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Chapter 1 of 13
NCERT Solutions

चिड़िया का गीत

CBSE · Class 4 · Hindi

NCERT Solutions for चिड़िया का गीत — CBSE Class 4 Hindi.

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33 Questions Solved · 10 Sections

बातचीत के लिए

1पशु-पक्षियों के लिए घर आवश्यक है या नहीं? कारण भी बताइए।Show solution
हाँ, पशु-पक्षियों के लिए घर (घोंसला/बिल/माँद) अत्यंत आवश्यक है। कारण:
- घर उन्हें वर्षा, धूप और ठंड से बचाता है।
- घर में वे अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं।
- घर उन्हें शत्रुओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
- रात को आराम करने के लिए भी घर आवश्यक है।
इस प्रकार, जिस प्रकार मनुष्य को घर की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार पशु-पक्षियों को भी घर की जरूरत होती है।
2आपके परिवार के सदस्य घर से बाहर क्यों जाते हैं?Show solution
हमारे परिवार के सदस्य घर से बाहर निम्नलिखित कारणों से जाते हैं:
- पिताजी/माताजी काम या नौकरी के लिए बाहर जाते हैं।
- हम बच्चे पढ़ाई के लिए विद्यालय जाते हैं।
- परिवार के सदस्य बाजार से सामान लाने के लिए जाते हैं।
- रिश्तेदारों या मित्रों से मिलने के लिए बाहर जाते हैं।
- कभी-कभी घूमने-फिरने या मनोरंजन के लिए भी बाहर जाते हैं।
इस प्रकार, परिवार के सदस्य अपनी-अपनी जरूरतों और जिम्मेदारियों के लिए घर से बाहर जाते हैं।
3जब परिवार के सदस्य बाहर जाते हैं या बाहर से आते हैं तो आपको कैसा लगता है और क्यों?Show solution
जब परिवार के सदस्य बाहर जाते हैं तो मुझे थोड़ा अकेलापन और उदासी महसूस होती है, क्योंकि उनके बिना घर सूना-सूना लगता है। मन में यह चिंता भी रहती है कि वे सुरक्षित हैं या नहीं।

जब वे वापस आते हैं तो मन बहुत प्रसन्न हो जाता है। उनसे मिलकर खुशी होती है और घर फिर से हँसता-खिलखिलाता लगने लगता है। यह अनुभव बताता है कि परिवार के सदस्य हमारे लिए कितने महत्त्वपूर्ण हैं।
4जब कोई अतिथि आपके घर आता है या आप किसी संबंधी के यहाँ जाते हैं तो आपको कैसा लगता है?Show solution
जब कोई अतिथि हमारे घर आता है तो बहुत अच्छा लगता है। घर में रौनक आ जाती है, नई-नई बातें होती हैं और मिलकर खाना खाने का आनंद अलग ही होता है।

जब हम किसी संबंधी के यहाँ जाते हैं तो भी बहुत खुशी होती है। नई जगह देखने को मिलती है, नए लोगों से मिलते हैं और नई चीजें सीखने को मिलती हैं। इस प्रकार अतिथि का आना-जाना जीवन को आनंदमय बनाता है।
5क्या आपको लगता है कि पक्षियों की तरह हम भी धीरे-धीरे बड़े होते हैं और फिर उनकी तरह ही संसार देखते हैं? अपने अनुभव साझा कीजिए।Show solution
हाँ, बिल्कुल। जिस प्रकार एक शिशु पक्षी पहले घोंसले में रहता है, फिर धीरे-धीरे शाखाओं पर आता है और अंत में आकाश में उड़कर संसार देखता है, उसी प्रकार हम भी बड़े होते हैं।

पहले हम केवल अपने घर और परिवार को जानते थे। फिर विद्यालय जाने लगे, नए मित्र बने, नई जगहें देखीं। जैसे-जैसे हम बड़े होते गए, हमारी समझ और अनुभव बढ़ते गए। अब हम जानते हैं कि यह संसार बहुत बड़ा और विविधताओं से भरा है। इस प्रकार हमारा अनुभव भी उस चिड़िया जैसा ही है।

कविता की बात

1कघोंसले से संबंधित उपयुक्त वाक्य को चिह्नित कीजिए—
- घोंसला पक्षियों का घर होता है।
- घोंसला सूखे तिनकों से बनाया जाता है।
- पक्षियों का घोंसला केवल पेड़ों पर होता है।
- कुछ पक्षियों का घोंसला हमारे घरों में भी होता है।
Show solution
सही विकल्प:
✓ घोंसला पक्षियों का घर होता है।
✓ घोंसला सूखे तिनकों से बनाया जाता है।
✓ कुछ पक्षियों का घोंसला हमारे घरों में भी होता है।

स्पष्टीकरण: घोंसला पक्षियों का घर होता है जिसे वे सूखे तिनकों, पत्तियों और घास से बनाते हैं। यह केवल पेड़ों पर ही नहीं, बल्कि हमारे घरों की छतों, दीवारों की दरारों आदि में भी बनाया जाता है। इसलिए तीसरा विकल्प (केवल पेड़ों पर) गलत है।
1खकविता में 'अंडे जैसा था आकार' का प्रयोग निम्नलिखित में से किसके लिए किया गया है—
- संसार
- आकाश
- घर
- घोंसला
Show solution
सही विकल्प: ✓ घोंसला

स्पष्टीकरण: कविता में चिड़िया कहती है कि जब वह घोंसले में थी तो उसे लगता था कि संसार बस इतना-सा ही है। घोंसले का आकार अंडे जैसा गोल और छोटा होता है। इसलिए 'अंडे जैसा था आकार' घोंसले के लिए कहा गया है।
1ग'तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार' इन पंक्तियों में 'इतना-सा' का अर्थ है—
- बहुत छोटा
- बहुत लंबा
- बहुत बड़ा
- रंग-बिरंगा
Show solution
सही विकल्प: ✓ बहुत छोटा

स्पष्टीकरण: जब चिड़िया घोंसले में थी, तब उसे लगता था कि संसार बस उसके घोंसले जितना ही छोटा है। 'इतना-सा' शब्द बहुत छोटे आकार का बोध कराता है। बाद में जब वह उड़ी तो उसे पता चला कि संसार वास्तव में बहुत बड़ा है।
2नीचे दी गई कविता की पंक्तियों का मिलान उनके नीचे दी गई उपयुक्त पंक्तियों से कीजिए।Show solution
मिलान इस प्रकार है:

1. 'तब मैं यही समझती थी, बस इतना-सा ही है संसार।'
→ यह पंक्ति उस समय की है जब चिड़िया घोंसले में थी और उसे लगता था कि संसार बहुत छोटा है।

2. 'तभी समझ में मेरी आया, बहुत बड़ा है यह संसार।'
→ यह पंक्ति उस समय की है जब चिड़िया ने आसमान में दूर तक पंख पसारकर उड़ान भरी और उसे संसार की विशालता का अनुभव हुआ।

(नोट: चित्र उपलब्ध न होने के कारण मिलान का विवरण पंक्तियों के अर्थ के आधार पर दिया गया है।)

सोचिए और लिखिए

1चिड़िया को यह संसार कब-कब छोटा लगा?Show solution
चिड़िया को संसार निम्नलिखित समय छोटा लगा:

1. जब वह घोंसले में थी — घोंसले के अंदर रहते हुए उसे लगता था कि यही उसका पूरा संसार है। घोंसला अंडे जैसे आकार का था, इसलिए संसार बहुत छोटा लगता था।

2. जब वह शाखाओं पर थी — घोंसले से निकलकर जब वह हरी-भरी कोमल शाखाओं पर बैठी, तब भी उसे लगा कि बस यही पेड़ और यही शाखाएँ ही उसका संसार हैं।

इस प्रकार, जब तक चिड़िया ने उड़ान नहीं भरी, तब तक उसे संसार छोटा ही लगता रहा।
2खुले आकाश में उड़ते समय चिड़िया ने क्या-क्या देखा होगा जिससे उसे लगा कि संसार बहुत बड़ा है?Show solution
खुले आकाश में उड़ते समय चिड़िया ने संभवतः निम्नलिखित चीजें देखी होंगी:

- दूर-दूर तक फैले हरे-भरे जंगल और पेड़-पौधे।
- बड़ी-बड़ी नदियाँ, झीलें और समुद्र।
- ऊँचे-ऊँचे पर्वत और पहाड़।
- विशाल मैदान और खेत।
- अनेक गाँव और शहर।
- अनगिनत पशु-पक्षी और मनुष्य।
- बादल और विस्तृत नीला आकाश।

इन सबको देखकर चिड़िया को अनुभव हुआ कि संसार उसके घोंसले या पेड़ से बहुत-बहुत बड़ा है।
3प्रायः सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट (कलरव) सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है?Show solution
सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट के निम्नलिखित कारण हैं:

सुबह के समय:
- सूर्योदय होने पर पक्षी जागते हैं और प्रसन्नता में चहचहाते हैं।
- भोजन की तलाश में निकलने से पहले वे एक-दूसरे को संकेत देते हैं।
- नई सुबह का स्वागत करते हैं।

शाम के समय:
- दिनभर भोजन खोजने के बाद वे अपने घोंसलों में लौटते हैं।
- घोंसले में वापस आकर वे अपने साथियों और बच्चों से मिलकर खुश होते हैं।
- रात होने से पहले वे आपस में बातें करते हैं।

इस प्रकार सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट उनकी खुशी और आपसी संवाद का प्रतीक है।

समझ और अनुभव

1जब कोई शिशु चिड़िया घोंसले से बाहर आती है तो उसे लगता है कि संसार बहुत बड़ा है। क्या आपको भी घर से बाहर निकलते समय ऐसा ही अनुभव होता है और क्यों?Show solution
हाँ, जब मैं पहली बार घर से बाहर निकला/निकली तो मुझे भी ऐसा ही लगा। घर के अंदर सब कुछ जाना-पहचाना था, लेकिन बाहर निकलते ही बहुत सारी नई चीजें दिखीं — बड़ी-बड़ी सड़कें, ऊँची इमारतें, बहुत सारे लोग, वाहन और दुकानें।

पहली बार विद्यालय जाते समय भी ऐसा ही लगा। इतने सारे बच्चे, बड़ी-बड़ी कक्षाएँ और नए शिक्षक देखकर मन में थोड़ा डर और थोड़ी उत्सुकता दोनों थे।

धीरे-धीरे जब हम बाहर की दुनिया से परिचित होते हैं तो समझ आता है कि यह संसार वाकई बहुत बड़ा और विविधताओं से भरा है।
2एक शिशु पक्षी की तरह आप भी धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं। अब तक आपमें भी कई परिवर्तन आए हैं। नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार अपने अंदर आए परिवर्तनों को लिखिए।Show solution
मेरे अंदर आए परिवर्तन:

1. शारीरिक परिवर्तन: मेरी लंबाई और वजन बढ़ा है। दाँत बदले हैं। शरीर पहले से अधिक मजबूत हुआ है।

2. खान-पान में परिवर्तन: पहले केवल माँ का दूध पीता/पीती था/थी, फिर नरम खाना खाने लगा/लगी। अब सब्जी, रोटी, चावल, फल सब खाता/खाती हूँ।

3. गीत-संगीत: पहले केवल लोरियाँ सुनता/सुनती था/थी, अब नए गाने सीखे हैं और गाना पसंद है।

4. रुचियों में परिवर्तन: पहले खिलौनों से खेलना पसंद था, अब किताबें पढ़ना और चित्र बनाना भी अच्छा लगता है।

5. चित्रकारी: पहले केवल टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ खींचता/खींचती था/थी, अब सुंदर चित्र बना सकता/सकती हूँ।

6. पढ़ना-लिखना: पहले अक्षर नहीं जानता/जानती था/थी, अब हिंदी और अंग्रेजी में पढ़-लिख सकता/सकती हूँ।

7. समझ में परिवर्तन: पहले छोटी-छोटी बातों पर रोता/रोती था/थी, अब सही-गलत की समझ आ गई है।

8. खेल: पहले केवल घर के अंदर खेलता/खेलती था/थी, अब क्रिकेट, बैडमिंटन जैसे खेल खेलता/खेलती हूँ।

9. नृत्य और अभिनय: पहले बस उछलना-कूदना था, अब नृत्य की कुछ मुद्राएँ सीखी हैं और विद्यालय में नाटक में भाग लेता/लेती हूँ।
3पहले चिड़िया को लगता था कि यह संसार बहुत छोटा है परंतु सच्चाई कुछ और ही थी। उस समय आपको कैसा लगा जब आपने इनमें से किसी एक को पहली बार देखा।Show solution
जब मैंने पहली बार पहाड़ देखा:

जब मैं पहली बार पहाड़ देखने गया/गई तो मैं हैरान रह गया/गई। इतने ऊँचे-ऊँचे पहाड़ देखकर मन में आश्चर्य और रोमांच दोनों हुए। पहाड़ों की चोटियाँ बादलों को छूती हुई लग रही थीं। हरे-भरे जंगल, झरने और ठंडी हवा ने मन को बहुत प्रसन्न किया।

तब मुझे भी उस चिड़िया की तरह लगा कि यह संसार वाकई बहुत बड़ा और सुंदर है। मेरे घर और मोहल्ले से बाहर भी कितनी अद्भुत दुनिया है!

(नोट: विद्यार्थी अपने अनुभव के अनुसार किसी भी एक चीज के बारे में लिख सकते हैं।)

चित्रों की भाषा

1नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए। चित्र से मेल खाती कविता की कुछ पंक्तियाँ उदाहरण के रूप में दी गई हैं। अब कविता की उपयुक्त पंक्तियों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।Show solution
(नोट: चित्र उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कविता की पंक्तियों के आधार पर उत्तर दिया जा रहा है।)

उदाहरण (दिया गया):
'आखिर जब मैं आसमान में उड़ी दूर तक पंख पसार, तभी समझ में मेरी आया बहुत बड़ा है यह संसार।'

अन्य रिक्त स्थानों के लिए संभावित पंक्तियाँ:

चित्र 2 (घोंसले का चित्र):
'था एक घोंसला मेरा प्यारा, अंडे जैसा था आकार।'

चित्र 3 (शाखाओं पर बैठी चिड़िया का चित्र):
'फिर मैं निकल गई शाखों पर, हरी-भरी थीं जो सुकुमार।'

अनुमान और कल्पना

1कविता की पंक्ति है — 'आखिर जब मैं आसमान में, उड़ी दूर तक पंख पसार।' चिड़िया ने अंततः इतनी दूर तक उड़ान क्यों भरी होगी?Show solution
चिड़िया ने इतनी दूर तक उड़ान निम्नलिखित कारणों से भरी होगी:

1. भोजन की खोज में — दूर-दूर तक भोजन ढूँढ़ने के लिए उसे उड़ना पड़ा होगा।

2. जिज्ञासा के कारण — नई-नई जगहें देखने और संसार को जानने की उत्सुकता रही होगी।

3. स्वतंत्रता का आनंद — खुले आकाश में उड़ने का आनंद लेने के लिए उसने दूर तक उड़ान भरी होगी।

4. अपना घर बनाने के लिए — बड़े होने पर उसे अपना नया घोंसला बनाने के लिए उचित जगह ढूँढ़नी होगी।

5. साथियों की तलाश में — अपने जैसे अन्य पक्षियों से मिलने के लिए भी वह दूर तक उड़ी होगी।
2पक्षी खुले आकाश में बहुत दूर तक उड़ते हैं। लंबी दूरी, हजारों पेड़ों और सैकड़ों घोंसलों के बीच पक्षी अपना घोंसला कैसे ढूँढ़ते होंगे?Show solution
पक्षी अपना घोंसला निम्नलिखित तरीकों से ढूँढ़ते होंगे:

1. तीव्र स्मरण शक्ति — पक्षियों की याददाश्त बहुत तेज होती है। वे अपने घोंसले की जगह, उसके आसपास के पेड़, पत्थर और अन्य निशानियाँ याद रखते हैं।

2. गंध की पहचान — पक्षी अपने घोंसले की गंध पहचानते हैं।

3. आवाज की पहचान — घोंसले में बैठे बच्चों की आवाज सुनकर माता-पिता पक्षी अपना घोंसला ढूँढ़ लेते हैं।

4. दिशा ज्ञान — पक्षियों में प्राकृतिक दिशा ज्ञान होता है। वे सूर्य और तारों की मदद से दिशा पहचानते हैं।

5. परिचित स्थान — वे अपने घोंसले के आसपास के पेड़, नदी, पहाड़ आदि को पहचानकर घर तक पहुँचते हैं।
3पक्षियों ने आकाश में उड़कर जाना कि संसार बहुत बड़ा है। हमारे पूर्वजों को यह बात कैसे पता चली होगी?Show solution
हमारे पूर्वजों को संसार की विशालता का पता निम्नलिखित तरीकों से चला होगा:

1. पैदल यात्रा — पूर्वजों ने पैदल चलकर दूर-दूर तक यात्राएँ कीं और नई-नई जगहें देखीं।

2. नदियों और समुद्र के किनारे — नदियों के किनारे-किनारे चलते हुए उन्होंने देखा कि नदियाँ बहुत दूर तक जाती हैं।

3. पहाड़ों पर चढ़कर — ऊँचे पहाड़ों पर चढ़कर उन्होंने दूर-दूर तक फैली धरती देखी।

4. आकाश के तारों से — रात में तारों को देखकर उन्होंने अनुमान लगाया कि आकाश और संसार बहुत विशाल है।

5. नाव और जहाज से — समुद्र में नाव चलाकर उन्होंने नए देशों और महाद्वीपों की खोज की।

इस प्रकार धीरे-धीरे मनुष्य को पता चला कि यह संसार बहुत बड़ा है।
4जब आप कहीं बाहर जाते हैं तो घर के बड़े-बूढ़े आपको कुछ निर्देश देकर भेजते हैं। क्या पक्षियों के माता-पिता भी उन्हें उड़ने के पूर्व कुछ निर्देश देते होंगे? यदि हाँ, तो वे निर्देश क्या-क्या हो सकते हैं?Show solution
हाँ, पक्षियों के माता-पिता भी अपने बच्चों को उड़ने से पहले निर्देश देते होंगे। वे निर्देश कुछ इस प्रकार हो सकते हैं:

1. 'बहुत ऊँचे मत उड़ो, तेज हवा में संभलकर उड़ना।'

2. 'शिकारी पक्षियों जैसे बाज और चील से दूर रहना।'

3. 'भोजन की तलाश में बहुत दूर मत जाना, शाम होने से पहले घर लौट आना।'

4. 'अजनबी जगहों पर सावधान रहना, मनुष्यों से दूर रहना।'

5. 'थक जाओ तो किसी पेड़ की शाखा पर बैठकर आराम करना।'

6. 'अपने घोंसले का रास्ता याद रखना ताकि वापस आ सको।'

7. 'साफ पानी पीना और ताजा भोजन खाना।'

इस प्रकार पक्षियों के माता-पिता भी अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्देश देते होंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमारे घर के बड़े हमें देते हैं।
5कविता में 'अंडे जैसा था आकार' का उल्लेख है। नीचे कुछ और चित्र दिए गए हैं जो अलग-अलग आकृतियों के हैं। चित्रों के नीचे उनके नाम लिखिए।Show solution
(नोट: चित्र उपलब्ध नहीं हैं। सामान्य आकृतियों के नाम इस प्रकार हैं जो इस प्रकार के प्रश्नों में आते हैं:)

1. गोल आकृति — वृत्त (Circle)
2. तीन भुजाओं वाली आकृति — त्रिभुज (Triangle)
3. चार बराबर भुजाओं वाली आकृति — वर्ग (Square)
4. चार भुजाओं वाली आकृति — आयत (Rectangle)
5. अंडे जैसी आकृति — अंडाकार/दीर्घवृत्त (Oval/Ellipse)
6. पाँच भुजाओं वाली आकृति — पंचभुज (Pentagon)

(विद्यार्थी अपने शिक्षक की सहायता से चित्रों की आकृतियों के नाम लिखें।)

भाषा की बात

1'सुकुमार' शब्द 'सु' और 'कुमार' के मेल से बना है। आप भी इसी प्रकार कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ खोजिए।Show solution
'सु' उपसर्ग से बने शब्द और उनके अर्थ:

| सु | + शब्द | = नया शब्द | अर्थ |
|---|---|---|---|
| सु | कुमार | सुकुमार | कोमल अंगों वाला |
| सु | योग्य | सुयोग्य | बहुत योग्य |
| सु | यश | सुयश | अच्छी कीर्ति/प्रसिद्धि |
| सु | कर्म | सुकर्म | अच्छे कर्म |
| सु | वास | सुवास | अच्छी सुगंध |
| सु | दर्शन | सुदर्शन | सुंदर दिखने वाला |
| सु | विचार | सुविचार | अच्छे विचार |
| सु | मन | सुमन | फूल / अच्छे मन वाला |
2नीचे दिए गए वाक्यों में कुछ रिक्त स्थान हैं और कुछ शब्द रेखांकित किए गए हैं। उन शब्दों से वाक्यों को पूरा कीजिए जो रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ रखते हैं।Show solution
विपरीत अर्थ वाले शब्दों से वाक्य पूरे करना:

(क) सूखा और गीला कचरा अलग-अलग डिब्बों में डालें।
(सूखा का विपरीत = गीला)

(ख) दिल्ली मेरे घर से दूर है लेकिन गुवाहाटी पास में है।
(पास का विपरीत = दूर)

(ग) अनवर कब आया और कब गया, पता ही नहीं चला।
(गया का विपरीत = आया)

(घ) कोई भी काम न तो बड़ा होता है और न ही छोटा
(बड़ा का विपरीत = छोटा)
3इतना-सा, उतना-सा, जितना-सा और कितना-सा का वाक्यों में प्रयोग कीजिए और उनके अर्थ भी समझाइए।Show solution
इन शब्दों के अर्थ और वाक्य प्रयोग:

1. इतना-सा (अर्थ: यहाँ के पास की मात्रा/आकार को दर्शाना)
वाक्य: मुझे इतना-सा काम करना है, जल्दी हो जाएगा।

2. उतना-सा (अर्थ: वहाँ की मात्रा/आकार को दर्शाना)
वाक्य: मुझे उतना-सा दूध चाहिए जितना तुमने लिया था।

3. जितना-सा (अर्थ: किसी के बराबर मात्रा/आकार)
वाक्य: मुझे राजू को जितना-सा मिला, उतना ही चाहिए।

4. कितना-सा (अर्थ: प्रश्नवाचक — कितनी मात्रा/आकार)
वाक्य: तुम्हें कितना-सा काम करना बाकी है?

इन शब्दों में '-सा' लगाने से मात्रा या आकार की अनिश्चितता या अल्पता का भाव आता है।

पाठ से आगे

1पक्षी भोजन की खोज में घोंसले से बाहर उड़ते हैं। पता कीजिए कि कौन-सा पक्षी क्या खाता है।Show solution
विभिन्न पक्षियों का भोजन:

| पक्षियों के नाम | पक्षियों का भोजन |
|---|---|
| बाज | छोटे पक्षी, चूहे, खरगोश, साँप (माँसाहारी) |
| हंस | जलीय पौधे, छोटी मछलियाँ, कीड़े-मकोड़े |
| तोता | फल, बीज, अनाज, सब्जियाँ |
| बगुला | मछली, मेंढक, केकड़े, जलीय कीड़े |
| कबूतर | अनाज के दाने, बीज, फल |
| उल्लू | चूहे, छोटे पक्षी, कीड़े-मकोड़े, साँप (रात में शिकार करता है) |

आनंदमयी गतिविधि

1नीचे दिए गए अक्षर जाल में पक्षियों के नाम खोजिए और उनके बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए।Show solution
अक्षर जाल में छिपे पक्षियों के नाम:

1. नीलकंठ — यह नीले रंग का सुंदर पक्षी है। इसे शुभ माना जाता है। दशहरे पर इसके दर्शन शुभ माने जाते हैं।

2. मैना — यह भूरे और काले रंग की चिड़िया है। यह बोलना सीख सकती है। यह कीड़े और फल खाती है।

3. कबूतर — यह सफेद या स्लेटी रंग का पक्षी है। यह अनाज खाता है। पुराने समय में इसे संदेश पहुँचाने के लिए उपयोग किया जाता था।

4. गौरैया — यह छोटी-सी भूरी चिड़िया है जो घरों के आसपास रहती है। यह अनाज और कीड़े खाती है।

5. बुलबुल — यह मधुर आवाज वाला पक्षी है। यह फल और कीड़े खाता है।

6. सारस — यह लंबी गर्दन और लंबी टाँगों वाला पक्षी है। यह जोड़े में रहता है और एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकता।

7. बाज — यह शिकारी पक्षी है। यह बहुत तेज उड़ता है और छोटे जानवरों का शिकार करता है।
2जब शिशु पक्षी चहचहाते हैं तो एक मधुर ध्वनि सुनाई देती है। आइए, हम भी शिशु पक्षियों की तरह चहचहाएँ।Show solution
यह एक मौखिक गतिविधि है।

गतिविधि के निर्देश:
1. सभी बच्चे अपनी एक हथेली अपने होठों पर रखें।
2. सभी मिलकर 'चीं-चीं' की ध्वनि निकालें।
3. बारी-बारी से किसी भी पक्षी की ध्वनि निकालें।
4. जैसे — कोयल की 'कू-कू', कौए की 'काँव-काँव', मोर की 'पीहू-पीहू', तोते की 'टें-टें'।
5. जो बच्चा सबसे अच्छी ध्वनि निकाले, उसे तालियों से सम्मानित करें।

यह गतिविधि पक्षियों की ध्वनियों को पहचानने और उनसे जुड़ाव महसूस करने में सहायक है।
3नीचे पशु-पक्षियों से संबंधित कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। पहेलियों का उत्तर बताइए।Show solution
पहेलियों के उत्तर:

पहेली 1:
'पंखों में नाखून हूँ रखता, रात अँधेरे में ही उड़ता।
दिन में न मैं भोजन पाऊँ, उल्टा होकर के सो जाऊँ।'
→ उत्तर: चमगादड़
(चमगादड़ रात में उड़ता है, दिन में उल्टा लटककर सोता है और उसके पंखों में नाखून होते हैं।)

पहेली 2:
'पत्तों जैसा उसका रंग, कुतर-कुतर खाने का ढंग।
घरों में भी पाला जाता, नाम बताओ उसका ज्ञाता।'
→ उत्तर: तोता
(तोता हरे रंग का होता है, चीजें कुतरकर खाता है और घरों में पाला जाता है।)

पहेली 3:
'नीड़ नहीं वह कभी बनाती, बागों की रानी कहलाती।
काला रंग है उसका भैया, सबके दिल को खूब लुभाती।'
→ उत्तर: कोयल
(कोयल काले रंग की होती है, अपना घोंसला नहीं बनाती और मधुर आवाज से सबका मन मोह लेती है।)

पहेली 4:
'दिनभर सूरत नहीं दिखाता, रात कुलाँचे भरता।
और समझता ऐसा जैसे, सूरज उससे डरता।'
→ उत्तर: उल्लू
(उल्लू दिन में छिपा रहता है और रात में सक्रिय होता है।)

बोलिए फटाफट

1परिवार हरा, हम भी हरे, एक थैली में तीन-चार भरे।Show solution
उत्तर: मटर

स्पष्टीकरण: मटर का पौधा हरा होता है और मटर की फली (थैली) में तीन-चार हरे दाने भरे होते हैं।
2एक लाठी की अजब कहानी, उसके भीतर मीठा पानी।Show solution
उत्तर: गन्ना

स्पष्टीकरण: गन्ना लाठी जैसा दिखता है और उसके भीतर मीठा रस (पानी) होता है।
3एक पक्षी ऐसा, जिसकी दुम पर पैसा।Show solution
उत्तर: मोर

स्पष्टीकरण: मोर की पूँछ (दुम) पर गोल-गोल चाँद जैसे निशान होते हैं जो सिक्के (पैसे) जैसे दिखते हैं।
4लाल डिबिया, पीले खाने, भीतर रखे मोती के दाने।Show solution
उत्तर: अनार

स्पष्टीकरण: अनार लाल रंग का होता है, उसके अंदर पीले-लाल रंग के खाने (कोष्ठ) होते हैं और उनमें मोती जैसे सफेद-लाल दाने भरे होते हैं।
5जाती हूँ मैं हर जगह, पर हिलती नहीं किसी भी तरह।Show solution
उत्तर: सड़क

स्पष्टीकरण: सड़क हर जगह जाती है — गाँव, शहर, पहाड़, मैदान — लेकिन वह खुद कभी नहीं हिलती।

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