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Chapter 37 of 38
NCERT Solutions

दूसरा देवदास (ममता कालिया)

Jharkhand Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for दूसरा देवदास (ममता कालिया) — Jharkhand Board Class 12 Hindi.

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ममता कालिया के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों, शिक्षा, अध्यापन कार्य, निदेशक पद और लेखन करियर को दर्शाने वाली एक समयरेखा।
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16 Questions Solved · 3 Sections

प्रश्न-अभ्यास

1पाठ के आधार पर हर की पीड़ी पर होने वाली गंगा जी की आरती का भावपूर्ण वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।Show solution
दिया गया: पाठ 'दूसरा देवदास' में हरिद्वार के हर की पीड़ी पर होने वाली गंगा आरती का सजीव चित्रण किया गया है।

वर्णन:

गोधूलि बेला में हर की पीड़ी पर गंगा आरती का दृश्य अत्यंत मनोरम और भावपूर्ण होता है। संध्या होते ही घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। पुजारी नीलांजलि (विशेष दीपक) जलाकर गंगा मैया की आरती करते हैं। दीपों की लौ जल की सतह पर प्रतिबिंबित होकर एक अद्भुत आलोक फैलाती है। घंटे-घड़ियालों की ध्वनि, शंखनाद और मंत्रोच्चार से वातावरण गुंजायमान हो उठता है। श्रद्धालु हाथ जोड़कर, आँखें मूँदकर गंगा मैया की स्तुति करते हैं। कुछ भक्त दीपक जलाकर गंगा की धारा में प्रवाहित करते हैं जो जल पर तैरते हुए एक अलौकिक दृश्य उपस्थित करते हैं। आरती की लपटें, भजन-कीर्तन की स्वर-लहरियाँ और गंगा का कलकल निनाद मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जिसमें मन स्वतः श्रद्धा से भर उठता है। यह दृश्य देखकर संभव भी भाव-विभोर हो जाता है और उसे लगता है कि गंगा मैया केवल नदी नहीं, बल्कि जीवन-शक्ति का साक्षात् स्वरूप हैं।
2'गंगापुत्र के लिए गंगा मैया ही जीविका और जीवन है'—इस कथन के आधार पर गंगा पुत्रों के जीवन-परिवेश की चर्चा कीजिए।Show solution
दिया गया: उक्त कथन गंगा के किनारे रहने वाले उन लोगों के जीवन पर प्रकाश डालता है जिनका अस्तित्व ही गंगा पर निर्भर है।

गंगापुत्रों का जीवन-परिवेश:

गंगा के तट पर रहने वाले लोग — नाविक, पंडे, पुजारी, मल्लाह — सभी 'गंगापुत्र' कहलाते हैं। इनके लिए गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि माँ के समान है जो उन्हें जीवन और जीविका दोनों देती है।

1. जीविका: नाविक नाव चलाकर, मल्लाह श्रद्धालुओं को पार उतारकर, पंडे पूजा-पाठ करवाकर और दुकानदार प्रसाद-सामग्री बेचकर अपना जीवन-यापन करते हैं। गंगा के घाट पर उनकी रोज़ी-रोटी चलती है।

2. जीवन: गंगा इनके सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का केंद्र है। जन्म से मृत्यु तक के सभी संस्कार गंगा के तट पर संपन्न होते हैं।

3. परिवेश: ये लोग घाट के आसपास छोटी-छोटी बस्तियों में रहते हैं। इनका जीवन सादा, संघर्षपूर्ण किंतु आस्था से भरा होता है।

4. आस्था: गंगा के प्रति इनकी श्रद्धा अटूट है। वे गंगा को माँ मानते हैं और उसकी रक्षा को अपना धर्म समझते हैं।

इस प्रकार गंगापुत्रों का संपूर्ण अस्तित्व — आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक — गंगा मैया से जुड़ा हुआ है।
3पुजारी ने लड़की के 'हम' को युगल अर्थ में लेकर क्या आशीर्वाद दिया और पुजारी द्वारा आशीर्वाद देने के बाद लड़के और लड़की के व्यवहार में अटपटापन क्यों आया?Show solution
दिया गया: मंसा देवी मंदिर में पुजारी ने लड़की के 'हम' शब्द को युगल (जोड़े) के अर्थ में ग्रहण किया।

पुजारी का आशीर्वाद:

जब लड़की ने पुजारी से कहा कि 'हम' मनोकामना की गाँठ बाँधने आए हैं, तो पुजारी ने 'हम' को एकवचन न मानकर युगल (लड़का-लड़की दोनों) के अर्थ में लिया। उसने दोनों को एक जोड़े के रूप में समझकर आशीर्वाद दिया — 'सदा सुहागन रहो', 'दोनों का जोड़ा सलामत रहे', 'मनोकामना पूर्ण हो' — इस प्रकार का दांपत्य-सुख का आशीर्वाद दिया।

अटपटापन का कारण:

पुजारी के इस आशीर्वाद के बाद लड़के (संभव) और लड़की (पारो) दोनों के व्यवहार में अटपटापन आ गया, क्योंकि:

1. दोनों वास्तव में एक-दूसरे को जानते नहीं थे — वे अपरिचित थे।
2. पुजारी ने उन्हें पति-पत्नी मान लिया था, जबकि उनके बीच ऐसा कोई संबंध नहीं था।
3. इस अप्रत्याशित स्थिति से दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति अनजाने आकर्षण और लज्जा का भाव एक साथ उत्पन्न हो गया।
4. लड़की लाज से गुलाबी हो गई और लड़के के मन में भी हलचल मच गई।

इस प्रकार पुजारी की भूल ने दोनों के बीच एक मधुर, लज्जापूर्ण और रोमांचक क्षण उत्पन्न कर दिया।
4उस छोटी सी मुलाकात ने संभव के मन में क्या हलचल उत्पन्न कर दी, इसका सूक्ष्म विवेचन कीजिए।Show solution
दिया गया: हर की पीड़ी पर गंगा आरती के समय संभव की लड़की (पारो) से एक संक्षिप्त मुलाकात हुई।

संभव के मन की हलचल का सूक्ष्म विवेचन:

वह मुलाकात भले ही क्षणिक थी, किंतु उसने संभव के मन पर गहरी छाप छोड़ी:

1. पहली दृष्टि का प्रभाव: गुलाबी परिधान में लड़की को देखकर संभव का मन अनायास उसकी ओर खिंच गया। उसकी मीठी आवाज़ और सहज व्यवहार ने संभव को मुग्ध कर दिया।

2. मन में बसना: वह लड़की संभव के मन में इस तरह बस गई कि वह बार-बार उसके बारे में सोचने लगा। उसकी आवाज़, उसका अंदाज़, उसका उलाहना — सब कुछ उसे याद रहा।

3. पुनर्मिलन की आकांक्षा: संभव के मन में उस लड़की से दोबारा मिलने की तीव्र इच्छा जागी। वह मंसा देवी जाने का निर्णय भी इसी आशा में करता है।

4. रोमांच और पुलक: जब केबिलकार में वही लड़की मिली तो 'पुलक से उसका रोम-रोम हिल उठा।' यह वाक्य उसके मन की गहरी हलचल को व्यक्त करता है।

5. ईश्वर के प्रति कृतज्ञता: वह ईश्वर को धन्यवाद देता है कि उसकी मनोकामना इतनी शीघ्र पूरी हो गई।

इस प्रकार एक छोटी-सी मुलाकात ने संभव के हृदय में प्रेम का बीज बो दिया।
5मंसा देवी जाने के लिए केबिलकार में बैठे हुए संभव के मन में जो कल्पनाएँ उठ रही थीं, उनका वर्णन कीजिए।Show solution
दिया गया: संभव मंसा देवी जाने के लिए केबिलकार में बैठा है और उसके मन में तरह-तरह की कल्पनाएँ उठ रही हैं।

संभव की कल्पनाओं का वर्णन:

1. लड़की से पुनर्मिलन की आशा: केबिलकार में बैठते ही संभव के मन में उस गुलाबी परिधान वाली लड़की की छवि उभर आई। वह मन-ही-मन सोच रहा था कि शायद वह लड़की भी मंसा देवी आई हो।

2. मनोकामना की कल्पना: वह सोच रहा था कि यदि वह लड़की मिल जाए तो वह भी मनोकामना की गाँठ बाँधेगा — उस लड़की से मिलने की मनोकामना।

3. रोमांटिक कल्पनाएँ: ऊँचाई पर केबिलकार में बैठकर वह उस लड़की के साथ इस यात्रा की कल्पना कर रहा था। पहाड़ों का सौंदर्य, हरियाली और ऊँचाई से दिखता हरिद्वार — इन सबके बीच उस लड़की की उपस्थिति की कल्पना उसे रोमांचित कर रही थी।

4. संयोग पर विश्वास: वह सोच रहा था कि शायद ईश्वर उन्हें फिर मिलाएगा, क्योंकि उनकी पहली मुलाकात भी एक संयोग ही थी।

5. भावी संबंध की कल्पना: उसके मन में यह भी आया कि यदि वह लड़की मिली तो वह उससे बात करेगा, उसका नाम जानेगा और शायद एक सुंदर संबंध की शुरुआत होगी।

इन कल्पनाओं में डूबे संभव को तब सुखद आश्चर्य हुआ जब केबिलकार में वही लड़की वास्तव में मिल गई।
6"पारो बुआ, पारो बुआ इनका नाम है... उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिटान का मधुर स्मरण हो आया।" कथन के आधार पर कहानी के संकेतपूर्ण आशय पर टिप्पणी लिखिए।Show solution
दिया गया: उपर्युक्त कथन कहानी के अंत में आता है जब संभव और पारो की पहचान होती है।

संकेतपूर्ण आशय:

इस कथन में कहानी के कई गहरे संकेत निहित हैं:

1. नाम का संकेत — 'पारो': लड़की का नाम 'पारो' है — यह शरत्चंद्र के उपन्यास 'देवदास' की नायिका 'पारो' (पार्वती) का स्मरण कराता है। इससे कहानी का शीर्षक 'दूसरा देवदास' सार्थक हो जाता है।

2. 'संभव देवदास' — नाम का संकेत: संभव ने अपना परिचय 'संभव देवदास' के रूप में दिया। 'देवदास' उपनाम होने से वह देवदास का आधुनिक संस्करण बन जाता है — किंतु 'संभव' नाम यह संकेत देता है कि इस बार प्रेम का 'संभव' (सफल) होना संभव है।

3. मनोकामना के धागे का संकेत: पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिटान (गाँठ) प्रेम की मनोकामना का प्रतीक है। दोनों ने अलग-अलग मनोकामना बाँधी थी — और वह मनोकामना एक-दूसरे से मिलने की थी।

4. 'इधर बाँधो उधर लग जाती है': यह संकेत है कि प्रेम की डोर दोनों ओर से बँध गई है — दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति आकर्षण है।

5. सुखद परिणति का संकेत: देवदास की दुखांत प्रेम-कथा के विपरीत यहाँ सुखद मिलन का संकेत है — यही 'दूसरे देवदास' की विशेषता है।

इस प्रकार यह कथन पूरी कहानी के केंद्रीय भाव को संकेतों में व्यक्त करता है।
7'मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत, अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।' कथन के आधार पर पारो की मनोदशा का वर्णन कीजिए।Show solution
दिया गया: यह कथन पारो के मन में उठा विचार है जब संभव से उसकी पुनः भेंट होती है।

पारो की मनोदशा:

1. आश्चर्य और प्रसन्नता: पारो को विश्वास नहीं हो रहा था कि जिस लड़के से वह हर की पीड़ी पर मिली थी, वही मंसा देवी में भी मिल गया। यह संयोग उसे अद्भुत लग रहा था।

2. मनोकामना पूर्ण होने का बोध: उसने मंसा देवी पर मनोकामना की गाँठ बाँधी थी — और उसकी मनोकामना (संभव से पुनर्मिलन) तुरंत पूरी हो गई। इससे वह चकित और प्रसन्न थी।

3. लज्जा और संकोच: सफेद साड़ी में वह 'लाज से गुलाबी' हो रही थी — यह उसके मन में उठते प्रेम-भाव और स्त्री-सुलभ लज्जा का प्रतीक है।

4. आस्था और श्रद्धा: उसने मंसा देवी पर एक और चुनरी चढ़ाने का संकल्प लिया — यह उसकी गहरी आस्था और कृतज्ञता को दर्शाता है।

5. प्रेम का अंकुरण: 'इधर बाँधो उधर लग जाती है' — यह कथन बताता है कि उसके मन में भी संभव के प्रति आकर्षण जन्म ले चुका है। मनोकामना की गाँठ केवल धागे में नहीं, दोनों के हृदयों में भी बँध गई है।

6. सुखद विस्मय: पारो की मनोदशा उस क्षण सुखद विस्मय, लज्जा, प्रसन्नता और आस्था का मिश्रण थी — जो एक युवती के प्रथम प्रेम की स्वाभाविक अनुभूति है।
8निम्नलिखित वाक्यों का आशय स्पष्ट कीजिए—
(क) 'तुम्हें तो तैरना भी न आवे। कहीं पैर फिसल जाता तो मैं तेरी माँ को कौन मुँह दिखाती।'
(ख) 'उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनित कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतनस्वरूप, आत्माराम और निर्मलानंद है।'
(ग) 'एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धारिणी मंसादेवी स्थापित थी। व्यापार यहाँ भी था।'
Show solution
(क) आशय:

दिया गया: यह कथन किसी बड़े-बुजुर्ग (संभवतः पारो की बुआ या कोई परिचित) का है जो संभव को गंगा में उतरने से रोक रही हैं।

आशय: इस कथन में वात्सल्य और चिंता का भाव है। वक्ता कह रही हैं कि यदि तुम्हें तैरना नहीं आता तो गंगा में उतरना खतरनाक है। यदि पैर फिसल जाता और कुछ अनहोनी हो जाती तो मैं तुम्हारी माँ को क्या जवाब देती? यह कथन एक ओर स्नेहपूर्ण चेतावनी है, तो दूसरी ओर उस जिम्मेदारी की भावना को व्यक्त करता है जो बड़े-बुजुर्ग बच्चों के प्रति महसूस करते हैं। साथ ही यह हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थल पर गंगा की तेज़ धारा के खतरे की ओर भी संकेत करता है।

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(ख) आशय:

दिया गया: यह वर्णन किसी श्रद्धालु के चेहरे का है जो गंगा आरती में पूर्णतः लीन है।

आशय: इस कथन में एक ऐसे व्यक्ति का चित्रण है जो भक्ति में इतना डूब गया है कि उसका अहंकार, स्वार्थ और मानसिक कुंठाएँ सब समाप्त हो गई हैं। 'विभोर विनीत भाव' का अर्थ है — पूर्णतः भाव-मग्न और विनम्र। 'आत्माराम' और 'निर्मलानंद' — ये शब्द उस आत्मिक शांति और पवित्रता को व्यक्त करते हैं जो सच्ची भक्ति से प्राप्त होती है। लेखिका यह बताना चाहती हैं कि गंगा आरती का वातावरण मनुष्य को उसके 'स्व' (अहम्) से मुक्त कर देता है और वह शुद्ध चेतना का अनुभव करता है।

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(ग) आशय:

दिया गया: यह वर्णन मंसा देवी मंदिर के अंदरूनी भाग का है।

आशय: इस कथन में लेखिका ने व्यंग्यात्मक दृष्टि से धर्म और व्यापार के घालमेल को उजागर किया है। मंदिर के सबसे भीतरी कक्ष में चामुंडा रूप धारिणी मंसा देवी विराजमान हैं — यह अत्यंत पवित्र स्थान है। किंतु 'व्यापार यहाँ भी था' — यह वाक्य बताता है कि धर्म के इस पवित्रतम स्थान पर भी पुजारियों और दुकानदारों का व्यावसायिक स्वार्थ विद्यमान है। प्रसाद, चुनरी, दक्षिणा — सब कुछ बिकता है। लेखिका का संकेत है कि आज धर्म भी व्यापार बन गया है और आस्था का भी व्यावसायीकरण हो गया है।
9'दूसरा देवदास' कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया: ममता कालिया की इस कहानी का शीर्षक 'दूसरा देवदास' है।

शीर्षक की सार्थकता:

1. शरत्चंद्र के 'देवदास' से संबंध:
शरत्चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास 'देवदास' में देवदास और पारो की दुखांत प्रेम-कथा है। देवदास अपनी कायरता और कमज़ोरी के कारण पारो से विवाह नहीं कर पाता और अंततः शराब में डूबकर मर जाता है।

2. 'दूसरा देवदास' — नया संदर्भ:
इस कहानी का नायक 'संभव' है जिसका उपनाम 'देवदास' है — अर्थात् वह 'दूसरा देवदास' है। किंतु यहाँ अंतर यह है:
- पहले देवदास में निराशा, पलायन और दुखांत था।
- 'दूसरे देवदास' (संभव) में आशा, साहस और सुखद मिलन की संभावना है।

3. 'संभव' नाम की सार्थकता:
'संभव' नाम ही संकेत देता है कि इस बार प्रेम का सफल होना 'संभव' है। यह पहले देवदास की असफलता का प्रतिकार है।

4. पारो का नाम:
लड़की का नाम भी 'पारो' है — जो देवदास की पारो की याद दिलाता है। किंतु यह पारो अपनी मनोकामना स्वयं बाँधती है और प्रेम में सक्रिय भूमिका निभाती है।

5. आधुनिक दृष्टिकोण:
लेखिका ने 'दूसरा देवदास' शीर्षक के माध्यम से यह संदेश दिया है कि आधुनिक युग में प्रेम को दुखांत होने की आवश्यकता नहीं — यदि साहस और संभावना हो तो प्रेम सफल हो सकता है।

निष्कर्ष: शीर्षक 'दूसरा देवदास' पूर्णतः सार्थक है क्योंकि यह पुरानी प्रेम-कथा का नया, आशावादी और सुखद संस्करण प्रस्तुत करता है।
10'हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा' — आशय स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया: यह कथन संभव के मन का उद्गार है जब केबिलकार में उसे वही लड़की (पारो) मिल जाती है।

आशय:

इस कथन में संभव की आश्चर्य, प्रसन्नता और कृतज्ञता की भावना व्यक्त हुई है:

1. मौन उद्गार: संभव ने हर की पीड़ी पर उस लड़की को देखकर मन-ही-मन (मौन रूप से) उससे पुनः मिलने की इच्छा की थी। उसने यह इच्छा किसी से कही नहीं थी — यह उसके हृदय का मौन उद्गार था।

2. मनोकामना: मंसा देवी जाने का निर्णय भी उसने इसी आशा में किया था कि शायद वह लड़की वहाँ मिले। यह उसकी अनकही मनोकामना थी।

3. शीघ्र परिणाम: उसे उम्मीद नहीं थी कि उसकी यह इच्छा इतनी जल्दी पूरी होगी। केबिलकार में उसी लड़की का मिलना उसे ईश्वरीय कृपा लगी।

4. ईश्वर के प्रति कृतज्ञता: 'हे ईश्वर!' — यह विस्मयादिबोधक उसकी कृतज्ञता और आश्चर्य को व्यक्त करता है। वह ईश्वर को धन्यवाद दे रहा है।

5. प्रेम का आरंभ: यह कथन संकेत करता है कि संभव के मन में उस लड़की के प्रति सच्चा प्रेम अंकुरित हो चुका है और ईश्वर ने उसे प्रोत्साहित किया है।

इस प्रकार यह कथन प्रेम, आस्था और संयोग के सुंदर संगम को व्यक्त करता है।

भाषा-शिल्प

1इस पाठ का शिल्प आख्याता (नैरेटर-लेखक) की ओर से लिखते हुए बना है—पाठ से कुछ उदाहरण देकर सिद्ध कीजिए।Show solution
दिया गया: 'दूसरा देवदास' कहानी तृतीय पुरुष (Third Person) आख्यान शैली में लिखी गई है।

आख्याता शैली का प्रमाण:

आख्याता (नैरेटर) वह होता है जो कहानी के बाहर रहकर पात्रों के कार्यों, विचारों और भावनाओं का वर्णन करता है। इस पाठ में इसके अनेक उदाहरण हैं:

उदाहरण 1: *'अब संभव ने गौर किया, बिलकुल वही कंठ, वही उलाहना, वही अंदाज़।'*
— यहाँ नैरेटर संभव के मन के भीतर झाँककर उसके विचार बता रहा है।

उदाहरण 2: *'पुलक से उसका रोम-रोम हिल उठा।'*
— यह संभव की आंतरिक अनुभूति है जिसे नैरेटर बाहर से देखकर वर्णित कर रहा है।

उदाहरण 3: *'लड़की ने आज गुलाबी परिधान नहीं पहना था पर सफेद साड़ी में लाज से गुलाबी होते हुए उसने मंसा देवी पर एक और चुनरी चढ़ाने का संकल्प लेते हुए सोचा...'*
— नैरेटर लड़की के मन का संकल्प और उसकी मनोदशा दोनों बता रहा है।

उदाहरण 4: *'उसे भी मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिटान का मधुर स्मरण हो आया।'*
— संभव के स्मृति-प्रवाह को नैरेटर बाहर से वर्णित कर रहा है।

निष्कर्ष: इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि लेखिका ने सर्वज्ञ आख्याता (Omniscient Narrator) की शैली अपनाई है जो पात्रों के बाहरी व्यवहार के साथ-साथ उनके आंतरिक विचारों और भावनाओं को भी पाठक के सामने प्रस्तुत करता है।
2पाठ में आए पूजा-अर्चना के शब्दों तथा इनसे संबंधित वाक्यों को छाँटकर लिखिए।Show solution
दिया गया: 'दूसरा देवदास' पाठ हरिद्वार और मंसा देवी की पृष्ठभूमि पर आधारित है, अतः इसमें पूजा-अर्चना से संबंधित अनेक शब्द और वाक्य हैं।

पूजा-अर्चना के शब्द और संबंधित वाक्य:

| शब्द | संबंधित वाक्य/संदर्भ |
|------|----------------------|
| नीलांजलि | आरती के समय देवमूर्ति के सामने नीलांजलि घुमाई जाती है। |
| आरती | हर की पीड़ी पर गंगा जी की आरती होती है। |
| मनोकामना | मंसा देवी पर मनोकामना की गाँठ बाँधी जाती है। |
| चुनरी | लड़की ने मंसा देवी पर चुनरी चढ़ाने का संकल्प लिया। |
| कलावा/मौली | कलाई में लाल डोरी (कलावा) बाँधी जाती है। |
| प्रकोष्ठ | एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धारिणी मंसादेवी स्थापित थी। |
| मनोरथ | मन की इच्छा (मनोरथ) पूर्ण करने के लिए गाँठ बाँधी जाती है। |
| आशीर्वाद | पुजारी ने युगल को आशीर्वाद दिया। |
| संकल्प | उसने मंसा देवी पर एक और चुनरी चढ़ाने का संकल्प लिया। |
| चामुंडा | चामुंडा रूप धारिणी मंसादेवी — देवी का एक रूप। |
| गिटान/गाँठ | मनोकामना का पीला-लाल धागा और उसमें पड़ी गिटान। |

पूजा-अर्चना से संबंधित प्रमुख वाक्य:
1. *'मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत, अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।'*
2. *'एकदम अंदर के प्रकोष्ठ में चामुंडा रूप धारिणी मंसादेवी स्थापित थी।'*
3. *'उसने मंसा देवी पर एक और चुनरी चढ़ाने का संकल्प लिया।'*
4. *'मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा।'*

योग्यता-विस्तार

1चंद्रधर शर्मा गुलेरी की 'उसने कहा था' कहानी पढ़िए और उस पर बनी फ़िल्म देखिए।Show solution
निर्देश: यह एक गतिविधि-आधारित प्रश्न है जिसे छात्र स्वयं करें।

संकेत:
'उसने कहा था' (1915) हिंदी की पहली आधुनिक कहानी मानी जाती है। इसमें लहनासिंह और एक लड़की के बचपन के प्रेम का मार्मिक चित्रण है। लहनासिंह प्रथम विश्वयुद्ध में उस लड़की के पति और बेटे की जान बचाते हुए स्वयं शहीद हो जाता है। यह कहानी निःस्वार्थ प्रेम और बलिदान की अमर गाथा है। छात्र इस कहानी को पढ़कर 'दूसरा देवदास' से इसकी तुलना कर सकते हैं।
2हरिद्वार और उसके आसपास के स्थानों की जानकारी प्राप्त कीजिए।Show solution
निर्देश: यह एक परियोजना-आधारित गतिविधि है।

संकेत:
हरिद्वार उत्तराखंड में गंगा नदी के तट पर स्थित एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। प्रमुख स्थान:
- हर की पीड़ी — गंगा आरती के लिए प्रसिद्ध
- मंसा देवी मंदिर — पहाड़ी पर स्थित, केबिलकार से जाते हैं
- चंडी देवी मंदिर — नील पर्वत पर स्थित
- ऋषिकेश — हरिद्वार से 25 किमी दूर, योग-ध्यान का केंद्र
- कुंभ मेला — हरिद्वार में प्रत्येक 12 वर्ष में लगता है

छात्र इंटरनेट, पुस्तकों या यात्रा-वृत्तांतों से विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।
3गंगा नदी पर एक निबंध लिखिए।Show solution
गंगा नदी

प्रस्तावना: गंगा भारत की सबसे पवित्र और महत्त्वपूर्ण नदी है। इसे 'गंगा मैया' कहकर माँ के समान पूजा जाता है।

उद्गम और प्रवाह: गंगा का उद्गम उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद (गोमुख) से होता है। यह हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती है। इसकी कुल लंबाई लगभग 2525 किलोमीटर है।

धार्मिक महत्त्व: गंगा हिंदू धर्म में मोक्षदायिनी मानी जाती है। हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी में गंगा स्नान का विशेष महत्त्व है। कुंभ मेला गंगा के तट पर ही लगता है।

आर्थिक महत्त्व: गंगा के मैदान भारत के सबसे उपजाऊ क्षेत्र हैं। करोड़ों लोगों की जीविका गंगा पर निर्भर है।

प्रदूषण की समस्या: आज गंगा प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। कारखानों का कचरा, शहरों का मलजल और धार्मिक कर्मकांड की सामग्री गंगा को प्रदूषित कर रही है।

उपसंहार: 'नमामि गंगे' जैसी सरकारी योजनाएँ गंगा की सफाई के लिए चलाई जा रही हैं। हम सबका कर्तव्य है कि गंगा को स्वच्छ रखें।
4आपके नगर/गाँव में नदी-तालाब-मंदिर के आसपास जो कर्मकांड होते हैं उनका रेखाचित्र के रूप में लेखन कीजिए।Show solution
निर्देश: यह एक सृजनात्मक लेखन गतिविधि है जिसे छात्र अपने अनुभव के आधार पर स्वयं लिखें।

संकेत एवं नमूना रेखाचित्र:

शीर्षक: हमारे गाँव का तालाब

हमारे गाँव के बीचोंबीच एक पुराना तालाब है। उसके किनारे एक छोटा-सा शिव मंदिर है। सुबह-सवेरे महिलाएँ तालाब पर आती हैं — कुछ कपड़े धोने, कुछ स्नान करने और कुछ पूजा के लिए जल लेने। सोमवार को मंदिर में भीड़ होती है। पुजारी जी घंटी बजाते हैं, धूप-दीप जलाते हैं। बच्चे प्रसाद के लिए लाइन लगाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर तालाब में दीप प्रवाहित किए जाते हैं — वह दृश्य अत्यंत मनोरम होता है। किंतु त्योहारों के बाद तालाब में फूल-माला और पूजा-सामग्री का ढेर लग जाता है जो प्रदूषण का कारण बनता है।

छात्र अपने स्थानीय अनुभव के आधार पर इसे विस्तार दें।

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Frequently Asked Questions

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Sources & Official References

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