जूझ (Part 4) — NCERT Solutions
Jharkhand Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for जूझ (Part 4), Jharkhand Board Class 12 Hindi: 6 textbook questions solved step by step. Covers अभ्यास.
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अभ्यास
1'जूझ' शीर्षक के औचित्य पर विचार करते हुए यह स्पष्ट करें कि क्या यह शीर्षक कथा नायक की किसी केंद्रीय चारित्रिक विशेषता को उजागर करता है?Show solution
‘जूझ’ का अर्थ है संघर्ष करना। पूरी कथा में नायक का जीवन संघर्षों से भरा है—एक ओर खेत-घर का काम, दूसरी ओर पढ़ने की इच्छा, और बीच में दादा का डर। फिर भी वह हार नहीं मानता। वह माँ के साथ दत्ता जी राव के पास जाता है, फिर दादा को समझाने की कोशिश करता है, और अंततः फिर से पाठशाला लौटकर पढ़ाई में लग जाता है।
इसलिए यह शीर्षक कथा के केंद्रीय भाव को प्रकट करता है। साथ ही यह नायक की मुख्य चारित्रिक विशेषता भी उजागर करता है—दृढ़ इच्छा, धैर्य, और कठिन परिस्थितियों से जूझते रहने की प्रवृत्ति। वह डरता जरूर है, लेकिन भीतर से पढ़ने के लिए जूझता रहता है। इस तरह शीर्षक बिल्कुल सार्थक है।
2स्वयं कविता रच लेने का आत्मविश्वास लेखक के मन में कैसे पैदा हुआ?Show solution
लेखक के मन में कविता रच लेने का आत्मविश्वास धीरे-धीरे पैदा हुआ। इसके मुख्य कारण थे:
- सौंदलगेकर मास्टर का प्रभाव — वे कविता को बहुत सुंदर ढंग से पढ़ाते थे, भाव, लय, अभिनय और गान के साथ।
- कवियों को ‘आदमी’ की तरह समझना — मास्टर के संस्मरणों से लेखक को लगा कि कवि कोई असाधारण प्राणी नहीं, बल्कि साधारण मनुष्य ही होता है; इसलिए वह भी कविता कर सकता है।
- मास्टर का प्रोत्साहन — लेखक द्वारा गाई गई और लिखी गई कविताओं पर वे शाबाशी देते थे, जिससे उसका हौसला बढ़ा।
- अपने आसपास की दुनिया का काव्यात्मक रूप में दिखाई देना — गाँव, खेत, फूल, भैंस, लता आदि देखकर उसे लगा कि इन पर भी कविता बन सकती है।
- लगातार अभ्यास — वह खेतों में, भैंस चराते हुए, पानी लगाते हुए तुकबंदी करने लगा और कागज-पेंसिल साथ रखने लगा।
इन सब कारणों से उसे विश्वास हुआ कि वह भी कविता कर सकता है।
3श्री सौंदलगेकर के अध्यापन की उन विशेषताओं को रेखांकित करें जिन्होंने कविताओं के प्रति लेखक के मन में रुचि जगाई।Show solution
श्री सौंदलगेकर के अध्यापन की कई विशेषताओं ने लेखक के मन में कविताओं के प्रति रुचि जगाई:
- वे कविता को सिर्फ पढ़ाते नहीं थे, जीकर दिखाते थे।
- उनका सुरिला गला, छंद की चाल, और रसिकता कविता को जीवंत बना देती थी।
- वे पहले कविता गाकर सुनाते, फिर अभिनय करके उसका भाव समझाते थे।
- वे उसी भाव की अन्य कविताएँ भी सुनाते थे, जिससे तुलना और समझ विकसित होती थी।
- वे कवियों के संस्मरण सुनाते थे, जिससे कवि लेखक को दूर की चीज़ नहीं लगते थे।
- वे स्वयं भी कविता लिखते थे और छात्रों को शाबाशी, पुस्तकें तथा कविता-संग्रह देते थे।
- वे कविता के साथ-साथ काव्य-शास्त्र, छंद, अलंकार, शुद्ध लेखन आदि भी सहज ढंग से समझाते थे।
इन विशेषताओं से कविता लेखक के लिए कठिन विषय न रहकर आनंद और आत्मीयता का विषय बन गई।
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in जूझ for Jharkhand Board Class 12 Hindi?
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How should I revise जूझ for the Jharkhand Board Class 12 board exam?
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