दूसरा देवदास (ममता कालिया) — NCERT Solutions
Meghalaya Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for दूसरा देवदास (ममता कालिया), Meghalaya Board Class 12 Hindi: 16 textbook questions solved step by step.
Interactive on Super Tutor
Studying दूसरा देवदास (ममता कालिया)? Get the full interactive chapter.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for NCERT solutions and more.
Free trial, no card needed.

Learn better with visuals Super Tutor pairs illustrations like this with notes and quizzes for दूसरा देवदास (ममता कालिया).
The first 8 solutions are open to read. The other 8 are free with a Super Tutor account.
प्रश्न-अभ्यास
1पाठ के आधार पर हर की पीड़ी पर होने वाली गंगा जी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।Show solution
दिया गया: पाठ 'दूसरा देवदास' में हरिद्वार के हर की पीड़ी पर होने वाली गंगा आरती का सजीव चित्रण किया गया है।
वर्णन:
गोधूलि बेला में हर की पीड़ी पर गंगा आरती का दृश्य अत्यंत मनोरम और भावपूर्ण होता है। संध्या होते ही घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। पुजारी नीलांजलि (विशेष दीपक) जलाकर गंगा मैया की आरती करते हैं। दीपों की लौ जल की सतह पर प्रतिबिंबित होकर एक अद्भुत आलोक फैलाती है। घंटे-घड़ियालों की ध्वनि, शंखनाद और मंत्रोच्चार से वातावरण गुंजायमान हो उठता है। श्रद्धालु हाथ जोड़कर, आँखें मूँदकर गंगा मैया की स्तुति करते हैं। कुछ भक्त दीपक जलाकर गंगा की धारा में प्रवाहित करते हैं जो जल पर तैरते हुए एक अलौकिक दृश्य उपस्थित करते हैं। आरती की लपटें, भजन-कीर्तन की स्वर-लहरियाँ और गंगा का कलकल निनाद मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जिसमें मन स्वतः श्रद्धा से भर उठता है। यह दृश्य देखकर संभव भी भाव-विभोर हो जाता है और उसे लगता है कि गंगा मैया केवल नदी नहीं, बल्कि जीवन-शक्ति का साक्षात् स्वरूप हैं।
2'गंगापुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है'—इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश की चर्चा कीजिए।Show solution
दिया गया: उक्त कथन गंगा के किनारे रहने वाले उन लोगों के जीवन पर प्रकाश डालता है जिनका अस्तित्व ही गंगा पर निर्भर है।
गंगापुत्रों का जीवन-परिवेश:
गंगा के तट पर रहने वाले लोग — नाविक, पंडे, पुजारी, मल्लाह — सभी 'गंगापुत्र' कहलाते हैं। इनके लिए गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि माँ के समान है जो उन्हें जीवन और जीविका दोनों देती है।
- जीविका: नाविक नाव चलाकर, मल्लाह श्रद्धालुओं को पार उतारकर, पंडे पूजा-पाठ करवाकर और दुकानदार प्रसाद-सामग्री बेचकर अपना जीवन-यापन करते हैं। गंगा के घाट पर उनकी रोज़ी-रोटी चलती है।
- जीवन: गंगा इनके सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का केंद्र है। जन्म से मृत्यु तक के सभी संस्कार गंगा के तट पर संपन्न होते हैं।
- परिवेश: ये लोग घाट के आसपास छोटी-छोटी बस्तियों में रहते हैं। इनका जीवन सादा, संघर्षपूर्ण किंतु आस्था से भरा होता है।
- आस्था: गंगा के प्रति इनकी श्रद्धा अटूट है। वे गंगा को माँ मानते हैं और उसकी रक्षा को अपना धर्म समझते हैं।
इस प्रकार गंगापुत्रों का संपूर्ण अस्तित्व — आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक — गंगा मैया से जुड़ा हुआ है।
3पुजारी ने लड़की के 'हम' को युगल अर्थ में लेकर क्या आशीर्वाद दिया और पुजारी द्वारा आशीर्वाद देने के बाद लड़के और लड़की के व्यवहार में अटपटापन क्यों आया?Show solution
दिया गया: मंसा देवी मंदिर में पुजारी ने लड़की के 'हम' शब्द को युगल (जोड़े) के अर्थ में ग्रहण किया।
पुजारी का आशीर्वाद:
जब लड़की ने पुजारी से कहा कि 'हम' मनोकामना की गाँठ बाँधने आए हैं, तो पुजारी ने 'हम' को एकवचन न मानकर युगल (लड़का-लड़की दोनों) के अर्थ में लिया। उसने दोनों को एक जोड़े के रूप में समझकर आशीर्वाद दिया — 'सदा सुहागन रहो', 'दोनों का जोड़ा सलामत रहे', 'मनोकामना पूर्ण हो' — इस प्रकार का दांपत्य-सुख का आशीर्वाद दिया।
अटपटापन का कारण:
पुजारी के इस आशीर्वाद के बाद लड़के (संभव) और लड़की (पारो) दोनों के व्यवहार में अटपटापन आ गया, क्योंकि:
- दोनों वास्तव में एक-दूसरे को जानते नहीं थे — वे अपरिचित थे।
- पुजारी ने उन्हें पति-पत्नी मान लिया था, जबकि उनके बीच ऐसा कोई संबंध नहीं था।
- इस अप्रत्याशित स्थिति से दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति अनजाने आकर्षण और लज्जा का भाव एक साथ उत्पन्न हो गया।
- लड़की लाज से गुलाबी हो गई और लड़के के मन में भी हलचल मच गई।
इस प्रकार पुजारी की भूल ने दोनों के बीच एक मधुर, लज्जापूर्ण और रोमांचक क्षण उत्पन्न कर दिया।
4उस छोटी सी मुलाकात ने संभव के मन में क्या हलचल उत्पन्न कर दी, इसका सूक्ष्म विवेचन कीजिए।Show solution
दिया गया: हर की पीड़ी पर गंगा आरती के समय संभव की लड़की (पारो) से एक संक्षिप्त मुलाकात हुई।
संभव के मन की हलचल का सूक्ष्म विवेचन:
वह मुलाकात भले ही क्षणिक थी, किंतु उसने संभव के मन पर गहरी छाप छोड़ी:
- पहली दृष्टि का प्रभाव: गुलाबी परिधान में लड़की को देखकर संभव का मन अनायास उसकी ओर खिंच गया। उसकी मीठी आवाज़ और सहज व्यवहार ने संभव को मुग्ध कर दिया।
- मन में बसना: वह लड़की संभव के मन में इस तरह बस गई कि वह बार-बार उसके बारे में सोचने लगा। उसकी आवाज़, उसका अंदाज़, उसका उलाहना — सब कुछ उसे याद रहा।
- पुनर्मिलन की आकांक्षा: संभव के मन में उस लड़की से दोबारा मिलने की तीव्र इच्छा जागी। वह मंसा देवी जाने का निर्णय भी इसी आशा में करता है।
- रोमांच और पुलक: जब केबिलकार में वही लड़की मिली तो 'पुलक से उसका रोम-रोम हिल उठा।' यह वाक्य उसके मन की गहरी हलचल को व्यक्त करता है।
- ईश्वर के प्रति कृतज्ञता: वह ईश्वर को धन्यवाद देता है कि उसकी मनोकामना इतनी शीघ्र पूरी हो गई।
इस प्रकार एक छोटी-सी मुलाकात ने संभव के हृदय में प्रेम का बीज बो दिया।
5मंसा देवी जाने के लिए केबिलकार में बैठे हुए संभव के मन में जो कल्पनाएँ उठ रही थीं, उनका वर्णन कीजिए।Show solution
दिया गया: संभव मंसा देवी जाने के लिए केबिलकार में बैठा है और उसके मन में तरह-तरह की कल्पनाएँ उठ रही हैं।
संभव की कल्पनाओं का वर्णन:
- लड़की से पुनर्मिलन की आशा: केबिलकार में बैठते ही संभव के मन में उस गुलाबी परिधान वाली लड़की की छवि उभर आई। वह मन-ही-मन सोच रहा था कि शायद वह लड़की भी मंसा देवी आई हो।
- मनोकामना की कल्पना: वह सोच रहा था कि यदि वह लड़की मिल जाए तो वह भी मनोकामना की गाँठ बाँधेगा — उस लड़की से मिलने की मनोकामना।
- रोमांटिक कल्पनाएँ: ऊँचाई पर केबिलकार में बैठकर वह उस लड़की के साथ इस यात्रा की कल्पना कर रहा था। पहाड़ों का सौंदर्य, हरियाली और ऊँचाई से दिखता हरिद्वार — इन सबके बीच उस लड़की की उपस्थिति की कल्पना उसे रोमांचित कर रही थी।
- संयोग पर विश्वास: वह सोच रहा था कि शायद ईश्वर उन्हें फिर मिलाएगा, क्योंकि उनकी पहली मुलाकात भी एक संयोग ही थी।
- भावी संबंध की कल्पना: उसके मन में यह भी आया कि यदि वह लड़की मिली तो वह उससे बात करेगा, उसका नाम जानेगा और शायद एक सुंदर संबंध की शुरुआत होगी।
इन कल्पनाओं में डूबे संभव को तब सुखद आश्चर्य हुआ जब केबिलकार में वही लड़की वास्तव में मिल गई।
6"पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है... उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिटान का मधुर स्मरण हो आया।" कथन के आधार पर कहानी के संकेतपूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए।Show solution
दिया गया: उपर्युक्त कथन कहानी के अंत में आता है जब संभव और पारो की पहचान होती है।
संकेतपूर्ण आशय:
इस कथन में कहानी के कई गहरे संकेत निहित हैं:
- नाम का संकेत — 'पारो': लड़की का नाम 'पारो' है — यह शरत्चंद्र के उपन्यास 'देवदास' की नायिका 'पारो' (पार्वती) का स्मरण कराता है। इससे कहानी का शीर्षक 'दूसरा देवदास' सार्थक हो जाता है।
- 'संभव देवदास' — नाम का संकेत: संभव ने अपना परिचय 'संभव देवदास' के रूप में दिया। 'देवदास' उपनाम होने से वह देवदास का आधुनिक संस्करण बन जाता है — किंतु 'संभव' नाम यह संकेत देता है कि इस बार प्रेम का 'संभव' (सफल) होना संभव है।
- मनोकामना के धागे का संकेत: पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिटान (गाँठ) प्रेम की मनोकामना का प्रतीक है। दोनों ने अलग-अलग मनोकामना बाँधी थी — और वह मनोकामना एक-दूसरे से मिलने की थी।
- 'इधर बाँधो उधर लग जाती है': यह संकेत है कि प्रेम की डोर दोनों ओर से बँध गई है — दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति आकर्षण है।
- सुखद परिणति का संकेत: देवदास की दुखांत प्रेम-कथा के विपरीत यहाँ सुखद मिलन का संकेत है — यही 'दूसरे देवदास' की विशेषता है।
इस प्रकार यह कथन पूरी कहानी के केंद्रीय भाव को संकेतों में व्यक्त करता है।
7'मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत, अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।' कथन के आधार पर पारो की मनोदशा का वर्णन कीजिए।Show solution
दिया गया: यह कथन पारो के मन में उठा विचार है जब संभव से उसकी पुनः भेंट होती है।
पारो की मनोदशा:
- आश्चर्य और प्रसन्नता: पारो को विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस लड़के से वह हर की पीड़ी पर मिली थी, वही मंसा देवी में भी मिल गया। यह संयोग उसे अद्भुत लग रहा था।
- मनोकामना पूर्ण होने का बोध: उसने मंसा देवी पर मनोकामना की गाँठ बाँधी थी — और उसकी मनोकामना (संभव से पुनर्मिलन) तुरंत पूरी हो गई। इससे वह चकित और प्रसन्न थी।
- लज्जा और संकोच: सफेद साड़ी में वह 'लाज से गुलाबी' हो रही थी — यह उसके मन में उठते प्रेम-भाव और स्त्री-सुलभ लज्जा का प्रतीक है।
- आस्था और श्रद्धा: उसने मंसा देवी पर एक और चुनरी चढ़ाने का संकल्प लिया — यह उसकी गहरी आस्था और कृतज्ञता को दर्शाता है।
- प्रेम का अंकुरण: 'इधर बाँधो उधर लग जाती है' — यह कथन बताता है कि उसके मन में भी संभव के प्रति आकर्षण जन्म ले चुका है। मनोकामना की गाँठ केवल धागे में नहीं, दोनों के हृदयों में भी बँध गई है।
- सुखद विस्मय: पारो की मनोदशा उस क्षण सुखद विस्मय, लज्जा, प्रसन्नता और आस्था का मिश्रण थी — जो एक युवती के प्रथम प्रेम की स्वाभाविक अनुभूति है।
8निम्नलिखित वाक्यों का आशय स्पष्ट कीजिए—
(क) 'तुम्हें तो तैरना भी न आवे। कहीं पैर फिसल जाता तो मैं तेरी माँ को कौन मुँह दिखाती।'
(ख) 'उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनित कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतनस्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।'
(ग) 'एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धारिणी मंसादेवी स्थापित थी। व्यापार यहाँ भी था।'Show solution
(क) आशय:
दिया गया: यह कथन किसी बड़े-बुजुर्ग (संभवतः पारो की बुआ या कोई परिचित) का है जो संभव को गंगा में उतरने से रोक रही हैं।
आशय: इस कथन में वात्सल्य और चिंता का भाव है। वक्ता कह रही हैं कि यदि तुम्हें तैरना नहीं आता तो गंगा में उतरना खतरनाक है। यदि पैर फिसल जाता और कुछ अनहोनी हो जाती तो मैं तुम्हारी माँ को क्या जवाब देती? यह कथन एक ओर स्नेहपूर्ण चेतावनी है, तो दूसरी ओर उस जिम्मेदारी की भावना को व्यक्त करता है जो बड़े-बुजुर्ग बच्चों के प्रति महसूस करते हैं। साथ ही यह हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थल पर गंगा की तेज़ धारा के खतरे की ओर भी संकेत करता है।
(ख) आशय:
दिया गया: यह वर्णन किसी श्रद्धालु के चेहरे का है जो गंगा आरती में पूर्णतः लीन है।
आशय: इस कथन में एक ऐसे व्यक्ति का चित्रण है जो भक्ति में इतना डूब गया है कि उसका अहंकार, स्वार्थ और मानसिक कुंठाएँ सब समाप्त हो गई हैं। 'विभोर विनीत भाव' का अर्थ है — पूर्णतः भाव-मग्न और विनम्र। 'आत्माराम' और 'निर्मलानंद' — ये शब्द उस आत्मिक शांति और पवित्रता को व्यक्त करते हैं जो सच्ची भक्ति से प्राप्त होती है। लेखिका यह बताना चाहती हैं कि गंगा आरती का वातावरण मनुष्य को उसके 'स्व' (अहम्) से मुक्त कर देता है और वह शुद्ध चेतना का अनुभव करता है।
(ग) आशय:
दिया गया: यह वर्णन मंसा देवी मंदिर के अंदरूनी भाग का है।
आशय: इस कथन में लेखिका ने व्यंग्यात्मक दृष्टि से धर्म और व्यापार के घालमेल को उजागर किया है। मंदिर के सबसे भीतरी कक्ष में चामुंडा रूप धारिणी मंसा देवी विराजमान हैं — यह अत्यंत पवित्र स्थान है। किंतु 'व्यापार यहाँ भी था' — यह वाक्य बताता है कि धर्म के इस पवित्रतम स्थान पर भी पुजारियों और दुकानदारों का व्यावसायिक स्वार्थ विद्यमान है। प्रसाद, चुनरी, दक्षिणा — सब कुछ बिकता है। लेखिका का संकेत है कि आज धर्म भी व्यापार बन गया है और आस्था का भी व्यावसायीकरण हो गया है।
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
भाषा-शिल्प
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
योग्यता-विस्तार
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
Free with a Super Tutor account
8 more solved questions in दूसरा देवदास (ममता कालिया)
They are free with a Super Tutor account, along with practice quizzes and flashcards for this chapter. Free to start, no card needed.
Frequently Asked Questions
What are the important topics in दूसरा देवदास (ममता कालिया) for Meghalaya Board Class 12 Hindi?
Are these NCERT Solutions for दूसरा देवदास (ममता कालिया) free?
How should I revise दूसरा देवदास (ममता कालिया) for the Meghalaya Board Class 12 board exam?
Sources & Official References
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
More resources for दूसरा देवदास (ममता कालिया)
Practice Quiz
Test yourself with a quick quiz
Important Questions
Exam-style questions with answers
Revision Notes
Key points for last-minute revision
Chapter Summary
Understand the chapter at a glance
Concept Maps
See how topics connect
Study Plan
Step-by-step plan for this chapter
Flashcards
Quick-fire cards for active recall
Syllabus
What topics to cover
For serious students
Get the full दूसरा देवदास (ममता कालिया) chapter — start free.
Quizzes, flashcards, an AI doubt solver and a study plan for Meghalaya Board Class 12 Hindi. Free to start, no card needed.