यतींद्र मिश्र (नौबतखाने में इबादत) — NCERT Solutions
Tripura Board · Class 10 · Hindi
NCERT Solutions for यतींद्र मिश्र (नौबतखाने में इबादत), Tripura Board Class 10 Hindi: 12 textbook questions solved step by step.
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Exercises
1शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?Show solution
डुमराँव को शहनाई की दुनिया में इसलिए याद किया जाता है क्योंकि शहनाई बजाने में काम आने वाली रीड डुमराँव में, विशेषतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाने वाली नरकट से बनाई जाती है। साथ ही बिस्मिल्ला खाँ का जन्म-स्थान भी डुमराँव ही था। इसलिए शहनाई और डुमराँव का संबंध बहुत महत्त्वपूर्ण माना गया है।
2बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?Show solution
बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक इसलिए कहा गया है क्योंकि उन्होंने शहनाई को केवल वाद्य नहीं, बल्कि मंगल अवसरों की ध्वनि और सुर की साधना का माध्यम बनाया। वे अस्सी वर्ष तक लगातार शहनाई साधते रहे। उनकी फूँक में भक्ति, आस्था, रियाज और लगन थी। काशी, मंदिर, नमाज, मुहर्रम और संगीत—सब उनके जीवन में एक साथ जुड़े रहे। इस तरह वे शहनाई की मंगलध्वनि के सबसे बड़े साधक और प्रतीक बन गए।
3सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है? शहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाह' की उपाधि क्यों दी गई होगी?Show solution
सुषिर-वाद्य वे वाद्य होते हैं जो फूँक मारकर बजाए जाते हैं। इनमें नाड़ी, रीड या छेद के माध्यम से हवा भरी जाती है। शहनाई भी इसी श्रेणी का वाद्य है।
शहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाह' इसलिए कहा गया होगा क्योंकि उसका स्वर बहुत मधुर, प्रभावशाली और मंगलमय होता है। यह मांगलिक अवसरों पर विशेष रूप से बजाई जाती है और अपनी अनोखी ध्वनि के कारण सुषिर वाद्यों में श्रेष्ठ मानी गई है।
4आशय स्पष्ट कीजिए—Show solution
(क) इस कथन का आशय है कि बाहरी वस्त्र-आडंबर की तुलना में सुर की शुद्धता अधिक महत्त्वपूर्ण है। बिस्मिल्ला खाँ के लिए फटी तहमद कोई बड़ी बात नहीं थी; उनके लिए असली मूल्य कला और साधना का था। वे कहते हैं कि भारतरत्न उन्हें शहनाई पर मिला, कपड़ों पर नहीं, इसलिए दिखावा छोड़कर रियाज करना ज़रूरी है।
(ख) इसका आशय है कि बिस्मिल्ला खाँ ईश्वर से सच्चे और शुद्ध सुर की प्रार्थना करते हैं। वे चाहते हैं कि सुर में इतना प्रभाव और माधुर्य हो कि वह मन को छू ले और आँखों से अनगढ़ आँसू निकल आएँ। यह उनकी कला-साधना और आस्था की गहराई को दिखाता है।
5काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?Show solution
काशी में जो परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे, वे थे—
- पक्का महाल और काशी के पुराने वातावरण का बदलना
- मलाई बरफ, देशी घी की कचौड़ी-जलेबी जैसी पुरानी चीज़ों का कम हो जाना
- संगतियों और गायकों के प्रति पहले जैसा आदर न रहना
- घंटों रियाज करने की परंपरा का कम हो जाना
- कजली, चैती और अदब की परंपरा का लुप्त होना
इन परिवर्तनों से उन्हें लगता था कि काशी की संगीत, साहित्य और संस्कृति की पुरानी समृद्धि घटती जा रही है।
6पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि—Show solution
पाठ के आधार पर कहा जा सकता है कि बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे क्योंकि—
- वे मुस्लिम होकर भी काशी के बालाजी मंदिर, काशी विश्वनाथ और गंगा मइया से गहरा लगाव रखते थे।
- वे मुहर्रम में शोक मनाते थे और उसी समय नौहा बजाते थे।
- काशी की होली, मुहर्रम, जगह-जगह की संगीत परंपरा और गंगा-जमुनी तहजीब उनके जीवन में एक साथ मौजूद थी।
- वे धार्मिक भेद से ऊपर उठकर संगीत और मानवता को जोड़ते थे।
वे वास्तविक अर्थों में सच्चे इंसान इसलिए थे क्योंकि—
- उनमें दिखावा नहीं, सादगी थी।
- वे अपनी फटी तहमद और सामान्य जीवन पर गर्व करते थे।
- मुहर्रम के दिनों में वे सच्चे मन से अजादारी करते थे।
- वे कला, ईश्वर और मनुष्यता के प्रति ईमानदार थे।
- उनकी बातचीत में अपनापन, हास्य और विनम्रता थी।
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in यतींद्र मिश्र (नौबतखाने में इबादत) for Tripura Board Class 10 Hindi?
Are these NCERT Solutions for यतींद्र मिश्र (नौबतखाने में इबादत) free?
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