मेरा बचपन — NCERT Solutions
CBSE · Class 5 · Hindi
NCERT Solutions for मेरा बचपन, CBSE Class 5 Hindi: 23 textbook questions solved step by step. Covers बातचीत के लिए, पाठ से and समझ और अनुभव and more.
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बातचीत के लिए
1लेखक को रामलीला की तैयारियों में कौन-कौन से काम सबसे अधिक उत्साहित करते होंगे?Show solution
लेखक को रामलीला की तैयारियों में निम्नलिखित काम सबसे अधिक उत्साहित करते होंगे—
- रामलीला के लिए मंच सजाना और रंग-बिरंगी सजावट करना।
- पात्रों के लिए वेशभूषा और मुकुट तैयार करना।
- रामलीला देखने के लिए दोपहर से ही वहाँ जाकर बैठ जाना।
- मशालें और दीपक जलाने में मदद करना।
- रामलीला के संवाद और गीत सुनना तथा उन्हें याद करना।
इन सभी कामों में उत्साह, उमंग और सामूहिक भागीदारी होती थी, जो लेखक को बहुत आनंद देती होगी।
2आपको लेखक के बचपन की कौन-कौन सी बातें सबसे अच्छी लगीं? वे बातें आपको अच्छी क्यों लगीं?Show solution
लेखक के बचपन की निम्नलिखित बातें सबसे अच्छी लगीं—
- गुल्ली-डंडा खेलना — यह खेल बिना किसी महँगे सामान के खेला जाता था। पेड़ से टहनियाँ काटकर स्वयं गुल्ली-डंडा बनाना बहुत रोचक लगता है।
- अमीर-गरीब का भेद न होना — सभी बच्चे मिलकर खेलते थे, कोई ऊँच-नीच नहीं था। यह बात इसलिए अच्छी लगी क्योंकि इससे सच्ची मित्रता और समानता का भाव झलकता है।
- प्रातःकाल घर से निकलकर खेलना — सुबह-सुबह प्रकृति के बीच खेलना स्वास्थ्यवर्धक और आनंददायक होता है।
- खेल में पूरी तरह डूब जाना — घर की चिंता छोड़कर खेल में मन लगाना बचपन की सच्ची मस्ती को दर्शाता है।
ये बातें इसलिए अच्छी लगीं क्योंकि इनमें सादगी, मेलजोल और निश्छल आनंद है।
3खेलते समय चोट न लगे, इसके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?Show solution
खेलते समय चोट न लगे, इसके लिए हम निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं—
- खेलने से पहले अच्छी तरह वार्म-अप (व्यायाम) करना चाहिए।
- खेल के नियमों का पालन करना चाहिए।
- खेल के मैदान में कोई नुकीली या खतरनाक वस्तु न हो, यह सुनिश्चित करना चाहिए।
- उचित खेल-सामग्री और सुरक्षात्मक उपकरण (जैसे घुटने के पैड, हेलमेट) पहनने चाहिए।
- किसी को धक्का नहीं देना चाहिए और झगड़ा नहीं करना चाहिए।
- खेलते समय सावधानी बरतनी चाहिए और दूसरे खिलाड़ियों का ध्यान रखना चाहिए।
- प्राथमिक चिकित्सा पेटी (फर्स्ट ऐड बॉक्स) पास में रखनी चाहिए।
4लेखक के पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे क्या-क्या बातें करते होंगे?Show solution
लेखक के पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे संभवतः निम्नलिखित बातें करते होंगे—
- लेखक के देर से घर आने और खाना न खाने की शिकायत करते होंगे।
- गुल्ली-डंडा खेलने से लगने वाली चोटों की चिंता करते होंगे।
- बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान देने की नसीहत देते होंगे।
- खेल-कूद में समय बर्बाद करने पर नाराजगी जताते होंगे।
- घर के काम-काज और खेत-बाड़ी की बातें करते होंगे।
- रामलीला और त्योहारों की तैयारियों पर चर्चा करते होंगे।
पाठ से
1लेखक के चचेरे भाई हलधर की आयु कितनी थी?Show solution
दिया गया: पाठ 'मेरा बचपन' में लेखक प्रेमचंद ने अपने चचेरे भाई हलधर का उल्लेख किया है।
उत्तर: लेखक के चचेरे भाई हलधर की आयु लगभग पंद्रह-सोलह वर्ष थी। वे लेखक से बड़े थे और गुल्ली-डंडा खेलने में बहुत कुशल थे।
2लेखक ने अपने घरवालों के क्रोध का कारण क्या बताया है?Show solution
दिया गया: पाठ में लेखक ने घरवालों के क्रोध का वर्णन किया है।
उत्तर: लेखक ने अपने घरवालों के क्रोध का कारण यह बताया है कि वे गुल्ली-डंडा खेलने में इतने मग्न हो जाते थे कि उन्हें न नहाने की सुध रहती थी और न खाने की। वे सुबह घर से निकल जाते और खेलते-खेलते देर तक घर नहीं लौटते थे। इसी कारण पिताजी क्रोधित होकर रोटियों पर अपना गुस्सा उतारते थे और घरवाले बिगड़ते थे।
3लेखक के अनुसार, गुल्ली-डंडा और विलायती खेलों में क्या अंतर है?Show solution
दिया गया: पाठ में लेखक ने गुल्ली-डंडा और विलायती खेलों की तुलना की है।
उत्तर: लेखक के अनुसार गुल्ली-डंडा और विलायती खेलों में निम्नलिखित अंतर है—
| गुल्ली-डंडा | विलायती खेल |
|---|---|
| इसमें कोई महँगा सामान नहीं चाहिए। | इनके सामान महँगे होते हैं। |
| इसे गरीब और अमीर सभी बच्चे खेल सकते हैं। | इन्हें केवल धनी बच्चे ही खेल सकते हैं। |
| इसमें अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता। | इनमें अमीरी-गरीबी का भेद स्पष्ट दिखता है। |
| इसमें अभिमान की गुंजाइश नहीं होती। | इनमें महँगे सामान के कारण अभिमान आ सकता है। |
लेखक को गुल्ली-डंडा सभी खेलों से अच्छा लगता था क्योंकि इसमें सादगी, समानता और सच्चा आनंद था।
4इस पाठ में लेखक ने अपने बचपन के किन-किन अनुभवों को याद किया है?Show solution
दिया गया: पाठ 'मेरा बचपन' प्रेमचंद द्वारा लिखित है।
उत्तर: इस पाठ में लेखक ने अपने बचपन के निम्नलिखित अनुभवों को याद किया है—
- चबेना खाना — सवेरे-सवेरे मटर और जौ का चबेना खाना।
- रामलीला देखना — दोपहर से ही रामलीला के मैदान में जाकर बैठ जाना और रामलीला का आनंद लेना।
- गुल्ली-डंडा खेलना — प्रातःकाल घर से निकलकर पेड़ पर चढ़ना, टहनियाँ काटना और गुल्ली-डंडा बनाकर खेलना।
- चचेरे भाई हलधर के साथ खेलना — हलधर के साथ मिलकर गुल्ली-डंडा खेलना।
- घरवालों का क्रोध — खेल में इतना डूब जाना कि नहाने-खाने की सुध न रहे और घरवालों का गुस्सा झेलना।
- खेल में चोट लगना — माथे पर गुल्ली का दाग लगना।
इन सभी अनुभवों में बचपन की सरलता, उत्साह और निश्छल आनंद झलकता है।
समझ और अनुभव
1लेखक के बचपन के कौन-कौन से काम आपने भी किए हैं?Show solution
लेखक के बचपन के निम्नलिखित काम मैंने भी किए हैं—
- गुल्ली-डंडा खेलना — मैंने भी अपने दोस्तों के साथ गुल्ली-डंडा खेला है।
- पेड़ पर चढ़ना — पेड़ पर चढ़कर फल तोड़ना और मस्ती करना।
- चबेना खाना — भुने हुए चने, मूँगफली और मकई का चबेना खाना।
- खेल में इतना डूब जाना कि खाने-पीने की सुध न रहे।
- मेला और तमाशा देखना — रामलीला या मेले में जाकर आनंद लेना।
(नोट: यह उत्तर व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। विद्यार्थी अपने अनुभव के अनुसार उत्तर लिखें।)
2लेखक अपने बचपन में खेलने के लिए स्वयं गुल्ली बना लेते थे। आप कौन-कौन से खेल-खिलौने स्वयं बना लेते हैं? किसी एक को बनाकर कक्षा में लेकर आइए और अपने समूह के साथ मिलकर खेलिए।Show solution
मैं निम्नलिखित खेल-खिलौने स्वयं बना लेता/लेती हूँ—
- कागज की नाव और हवाई जहाज — कागज को मोड़कर।
- गुलेल — पेड़ की Y-आकार की टहनी और रबर बैंड से।
- पतंग — पतले कागज और बाँस की तीलियों से।
- गुड्डा-गुड़िया — कपड़े के टुकड़ों से।
- लट्टू — लकड़ी के टुकड़े को तराशकर।
- रबर की गेंद — पुराने कपड़ों को लपेटकर।
एक खिलौना बनाने की विधि (कागज की नाव):
- एक चौकोर कागज लें।
- उसे बीच से मोड़ें।
- दोनों कोनों को ऊपर की ओर मोड़ें।
- नीचे के हिस्से को ऊपर की ओर मोड़कर नाव का आकार दें।
(नोट: विद्यार्थी अपनी पसंद का खिलौना बनाकर कक्षा में लाएँ और समूह के साथ खेलें।)
3अनेक बच्चे कपड़े धोने के लिए काम में आने वाली 'थापी' को बल्ले की तरह उपयोग कर लेते हैं। आप अपने घर या पास-पड़ोस की किन वस्तुओं को खेल-खिलौने की तरह उपयोग में लेते हैं?Show solution
हम घर या पास-पड़ोस की निम्नलिखित वस्तुओं को खेल-खिलौने की तरह उपयोग में लेते हैं—
- थापी — बल्ले की तरह उपयोग।
- पुराना टायर — लुढ़काने के खेल में।
- डिब्बे और बर्तन — ढोल-नगाड़े की तरह बजाने में।
- रस्सी — रस्साकशी और कूदने के खेल में।
- पत्थर के टुकड़े — सितोलिया (पिट्टू) खेलने में।
- पुराने कपड़े — गुड्डा-गुड़िया बनाने में।
- बाँस की छड़ी — डंडे की तरह खेलने में।
- नारियल का खोल — गाड़ी की तरह खींचने में।
4लेखक बचपन में अनेक काम उत्साह से दौड़-दौड़कर किया करते थे। आप कौन-से काम बहुत उत्साह से करते हैं?Show solution
मैं निम्नलिखित काम बहुत उत्साह से करता/करती हूँ—
- खेल-कूद — क्रिकेट, कबड्डी, पतंग उड़ाना।
- चित्रकारी — रंग-बिरंगे चित्र बनाना।
- त्योहारों की तैयारी — दीपावली पर दीये सजाना, होली पर रंग खेलना।
- पिकनिक पर जाना — परिवार के साथ घूमने जाना।
- नई किताबें पढ़ना — कहानी की किताबें पढ़ना।
- बागवानी — पौधों में पानी देना और फूल लगाना।
- खाना बनाने में मदद करना — माँ के साथ रसोई में सहायता करना।
(नोट: विद्यार्थी अपने व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार उत्तर लिखें।)
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in मेरा बचपन for CBSE Class 5 Hindi?
Are these NCERT Solutions for मेरा बचपन free?
How should I revise मेरा बचपन for Class 5 exams?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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