वसंत आया / तोड़ो (रघुवीर सहाय) — NCERT Solutions
Mizoram Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for वसंत आया / तोड़ो (रघुवीर सहाय), Mizoram Board Class 12 Hindi: 14 textbook questions solved step by step.
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प्रश्न-अभ्यास
1वसंत आगमन की सूचना कवि को कैसे मिली?Show solution
दिया गया है: रघुवीर सहाय की कविता 'वसंत आया'।
उत्तर:
कवि को वसंत आगमन की सूचना किसी मौसम-विभाग की घोषणा से नहीं, बल्कि प्रकृति के विभिन्न संकेतों से मिली। कोयल की कुहुक सुनाई दी, पेड़ों के बड़े-बड़े पत्ते पीले पड़कर चुरमुराने लगे, सुबह छह बजे हवा ऐसी चली जैसे गरम पानी से नहाई हो — खिली हुई, ताज़ी और सुखद। ढाक के जंगल दहर-दहर दहकने को तैयार दिखे। इस प्रकार प्रकृति के इन्हीं नैसर्गिक संकेतों से कवि को वसंत के आगमन की सूचना मिली।
2'कोई छह बजे सुबह... फिरकी सी आई, चली गई'—पंक्ति में निहित भाव स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया है: उक्त पंक्ति 'वसंत आया' कविता से है।
भाव:
इन पंक्तियों में कवि ने वसंत की हवा का अत्यंत सजीव और चित्रात्मक वर्णन किया है। सुबह लगभग छह बजे एक ताज़ी, गर्म और सुखद हवा का झोंका आया — जैसे कोई गरम पानी से नहाकर आई हो। वह हवा 'फिरकी' (लट्टू/घूमने वाले खिलौने) की तरह क्षण-भर के लिए आई और चली गई। इससे यह भाव व्यक्त होता है कि वसंत की अनुभूति क्षणिक और चंचल होती है — वह आती है, मन को छूती है और चली जाती है। आधुनिक व्यस्त मनुष्य इस क्षणिक सौंदर्य को भी ठीक से अनुभव नहीं कर पाता।
3अलंकार बताइए:
(क) बड़े-बड़े पियराए पत्ते
(ख) कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो
(ग) खिली हुई हवा आई, फिरकी-सी आई, चली गई
(घ) कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगलShow solution
(क) बड़े-बड़े पियराए पत्ते
- पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार — 'बड़े-बड़े' शब्द की पुनरावृत्ति से विशेषता में बल आया है।
- अनुप्रास अलंकार — 'प' वर्ण की आवृत्ति: 'पियराए पत्ते'।
(ख) कोई छह बजे सुबह जैसे गरम पानी से नहाई हो
- उपमा अलंकार — हवा की तुलना गरम पानी से नहाई हुई स्त्री से की गई है। उपमेय = हवा, उपमान = गरम पानी से नहाई हुई, वाचक शब्द = 'जैसे'।
(ग) खिली हुई हवा आई, फिरकी-सी आई, चली गई
- उपमा अलंकार — हवा की तुलना फिरकी से की गई है; वाचक शब्द = 'सी'।
- पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार — 'आई' की पुनरावृत्ति।
(घ) कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल
- अनुप्रास अलंकार — 'द' वर्ण की आवृत्ति: 'दहर-दहर दहकेंगे'।
- पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार — 'दहर-दहर' की पुनरावृत्ति से तीव्रता का बोध।
4किन पंक्तियों से ज्ञात होता है कि आज मनुष्य प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य की अनुभूति से वंचित है?Show solution
उत्तर:
निम्नलिखित पंक्तियों से ज्ञात होता है कि आधुनिक मनुष्य प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य की अनुभूति से वंचित है:
कवि कहता है कि पहले मनुष्य प्रकृति के साथ जुड़ा था, परंतु अब वह केवल कैलेंडर देखकर बताता है कि वसंत आ गया। वह कोयल की कुहुक, पत्तों के पीलेपन, हवा की ताज़गी को स्वयं अनुभव नहीं करता। पंक्ति —
> "कि कोकिल कूकी, कि वसंत आया"
तथा
> "फिरकी-सी आई, चली गई"
— इन पंक्तियों से स्पष्ट होता है कि वसंत का सौंदर्य क्षण-भर के लिए आता है और मनुष्य उसे पकड़ नहीं पाता। वह प्रकृति से इतना कट गया है कि उसे वसंत की सूचना स्वयं प्रकृति से नहीं, बल्कि दूसरों के माध्यम से मिलती है।
5'प्रकृति मनुष्य की सहचरी है' इस विषय पर विचार व्यक्त करते हुए आज के संदर्भ में इस कथन की वास्तविकता पर प्रकाश डालिए।Show solution
उत्तर:
प्रकृति और मनुष्य का संबंध अत्यंत प्राचीन और घनिष्ठ है। आदिकाल से मनुष्य प्रकृति की गोद में पला-बढ़ा है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत — सभी में प्रकृति को मनुष्य की सहचरी के रूप में चित्रित किया गया है। कवियों ने प्रकृति में अपनी भावनाओं का प्रतिबिंब देखा है।
आज के संदर्भ में:
आज की वास्तविकता यह है कि मनुष्य प्रकृति से दूर होता जा रहा है। औद्योगीकरण, नगरीकरण और भौतिकवाद ने मनुष्य को प्रकृति से काट दिया है। 'वसंत आया' कविता में रघुवीर सहाय इसी चिंता को व्यक्त करते हैं — आधुनिक मनुष्य वसंत को कैलेंडर से जानता है, अनुभव से नहीं। वह कोयल की कुहुक, फूलों की सुगंध और हवा की ताज़गी को महसूस करने का समय नहीं निकाल पाता।
निष्कर्ष: प्रकृति आज भी मनुष्य की सहचरी है, परंतु मनुष्य ने स्वयं इस साहचर्य को तोड़ा है। यदि मनुष्य प्रकृति के साथ अपना संबंध पुनः स्थापित करे तो उसका जीवन अधिक सुखी और संतुलित होगा।
6'वसंत आया' कविता में कवि की चिंता क्या है?Show solution
उत्तर:
'वसंत आया' कविता में कवि रघुवीर सहाय की मुख्य चिंता यह है कि आधुनिक मनुष्य प्रकृति से पूरी तरह कट गया है। वह वसंत जैसी ऋतु को भी प्रत्यक्ष अनुभव से नहीं, बल्कि परोक्ष रूप से — किसी के बताने पर या कैलेंडर देखकर — जानता है।
कवि चिंतित है कि:
- मनुष्य की संवेदनशीलता कम हो गई है।
- वह प्रकृति के सूक्ष्म संकेतों को पहचानने में असमर्थ हो गया है।
- नगरीय जीवन की व्यस्तता ने उसे प्रकृति के नैसर्गिक सौंदर्य से वंचित कर दिया है।
- मनुष्य और प्रकृति के बीच जो स्वाभाविक, भावनात्मक संबंध था, वह टूट रहा है।
इस प्रकार कवि की चिंता केवल वसंत तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आधुनिक मनुष्य की संवेदनहीनता और प्रकृति से बढ़ती दूरी पर गहरी चिंता व्यक्त करता है।
प्रश्न-अभ्यास
1'पत्थर' और 'चट्टान' शब्द किसके प्रतीक हैं?Show solution
उत्तर:
कविता 'तोड़ो' में 'पत्थर' और 'चट्टान' शब्द प्रतीकात्मक हैं:
- पत्थर — मनुष्य के मन में जमी हुई जड़ता, संवेदनहीनता, रूढ़िवादिता और मानसिक अवरोधों के प्रतीक हैं।
- चट्टान — समाज में व्याप्त कठोर, अटल और पुरानी रूढ़ियाँ, परंपराएँ, झूठे बंधन और वे बाधाएँ जो मनुष्य को प्रगति से रोकती हैं — इनके प्रतीक हैं।
कवि का आशय है कि मनुष्य को अपने मन की जड़ता और समाज की रूढ़िवादी बेड़ियों को तोड़ना होगा, तभी वह धरती (वास्तविकता/जीवन) को सही अर्थों में जान सकेगा और उसमें नई संभावनाएँ उत्पन्न कर सकेगा।
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो
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तो धरती को हम जानें
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Frequently Asked Questions
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