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Chapter 3 of 15
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तुलसीदास (राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद)

Tripura Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for तुलसीदास (राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद) — Tripura Board Class 10 Hindi.

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एक समयरेखा जो तुलसीदास के जन्म, बचपन के कष्ट, गुरु नरहरिदास से भेंट, रत्नावली से विवाह (विवादित), गृहत्याग, तीर्थयात्रा, रामचरितमानस की रचना का प्रारंभ, काशी में निवास और निधन जैसी प्रमुख घटनाओं को दर
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15 Questions Solved · 1 Section

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तुलसीदास

1परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?Show solution
लक्ष्मण ने धनुष टूटने के लिए कई तर्क दिए। उन्होंने कहा कि:

- बचपन में उन्होंने अनेक धनुष तोड़े हैं, इसलिए इस धनुष के टूटने पर इतना क्रोध उचित नहीं है।
- यह धनुष बहुत पुराना था, इसलिए इसके टूट जाने में कोई बड़ी हानि नहीं हुई।
- पुराने धनुष के टूटने से लाभ-हानि की कोई बात नहीं बनती।
- उन्होंने यह भी कहा कि राम के छूते ही धनुष टूट गया, इसमें राम का दोष नहीं है।
- बिना कारण क्रोध करना ठीक नहीं है, क्योंकि कोई भी कार्य हो जाने पर केवल रोष करना व्यर्थ है।

इस प्रकार लक्ष्मण ने धनुष के टूटने को एक सामान्य घटना बताकर परशुराम के क्रोध को अनुचित सिद्ध किया।

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2परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
राम और लक्ष्मण की प्रतिक्रियाओं के आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

- राम अत्यंत विनम्र, शीलवान, धैर्यवान और मर्यादित हैं। वे परशुराम के क्रोध को शांत करने का प्रयास करते हैं और शांत रहकर उत्तर देते हैं। उनसे सहनशीलता और आदरसूचक व्यवहार प्रकट होता है।
- लक्ष्मण वीर, निर्भीक, वाक्पटु और व्यंग्यप्रिय हैं। वे परशुराम के क्रोध से डरते नहीं और तीखे, चुटीले उत्तर देते हैं। उनका स्वभाव साहसी है, लेकिन कभी-कभी वे उग्र भी हो जाते हैं।

इस प्रकार राम का स्वभाव मृदु और शांत है, जबकि लक्ष्मण का स्वभाव तेज, साहसी और व्यंग्यपूर्ण है।

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3लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।Show solution
संवाद शैली में मेरा सबसे अच्छा लगा अंश इस प्रकार है:

लक्ष्मण: हे मुनिवर! बार-बार अपने फरसे का दिखावा क्यों करते हैं? क्या आप मुझे डराना चाहते हैं?

परशुराम: अरे मूर्ख! क्या तू मेरे स्वभाव को नहीं जानता? मैं बाल ब्रह्मचारी हूँ और अत्यंत क्रोधी हूँ।

लक्ष्मण: महाशय, आप तो बहुत बड़े योद्धा माने जाते हैं, फिर एक छोटे-से बालक पर इतना क्रोध क्यों?

परशुराम: यह मेरी कुल्हाड़ी को देखकर भी नहीं समझता! मैं क्षत्रियों का शत्रु हूँ और अनेक बार पृथ्वी को क्षत्रियहीन कर चुका हूँ।

इस संवाद में लक्ष्मण की व्यंग्यात्मक चतुराई और परशुराम की अभिमानपूर्ण क्रोधशीलता स्पष्ट दिखाई देती है।

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4परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए—Show solution
दिए गए पद्यांश के आधार पर परशुराम ने अपने बारे में सभा में यह कहा कि वे:

- बाल ब्रह्मचारी हैं।
- बहुत क्रोधी हैं।
- क्षत्रिय कुल के शत्रु हैं और यह बात संसार में प्रसिद्ध है।
- उन्होंने अपने भुजबल से पृथ्वी को अनेक बार राजा-विहीन किया है और उसे ब्राह्मणों को दान में दिया है।
- वे सहस्रबाहु का वध करने वाले हैं।
- उनका परशु बहुत भयानक है और वह शिशुओं तक का संहार कर सकता है।
- इस कारण किसी को भी उनके क्रोध से डरना चाहिए।

अर्थात परशुराम ने स्वयं को एक भयानक, क्रोधी, प्रतापी और क्षत्रिय-विरोधी योद्धा के रूप में प्रस्तुत किया।

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5लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताईं?Show solution
लक्ष्मण ने वीर योद्धा की ये विशेषताएँ बताईं:

- वीर योद्धा निर्भीक होता है।
- वह अपने शस्त्र-बल पर घमंड नहीं करता, बल्कि उसका उचित प्रयोग करता है।
- सच्चा वीर क्रोध में अंधा नहीं होता।
- वह बालक या निर्बल व्यक्ति को धमकाता नहीं है।
- उसे अपने बल का अभिमान नहीं करना चाहिए।
- वीर योद्धा का व्यवहार धैर्यपूर्ण, संयत और न्यायपूर्ण होना चाहिए।

लक्ष्मण के अनुसार, केवल शस्त्र दिखाना ही वीरता नहीं है; साहस के साथ संयम भी आवश्यक है।

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6साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथन पर अपने विचार लिखिए।Show solution
यह कथन बिल्कुल सही है कि साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो व्यक्ति अधिक महान बनता है। केवल बल या साहस पर्याप्त नहीं होते; यदि उनमें विनम्रता न हो तो व्यक्ति अहंकारी और कठोर हो सकता है।

विनम्र व्यक्ति अपनी शक्ति का उपयोग दूसरों की रक्षा और सही कार्यों के लिए करता है। ऐसा व्यक्ति सबका सम्मान पाता है। उदाहरण के लिए, राम और लक्ष्मण में साहस था, पर राम की विनम्रता उन्हें आदर्श बनाती है। दूसरी ओर, परशुराम जैसे शक्तिशाली व्यक्ति का क्रोध उनकी छवि को कठोर बना देता है।

इसलिए मैं मानता हूँ कि शक्ति के साथ विनम्रता मनुष्य को वास्तव में महान बनाती है। यह गुण संबंधों में मधुरता, समाज में सम्मान और जीवन में संतुलन लाता है।

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7भाव स्पष्ट कीजिए—Show solution
(क) इन पंक्तियों का भाव यह है कि लक्ष्मण ने परशुराम के क्रोध को देखकर मृदु वाणी में हँसते हुए कहा कि वे स्वयं को महान योद्धा समझते हैं, फिर भी बार-बार अपनी कुल्हाड़ी दिखाकर उन्हें डराने की कोशिश कर रहे हैं। लक्ष्मण का आशय है कि इतनी बड़ी वीरता का प्रदर्शन करना उचित नहीं है। यहाँ लक्ष्मण की व्यंग्यपूर्ण विनम्रता दिखाई देती है।

(ख) इन पंक्तियों का भाव यह है कि लक्ष्मण कहते हैं—यहाँ कोई कमजोर या डरपोक नहीं है जो केवल परशुराम की उँगली उठाने से ही मर जाए। वे परशुराम के धनुष, बाण और कुल्हाड़ी को देखकर भी डरते नहीं हैं। वे अपने कथन में कुछ-न-कुछ अभिमान भी रखते हैं, पर वह व्यंग्य के रूप में प्रकट होता है।

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8पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।Show solution
तुलसी के भाषा-सौंदर्य की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

1. तुलसी की भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली है।
2. उन्होंने अवधी का सुंदर और स्वाभाविक प्रयोग किया है।
3. उनकी भाषा में लोकभाषा की मिठास है।
4. चौपाई और दोहों के कारण कथन में लय और संगीतात्मकता है।
5. भाषा में भावों की तीव्रता और स्पष्टता दोनों हैं।
6. संवादों में जीवंतता है, जिससे पात्र सजीव लगते हैं।
7. तुलसी की भाषा में विनय, व्यंग्य, वीरता और हास्य सबका सुंदर संगम है।
8. उनके शब्द सटीक और अर्थपूर्ण हैं।
9. अलंकारों का प्रयोग भाषा को सौंदर्यपूर्ण बनाता है।
10. तुलसी की भाषा जनता के हृदय को छूने वाली और स्मरणीय है।

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9इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।
10निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए—
11.“सामाजिक जीवन में क्रोध की जरूरत बराबर पड़ती है। यदि क्रोध न हो तो मनुष्य दूसरे के द्वारा पहुँचाए जाने वाले बहुत से कष्टों की चिर-निवृत्ति का उपाय ही न कर सके।”
आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का यह कथन इस बात की पुष्टि करता है कि क्रोध हमेशा नकारात्मक भाव लिए नहीं होता बल्कि कभी-कभी सकारात्मक भी होता है। इसके पक्ष या विपक्ष में अपना मत प्रकट कीजिए।
12.अपने किसी परिचित या मित्र के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।
13.दूसरों की क्षमताओं को कम नहीं समझना चाहिए—इस शीर्षक को ध्यान में रखते हुए एक कहानी लिखिए।
14.उन घटनाओं को याद करके लिखिए जब आपने अन्याय का प्रतिकार किया हो।
15.अवधी भाषा आज किन-किन क्षेत्रों में बोली जाती है?

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Frequently Asked Questions

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