अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले
Himachal Pradesh Board · Class 10 · Hindi
NCERT Solutions for अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले — Himachal Pradesh Board Class 10 Hindi.
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Get startedमौखिक प्रश्न (एक-दो पंक्तियों में उत्तर)
1बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?Show solution
बड़े-बड़े बिल्डर अपनी इमारतें और कॉलोनियाँ बनाने के लिए अधिक से अधिक जमीन प्राप्त करना चाहते थे। इसीलिए वे समुद्र को पीछे धकेलकर उसकी जमीन पर कब्जा कर रहे थे।
2लेखक का घर किस शहर में था?Show solution
लेखक का घर बंबई (मुंबई) शहर में था।
3जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है?Show solution
बढ़ती हुई आबादी और शहरीकरण के कारण जीवन छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में सिमटने लगा है। पहले जहाँ बड़े-बड़े आँगन, बाग-बगीचे और खुले मैदान होते थे, अब वहाँ बहुमंजिली इमारतों के छोटे-छोटे फ्लैट बन गए हैं।
4कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे?Show solution
लेखक की पत्नी ने कबूतरों के आशियाने वाली जगह पर जाली लगा दी थी और उनके बच्चों को दूसरी जगह कर दिया था। अपने बच्चों से बिछड़ने और घर छिन जाने के कारण कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।
लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर
1अरब में लराकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?Show solution
हजरत नूह एक पैगंबर थे जो लगभग 950 वर्षों तक जीवित रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक कठिनाइयाँ झेलीं और लंबे समय तक संघर्ष किया। इसीलिए अरब में किसी बहुत अधिक उम्र वाले व्यक्ति को 'नूह' के नाम से याद किया जाता है। 'नूह' का अर्थ ही है — बहुत अधिक रोने वाला अर्थात् दुखी रहने वाला।
2लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?Show solution
लेखक की माँ रात के समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं। उनका मानना था कि रात को पेड़-पौधे सो जाते हैं और उस समय उनके पत्ते तोड़ने से उन्हें कष्ट होता है। यह प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और सम्मान का भाव था।
3प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?Show solution
प्रकृति में आए असंतुलन के कारण कई भयंकर परिणाम सामने आए — असमय बाढ़, भूकंप, तूफान और सूखे जैसी आपदाएँ बढ़ गईं। ऋतुओं का चक्र बिगड़ गया। पशु-पक्षियों के आवास नष्ट हो गए और अनेक प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर आ गईं।
4लेखक की माँ ने पूरे दिन का रोजा क्यों रखा?Show solution
लेखक के घर के पास एक कबूतर के घोंसले में दो अंडे थे। एक दिन अचानक बिल्ली ने उन अंडों को तोड़ दिया। इस घटना से लेखक की माँ को बहुत दुख हुआ। उन्होंने उन बेजुबान पक्षियों के दुख में सहभागिता जताने के लिए पूरे दिन का रोजा रखा।
5लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।Show solution
लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक आते-आते अनेक बदलाव महसूस किए। ग्वालियर में उनका बड़ा घर था जिसमें आँगन, बाग-बगीचे और खुली जगह थी। वहाँ पशु-पक्षियों के लिए भी स्थान था। लेकिन बंबई में आकर जीवन एक छोटे से फ्लैट में सिमट गया। पेड़-पौधे, खुला आकाश और प्रकृति से निकटता समाप्त हो गई। शहरीकरण के कारण पशु-पक्षियों के आवास भी छिन गए।
6'डेरा डालने' से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।Show solution
'डेरा डालना' का अर्थ है — किसी स्थान पर अस्थायी रूप से रहना या पड़ाव डालना। पाठ में इस शब्द का प्रयोग उन पशु-पक्षियों के संदर्भ में हुआ है जिनके घर मनुष्य ने छीन लिए। वे अपना स्थायी घर खोकर यहाँ-वहाँ अस्थायी आश्रय ढूँढ़ने पर मजबूर हो गए हैं।
7शेख अयाज के पिता अपने बाजू पर काला च्यांटा रेंगता देख भोजन छोड़ कर क्यों उठ खड़े हुए?Show solution
शेख अयाज के पिता कुएँ से नहाकर आए थे। भोजन करते समय उन्होंने देखा कि उनके बाजू पर एक काला च्यूँटा रेंग रहा है। उन्हें एहसास हुआ कि वे उस च्यूँटे को उसके घर (कुएँ) से बेघर करके ले आए हैं। इसलिए उन्होंने तुरंत भोजन छोड़ दिया और उस च्यूँटे को वापस कुएँ पर छोड़ने चले गए। यह उनकी दूसरे जीवों के प्रति गहरी संवेदनशीलता और करुणा का प्रमाण था।
लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर
1बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?Show solution
बढ़ती हुई आबादी के कारण पर्यावरण पर अत्यंत विनाशकारी प्रभाव पड़ा। अधिक जनसंख्या के लिए आवास बनाने हेतु जंगल काटे गए, पहाड़ खोदे गए और समुद्र को पीछे धकेला गया। पशु-पक्षियों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए। प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया जिसके परिणामस्वरूप बाढ़, भूकंप, तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ने लगीं। वायु और जल प्रदूषण में वृद्धि हुई। अनेक वन्य प्राणियों की प्रजातियाँ विलुप्त होने लगीं। कुल मिलाकर मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति को गंभीर क्षति पहुँचाई।
2लेखक की पत्नी को खिड़की में जाली क्यों लगवानी पड़ी?Show solution
लेखक के घर की एक खिड़की के पास कबूतरों ने अपना घोंसला बना लिया था और वहाँ उनके बच्चे भी थे। कबूतर दिन में कई बार आते-जाते थे जिससे घर में परेशानी होती थी। वे कभी किसी चीज को गिराकर तोड़ देते, कभी लाइब्रेरी में घुस जाते। इस रोज-रोज की परेशानी से तंग आकर लेखक की पत्नी ने उस जगह जाली लगवा दी, बच्चों को दूसरी जगह कर दिया और खिड़की भी बंद करने लगीं।
3समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?Show solution
समुद्र के गुस्से की वजह यह थी कि बड़े-बड़े बिल्डरों ने अपनी इमारतें और कॉलोनियाँ बनाने के लिए समुद्र की जमीन पर अतिक्रमण किया था। उसे लगातार पीछे धकेला जा रहा था। इस अतिक्रमण से क्रुद्ध होकर समुद्र ने अपना गुस्सा बंबई में भयंकर तूफान और बाढ़ के रूप में निकाला। उसने कई बस्तियों को तहस-नहस कर दिया और अनेक इमारतों को नुकसान पहुँचाया। यह प्रकृति की सहनशक्ति की सीमा टूटने का परिणाम था।
4'मट्टी से मट्टी मिले, खो के सभी निशान, किसमें कितना कौन है, कैसे हो पहचान' — इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?Show solution
इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक यह कहना चाहता है कि इस संसार में सभी प्राणी — मनुष्य, पशु, पक्षी — एक ही मिट्टी से बने हैं और अंत में उसी मिट्टी में मिल जाते हैं। मृत्यु के बाद सबके सब निशान मिट जाते हैं और कोई भेद नहीं रहता। इसलिए मनुष्य को किसी भी प्राणी को तुच्छ नहीं समझना चाहिए। सभी जीव समान हैं और सबको जीने का समान अधिकार है। मनुष्य को दूसरे जीवों के प्रति संवेदनशील और दयालु होना चाहिए।
लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए
1नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था।Show solution
इन पंक्तियों में लेखक यह स्पष्ट करना चाहता है कि प्रकृति बहुत सहनशील है, परंतु उसकी सहनशक्ति की भी एक सीमा होती है। जब मनुष्य अपने लालच और स्वार्थ के लिए प्रकृति का अत्यधिक दोहन करता है, उसे नुकसान पहुँचाता है, तो प्रकृति भी अपना प्रतिशोध लेती है। बंबई में बड़े-बड़े बिल्डरों ने समुद्र को पीछे धकेलकर उसकी जमीन पर कब्जा किया। इसके परिणामस्वरूप समुद्र ने भयंकर तूफान और बाढ़ के रूप में अपना गुस्सा निकाला और बस्तियों को तबाह कर दिया। यह प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का दुष्परिणाम था।
2जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।Show solution
इस पंक्ति का आशय यह है कि जो व्यक्ति या प्राणी जितना अधिक महान, उदार और सहनशील होता है, वह उतना ही कम क्रोध करता है। बड़प्पन का गुण यही है कि वह छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित नहीं होता। लेखक इसे समुद्र के संदर्भ में कह रहा है — समुद्र इतना विशाल है, फिर भी वह बहुत देर तक सहता रहा। जब सहनशक्ति की सीमा टूट गई तभी उसने प्रतिक्रिया की। यह पंक्ति हमें यह भी सिखाती है कि सच्चा बड़प्पन क्षमा और सहनशीलता में है।
3इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है। इनमें से कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं। जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है।Show solution
इन पंक्तियों में लेखक मानव सभ्यता के विस्तार के कारण पशु-पक्षियों की दुर्दशा का मार्मिक चित्रण कर रहा है। शहरों और बस्तियों के बनने से जंगल कटे, पेड़ उजड़े और पशु-पक्षियों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए। कुछ पक्षी और जानवर शहर छोड़कर दूसरी जगह चले गए, परंतु जो नहीं जा सके वे यहाँ-वहाँ अस्थायी आश्रय ढूँढ़ने पर मजबूर हो गए। लेखक मनुष्य की स्वार्थपरता की आलोचना करते हुए यह बताना चाहता है कि हमने अपने विकास के नाम पर अनगिनत जीवों को बेघर कर दिया है।
4शेख अयाज के पिता बोले, 'नहीं, यह बात नहीं है। मैंने एक घरवाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ।'Show solution
इन पंक्तियों में शेख अयाज के पिता की असाधारण संवेदनशीलता और करुणा का भाव प्रकट होता है। जब वे कुएँ से नहाकर आए तो उनके बाजू पर एक काला च्यूँटा आ गया था। भोजन करते समय उन्हें यह एहसास हुआ कि वे उस च्यूँटे को उसके घर से बेघर करके ले आए हैं। उन्होंने तुरंत भोजन छोड़ दिया और उसे वापस कुएँ पर छोड़ने चले गए। इन पंक्तियों में यह संदेश छिपा है कि सच्ची मानवता यही है कि हम छोटे से छोटे जीव के प्रति भी दया और करुणा का भाव रखें और किसी को भी बेघर न करें।
भाषा-अध्ययन
1उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित वाक्यों में कारक चिह्नों को पहचानकर रेखांकित कीजिए और उनके नाम रिक्त स्थानों में लिखिए।Show solution
(ख) मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ। → के लिए → संप्रदान कारक
(ग) मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया। → को → कर्म कारक
(घ) कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे। → में → अधिकरण कारक
(ङ) दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो। → पर → अधिकरण कारक
2नीचे दिए गए शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए — चींटी, घोड़ा, आवाज, बिल, फ़ौज, रोटी, बिंदु, दीवार, टुकड़ा।Show solution
|--------|--------|
| चींटी | चींटियाँ |
| घोड़ा | घोड़े |
| आवाज | आवाजें |
| बिल | बिल (अपरिवर्तित) |
| फ़ौज | फ़ौजें |
| रोटी | रोटियाँ |
| बिंदु | बिंदु (अपरिवर्तित) |
| दीवार | दीवारें |
| टुकड़ा | टुकड़े |
3निम्नलिखित वाक्यों में उचित शब्द भरकर वाक्य पूरे कीजिए — (क) आजकल _____ बहुत खराब है। (जमाना/ज़माना) (ख) पूरे कमरे को _____ दो। (सजा/सज़ा) (ग) _____ चीनी तो देना। (जरा/ज़रा) (घ) माँ दही _____ भूल गई। (जमाना/ज़माना) (ङ) दोषी को _____ दी गई। (सजा/सज़ा) (च) महात्मा के चेहरे पर _____ था। (तेज/तेज़)Show solution
(ख) पूरे कमरे को सजा दो। (सजाना = सँवारना — नुक्तारहित)
(ग) ज़रा चीनी तो देना। (ज़रा = थोड़ा — नुक्तायुक्त)
(घ) माँ दही जमाना भूल गई। (जमाना = जमाना/दही जमाना — नुक्तारहित)
(ङ) दोषी को सज़ा दी गई। (सज़ा = दंड — नुक्तायुक्त)
(च) महात्मा के चेहरे पर तेज था। (तेज = प्रकाश/कांति — नुक्तारहित)
योग्यता विस्तार एवं परियोजना कार्य
1पशु-पक्षी एवं वन्य संरक्षण केंद्रों में जाकर पशु-पक्षियों की सेवा-सुश्रूषा के संबंध में जानकारी प्राप्त कीजिए।Show solution
यह एक क्रियाकलाप आधारित प्रश्न है। विद्यार्थी अपने नजदीकी चिड़ियाघर, पशु-चिकित्सालय या वन्य प्राणी संरक्षण केंद्र में जाकर निम्नलिखित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं —
- वहाँ किन-किन पशु-पक्षियों की देखभाल होती है।
- उन्हें क्या खिलाया-पिलाया जाता है।
- बीमार पशु-पक्षियों का उपचार कैसे होता है।
- संरक्षण केंद्र में कितने कर्मचारी काम करते हैं।
- हम किस प्रकार इनकी सहायता कर सकते हैं।
इस जानकारी को एक रिपोर्ट के रूप में लिखकर कक्षा में प्रस्तुत करें।
2 (परियोजना)किसी ऐसी घटना का वर्णन कीजिए जब अपने मनोरंजन के लिए मानव द्वारा पशु-पक्षियों का उपयोग किया गया हो।Show solution
एक बार मैंने अपने गाँव में एक मेला देखा जहाँ एक मदारी ने भालू को जंजीरों से बाँधकर नचाया। भालू को नाचने के लिए मजबूर किया जा रहा था और वह दर्द से कराह रहा था। लोग उसे देखकर हँस रहे थे और तालियाँ बजा रहे थे, परंतु किसी को उस बेजुबान जानवर की पीड़ा का एहसास नहीं था।
इसी प्रकार सर्कस में शेर, हाथी, घोड़े आदि जानवरों को कठिन करतब करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। बैलगाड़ी दौड़, मुर्गों की लड़ाई, साँपों का खेल — ये सब मनुष्य के मनोरंजन के लिए पशु-पक्षियों के शोषण के उदाहरण हैं।
हमें यह समझना चाहिए कि पशु-पक्षी भी हमारी तरह जीवित प्राणी हैं और उन्हें भी दर्द होता है। उनका उपयोग मनोरंजन के लिए करना अमानवीय और क्रूरता है।
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