गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात (भीष्म साहनी) — NCERT Solutions
Assam Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात (भीष्म साहनी), Assam Board Class 12 Hindi: 15 textbook questions solved step by step.
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प्रश्न-अभ्यास
1लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया था?Show solution
दिया गया है: भीष्म साहनी का संस्मरण 'गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात'।
उत्तर:
लेखक भीष्म साहनी सेवाग्राम उस समय गए थे जब वे एक युवा लेखक थे। वे गांधी जी के दर्शन करने तथा उनके आश्रम के जीवन को निकट से देखने-समझने के उद्देश्य से सेवाग्राम गए थे। गांधी जी का व्यक्तित्व और उनका सादा जीवन लेखक को बहुत आकर्षित करता था, इसलिए वे वहाँ जाकर उनके साथ कुछ समय बिताना चाहते थे। सेवाग्राम में रहकर लेखक ने गांधी जी की दिनचर्या, उनके आश्रम के वातावरण और उनके सरल-सहज व्यवहार को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया।
2लेखक का गांधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव किस प्रकार का रहा?Show solution
दिया गया है: लेखक का गांधी जी के साथ प्रातःकालीन भ्रमण का अनुभव।
उत्तर:
लेखक का गांधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव अत्यंत रोमांचक और अविस्मरणीय रहा। गांधी जी बहुत तेज़ गति से चलते थे और लेखक को उनके साथ कदम मिलाकर चलने में कठिनाई होती थी। गांधी जी के साथ चलते हुए लेखक को ऐसा लगा जैसे वे किसी साधारण व्यक्ति के साथ नहीं, बल्कि एक महान विभूति के साथ चल रहे हैं। गांधी जी की सरलता, उनकी ऊर्जा और उनका आत्मीय व्यवहार लेखक को बहुत प्रभावित कर गया। यह अनुभव लेखक के लिए जीवन की एक अमूल्य स्मृति बन गया।
3लेखक ने सेवाग्राम में किन-किन लोगों के आने का जिक्र किया है?Show solution
दिया गया है: सेवाग्राम आश्रम में आने वाले लोगों का वर्णन।
उत्तर:
लेखक ने सेवाग्राम में अनेक प्रकार के लोगों के आने का जिक्र किया है। वहाँ देश के विभिन्न भागों से लोग गांधी जी के दर्शन करने आते थे। इनमें साधारण ग्रामीण जन, किसान, मजदूर, बुद्धिजीवी, नेता, विदेशी पत्रकार तथा अन्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। बौद्ध भिक्षु भी चीवर पहने वहाँ आते थे। इस प्रकार सेवाग्राम एक ऐसा केंद्र था जहाँ हर वर्ग और हर देश के लोग गांधी जी से मिलने और उनका आशीर्वाद लेने आते थे। यह आश्रम एक तीर्थस्थल के समान था।
4रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार किस प्रकार का था?Show solution
दिया गया है: सेवाग्राम में एक रोगी बालक और गांधी जी का व्यवहार।
उत्तर:
रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार अत्यंत स्नेहपूर्ण, करुणामय और ममतापूर्ण था। जब एक रुग्ण (बीमार) बालक को उनके पास लाया गया, तो गांधी जी ने उसे बड़े प्यार से देखा। उन्होंने बालक की माँ को सांत्वना दी और उसके उपचार के बारे में सुझाव दिए। गांधी जी की आँखों में उस बालक के प्रति गहरी करुणा और ममता थी। वे उस बालक को माँ जैसी ममता से देख रहे थे। उनका यह व्यवहार यह सिद्ध करता है कि वे केवल राजनेता नहीं, बल्कि एक सच्चे मानवतावादी और करुणाशील व्यक्ति थे।
5काश्मीर के लोगों ने नेहरू जी का स्वागत किस प्रकार किया?Show solution
दिया गया है: नेहरू जी की काश्मीर यात्रा और वहाँ के लोगों का स्वागत।
उत्तर:
काश्मीर के लोगों ने नेहरू जी का अत्यंत उत्साहपूर्ण और भावपूर्ण स्वागत किया। नेहरू जी काश्मीरी मूल के थे, इसलिए काश्मीर की जनता उनसे विशेष लगाव रखती थी। जब नेहरू जी काश्मीर पहुँचे तो वहाँ के लोग बड़ी संख्या में उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़े। लोगों की आँखों में उनके प्रति अपार श्रद्धा और प्रेम था। काश्मीरी जनता ने उन्हें अपना प्रिय नेता और अपना बेटा मानकर हार्दिक स्वागत किया। यह स्वागत केवल औपचारिक नहीं था, बल्कि इसमें जनता का सच्चा प्रेम और आत्मीयता झलकती थी।
6अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की कौन सी विशेषता स्पष्ट होती है?Show solution
दिया गया है: नेहरू जी से संबंधित अखबार वाली घटना।
उत्तर:
अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं:
- स्वाभिमान और आत्मसम्मान: नेहरू जी किसी भी प्रकार की चापलूसी या झूठी प्रशंसा पसंद नहीं करते थे। जब उन्हें लगा कि अखबार में उनकी झूठी या अतिरंजित प्रशंसा की जा रही है, तो वे तिलमिला उठे।
- सत्यनिष्ठा: वे सत्य के प्रति पूर्णतः समर्पित थे और असत्य या अर्धसत्य को कभी स्वीकार नहीं करते थे।
- निर्भीकता: वे अपनी बात बेबाकी से कहते थे और किसी के दबाव में नहीं आते थे।
- सादगी: वे दिखावे और आडंबर से दूर रहते थे।
इस प्रकार यह घटना नेहरू जी के सत्यप्रिय, स्वाभिमानी और निर्भीक व्यक्तित्व को उजागर करती है।
7फिलिस्तीन के प्रति भारत का रवैया बहुत सहानुभूतिपूर्ण एवं समर्थन भरा क्यों था?Show solution
दिया गया है: भारत और फिलिस्तीन के संबंध तथा भारत की विदेश नीति।
उत्तर:
फिलिस्तीन के प्रति भारत का रवैया सहानुभूतिपूर्ण एवं समर्थन भरा होने के निम्नलिखित कारण थे:
- उपनिवेशवाद-विरोध: भारत स्वयं लंबे समय तक औपनिवेशिक शासन का शिकार रहा था। फिलिस्तीनी जनता भी अपनी भूमि पर अधिकार के लिए संघर्ष कर रही थी, इसलिए भारत उनके संघर्ष को समझता था।
- गुटनिरपेक्ष नीति: भारत की विदेश नीति हमेशा से उत्पीड़ित और संघर्षरत जनता के पक्ष में रही है।
- मानवीय संवेदना: फिलिस्तीनी लोग अपनी मातृभूमि से विस्थापित हो रहे थे, जो एक मानवीय त्रासदी थी। भारत इस पीड़ा को समझता था।
- गांधीवादी मूल्य: अहिंसा और न्याय के गांधीवादी मूल्यों के आधार पर भी भारत फिलिस्तीन के न्यायसंगत संघर्ष का समर्थन करता था।
इन सभी कारणों से भारत फिलिस्तीन का समर्थक रहा।
8अराफात के आतिथ्य प्रेम से संबंधित किन्हीं दो घटनाओं का वर्णन कीजिए।Show solution
दिया गया है: यास्सेर अराफात का आतिथ्य-प्रेम।
उत्तर:
अराफात के आतिथ्य प्रेम से संबंधित दो प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं:
पहली घटना — फल छीलकर खिलाना:
जब लेखक और उनके साथी अराफात से मिलने गए, तो अराफात ने स्वयं अपने हाथों से फल छील-छीलकर उन्हें खिलाए। एक इतने बड़े नेता का इस प्रकार स्वयं अपने हाथों से अतिथियों की सेवा करना उनके आतिथ्य-प्रेम और विनम्रता का प्रमाण था।
दूसरी घटना — शहद की चाय बनाना:
अराफात ने अपने अतिथियों के लिए स्वयं अपने हाथों से शहद की चाय बनाई। उन्होंने शहद की उपयोगिता के बारे में भी बताया। इसके अलावा, जब लेखक गुसलखाने से बाहर निकले तो अराफात स्वयं तौलिया हाथ में लिए बाहर खड़े थे — यह उनके अतिथि-सत्कार की पराकाष्ठा थी।
इन दोनों घटनाओं से स्पष्ट होता है कि अराफात एक महान नेता होते हुए भी अत्यंत विनम्र, सरल और आतिथ्य-प्रेमी व्यक्ति थे।
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Frequently Asked Questions
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