शब्दों का भी प्रयोग हुआ है; जैसे — 'री' (की), 'भीर' (पीड़ा), 'धर्यो' (धारण किया), 'राख्यो' (रखा), 'पास्यूँ' (पाऊँगी) आदि।

2. सरलता और सहजता: भाषा अत्यंत सरल, सहज और बोधगम्य है। कठिन शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया।

3. संगीतात्मकता: पद गेय हैं और इनमें लय एवं तुक का सुंदर निर्वाह हुआ है।

4. भक्ति रस की प्रधानता: पूरी भाषा में भक्ति और प्रेम का भाव ओत-प्रोत है।

5. अलंकारों का प्रयोग: अनुप्रास, उपमा और दृष्टांत अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग हुआ है।

6. विनय और समर्पण का स्वर: भाषा में दास्य भाव और आत्म-समर्पण की भावना स्पष्ट झलकती है।
5वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या कार्य करने को तैयार हैं?Show solution
उत्तर:

मीराबाई श्रीकृष्ण को पाने के लिए निम्नलिखित कार्य करने को तैयार हैं:

1. चाकरी करना: वे श्रीकृष्ण की दासी बनकर उनकी सेवा करना चाहती हैं।

2. बाग लगाना: वे श्रीकृष्ण के लिए बाग (बगीचा) लगाने को तैयार हैं ताकि वे उसमें विचरण करें और उन्हें दर्शन मिलें।

3. कुसुम्बी साड़ी पहनना: वे कुसुम्बी रंग की साड़ी पहनकर श्रीकृष्ण के साथ रहना चाहती हैं।

4. वृंदावन में रहना: वे वृंदावन की कुंजगलियों में श्रीकृष्ण के साथ विचरण करना चाहती हैं।

5. यमुना तट पर दर्शन करना: वे यमुना के तट पर श्रीकृष्ण की लीलाओं का दर्शन करना चाहती हैं।

6. निरंतर स्मरण करना: वे हर पल श्रीकृष्ण का स्मरण करती रहना चाहती हैं।

संक्षेप में, मीरा अपना सर्वस्व — तन, मन, धन — श्रीकृष्ण को अर्पित करने को तैयार हैं।

प्रश्न-अभ्यास — (ख) निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए

1हरि आप हरो जन री भीर।
द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धर्यो आप सरीर।
Show solution
काव्य-सौंदर्य:

भाव-सौंदर्य:
इन पंक्तियों में मीराबाई ने श्रीकृष्ण से अपनी पीड़ा हरने की विनती की है। वे श्रीकृष्ण के पूर्व के उपकारों का स्मरण कराकर उनसे सहायता माँगती हैं। द्रौपदी के चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने चीर बढ़ाकर उनकी लाज रखी और भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह रूप धारण किया — इन प्रसंगों का उल्लेख भक्त की श्रद्धा और विश्वास को व्यक्त करता है।

शिल्प-सौंदर्य:
- भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा — 'री', 'भीर', 'धर्यो' जैसे राजस्थानी शब्द।
- अलंकार: 'हरि हरो' में अनुप्रास अलंकार है। 'आप बढ़ायो चीर' और 'धर्यो आप सरीर' में दृष्टांत अलंकार है।
- रस: भक्ति रस एवं करुण रस का सुंदर समन्वय।
- शैली: विनय शैली — भक्त का ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण।
- तुक: 'भीर', 'चीर', 'सरीर' में तुकबंदी है जो संगीतात्मकता प्रदान करती है।
2बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।
Show solution
काव्य-सौंदर्य:

भाव-सौंदर्य:
इन पंक्तियों में मीरा ने गजराज (हाथी) के उद्धार का प्रसंग याद दिलाया है। जब गजराज मगरमच्छ के मुँह में फँसकर डूब रहा था, तब श्रीकृष्ण ने उसे बचाया और उसकी पीड़ा काटी। इसी प्रकार मीरा अपने आप को 'दासी' कहकर श्रीकृष्ण से अपनी पीड़ा हरने की प्रार्थना करती हैं।

शिल्प-सौंदर्य:
- भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा — 'राख्यो', 'म्हारी', 'भीर' जैसे शब्द।
- अलंकार: 'काटी कुण्जर' में अनुप्रास अलंकार। 'गजराज' और 'कुण्जर' दोनों हाथी के पर्यायवाची हैं — पर्यायोक्ति
- दास्य भाव: 'दासी मीराँ' में दास्य भक्ति का सुंदर उदाहरण है।
- रस: भक्ति रस एवं करुण रस।
- तुक: 'पीर' और 'भीर' में तुकबंदी — संगीतात्मकता।
- संबोधन: 'लाल गिरधर' — श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और आत्मीयता का भाव।
3चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।
Show solution
काव्य-सौंदर्य:

भाव-सौंदर्य:
इन पंक्तियों में मीरा ने श्रीकृष्ण की चाकरी (सेवा) के तीन लाभ बताए हैं — दर्शन, स्मरण (खर्ची) और भाव-भक्ति (जागीर)। वे सांसारिक नौकरी की भाषा में आध्यात्मिक लाभ की बात करती हैं। यह अत्यंत मौलिक और सुंदर कल्पना है।

शिल्प-सौंदर्य:
- भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा — 'पास्यूँ', 'सरसी', 'तीनूं बाताँ' जैसे राजस्थानी शब्द।
- अलंकार: 'दरसण', 'सुमरण', 'जागीरी' में अनुप्रास अलंकार। 'खर्ची' और 'जागीरी' में रूपक अलंकार — स्मरण को खर्ची और भक्ति को जागीर कहा गया है।
- रस: भक्ति रस की प्रधानता।
- बिम्ब: सांसारिक चाकरी का बिम्ब लेकर आध्यात्मिक भाव व्यक्त किया गया है — अत्यंत मौलिक।
- तुक: 'खरची' और 'सरसी' में तुकबंदी।
- संगीतात्मकता: पद गेय है और लय का सुंदर निर्वाह हुआ है।

भाषा अध्ययन

1उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए —
चीर, धर्यो, कुण्जर, बिन्दरावन, रहस्यूँ, राखो, बूढ़तो, लगास्यूँ, घणा, सरसी, हिवड़ा, कुसुम्बी
Show solution
उत्तर:

निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप इस प्रकार हैं:

| पाठ में प्रयुक्त शब्द | प्रचलित रूप |
|---|---|
| चीर | वस्त्र / साड़ी |
| धर्यो | धारण किया |
| कुण्जर | हाथी |
| बिन्दरावन | वृंदावन |
| रहस्यूँ | रहूँगी |
| राखो | रखो / रक्षा करो |
| बूढ़तो | डूबता हुआ |
| लगास्यूँ | लगाऊँगी |
| घणा | बहुत / अधिक |
| सरसी | सरस होंगी / पूरी होंगी |
| हिवड़ा | हृदय |
| कुसुम्बी | केसरिया / लाल रंग की |

योग्यता विस्तार

1मीरा के अन्य पदों को याद करके कक्षा में सुनाइए।Show solution
उत्तर:

यह एक क्रियाकलाप (Activity) आधारित प्रश्न है। विद्यार्थी मीराबाई के निम्नलिखित प्रसिद्ध पदों को याद करके कक्षा में सुना सकते हैं:

1. "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो" — इस पद में मीरा ने राम-नाम रूपी अमूल्य धन पाने की खुशी व्यक्त की है।

2. "मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई" — इस पद में मीरा ने श्रीकृष्ण को ही अपना सर्वस्व बताया है।

3. "जागो बंसीवारे ललना" — इस पद में मीरा ने श्रीकृष्ण को जगाने का भाव व्यक्त किया है।

*नोट: विद्यार्थी इन पदों को याद करके भावपूर्ण ढंग से कक्षा में प्रस्तुत करें।*
2यदि आपको मीरा के पदों के कैसेट मिल सकें तो अवसर मिलने पर उन्हें सुनिए।Show solution
उत्तर:

यह एक श्रवण-कौशल (Listening Skill) आधारित क्रियाकलाप है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे:

1. मीराबाई के पदों को विभिन्न गायकों — जैसे लता मंगेशकर, वाणी जयराम आदि — द्वारा गाए गए रूप में सुनें।
2. आजकल यूट्यूब और अन्य डिजिटल माध्यमों पर भी मीरा के पद उपलब्ध हैं, उन्हें सुनें।
3. पदों की धुन और भाव को समझने का प्रयास करें।

*नोट: यह एक व्यावहारिक गतिविधि है जिसे विद्यार्थी स्वयं करें।*

परियोजना

1मीरा के पदों का संकलन करके उन पदों को चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।Show solution
उत्तर:

यह एक परियोजना कार्य (Project Work) है। विद्यार्थी निम्न प्रकार से इसे पूरा कर सकते हैं:

1. मीराबाई के प्रसिद्ध पदों का संकलन करें — जैसे 'पायो जी मैंने राम रतन धन पायो', 'मेरे तो गिरधर गोपाल', 'हरि आप हरो जन री भीर' आदि।
2. इन पदों को सुंदर अक्षरों में रंगीन चार्ट पेपर पर लिखें।
3. चार्ट को सजाएँ और कक्षा की भित्ति पत्रिका (Wall Magazine) पर लगाएँ।
4. यदि संभव हो तो मीराबाई का चित्र भी लगाएँ।

*नोट: यह एक सृजनात्मक गतिविधि है जिसे विद्यार्थी समूह में मिलकर करें।*
2पहले हमारे यहाँ दस अवतार माने जाते थे। विष्णु के अवतार राम और कृष्ण प्रमुख हैं। अन्य अवतारों के बारे में जानकारी प्राप्त करके एक चार्ट बनाइए।Show solution
उत्तर:

विष्णु के दस अवतार (दशावतार) निम्नलिखित हैं:

| क्रम | अवतार का नाम | विशेषता |
|---|---|---|
| 1 | मत्स्य | मछली का रूप — वेदों की रक्षा |
| 2 | कूर्म | कछुए का रूप — समुद्र मंथन में सहायता |
| 3 | वराह | सूअर का रूप — पृथ्वी को हिरण्याक्ष से बचाया |
| 4 | नरसिंह | आधा मानव-आधा सिंह — प्रह्लाद की रक्षा |
| 5 | वामन | बौने ब्राह्मण का रूप — बलि से तीन पग भूमि |
| 6 | परशुराम | ब्राह्मण योद्धा — क्षत्रियों का नाश |
| 7 | राम | मर्यादा पुरुषोत्तम — रावण वध |
| 8 | कृष्ण | योगेश्वर — महाभारत, गीता उपदेश |
| 9 | बुद्ध | ज्ञान और अहिंसा के प्रतीक |
| 10 | कल्कि | भविष्य का अवतार — कलियुग के अंत में |

*नोट: विद्यार्थी इस जानकारी को रंगीन चार्ट पर सुंदर ढंग से लिखकर प्रस्तुत करें।*

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Frequently Asked Questions

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