गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात (भीष्म साहनी)
Assam Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात (भीष्म साहनी) — Assam Board Class 12 Hindi.
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1लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया था?Show solution
उत्तर:
लेखक भीष्म साहनी सेवाग्राम उस समय गए थे जब वे एक युवा लेखक थे। वे गांधी जी के दर्शन करने तथा उनके आश्रम के जीवन को निकट से देखने-समझने के उद्देश्य से सेवाग्राम गए थे। गांधी जी का व्यक्तित्व और उनका सादा जीवन लेखक को बहुत आकर्षित करता था, इसलिए वे वहाँ जाकर उनके साथ कुछ समय बिताना चाहते थे। सेवाग्राम में रहकर लेखक ने गांधी जी की दिनचर्या, उनके आश्रम के वातावरण और उनके सरल-सहज व्यवहार को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया।
2लेखक का गांधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव किस प्रकार का रहा?Show solution
उत्तर:
लेखक का गांधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव अत्यंत रोमांचक और अविस्मरणीय रहा। गांधी जी बहुत तेज़ गति से चलते थे और लेखक को उनके साथ कदम मिलाकर चलने में कठिनाई होती थी। गांधी जी के साथ चलते हुए लेखक को ऐसा लगा जैसे वे किसी साधारण व्यक्ति के साथ नहीं, बल्कि एक महान विभूति के साथ चल रहे हैं। गांधी जी की सरलता, उनकी ऊर्जा और उनका आत्मीय व्यवहार लेखक को बहुत प्रभावित कर गया। यह अनुभव लेखक के लिए जीवन की एक अमूल्य स्मृति बन गया।
3लेखक ने सेवाग्राम में किन-किन लोगों के आने का जिक्र किया है?Show solution
उत्तर:
लेखक ने सेवाग्राम में अनेक प्रकार के लोगों के आने का जिक्र किया है। वहाँ देश के विभिन्न भागों से लोग गांधी जी के दर्शन करने आते थे। इनमें साधारण ग्रामीण जन, किसान, मजदूर, बुद्धिजीवी, नेता, विदेशी पत्रकार तथा अन्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। बौद्ध भिक्षु भी चीवर पहने वहाँ आते थे। इस प्रकार सेवाग्राम एक ऐसा केंद्र था जहाँ हर वर्ग और हर देश के लोग गांधी जी से मिलने और उनका आशीर्वाद लेने आते थे। यह आश्रम एक तीर्थस्थल के समान था।
4रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार किस प्रकार का था?Show solution
उत्तर:
रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार अत्यंत स्नेहपूर्ण, करुणामय और ममतापूर्ण था। जब एक रुग्ण (बीमार) बालक को उनके पास लाया गया, तो गांधी जी ने उसे बड़े प्यार से देखा। उन्होंने बालक की माँ को सांत्वना दी और उसके उपचार के बारे में सुझाव दिए। गांधी जी की आँखों में उस बालक के प्रति गहरी करुणा और ममता थी। वे उस बालक को माँ जैसी ममता से देख रहे थे। उनका यह व्यवहार यह सिद्ध करता है कि वे केवल राजनेता नहीं, बल्कि एक सच्चे मानवतावादी और करुणाशील व्यक्ति थे।
5काश्मीर के लोगों ने नेहरू जी का स्वागत किस प्रकार किया?Show solution
उत्तर:
काश्मीर के लोगों ने नेहरू जी का अत्यंत उत्साहपूर्ण और भावपूर्ण स्वागत किया। नेहरू जी काश्मीरी मूल के थे, इसलिए काश्मीर की जनता उनसे विशेष लगाव रखती थी। जब नेहरू जी काश्मीर पहुँचे तो वहाँ के लोग बड़ी संख्या में उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़े। लोगों की आँखों में उनके प्रति अपार श्रद्धा और प्रेम था। काश्मीरी जनता ने उन्हें अपना प्रिय नेता और अपना बेटा मानकर हार्दिक स्वागत किया। यह स्वागत केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि इसमें जनता का सच्चा प्रेम और आत्मीयता झलकती थी।
6अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता स्पष्ट होती है?Show solution
उत्तर:
अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं:
1. स्वाभिमान और आत्मसम्मान: नेहरू जी किसी भी प्रकार की चापलूसी या झूठी प्रशंसा पसंद नहीं करते थे। जब उन्हें लगा कि अखबार में उनकी झूठी या अतिरंजित प्रशंसा की जा रही है, तो वे तिलमिला उठे।
2. सत्यनिष्ठा: वे सत्य के प्रति पूर्णतः समर्पित थे और असत्य या अर्धसत्य को कभी स्वीकार नहीं करते थे।
3. निर्भीकता: वे अपनी बात बेबाकी से कहते थे और किसी के दबाव में नहीं आते थे।
4. सादगी: वे दिखावे और आडंबर से दूर रहते थे।
इस प्रकार यह घटना नेहरू जी के सत्यप्रिय, स्वाभिमानी और निर्भीक व्यक्तित्व को उजागर करती है।
7फिलिस्तीन के प्रति भारत का रवैया बहुत सहानुभूतिपूर्ण एवं समर्थन भरा क्यों था?Show solution
उत्तर:
फिलिस्तीन के प्रति भारत का रवैया सहानुभूतिपूर्ण एवं समर्थन भरा होने के निम्नलिखित कारण थे:
1. उपनिवेशवाद-विरोध: भारत स्वयं लंबे समय तक औपनिवेशिक शासन का शिकार रहा था। फिलिस्तीनी जनता भी अपनी भूमि पर अधिकार के लिए संघर्ष कर रही थी, इसलिए भारत उनके संघर्ष को समझता था।
2. गुटनिरपेक्ष नीति: भारत की विदेश नीति हमेशा से उत्पीड़ित और संघर्षरत जनता के पक्ष में रही है।
3. मानवीय संवेदना: फिलिस्तीनी लोग अपनी मातृभूमि से विस्थापित हो रहे थे, जो एक मानवीय त्रासदी थी। भारत इस पीड़ा को समझता था।
4. गांधीवादी मूल्य: अहिंसा और न्याय के गांधीवादी मूल्यों के आधार पर भी भारत फिलिस्तीन के न्यायसंगत संघर्ष का समर्थन करता था।
इन सभी कारणों से भारत फिलिस्तीन का समर्थक रहा।
8अराफात के आतिथ्य प्रेम से संबंधित किन्हीं दो घटनाओं का वर्णन कीजिए।Show solution
उत्तर:
अराफात के आतिथ्य प्रेम से संबंधित दो प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं:
पहली घटना — फल छीलकर खिलाना:
जब लेखक और उनके साथी अराफात से मिलने गए, तो अराफात ने स्वयं अपने हाथों से फल छील-छीलकर उन्हें खिलाए। एक इतने बड़े नेता का इस प्रकार स्वयं अपने हाथों से अतिथियों की सेवा करना उनके आतिथ्य-प्रेम और विनम्रता का प्रमाण था।
दूसरी घटना — शहद की चाय बनाना:
अराफात ने अपने अतिथियों के लिए स्वयं अपने हाथों से शहद की चाय बनाई। उन्होंने शहद की उपयोगिता के बारे में भी बताया। इसके अलावा, जब लेखक गुसलखाने से बाहर निकले तो अराफात स्वयं तौलिया हाथ में लिए बाहर खड़े थे — यह उनके अतिथि-सत्कार की पराकाष्ठा थी।
इन दोनों घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अराफात एक महान नेता होते हुए भी अत्यंत विनम्र, सरल और आतिथ्य-प्रेमी व्यक्ति थे।
9अराफात ने ऐसा क्यों बोला कि 'वे आपके ही नहीं हमारे भी नेता हैं। उतने ही आदरणीय जितने आपके लिए।' इस कथन के आधार पर गांधी जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।Show solution
उत्तर:
अराफात ने यह कथन इसलिए कहा क्योंकि गांधी जी का व्यक्तित्व और उनके विचार केवल भारत तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे विश्वव्यापी थे। फिलिस्तीनी जनता भी अपनी मातृभूमि के लिए संघर्ष कर रही थी और गांधी जी का अहिंसक संघर्ष उनके लिए भी प्रेरणास्रोत था।
गांधी जी के व्यक्तित्व की विशेषताएँ:
1. सार्वभौमिक अपील: गांधी जी के विचार — सत्य, अहिंसा, न्याय और मानवीय गरिमा — किसी एक देश या धर्म तक सीमित नहीं थे। ये मूल्य सार्वभौमिक थे, इसलिए विश्व के हर कोने में उनका सम्मान था।
2. उत्पीड़ितों के नेता: गांधी जी ने हमेशा उत्पीड़ित और कमज़ोर वर्ग का पक्ष लिया। फिलिस्तीनी जनता भी उत्पीड़ित थी, इसलिए वे गांधी जी को अपना नेता मानते थे।
3. अहिंसा का संदेश: गांधी जी का अहिंसक प्रतिरोध का मार्ग विश्व के अनेक संघर्षरत लोगों के लिए आदर्श बना।
4. मानवतावाद: गांधी जी किसी जाति, धर्म या देश की सीमाओं से परे एक सच्चे मानवतावादी थे।
निष्कर्ष: अराफात का यह कथन गांधी जी की उस महानता का प्रमाण है जो उन्हें केवल भारत का नहीं, बल्कि समस्त मानवजाति का नेता बनाती है।
भाषा-शिल्प
1पाठ से क्रिया विशेषण छाँटिए और उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।Show solution
क्रिया विशेषण की परिभाषा: जो शब्द क्रिया की विशेषता बताएँ, उन्हें क्रिया विशेषण कहते हैं।
पाठ से छाँटे गए क्रिया विशेषण और उनका वाक्यों में प्रयोग:
| क्रिया विशेषण | वाक्य में प्रयोग |
|---|---|
| शीघ्र | वह शीघ्र ही वहाँ पहुँच गया। |
| बीच-बीच में | बीच-बीच में वर्षा होती रही। |
| साथ-ही-साथ | वह पढ़ाई के साथ-ही-साथ खेलता भी है। |
| अनथक | वह अनथक परिश्रम करता रहा। |
| सीधा | वह सीधा घर चला गया। |
| बड़े इत्मीनान से | वह बड़े इत्मीनान से बैठकर काम करता है। |
इन क्रिया विशेषणों में कालवाचक (शीघ्र), रीतिवाचक (सीधा, बड़े इत्मीनान से) और स्थानवाचक क्रिया विशेषण सम्मिलित हैं।
2'मैं सेवाग्राम में ……………… माँ जैसी लगती' गद्यांश में क्रिया पर ध्यान दीजिए।Show solution
उत्तर:
इस गद्यांश में विभिन्न प्रकार की क्रियाओं का प्रयोग हुआ है:
1. सकर्मक क्रिया: जिन क्रियाओं के साथ कर्म होता है — जैसे 'देखना', 'खिलाना', 'बनाना' आदि।
2. अकर्मक क्रिया: जिन क्रियाओं के साथ कर्म नहीं होता — जैसे 'लगती', 'चलना' आदि।
3. 'लगती' क्रिया — यहाँ 'माँ जैसी लगती' में 'लगती' एक अकर्मक क्रिया है जो भाव या अनुभूति को व्यक्त करती है। यह क्रिया स्त्रीलिंग, एकवचन, वर्तमान काल में प्रयुक्त है।
4. इस गद्यांश में क्रियाएँ मुख्यतः वर्तमान काल और भूतकाल में प्रयुक्त हुई हैं, जो संस्मरण की शैली के अनुकूल हैं।
5. क्रियाओं के माध्यम से लेखक ने सेवाग्राम के वातावरण और गांधी जी की ममतामयी छवि को जीवंत रूप से प्रस्तुत किया है।
3नेहरू जी द्वारा सुनाई गई कहानी को अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
उत्तर:
नेहरू जी ने एक बार एक बहुत रोचक और शिक्षाप्रद कहानी सुनाई। कहानी इस प्रकार थी —
एक बार एक व्यक्ति था जो बहुत परेशान था। उसके जीवन में अनेक समस्याएँ थीं। वह एक बुद्धिमान व्यक्ति के पास गया और अपनी परेशानियाँ बताईं। बुद्धिमान व्यक्ति ने उसे एक सरल उपाय बताया — 'अपनी समस्याओं को बड़ा मत समझो, बल्कि उनका सामना करो।'
नेहरू जी इस कहानी के माध्यम से यह संदेश देना चाहते थे कि जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं, लेकिन उनसे घबराना नहीं चाहिए। साहस और धैर्य से हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
*(टिप्पणी: पाठ में नेहरू जी की कहानी का पूर्ण विवरण उपलब्ध नहीं है, अतः उपर्युक्त उत्तर पाठ के संदर्भ और भाव के आधार पर लिखा गया है। विद्यार्थी पाठ में दी गई मूल कहानी को पढ़कर उसे अपने शब्दों में लिखें।)*
योग्यता-विस्तार
1भीष्म साहनी की अन्य रचनाएँ 'तमस' तथा 'मेरा भाई बलराज' पढ़िए।Show solution
तमस — यह भीष्म साहनी का सबसे प्रसिद्ध उपन्यास है जो 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी पर आधारित है। इसमें सांप्रदायिक दंगों की विभीषिका और उसमें पिसते आम लोगों की पीड़ा का मार्मिक चित्रण है। इस उपन्यास पर दूरदर्शन धारावाहिक भी बना है।
मेरा भाई बलराज — यह भीष्म साहनी का संस्मरणात्मक लेखन है जिसमें उन्होंने अपने बड़े भाई और प्रसिद्ध अभिनेता बलराज साहनी के जीवन और व्यक्तित्व का भावपूर्ण चित्रण किया है।
विद्यार्थियों को इन रचनाओं को पढ़कर उन पर अपनी टिप्पणी लिखनी चाहिए।
2गांधी तथा नेहरू जी से संबंधित अन्य संस्मरण भी पढ़िए और उन पर टिप्पणी लिखिए।Show solution
गांधी जी से संबंधित प्रमुख संस्मरण:
- 'मेरे सपनों का भारत' — महात्मा गांधी
- 'गांधी की कहानी' — लुई फिशर
- 'बापू के साथ' — काका कालेलकर
नेहरू जी से संबंधित प्रमुख संस्मरण:
- 'मेरी कहानी' (An Autobiography) — जवाहरलाल नेहरू
- 'भारत की खोज' — जवाहरलाल नेहरू
टिप्पणी लिखते समय ध्यान दें:
- संस्मरण में वर्णित घटनाओं का उल्लेख करें।
- नेता के व्यक्तित्व की विशेषताएँ बताएँ।
- संस्मरण से मिली प्रेरणा का उल्लेख करें।
3यास्सर अराफ़ात के आतिथ्य से क्या प्रेरणा मिलती है और अपने अतिथि का सत्कार आप किस प्रकार करना चाहेंगे।Show solution
यास्सर अराफात जैसे विश्वप्रसिद्ध नेता ने अपने अतिथियों का जिस प्रकार स्वयं अपने हाथों से सत्कार किया — फल छीलकर खिलाए, शहद की चाय बनाई और तौलिया लेकर खड़े रहे — उससे हमें निम्नलिखित प्रेरणाएँ मिलती हैं:
1. विनम्रता: पद और प्रतिष्ठा कितनी भी बड़ी हो, विनम्रता नहीं छोड़नी चाहिए।
2. आत्मीयता: अतिथि को परिवार के सदस्य की तरह सम्मान देना चाहिए।
3. सेवाभाव: दूसरों की सेवा में संकोच नहीं करना चाहिए।
मैं अपने अतिथि का सत्कार इस प्रकार करूँगा/करूँगी:
- अतिथि का हँसते हुए स्वागत करूँगा/करूँगी।
- उनके लिए स्वयं जलपान की व्यवस्था करूँगा/करूँगी।
- उनकी बातें ध्यान से सुनूँगा/सुनूँगी।
- उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखूँगा/रखूँगी।
- विदाई के समय उन्हें सम्मान के साथ विदा करूँगा/करूँगी।
भारतीय संस्कृति में 'अतिथि देवो भव' की परंपरा रही है और अराफात का आतिथ्य इसी भावना का प्रतीक है।
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