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Chapter 9 of 32
NCERT Solutions

आत्मकथ्य

Tripura Board · Class 10 · Hindi

NCERT Solutions for आत्मकथ्य — Tripura Board Class 10 Hindi.

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जयशंकर प्रसाद के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं और उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियों को दर्शाने वाली एक समयरेखा। इसमें जन्म, शिक्षा, प्रमुख काव्य, नाटक, उपन्यास और कहानी संग्रह शामिल होंगे, साथ ही उनके निधन की
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12 Questions Solved · 1 Section

आत्मकथ्य — प्रश्न-उत्तर (क्षितिज-2, कक्षा 10)

1कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?Show solution
दिया गया है: जयशंकर प्रसाद की कविता 'आत्मकथ्य' में कवि से आत्मकथा लिखने का आग्रह किया जाता है।

उत्तर:
कवि आत्मकथा लिखने से निम्नलिखित कारणों से बचना चाहता है—

1. जीवन की असफलताएँ और दुःख: कवि का जीवन सुख-रहित रहा है। उसे जो सुख का स्वप्न था, वह कभी पूरा नहीं हुआ। ऐसे दुःखमय जीवन की कथा सुनाना उसे उचित नहीं लगता।

2. निजी पीड़ा को उजागर न करना: कवि अपनी प्रेम-विफलता, छल-प्रपंच और व्यक्तिगत कमज़ोरियों को सार्वजनिक नहीं करना चाहता। वह नहीं चाहता कि उसकी निजी पीड़ा दूसरों के लिए हँसी का विषय बने।

3. जीवन की सामान्यता: कवि मानता है कि उसका जीवन विशेष उपलब्धियों से रहित है — उसकी 'गागर रीती' (मन खाली) है। ऐसे जीवन की आत्मकथा दूसरों के लिए प्रेरणादायक नहीं होगी।

4. आत्म-प्रशंसा से परहेज: कवि स्वयं की 'उज्ज्वल गाथा' गाना नहीं चाहता क्योंकि यह आत्म-प्रशंसा जैसा लगेगा।

निष्कर्ष: कवि की विनम्रता, आत्म-संकोच और जीवन की पीड़ाओं को सार्वजनिक न करने की इच्छा ही उसे आत्मकथा लिखने से रोकती है।
2आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में 'अभी समय भी नहीं' कवि ऐसा क्यों कहता है?Show solution
दिया गया है: कवि से आत्मकथा सुनाने का आग्रह किया जाता है, परंतु वह कहता है — 'अभी समय भी नहीं'।

उत्तर:
कवि के 'अभी समय भी नहीं' कहने के पीछे निम्नलिखित भाव हैं—

1. जीवन-संघर्ष जारी है: कवि का जीवन अभी भी संघर्षों से भरा हुआ है। जब जीवन की यात्रा अभी पूरी नहीं हुई, तो उसकी कथा कैसे सुनाई जाए?

2. मन की व्यस्तता: कवि का मन अभी भी अपनी स्मृतियों, पीड़ाओं और अनुभवों को पचाने में लगा है। इस अवस्था में आत्मकथा लिखना संभव नहीं।

3. विनम्र टालने का भाव: यह कथन एक विनम्र बहाना भी है। कवि वास्तव में आत्मकथा लिखना नहीं चाहता, इसलिए 'समय नहीं' कहकर इस आग्रह को टाल देता है।

4. जीवन की अपूर्णता: कवि को लगता है कि उसका जीवन अभी अधूरा है — उसके सपने अधूरे हैं, उसकी कहानी अभी समाप्त नहीं हुई।

निष्कर्ष: 'अभी समय भी नहीं' — यह कथन कवि की विनम्रता, आत्म-संकोच और जीवन की अपूर्णता का प्रतीक है।
3स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का क्या आशय है?Show solution
दिया गया है: कवि अपनी प्रिया की स्मृति को 'पाथेय' बनाने की बात करता है।

शब्दार्थ: 'पाथेय' का अर्थ है — यात्रा में साथ ले जाने वाला भोजन या संबल, अर्थात् वह सहारा जो लंबी यात्रा में शक्ति देता है।

आशय:
कवि का आशय यह है कि उसकी प्रिया की मधुर स्मृतियाँ ही उसके जीवन-पथ की एकमात्र संबल हैं। जिस प्रकार एक यात्री लंबी यात्रा पर निकलते समय अपने साथ भोजन (पाथेय) लेकर चलता है, जो उसे थकान में शक्ति देता है — उसी प्रकार कवि अपनी प्रिया की प्रेम-भरी स्मृतियों को अपने जीवन-यात्रा का सहारा बनाता है।

कवि का जीवन कठिनाइयों और निराशाओं से भरा है। प्रिया का साथ नहीं रहा, परंतु उसकी मधुर यादें कवि को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा और शक्ति देती हैं।

निष्कर्ष: स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का आशय है — प्रिया की प्रेम-स्मृतियों को जीवन-यात्रा का आधार और शक्ति-स्रोत बनाना।
4भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।
(ख) जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।
Show solution
(क) भाव:

दिया गया है: कवि ने सुख का स्वप्न देखा था, परंतु वह सुख कभी प्राप्त नहीं हुआ।

इन पंक्तियों में कवि अपने जीवन की सबसे बड़ी विडंबना व्यक्त करता है। कवि ने प्रेम और सुख का एक सुंदर स्वप्न देखा था — उसे लगा था कि उसे अपनी प्रिया का प्रेम और जीवन में सुख मिलेगा। परंतु यह सुख केवल स्वप्न ही रहा; जब वह वास्तविकता में बदलने वाला था, तभी वह मुस्कुराकर भाग गया — अर्थात् प्रिया या सुख ने उसे छल दिया।

'आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया' — यह पंक्ति प्रेम की क्षणभंगुरता और जीवन की विडंबना को दर्शाती है। सुख इतना निकट था, फिर भी हाथ न आया। यह कवि की प्रेम-विफलता और जीवन की निराशा का मार्मिक चित्रण है।

---

(ख) भाव:

दिया गया है: कवि अपनी प्रिया की सुंदरता का वर्णन करता है।

इन पंक्तियों में कवि अपनी प्रिया की अलौकिक सुंदरता का वर्णन करता है। प्रिया के लाल-लाल गालों (अरुण कपोल) की आभा इतनी मनमोहक थी कि प्रेम से भरी भोर (अनुरागिनी उषा) भी उसी की छाया में अपना सुहाग (सौंदर्य और मधुरता) ग्रहण करती थी।

अर्थात् — प्रातःकाल की लालिमा भी प्रिया के गालों की लालिमा से प्रेरित लगती थी। यह अतिशयोक्ति अलंकार का सुंदर प्रयोग है जिसमें प्रिया की सुंदरता को उषा से भी श्रेष्ठ बताया गया है। कवि की प्रिया के प्रति गहरी आसक्ति और उसकी अपूर्व सुंदरता का यह मनोरम चित्रण है।
5'उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की'—कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?Show solution
दिया गया है: कवि से आत्मकथा लिखने का आग्रह किया जाता है।

भाव एवं आशय:

इस कथन के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि उसके जीवन में जो सुखद और मधुर क्षण थे — वे प्रेम की चाँदनी रातों जैसे थे — वे अब केवल स्मृति बनकर रह गए हैं। उन मधुर पलों की 'उज्ज्वल गाथा' गाना उसके लिए संभव नहीं, क्योंकि—

1. वे क्षण अब नहीं रहे: जो सुखद प्रेम-प्रसंग थे, वे बीत चुके हैं। उनकी स्मृति मात्र शेष है।

2. आत्म-प्रशंसा से परहेज: अपने सुखद अनुभवों को सार्वजनिक करना आत्म-प्रशंसा जैसा लगेगा, जो कवि को स्वीकार नहीं।

3. पीड़ा का बोध: उन मधुर रातों की याद करना कवि के लिए और भी पीड़ादायक है, क्योंकि वे सुख अब उसके जीवन में नहीं हैं।

4. निजता की रक्षा: कवि अपने प्रेम-जीवन की मधुर स्मृतियों को सार्वजनिक नहीं करना चाहता।

निष्कर्ष: यह कथन कवि की विनम्रता, आत्म-संकोच और अपनी निजी खुशियों को सार्वजनिक न करने की इच्छा का प्रतीक है।
6'आत्मकथ्य' कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।Show solution
दिया गया है: जयशंकर प्रसाद की कविता 'आत्मकथ्य'।

काव्यभाषा की विशेषताएँ:

1. खड़ी बोली का प्रयोग:
कविता में परिष्कृत और साहित्यिक खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है।
उदाहरण: *'मधुप गुनगुनाकर कह जाता कौन कहानी यह अपनी।'*

2. संस्कृतनिष्ठ शब्दावली:
कविता में तत्सम शब्दों का प्रचुर प्रयोग है जो भाषा को गरिमामय बनाता है।
उदाहरण: *'अनुरागिनी उषा', 'अनंत नीलिमा', 'प्रवंचना'।*

3. अलंकारों का सुंदर प्रयोग:
- रूपक अलंकार: *'मधुप गुनगुनाकर'* — मन को मधुप (भौंरा) कहा गया है।
- अतिशयोक्ति: *'अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में'* — उषा की तुलना प्रिया से।
- मानवीकरण: उषा को अनुरागिनी बताना।

4. प्रतीकात्मकता:
- *'गागर रीती'* — खाली जीवन का प्रतीक
- *'पाथेय'* — जीवन-संबल का प्रतीक
- *'चाँदनी रातें'* — सुखद प्रेम-क्षणों का प्रतीक

5. संगीतात्मकता और लय:
कविता में तुकबंदी और लय का सुंदर निर्वाह है जो इसे गेय बनाता है।
उदाहरण: *'जाग गया — भाग गया'*, *'रातों की — बातों की'।*

6. भावानुकूल भाषा:
कवि की पीड़ा, विनम्रता और आत्म-संकोच को व्यक्त करने में भाषा पूर्णतः सफल है।

निष्कर्ष: 'आत्मकथ्य' की काव्यभाषा परिष्कृत, प्रतीकात्मक, संगीतमय और भावपूर्ण है जो छायावादी काव्य की विशेषताओं से युक्त है।
7कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था, उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है?Show solution
दिया गया है: कवि जयशंकर प्रसाद ने 'आत्मकथ्य' में अपने जीवन के सुख-स्वप्न का वर्णन किया है।

उत्तर:
कवि ने अपने सुख के स्वप्न को कविता में निम्नलिखित रूपों में अभिव्यक्त किया है—

1. प्रेम का स्वप्न:
कवि ने एक सुंदर प्रेम-संबंध का स्वप्न देखा था। उसकी प्रिया अत्यंत सुंदर थी — *'जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में'* — यह पंक्ति उस प्रेम-स्वप्न की अभिव्यक्ति है।

2. सुख की क्षणभंगुरता:
कवि का सुख-स्वप्न कभी पूरा नहीं हुआ — *'मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया'* — यह पंक्ति स्वप्न की अपूर्णता को दर्शाती है।

3. मधुर रातों की स्मृति:
*'उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की'* — इसमें प्रेम के सुखद क्षणों को चाँदनी रातों के रूप में व्यक्त किया गया है।

4. प्रवंचना (छल) का अनुभव:
सुख का स्वप्न छलावा निकला — *'आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया'* — सुख निकट आकर भी हाथ न आया।

5. स्मृति के रूप में शेष:
अंततः वह सुख-स्वप्न केवल स्मृति बनकर रह गया जिसे कवि 'पाथेय' (जीवन-संबल) बनाकर आगे बढ़ता है।

निष्कर्ष: कवि का सुख-स्वप्न प्रेम, सौंदर्य और मधुर क्षणों के रूप में अभिव्यक्त हुआ है, जो अंततः अधूरा रहकर पीड़ा में बदल गया।
8इस कविता के माध्यम से प्रसाद जी के व्यक्तित्व की जो झलक मिलती है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
दिया गया है: 'आत्मकथ्य' कविता जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित है।

प्रसाद जी के व्यक्तित्व की झलक:

'आत्मकथ्य' कविता के माध्यम से प्रसाद जी के व्यक्तित्व के निम्नलिखित पहलू उभरकर सामने आते हैं—

1. विनम्रता और आत्म-संकोच:
प्रसाद जी अत्यंत विनम्र स्वभाव के थे। वे अपनी आत्मकथा लिखने से इसलिए बचते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका जीवन दूसरों के लिए प्रेरणादायक नहीं है।

2. संवेदनशीलता:
कवि अत्यंत भावुक और संवेदनशील हैं। प्रेम में मिली पीड़ा और जीवन की विफलताएँ उन्हें गहराई से प्रभावित करती हैं।

3. आत्मसम्मान:
प्रसाद जी अपनी निजी पीड़ाओं को सार्वजनिक नहीं करना चाहते। यह उनके आत्मसम्मान और गरिमा का परिचायक है।

4. जीवन के प्रति यथार्थवादी दृष्टि:
वे जीवन की कठिनाइयों और असफलताओं को स्वीकार करते हैं और उनसे भागते नहीं, बल्कि स्मृतियों को 'पाथेय' बनाकर आगे बढ़ते हैं।

5. प्रेम और सौंदर्य के प्रति आसक्ति:
प्रसाद जी का हृदय प्रेम और सौंदर्य के प्रति अत्यंत संवेदनशील था। प्रिया की स्मृतियाँ उनके जीवन का आधार हैं।

निष्कर्ष: प्रसाद जी एक विनम्र, संवेदनशील, आत्मसम्मानी और जीवन की पीड़ाओं को गरिमापूर्वक सहने वाले महान कवि थे।
9आप किन व्यक्तियों की आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे और क्यों?Show solution
उत्तर (विद्यार्थी के लिए नमूना उत्तर):

मैं निम्नलिखित व्यक्तियों की आत्मकथा पढ़ना चाहूँगा/चाहूँगी—

1. महात्मा गांधी — 'सत्य के प्रयोग':
गांधी जी की आत्मकथा पढ़ना चाहूँगा क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में सत्य और अहिंसा के प्रयोग किए। उनकी ईमानदारी और साहस अद्वितीय है। उनकी आत्मकथा से जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है।

2. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम — 'अग्नि की उड़ान':
एक साधारण परिवार से निकलकर देश के राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक बनने की उनकी यात्रा अत्यंत प्रेरणादायक है। उनकी आत्मकथा युवाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देती है।

3. डॉ. भीमराव अंबेडकर:
सामाजिक भेदभाव और कठिनाइयों से लड़कर देश के संविधान निर्माता बनने की उनकी संघर्ष-गाथा अत्यंत प्रेरणादायक है।

कारण:
इन महान व्यक्तियों की आत्मकथाएँ हमें जीवन में संघर्ष करने, सत्य पर चलने और समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा देती हैं। इनके अनुभवों से हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
10कोई भी अपनी आत्मकथा लिख सकता है। उसके लिए विशिष्ट या बड़ा होना जरूरी नहीं। हरियाणा राज्य के गुड़गाँव में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली बेबी हालदार की आत्मकथा 'आलो आंधारि' बहुतों के द्वारा सराही गई। आत्मकथात्मक शैली में अपने बारे में कुछ लिखिए।Show solution
उत्तर (विद्यार्थी के लिए नमूना उत्तर — आत्मकथात्मक शैली में):

मेरा नाम [अपना नाम लिखें] है। मैं एक साधारण परिवार में पला/पली हूँ। मेरे पिता एक छोटे व्यापारी हैं और माँ गृहिणी हैं। हमारा परिवार छोटा है, परंतु प्रेम और संस्कारों से भरपूर है।

बचपन से ही मुझे पढ़ने का शौक रहा है। जब भी कोई कठिनाई आई, मेरे माता-पिता ने मुझे हिम्मत दी। मुझे याद है जब मैं पहली बार विद्यालय गया/गई था/थी — मन में डर था, परंतु शिक्षकों के स्नेह ने उस डर को दूर कर दिया।

मेरे जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए। परीक्षाओं में असफलता का दर्द भी झेला, परंतु हार नहीं मानी। मेरे मित्रों ने हमेशा मेरा साथ दिया। मुझे विश्वास है कि ईमानदारी और परिश्रम से मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त करूँगा/करूँगी।

मेरा सपना है कि मैं अपने माता-पिता का नाम रोशन करूँ और समाज के लिए कुछ उपयोगी कार्य करूँ। यही मेरी आत्मकथा का सार है — एक साधारण बालक/बालिका की असाधारण जिजीविषा की कहानी।

*(नोट: विद्यार्थी अपने वास्तविक अनुभवों के आधार पर इसे और विस्तृत कर सकते हैं।)*
पाठेतर-1किसी भी चर्चित व्यक्ति का अपनी निजता को सार्वजनिक करना या दूसरों का उनसे ऐसी अपेक्षा करना सही है — इस विषय के पक्ष-विपक्ष में कक्षा में चर्चा कीजिए।Show solution
पक्ष में तर्क (निजता सार्वजनिक करना उचित है):

1. चर्चित व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा-स्रोत होते हैं। उनके संघर्ष और अनुभव दूसरों को प्रेरित करते हैं।
2. सार्वजनिक जीवन में आने के बाद वे समाज के प्रति उत्तरदायी होते हैं।
3. उनकी सफलता की कहानी युवाओं को दिशा देती है।

विपक्ष में तर्क (निजता सार्वजनिक करना उचित नहीं):

1. प्रत्येक व्यक्ति को अपनी निजता का अधिकार है, चाहे वह कितना भी प्रसिद्ध हो।
2. निजी जीवन को सार्वजनिक करने से परिवार के अन्य सदस्यों को कठिनाई हो सकती है।
3. निजी पीड़ाओं और कमज़ोरियों को उजागर करना व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुँचा सकता है।
4. 'आत्मकथ्य' में प्रसाद जी ने भी यही भाव व्यक्त किया है — निजी जीवन को सार्वजनिक करना उचित नहीं।

निष्कर्ष: चर्चित व्यक्ति अपनी इच्छा से जितना साझा करना चाहें, उतना ही उचित है। दूसरों को उनसे निजता उजागर करने की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
पाठेतर-2बिना ईमानदारी और साहस के आत्मकथा नहीं लिखी जा सकती। गांधी जी की आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' पढ़कर पता लगाइए कि उसकी क्या-क्या विशेषताएँ हैं?Show solution
गांधी जी की आत्मकथा 'सत्य के प्रयोग' की विशेषताएँ:

1. असाधारण ईमानदारी:
गांधी जी ने अपनी कमज़ोरियों, गलतियों और पापों को भी बेझिझक स्वीकार किया है। उन्होंने बचपन में चोरी करने, माँस खाने और धूम्रपान जैसी बातें भी निर्भीकता से लिखी हैं।

2. सत्य की खोज:
पूरी आत्मकथा सत्य की खोज की यात्रा है। गांधी जी ने अपने प्रत्येक अनुभव को 'सत्य के प्रयोग' के रूप में देखा।

3. सरल और स्पष्ट भाषा:
आत्मकथा की भाषा अत्यंत सरल, स्पष्ट और प्रवाहमयी है जो पाठक को सहज ही आकर्षित करती है।

4. आत्म-विश्लेषण:
गांधी जी ने अपने प्रत्येक कार्य का गहन आत्म-विश्लेषण किया है और उससे सीख ली है।

5. सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ:
व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ देश की स्वतंत्रता के संघर्ष का भी सजीव चित्रण है।

6. नैतिक और आध्यात्मिक दृष्टि:
आत्मकथा में नैतिकता, अहिंसा और ईश्वर-भक्ति का समावेश है।

निष्कर्ष: 'सत्य के प्रयोग' एक ऐसी आत्मकथा है जो ईमानदारी, साहस और आत्म-विश्लेषण का अद्भुत उदाहरण है।

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Frequently Asked Questions

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Sources & Official References

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