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Chapter 12 of 32
NCERT Solutions

मनुष्यता

Haryana Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for मनुष्यता — Haryana Board Class 10 Hindi.

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मैथिलीशरण गुप्त के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, जन्म, शिक्षा, राष्ट्रकवि के रूप में पहचान और प्रमुख कृतियों को दर्शाने वाली एक समयरेखा।
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15 Questions Solved · 4 Sections

प्रश्न-अभ्यास — (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है?Show solution
दिया गया: कविता 'मनुष्यता' — कवि मैथिलीशरण गुप्त।

उत्तर:
कवि ने उस मृत्यु को सुमृत्यु (अच्छी मृत्यु) कहा है जो मरने के बाद भी व्यक्ति को अमर बना दे। अर्थात् जो व्यक्ति अपने जीवन में परोपकार के ऐसे कार्य करे कि उसके जाने के बाद भी लोग उसे याद करें, उसकी कीर्ति युगों-युगों तक गाई जाए — वही मृत्यु सुमृत्यु है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति केवल अपने लिए जीता है और मरने के बाद कोई उसे याद नहीं करता, उसकी मृत्यु व्यर्थ है। कवि के शब्दों में — *'मरो परंतु यों मरो कि याद जो करे सभी।'*
2उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है?Show solution
दिया गया: कविता 'मनुष्यता' — कवि मैथिलीशरण गुप्त।

उत्तर:
उदार व्यक्ति की पहचान यह है कि वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समस्त मानव-जाति के लिए जीता है। उसका हृदय इतना विशाल होता है कि वह सारी पृथ्वी को अपना परिवार मानता है। उसकी कीर्ति दूर-दूर तक फैलती है और उसे देखकर लोग कृतार्थ (धन्य) हो जाते हैं। कवि कहते हैं — *'उदार जिनका विश्व है, उन्हीं का नाम है।'* अर्थात् जो व्यक्ति विश्व-कल्याण की भावना रखता है, वही सच्चा उदार है और उसी का नाम संसार में अमर रहता है।
3कवि ने दधीचि, कर्ण आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर 'मनुष्यता' के लिए क्या संदेश दिया है?Show solution
दिया गया: कविता 'मनुष्यता' — कवि मैथिलीशरण गुप्त।

उत्तर:
कवि ने निम्नलिखित महान व्यक्तियों के उदाहरण दिए हैं:

- रंतिदेव — जो स्वयं भूखे रहकर भी क्षुधार्त (भूखे) अतिथि को अपना भोजन दे देते थे।
- दधीचि — जिन्होंने देवताओं की रक्षा के लिए अपनी हड्डियाँ (अस्थिजाल) दान कर दीं, जिनसे इंद्र का वज्र बना।
- उशीनर (राजा शिबि) — जिन्होंने एक कबूतर की प्राण-रक्षा के लिए अपने शरीर का मांस काटकर दे दिया।
- कर्ण — जो अपने कवच-कुंडल तक दान कर देते थे।

इन उदाहरणों के माध्यम से कवि ने मनुष्यता के लिए यह संदेश दिया है कि सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के कल्याण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दे। परोपकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है।
4कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?Show solution
दिया गया: कविता 'मनुष्यता' — कवि मैथिलीशरण गुप्त।

उत्तर:
कवि ने निम्नलिखित पंक्तियों में गर्व-रहित जीवन जीने की बात कही है:

*'रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,*
*सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।*
*अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,*
*दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।'*

इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि धन-संपत्ति के मद में अंधे होकर कभी अहंकार मत करो। यह सोचकर कि तुम्हारे साथ कोई है, घमंड मत करो, क्योंकि इस संसार में कोई भी अनाथ नहीं है — ईश्वर (त्रिलोकनाथ) सबके साथ हैं।
5'मनुष्य मात्र बंधु है' से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया: कविता 'मनुष्यता' — कवि मैथिलीशरण गुप्त।

उत्तर:
'मनुष्य मात्र बंधु है' का अर्थ है — प्रत्येक मनुष्य एक-दूसरे का भाई है। कवि का मानना है कि सभी मनुष्य एक ही परमात्मा की संतान हैं, इसलिए जाति, धर्म, देश या भाषा के आधार पर भेदभाव करना उचित नहीं है। जब हम यह समझ लें कि सारी मानव-जाति एक ही परिवार है, तो हम एक-दूसरे की सहायता करेंगे, परस्पर प्रेम और सहयोग से रहेंगे। यही भावना 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना है। इस भावना को अपनाने से ही सच्ची मनुष्यता का विकास होता है।
6कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?Show solution
दिया गया: कविता 'मनुष्यता' — कवि मैथिलीशरण गुप्त।

उत्तर:
कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा इसलिए दी है क्योंकि:

1. एकता में शक्ति है — जब सभी मनुष्य मिलकर चलते हैं तो विपत्तियाँ और बाधाएँ आसानी से दूर हो जाती हैं।
2. परस्परावलंब — एक-दूसरे का सहारा लेकर चलने से जीवन-पथ सरल हो जाता है।
3. भिन्नता हानिकारक है — आपसी मतभेद और भेदभाव समाज को कमज़ोर बनाते हैं।
4. मानव-बंधुत्व — सभी मनुष्य एक ही ईश्वर की संतान हैं, अतः मिलकर चलना ही उचित है।

कवि चाहते हैं कि सभी लोग अपने मतभेद भुलाकर एक ही लक्ष्य की ओर सहर्ष बढ़ें।
7व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए।Show solution
दिया गया: कविता 'मनुष्यता' — कवि मैथिलीशरण गुप्त।

उत्तर:
इस कविता के आधार पर व्यक्ति को निम्नलिखित प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए:

1. परोपकारी जीवन — केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी जीना चाहिए।
2. गर्व-रहित जीवन — धन-संपत्ति या शक्ति का अहंकार नहीं करना चाहिए।
3. उदार जीवन — विश्व को अपना परिवार मानकर सबके प्रति दयालु रहना चाहिए।
4. एकता का जीवन — सभी मनुष्यों को बंधु मानकर मिल-जुलकर रहना चाहिए।
5. कीर्तिमय जीवन — ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे मृत्यु के बाद भी नाम अमर रहे।
6. सहानुभूतिपूर्ण जीवन — दूसरों के दुख में सहभागी बनना चाहिए।

संक्षेप में, व्यक्ति को मानवता, परोपकार और बंधुत्व की भावना से युक्त जीवन जीना चाहिए।
8'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?Show solution
दिया गया: कविता 'मनुष्यता' — कवि मैथिलीशरण गुप्त।

उत्तर:
'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि मैथिलीशरण गुप्त निम्नलिखित मुख्य संदेश देना चाहते हैं:

1. परोपकार ही सच्ची मनुष्यता है — जो व्यक्ति दूसरों के लिए जीता और मरता है, वही सच्चा मनुष्य है।
2. अमर कीर्ति का महत्त्व — ऐसे कार्य करो जिससे मृत्यु के बाद भी तुम्हारा नाम अमर रहे।
3. विश्व-बंधुत्व की भावना — सभी मनुष्य एक-दूसरे के भाई हैं, भेदभाव छोड़ो।
4. अहंकार का त्याग — धन, बल या पद का घमंड नहीं करना चाहिए।
5. एकता और सहयोग — मिलकर चलने से ही जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
6. सहानुभूति और दया — दूसरों के प्रति करुणा और सहानुभूति रखना मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है।

कुल मिलाकर, कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि मनुष्य को पशु-प्रवृत्ति छोड़कर मानवीय गुणों को अपनाना चाहिए — तभी वह सच्चे अर्थों में मनुष्य कहलाने का अधिकारी है।

प्रश्न-अभ्यास — (ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए

1सहानुभूति चाहिए, महाविभूति है यही;
वशीकृता सदैव है बनी हुई स्वयं मही।
विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा,
विनीत लोकवर्ग क्या न सामने झुका रहा?
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प्रसंग: ये पंक्तियाँ कवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'मनुष्यता' से ली गई हैं।

भाव स्पष्टीकरण:

कवि कहते हैं कि मनुष्य के पास सबसे बड़ी संपत्ति (महाविभूति) सहानुभूति है। जो व्यक्ति दूसरों के दुख में सहभागी होता है और उनके प्रति करुणा रखता है, वह इस पूरी पृथ्वी को अपने वश में कर लेता है। पृथ्वी सदा से ऐसे ही उदार और दयालु व्यक्तियों के सामने नतमस्तक रही है।

इसका प्रमाण महात्मा बुद्ध हैं — उन्होंने तत्कालीन समाज की रूढ़िवादी मान्यताओं और परंपराओं का विरोध किया, परंतु उनके हृदय में जो दया और करुणा का प्रवाह था, उसने सारे विरोध को बहा दिया। उनकी करुणा के सामने समस्त संसार विनम्रतापूर्वक झुक गया।

सार: सहानुभूति और दया ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है — इसी से संसार को जीता जा सकता है।
2रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,
सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।
अनाथ कौन है यहाँ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,
दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।
Show solution
प्रसंग: ये पंक्तियाँ कवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'मनुष्यता' से ली गई हैं।

भाव स्पष्टीकरण:

कवि मनुष्य को सचेत करते हुए कहते हैं — कभी भी तुच्छ धन-संपत्ति के मद में अंधे होकर अहंकार मत करो। यह सोचकर कि तुम्हारे पास धन है, परिवार है, सहारा है — घमंड मत करो।

कवि आगे कहते हैं कि इस संसार में कोई भी अनाथ नहीं है, क्योंकि तीनों लोकों के स्वामी (त्रिलोकनाथ) ईश्वर सबके साथ हैं। वे दयालु और दीनबंधु हैं — उनके हाथ इतने विशाल हैं कि वे सबकी रक्षा कर सकते हैं। अतः न तो अपनी संपत्ति पर घमंड करो और न ही किसी को अनाथ या असहाय समझो।

सार: धन का अहंकार व्यर्थ है। ईश्वर सबका रक्षक है, इसलिए विनम्र रहो और गर्व का त्याग करो।
3चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।
Show solution
प्रसंग: ये पंक्तियाँ कवि मैथिलीशरण गुप्त की कविता 'मनुष्यता' से ली गई हैं।

भाव स्पष्टीकरण:

कवि मनुष्यों को प्रेरणा देते हुए कहते हैं — अपने इच्छित (अभीष्ट) मार्ग पर प्रसन्नतापूर्वक आगे बढ़ते चलो। जो भी विपत्तियाँ और बाधाएँ (विघ्न) रास्ते में आएँ, उन्हें हँसते-खेलते हुए दूर करते चलो, घबराओ मत।

साथ ही कवि यह भी कहते हैं कि आपसी मेल-मिलाप कभी कम नहीं होना चाहिए और परस्पर भिन्नता (मतभेद) कभी नहीं बढ़नी चाहिए। जो मार्ग तर्क से परे (अतर्क) — अर्थात् मानवता और प्रेम का मार्ग — है, उस पर सभी सावधान और सतर्क यात्री बनकर चलें।

सार: जीवन-पथ पर प्रसन्नतापूर्वक, एकजुट होकर और सावधानी से चलो। बाधाओं से मत डरो और आपसी एकता बनाए रखो।

योग्यता विस्तार

1अपने अध्यापक की सहायता से रंतिदेव, दधीचि, कर्ण आदि पौराणिक पात्रों के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।Show solution
संकेत एवं जानकारी:

रंतिदेव: ये एक परम दानी राजा थे। कहा जाता है कि ये स्वयं कई दिनों से भूखे थे, परंतु जब एक भूखा अतिथि आया तो उन्होंने अपना सारा भोजन उसे दे दिया। उनकी दानशीलता और परोपकार की भावना अद्वितीय थी।

दधीचि: ये एक महान ऋषि थे। जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध में देवता कमज़ोर पड़ने लगे, तब इंद्र ने दधीचि से सहायता माँगी। दधीचि ने देवताओं की रक्षा के लिए अपने प्राण त्याग दिए और अपनी हड्डियाँ दान कर दीं। उन्हीं हड्डियों से विश्वकर्मा ने इंद्र का वज्र बनाया, जिससे वृत्रासुर का वध हुआ।

कर्ण: ये महाभारत के महान पात्र हैं। ये कुंती के पुत्र और सूर्यदेव के अंश थे। ये अपने कवच और कुंडल लेकर जन्मे थे जो उन्हें अजेय बनाते थे। इंद्र ने ब्राह्मण वेश में आकर उनसे वे कवच-कुंडल माँग लिए और कर्ण ने बिना संकोच के दे दिए। कर्ण अपने दान के लिए सदा प्रसिद्ध रहे।

*(विद्यार्थी अपने अध्यापक की सहायता से इन पात्रों के बारे में और अधिक विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।)*
2'परोपकार' विषय पर आधारित दो कविताओं और दो दोहों का संकलन कीजिए। उन्हें कक्षा में सुनाइए।Show solution
परोपकार पर आधारित कविताएँ एवं दोहे:

कविता 1 — (सुमित्रानंदन पंत)
*'वह जन्म व्यर्थ है जो जग में,*
*कुछ काम न आए।*
*जो दूसरों के काम आए,*
*वही जीवन सच्चा पाए।'*

कविता 2 — (लोकप्रिय)
*'परहित सरिस धर्म नहिं भाई,*
*पर पीड़ा सम नहिं अधमाई।*
*जो जन दूजे के काम आवे,*
*वही सच्चा मानव कहलावे।'*

दोहा 1 — (रहीम)
तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियत न पान।\text{तरुवर फल नहिं खात है, सरवर पियत न पान।}
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।\text{कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।}
*(वृक्ष अपना फल स्वयं नहीं खाते, सरोवर अपना जल स्वयं नहीं पीते — इसी प्रकार सज्जन लोग दूसरों के काम के लिए संपत्ति संचित करते हैं।)*

दोहा 2 — (कबीर)
जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोव तू फूल।\text{जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोव तू फूल।}
तोहि फूल को फूल है, वाको है तिरसूल।।\text{तोहि फूल को फूल है, वाको है तिरसूल।।}
*(जो तुम्हारे लिए काँटे बोए, उसके लिए तुम फूल बोओ — यही परोपकार की भावना है।)*

*(विद्यार्थी इन्हें कक्षा में सुनाएँ और अन्य कविताएँ भी खोजें।)*

परियोजना कार्य

1अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कविता 'कर्मवीर' तथा अन्य कविताओं को पढ़िए तथा कक्षा में सुनाइए।Show solution
संकेत:

अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हिंदी के प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी कविता 'कर्मवीर' में परिश्रम, लगन और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया गया है। कविता का मुख्य भाव है कि जो व्यक्ति कठिन परिश्रम करता है और कभी हार नहीं मानता, वही सच्चा कर्मवीर है।

'कर्मवीर' की कुछ पंक्तियाँ:
*'देखकर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहीं,*
*रह भरोसे भाग्य के दुख भोग पछताते नहीं।*
*काम कितना ही कठिन हो, किंतु उकताते नहीं,*
*भीड़ में चंचल बने जो, वीर दिखलाते नहीं।'*

*(विद्यार्थी पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से पूरी कविता पढ़ें और कक्षा में सुनाएँ।)*
2भवानी प्रसाद मिश्र की 'प्राणी वही प्राणी है' कविता पढ़िए तथा दोनों कविताओं के भावों में व्यक्त हुई समानता को लिखिए।Show solution
समानता:

भवानी प्रसाद मिश्र की कविता 'प्राणी वही प्राणी है' और मैथिलीशरण गुप्त की 'मनुष्यता' — दोनों कविताओं में निम्नलिखित भावों की समानता है:

1. परोपकार का महत्त्व — दोनों कविताएँ यह बताती हैं कि जो व्यक्ति दूसरों के काम आता है, वही सच्चा मनुष्य/प्राणी है।

2. स्वार्थ का त्याग — दोनों कवि स्वार्थी जीवन को व्यर्थ मानते हैं।

3. मानवीय मूल्यों की स्थापना — दोनों कविताएँ मानवता, दया, करुणा और प्रेम को सर्वोच्च मूल्य मानती हैं।

4. सामाजिक चेतना — दोनों कवि समाज को जागरूक करना चाहते हैं कि मनुष्य का जीवन केवल भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि सेवा और त्याग के लिए है।

*(विद्यार्थी भवानी प्रसाद मिश्र की पूरी कविता पढ़कर और अधिक समानताएँ खोजें।)*

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in मनुष्यता for Haryana Board Class 10 Hindi?
Key topics in मनुष्यता include मनुष्यता कविता — मुख्य संकल्पना मानचित्र, मनुष्यता — कविता के मुख्य विचारों का मानचित्र, मनुष्यता कविता — सही समझ का मानचित्र. These are the concepts Haryana Board Class 10 examiners draw on most — study them first, then practise related questions.
How to score full marks in मनुष्यता — Haryana Board Class 10 Hindi?
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Sources & Official References

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