संवदिया (फणीश्वरनाथ 'रेणु') — NCERT Solutions
Assam Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for संवदिया (फणीश्वरनाथ 'रेणु'), Assam Board Class 12 Hindi: 18 textbook questions solved step by step.
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प्रश्न-अभ्यास
1संवदिया की क्या विशेषताएँ हैं और गाँववालों के मन में संवदिया की क्या अवधारणा है?Show solution
दिया गया: फणीश्वरनाथ 'रेणु' की कहानी 'संवदिया' पर आधारित प्रश्न।
संवदिया की विशेषताएँ:
- विश्वसनीयता: संवदिया एक ऐसा व्यक्ति होता है जिस पर संदेश भेजने वाला पूरा भरोसा करता है। वह गोपनीय बातें भी उसी को सौंपता है।
- स्मरण-शक्ति: संवदिया को संदेश मौखिक रूप से याद रखना होता है और ज्यों-का-त्यों पहुँचाना होता है। उसकी स्मरण-शक्ति तीव्र होती है।
- वाक्पटुता: वह संदेश को उसी भाव, स्वर और लहजे में सुनाता है जिस प्रकार संदेश देने वाले ने कहा हो।
- निष्ठा एवं ईमानदारी: संवदिया संदेश में कोई मिलावट नहीं करता, वह पूरी निष्ठा से अपना कार्य करता है।
- शारीरिक सक्षमता: लंबी यात्राएँ करने के लिए उसे शारीरिक रूप से सक्षम होना आवश्यक है।
गाँववालों की अवधारणा:
गाँववालों के मन में संवदिया के प्रति एक विशेष धारणा है — 'संवदिया डटकर खाता है और अफर कर सोता है।' अर्थात् लोग समझते हैं कि संवदिया का काम आसान है — वह जहाँ जाता है, वहाँ खाता-पीता है और आराम से सोता है। लोग उसे एक साधारण दूत मानते हैं जिसका काम केवल संदेश पहुँचाना है, परंतु वास्तव में यह कार्य अत्यंत जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का होता है।
निष्कर्ष: संवदिया केवल संदेशवाहक नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच भावनात्मक सेतु होता है।
2बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन के मन में किस प्रकार की आशंका हुई?Show solution
दिया गया: हरगोबिन एक संवदिया है जिसे बड़ी हवेली से बुलावा आता है।
हरगोबिन की आशंकाएँ:
बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन के मन में अनेक प्रकार की आशंकाएँ उत्पन्न हुईं —
- दंड का भय: हरगोबिन को लगा कि शायद उससे कोई गलती हुई है और हवेली के मालिक उसे दंड देना चाहते हैं।
- बकाया का डर: उसे आशंका हुई कि शायद हवेली का कोई पुराना हिसाब-किताब बाकी है जिसके लिए उसे बुलाया जा रहा है।
- अपमान का भय: चूँकि हवेली की शान पहले जैसी नहीं रही थी, फिर भी उसके मन में यह डर था कि कहीं उसे अपमानित न किया जाए।
- अनिश्चितता: हरगोबिन का कलेजा धड़कने लगा क्योंकि वह नहीं जानता था कि बुलावे का कारण क्या है।
इस प्रकार बुलावे की सूचना पाते ही हरगोबिन के मन में भय, आशंका और घबराहट का मिला-जुला भाव उत्पन्न हो गया। वह सोचने लगा कि न जाने क्या होगा।
3बड़ी बहुरिया अपने मायके संदेश क्यों भेजना चाहती थी?Show solution
दिया गया: बड़ी बहुरिया हवेली में रहती है और मायके संदेश भेजना चाहती है।
संदेश भेजने के कारण:
बड़ी बहुरिया की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उसके संदेश भेजने के निम्नलिखित कारण थे —
- आर्थिक दुर्दशा: हवेली की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी। पहले की समृद्धि समाप्त हो चुकी थी। बड़ी बहुरिया को दो वक्त का भोजन भी ठीक से नहीं मिलता था।
- एकाकीपन और उपेक्षा: ससुराल में उसकी कोई सुध लेने वाला नहीं था। देवर-जेठ सब अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त थे। वह अकेलेपन से त्रस्त थी।
- मायके जाने की इच्छा: वह अपने मायके वालों को संदेश भेजकर यह जानना चाहती थी कि क्या वे उसे अपने पास बुला सकते हैं। वह ससुराल की दुर्दशा से मुक्ति चाहती थी।
- भावनात्मक पीड़ा: 'बधुआ साग खाकर कब तक जीऊँ' — इस कथन से स्पष्ट है कि वह अपनी दुर्दशा से व्यथित थी और मायके में सुख की आशा रखती थी।
निष्कर्ष: बड़ी बहुरिया की विवशता, एकाकीपन और आर्थिक कष्ट ने उसे मायके संदेश भेजने पर विवश किया।
4हरगोबिन बड़ी हवेली में पहुँचकर अतीत की किन स्मृतियों में खो जाता है?Show solution
दिया गया: हरगोबिन बड़ी हवेली में पहुँचता है और अतीत को याद करता है।
अतीत की स्मृतियाँ:
हरगोबिन जब बड़ी हवेली में पहुँचता है तो वह अतीत की निम्नलिखित स्मृतियों में खो जाता है —
- हवेली की पुरानी शान: हरगोबिन को याद आता है कि कभी यह हवेली कितनी भव्य और समृद्ध थी। यहाँ हाथी-घोड़े बँधते थे, नौकर-चाकर थे और चारों ओर रौनक थी।
- बड़े बाबू की याद: उसे हवेली के पूर्व मालिक बड़े बाबू की याद आती है जो बड़े रौबदार और दयालु थे। उनके समय में हवेली में जीवन था।
- उत्सव और समारोह: पहले हवेली में त्योहार, विवाह और अन्य उत्सव धूमधाम से मनाए जाते थे। उन दिनों की खुशहाली उसे याद आती है।
- अपना बचपन: हरगोबिन को अपने बचपन की स्मृतियाँ भी आती हैं जब वह इस हवेली में आता-जाता था और यहाँ के लोग उसे स्नेह देते थे।
- हवेली की वर्तमान दुर्दशा: अतीत की स्मृतियों से तुलना करते हुए वह वर्तमान की जर्जर हवेली को देखकर दुखी होता है।
निष्कर्ष: अतीत की स्मृतियाँ हरगोबिन को भावुक कर देती हैं और वह हवेली के पतन पर मन-ही-मन दुखी होता है।
5संवाद कहते वक्त बड़ी बहुरिया की आँखें क्यों छलछला आई?Show solution
दिया गया: बड़ी बहुरिया हरगोबिन को संदेश सुना रही है।
आँखें छलछलाने के कारण:
संवाद कहते समय बड़ी बहुरिया की आँखें निम्नलिखित कारणों से छलछला आईं —
- अपनी दुर्दशा का स्मरण: जब वह अपनी पीड़ा, एकाकीपन और आर्थिक कष्ट को शब्दों में व्यक्त करने लगी तो उसका दर्द उमड़ पड़ा।
- मायके की याद: मायके के लोगों को संदेश भेजते समय उसे अपने सुखद बचपन और मायके के प्रेम की याद आई जिससे वह भावुक हो गई।
- विवशता का बोध: वह जानती थी कि एक विवाहिता स्त्री के लिए मायके से सहायता माँगना कितना कठिन और अपमानजनक है, फिर भी विवशता में उसे ऐसा करना पड़ रहा था।
- ससुराल की उपेक्षा: ससुराल में उसकी उपेक्षा और अकेलेपन की पीड़ा जब शब्दों में ढली तो वह रो पड़ी।
- भविष्य की अनिश्चितता: उसे यह भी नहीं पता था कि मायके वाले उसे स्वीकार करेंगे या नहीं, इस अनिश्चितता ने भी उसे भावुक किया।
निष्कर्ष: बड़ी बहुरिया की आँखों का छलछलाना उसकी संचित पीड़ा, विवशता और भावनात्मक टूटन का प्रतीक है।
6गाड़ी पर सवार होने के बाद संवदिया के मन में काँटे की चुभन का अनुभव क्यों हो रहा था। उससे छुटकारा पाने के लिए उसने क्या उपाय सोचा?Show solution
दिया गया: हरगोबिन संदेश लेकर जलालगढ़ की ओर जा रहा है।
काँटे की चुभन का कारण:
गाड़ी पर सवार होने के बाद हरगोबिन के मन में काँटे की चुभन इसलिए हो रही थी क्योंकि —
- संदेश की प्रकृति: बड़ी बहुरिया का संदेश अत्यंत करुण और पीड़ादायक था। वह एक असहाय स्त्री की व्यथा थी जिसे वह मायके तक पहुँचाने जा रहा था।
- नैतिक द्वंद्व: हरगोबिन के मन में यह प्रश्न उठ रहा था कि क्या वह इस संदेश को सुनाने में सक्षम होगा। एक विवाहिता स्त्री की इस प्रकार की पीड़ा को दूसरों के सामने कहना उसे उचित नहीं लग रहा था।
- बड़ी बहुरिया के प्रति सहानुभूति: वह बड़ी बहुरिया को माँ के समान मानता था, इसलिए उनकी पीड़ा उसे भीतर तक कचोट रही थी।
- संदेश सुनाने की कठिनाई: उसे लग रहा था कि 'किस मुँह से वह ऐसा संवाद सुनाएगा' — यह विचार उसे बेचैन कर रहा था।
उपाय:
इस चुभन से छुटकारा पाने के लिए हरगोबिन ने यह उपाय सोचा कि वह जलालगढ़ पहुँचकर बड़ी बहुरिया के भाई को संदेश नहीं सुनाएगा, बल्कि उन्हें स्वयं गाँव चलकर अपनी बहन की स्थिति देखने के लिए कहेगा। इस प्रकार वह संदेश की पीड़ादायक विषयवस्तु को सीधे शब्दों में कहने से बच सकता था।
निष्कर्ष: हरगोबिन की यह बेचैनी उसकी संवेदनशीलता और बड़ी बहुरिया के प्रति उसके आदर का प्रमाण है।
7बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन क्यों नहीं सुना सका?Show solution
दिया गया: हरगोबिन जलालगढ़ पहुँचता है परंतु संदेश नहीं सुना पाता।
संवाद न सुना पाने के कारण:
हरगोबिन बड़ी बहुरिया का संदेश निम्नलिखित कारणों से नहीं सुना सका —
- भावनात्मक कमज़ोरी: बड़ी बहुरिया का संदेश इतना करुण और हृदयविदारक था कि हरगोबिन उसे दूसरों के सामने कहते-कहते भावुक हो जाता था।
- नैतिक संकोच: एक विवाहिता स्त्री की पीड़ा और उसकी ससुराल की दुर्दशा को मायके वालों के सामने उजागर करना उसे नैतिक रूप से उचित नहीं लगा।
- बड़ी बहुरिया के प्रति आदर: वह बड़ी बहुरिया को माँ के समान मानता था। उनकी व्यथा को शब्दों में कहना उसे उनका अपमान लगा।
- संदेश की संवेदनशीलता: संदेश में बड़ी बहुरिया ने अपनी दुर्दशा, भूख और एकाकीपन का वर्णन किया था। इसे सुनाना हरगोबिन के लिए असह्य था।
- मायके वालों की प्रतिक्रिया का भय: उसे डर था कि यदि उसने संदेश सुनाया तो मायके वाले बड़ी बहुरिया को लेकर चले जाएँगे और गाँव उनसे वंचित हो जाएगा।
निष्कर्ष: हरगोबिन की संवेदनशीलता, नैतिकता और बड़ी बहुरिया के प्रति गहरा लगाव — ये सब मिलकर उसे संदेश सुनाने से रोकते रहे।
8'संवदिया डटकर खाता है और अफर कर सोता है' से क्या आशय है?Show solution
दिया गया: यह कथन कहानी में गाँव वालों की संवदिया के प्रति धारणा को व्यक्त करता है।
आशय:
इस कथन का शाब्दिक अर्थ है — संवदिया जहाँ भी जाता है, वहाँ पेट भरकर खाता है और आराम से सोता है।
व्यंग्यात्मक अर्थ:
- गाँव वालों की यह धारणा है कि संवदिया का काम बहुत आसान है। वह केवल संदेश लेकर जाता है और जहाँ पहुँचता है, वहाँ उसका खूब आतिथ्य-सत्कार होता है।
- लोग समझते हैं कि संवदिया को कोई कठिनाई नहीं होती — न शारीरिक, न मानसिक। वह मुफ्त में खाता-पीता और मौज करता है।
- इस कथन में संवदिया के प्रति एक प्रकार का व्यंग्य और हल्की ईर्ष्या भी है।
वास्तविकता:
किंतु वास्तव में संवदिया का काम अत्यंत जिम्मेदारी का होता है। उसे संदेश को ज्यों-का-त्यों याद रखना होता है, लंबी यात्राएँ करनी होती हैं और दूसरों की भावनाओं का बोझ उठाना होता है। हरगोबिन का उदाहरण इसी बात को सिद्ध करता है।
निष्कर्ष: यह कथन समाज की उस सतही सोच को उजागर करता है जो किसी के काम की गहराई और कठिनाई को नहीं समझती।
9जलालगढ़ पहुँचने के बाद बड़ी बहुरिया के सामने हरगोबिन ने क्या संकल्प लिया?Show solution
दिया गया: हरगोबिन जलालगढ़ से वापस आता है और बड़ी बहुरिया के सामने उपस्थित होता है।
हरगोबिन का संकल्प:
जलालगढ़ से वापस आने के बाद जब हरगोबिन बड़ी बहुरिया के सामने आया तो उसने निम्नलिखित संकल्प लिए —
- क्षमा-याचना: हरगोबिन ने बड़ी बहुरिया के पैर पकड़कर कहा — "मुझे माफ़ करो। मैं तुम्हारा संवाद नहीं कह सका।" उसने अपनी असफलता स्वीकार की।
- गाँव न छोड़ने की विनती: उसने बड़ी बहुरिया से विनती की — "तुम गाँव छोड़कर मत जाओ।"
- सेवा का संकल्प: उसने कहा — "मैं तुम्हारा बेटा! बड़ी बहुरिया, तुम मेरी माँ, सारे गाँव की माँ हो!" उसने उन्हें माँ का दर्जा दिया।
- निठल्लापन छोड़ने का वचन: उसने संकल्प लिया — "मैं अब निठल्ला बैठा नहीं रहूँगा।"
- सेवा करने का वचन: उसने कहा — "तुम्हारा सब काम करूँगा" और यह भी कि "तुमको कोई कष्ट नहीं होने दूँगा।"
निष्कर्ष: हरगोबिन का यह संकल्प उसकी संवेदनशीलता, कर्तव्यनिष्ठा और बड़ी बहुरिया के प्रति गहरे आदर का प्रतीक है। वह एक सच्चे संवदिया से आगे बढ़कर एक समर्पित पुत्र की भूमिका निभाने को तैयार हो जाता है।
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Frequently Asked Questions
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