भक्तिन-(महादेवी वर्मा) (Part 2) — NCERT Solutions
Jharkhand Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for भक्तिन-(महादेवी वर्मा) (Part 2), Jharkhand Board Class 12 Hindi: 14 textbook questions solved step by step.
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पाठ के साथ
1भक्तिन अपना वास्तविक नाम लोगों से क्यों छुपाती थी? भक्तिन को यह नाम किसने और क्यों दिया होगा?Show solution
दिया गया संदर्भ: यह प्रश्न महादेवी वर्मा के रेखाचित्र 'भक्तिन' पर आधारित है।
उत्तर:
भक्तिन का वास्तविक नाम लछमिन (लक्ष्मी) था। वह इस नाम को छुपाती थी क्योंकि उसका जीवन उस नाम के अनुरूप नहीं था। लक्ष्मी धन-वैभव और सौभाग्य की देवी हैं, किंतु भक्तिन का जीवन दरिद्रता, कष्ट और संघर्ष से भरा था। उसे लगता था कि इतने वैभवशाली नाम और उसकी दयनीय स्थिति में बहुत बड़ा विरोधाभास है, इसलिए वह इस नाम को सुनकर असहज हो जाती थी।
'भक्तिन' नाम किसने और क्यों दिया:
यह नाम लेखिका महादेवी वर्मा ने दिया। भक्तिन के सिर पर हमेशा एक छोटी-सी चोटी रहती थी, वह कानों में ठीक वैसे कुंडल पहनती थी जैसे वैष्णव भक्त पहनते हैं, और उसका आचरण एक समर्पित सेविका जैसा था। उसकी वेशभूषा और भक्तिभाव देखकर लेखिका ने उसे 'भक्तिन' नाम दिया। यह नाम उसके व्यक्तित्व और स्वभाव के अनुकूल था, इसलिए वह इसे सहर्ष स्वीकार करती थी।
2दो कन्या-रत्न पैदा करने पर भक्तिन पुत्र-महिमा में अंधी अपनी जिठानियों द्वारा घृणा व उपेक्षा का शिकार बनी। ऐसी घटनाओं से ही अकसर यह धारणा चलती है कि स्त्री ही स्त्री की दुश्मन होती है। क्या इससे आप सहमत हैं?Show solution
दिया गया संदर्भ: भक्तिन की जिठानियाँ पुत्रवती थीं और वे भक्तिन को कन्याओं की माँ होने के कारण हेय दृष्टि से देखती थीं।
उत्तर:
मैं इस धारणा से पूर्णतः सहमत नहीं हूँ कि 'स्त्री ही स्त्री की दुश्मन होती है।' इस धारणा के पक्ष और विपक्ष दोनों पर विचार करना आवश्यक है—
धारणा के पक्ष में:
भक्तिन की जिठानियों ने उसे कन्याओं की माँ होने के कारण प्रताड़ित किया। यह सच है कि कभी-कभी स्त्रियाँ ही पितृसत्तात्मक मूल्यों को आगे बढ़ाती हैं और दूसरी स्त्रियों को कुचलती हैं।
धारणा के विपक्ष में:
वास्तव में यह स्त्री की नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही पुरुष-प्रधान सामाजिक व्यवस्था की देन है। जिठानियाँ स्वयं उसी पितृसत्तात्मक सोच की शिकार थीं जो पुत्र को श्रेष्ठ और पुत्री को हीन मानती है। उन्होंने वही किया जो समाज ने उन्हें सिखाया था।
निष्कर्ष:
स्त्री-स्त्री की दुश्मन नहीं होती, बल्कि वह उस सामाजिक ढाँचे की शिकार होती है जो उसे ऐसा सोचने पर मजबूर करता है। जब स्त्री शिक्षित और जागरूक होती है, तो वह दूसरी स्त्री की सबसे बड़ी सहयोगी बनती है।
3भक्तिन की बेटी पर पंचायत द्वारा जबरन पति थोपा जाना एक दुर्घटना भर नहीं, बल्कि विवाह के संदर्भ में स्त्री के मानवाधिकार (विवाह करें या न करें अथवा किससे करें) इसकी स्वतंत्रता को कुचलते रहने की सदियों से चली आ रही सामाजिक परंपरा का प्रतीक है। कैसे?Show solution
दिया गया संदर्भ: भक्तिन की विधवा बेटी को पंचायत ने जबरन उसके जेठ के साथ विवाह करने पर बाध्य किया।
उत्तर:
भक्तिन की बेटी का प्रसंग केवल एक घटना नहीं, बल्कि यह उस सामाजिक परंपरा का प्रतीक है जो सदियों से स्त्री के मानवाधिकारों को कुचलती आई है। इसे निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है—
- स्त्री की इच्छा का दमन: भक्तिन की बेटी विधवा थी और वह अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करना चाहती थी, किंतु पंचायत ने उसकी इच्छा को कोई महत्त्व नहीं दिया।
- पंचायत का एकतरफा निर्णय: पंचायत पुरुष-प्रधान संस्था थी। उसने स्त्री की सहमति लिए बिना ही उसके लिए पति तय कर दिया। यह स्त्री को एक वस्तु की तरह मानने की मानसिकता को दर्शाता है।
- सामाजिक परंपरा की जड़ें: यह परंपरा सदियों पुरानी है। स्त्री को विवाह में 'दान' की वस्तु माना जाता रहा है। उसकी अपनी पसंद-नापसंद को कभी महत्त्व नहीं दिया गया।
- मानवाधिकार का हनन: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार घोषणापत्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छा से विवाह करने का अधिकार है। पंचायत का यह निर्णय इस मूल अधिकार का सीधा उल्लंघन था।
निष्कर्ष: इस प्रकार यह घटना एक व्यक्तिगत दुर्घटना नहीं, बल्कि उस व्यापक सामाजिक व्यवस्था का प्रतीक है जो स्त्री को स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार नहीं देती।
4भक्तिन अच्छी है, यह कहना कठिन होगा, क्योंकि उसमें दुर्गुणों का अभाव नहीं — लेखिका ने ऐसा क्यों कहा होगा?Show solution
दिया गया संदर्भ: लेखिका महादेवी वर्मा ने भक्तिन के चरित्र का यथार्थ चित्रण करते हुए यह टिप्पणी की है।
उत्तर:
लेखिका ने यह इसलिए कहा क्योंकि वे भक्तिन का आदर्शीकृत नहीं, बल्कि यथार्थवादी चित्रण करना चाहती थीं। भक्तिन में निम्नलिखित दुर्गुण विद्यमान थे—
- हठधर्मिता: भक्तिन अपनी बात पर अड़ी रहती थी और किसी की नहीं सुनती थी।
- झूठ बोलना: वह अपनी सुविधा के अनुसार झूठ बोल देती थी।
- चालाकी: वह शास्त्र और नियमों को अपनी सुविधा के अनुसार तोड़-मरोड़ लेती थी।
- अंधविश्वास: वह कई अंधविश्वासों में विश्वास रखती थी।
- दूसरों के काम में दखल: वह लेखिका के अन्य नौकरों और परिचितों के बारे में अपनी राय थोपती थी।
फिर भी लेखिका उसे क्यों पसंद करती हैं:
इन दुर्गुणों के बावजूद भक्तिन में अटूट स्वामिभक्ति, परिश्रम, ईमानदारी और निःस्वार्थ सेवाभाव था। लेखिका का यह कथन यह भी दर्शाता है कि कोई भी मनुष्य पूर्णतः अच्छा या बुरा नहीं होता — मनुष्य का चरित्र गुण-दोषों का मिश्रण होता है। इस प्रकार लेखिका ने भक्तिन को एक जीवंत और विश्वसनीय पात्र के रूप में प्रस्तुत किया है।
5भक्तिन द्वारा शास्त्र के प्रश्न को सुविधा से सुलझा लेने का क्या उदाहरण लेखिका ने दिया है?Show solution
दिया गया संदर्भ: भक्तिन व्यावहारिक बुद्धि की धनी थी और शास्त्र के कठिन प्रश्नों को अपनी सुविधा के अनुसार हल कर लेती थी।
उत्तर:
लेखिका ने इसका एक बहुत रोचक उदाहरण दिया है। भक्तिन के घर में मांस-मछली पकाने और खाने की परंपरा थी, किंतु लेखिका के घर में यह वर्जित था। भक्तिन को लेखिका के घर में रहते हुए इस नियम का पालन करना पड़ता था।
इस पर भक्तिन ने शास्त्र का सहारा लेकर अपनी स्थिति को इस प्रकार सुलझाया — उसने यह तर्क दिया कि जो व्यक्ति जिसके साथ रहता है, उसे उसी के नियमों का पालन करना चाहिए। इस प्रकार उसने 'यस्मिन् देशे यदाचारः' जैसे शास्त्रीय सिद्धांत को अपनी सुविधा के अनुसार लागू कर लिया।
इसके अतिरिक्त, जब लेखिका के घर में किसी त्योहार पर कोई विशेष नियम होता था, तो भक्तिन उसे भी अपनी व्याख्या से सुलझा लेती थी। इस प्रकार वह बिना किसी शास्त्रीय ज्ञान के भी शास्त्र के प्रश्नों को अपने व्यावहारिक तर्क से हल कर लेती थी। यह उसकी व्यावहारिक बुद्धि और चतुराई का प्रमाण है।
6भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती कैसे हो गई?Show solution
दिया गया संदर्भ: भक्तिन एक ग्रामीण महिला थी और उसके लेखिका के जीवन में आने से लेखिका के रहन-सहन और भाषा पर गहरा प्रभाव पड़ा।
उत्तर:
भक्तिन के आने से महादेवी वर्मा निम्नलिखित प्रकार से 'अधिक देहाती' हो गईं—
- भाषा पर प्रभाव: भक्तिन अवधी-भोजपुरी मिश्रित ग्रामीण भाषा बोलती थी। उसके साथ रहते-रहते लेखिका भी उसी लहजे और शब्दों का प्रयोग करने लगीं।
- खान-पान: भक्तिन देहाती खाना बनाती थी — मोटे अनाज की रोटी, साग-भाजी आदि। लेखिका भी उसी सादे देहाती भोजन की अभ्यस्त हो गईं।
- रहन-सहन: भक्तिन की देहाती आदतें और जीवनशैली धीरे-धीरे लेखिका के जीवन में भी समाहित होती गईं।
- पशु-पक्षियों से लगाव: भक्तिन के प्रभाव से लेखिका का ग्रामीण जीवन के प्रति, पशु-पक्षियों के प्रति लगाव और गहरा हुआ।
- सोच और दृष्टिकोण: भक्तिन की ग्रामीण सोच, उसके किस्से-कहानियाँ और जीवन-दर्शन ने लेखिका को जमीन से जोड़े रखा।
निष्कर्ष: इस प्रकार भक्तिन ने लेखिका को शहरी परिष्कार से दूर कर ग्रामीण जीवन की सादगी और यथार्थ के करीब ला दिया। यह 'देहातीपन' वास्तव में एक सकारात्मक परिवर्तन था।
पाठ के आसपास
1आलो अंधारि की नायिका और लेखिका बेबी हालदार और भक्तिन के व्यक्तित्व में आप क्या समानता देखते हैं?Show solution
दिया गया संदर्भ: 'आलो अंधारि' बेबी हालदार की आत्मकथा है जो एक घरेलू कामगार महिला की संघर्षगाथा है।
उत्तर:
बेबी हालदार और भक्तिन के व्यक्तित्व में निम्नलिखित समानताएँ हैं—
- संघर्षशील जीवन: दोनों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत किया। दोनों के जीवन में गरीबी, शोषण और सामाजिक उपेक्षा थी।
- स्वाभिमान: दोनों स्त्रियाँ अपने स्वाभिमान के प्रति सजग थीं। कठिन से कठिन परिस्थिति में भी उन्होंने अपना आत्मसम्मान नहीं खोया।
- परिश्रम और लगन: दोनों अत्यंत परिश्रमी थीं और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित थीं।
- निम्न सामाजिक स्तर: दोनों समाज के निचले तबके से आती थीं और घरेलू सेवा के काम से जुड़ी थीं।
- जिजीविषा: दोनों में जीने की अदम्य इच्छाशक्ति थी। विपरीत परिस्थितियों ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि और मजबूत बनाया।
- सामाजिक बंधनों से संघर्ष: दोनों ने पितृसत्तात्मक समाज की बेड़ियों से लड़ते हुए अपना रास्ता बनाया।
निष्कर्ष: दोनों पात्र उन लाखों भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं जो चुपचाप संघर्ष करती हैं और अपनी पहचान बनाती हैं।
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भाषा की बात
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Frequently Asked Questions
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