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Chapter 18 of 38
NCERT Solutions

बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') (Part 2) — NCERT Solutions

Assam Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') (Part 2), Assam Board Class 12 Hindi: 11 textbook questions solved step by step. Covers अभ्यास.

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यह इन्फोग्राफिक सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के काव्य व्यक्तित्व के द्वंद्व को दर्शाता है, जिसमें संघर्ष और जीवन, क्रांति और निर्माण, ओज और माधुर्य, आशा और निराशा, उल्लास-शोक, राग-विराग, उत्थान-पतन, अं
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11 Questions Solved · 1 Section

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अभ्यास

कविता के साथ — 1अस्थिर सुख पर दुख की छाया पंक्ति में दुख की छाया किसे कहा गया है और क्यों?Show solution

दिया गया है: कविता 'बादल राग' की पंक्ति — 'अस्थिर सुख पर दुख की छाया'।

उत्तर:
इस पंक्ति में बादलों की छाया को 'दुख की छाया' कहा गया है।

कारण:

  • बादल जब आकाश में छा जाते हैं तो धरती पर उनकी छाया पड़ती है। यह छाया उस 'अस्थिर सुख' पर पड़ती है जो पूँजीपति वर्ग को प्राप्त है।
  • पूँजीपतियों का सुख 'अस्थिर' है क्योंकि वह शोषण पर टिका है और कभी भी नष्ट हो सकता है।
  • बादल क्रांति के प्रतीक हैं। जब क्रांति (विप्लव) आती है तो शोषक वर्ग के सुख पर संकट (दुख की छाया) मँडराने लगता है।
  • अतः 'दुख की छाया' से तात्पर्य है — क्रांति का भय और आसन्न संकट, जो पूँजीपतियों के अस्थायी सुख को नष्ट करने वाला है।

निष्कर्ष: कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' ने बादलों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि शोषकों का सुख क्षणिक है और क्रांति की छाया उनके विनाश का संकेत है।

कविता के साथ — 2अशानि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर पंक्ति में किसकी ओर संकेत किया गया है?Show solution

दिया गया है: पंक्ति — 'अशनि-पात से शापित उन्नत शत-शत वीर'।

उत्तर:
इस पंक्ति में उन महान क्रांतिकारी वीरों की ओर संकेत किया गया है जो समाज में परिवर्तन लाने के लिए संघर्ष करते हैं और शोषक व्यवस्था के विरुद्ध लड़ते हैं।

विस्तार:

  • 'अशनि-पात' का अर्थ है — वज्रपात (बिजली का गिरना)। यहाँ यह शासक वर्ग के दमन और अत्याचार का प्रतीक है।
  • 'उन्नत शत-शत वीर' से तात्पर्य उन सैकड़ों ऊँचे सिर वाले, स्वाभिमानी क्रांतिकारियों से है जो शोषण के विरुद्ध खड़े होते हैं।
  • ये वीर शासक वर्ग के 'वज्रपात' (दमन, कारावास, फाँसी) से 'शापित' (पीड़ित/दंडित) किए जाते हैं।
  • कवि का संकेत उन स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों की ओर भी है जो ब्रिटिश शासन के अत्याचार का शिकार हुए।

निष्कर्ष: यह पंक्ति उन वीर योद्धाओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करती है जो क्रांति की राह में बलिदान हो जाते हैं।

कविता के साथ — 3विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते पंक्ति में विप्लव-रव से क्या तात्पर्य है? छोटे ही हैं शोभा पाते ऐसा क्यों कहा गया है?Show solution

दिया गया है: पंक्ति — 'विप्लव-रव से छोटे ही हैं शोभा पाते'।

विप्लव-रव का तात्पर्य:
'विप्लव' का अर्थ है — क्रांति अथवा बाढ़, और 'रव' का अर्थ है — शोर/ध्वनि। अतः 'विप्लव-रव' से तात्पर्य है — क्रांति की गर्जना, अर्थात् बादलों की गड़गड़ाहट जो क्रांति के आह्वान का प्रतीक है।

'छोटे ही हैं शोभा पाते' — कारण:

  • क्रांति की गर्जना से छोटे-छोटे पौधे, घास और छोटे जीव प्रसन्न होते हैं क्योंकि वर्षा उनके जीवन का आधार है।
  • प्रतीकात्मक रूप से — समाज के निर्धन, शोषित और दलित वर्ग (छोटे लोग) ही क्रांति से लाभान्वित होते हैं और उसका स्वागत करते हैं।
  • बड़े और शक्तिशाली वृक्ष (पूँजीपति/शोषक वर्ग) तूफान में उखड़ जाते हैं, जबकि छोटे पौधे झुककर बच जाते हैं और पुनः खिल उठते हैं।
  • अतः क्रांति का वास्तविक लाभ गरीब और पीड़ित वर्ग को ही मिलता है — इसीलिए 'छोटे ही शोभा पाते हैं'।

निष्कर्ष: कवि का संदेश है कि क्रांति सदा शोषितों के हित में होती है।

कविता के साथ — 4बादलों के आगमन से प्रकृति में होने वाले किन-किन परिवर्तनों को कविता रेखांकित करती है?Show solution

दिया गया है: कविता 'बादल राग' — सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'।

बादलों के आगमन से प्रकृति में होने वाले परिवर्तन:

  1. आकाश में परिवर्तन: बादल घुमड़-घुमड़कर आते हैं, आकाश में छा जाते हैं और घनघोर अंधकार फैल जाता है।
  1. वायु में परिवर्तन: समीर (हवा) का सागर-सा विस्तार होता है — तेज़ हवाएँ चलने लगती हैं।
  1. बिजली और गर्जना: वज्र-गर्जन (बादलों की गड़गड़ाहट) होती है और बिजली चमकती है (अशनि-पात)।
  1. वर्षा और बाढ़: बादलों से मूसलाधार वर्षा होती है जिससे जल-विप्लव (बाढ़) की स्थिति उत्पन्न होती है।
  1. धरती पर परिवर्तन: वर्षा से धरती हरी-भरी (शस्य-श्यामल) हो जाती है। छोटे पौधे और घास खिल उठते हैं।
  1. जीव-जगत पर प्रभाव: बड़े-बड़े वृक्ष तूफान में उखड़ जाते हैं जबकि छोटे पौधे झुककर बच जाते हैं।
  1. मानव-मन पर प्रभाव: धनी और शोषक वर्ग भयभीत होकर मुँह ढाँप लेते हैं, जबकि किसान और गरीब वर्ग बादलों का स्वागत करते हैं।

निष्कर्ष: कवि ने प्रकृति के इन परिवर्तनों के माध्यम से सामाजिक क्रांति का चित्रण किया है।

व्याख्या — 1निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए:
तिरती है समीर-सागर पर
अस्थिर सुख पर दुख की छाया—
जग के दग्ध हृदय पर
निर्दय विप्लव की प्लावित माया—
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प्रसंग: ये पंक्तियाँ सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता 'बादल राग' से ली गई हैं। कवि बादलों के आगमन का वर्णन करते हुए उनके प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट कर रहे हैं।

शब्दार्थ:

  • समीर-सागर = वायु का सागर (विशाल वायुमंडल)
  • दग्ध हृदय = तपा हुआ / पीड़ित हृदय
  • विप्लव = क्रांति / बाढ़
  • प्लावित माया = बहा देने वाली शक्ति

व्याख्या:
कवि कहते हैं कि बादल वायु के विशाल सागर पर तैरते हुए आ रहे हैं। जिस प्रकार बादलों की छाया धरती पर पड़ती है, उसी प्रकार पूँजीपतियों के अस्थिर सुख पर दुख की छाया मँडराने लगती है। पूँजीपतियों का सुख 'अस्थिर' है क्योंकि वह शोषण पर आधारित है।

दूसरी ओर, संसार के दग्ध (पीड़ित) हृदयों — अर्थात् शोषित, गरीब और दुखी लोगों — पर क्रांति की 'प्लावित माया' (बाढ़ की तरह बह जाने वाली शक्ति) छा जाती है। यह क्रांति 'निर्दय' है क्योंकि यह शोषण की पुरानी व्यवस्था को बिना किसी दया के बहा देती है।

काव्य-सौंदर्य:

  • 'समीर-सागर' में रूपक अलंकार है।
  • 'दग्ध हृदय' में विशेषण का सार्थक प्रयोग है।
  • पूरी पंक्तियों में प्रतीकात्मकता का सुंदर प्रयोग है।

भाव: क्रांति शोषकों के लिए विनाशकारी और शोषितों के लिए मुक्तिदायिनी है।

व्याख्या — 2निम्नलिखित पंक्तियों की व्याख्या कीजिए:
अट्टालिका नहीं है रे
आतंक-भवन
सदा पंक पर ही होता
जल-विप्लव-प्लावन
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प्रसंग: ये पंक्तियाँ 'बादल राग' कविता से ली गई हैं। कवि निराला यहाँ बादलों को संबोधित करते हुए क्रांति का आह्वान कर रहे हैं।

शब्दार्थ:

  • अट्टालिका = ऊँची अट्टालिकाएँ / महल
  • आतंक-भवन = भय और आतंक का घर
  • पंक = कीचड़
  • जल-विप्लव-प्लावन = बाढ़ का पानी

व्याख्या:
कवि बादलों से कहते हैं — हे बादल! ये ऊँची-ऊँची अट्टालिकाएँ (महल, बड़े भवन) वास्तव में 'आतंक-भवन' हैं, अर्थात् ये भवन शोषण और आतंक के प्रतीक हैं। इनमें रहने वाले पूँजीपति और शोषक वर्ग गरीबों पर अत्याचार करके इन्हें बनाते हैं।

इसके बाद कवि एक महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक सत्य की ओर संकेत करते हैं — बाढ़ का पानी सदा नीचे कीचड़ (पंक) वाले स्थानों पर ही आता है, अर्थात् क्रांति की बाढ़ सदा निम्न वर्ग (गरीब, शोषित) के बीच ही उठती है। ऊँचे महलों तक बाढ़ नहीं पहुँचती — यह व्यंग्य है कि पूँजीपति सुरक्षित बैठे हैं।

परंतु कवि का संदेश यह भी है कि जब क्रांति की बाढ़ आती है तो वह इन आतंक-भवनों को भी ध्वस्त कर देती है।

काव्य-सौंदर्य:

  • 'आतंक-भवन' में रूपक अलंकार है।
  • 'जल-विप्लव-प्लावन' में अनुप्रास अलंकार है।
  • प्रकृति के माध्यम से सामाजिक यथार्थ का चित्रण किया गया है।

भाव: शोषण पर टिकी व्यवस्था अंततः क्रांति की बाढ़ में बह जाती है।

कला की बात — 1पूरी कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। आपको प्रकृति का कौन-सा मानवीय रूप पसंद आया और क्यों?

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कला की बात — 2कविता में रूपक अलंकार का प्रयोग कहाँ-कहाँ हुआ है? संबंधित वाक्यांश को छाँटकर लिखिए।

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कला की बात — 3इस कविता में बादल के लिए 'ऐ विप्लव के वीर!', 'ऐ जीवन के पारावार!' जैसे संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है। बादल राग कविता के शेष पाँच खंडों में भी कई संबोधनों का इस्तेमाल किया गया है — अरे वर्ष के हर्ष!, मेरे पागल बादल!, ऐ निर्बंध!, ऐ स्वच्छंद!, ऐ उद्यम!, ऐ सम्राट!, ऐ विप्लव के प्लावन!, ऐ अनंत के चंचल शिशु सुकुमार! — इन संबोधनों की व्याख्या करें तथा बताएँ कि बादल के लिए इन संबोधनों का क्या औचित्य है?

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कला की बात — 4कवि बादलों को किस रूप में देखता है? कालिदास ने मेघदूत काव्य में मेघों को दूत के रूप में देखा। आप अपना कोई काल्पनिक बिंब दीजिए।

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कला की बात — 5कविता को प्रभावी बनाने के लिए कवि विशेषणों का सायास प्रयोग करता है जैसे- अस्थिर सुख। सुख के साथ अस्थिर विशेषण के प्रयोग ने सुख के अर्थ में विशेष प्रभाव पैदा कर दिया है। ऐसे अन्य विशेषणों को कविता से छाँटकर लिखें तथा बताएँ कि ऐसे शब्द-पदों के प्रयोग से कविता के अर्थ में क्या विशेष प्रभाव पैदा हुआ है?

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5 more solved questions in बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला')

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') for Assam Board Class 12 Hindi?
Key topics in बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') include कवि परिचय, कविता का केंद्रीय भाव, प्रथम खंड का भावार्थ, द्वितीय खंड का भावार्थ. Study these first, then practise questions on each for the Assam Board Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') free?
The first 6 of the 11 solutions on this page are open to read. The other 5 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise बादल राग-(सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला') for the Assam Board Class 12 board exam?
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Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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