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Chapter 15 of 15
NCERT Solutions

भदंत आनंद कौसल्यायन (संस्कृति)

Tripura Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for भदंत आनंद कौसल्यायन (संस्कृति) — Tripura Board Class 10 Hindi.

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Exercises

1लेखक की दृष्टि में 'सभ्यता' और 'संस्कृति' की सही समझ अब तक क्यों नहीं बन पाई है?Show solution
लेखक के अनुसार ‘सभ्यता’ और ‘संस्कृति’ की सही समझ इसलिए नहीं बन पाई क्योंकि इन दोनों शब्दों का प्रयोग बहुत अधिक होता है, पर उनका अर्थ कम समझा जाता है। इनके साथ कई विशेषण लगा दिए जाते हैं, जैसे भौतिक-सभ्यता और आध्यात्मिक-सभ्यता, जिससे जो थोड़ा-बहुत अर्थ समझ में आता है, वह भी उलझकर गलत-सलत हो जाता है। इसलिए लोग यह तय नहीं कर पाते कि ये एक ही चीज हैं या अलग-अलग।

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2आग की खोज एक बहुत बड़ी खोज क्यों मानी जाती है? इस खोज के पीछे रही प्रेरणा के मुख्य स्रोत क्या रहे होंगे?Show solution
आग की खोज एक बहुत बड़ी खोज इसलिए मानी जाती है क्योंकि इससे मनुष्य के जीवन में बड़ा परिवर्तन आया। आग से भोजन पकाना, ठंड से बचना, अँधेरे में प्रकाश पाना और अनेक काम करना संभव हुआ। इसके पीछे मुख्य प्रेरणाएँ पेट की ज्वाला यानी भूख, ठंड से बचने की इच्छा, और जीवन को सुविधाजनक बनाने की जरूरत रही होंगी।

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1वास्तविक अर्थों में 'संस्कृत व्यक्ति' किसे कहा जा सकता है?Show solution
वास्तविक अर्थों में ‘संस्कृत व्यक्ति’ वह है जिसकी बुद्धि या विवेक ने किसी नए तथ्य का दर्शन किया हो और जिसने अपने बल पर किसी नई चीज की खोज की हो। यानी जो केवल पहले से मिली हुई चीजों को जानता नहीं, बल्कि स्वयं नया ज्ञान या नया आविष्कार करता है, वही संस्कृत व्यक्ति कहलाता है।

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2न्यूटन को संस्कृत मानव कहने के पीछे कौन से तर्क दिए गए हैं? न्यूटन द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों एवं ज्ञान की कई दूसरी बारीकियों को जानने वाले लोग भी न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकते, क्यों?Show solution
न्यूटन को संस्कृत मानव कहने के पीछे यह तर्क दिया गया है कि उन्होंने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार किया। वे उस व्यक्ति के समान हैं जिसने किसी नए तथ्य को पहली बार देखा और समझा।

लेकिन जो लोग न्यूटन के सिद्धांतों और उनके बाद की दूसरी बारीकियों को जानते हैं, उन्हें न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वे ज्ञान उन्हें अनायास पूर्वजों या पहले के वैज्ञानिकों से मिला है। उन्होंने उस ज्ञान को स्वयं खोजा नहीं है। इसलिए वे न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले हों, पर संस्कृत नहीं कहे जा सकते।

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3किन महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सुई-धागे का आविष्कार हुआ होगा?Show solution
सुई-धागे का आविष्कार कई महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हुआ होगा। इनमें मुख्य हैं—
- शरीर को शीत-ताप से बचाने के लिए कपड़े जोड़ना,
- कपड़े सिलने की जरूरत,
- और शरीर को सजाने की प्रवृत्ति।

अर्थात, सुई-धागा मनुष्य की पहनने-ओढ़ने और जीवन को व्यवस्थित करने की आवश्यकताओं से जुड़ा आविष्कार है।

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4"मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है।" किन्हीं दो प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जब—Show solution
मानव संस्कृति को अविभाज्य सिद्ध करने के लिए दो प्रसंग दिए जा सकते हैं—

1. लेनिन का उदाहरण: लेनिन अपनी डेस्क में रखे सूखे डबल रोटी के टुकड़े स्वयं न खाकर दूसरों को खिला देता था। यह त्याग और परोपकार की संस्कृति दिखाता है।
2. सिद्धार्थ का उदाहरण: सिद्धार्थ ने मानवता के सुख के लिए अपना घर त्याग दिया। यह भी दर्शाता है कि मानव संस्कृति में त्याग, करुणा और कल्याण का भाव सब जगह एक-सा है।

इन प्रसंगों से स्पष्ट होता है कि संस्कृति अलग-अलग टुकड़ों में बँटी नहीं, बल्कि एक ही कल्याणकारी धारा है।

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5आशय स्पष्ट कीजिए—
1लेखक ने अपने दृष्टिकोण से सभ्यता और संस्कृति की एक परिभाषा दी है। आप सभ्यता और संस्कृति के बारे में क्या सोचते हैं, लिखिए।
1निम्नलिखित सामासिक पदों का विग्रह करके समास का भेद भी लिखिए—
10'स्थूल भौतिक कारण ही आविष्कारों का आधार नहीं है।' इस विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन कीजिए।
11उन खोजों और आविष्कारों की सूची तैयार कीजिए जो आपकी नजर में बहुत महत्वपूर्ण हैं?

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