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Chapter 29 of 38
NCERT Solutions

संवदिया (फणीश्वरनाथ 'रेणु')

Himachal Pradesh Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for संवदिया (फणीश्वरनाथ 'रेणु') — Himachal Pradesh Board Class 12 Hindi.

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एक तुलनात्मक चार्ट जो संवदिया (संदेशवाहक) की पारंपरिक भूमिका और आधुनिक संचार माध्यमों (जैसे डाकघर, डिजिटल संचार) के आगमन के बाद उसकी प्रासंगिकता को दर्शाता है।
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15 Questions Solved · 3 Sections

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प्रश्न-अभ्यास

1संवदिया की क्या विशेषताएँ हैं और गाँववालों के मन में संवदिया की क्या अवधारणा है?Show solution
संवदिया वह होता है जो संदेशवाहक का काम करता है और एक गाँव/घर का संदेश दूसरे तक पहुँचाता है। कहानी के अनुसार संवदिया के लिए यह ज़रूरी है कि वह संवाद के प्रत्येक शब्द को याद रखे, और जिस सुर-स्वर में संदेश दिया गया है, उसी ढंग से उसे पहुँचाए। वह केवल संदेश ले जाने वाला नहीं, बल्कि लोगों की भावनाएँ भी साथ लेकर चलता है।

गाँववालों की धारणा इससे अलग है। वे समझते हैं कि निठल्ला, कामचोर, पेटू, आगे नाथ न पीछे पगहा वाला आदमी ही संवदिया होता है। वे उसे ऐसा आदमी मानते हैं जो बिना मजदूरी लिए गाँव-गाँव संदेश पहुँचाता है और औरतों की मीठी बोली सुनकर तुरंत पिघल जाता है।

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2बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन के मन में किस प्रकार की आशंका हुई?Show solution
बड़ी हवेली से बुलावा आने पर हरगोबिन को यह अचरज हुआ कि आज के समय में भी संवदिया की ज़रूरत क्यों पड़ सकती है। फिर उसके मन में आशंका हुई कि अवश्य ही कोई गुप्त समाचार ले जाना है, कोई ऐसा संदेश है जो खुले तौर पर नहीं कहा जा सकता। उसे लगा कि बात इतनी छिपी हुई है कि चाँद-सूरज को भी मालूम न हो, परेवा-पंछी तक न जाने। इस तरह वह संवाद के स्वरूप को लेकर उत्सुक और संशयग्रस्त हो गया।

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3बड़ी बहुरिया अपने मायके संदेश क्यों भेजना चाहती थी?Show solution
बड़ी बहुरिया अपने मायके संदेश इसलिए भेजना चाहती थी क्योंकि वह ससुराल में असह्य कष्ट झेल रही थी। देवर-देवरानियाँ और घर की टूटी-फूटी हालत के बीच वह वहाँ नहीं रह सकना चाहती थी। उसने अपनी माँ से कहलवाना चाहा कि वह भाई-भाभियों की नौकरी करके पेट पाल लेगी, बच्चों की जूठन खाकर एक कोने में पड़ी रहेगी, लेकिन अब यहाँ नहीं रहेगी। यदि माँ उसे वहाँ से नहीं ले जाएगी तो वह घड़े से पोखरे में डूब मरने की बात भी कहती है।

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4हरगोबिन बड़ी हवेली में पहुँचकर अतीत की किन स्मृतियों में खो जाता है?Show solution
बड़ी हवेली में पहुँचकर हरगोबिन अतीत की टूटन और पुराने वैभव की स्मृतियों में खो जाता है। वह याद करता है कि पहले वहाँ नौकर-नौकरानियों और जन-मजदूरों की भीड़ लगी रहती थी, पर अब हवेली नाममात्र की बड़ी हवेली रह गई है। उसे बड़े भैया के मरने के बाद बँटवारे, भाइयों की लड़ाई, रैयतों के दखल, बहुरिया के जेवर खींचे जाने और बनारसी साड़ी को तीन टुकड़ों में बाँटने जैसी बातें याद आती हैं। उसे लगता है मानो उसने द्रौपदी के चीरहरण जैसी निर्दयता देखी हो।

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5संवाद कहते वक्त बड़ी बहुरिया की आँखें क्यों छलछला आईं?Show solution
संवाद कहते समय बड़ी बहुरिया की आँखें इसलिए छलछला आईं क्योंकि वह भीतरी पीड़ा और असहनीय अकेलेपन से भरी हुई थी। ससुराल में उसका कोई सहारा नहीं रह गया था—देवर-देवरानियाँ दूर हो गए थे, नौकर भाग गया था, गाय भूखी-प्यासी थी और वह स्वयं बथुआ-साग खाकर जी रही थी। माँ से बात करते हुए उसका मन टूट गया, इसलिए वह सिसकने लगी और उसकी आँखों में आँसू भर आए।

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6गाड़ी पर सवार होने के बाद संवदिया के मन में काँटे की चुभन का अनुभव क्यों हो रहा था। उससे छुटकारा पाने के लिए उसने क्या उपाय सोचा?Show solution
गाड़ी पर सवार होने के बाद हरगोबिन के मन में काँटे-सी चुभन इसलिए हो रही थी क्योंकि वह बड़ी बहुरिया का दुख भरा सही संवाद माँ तक पहुँचाने के बजाय झूठ बोल आया था। उसे लग रहा था कि उसने अपना कर्तव्य नहीं निभाया, इसलिए उसका मन अपराध-बोध से काँप रहा था।

इससे छुटकारा पाने के लिए उसने मन-ही-मन सोचा कि सुबह उठते ही वह बूढ़ी माता को अक्षर-अक्षर सही संवाद सुना देगा—कि बड़ी बहुरिया बहुत कष्ट में है, आज ही किसी को भेजकर उसे बुला लिया जाए, नहीं तो वह कुछ कर बैठेगी।

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7बड़ी बहुरिया का संवाद हरगोबिन क्यों नहीं सुना सका?Show solution
हरगोबिन बड़ी बहुरिया का संवाद इसलिए नहीं सुना सका क्योंकि वह उसकी पीड़ा से अत्यंत द्रवित हो गया था। रास्ते भर उसे बड़ी बहुरिया की छलछलाई आँखें, सिसकियाँ, और उसका करुण स्वर याद आता रहा। मायके पहुँचकर वह बूढ़ी माता के सामने सच कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाया और झूठ बोल आया कि कोई संवाद नहीं है। बाद में उसे अपने झूठ पर पछतावा हुआ, लेकिन तब तक वह संवाद नहीं सुना सका था।

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8‘संवदिया डटकर खाता है और अफर कर सोता है’ से क्या आशय है?Show solution
संवदिया डटकर खाता है और अफर कर सोता है’ से आशय यह है कि लोगों की धारणा में संवदिया निठल्ला, आरामतलब और पेटू होता है। यानी वह काम-धंधा किए बिना पेट भरकर खाता है और फिर बेफिक्री से सो जाता है। यह गाँववालों की व्यंग्यपूर्ण और गलत अवधारणा है; कहानी में हरगोबिन का संवदिया होना इस धारणा को सही नहीं ठहराता।

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9जलालगढ़ पहुँचने के बाद बड़ी बहुरिया के सामने हरगोबिन ने क्या संकल्प लिया?
10‘डिजिटल इंडिया’ के दौर में संवदिया की क्या कोई भूमिका हो सकती है?

भाषा-शिल्प

1इन शब्दों का अर्थ समझिए—
2पाठ से प्रश्नवाचक वाक्यों को छाँटिए और संदर्भ के साथ उन पर टिप्पणी लिखिए।
3इन पंक्तियों की व्याख्या कीजिए—

योग्यता-विस्तार

1संवदिया की भूमिका आपको मिले तो आप क्या करेंगे? संवदिया बनने के लिए किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है?
2इस कहानी का नाट्य रूपांतरण कर विद्यालय के मंच पर प्रस्तुत कीजिए।

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Frequently Asked Questions

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Sources & Official References

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