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Chapter 34 of 38
NCERT Solutions

शिरीष के फूल-(हजारी प्रसाद द्विवेदी)

Assam Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for शिरीष के फूल-(हजारी प्रसाद द्विवेदी) — Assam Board Class 12 Hindi.

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एक शिरीष वृक्ष का चित्रण जो जेठ की जलती धूप में भी फूलों से लदा हुआ है, उसकी छायादार और घनी हरीतिमा को दर्शाता है। इसमें शिरीष के फूलों की कोमलता और फलों की दृढ़ता भी दिखाई गई है।
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अभ्यास

1लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत(संन्यासी) की तरह क्यों माना है?Show solution
लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत इसलिए माना है क्योंकि वह जेठ की जलती धूप, लू और उमस में भी अविचल रहकर फूलता है। वह दुःख-सुख, आँधी-तूफान और मौसम की कठोरता से विचलित नहीं होता। जैसे अवधूत संसार के द्वंद्वों से ऊपर उठकर मस्त, निर्भय और अनासक्त रहता है, वैसे ही शिरीष भी जीवन की प्रचंड परिस्थितियों में अपने रस और सौंदर्य को बनाए रखता है। इसलिए वह लेखक को अजेय जिजीविषा और धैर्य का प्रतीक लगता है।

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2हृदय की कोमलता को बचाने के लिए व्यवहार की कठोरता भी कभी-कभी जरूरी हो जाती है—प्रस्तुत पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।Show solution
पाठ में पुराने फलों की अधिकार-लिप्सा और जड़ता की आलोचना की गई है। शिरीष के पुराने फल नए पत्तों और फलों के आने पर भी आसानी से जगह नहीं छोड़ते; जब तक उन्हें धकियाकर बाहर न निकाला जाए, वे डटे रहते हैं। लेखक इसे उन लोगों से जोड़ता है जो समय के बदलते रुख को नहीं पहचानते। इससे यह सीख मिलती है कि केवल कोमलता पर्याप्त नहीं होती; कभी-कभी अपनी कोमल भावनाओं और मानवीय संवेदना को बचाने के लिए व्यवहार में कठोरता, दृढ़ता और निर्णयशीलता जरूरी हो जाती है। जैसे नए जीवन को जगह देने के लिए पुराने, जड़ और बोझिल तत्त्वों को हटाना पड़ता है, वैसे ही मन की कोमलता को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कठोरता अपनानी पड़ती है।

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3द्विवेदी जी ने शिरीष के माध्यम से कोलाहल व संघर्ष से भरी जीवन-स्थितियों में अविचल रह कर जिजीविषु बने रहने की सीख दी है। स्पष्ट करें।Show solution
लेखक शिरीष के माध्यम से यह दिखाता है कि कोलाहल, संघर्ष, गर्मी, लू और कठिन परिस्थितियों के बीच भी मनुष्य को अविचल रहना चाहिए। शिरीष भरे भादों में, उमस और जलन के समय भी फूलता रहता है; वह हार नहीं मानता। इसी से वह सिखाता है कि जीवन में सच्ची जिजीविषा वही है जो बाहरी प्रतिकूलताओं से टूटती नहीं, बल्कि भीतर से रस खींचकर अपने को बनाए रखती है। लेखक के अनुसार जैसे शिरीष वायुमंडल से रस खींचकर कोमल और कठोर दोनों बना रहता है, वैसे ही मनुष्य को भी आत्मबल से अपने अस्तित्व को टिकाए रखना चाहिए। यही अविचलता, धैर्य और जिजीविषा की सीख है।

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4हाय, वह अवधूत आज कहाँ है? ऐसा कहकर लेखक ने आत्मबल पर देह-बल के वर्चस्व की वर्तमान सभ्यता के संकट की ओर संकेत किया है। कैसे?Show solution
लेखक को शिरीष देखकर उस अवधूत की याद आती है जो आत्मबल से जीता था, न कि देह-बल से। जब वह पूछता है—“हाय, वह अवधूत आज कहाँ है?”—तो उसके मन में यह पीड़ा व्यक्त होती है कि आज की सभ्यता में बाहरी शक्ति, सत्ता, भोग-विलास और शारीरिक बल का महत्व बढ़ गया है, जबकि कोमलता, अनासक्ति, धैर्य और मानवता जैसे आंतरिक गुण पीछे छूट गए हैं। गांधीजी ऐसे ही आत्मबल के प्रतीक थे। उनके अभाव से लेखक वर्तमान सभ्यता को संकटग्रस्त मानता है, क्योंकि वह भीतर की नैतिक शक्ति की जगह बाहर की शक्ति को महत्त्व देती है।

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5कवि (साहित्यकार) के लिए अनासक्त योगी की स्थिर प्रज्ञा और विदग्ध प्रेमी का हृदय—एक साथ आवश्यक है। ऐसा विचार प्रस्तुत कर लेखक ने साहित्य-कर्म के लिए बहुत ऊँचा मानदंड निर्धारित किया है। विस्तारपूर्वक समझाएँ।Show solution
लेखक के अनुसार सच्चे कवि के लिए दो गुण एक साथ आवश्यक हैं—अनासक्त योगी की स्थिरप्रज्ञता और विदग्ध प्रेमी का हृदय। इसका अर्थ है कि कवि संसार के वैभव, सौंदर्य और अनुभवों में रहते हुए भी उनसे आसक्त न हो; वह भीतर से शांत, संतुलित और विवेकपूर्ण रहे। साथ ही उसमें प्रेम, संवेदना, सरसता और सौंदर्य-बोध भी हो, ताकि वह जीवन की कोमल अनुभूतियों को गहराई से पकड़ सके। इसी कारण लेखक कालिदास को महान मानता है—वे सौंदर्य के बाह्य आवरण को भेदकर भीतर तक पहुँचते हैं और भाव-रस को खींच लेते हैं। इस तरह लेखक साहित्य-कर्म के लिए बहुत ऊँचा मानदंड रखता है: केवल प्रतिभा या तकनीक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनासक्ति और भावनात्मक समृद्धि दोनों जरूरी हैं।

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6सर्वग्रासी काल की मार से बचते हुए वही दीर्घजीवी हो सकता है, जिसने अपने व्यवहार में जड़ता छोड़कर नित बदल रही स्थितियों में निरंतर अपनी गतिशीलता बनाए रखी है। पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।Show solution
पाठ में शिरीष के पुराने फलों का उदाहरण देकर बताया गया है कि जो जीव या व्यक्ति नएपन को स्वीकार करता है, वही टिकता है। पुराने फल तब तक डटे रहते हैं जब तक नए पत्ते और फल उन्हें धकियाकर बाहर नहीं निकाल देते। लेखक इसे जीवन, समाज और राजनीति में भी लागू करता है—जो समय के साथ नहीं बदलते, वे जड़ हो जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं। इसके विपरीत शिरीष लगातार बदलती ऋतुओं में भी सक्रिय रहता है; वह वसंत में खिलता है और भादों-जेठ की प्रतिकूलता में भी अपना रस बनाए रखता है। लेखक कहता है कि हिलते-डुलते रहो, स्थान बदलते रहो, आगे की ओर मुँह किए रहो—यही जीवन की गतिशीलता है। इसलिए जड़ता छोड़कर निरंतर गतिशील रहने वाला ही काल की मार से बचकर दीर्घजीवी हो सकता है।

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7आशय स्पष्ट कीजिए—Show solution
क) इसका आशय है कि जीवन में प्राणधारा और काल का संघर्ष निरंतर चलता रहता है। जो लोग यह सोचते हैं कि एक ही स्थान पर जमे रहकर वे समय के प्रहार से बच जाएंगे, वे भ्रम में हैं। बचने का उपाय गतिशीलता, स्थान-परिवर्तन और आगे की ओर बढ़ना है; जड़ हो जाना मृत्यु को बुलाना है।

ख) इसका आशय है कि कवि बनने के लिए अनासक्त, फक्कड़ और निस्पृह होना जरूरी है। जो व्यक्ति लाभ-हानि, हिसाब-किताब और स्वार्थ में उलझा रहता है, वह सच्चा कवि नहीं हो सकता। लेखक कहना चाहता है कि कवि को जीवन के प्रति मुक्त, मस्त और सहज होना चाहिए।

ग) इसका आशय है कि फूल या पेड़ अपने-आप में अंतिम लक्ष्य नहीं है। वह किसी बड़े अर्थ, किसी व्यापक सत्य या किसी अन्य संकेत की ओर इशारा करता है। प्रकृति की प्रत्येक वस्तु हमें केवल स्वयं नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपे हुए जीवन-सत्य की ओर ले जाती है।

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1शिरीष के पुष्प को शीतपुष्प भी कहा जाता है। ज्येष्ठ माह की प्रचंड गर्मी में फूलने वाले फूल को शीतपुष्प संज्ञा किस आधार पर दी गई होगी?
2कोमल और कठोर दोनों भाव किस प्रकार गांधीजी के व्यक्तित्व की विशेषता बन गए।
3आजकल अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय फूलों की बहुत माँग है। बहुत से किसान साग-सब्जी व अन्य उत्पादन छोड़ फूलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसी मुद्दे को विषय बनाते हुए वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करें।
4हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इस पाठ की तरह ही वनस्पतियों के संदर्भ में कई व्यक्तित्व व्यंजक ललित निबंध और भी लिखे हैं—कुटज, आम फिर बौरा गए, अशोक के फूल, देवदारु आदि। शिक्षक की सहायता से इन्हें ढूँढ़िए और पढ़िए।
5द्विवेदी जी की वनस्पतियों में ऐसी रुचि का क्या कारण हो सकता है? आज साहित्यिक रचना-फलक पर प्रकृति की उपस्थिति न्यून से न्यून होती जा रही है। तब ऐसी रचनाओं का महत्व बढ़ गया है। प्रकृति के प्रति आपका दृष्टिकोण रुचिपूर्ण है या उपेक्षामय? इसका मूल्यांकन करें।
13दस दिन फूले और फिर खंखड़-खंखड़

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