सुमिरिनी के मनके (पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी)
Himachal Pradesh Board · Class 12 · Hindi
NCERT Solutions for सुमिरिनी के मनके (पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी) — Himachal Pradesh Board Class 12 Hindi.
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प्रश्न-अभ्यास
(क)1बालक से उसकी उम्र और योग्यता से ऊपर के कौन-कौन से प्रश्न पूछे गए?Show solution
- धर्म के दस लक्षण
- नौ रसों के उदाहरण
- पानी चार डिग्री के नीचे शीतता में फैलने का कारण और उससे मछलियों की प्राणरक्षा
- चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक समाधान
- अभाव को पदार्थ मानने न मानने का शास्त्रार्थ
- इंग्लैंड के राजा आठवें हेनरी की स्त्रियों के नाम
- पेशवाओं का कुर्सीनामा
ये सभी प्रश्न आठ वर्ष के बालक की योग्यता से ऊपर थे।
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(क)2बालक ने क्यों कहा कि मैं यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा?Show solution
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(क)3बालक द्वारा इनाम में लड्डू माँगने पर लेखक ने सुख की साँस क्यों भरी?Show solution
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(क)4बालक की प्रवृत्तियों का गला घोटना अनुचित है, पाठ में ऐसा आभास किन स्थलों पर होता है कि उसकी प्रवृत्तियों का गला घोटा जाता है?Show solution
- उसे लाड़-प्यार में दिखावा-पुत्र की तरह प्रस्तुत किया जा रहा था।
- उससे उसकी उम्र से बाहर के अति कठिन और रटंत प्रश्न पूछे जा रहे थे।
- उससे बनावटी, सिखाए हुए उत्तर कहलवाए जा रहे थे।
- बालक के मन में उठने वाले स्वाभाविक भावों को दबाकर उसके ऊपर कृत्रिम शिक्षा लादी जा रही थी।
- लेखक को लग रहा था कि पिता और अध्यापक उसकी प्रवृत्तियों का गला घोंटने में लगे हैं।
इन सब से स्पष्ट होता है कि उसकी स्वाभाविक बाल-सुलभ रुचियों को दबाया जा रहा था।
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(क)5"बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह 'लड़ू की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, मरे काठ की अलमारी की सिर दुखानेवाली खड़खड़ाहट नहीं" कथन के आधार पर बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए।Show solution
- उसे कृत्रिम गंभीरता नहीं, बल्कि बच्चों जैसी सरल इच्छा प्रिय है।
- उसका मन जीवंत, स्वाभाविक और सहज है।
- वह पढ़ाई के बोझ के नीचे पूरी तरह मरा नहीं है।
- उसका ‘लड़ू’ माँगना बताता है कि उसके भीतर अभी भी बाल-प्रकृति, आनंद, रुचि और निर्दोष आकांक्षा जीवित है।
अर्थात वह मरे हुए काठ की अलमारी जैसा नहीं, बल्कि हरे पत्तों वाले जीवित वृक्ष जैसा है।
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(क)6उम्र के अनुसार बालक में योग्यता का होना आवश्यक है किन्तु उसका ज्ञानी या दार्शनिक होना जरूरी नहीं। 'लर्निंग आउटकम' के बारे में विचार कीजिए।Show solution
इसलिए शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो बच्चे पर बोझ न बने, बल्कि उसकी मानसिक, भावनात्मक और बौद्धिक वृद्धि को सहज रूप से बढ़ाए। बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार सीखना चाहिए; उससे वयस्कों जैसा ज्ञान या दर्शन अपेक्षित करना अनुचित है।
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(ख)1लेखक ने धर्म का रहस्य जानने के लिए 'घड़ी के पुर्जे' का दृष्टांत क्यों दिया है?Show solution
लेखक इस उपमा के माध्यम से धर्माचार्यों के एकाधिकार पर प्रश्न उठाते हैं। वे कहना चाहते हैं कि यदि घड़ी देखना सीखा जा सकता है तो धर्म को समझना भी मनुष्य का अधिकार है; जिज्ञासा पर प्रतिबंध नहीं होना चाहिए।
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(ख)2'धर्म का रहस्य जानना वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का ही काम है।' आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं? धर्म संबंधी अपने विचार व्यक्त कीजिए।Show solution
मेरी दृष्टि में धर्म का अर्थ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि मानवता है। यदि धर्म मानव के हित, प्रेम और नैतिकता को बढ़ाए, तो वह सबका विषय है, न कि केवल कुछ धर्माचार्यों का।
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(ख)3घड़ी समय का ज्ञान कराती है। क्या धर्म संबंधी मान्यताएँ या विचार अपने समय का बोध नहीं कराते?Show solution
लेकिन लेखक का संकेत यह भी है कि धर्म को केवल कुछ लोगों की समझ का विषय बनाकर सीमित नहीं किया जाना चाहिए। धर्म के विचार यदि समाज को दिशा दें, मानवीय मूल्यों को बढ़ाएँ और समय के अनुसार बदलती जरूरतों को समझें, तभी वे सार्थक हैं।
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(ख)4धर्म अगर कुछ विशेष लोगों वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों, मठाधीशों, पंडे-पुजारियों की मुट्ठी में है तो आम आदमी और समाज का उससे क्या संबंध होगा? अपनी राय लिखिए।Show solution
ऐसी स्थिति में धर्म का संबंध मानव-कल्याण से कम और आडंबर, शोषण और एकाधिकार से अधिक होगा। समाज के लिए धर्म एक जीवंत मार्गदर्शक नहीं, बल्कि कुछ लोगों का नियंत्रण-तंत्र बन जाएगा।
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(ख)5'जहाँ धर्म पर कुछ मुट्ठीभर लोगों का एकाधिकार धर्म को संकुचित अर्थ प्रदान करता है वहीं धर्म का आम आदमी से संबंध उसके विकास एवं विस्तार का द्योतक है।' तर्क सहित व्याख्या कीजिए।Show solution
इसके विपरीत, जब धर्म का संबंध आम आदमी से जुड़ता है, तब वह जीवन के नैतिक, सामाजिक और मानवीय पक्षों को प्रभावित करता है। ऐसा धर्म विकसित और विस्तृत रूप लेता है, क्योंकि वह जनजीवन की समस्याओं, करुणा, समानता और सदाचार से जुड़ जाता है।
अर्थात धर्म का सच्चा विकास तब है जब वह सबके लिए खुला हो, न कि कुछ लोगों की संपत्ति बन जाए।
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(ख)6निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए--Show solution
(ख) इसका अर्थ है कि यदि कोई व्यक्ति घड़ी को समझने, खोलने, सुधारने की परीक्षा पास कर चुका है, तो उसे घड़ी देखने का अधिकार होना चाहिए। इसी तरह, जो धर्म को समझना चाहता है और सक्षम है, उसे भी उसे समझने का अवसर मिलना चाहिए।
(ग) इसका आशय है कि कुछ लोग पुरानी, बंद पड़ी परंपराओं को ही ढोते रहते हैं—जैसे कोई बंद घड़ी जेब में रखे फिरता हो—पर न तो उसे चलाना जानते हैं, न सुधारना। फिर भी वे दूसरों को उसमें हाथ नहीं लगाने देते। लेखक इस परंपरागत जड़ता और अज्ञान पर व्यंग्य करता है।
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