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Chapter 8 of 15
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नागार्जुन (यह दंतुरित मुसकान / फसल) — NCERT Solutions

Tripura Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for नागार्जुन (यह दंतुरित मुसकान / फसल), Tripura Board Class 10 Hindi: 13 textbook questions solved step by step.

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नागार्जुन के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, जन्म, शिक्षा, बौद्ध धर्म में दीक्षा, यात्राएँ, देहांत और प्रमुख साहित्यिक कृतियों को दर्शाने वाली एक समयरेखा।
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13 Questions Solved · 3 Sections

The first 7 solutions are open to read. The other 6 are free with a Super Tutor account.

प्रश्नोत्तर

1बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?Show solution

दिया गया: कविता 'यह दंतुरित मुसकान' — नागार्जुन

उत्तर:
बच्चे की दंतुरित (नए-नए दाँतों वाली) मुसकान का कवि के मन पर अत्यंत गहरा और जादुई प्रभाव पड़ता है। कवि कहता है कि वह मुसकान इतनी मनमोहक है कि उसे देखकर पत्थर जैसा कठोर हृदय भी पिघल जाता है। कवि स्वयं को मृतक के समान मानता था, किंतु बच्चे की उस मुसकान ने उसके भीतर नई जीवन-शक्ति और चेतना का संचार कर दिया। ऐसा लगा जैसे तालाब छोड़कर कमल के फूल उसकी झोंपड़ी में खिल उठे हों। अर्थात् बच्चे की मुसकान ने कवि के निर्जीव, उदास जीवन में सौंदर्य और आनंद भर दिया।

2बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है?Show solution

उत्तर:
बच्चे की मुसकान और बड़े व्यक्ति की मुसकान में निम्नलिखित अंतर है:

बच्चे की मुसकानबड़े व्यक्ति की मुसकान
निश्छल, निर्मल और स्वाभाविक होती है।प्रायः स्वार्थ, दिखावे या शिष्टाचार से युक्त होती है।
हृदय की गहराइयों से उत्पन्न होती है।बाहरी परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है।
देखने वाले के मन को पूरी तरह मोह लेती है।उतना गहरा प्रभाव नहीं छोड़ती।
पत्थर हृदय को भी पिघला देती है।सामान्य प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है।

संक्षेप में, बच्चे की मुसकान में निर्दोषता और आत्मीयता होती है जो बड़ों की मुसकान में नहीं होती।

3कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन-किन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है?Show solution

उत्तर:
कवि नागार्जुन ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को निम्नलिखित बिंबों (चित्रों) के माध्यम से व्यक्त किया है:

  1. कमल का बिंब: 'छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात' — बच्चे की मुसकान को तालाब छोड़कर झोंपड़ी में खिले कमल के फूल से उपमा दी गई है, जो असंभव सौंदर्य का प्रतीक है।
  1. पत्थर पिघलने का बिंब: बच्चे की मुसकान देखकर पत्थर का हृदय भी पिघल जाता है — यह बिंब मुसकान की अपार कोमलता और प्रभाव को दर्शाता है।
  1. शेफालिका के फूलों का बिंब: 'छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल' — बच्चे के स्पर्श से बाँस या बबूल जैसे कठोर पेड़ से भी कोमल शेफालिका के फूल झरने लगते हैं। यह बिंब बच्चे की मुसकान की जादुई शक्ति को व्यक्त करता है।
  1. मृतक में जीवन का बिंब: बच्चे की मुसकान देखकर मृत व्यक्ति भी जीवित हो उठता है — यह बिंब मुसकान की जीवनदायिनी शक्ति को दर्शाता है।
4भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात।
(ख) छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल?
Show solution

(क) छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात।

भाव: 'जलजात' का अर्थ है कमल का फूल, जो तालाब में खिलता है। कवि कहता है कि बच्चे की मुसकान देखकर उसे ऐसा लगा जैसे कमल के फूल अपना स्वाभाविक स्थान (तालाब) छोड़कर उसकी साधारण-सी झोंपड़ी में खिल उठे हों। यह एक असंभव-सी बात है, किंतु बच्चे की मुसकान ने यह चमत्कार कर दिखाया। अर्थात् बच्चे की मुसकान ने कवि के सामान्य और उदास जीवन में असाधारण सौंदर्य और प्रसन्नता भर दी।

(ख) छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल?

भाव: शेफालिका (हरसिंगार) के फूल अत्यंत कोमल और सुगंधित होते हैं, जबकि बाँस और बबूल कठोर और काँटेदार पेड़ हैं। कवि कहता है कि बच्चे के स्पर्श मात्र से कठोर बाँस या बबूल जैसे पेड़ से भी कोमल शेफालिका के फूल झरने लगे। भाव यह है कि बच्चे की मुसकान और स्पर्श में इतनी अद्भुत शक्ति है कि वह कठोर से कठोर हृदय को भी कोमल बना देती है और उसमें सौंदर्य व संवेदना जगा देती है।

5मुसकान और क्रोध भिन्न-भिन्न भाव हैं। इनकी उपस्थिति से बने वातावरण की भिन्नता का चित्रण कीजिए।Show solution

रचना और अभिव्यक्ति

उत्तर:

मुसकान से बना वातावरण:
जब किसी के चेहरे पर मुसकान होती है तो चारों ओर का वातावरण सुखद, आनंदमय और प्रेमपूर्ण हो जाता है। मुसकान देखने वाले के मन में भी प्रसन्नता का संचार होता है। आपसी संबंध मधुर बनते हैं, तनाव दूर होता है और जीवन में उत्साह का भाव जागता है। बच्चे की मुसकान तो इतनी प्रभावशाली होती है कि पत्थर हृदय भी पिघल जाता है और निराश मन में भी जीने की उमंग जाग उठती है।

क्रोध से बना वातावरण:
इसके विपरीत, जब किसी के चेहरे पर क्रोध होता है तो वातावरण तनावपूर्ण, भयावह और अप्रिय हो जाता है। क्रोध देखने वाले के मन में भय, घबराहट या प्रतिक्रिया में क्रोध उत्पन्न होता है। आपसी संबंध कटु हो जाते हैं, बातचीत बंद हो जाती है और वातावरण में एक अजीब-सी घुटन छा जाती है।

निष्कर्ष: मुसकान जहाँ जीवन में मिठास, प्रेम और सौंदर्य भरती है, वहीं क्रोध कटुता, वैमनस्य और दुःख का कारण बनता है।

6दंतुरित मुसकान से बच्चे की उम्र का अनुमान लगाइए और तर्क सहित उत्तर दीजिए।Show solution

उत्तर:
'दंतुरित मुसकान' का अर्थ है — नए-नए दाँत निकलने पर आने वाली मुसकान। बच्चों में दाँत सामान्यतः 6 से 12 महीने की आयु के बीच निकलने शुरू होते हैं।

तर्क:

  • कविता में बच्चे को 'धूलि-धूसर गात' (धूल-मिट्टी से सने शरीर वाला) कहा गया है, जिससे लगता है कि बच्चा थोड़ा बड़ा है और खेलने-रेंगने लगा है।
  • बच्चे के नए-नए दाँत निकले हैं और वह मुसकुरा रहा है, जो 6 माह से 1.5 वर्ष की आयु का संकेत देता है।
  • बच्चा कनखी से देख रहा है और माँ की गोद में है, जो इस आयु-वर्ग के बच्चों का स्वाभाविक व्यवहार है।

निष्कर्ष: इन तर्कों के आधार पर कहा जा सकता है कि बच्चे की उम्र लगभग 6 महीने से डेढ़ वर्ष के बीच है।

7बच्चे से कवि की मुलाकात का जो शब्द-चित्र उपस्थित हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।Show solution

उत्तर:
कवि नागार्जुन बहुत दिनों बाद अपने घर लौटे हैं। घर में उनकी पत्नी की गोद में एक छोटा-सा शिशु है जिसके नए-नए दाँत निकले हैं। बच्चे का शरीर धूल-मिट्टी से सना हुआ है। जब कवि की नजर उस बच्चे पर पड़ती है तो बच्चा अपनी दंतुरित (नए दाँतों वाली) मुसकान से कवि का स्वागत करता है।

कवि उस मुसकान को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है। उसे लगता है जैसे पत्थर का हृदय भी पिघल गया हो। बच्चा माँ की गोद में बैठा कनखियों से (तिरछी नजर से) कवि को देखता है और मुसकुराता है। कवि को लगता है कि यह मुसकान इतनी अद्भुत है कि तालाब छोड़कर कमल के फूल उसकी झोंपड़ी में खिल उठे हों।

जब बच्चा कवि को छूता है तो कवि को ऐसा अनुभव होता है जैसे कठोर बाँस या बबूल से शेफालिका के कोमल फूल झर पड़े हों। बच्चे की यह मुसकान कवि के मृतप्राय जीवन में नई चेतना और जीवन-शक्ति भर देती है। यह मुलाकात कवि के लिए एक अविस्मरणीय और जीवन-परिवर्तनकारी अनुभव बन जाती है।

फसल — प्रश्नोत्तर

1कवि के अनुसार फसल क्या है?

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2कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है। वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से हैं?

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3फसल को 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' और 'महिमा' कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?

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4भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) रूपांतर है सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

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5कवि ने फसल को हजार-हजार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है—
(क) मिट्टी के गुण-धर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?
(ख) वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस-किस तरह प्रभावित करती है?
(ग) मिट्टी द्वारा अपना गुण-धर्म छोड़ने की स्थिति में क्या किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना की जा सकती है?
(घ) मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित करने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है?

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पाठेतर सक्रियता

1इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया द्वारा आपने किसानों की स्थिति के बारे में बहुत कुछ सुना, देखा और पढ़ा होगा। एक सुदृढ़ कृषि-व्यवस्था के लिए आप अपने सुझाव देते हुए अखबार के संपादक को पत्र लिखिए।

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6 more solved questions in नागार्जुन (यह दंतुरित मुसकान / फसल)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in नागार्जुन (यह दंतुरित मुसकान / फसल) for Tripura Board Class 10 Hindi?
Key topics in नागार्जुन (यह दंतुरित मुसकान / फसल) include १. नागार्जुन का परिचय, २. ‘यह दंतुरित मुसकान’ का भावार्थ, ३. ‘फसल’ का भावार्थ. Study these first, then practise questions on each for the Tripura Board Class 10 board exam.
Are these NCERT Solutions for नागार्जुन (यह दंतुरित मुसकान / फसल) free?
The first 7 of the 13 solutions on this page are open to read. The other 6 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise नागार्जुन (यह दंतुरित मुसकान / फसल) for the Tripura Board Class 10 board exam?
Learn the core ideas first, then work through the 42 practice questions on नागार्जुन (यह दंतुरित मुसकान / फसल). Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.

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