चिड़िया का गीत — NCERT Solutions
CBSE · Class 4 · Hindi
NCERT Solutions for चिड़िया का गीत, CBSE Class 4 Hindi: 33 textbook questions solved step by step. Part of the CBSE Class 4 Hindi syllabus.
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बातचीत के लिए
1पशु-पक्षियों के लिए घर आवश्यक है या नहीं? कारण भी बताइए।Show solution
हाँ, पशु-पक्षियों के लिए घर (घोंसला/बिल/माँद) अत्यंत आवश्यक है। कारण:
- घर उन्हें वर्षा, धूप और ठंड से बचाता है।
- घर में वे अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं।
- घर उन्हें शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
- रात को आराम करने के लिए भी घर आवश्यक है।
इस प्रकार, जिस प्रकार मनुष्य को घर की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार पशु-पक्षियों को भी घर की जरूरत होती है।
2आपके परिवार के सदस्य घर से बाहर क्यों जाते हैं?Show solution
हमारे परिवार के सदस्य घर से बाहर निम्नलिखित कारणों से जाते हैं:
- पिताजी/माताजी काम या नौकरी के लिए बाहर जाते हैं।
- हम बच्चे पढ़ाई के लिए विद्यालय जाते हैं।
- परिवार के सदस्य बाजार से सामान लाने के लिए जाते हैं।
- रिश्तेदारों या मित्रों से मिलने के लिए बाहर जाते हैं।
- कभी-कभी घूमने-फिरने या मनोरंजन के लिए भी बाहर जाते हैं।
इस प्रकार, परिवार के सदस्य अपनी-अपनी जरूरतों और जिम्मेदारियों के लिए घर से बाहर जाते हैं।
3जब परिवार के सदस्य बाहर जाते हैं या बाहर से आते हैं तो आपको कैसा लगता है और क्यों?Show solution
जब परिवार के सदस्य बाहर जाते हैं तो मुझे थोड़ा अकेलापन और उदासी महसूस होती है, क्योंकि उनके बिना घर सूना-सूना लगता है। मन में यह चिंता भी रहती है कि वे सुरक्षित हैं या नहीं।
जब वे वापस आते हैं तो मन बहुत प्रसन्न हो जाता है। उनसे मिलकर खुशी होती है और घर फिर से हँसता-खिलखिलाता लगने लगता है। यह अनुभव बताता है कि परिवार के सदस्य हमारे लिए कितने महत्त्वपूर्ण हैं।
4जब कोई अतिथि आपके घर आता है या आप किसी संबंधी के यहाँ जाते हैं तो आपको कैसा लगता है?Show solution
जब कोई अतिथि हमारे घर आता है तो बहुत अच्छा लगता है। घर में रौनक आ जाती है, नई-नई बातें होती हैं और मिलकर खाना खाने का आनंद अलग ही होता है।
जब हम किसी संबंधी के यहाँ जाते हैं तो भी बहुत खुशी होती है। नई जगह देखने को मिलती है, नए लोगों से मिलते हैं और नई चीजें सीखने को मिलती हैं। इस प्रकार अतिथि का आना-जाना जीवन को आनंदमय बनाता है।
5क्या आपको लगता है कि पक्षियों की तरह हम भी धीरे-धीरे बड़े होते हैं और फिर उनकी तरह ही संसार देखते हैं? अपने अनुभव साझा कीजिए।Show solution
हाँ, बिल्कुल। जिस प्रकार एक शिशु पक्षी पहले घोंसले में रहता है, फिर धीरे-धीरे शाखाओं पर आता है और अंत में आकाश में उड़कर संसार देखता है, उसी प्रकार हम भी बड़े होते हैं।
पहले हम केवल अपने घर और परिवार को जानते थे। फिर विद्यालय जाने लगे, नए मित्र बने, नई जगहें देखीं। जैसे-जैसे हम बड़े होते गए, हमारी समझ और अनुभव बढ़ते गए। अब हम जानते हैं कि यह संसार बहुत बड़ा और विविधताओं से भरा है। इस प्रकार हमारा अनुभव भी उस चिड़िया जैसा ही है।
कविता की बात
1कघोंसले से संबंधित उपयुक्त वाक्य को चिह्नित कीजिए—
- घोंसला पक्षियों का घर होता है।
- घोंसला सूखे तिनकों से बनाया जाता है।
- पक्षियों का घोंसला केवल पेड़ों पर होता है।
- कुछ पक्षियों का घोंसला हमारे घरों में भी होता है।Show solution
सही विकल्प:
✓ घोंसला पक्षियों का घर होता है।
✓ घोंसला सूखे तिनकों से बनाया जाता है।
✓ कुछ पक्षियों का घोंसला हमारे घरों में भी होता है।
स्पष्टीकरण: घोंसला पक्षियों का घर होता है जिसे वे सूखे तिनकों, पत्तियों और घास से बनाते हैं। यह केवल पेड़ों पर ही नहीं, बल्कि हमारे घरों की छतों, दीवारों की दरारों आदि में भी बनाया जाता है। इसलिए तीसरा विकल्प (केवल पेड़ों पर) गलत है।
1खकविता में 'अंडे जैसा था आकार' का प्रयोग निम्नलिखित में से किसके लिए किया गया है—
- संसार
- आकाश
- घर
- घोंसलाShow solution
सही विकल्प: ✓ घोंसला
स्पष्टीकरण: कविता में चिड़िया कहती है कि जब वह घोंसले में थी तो उसे लगता था कि संसार बस इतना-सा ही है। घोंसले का आकार अंडे जैसा गोल और छोटा होता है। इसलिए 'अंडे जैसा था आकार' घोंसले के लिए कहा गया है।
1ग'तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार' इन पंक्तियों में 'इतना-सा' का अर्थ है—
- बहुत छोटा
- बहुत लंबा
- बहुत बड़ा
- रंग-बिरंगाShow solution
सही विकल्प: ✓ बहुत छोटा
स्पष्टीकरण: जब चिड़िया घोंसले में थी, तब उसे लगता था कि संसार बस उसके घोंसले जितना ही छोटा है। 'इतना-सा' शब्द बहुत छोटे आकार का बोध कराता है। बाद में जब वह उड़ी तो उसे पता चला कि संसार वास्तव में बहुत बड़ा है।
2नीचे दी गई कविता की पंक्तियों का मिलान उनके नीचे दी गई उपयुक्त पंक्तियों से कीजिए।Show solution
मिलान इस प्रकार है:
- 'तब मैं यही समझती थी, बस इतना-सा ही है संसार।'
→ यह पंक्ति उस समय की है जब चिड़िया घोंसले में थी और उसे लगता था कि संसार बहुत छोटा है।
- 'तभी समझ में मेरी आया, बहुत बड़ा है यह संसार।'
→ यह पंक्ति उस समय की है जब चिड़िया ने आसमान में दूर तक पंख पसारकर उड़ान भरी और उसे संसार की विशालता का अनुभव हुआ।
(नोट: चित्र उपलब्ध न होने के कारण मिलान का विवरण पंक्तियों के अर्थ के आधार पर दिया गया है।)
सोचिए और लिखिए
1चिड़िया को यह संसार कब-कब छोटा लगा?Show solution
चिड़िया को संसार निम्नलिखित समय छोटा लगा:
- जब वह घोंसले में थी — घोंसले के अंदर रहते हुए उसे लगता था कि यही उसका पूरा संसार है। घोंसला अंडे जैसे आकार का था, इसलिए संसार बहुत छोटा लगता था।
- जब वह शाखाओं पर थी — घोंसले से निकलकर जब वह हरी-भरी कोमल शाखाओं पर बैठी, तब भी उसे लगा कि बस यही पेड़ और यही शाखाएँ ही उसका संसार हैं।
इस प्रकार, जब तक चिड़िया ने उड़ान नहीं भरी, तब तक उसे संसार छोटा ही लगता रहा।
2खुले आकाश में उड़ते समय चिड़िया ने क्या-क्या देखा होगा जिससे उसे लगा कि संसार बहुत बड़ा है?Show solution
खुले आकाश में उड़ते समय चिड़िया ने संभवतः निम्नलिखित चीजें देखी होंगी:
- दूर-दूर तक फैले हरे-भरे जंगल और पेड़-पौधे।
- बड़ी-बड़ी नदियाँ, झीलें और समुद्र।
- ऊँचे-ऊँचे पर्वत और पहाड़।
- विशाल मैदान और खेत।
- अनेक गाँव और शहर।
- अनगिनत पशु-पक्षी और मनुष्य।
- बादल और विस्तृत नीला आकाश।
इन सबको देखकर चिड़िया को अनुभव हुआ कि संसार उसके घोंसले या पेड़ से बहुत-बहुत बड़ा है।
3प्रायः सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट (कलरव) सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है?Show solution
सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट के निम्नलिखित कारण हैं:
सुबह के समय:
- सूर्योदय होने पर पक्षी जागते हैं और प्रसन्नता में चहचहाते हैं।
- भोजन की तलाश में निकलने से पहले वे एक-दूसरे को संकेत देते हैं।
- नई सुबह का स्वागत करते हैं।
शाम के समय:
- दिनभर भोजन खोजने के बाद वे अपने घोंसलों में लौटते हैं।
- घोंसले में वापस आकर वे अपने साथियों और बच्चों से मिलकर खुश होते हैं।
- रात होने से पहले वे आपस में बातें करते हैं।
इस प्रकार सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट उनकी खुशी और आपसी संवाद का प्रतीक है।
समझ और अनुभव
1जब कोई शिशु चिड़िया घोंसले से बाहर आती है तो उसे लगता है कि संसार बहुत बड़ा है। क्या आपको भी घर से बाहर निकलते समय ऐसा ही अनुभव होता है और क्यों?Show solution
हाँ, जब मैं पहली बार घर से बाहर निकला/निकली तो मुझे भी ऐसा ही लगा। घर के अंदर सब कुछ जाना-पहचाना था, लेकिन बाहर निकलते ही बहुत सारी नई चीजें दिखीं — बड़ी-बड़ी सड़कें, ऊँची इमारतें, बहुत सारे लोग, वाहन और दुकानें।
पहली बार विद्यालय जाते समय भी ऐसा ही लगा। इतने सारे बच्चे, बड़ी-बड़ी कक्षाएँ और नए शिक्षक देखकर मन में थोड़ा डर और थोड़ी उत्सुकता दोनों थे।
धीरे-धीरे जब हम बाहर की दुनिया से परिचित होते हैं तो समझ आता है कि यह संसार वाकई बहुत बड़ा और विविधताओं से भरा है।
2एक शिशु पक्षी की तरह आप भी धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं। अब तक आपमें भी कई परिवर्तन आए हैं। नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार अपने अंदर आए परिवर्तनों को लिखिए।Show solution
मेरे अंदर आए परिवर्तन:
- शारीरिक परिवर्तन: मेरी लंबाई और वजन बढ़ा है। दाँत बदले हैं। शरीर पहले से अधिक मजबूत हुआ है।
- खान-पान में परिवर्तन: पहले केवल माँ का दूध पीता/पीती था/थी, फिर नरम खाना खाने लगा/लगी। अब सब्जी, रोटी, चावल, फल सब खाता/खाती हूँ।
- गीत-संगीत: पहले केवल लोरियाँ सुनता/सुनती था/थी, अब नए गाने सीखे हैं और गाना पसंद है।
- रुचियों में परिवर्तन: पहले खिलौनों से खेलना पसंद था, अब किताबें पढ़ना और चित्र बनाना भी अच्छा लगता है।
- चित्रकारी: पहले केवल टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ खींचता/खींचती था/थी, अब सुंदर चित्र बना सकता/सकती हूँ।
- पढ़ना-लिखना: पहले अक्षर नहीं जानता/जानती था/थी, अब हिंदी और अंग्रेजी में पढ़-लिख सकता/सकती हूँ।
- समझ में परिवर्तन: पहले छोटी-छोटी बातों पर रोता/रोती था/थी, अब सही-गलत की समझ आ गई है।
- खेल: पहले केवल घर के अंदर खेलता/खेलती था/थी, अब क्रिकेट, बैडमिंटन जैसे खेल खेलता/खेलती हूँ।
- नृत्य और अभिनय: पहले बस उछलना-कूदना था, अब नृत्य की कुछ मुद्राएँ सीखी हैं और विद्यालय में नाटक में भाग लेता/लेती हूँ।
3पहले चिड़िया को लगता था कि यह संसार बहुत छोटा है परंतु सच्चाई कुछ और ही थी। उस समय आपको कैसा लगा जब आपने इनमें से किसी एक को पहली बार देखा।Show solution
जब मैंने पहली बार पहाड़ देखा:
जब मैं पहली बार पहाड़ देखने गया/गई तो मैं हैरान रह गया/गई। इतने ऊँचे-ऊँचे पहाड़ देखकर मन में आश्चर्य और रोमांच दोनों हुए। पहाड़ों की चोटियाँ बादलों को छूती हुई लग रही थीं। हरे-भरे जंगल, झरने और ठंडी हवा ने मन को बहुत प्रसन्न किया।
तब मुझे भी उस चिड़िया की तरह लगा कि यह संसार वाकई बहुत बड़ा और सुंदर है। मेरे घर और मोहल्ले से बाहर भी कितनी अद्भुत दुनिया है!
(नोट: विद्यार्थी अपने अनुभव के अनुसार किसी भी एक चीज के बारे में लिख सकते हैं।)
चित्रों की भाषा
1नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए। चित्र से मेल खाती कविता की कुछ पंक्तियाँ उदाहरण के रूप में दी गई हैं। अब कविता की उपयुक्त पंक्तियों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।Show solution
(नोट: चित्र उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कविता की पंक्तियों के आधार पर उत्तर दिया जा रहा है।)
उदाहरण (दिया गया):
'आखिर जब मैं आसमान में उड़ी दूर तक पंख पसार, तभी समझ में मेरी आया बहुत बड़ा है यह संसार।'
अन्य रिक्त स्थानों के लिए संभावित पंक्तियाँ:
चित्र 2 (घोंसले का चित्र):
'था एक घोंसला मेरा प्यारा, अंडे जैसा था आकार।'
चित्र 3 (शाखाओं पर बैठी चिड़िया का चित्र):
'फिर मैं निकल गई शाखों पर, हरी-भरी थीं जो सुकुमार।'
अनुमान और कल्पना
1कविता की पंक्ति है — 'आखिर जब मैं आसमान में, उड़ी दूर तक पंख पसार।' चिड़िया ने अंततः इतनी दूर तक उड़ान क्यों भरी होगी?Show solution
चिड़िया ने इतनी दूर तक उड़ान निम्नलिखित कारणों से भरी होगी:
- भोजन की खोज में — दूर-दूर तक भोजन ढूँढ़ने के लिए उसे उड़ना पड़ा होगा।
- जिज्ञासा के कारण — नई-नई जगहें देखने और संसार को जानने की उत्सुकता रही होगी।
- स्वतंत्रता का आनंद — खुले आकाश में उड़ने का आनंद लेने के लिए उसने दूर तक उड़ान भरी होगी।
- अपना घर बनाने के लिए — बड़े होने पर उसे अपना नया घोंसला बनाने के लिए उचित जगह ढूँढ़नी होगी।
- साथियों की तलाश में — अपने जैसे अन्य पक्षियों से मिलने के लिए भी वह दूर तक उड़ी होगी।
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in चिड़िया का गीत for CBSE Class 4 Hindi?
Are these NCERT Solutions for चिड़िया का गीत free?
How should I revise चिड़िया का गीत for Class 4 exams?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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