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Chapter 7 of 15
NCERT Solutions

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला (उत्साह / अट नहीं रही है) — NCERT Solutions

Tripura Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला (उत्साह / अट नहीं रही है), Tripura Board Class 10 Hindi: 11 textbook questions solved step by step.

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सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, जन्म, शिक्षा, पारिवारिक संघर्ष, साहित्यिक यात्रा और निधन को दर्शाने वाली एक समयरेखा।
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One of 5 illustrations for सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला (उत्साह / अट नहीं रही है) in Super Tutor — alongside flashcards, concept maps and practice questions.

11 Questions Solved · 4 Sections

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उत्साह

1कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर 'गरजने' के लिए कहता है, क्यों?Show solution

दिया गया है: कविता 'उत्साह' में कवि निराला बादल को गरजने के लिए कहते हैं।

उत्तर:
कवि बादल से गरजने के लिए इसलिए कहता है क्योंकि —

  1. सामाजिक संदर्भ में: समाज में चारों ओर निराशा, शोषण और पीड़ा व्याप्त है। लोगों के मन 'प्यासे' हैं — अर्थात् वे क्रांति और परिवर्तन के लिए तरस रहे हैं। केवल फुहार या रिमझिम से यह प्यास नहीं बुझेगी।
  1. क्रांति का आह्वान: कवि चाहता है कि बादल (क्रांतिदूत) अपनी गर्जना से सोए हुए, निराश और उदासीन लोगों को जगाए, उनमें नई चेतना और उत्साह का संचार करे।
  1. नवनिर्माण की आवश्यकता: गरजना विध्वंस और पुनर्निर्माण का प्रतीक है। पुरानी व्यवस्था को तोड़कर नई व्यवस्था लाने के लिए तीव्र और प्रचंड शक्ति की आवश्यकता है, जो केवल गर्जना से ही संभव है।

निष्कर्ष: इस प्रकार कवि बादल को क्रांति के प्रतीक के रूप में देखता है और उससे प्रचंड गर्जना का आह्वान करता है ताकि समाज में नई ऊर्जा और चेतना का उदय हो।

2कविता का शीर्षक 'उत्साह' क्यों रखा गया है?Show solution

दिया गया है: कविता 'उत्साह' — सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित।

उत्तर:
कविता का शीर्षक 'उत्साह' अत्यंत सार्थक है, क्योंकि —

  1. कवि का उत्साह: कवि स्वयं बादल को देखकर उत्साहित हो उठता है और उसे गरजने के लिए प्रेरित करता है।
  1. बादल में उत्साह: बादल स्वयं उत्साह और ऊर्जा का प्रतीक है। वह उमड़-घुमड़कर आता है और अपनी शक्ति का प्रदर्शन करता है।
  1. जन-जागरण का उत्साह: कवि चाहता है कि बादल की गर्जना से समाज के निराश और पीड़ित लोगों में नया उत्साह जागे, वे क्रांति के लिए प्रेरित हों।
  1. प्रकृति और मानव दोनों में उत्साह: कविता में प्रकृति (बादल) और मानव (कवि तथा समाज) दोनों में उत्साह का भाव विद्यमान है।

निष्कर्ष: इस प्रकार 'उत्साह' शीर्षक कविता के केंद्रीय भाव — ऊर्जा, जोश, क्रांति-चेतना और नवनिर्माण की प्रेरणा — को पूर्णतः व्यक्त करता है।

3कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?Show solution

दिया गया है: कविता 'उत्साह' में बादल का प्रतीकात्मक प्रयोग।

उत्तर:
कविता में बादल निम्नलिखित अर्थों की ओर संकेत करता है —

  1. प्राकृतिक बादल: सबसे पहले बादल अपने सामान्य अर्थ में है — वर्षा लाने वाला, गर्जना करने वाला, जल से भरा बादल जो धरती की प्यास बुझाता है।
  1. क्रांतिदूत का प्रतीक: बादल क्रांति लाने वाले उस नायक का प्रतीक है जो समाज की पुरानी, जर्जर व्यवस्था को तोड़कर नई व्यवस्था स्थापित करता है।
  1. कवि-कल्पना का प्रतीक: बादल कवि की उस उर्वर कल्पना-शक्ति का प्रतीक है जो उमड़-घुमड़कर काव्य-सृजन करती है।
  1. आशा और नवजीवन का प्रतीक: जिस प्रकार बादल सूखी धरती को जल देकर नया जीवन देता है, उसी प्रकार वह निराश समाज में नई आशा और उत्साह का संचार करता है।
  1. विध्वंसक और निर्माणकारी शक्ति: बादल की गर्जना विध्वंस का और उसकी वर्षा नवनिर्माण का प्रतीक है।

निष्कर्ष: इस प्रकार बादल कविता में बहुआयामी प्रतीक के रूप में प्रयुक्त हुआ है।

4शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। 'उत्साह' कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।Show solution

दिया गया है: नाद-सौंदर्य की परिभाषा और 'उत्साह' कविता।

अवधारणा: नाद-सौंदर्य वह ध्वन्यात्मक प्रभाव है जो शब्दों के उच्चारण से उत्पन्न होता है और कविता के भाव को और अधिक प्रभावशाली बनाता है।

'उत्साह' कविता में नाद-सौंदर्य से युक्त शब्द:

शब्द/पदनाद-सौंदर्य का प्रभाव
गरजो'ग' और 'र' की ध्वनि से गर्जना का आभास
घेर-घेरपुनरुक्ति से घिरने का ध्वन्यात्मक प्रभाव
घोरभारी, गहरी ध्वनि से भयंकरता का बोध
ललितकोमल ध्वनि से सौंदर्य का बोध
विद्युत-छवि'व' और 'च' की ध्वनि से चमक का आभास
बाँधोदृढ़ता का ध्वन्यात्मक प्रभाव
धाराधर'ध' की आवृत्ति से जल-प्रवाह का बोध

निष्कर्ष: इन शब्दों के उच्चारण से बादल की गर्जना, बिजली की चमक और वर्षा के प्रवाह का जीवंत ध्वन्यात्मक चित्र उभरता है, जो कविता के नाद-सौंदर्य को समृद्ध बनाता है।

रचना और अभिव्यक्ति (उत्साह)

5जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।Show solution

संकेत: यह एक रचनात्मक प्रश्न है। विद्यार्थी अपनी मौलिक कविता लिखें। नीचे एक नमूना प्रस्तुत है —

नमूना कविता: नदी

बहती चली जाती है नदी,
पत्थरों से टकराकर भी,
रुकती नहीं, झुकती नहीं,
आगे बढ़ती जाती है नदी।

कभी शांत, कभी उफनती,
कभी गीत गाती, कभी गरजती,
जीवन का संदेश सुनाती,
बहती चली जाती है नदी।

दो किनारों के बीच बँधकर भी,
अपनी राह खुद बनाती है,
सागर से मिलने की चाह में,
बहती चली जाती है नदी।

निर्देश: विद्यार्थी किसी भी प्राकृतिक दृश्य — सूर्योदय, पर्वत, वन, झरना आदि — को देखकर अपनी मौलिक कविता लिख सकते हैं।

अट नहीं रही है

1छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।Show solution

दिया गया है: छायावाद की विशेषता — अंतर्मन के भावों का बाहरी जगत से सामंजस्य।

उत्तर:
निम्नलिखित पंक्तियाँ इस धारणा को पुष्ट करती हैं —

पंक्तियाँ:
"उड़ने को नभ में तुम\text{"उड़ने को नभ में तुम}
पर-पर कर देते हो,\text{पर-पर कर देते हो,}
आँख हटाता हूँ तो\text{आँख हटाता हूँ तो}
हट नहीं रही है।"\text{हट नहीं रही है।"}

तथा —
"पाट-पाट शोभा-श्री\text{"पाट-पाट शोभा-श्री}
पट नहीं रही है।"\text{पट नहीं रही है।"}

व्याख्या:

  1. पहली पंक्तियों में कवि का अंतर्मन फागुन की सुंदरता से इतना अभिभूत है कि वह आँख हटाना चाहते हुए भी हटा नहीं पाता — यह अंतर्मन और बाहरी प्रकृति का सामंजस्य है।
  1. दूसरी पंक्तियों में फागुन की शोभा इतनी व्यापक है कि वह किसी सीमा में नहीं समाती — यह बाहरी प्रकृति की विशालता और कवि के भीतर के असीम आनंद का सामंजस्य दर्शाता है।

निष्कर्ष: इन पंक्तियों में कवि का आंतरिक आनंद और फागुन की बाहरी सुंदरता एकाकार हो जाते हैं, जो छायावाद की मूल विशेषता है।

2कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?

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3प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?

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4फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?

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5इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।

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रचना और अभिव्यक्ति (अट नहीं रही है)

6होली के आसपास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते हैं, उन्हें लिखिए।

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5 more solved questions in सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला (उत्साह / अट नहीं रही है)

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला (उत्साह / अट नहीं रही है) for Tripura Board Class 10 Hindi?
Key topics in सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला (उत्साह / अट नहीं रही है) include कवि-परिचय और साहित्यिक विशेषताएँ, ‘उत्साह’ कविता का भावार्थ और केंद्रीय विचार, ‘उत्साह’ की प्रमुख पंक्तियाँ और अर्थ, ‘अट नहीं रही है’ कविता का भावार्थ और केंद्रीय विचार. Study these first, then practise questions on each for the Tripura Board Class 10 board exam.
Are these NCERT Solutions for सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला (उत्साह / अट नहीं रही है) free?
The first 6 of the 11 solutions on this page are open to read. The other 5 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
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Sources & Official References

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