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Chapter 32 of 38
NCERT Solutions

पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु) (Part 2) — NCERT Solutions

Himachal Pradesh Board · Class 12 · Hindi

NCERT Solutions for पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु) (Part 2), Himachal Pradesh Board Class 12 Hindi: 15 textbook questions solved step by step.

45 questions40 flashcards5 formulas & key relations5 concepts

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फणीश्वर नाथ रेणु के जीवन, जन्म, निधन, प्रमुख रचनाओं (उपन्यास, कहानी-संग्रह, संस्मरण, रिपोर्टाज) और उनके साहित्यिक योगदान को दर्शाने वाला एक इन्फोग्राफिक।
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One of 7 illustrations for पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु) in Super Tutor — alongside flashcards, concept maps and practice questions.

15 Questions Solved · 3 Sections

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पाठ के साथ

1कुश्ती के समय ढोल की आवाज और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द और ढोल की आवाज आपके मन में कैसी ध्वनि पैदा करते हैं, उन्हें शब्द दीजिए।Show solution

कुश्ती के समय ढोल की थाप और लुट्टन के दाँव-पेंच में पूरा तालमेल था। ढोल की आवाज उसे बार-बार उत्तेजित, सावधान और सक्रिय करती थी। पाठ में ढोल की ध्वनि जैसे शब्द आए हैं—‘चट्-धा, गिड्-धा’, ‘चटाक्-चट्-धा’, ‘ढाक्-ढिना’, ‘धाक-धिना’, ‘धिना-धिना, धिक-धिना’, ‘धा-गिड़-गिड़’। इनसे कानों में ऐसी ध्वनि गूँजती है जैसे कोई तेज, तालबद्ध, युद्ध-सी ललकार हो रही हो। यह ध्वनि मन में जोश, ललकार, उठाकर पटक देने और सामने वाले को चुनौती देने जैसा प्रभाव पैदा करती है। ढोल मानो लुट्टन को दाँव काटने, बाहर निकलने, और जोर लगाकर चित करने का संकेत देता है।

2कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए?Show solution

कहानी में लुट्टन के जीवन में कई मोड़ आते हैं। पहले वह एक अनाथ बालक था, जिसे सास ने पाला। कसरत की धुन उसके बचपन के अपमान और बदले की भावना से शुरू हुई। फिर वह गाँव का सबसे अच्छा पहलवान बना। श्यामनगर मेले में चाँद सिंह को चुनौती देकर उसने अपनी वीरता सिद्ध की और राज-पहलवान बन गया। इसके बाद उसकी कीर्ति दूर-दूर तक फैल गई। आगे चलकर बूढ़े राजा के मरने और नए राजकुमार के सत्ता में आने पर वह दरबार से हटाकर गाँव भेज दिया गया। वहाँ उसने गाँव के नौजवानों और अपने पुत्रों को कुश्ती सिखाई। फिर अकाल, मलेरिया, हैजा के समय उसने ढोल बजाकर गाँव में हिम्मत बनाए रखी। अंत में उसके दोनों बेटों की मृत्यु और फिर स्वयं उसकी मृत्यु हुई। इस तरह उसका जीवन अनाथ बालक → पहलवान → राज-पहलवान → गाँव का गुरु → त्रासदीग्रस्त संघर्षशील पिता के रूप में बदलता गया।

3लुट्टन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है?Show solution

लुट्टन ने कहा होगा कि उसका गुरु कोई पहलवान नहीं, बल्कि ढोल है, क्योंकि उसकी कुश्ती-विद्या और उत्साह का असली आधार ढोल की थाप थी। पाठ में दिखाया गया है कि ढोल की आवाज उसे दाँव काटने, बाहर निकलने, जोर लगाने, चित करने का साहस देती थी। वह दंगल में ढोल की लय के अनुसार अपने शरीर और मन को साधता था। इसलिए उसके लिए ढोल केवल वाद्य नहीं, बल्कि प्रेरक गुरु, उत्साह देने वाला साथी और जीवन-शक्ति था।

4गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?Show solution

गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के मर जाने के बावजूद लुट्टन ढोल बजाता रहा, क्योंकि ढोल उसके लिए केवल मनोरंजन का साधन नहीं था, बल्कि जीवन-रक्षा की शक्ति था। उसकी थाप मृतप्राय लोगों में संजीवनी भरती थी। वह जानता था कि बीमारी और मृत्यु को वह रोक नहीं सकता, पर ढोल की आवाज से वह गाँव वालों के भीतर हिम्मत, जीने की इच्छा और मृत्यु से न डरने का साहस जगा सकता है। अपने बेटों की मृत्यु के बाद भी वह इसलिए बजाता रहा कि वह स्वयं टूट न जाए और दूसरों की टूटती हुई हिम्मत को सहारा दे सके।

5ढोलक की आवाज का पूरे गाँव पर क्या असर होता था?Show solution

ढोलक की आवाज का पूरे गाँव पर गहरा असर होता था। वह मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती थी। उसकी थाप से बूढ़ों, बच्चों और जवानों के भीतर फिर से साहस और जीने की शक्ति जाग उठती थी। लोग अपनी बीमारी और कमजोरी भूलकर दंगल का दृश्य मन में देखने लगते थे। ढोल की आवाज उन्हें मृत्यु से डरने से बचाती थी और दुख के बीच भी उन्हें मनोबल देती थी।

6महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?Show solution

महामारी फैलने के बाद सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में बहुत अंतर था। दिन में, सूर्य के प्रकाश में लोग घरों से बाहर निकलकर एक-दूसरे को ढाढ़स देते थे, रोते हुए भी कुछ बोल लेते थे। लेकिन सूर्यास्त के बाद गाँव अपनी झोंपड़ियों में घुसकर बिल्कुल निस्तब्ध हो जाता था; किसी में बोलने की शक्ति नहीं रहती थी, यहाँ तक कि मरते हुए पुत्र को अंतिम बार पुकारने की भी हिम्मत नहीं होती थी। इसलिए सूर्योदय में थोड़ी मानवीय हलचल और सहारा, जबकि सूर्यास्त में डर, चुप्पी और मृत्यु-सा सन्नाटा दिखाई देता था।

7कुश्ती या दंगल पहले लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था। पहलवानों को राजा एवं लोगों के द्वारा विशेष सम्मान दिया जाता था—Show solution

पहले कुश्ती और दंगल लोगों तथा राजाओं का प्रिय शौक थे, इसलिए पहलवानों को विशेष सम्मान मिलता था। लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है, क्योंकि समाज की रुचियाँ बदल गई हैं और मनोरंजन के नए साधन आ गए हैं। पाठ के अनुसार दंगल की जगह घोड़े की रेस ने ले ली। आज के समय में कुश्ती को फिर से प्रिय बनाने के लिए विद्यालयों, अखाड़ों और गाँवों में इसका अभ्यास कराया जा सकता है; खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण, पोषण, सुविधाएँ और सम्मान दिया जा सकता है; तथा लोक-खेलों के महत्व को जन-जागरण के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है।

8आशय स्पष्ट करें—Show solution

इस पंक्ति का आशय यह है कि प्रकृति में भी भावनाएँ और मानवीय गुण दिखाई जा सकते हैं। यहाँ तारे को एक भावुक व्यक्ति की तरह दिखाया गया है जो पृथ्वी पर आना चाहता है, पर उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही समाप्त हो जाती है। अन्य तारे उसकी असफलता पर हँसते हैं। इससे अंधेरी, निराशाजनक स्थिति और असफल प्रयास का चित्र बनता है।

9पाठ में अनेक स्थलों पर प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। पाठ में से ऐसे अंश चुनिए और उनका आशय स्पष्ट कीजिए।

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पाठ के आसपास

1पाठ में मलेरिया और हैजे से पीड़ित गाँव की दयनीय स्थिति को चित्रित किया गया है। आप ऐसी किसी अन्य आपद स्थिति की कल्पना करें और लिखें कि आप ऐसी स्थिति का सामना कैसे करेंगे/करेंगी?

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2ढोलक की थाप मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी— कला से जीवन के संबंध को ध्यान में रखते हुए चर्चा कीजिए।

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3चर्चा करें— कलाओं का अस्तित्व व्यवस्था का मोहताज नहीं है।

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भाषा की बात

1हर विषय, क्षेत्र, परिवेश आदि के कुछ विशिष्ट शब्द होते हैं। पाठ में कुश्ती से जुड़ी शब्दावली का बहुतायत प्रयोग हुआ है। उन शब्दों की सूची बनाइए। साथ ही नीचे दिए गए क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले कोई पाँच-पाँच शब्द बताइए—

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2पाठ में अनेक अंश ऐसे हैं जो भाषा के विशिष्ट प्रयोगों की बानगी प्रस्तुत करते हैं। भाषा का विशिष्ट प्रयोग न केवल भाषाई सर्जनात्मकता को बढ़ावा देता है बल्कि कथ्य को भी प्रभावी बनाता है। यदि उन शब्दों, वाक्यांशों के स्थान पर किन्हीं अन्य का प्रयोग किया जाए तो संभवतः वह अर्थगत चमत्कार और भाषिक सौंदर्य उद्घाटित न हो सके। कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं—

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3जैसे क्रिकेट की कमेंट्री की जाती है वैसे ही इसमें कुश्ती की कमेंट्री की गई है? आपको दोनों में क्या समानता और अंतर दिखाई पड़ता है?

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7 more solved questions in पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु) for Himachal Pradesh Board Class 12 Hindi?
Key topics in पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु) include लेखक परिचय और रचनात्मक विशेषताएँ, कथानक का सार, मुख्य पात्र और उनका चरित्र-चित्रण, ढोलक का प्रतीकात्मक महत्त्व. Study these first, then practise questions on each for the Himachal Pradesh Board Class 12 board exam.
Are these NCERT Solutions for पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु) free?
The first 8 of the 15 solutions on this page are open to read. The other 7 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु) for the Himachal Pradesh Board Class 12 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 45 practice questions on पहलवान की ढोलक-(फणीश्वर नाथ रेणु). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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