पतंग
Mizoram Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for पतंग — Mizoram Board Class 12 Hindi.
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1'सबसे तेज़ बौछारें गयीं, भादो गया' के बाद प्रकृति में जो परिवर्तन कवि ने दिखाया है, उसका वर्णन अपने शब्दों में करें।Show solution
प्रकृति में परिवर्तन का वर्णन:
भादो मास की तेज़ और मूसलाधार बौछारें जब समाप्त हो जाती हैं, तो प्रकृति का रूप पूरी तरह बदल जाता है। आकाश स्वच्छ, निर्मल और नीला हो जाता है। चारों ओर उजाला और ताज़गी छा जाती है। सवेरा खरगोश की आँखों जैसा लाल और कोमल होता है — अर्थात् भोर की लालिमा अत्यंत मनोरम लगती है।
शरद ऋतु का आगमन होता है, मानो वह पुलों को पार करते हुए, अपनी नई चमकीली साइकिल तेज़ चलाते हुए, घंटी बजाते हुए आ रहा हो। यह उपमा शरद की ताज़गी, गति और उत्साह को दर्शाती है। आकाश इतना मुलायम और साफ हो जाता है कि पतंगें ऊँची उड़ सकें। धूप चमकीली और सुनहरी हो जाती है। वातावरण में एक नई ऊर्जा, उमंग और उल्लास भर जाता है।
निष्कर्ष: संक्षेप में, भादो के जाने के बाद प्रकृति वर्षा की उदासी और भारीपन से मुक्त होकर शरद की स्वच्छता, चमक और कोमलता से भर जाती है।
2सोचकर बताएँ कि पतंग के लिए सबसे हल्की और रंगीन चीज़, सबसे पतला कागज़, सबसे पतली कमानी जैसे विशेषणों का प्रयोग क्यों किया है?Show solution
विशेषणों के प्रयोग का कारण:
कवि ने इन विशेषणों का प्रयोग निम्नलिखित कारणों से किया है —
1. पतंग की विशेषता उजागर करना: पतंग स्वभाव से ही अत्यंत हल्की, नाज़ुक और रंगीन होती है। 'सबसे' जैसे अतिशयोक्तिपूर्ण विशेषण उसकी इस विशेषता को और अधिक उभारते हैं।
2. बच्चों के स्वप्न और कल्पना का प्रतीक: पतंग बच्चों की उड़ान, स्वतंत्रता और कल्पनाशीलता का प्रतीक है। 'सबसे हल्की' कहकर कवि यह बताना चाहता है कि बच्चों के सपने भी इसी तरह हल्के, मुक्त और असीमित होते हैं।
3. नाज़ुकता और कोमलता का बोध: 'सबसे पतला कागज़' और 'सबसे पतली कमानी' — ये विशेषण पतंग की नाज़ुकता को दर्शाते हैं, जो बच्चों की कोमलता और मासूमियत की भी प्रतीक है।
4. उड़ान की संभावना: जितनी हल्की और पतली पतंग होगी, उतनी ही ऊँची उड़ेगी। इस प्रकार ये विशेषण पतंग की असीमित ऊँचाई तक उड़ने की क्षमता को भी व्यक्त करते हैं।
निष्कर्ष: इन विशेषणों के माध्यम से कवि पतंग को केवल एक खिलौना नहीं, बल्कि बच्चों के स्वप्न, उमंग और स्वतंत्रता का सर्वोत्तम प्रतीक बनाता है।
3बिंब स्पष्ट करें — सबसे तेज बौछारें गयीं भादो गया / सवेरा हुआ / खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा / शरद आया पुलों को पार करते हुए / अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए / घंटी बजाते हुए जोर-जोर से / चमकीले इशारों से बुलाते हुए और / आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए / कि पतंग ऊपर उठ सके।Show solution
बिंबों की व्याख्या:
1. 'सबसे तेज बौछारें गयीं भादो गया' — यहाँ दृश्य बिंब है। भादो की मूसलाधार बारिश का चित्र उभरता है और फिर उसके जाने से प्रकृति में आई शांति का अनुभव होता है।
2. 'सवेरा हुआ' — दृश्य बिंब। रात के अंधकार के बाद प्रकाश के फैलने का सरल किंतु प्रभावशाली चित्र।
3. 'खरगोश की आँखों जैसा लाल सवेरा' — दृश्य बिंब। खरगोश की आँखें लाल और कोमल होती हैं। इस उपमा से भोर की लाल, कोमल और मनोरम आभा का सजीव चित्र उभरता है।
4. 'शरद आया पुलों को पार करते हुए' — गति बिंब (चलचित्र बिंब)। शरद ऋतु को एक यात्री की तरह चित्रित किया गया है जो पुल पार करते हुए आ रहा है — यह ऋतु-परिवर्तन की गतिशीलता को दर्शाता है।
5. 'अपनी नयी चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए' — दृश्य एवं गति बिंब। शरद की ताज़गी, चमक और उत्साह को एक नई साइकिल चलाते उत्साही व्यक्ति के रूप में चित्रित किया गया है।
6. 'घंटी बजाते हुए जोर-जोर से' — श्रव्य बिंब (ध्वनि बिंब)। साइकिल की घंटी की आवाज़ से शरद के आगमन की सूचना का सजीव चित्र बनता है।
7. 'चमकीले इशारों से बुलाते हुए' — दृश्य बिंब। शरद की धूप की चमक को 'चमकीले इशारे' कहा गया है — मानो धूप बच्चों को बाहर खेलने के लिए बुला रही हो।
8. 'आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए / कि पतंग ऊपर उठ सके' — स्पर्श बिंब। शरद के स्वच्छ, शांत और कोमल आकाश को 'मुलायम' कहकर उसकी कोमलता का स्पर्श-अनुभव कराया गया है।
निष्कर्ष: इन बिंबों के माध्यम से कवि ने शरद ऋतु के आगमन को अत्यंत जीवंत, सजीव और बहुआयामी रूप में प्रस्तुत किया है।
4जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास— कपास के बारे में सोचें कि कपास से बच्चों का क्या संबंध बन सकता है।Show solution
कपास और बच्चों का संबंध:
कपास एक अत्यंत कोमल, हल्की, सफेद और मुलायम वस्तु है। बच्चों और कपास के बीच निम्नलिखित संबंध बन सकते हैं —
1. कोमलता का प्रतीक: जिस प्रकार कपास स्पर्श में अत्यंत मुलायम होती है, उसी प्रकार बच्चे भी स्वभाव से कोमल, निश्छल और मासूम होते हैं।
2. हल्केपन का प्रतीक: कपास बहुत हल्की होती है और हवा में उड़ती है। बच्चे भी निश्चिंत, भारमुक्त और स्वतंत्र होते हैं — उनके मन पर किसी प्रकार का बोझ नहीं होता।
3. शुद्धता और निर्मलता: कपास की सफेदी बच्चों की मन की पवित्रता और निर्दोषिता का प्रतीक है।
4. लचीलेपन का प्रतीक: कपास लचीली होती है, टूटती नहीं। बच्चे भी गिरकर उठ जाते हैं, चोट खाकर भी खेलते रहते हैं।
5. नई शुरुआत का प्रतीक: कपास से नए वस्त्र बनते हैं। बच्चे भी नई संभावनाओं और नए भविष्य के प्रतीक होते हैं।
निष्कर्ष: कपास बच्चों की कोमलता, निर्मलता, हल्केपन और असीमित संभावनाओं का प्रतीक है। कवि यह कहना चाहता है कि बच्चे जन्म से ही इन गुणों को लेकर आते हैं।
5पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं— बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध बनता है?Show solution
बच्चों और उड़ान का संबंध:
1. कल्पना की उड़ान: बच्चों की कल्पनाशक्ति असीमित होती है। पतंग उड़ाते समय वे स्वयं को भी आकाश में उड़ता हुआ महसूस करते हैं। उनकी कल्पना पतंग के साथ-साथ ऊँची उड़ान भरती है।
2. स्वतंत्रता की अनुभूति: उड़ान स्वतंत्रता का प्रतीक है। बच्चे स्वभाव से स्वतंत्र और बंधनमुक्त होते हैं। पतंग की उड़ान उनकी इसी स्वतंत्रता की भावना को व्यक्त करती है।
3. उत्साह और उमंग: पतंग जितनी ऊँची उड़ती है, बच्चों का उत्साह उतना ही बढ़ता है। उनका रोमांचित शरीर पतंग की ऊँचाई के साथ तालमेल बिठाता है।
4. सपनों की उड़ान: पतंग बच्चों के सपनों और आकांक्षाओं का प्रतीक है। जिस प्रकार पतंग आकाश की सीमाओं को छूना चाहती है, उसी प्रकार बच्चे भी अपने जीवन में ऊँचाइयाँ प्राप्त करना चाहते हैं।
5. जोखिम उठाने की क्षमता: उड़ान में जोखिम भी है — पतंग कट सकती है, बच्चे छत से गिर सकते हैं। फिर भी वे डरते नहीं। यह उनके साहस और निडरता को दर्शाता है।
निष्कर्ष: बच्चों और उड़ान का संबंध केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और आत्मिक है। पतंग उनके स्वप्न, स्वतंत्रता और जीवन-उत्साह का प्रतीक बन जाती है।
6निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़ कर प्रश्नों का उत्तर दीजिए:
(क) छतों को भी नरम बनाते हुए / दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए
(ख) अगर वे कभी गिरते हैं छतों के खतरनाक किनारों से / और बच जाते हैं तब तो / और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं।
* दिशाओं को मृदंग की तरह बजाने का क्या तात्पर्य है?
* जब पतंग सामने हो तो छतों पर दौड़ते हुए क्या आपको छत कठोर लगती है?
* खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद आप दुनिया की चुनौतियों के सामने स्वयं को कैसा महसूस करते हैं?Show solution
मृदंग एक वाद्य यंत्र है जिसे बजाने पर चारों दिशाओं में मधुर और लयबद्ध ध्वनि गूँजती है। 'दिशाओं को मृदंग की तरह बजाना' का तात्पर्य है — बच्चों की किलकारियाँ, उनकी हँसी, उनके शोर और उल्लास की आवाज़ें चारों दिशाओं में इस प्रकार गूँजती हैं जैसे मृदंग बज रहा हो। बच्चों का उत्साह और आनंद इतना व्यापक होता है कि वह पूरे वातावरण को संगीतमय बना देता है। यह श्रव्य बिंब के साथ-साथ बच्चों की जीवंतता और ऊर्जा का प्रतीक भी है।
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(ii) जब पतंग सामने हो तो छतों पर दौड़ते हुए क्या छत कठोर लगती है?
नहीं, जब पतंग सामने हो और मन में उत्साह और उमंग भरी हो, तो छत कठोर नहीं लगती। पतंग उड़ाने के आनंद में बच्चे इतने तल्लीन हो जाते हैं कि उन्हें छत की कठोरता का बोध ही नहीं होता। उनका उत्साह और एकाग्रता इतनी प्रबल होती है कि वे छत को भी 'नरम' महसूस करते हैं। कवि ने इसीलिए कहा है — 'छतों को भी नरम बनाते हुए।' यह मन की भावनात्मक अवस्था का प्रभाव है — जब मन प्रसन्न हो, तो कठिनाइयाँ भी सरल लगने लगती हैं।
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(iii) खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद दुनिया की चुनौतियों के सामने स्वयं को कैसा महसूस करते हैं?
कविता की पंक्तियाँ — 'अगर वे कभी गिरते हैं छतों के खतरनाक किनारों से / और बच जाते हैं तब तो / और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं' — यह सत्य उजागर करती हैं कि खतरनाक परिस्थितियों का सामना करने के बाद व्यक्ति और अधिक साहसी और आत्मविश्वासी बन जाता है।
जब हम किसी कठिन परिस्थिति से गुज़रकर सफलतापूर्वक बाहर निकलते हैं, तो हमारे भीतर एक नई शक्ति और आत्मबल का संचार होता है। हम दुनिया की चुनौतियों का सामना अधिक निडरता और दृढ़ता से कर पाते हैं। भय कम हो जाता है और आत्मविश्वास बढ़ जाता है। ठीक उसी प्रकार जैसे बच्चे गिरकर भी उठते हैं और 'सुनहले सूरज के सामने' और भी निडर होकर आते हैं — अर्थात् जीवन की चमक और संभावनाओं को और अधिक उत्साह से अपनाते हैं।
कविता के आसपास
1आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों को देखकर आपके मन में कैसे खयाल आते हैं? लिखिए।Show solution
आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों को देखकर मन में अनेक सुखद और उत्साहपूर्ण विचार आते हैं —
1. बचपन की याद: पतंगें देखते ही बचपन के वे दिन याद आ जाते हैं जब हम छत पर दौड़-दौड़कर पतंग उड़ाते थे और पतंग कटने पर 'वो काटा!' की आवाज़ें लगाते थे।
2. स्वतंत्रता का अहसास: आकाश में स्वतंत्र उड़ती पतंगें मन में स्वतंत्रता और मुक्ति की भावना जगाती हैं — लगता है कि काश हम भी इसी तरह सारी बंधनों से मुक्त होकर उड़ सकते।
3. जीवन का प्रतीक: पतंग की डोर जीवन के संघर्ष की याद दिलाती है — जितनी मज़बूत डोर, उतनी ऊँची उड़ान। जीवन में भी संयम और अनुशासन ही हमें ऊँचाइयों तक ले जाते हैं।
4. प्रकृति की सुंदरता: नीले आकाश में रंग-बिरंगी पतंगें एक सुंदर चित्र बनाती हैं जो मन को प्रसन्न और तरोताज़ा कर देती हैं।
5. उमंग और उत्साह: पतंगें देखकर मन में एक अजीब-सी उमंग और उत्साह भर जाता है — जीवन को उत्सव की तरह जीने की प्रेरणा मिलती है।
2'रोमांचित शरीर का संगीत' का जीवन के लय से क्या संबंध है?Show solution
जब बच्चे पतंग उड़ाते हैं, तो उनका पूरा शरीर उत्साह और रोमांच से भर जाता है। उनकी साँसें तेज़ होती हैं, हृदय की धड़कन बढ़ जाती है, पैर तेज़ी से दौड़ते हैं — यह सब मिलकर एक प्रकार का 'संगीत' बनाते हैं। यही है 'रोमांचित शरीर का संगीत।'
जीवन की लय से संबंध:
जीवन भी एक संगीत की तरह है जिसमें लय और ताल होती है। जब हम किसी कार्य को पूरे उत्साह, लगन और आनंद के साथ करते हैं, तो हमारा शरीर और मन एक लय में बँध जाते हैं। यही 'जीवन की लय' है।
- जब शरीर रोमांचित होता है, तो हम जीवन को पूरी तीव्रता से जीते हैं।
- रोमांच और उत्साह जीवन में ऊर्जा और गति भरते हैं।
- जिस प्रकार संगीत में सुर-ताल का सामंजस्य होता है, उसी प्रकार जीवन में भी उत्साह और संयम का संतुलन होना चाहिए।
- बच्चों का यह रोमांच उनके जीवन की स्वाभाविक लय है — वे जो करते हैं, पूरे मन से करते हैं।
निष्कर्ष: 'रोमांचित शरीर का संगीत' यह बताता है कि जब हम जीवन को पूरे जोश और उमंग के साथ जीते हैं, तो हमारा अस्तित्व एक संगीत बन जाता है और जीवन की लय स्वतः सध जाती है।
3'महज एक धागे के सहारे, पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ' उन्हें (बच्चों को) कैसे थाम लेती हैं? चर्चा करें।Show solution
पतंग एक पतले धागे के सहारे आकाश में ऊँची उड़ती है। यह धागा ही उसे ज़मीन से जोड़े रखता है। इसी प्रकार बच्चे भी पतंग की 'धड़कती ऊँचाइयों' से बँधे रहते हैं।
बच्चों को थामने का तात्पर्य:
1. भावनात्मक जुड़ाव: पतंग की डोर बच्चों के हाथ में होती है। जैसे-जैसे पतंग ऊँची उठती है, बच्चों का मन भी उसके साथ उड़ता है। यह भावनात्मक जुड़ाव उन्हें थामे रखता है।
2. एकाग्रता और तल्लीनता: पतंग उड़ाते समय बच्चे इतने एकाग्र हो जाते हैं कि उन्हें अपने आसपास का होश नहीं रहता। पतंग की ऊँचाई उनका ध्यान पूरी तरह खींच लेती है — यही उन्हें 'थाम' लेती है।
3. जोखिम और साहस: पतंग की ऊँचाई बच्चों को छत के किनारों तक ले जाती है। यह खतरनाक भी है, फिर भी पतंग का आकर्षण उन्हें रोक नहीं पाता। पतंग की 'धड़कती ऊँचाइयाँ' उनके साहस को जगाए रखती हैं।
4. जीवन का प्रतीक: यह धागा जीवन के उस अनुशासन और संयम का प्रतीक है जो हमें ऊँचाइयों पर भी ज़मीन से जोड़े रखता है। बच्चे पतंग के माध्यम से यह सीखते हैं कि ऊँची उड़ान के लिए एक मज़बूत आधार ज़रूरी है।
निष्कर्ष: 'महज एक धागे के सहारे पतंगों की धड़कती ऊँचाइयाँ' बच्चों को उनके स्वप्नों, उत्साह और जीवन-ऊर्जा से जोड़कर थाम लेती हैं। यह धागा उनके और उनके सपनों के बीच का वह सेतु है जो उन्हें ज़मीन पर रहते हुए भी आकाश छूने की प्रेरणा देता है।
आपकी कविता
1हिंदी साहित्य के विभिन्न कालों में तुलसी, जायसी, मतिराम, द्विजदेव, मैथिलीशरण गुप्त आदि कवियों ने भी शरद ऋतु का सुंदर वर्णन किया है। आप उन्हें तलाश कर कक्षा में सुनाएँ और चर्चा करें कि पतंग कविता में शरद ऋतु वर्णन उनसे किस प्रकार भिन्न है?Show solution
परंपरागत शरद वर्णन की विशेषताएँ:
- तुलसीदास, जायसी, मतिराम आदि कवियों ने शरद ऋतु का वर्णन मुख्यतः प्रकृति-चित्रण, श्रृंगार रस और भक्ति के संदर्भ में किया है।
- इनमें चाँदनी रात, कमल-खिलना, हंसों का आगमन, नदियों का स्वच्छ जल आदि परंपरागत बिंब मिलते हैं।
- मैथिलीशरण गुप्त ने राष्ट्रीय भावना के साथ प्रकृति का वर्णन किया।
'पतंग' कविता में शरद वर्णन की भिन्नता:
1. कवि आलोकधन्वा ने शरद को एक आधुनिक युवा की तरह चित्रित किया है — साइकिल चलाते, घंटी बजाते।
2. यहाँ शरद का संबंध बच्चों के उत्साह और पतंगबाज़ी से जोड़ा गया है।
3. परंपरागत प्रतीकों (हंस, कमल, चाँदनी) के स्थान पर नए और ताज़े बिंब (साइकिल, घंटी, खरगोश की आँखें) प्रयुक्त हैं।
4. यह वर्णन बाल-जीवन और सामाजिक यथार्थ से जुड़ा है, केवल प्रकृति-चित्रण तक सीमित नहीं।
निर्देश: विद्यार्थी पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से उपर्युक्त कवियों की शरद-वर्णन संबंधी कविताएँ खोजें और कक्षा में प्रस्तुत करें।
2आपके जीवन में शरद ऋतु क्या मायने रखती है?Show solution
शरद ऋतु मेरे जीवन में एक विशेष महत्त्व रखती है। यह ऋतु वर्षा की उमस और गर्मी के बाद एक सुखद राहत लेकर आती है।
1. प्रकृति की सुंदरता: शरद में आकाश नीला और स्वच्छ हो जाता है। सूरज की सुनहरी धूप मन को प्रसन्न करती है। चारों ओर हरियाली और ताज़गी होती है।
2. त्योहारों का मौसम: शरद ऋतु में दशहरा, दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं जो जीवन में उत्साह और उमंग भर देते हैं।
3. पतंगबाज़ी का आनंद: शरद में पतंग उड़ाने का विशेष आनंद आता है। छत पर दोस्तों के साथ पतंग उड़ाना बचपन की सबसे सुखद यादों में से एक है।
4. स्वास्थ्य और ऊर्जा: न अधिक गर्मी, न अधिक सर्दी — शरद का मौसम स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम होता है। इस मौसम में मन और शरीर दोनों ऊर्जावान रहते हैं।
5. नई शुरुआत का अहसास: शरद ऋतु मुझे नई शुरुआत का अहसास दिलाती है — जैसे वर्षा की कठिनाइयों के बाद एक नया, उज्ज्वल अध्याय शुरू हो रहा हो।
निष्कर्ष: शरद ऋतु मेरे लिए केवल एक मौसम नहीं, बल्कि उत्साह, उमंग, त्योहार और जीवन की नई संभावनाओं का प्रतीक है।
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