यह दीप अकेला- मैंने देखा, एक बूँद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय')
Jharkhand Board · Class 12 · Hindi
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यह दीप अकेला
1'दीप अकेला' के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए यह बताइए कि उसे कवि ने स्नेह भरा, गर्व भरा एवं मदमाता क्यों कहा है?Show solution
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2यह दीप अकेला है 'पर इसको भी पंक्ति को दे दो' के आधार पर व्यष्टि का समष्टि में विलय क्यों और कैसे संभव है?Show solution
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3'गीत' और 'मोती' की सार्थकता किससे जुड़ी है?Show solution
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4'यह अद्वितीय-यह मेरा-यह मैं स्वयं विसर्जित'-पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए।Show solution
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5'यह मधु है ... तकता निर्भय'-पंक्तियों के आधार पर बताइए कि 'मधु', 'गोरस' और 'अंकुर' की क्या विशेषता है?Show solution
- मधु: यह काल की मौनता का युग-संचय है, यानी समय के भीतर संचित मधुरता और जीवन का रस।
- गोरस: यह जीवन और कामधेनु का अमृत-पूत पय है, यानी पवित्र, पोषक और अमृत समान दूध।
- अंकुर: यह धरती को फोड़कर निर्भय होकर सूर्य की ओर देखने वाला है, यानी नया जीवन, आशा और विकास का प्रतीक।
अर्थात ये सब प्रकृत, स्वयंभू और शक्ति-संपन्न हैं।
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6भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए—Show solution
यहाँ मधु, गोरस और अंकुर की स्वाभाविक, स्वतःस्फूर्त और दिव्य सत्ता का भाव है। वे प्रकृति से उत्पन्न, स्वयंभू और पृथक होते हुए भी जीवन-शक्ति से भरे हैं। “शक्ति को दे दो” में यह संकेत है कि इनकी शक्ति किसी बड़े प्रवाह में जुड़नी चाहिए।
(ख) “यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक ... चिर-अखंड अपनापा।”
इन पंक्तियों में उस दीप का संवेदनशील, जागरूक, अनुरक्त और अखंड आत्मीय स्वरूप व्यक्त हुआ है। वह अपमान, निंदा और पीड़ा में भी द्रवित रहता है, फिर भी उसका अपनापा टूटा नहीं है। भाव यह है कि सच्चा व्यक्ति दुखों के बीच भी संवेदना और आत्मीयता बनाए रखता है।
(ग) “जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो।”
यहाँ दीप के जिज्ञासु, प्रबुद्ध और श्रद्धामय स्वरूप का सुंदर चित्रण है। उसमें ज्ञान की तलाश है, समझ है और विश्वासपूर्ण समर्पण भी। “भक्ति को दे दो” का अर्थ है कि ऐसी चेतना को समर्पण, श्रद्धा और उच्च उद्देश्य से जोड़ा जाए।
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7'यह दीप अकेला' एक प्रयोगवादी कविता है। इस कविता के आधार पर 'लघु मानव' के अस्तित्व और महत्त्व पर प्रकाश डालिए।Show solution
इस कविता में लघु मानव को दीप के रूप में दिखाकर बताया गया है कि वह भले ही छोटा लगे, पर उसके भीतर प्रकाश है। उसका महत्व इसलिए है कि वह अपनी व्यक्तिगत सत्ता को खोए बिना समष्टि का हिस्सा बने। इसी से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र मजबूत होते हैं। इसलिए यह कविता प्रयोगवादी होते हुए भी मानव-गरिमा, सामाजिकता और सामूहिकता का समर्थन करती है।
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मैंने देखा, एक बूँद
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