बड़े भाई साहब
Himachal Pradesh Board · Class 10 · Hindi
NCERT Solutions for बड़े भाई साहब — Himachal Pradesh Board Class 10 Hindi.
Interactive on Super Tutor
Studying बड़े भाई साहब? Get the full interactive chapter.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for ncert solutions and more.
1,000+ Class 10 students started this chapter today

This is just one of 9+ visuals inside Super Tutor's बड़े भाई साहब chapter
Explore the full setमौखिक प्रश्न
1कथा नायक की रुचि किन कार्यों में थी?Show solution
कथा नायक (छोटे भाई) की रुचि खेल-कूद, कनकौए उड़ाना, गुल्ली-डंडा खेलना, मैदान में उछल-कूद करना तथा मेला-तमाशा देखने जैसे कार्यों में थी। पढ़ाई में उसका बिल्कुल मन नहीं लगता था।
2बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे?Show solution
बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल यही पूछते थे — "कहाँ थे?" अर्थात् वे हमेशा छोटे भाई की अनुपस्थिति और खेल-कूद में समय बर्बाद करने पर नज़र रखते थे।
3दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?Show solution
दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के मन में अभिमान आ गया। उसे लगने लगा कि बिना पढ़े भी वह पास हो जाता है, इसलिए उसने खेल-कूद और मनोरंजन में और अधिक समय बिताना शुरू कर दिया तथा बड़े भाई साहब की डाँट-फटकार की परवाह कम हो गई।
4बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने बड़े थे और वे कौन-सी कक्षा में पढ़ते थे?Show solution
बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में पाँच साल बड़े थे। जब छोटा भाई नौवीं कक्षा में था, तब बड़े भाई साहब दसवीं (मैट्रिक) की कक्षा में पढ़ते थे। कहानी के आरंभ में छोटा भाई पाँचवीं कक्षा में और बड़े भाई साहब आठवीं कक्षा में थे।
5बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?Show solution
बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए कभी कापी पर, कभी किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों और बिल्लियों के चित्र बनाते थे। कभी-कभी वे किसी एक शब्द या नाम को बार-बार लिखते रहते थे।
लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर
1छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम-टेबिल बनाते समय क्या-क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?Show solution
छोटे भाई ने टाइम-टेबिल बनाते समय सोचा कि वह सुबह उठकर पढ़ेगा, खेलने का समय निश्चित करेगा और हर विषय को उचित समय देगा। परंतु वह उसका पालन नहीं कर पाया क्योंकि खेल के मैदान की हवा, दोस्तों का साथ और खेल-कूद का आकर्षण उसे टाइम-टेबिल भुला देता था। मन पढ़ाई में लगता ही नहीं था।
2एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई साहब के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?Show solution
गुल्ली-डंडा खेलकर लौटने पर बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कड़े शब्दों में डाँटते हुए कहा कि तुम्हें खेल-कूद के अलावा कुछ नहीं सूझता। उन्होंने उसे समझाया कि यदि इसी तरह समय बर्बाद करते रहे तो जीवन में कुछ नहीं बन पाओगे और परीक्षा में फेल हो जाओगे।
3बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?Show solution
बड़े भाई साहब को अपने मन की इच्छाएँ इसलिए दबानी पड़ती थीं क्योंकि वे परिवार में बड़े थे और छोटे भाई के अभिभावक की भूमिका निभा रहे थे। यदि वे स्वयं खेल-कूद में लग जाते, तो छोटे भाई को सही राह दिखाने का उनका नैतिक अधिकार समाप्त हो जाता। उन्हें अपना कर्तव्य निभाना था।
4बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?Show solution
बड़े भाई साहब छोटे भाई को सलाह देते थे कि वह खेल-कूद छोड़कर मन लगाकर पढ़ाई करे, समय की पाबंदी रखे और अपनी नींव मजबूत करे। वे यह सलाह इसलिए देते थे क्योंकि वे उसका भला चाहते थे और जानते थे कि बिना परिश्रम के जीवन में सफलता नहीं मिलती।
5छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फ़ायदा उठाया?Show solution
जब बड़े भाई साहब का व्यवहार नरम पड़ा तो छोटे भाई ने इसका पूरा फायदा उठाया। उसने खेल-कूद और मनोरंजन में और अधिक समय बिताना शुरू कर दिया। उसने सोचा कि अब भाई साहब कुछ नहीं कहेंगे, इसलिए वह पहले से भी अधिक स्वच्छंद हो गया और पढ़ाई की ओर ध्यान देना लगभग बंद कर दिया।
लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर
1बड़े भाई की डॉट-फटकार अगर न मिलती, तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए।Show solution
यदि बड़े भाई साहब की डाँट-फटकार न मिलती तो छोटा भाई कक्षा में अव्वल नहीं आता। छोटे भाई का स्वभाव खेल-कूद और मनोरंजन में रमने का था। उसे पढ़ाई में बिल्कुल रुचि नहीं थी। बड़े भाई साहब की डाँट ही उसे समय-समय पर सचेत करती थी और उसके मन में एक भय बनाए रखती थी। इसी भय के कारण वह कभी-कभी पढ़ाई की ओर ध्यान देता था। बड़े भाई की फटकार न होती तो वह पूरी तरह खेल-कूद में डूब जाता और परीक्षा में फेल हो जाता। अतः बड़े भाई की डाँट-फटकार उसकी सफलता में सहायक थी।
2इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन गौर-तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?Show solution
लेखक प्रेमचंद ने इस पाठ में रटंत शिक्षा पद्धति पर व्यंग्य किया है। उन्होंने बताया है कि बड़े भाई साहब वर्षों से एक ही कक्षा में पढ़ते हैं, फिर भी फेल होते हैं क्योंकि वे केवल रटते हैं, समझते नहीं। अंग्रेजी के कठिन पाठ्यक्रम, इतिहास की तारीखें रटना, बेकार के प्रश्नों को याद करना — इन सब पर व्यंग्य किया गया है। लेखक का मानना है कि परीक्षा पास करना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है, बल्कि बुद्धि का विकास और जीवन की समझ असली शिक्षा है। हम लेखक के विचार से पूरी तरह सहमत हैं क्योंकि व्यावहारिक ज्ञान और समझ ही जीवन में काम आती है।
3बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?Show solution
बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ केवल किताबी पढ़ाई से नहीं आती। उनका मानना था कि जीवन के अनुभव, बड़े-बुजुर्गों की सीख और संसार के व्यावहारिक ज्ञान से जीवन की असली समझ आती है। उन्होंने उदाहरण दिया कि उनकी माँ और दादा ने कोई बड़ी पढ़ाई नहीं की, फिर भी वे घर-परिवार को बखूबी चलाते हैं। किताबें पढ़कर डिग्री लेना अलग बात है और जीवन को समझना अलग। जीवन की समझ संघर्ष, अनुभव और परिपक्वता से आती है।
4छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?Show solution
छोटे भाई के मन में बड़े भाई साहब के प्रति श्रद्धा कई कारणों से उत्पन्न हुई। बड़े भाई साहब हमेशा उसकी भलाई चाहते थे और उसे सही राह दिखाते थे। वे स्वयं अपनी इच्छाओं को दबाकर अपना कर्तव्य निभाते थे। उनकी डाँट-फटकार में भी प्रेम और चिंता झलकती थी। जब बड़े भाई साहब ने कनकौआ पकड़ने के लिए दौड़ लगाई, तब छोटे भाई को समझ आया कि उनके भीतर भी बच्चा है, फिर भी वे अपनी जिम्मेदारी नहीं भूलते। यही देखकर उसके मन में श्रद्धा जागी।
5बड़े भाई की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।Show solution
बड़े भाई साहब की स्वभावगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. जिम्मेदार: वे अपने छोटे भाई की देखभाल को अपना कर्तव्य मानते थे।
2. अनुशासनप्रिय: वे स्वयं कठोर परिश्रम करते और छोटे भाई को भी अनुशासन में रहने की सीख देते थे।
3. उपदेश देने में निपुण: वे बड़े प्रभावशाली ढंग से नसीहत देते थे।
4. स्नेही: डाँट-फटकार के बावजूद उनके मन में छोटे भाई के प्रति गहरा प्रेम था।
5. व्यावहारिक: वे किताबी ज्ञान से अधिक जीवन के अनुभव को महत्व देते थे।
6. बालसुलभ: मन से वे भी बच्चे थे — कनकौआ पकड़ने के लिए दौड़ पड़ना इसका प्रमाण है।
6बड़े भाई साहब ने ज़िदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्वपूर्ण कहा है?Show solution
बड़े भाई साहब ने ज़िंदगी के अनुभव को किताबी ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण बताया है। उनका तर्क था कि उनकी माँ और दादा ने कोई बड़ी पढ़ाई नहीं की, फिर भी वे घर-परिवार, खेती-बाड़ी और जीवन की जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाते हैं। इसके विपरीत, पढ़े-लिखे लोग भी कभी-कभी व्यावहारिक जीवन में असफल हो जाते हैं। किताबें पढ़कर परीक्षा पास करना अलग बात है, परंतु जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति अनुभव से ही आती है। इसीलिए उन्होंने जीवन के अनुभव को श्रेष्ठ माना।
7बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि—(क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है। (ख) भाई साहब को ज़िदगी का अच्छा अनुभव है। (ग) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है। (घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।Show solution
(क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है:
जब भी बड़े भाई साहब छोटे भाई को डाँटते थे, वह चुपचाप सुनता था और उनका विरोध नहीं करता था। पाठ में आता है — "उनका रोब मुझ पर पड़ता था।" कनकौआ पकड़ने के बाद जब भाई साहब ने उसे समझाया, तो उसके मन में श्रद्धा उत्पन्न हुई और उसने सिर झुका लिया।
(ख) भाई साहब को ज़िंदगी का अच्छा अनुभव है:
भाई साहब ने माँ और दादा का उदाहरण देकर समझाया कि बिना पढ़े भी लोग जीवन को सफलतापूर्वक चला सकते हैं। उन्होंने कहा — "जिंदगी की समझ किताबों से नहीं, अनुभव से आती है।" यह उनकी परिपक्व सोच और जीवन-अनुभव को दर्शाता है।
(ग) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है:
पाठ के अंत में जब एक कटा हुआ कनकौआ उनके ऊपर से गुजरा, तो भाई साहब ने उछलकर उसकी डोर पकड़ ली और बेतहाशा होस्टल की तरफ दौड़ पड़े। यह दृश्य स्पष्ट करता है कि उनके भीतर भी एक बच्चा छिपा हुआ है।
(घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं:
भाई साहब ने कहा — "मेरा भी जी ललचाता है; लेकिन करूँ क्या, खुद बेराह चलूँ, तो तुम्हारी रक्षा कैसे करूँ? यह कर्तव्य भी तो मेरे सिर है।" यह कथन सिद्ध करता है कि वे छोटे भाई की भलाई के लिए अपनी इच्छाओं का बलिदान करते हैं।
लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए
1इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज नहीं, असल चीज है बुद्धि का विकास।Show solution
इस कथन में लेखक ने रटंत शिक्षा पद्धति पर व्यंग्य किया है। बड़े भाई साहब का कहना है कि केवल परीक्षा पास कर लेना वास्तविक शिक्षा नहीं है। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए रट-रटाकर अंक प्राप्त किए जा सकते हैं, परंतु इससे बुद्धि का विकास नहीं होता। असली शिक्षा वह है जो व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति को बढ़ाए, उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाए। जो विद्यार्थी केवल नंबर लाने के लिए पढ़ता है, वह जीवन में व्यावहारिक ज्ञान से वंचित रह जाता है। अतः शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बुद्धि और विवेक का विकास है।
2फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।Show solution
इस कथन में छोटे भाई की मनोदशा का सजीव चित्रण है। जिस प्रकार मृत्यु और विपत्ति सामने होने पर भी मनुष्य अपने मोह-माया के बंधन नहीं तोड़ पाता, उसी प्रकार छोटा भाई बड़े भाई साहब की कड़ी डाँट-फटकार खाने के बाद भी खेल-कूद का मोह नहीं छोड़ पाता था। वह जानता था कि खेलना उचित नहीं है, भाई साहब नाराज होंगे, फिर भी खेल का आकर्षण उसे बार-बार मैदान की ओर खींच ले जाता था। यह मानव स्वभाव की कमजोरी को दर्शाता है कि जानते-बूझते भी हम गलत आदतें नहीं छोड़ पाते।
3बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने?Show solution
यह कथन बड़े भाई साहब ने छोटे भाई को शिक्षा का महत्व समझाते हुए कहा है। इसमें एक सुंदर उपमा का प्रयोग किया गया है। जिस प्रकार किसी मकान की नींव यदि कमजोर हो तो वह मकान टिकाऊ नहीं बन सकता, उसी प्रकार यदि प्रारंभिक शिक्षा की नींव मजबूत न हो तो आगे की पढ़ाई और जीवन में सफलता संभव नहीं है। बड़े भाई साहब का आशय था कि छोटे भाई को अभी से मन लगाकर पढ़ना चाहिए, क्योंकि यही उसके भविष्य की नींव है। यदि अभी लापरवाही की तो आगे चलकर पछताना पड़ेगा।
4आँखें आसमान की ओर थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था, मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकलकर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।Show solution
यह अत्यंत काव्यात्मक और भावपूर्ण वाक्य है। इसमें कटे हुए कनकौए (पतंग) का वर्णन किया गया है। छोटे भाई की आँखें आसमान में उस कटे हुए कनकौए को देख रही थीं जो धीरे-धीरे झूमता हुआ नीचे आ रहा था। लेखक ने उस कनकौए की तुलना एक ऐसी आत्मा से की है जो स्वर्ग (आकाश) से निकलकर उदास मन से धरती (नए संस्कार) की ओर आ रही हो। यह वर्णन बताता है कि छोटे भाई का मन पूरी तरह उस कनकौए में रमा हुआ था और उसके मन में उसे पकड़ने की तीव्र इच्छा थी। यह बालमन की स्वाभाविक चंचलता का सुंदर चित्रण है।
भाषा अध्ययन
1निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए— नसीहत, रोष, आजादी, राजा, ताज्जुबShow solution
| शब्द | पर्यायवाची शब्द |
|------|----------------|
| नसीहत | सलाह, उपदेश |
| रोष | क्रोध, कोप |
| आजादी | स्वतंत्रता, स्वच्छंदता |
| राजा | नृप, महीप |
| ताज्जुब | आश्चर्य, अचंभा |
2निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए— सिर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना, लोहे के चने चबाना, दाँतों पसीना आना, ऐरा-गैरा नत्थू खैरा।Show solution
1. सिर पर नंगी तलवार लटकना (हर समय खतरा बना रहना):
परीक्षा के दिनों में हर विद्यार्थी के सिर पर नंगी तलवार लटकती रहती है।
2. आड़े हाथों लेना (कड़ी आलोचना करना / खरी-खोटी सुनाना):
देर से घर लौटने पर माँ ने रमेश को आड़े हाथों लिया।
3. अंधे के हाथ बटेर लगना (बिना प्रयास के लाभ मिलना):
बिना मेहनत किए परीक्षा में प्रथम आना तो अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा है।
4. लोहे के चने चबाना (बहुत कठिन काम करना):
इस प्रतियोगी परीक्षा को पास करना लोहे के चने चबाने जैसा है।
5. दाँतों पसीना आना (बहुत कठिनाई होना):
इस गणित के प्रश्न को हल करने में मुझे दाँतों पसीना आ गया।
6. ऐरा-गैरा नत्थू खैरा (साधारण / कोई भी व्यक्ति):
इस पद पर कोई ऐरा-गैरा नत्थू खैरा नहीं बैठ सकता, यहाँ योग्यता चाहिए।
3निम्नलिखित तत्सम, तद्भव, देशी, आगत शब्दों को दिए गए उदाहरणों के आधार पर छाँटकर लिखिए। तालीम, जल्दबाजी, पुख्ता, हाशिया, चेष्टा, जमात, हर्फ़, सूक्तिबाण, जानलेवा, आँखफोड़, घुड़कियाँ, आधिपत्य, पन्ना, मेला-तमाशा, मसलन, स्पेशल, स्कीम, फटकार, प्रातःकाल, विद्वान, निपुण, भाई साहब, अवहेलना, टाइम-टेबिलShow solution
| तत्सम | तद्भव | देशज | आगत (अंग्रेजी) | आगत (उर्दू/अरबी-फ़ारसी) |
|-------|-------|------|----------------|------------------------|
| चेष्टा | जल्दबाजी | जानलेवा | स्पेशल | तालीम |
| सूक्तिबाण | आँखफोड़ | मेला-तमाशा | स्कीम | पुख्ता |
| आधिपत्य | घुड़कियाँ | फटकार | टाइम-टेबिल | हाशिया |
| प्रातःकाल | पन्ना | भाई साहब | | जमात |
| विद्वान | | | | हर्फ़ |
| निपुण | | | | मसलन |
| अवहेलना | | | | |
*(नोट: 'भाई साहब' — 'भाई' तद्भव है, 'साहब' उर्दू/अरबी है — यह मिश्रित शब्द है।)*
4नीचे दिए वाक्यों में कौन-सी क्रिया है—सकर्मक या अकर्मक? लिखिए— (क) उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया। (ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा। (ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा। (घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता। (ङ) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो। (च) मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था।Show solution
(क) उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया।
क्रिया: पकड़ लिया — सकर्मक क्रिया (कर्म = हाथ)
(ख) फिर चोरों-सा जीवन कटने लगा।
क्रिया: कटने लगा — अकर्मक क्रिया (कोई कर्म नहीं)
(ग) शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा।
क्रिया: पढ़ा होगा — सकर्मक क्रिया (कर्म = हाल)
(घ) मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता।
क्रिया: बहाने लगता — सकर्मक क्रिया (कर्म = आँसू)
(ङ) समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो।
क्रिया: लिखो — सकर्मक क्रिया (कर्म = निबंध)
(च) मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था।
क्रिया: दौड़ रहा था — अकर्मक क्रिया (कोई कर्म नहीं)
5'इक' प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए— विचार, इतिहास, संसार, दिन, नीति, प्रयोग, अधिकारShow solution
| मूल शब्द | 'इक' प्रत्यय लगाने पर |
|----------|----------------------|
| विचार | वैचारिक |
| इतिहास | ऐतिहासिक |
| संसार | सांसारिक |
| दिन | दैनिक |
| नीति | नैतिक |
| प्रयोग | प्रायोगिक |
| अधिकार | आधिकारिक |
योग्यता विस्तार
1प्रेमचंद की कहानियाँ मानसरोवर के आठ भागों में संकलित हैं। इनमें से कहानियाँ पढ़िए और कक्षा में सुनाइए। कुछ कहानियों का मंचन भी कीजिए।Show solution
यह एक गतिविधि-आधारित प्रश्न है। विद्यार्थी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियाँ जैसे — 'ईदगाह', 'पूस की रात', 'नमक का दारोगा', 'कफन', 'बड़े घर की बेटी' आदि पढ़ें। इन कहानियों को कक्षा में सुनाएँ और उनका मंचन करें। इससे भाषा-कौशल, अभिनय-क्षमता और साहित्यिक समझ का विकास होगा।
2शिक्षा रटंत विद्या नहीं है—इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।Show solution
यह एक परिचर्चा-आधारित गतिविधि है। विद्यार्थी निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करें:
- रटंत शिक्षा से केवल परीक्षा पास होती है, ज्ञान नहीं मिलता।
- समझकर पढ़ने से बुद्धि का विकास होता है।
- व्यावहारिक ज्ञान और रचनात्मक सोच ही असली शिक्षा है।
- आधुनिक शिक्षा पद्धति में बदलाव की आवश्यकता है।
3क्या पढ़ाई और खेल-कूद साथ-साथ चल सकते हैं—कक्षा में इस पर वाद-विवाद कार्यक्रम आयोजित कीजिए।Show solution
यह एक वाद-विवाद गतिविधि है। दोनों पक्षों के तर्क:
पक्ष में: खेल-कूद से शरीर और मन स्वस्थ रहता है, जिससे पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है। संतुलित दिनचर्या से दोनों साथ चल सकते हैं।
विपक्ष में: अत्यधिक खेल-कूद से पढ़ाई का समय नष्ट होता है और परीक्षा में नुकसान होता है।
निष्कर्ष: उचित समय-प्रबंधन से पढ़ाई और खेल-कूद दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।
4क्या परीक्षा पास कर लेना ही योग्यता का आधार है? इस विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।Show solution
यह एक विचार-विमर्श गतिविधि है। विद्यार्थी निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा करें:
- परीक्षा में अंक प्राप्त करना योग्यता का एकमात्र पैमाना नहीं है।
- व्यावहारिक ज्ञान, सामाजिक कौशल, रचनात्मकता भी योग्यता के अंग हैं।
- कई महान व्यक्ति परीक्षाओं में औसत थे, फिर भी जीवन में सफल रहे।
- योग्यता का आधार बहुआयामी होना चाहिए।
परियोजना कार्य
1कहानी में जिंदगी से प्राप्त अनुभवों को किताबी ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण बताया गया है। अपने माता-पिता, बड़े भाई-बहिनों या अन्य बुजुर्ग/बड़े सदस्यों से उनके जीवन के बारे में बातचीत कीजिए और पता लगाइए कि बेहतर ढंग से जिंदगी जीने के लिए क्या काम आया—समझदारी/पुराने अनुभव या किताबी पढ़ाई?Show solution
यह एक परियोजना-आधारित कार्य है। विद्यार्थी अपने परिवार के बड़े सदस्यों से बातचीत करें और निम्नलिखित प्रश्न पूछें:
- आपके जीवन में किन अनुभवों ने सबसे अधिक मदद की?
- क्या किताबी ज्ञान व्यावहारिक जीवन में उपयोगी रहा?
- जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में क्या काम आया?
इस बातचीत के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार करें और कक्षा में प्रस्तुत करें।
2आपकी छोटी बहिन/छोटा भाई छात्रावास में रहती/रहता है। उसकी पढ़ाई-लिखाई के संबंध में उसे एक पत्र लिखिए।Show solution
छात्रावास, दिल्ली
दिनांक: ______
प्रिय अनुज/अनुजा,
सप्रेम नमस्ते।
आशा है कि तुम वहाँ स्वस्थ और प्रसन्न होगे/होगी। माँ-पापा भी यहाँ ठीक हैं और तुम्हारी याद करते रहते हैं।
मैं यह पत्र तुम्हारी पढ़ाई-लिखाई के बारे में लिखना चाहता/चाहती हूँ। छात्रावास में रहकर पढ़ाई करना एक अच्छा अवसर है। यहाँ तुम्हें कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है, इसलिए अपनी जिम्मेदारी स्वयं समझो। एक नियमित टाइम-टेबिल बनाओ और उसका पालन करो। खेल-कूद भी जरूरी है, परंतु पढ़ाई को प्राथमिकता दो।
याद रखो, यह समय बहुत महत्वपूर्ण है। अभी की मेहनत भविष्य को उज्ज्वल बनाएगी। यदि कोई कठिनाई हो तो अपने शिक्षकों से अवश्य पूछो।
माँ-पापा को तुम्हारी बहुत चिंता रहती है। उन्हें नियमित रूप से फोन करते रहो।
तुम्हारा/तुम्हारी शुभचिंतक,
बड़ा भाई/बड़ी बहन
(नाम)
Stuck on a step?
Ask Super Tutor AI to explain any solution on this page in a simpler way — free, 24x7.
Ask a Doubt FreeFrequently Asked Questions
What are the important topics in बड़े भाई साहब for Himachal Pradesh Board Class 10 Hindi?
How to score full marks in बड़े भाई साहब — Himachal Pradesh Board Class 10 Hindi?
Where can I get free NCERT Solutions for बड़े भाई साहब Class 10 Hindi?
Sources & Official References
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
More resources for बड़े भाई साहब
Important Questions
Practice with board exam-style questions
Syllabus
What topics to cover
Revision Notes
Key points for last-minute revision
Study Plan
Step-by-step plan to ace this chapter
Flashcards
Quick-fire cards for active recall
Formula Sheet
All formulas in one place
Chapter Summary
Understand the chapter at a glance
Practice Quiz
Test yourself with a quick quiz
Concept Maps
See how topics connect visually
For serious students
Get the full बड़े भाई साहब chapter — for free.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan for Himachal Pradesh Board Class 10 Hindi.