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Chapter 22 of 38
NCERT Solutions

रुबाइयाँ-( फ़िराक गोरखपुरी) (Part 2) — NCERT Solutions

Jharkhand Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for रुबाइयाँ-( फ़िराक गोरखपुरी) (Part 2), Jharkhand Board Class 12 Hindi: 9 textbook questions solved step by step.

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9 Questions Solved · 3 Sections

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पाठ के साथ

1शायर राखी के लच्छे को बिजली की चमक की तरह कहकर क्या भाव व्यंजित करना चाहता है?Show solution

दिया गया संदर्भ: फ़िराक गोरखपुरी की रुबाइयों में शायर ने राखी के लच्छे की तुलना बिजली की चमक से की है।

भाव-व्यंजना:

शायर इस उपमा के माध्यम से निम्नलिखित भाव व्यंजित करना चाहता है —

  1. क्षणभंगुरता का भाव: जिस प्रकार बिजली की चमक क्षण-भर के लिए चमककर अंधेरे में विलीन हो जाती है, उसी प्रकार राखी का रेशमी लच्छा भी अपनी चमक-दमक से क्षण-भर के लिए मन को आलोकित कर देता है। यह भाई-बहन के प्रेम की उस पवित्र अनुभूति का प्रतीक है जो हृदय में एक तीव्र आलोक उत्पन्न करती है।
  1. प्रेम की तीव्रता: बिजली की चमक जितनी तीव्र और प्रभावशाली होती है, उतना ही तीव्र और हृदयस्पर्शी भाई-बहन का प्रेम-बंधन होता है।
  1. सौंदर्य-बोध: राखी के चमकीले लच्छे की सुंदरता को बिजली की चमक से जोड़कर शायर ने उसे एक दिव्य और अलौकिक सौंदर्य प्रदान किया है।
  1. पावनता का भाव: जैसे बिजली की चमक आकाश को पवित्र आलोक से भर देती है, वैसे ही राखी का बंधन भाई के जीवन को बहन के प्रेम और शुभकामनाओं के प्रकाश से आलोकित कर देता है।

निष्कर्ष: इस प्रकार शायर ने बिजली की चमक की उपमा देकर राखी के लच्छे में निहित भाई-बहन के पवित्र, तीव्र और क्षण-भर में हृदय को आलोकित कर देने वाले प्रेम का सुंदर चित्रण किया है।

2खुद का परदा खोलने से क्या आशय है?Show solution

दिया गया संदर्भ: फ़िराक गोरखपुरी की रुबाइयों में 'खुद का परदा खोलना' पद का प्रयोग हुआ है।

आशय:

'खुद का परदा खोलने' से शायर का आशय है — अपने अंतर्मन की भावनाओं, अपनी कमज़ोरियों और अपने प्रेम को बिना किसी संकोच या छिपाव के प्रकट कर देना।

विस्तार से समझें तो —

  1. जब कोई व्यक्ति अपने प्रिय के सामने अपना हृदय पूरी तरह खोल देता है, अपनी भावनाओं को निःसंकोच व्यक्त कर देता है, तो वह 'खुद का परदा खोलना' है।
  1. इसमें आत्म-प्रकाशन का भाव है — अर्थात् अपने भीतर छिपे प्रेम, पीड़ा, विरह या आनंद को सबके सामने उजागर कर देना।
  1. यह भाव यह भी व्यंजित करता है कि प्रेम इतना गहरा और सच्चा होता है कि मनुष्य अपनी लज्जा और संकोच को भूलकर अपनी समस्त भावनाओं को प्रकट कर देता है।
  1. इसमें एक प्रकार की आत्म-समर्पण की भावना भी निहित है — जब व्यक्ति अपने अहंकार और आत्म-गोपन का आवरण हटाकर सच्चे रूप में सामने आता है।

निष्कर्ष: 'खुद का परदा खोलना' से तात्पर्य है — अपनी भावनाओं, प्रेम और अंतर्मन की सच्चाई को बिना किसी छिपाव के उजागर कर देना। यह आत्म-समर्पण और निश्छल प्रेम का प्रतीक है।

टिप्पणी (क)गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता।Show solution

संदर्भ: फ़िराक गोरखपुरी की रुबाइयों में माँ अपने शिशु को 'गोदी का चाँद' कहती है और आकाश के चाँद को 'गगन का चाँद'।

टिप्पणी:

फ़िराक गोरखपुरी ने अपनी रुबाइयों में एक अत्यंत मार्मिक और सुंदर बिम्ब प्रस्तुत किया है — माँ की गोद में खेलता हुआ शिशु और आकाश में चमकता हुआ चाँद।

गोदी का चाँद — माँ की गोद में लेटा हुआ शिशु जो माँ के लिए संसार का सबसे सुंदर, सबसे प्रिय और सबसे मूल्यवान प्राणी है। माँ की दृष्टि में उसका बच्चा चाँद से भी अधिक सुंदर और प्रिय है।

गगन का चाँद — आकाश में चमकने वाला वास्तविक चाँद जो अपनी शीतल चाँदनी से संसार को आलोकित करता है।

दोनों का रिश्ता:

  • माँ अपने शिशु को चाँद दिखाकर उसे बहलाती है। इस प्रकार गोदी का चाँद (शिशु) और गगन का चाँद (आकाश का चंद्रमा) आमने-सामने होते हैं।
  • दोनों एक-दूसरे के प्रतिबिम्ब हैं — एक धरती पर, एक आकाश में।
  • माँ के लिए उसका शिशु गगन के चाँद से भी अधिक सुंदर है, इसीलिए वह उसे 'गोदी का चाँद' कहती है।
  • यह बिम्ब माँ के अपार वात्सल्य और शिशु की निश्छल सुंदरता को एक साथ व्यक्त करता है।

निष्कर्ष: गोदी के चाँद और गगन के चाँद का रिश्ता वात्सल्य, सौंदर्य और प्रेम का रिश्ता है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और माँ-शिशु के पवित्र संबंध को अभिव्यक्त करते हैं।

टिप्पणी (ख)सावन की घटाएँ व रक्षाबंधन का पर्व।Show solution

संदर्भ: फ़िराक गोरखपुरी की रुबाइयों में सावन की घटाओं और रक्षाबंधन के पर्व का एक साथ उल्लेख हुआ है।

टिप्पणी:

सावन की घटाएँ और रक्षाबंधन का पर्व — ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और भारतीय संस्कृति में इनका गहरा संबंध है।

  1. प्राकृतिक पृष्ठभूमि: रक्षाबंधन का पर्व सावन (श्रावण) मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस समय आकाश में काली-काली घटाएँ छाई रहती हैं, वर्षा होती है और प्रकृति हरी-भरी हो जाती है। सावन की घटाएँ इस पर्व की प्राकृतिक पृष्ठभूमि बनाती हैं।
  1. भावनात्मक संबंध: जिस प्रकार सावन की घटाएँ उमड़-घुमड़कर आती हैं और धरती को अपने प्रेम से सींचती हैं, उसी प्रकार बहन का प्रेम भी उमड़-उमड़कर भाई के प्रति प्रकट होता है।
  1. रक्षाबंधन का महत्त्व: रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का पर्व है। बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उसकी दीर्घायु और सुरक्षा की कामना करती है और भाई बहन की रक्षा का वचन देता है।
  1. शायर का दृष्टिकोण: फ़िराक ने सावन की घटाओं को रक्षाबंधन के पर्व के साथ जोड़कर यह दर्शाया है कि जैसे सावन की घटाएँ प्रकृति में नई ऊर्जा और उल्लास भर देती हैं, वैसे ही रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के संबंध में नई ऊर्जा, उल्लास और प्रेम का संचार करता है।

निष्कर्ष: सावन की घटाएँ और रक्षाबंधन का पर्व — दोनों मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जो भाई-बहन के प्रेम को और अधिक गहरा, पवित्र और भावपूर्ण बना देता है।

कविता के आसपास

1इन रूबाइयों से हिंदी, उर्दू और लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोगों को छाँटिए।Show solution

फ़िराक गोरखपुरी की रुबाइयों में हिंदी, उर्दू और लोकभाषा के मिले-जुले प्रयोग:

फ़िराक गोरखपुरी की भाषा हिंदुस्तानी है जिसमें हिंदी, उर्दू और लोकभाषा (अवधी/भोजपुरी) का सुंदर समन्वय मिलता है। इसे 'रेख्ता' शैली भी कहते हैं।

उर्दू के शब्द/प्रयोग:

  • शब (रात)
  • आँचल
  • परदा
  • लच्छा
  • जिस्म
  • रुबाई
  • नग़मा
  • हई (है ही)

हिंदी के शब्द/प्रयोग:

  • गोदी
  • चाँद
  • माँ
  • राखी
  • सावन
  • घटाएँ
  • बिजली
  • आँखें
  • दीपक

लोकभाषा (अवधी/भोजपुरी) के प्रयोग:

  • 'लोका देना' (उछाल-उछाल कर प्यार करने की क्रिया)
  • 'हई' (है ही)
  • 'आँचल में छुपाना' जैसे लोक-व्यवहार के प्रयोग

मिले-जुले प्रयोगों का प्रभाव:
इन तीनों भाषाओं के मिले-जुले प्रयोग से फ़िराक की रुबाइयाँ एक विशेष 'हिंदुस्तानी' रंग ग्रहण करती हैं। इससे कविता आम जनजीवन के अधिक निकट आ जाती है और उसमें एक सहज प्रवाह उत्पन्न होता है। यही फ़िराक की भाषा-शैली की विशेषता है।

आपसदारी

कमैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों। – सूरदास
इस पंक्ति के समानार्थी पंक्तियाँ रुबाइयों में से ढूँढ़िए।

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खवियोगी होगा पहला कवि / आह से उपजा होगा गान / उमड़ कर आँखों से चुपचाप / बही होगी कविता अनजान – सुमित्रानंदन पंत
इस कविता के समानार्थी पंक्तियाँ रुबाइयों में से ढूँढ़िए।

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गसीस उतारे भुई धरे तत्र मिलिहें करतार – कबीर
इस पंक्ति के समानार्थी पंक्तियाँ रुबाइयों में से ढूँढ़िए।

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(ग)सीस उतारे भुईं धरे तब मिलिहैं करतार

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in रुबाइयाँ-( फ़िराक गोरखपुरी) for Jharkhand Board Class 12 Hindi?
Key topics in रुबाइयाँ-( फ़िराक गोरखपुरी) include कवि परिचय और काव्य-विशेषताएँ, रुबाई का रूप और तुक-योजना, भाषा, बिंब और शैली, पहली रुबाई : माँ और बच्चे का वात्सल्य. Study these first, then practise questions on each for the Jharkhand Board Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for रुबाइयाँ-( फ़िराक गोरखपुरी) free?
The first 5 of the 9 solutions on this page are open to read. The other 4 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
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Sources & Official References

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