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Chapter 10 of 38
NCERT Solutions

अपना मालवा-खाऊ-उजाड़ सभ्यता में (Part 2) — NCERT Solutions

Assam Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for अपना मालवा-खाऊ-उजाड़ सभ्यता में (Part 2), Assam Board Class 12 Hindi: 10 textbook questions solved step by step.

45 questions34 flashcards5 concepts

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मालवा पठार की प्रमुख नदियों (शिप्रा, चंबल, गंभीर, पार्वती, कालीसिंध, चोरल, नर्मदा) और उनकी सहायक नदियों को दर्शाने वाला एक भौगोलिक मानचित्र, जिसमें उनके उद्गम स्थल और बहाव मार्ग स्पष्ट रूप से चिह्नित
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10 Questions Solved · 2 Sections

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प्रश्न–अभ्यास

1मालवा में जब सब जगह बरसात की झाड़ी लगी रहती है तब मालवा के जनजीवन पर इसका क्या असर पड़ता है?Show solution

दिया गया है: मालवा की बरसात और वहाँ के जनजीवन पर उसके प्रभाव का वर्णन पाठ में किया गया है।

उत्तर:
मालवा में जब चारों ओर बरसात की झड़ी लगी रहती है तब वहाँ के जनजीवन पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं:

  1. प्रकृति का सौंदर्य: चारों ओर हरियाली छा जाती है, धरती हरी-भरी हो उठती है और वातावरण में एक अनोखी ताज़गी आ जाती है।
  2. कृषि समृद्धि: खेत-खलिहान लहलहा उठते हैं, फसलें अच्छी होती हैं और किसानों के चेहरे पर खुशी आ जाती है।
  3. जल-संग्रह: नदी, नाले और तालाब पानी से भर जाते हैं जिससे पूरे वर्ष पानी की कमी नहीं रहती।
  4. उत्सव का माहौल: लोग ओटलों (मुख्यद्वार) पर बैठकर बादलों की घऊ-घऊ आवाज़ सुनते हैं, मन प्रसन्न रहता है।
  5. समृद्धि का आश्वासन: 'मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी, पग-पग नीर' — यह कहावत चरितार्थ होती है अर्थात् अन्न और जल दोनों की प्रचुरता रहती है।
  6. सामाजिक उल्लास: लोग माता की मूर्ति स्थापित करने, पूजा-पाठ करने जैसे शुभ कार्यों की योजना बनाते हैं।

निष्कर्ष: बरसात मालवा के जनजीवन में खुशहाली, समृद्धि और उत्साह भर देती है।

2अब मालवा में बैसा पानी नहीं गिरता जैसा गिरा करता था। उसके क्या कारण हैं?Show solution

दिया गया है: मालवा में पहले की तुलना में अब कम वर्षा होती है।

उत्तर:
मालवा में पहले जैसी वर्षा न होने के निम्नलिखित प्रमुख कारण हैं:

  1. वनों की कटाई: पहले मालवा में घने जंगल थे जो बादलों को रोककर वर्षा कराते थे। आज वे जंगल काटे जा चुके हैं जिससे वर्षा कम हो गई है।
  2. औद्योगीकरण: कारखानों और उद्योगों से निकलने वाले धुएँ और प्रदूषण ने वातावरण को दूषित किया है जिससे मौसम का चक्र बिगड़ गया है।
  3. कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ना: वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ने से धरती का तापमान बढ़ा है और वर्षा का स्वाभाविक चक्र बाधित हुआ है।
  4. जल-स्रोतों की उपेक्षा: पहले के राजाओं ने तालाब, बावड़ियाँ और जलाशय बनवाए थे जो जल-संरक्षण में सहायक थे। आज उनकी देखभाल नहीं होती, वे नष्ट हो रहे हैं।
  5. नदियों का प्रदूषण: नदियों को गंदे पानी के नाले बना दिया गया है जिससे जल-चक्र प्रभावित हुआ है।
  6. खाऊ-उजाड़ सभ्यता: आधुनिक विकास की अंधी दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है जिससे पर्यावरण असंतुलित हो गया है।

निष्कर्ष: मनुष्य की अदूरदर्शिता और प्रकृति के प्रति लापरवाही ने मालवा की वर्षा को प्रभावित किया है।

3हमारे आज के इंजीनियर ऐसा क्यों समझते हैं कि वे पानी का प्रबंध जानते हैं और पहले जमाने के लोग कुछ नहीं जानते थे?Show solution

दिया गया है: आधुनिक इंजीनियरों और पुराने जल-प्रबंधन की तुलना पाठ में की गई है।

उत्तर:
आज के इंजीनियर यह समझते हैं कि केवल आधुनिक तकनीक, मशीनें और बड़े-बड़े बाँध ही जल-प्रबंधन के सही तरीके हैं। उनकी इस सोच के निम्नलिखित कारण हैं:

  1. आधुनिकता का अहंकार: आज के इंजीनियर पश्चिमी शिक्षा और तकनीक से प्रभावित हैं। वे मानते हैं कि जो कुछ भी पुराना है वह अवैज्ञानिक और पिछड़ा हुआ है।
  2. परंपरागत ज्ञान की अनदेखी: उन्हें पुराने तालाबों, बावड़ियों और जलाशयों की वैज्ञानिकता का ज्ञान नहीं है। वे नहीं जानते कि पुराने राजाओं ने कितनी कुशलता से जल-संरक्षण किया था।
  3. दिखावे की प्रवृत्ति: बड़े-बड़े बाँध और नहरें बनाना अधिक प्रतिष्ठाजनक लगता है जबकि पुराने छोटे-छोटे तालाब और कुएँ साधारण दिखते हैं।
  4. इतिहास से अनभिज्ञता: उन्हें यह नहीं पता कि विक्रमादित्य, भोज और मुंज जैसे राजाओं ने मालवा में जल-प्रबंधन की जो व्यवस्था की थी वह अत्यंत वैज्ञानिक और टिकाऊ थी।

वास्तविकता: पुराने जमाने के लोग प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जल-संरक्षण करते थे जो आज के बड़े बाँधों से कहीं अधिक प्रभावी और पर्यावरण-हितैषी था।

निष्कर्ष: आधुनिक इंजीनियरों की यह सोच उनकी संकीर्णता और परंपरागत ज्ञान के प्रति उपेक्षा का परिणाम है।

4'मालवा में विक्रमादित्य और भोज और मुंज रिनेसां के बहुत पहले हो गए।' पानी के रखरखाव के लिए उन्होंने क्या प्रबंध किए?Show solution

दिया गया है: मालवा के प्राचीन राजाओं द्वारा जल-प्रबंधन का उल्लेख पाठ में है।

उत्तर:
लेखक का कहना है कि मालवा में विक्रमादित्य, भोज और मुंज जैसे महान राजा पश्चिम के पुनर्जागरण (रिनेसां) से बहुत पहले हो चुके थे। इन राजाओं ने पानी के रखरखाव के लिए निम्नलिखित प्रबंध किए:

  1. विशाल तालाबों का निर्माण: राजा भोज ने भोपाल के पास एक विशाल तालाब बनवाया जो 'भोजताल' के नाम से प्रसिद्ध है। यह तालाब इतना बड़ा था कि उसे एक छोटे समुद्र की संज्ञा दी जाती थी।
  2. बावड़ियों का निर्माण: पूरे मालवा में सैकड़ों बावड़ियाँ बनवाई गईं जो भूमिगत जल को संरक्षित करती थीं और वर्षभर पानी उपलब्ध कराती थीं।
  3. नदियों पर बाँध: नदियों पर छोटे-छोटे बाँध बनाकर पानी को रोका जाता था ताकि सूखे के समय भी पानी की कमी न हो।
  4. जलाशयों की श्रृंखला: पूरे क्षेत्र में एक-दूसरे से जुड़े जलाशयों की श्रृंखला बनाई गई थी जिससे एक जलाशय के भरने पर पानी दूसरे में जाता था।
  5. सामुदायिक जल-प्रबंधन: जल-संरक्षण को सामाजिक दायित्व माना जाता था और पूरा समाज मिलकर तालाबों और जलाशयों की देखभाल करता था।

निष्कर्ष: इन राजाओं की दूरदर्शिता और वैज्ञानिक सोच के कारण मालवा 'डग-डग रोटी, पग-पग नीर' की धरती बना रहा।

5'हमारी आज की सभ्यता इन नदियों को अपने गंदे पानी के नाले बना रही है।' क्यों और कैसे?Show solution

दिया गया है: आधुनिक सभ्यता द्वारा नदियों के प्रदूषण का वर्णन पाठ में है।

उत्तर:
आज की औद्योगिक सभ्यता ने नदियों को गंदे पानी के नालों में बदल दिया है। इसके निम्नलिखित कारण और तरीके हैं:

क्यों:

  1. औद्योगिक लालच: उद्योगपति अपना कचरा और रासायनिक अपशिष्ट नदियों में बहाते हैं क्योंकि इससे उनका खर्च बचता है।
  2. प्रशासनिक उदासीनता: सरकार और प्रशासन नदियों की सफाई के प्रति गंभीर नहीं हैं।
  3. जागरूकता की कमी: आम जनता को नदी-प्रदूषण के दुष्परिणामों की जानकारी नहीं है।

कैसे:

  1. औद्योगिक कचरा: कारखानों का जहरीला रासायनिक कचरा सीधे नदियों में छोड़ा जाता है।
  2. शहरी मल-जल: शहरों का गंदा पानी (सीवेज) बिना शोधन के नदियों में मिला दिया जाता है।
  3. कृषि रसायन: खेतों में प्रयुक्त कीटनाशक और रासायनिक खाद बारिश के पानी के साथ बहकर नदियों में पहुँचते हैं।
  4. धार्मिक कचरा: मूर्तियाँ, फूल-माला और पूजा सामग्री नदियों में विसर्जित की जाती है।
  5. प्लास्टिक प्रदूषण: प्लास्टिक और अन्य अजैव पदार्थ नदियों में फेंके जाते हैं।

परिणाम: नदियों का पानी पीने योग्य नहीं रहा, जलीय जीव मर रहे हैं और नदियाँ 'सदानीरा' से 'गंदे नाले' बन गई हैं।

निष्कर्ष: यह हमारी खाऊ-उजाड़ सभ्यता का सबसे बड़ा पाप है।

6लेखक को क्यों लगता है कि 'हम जिसे विकास की औद्योगिक सभ्यता कहते हैं वह उजाड़ की अपसभ्यता है'? आप क्या मानते हैं?

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7धरती का वातावरण गरम क्यों हो रहा है? इसमें यूरोप और अमेरिका की क्या भूमिका है? टिप्पणी कीजिए।

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योग्यता-विस्तार

1क्या आपको भी पर्यावरण की चिंता है? अगर है तो किस प्रकार? अपने शब्दों में लिखिए।

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2विकास की औद्योगिक सभ्यता उजाड़ की अपसभ्यता है। खाऊ-उजाड़ सभ्यता के संदर्भ में हो रहे पर्यावरण के विनाश पर प्रकाश डालिए।

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3पर्यावरण को विनाश से बचाने के लिए आप क्या कर सकते हैं? उसे कैसे बचाया जा सकता है? अपने विचार लिखिए।

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5 more solved questions in अपना मालवा-खाऊ-उजाड़ सभ्यता में

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in अपना मालवा-खाऊ-उजाड़ सभ्यता में for Assam Board Class 12 Hindi?
Key topics in अपना मालवा-खाऊ-उजाड़ सभ्यता में include मालवा का प्राकृतिक और सांस्कृतिक रूप, यात्रा के अनुभव और नदी-संवेदना, नर्मदा, शिप्रा और चंबल का भूगोल और भाव, तालाब, बावड़ियाँ और जल-प्रबंधन. Study these first, then practise questions on each for the Assam Board Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for अपना मालवा-खाऊ-उजाड़ सभ्यता में free?
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Sources & Official References

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