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Chapter 1 of 10
NCERT Solutions

स्वदेश

CBSE · Class 8 · Hindi

NCERT Solutions for स्वदेश — CBSE Class 8 Hindi.

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30 Questions Solved · 12 Sections

मेरी समझ से — (क) बहुविकल्पीय प्रश्न

1"वह हृदय नहीं है पत्थर है" इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है—
- सामाजिकता से
- संवेदनहीनता से
- कठोरता से
- नैतिकता से
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सही उत्तर: संवेदनहीनता से तथा कठोरता से (दोनों विकल्पों पर ★)

स्पष्टीकरण: कवि ने हृदय की तुलना पत्थर से की है। पत्थर में न कोई भावना होती है, न कोई कोमलता। जिस व्यक्ति के मन में देश के प्रति प्रेम नहीं है, वह संवेदनहीन भी है और कठोर भी। इसलिए ये दोनों विकल्प सही हैं।
2निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
- देश की प्रगति
- देश के प्रति प्रेम
- देश की सुरक्षा
- देश की स्वतंत्रता
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सही उत्तर: देश के प्रति प्रेम (★)

स्पष्टीकरण: 'स्वदेश' कविता का केंद्रीय भाव देश-प्रेम है। कवि गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' ने पूरी कविता में यही संदेश दिया है कि जिस हृदय में स्वदेश का प्यार नहीं, वह हृदय पत्थर के समान है। कविता नागरिकों को देश से प्रेम करने के लिए प्रेरित करती है।
3"हम हैं जिसके राजा-रानी" — इस पंक्ति में 'हम' शब्द किसके लिए आया है?
- देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
- देश की शासन व्यवस्था के लिए
- देश के समस्त नागरिकों के लिए
- देश के सभी प्राणियों के लिए
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सही उत्तर: देश के समस्त नागरिकों के लिए (★)

स्पष्टीकरण: कवि ने 'हम' शब्द का प्रयोग देश के सभी नागरिकों के लिए किया है। कवि कहते हैं कि यह वही देश है जिसकी मिट्टी में हम पले-बढ़े हैं, जहाँ हमारे माता-पिता और बंधु हैं — इस देश के हम सब नागरिक ही राजा-रानी अर्थात् स्वामी हैं।
4कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
- जिसमें साहस की कमी है
- जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
- जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
- जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
Show solution
सही उत्तर: जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है (★)

स्पष्टीकरण: कवि ने स्पष्ट शब्दों में कहा है — "वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।" अतः जिस हृदय में देश-प्रेम की भावना नहीं है, वही हृदय पत्थर के समान है।

मिलकर करें मिलान

1स्तंभ 1 और स्तंभ 2 का सही मिलान कीजिए:
1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।
3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।
4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
Show solution
सही मिलान:

| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। | 3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। |
| 2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। | 4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है। |
| 3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। | 1. जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। |
| 4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। | 2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। |

पंक्तियों पर चर्चा

"निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।
Show solution
अर्थ: कवि कहते हैं कि यह बात बिल्कुल निश्चित और संदेह से परे है कि एक न एक दिन इस जीवन (जान) को जाना ही है — अर्थात् मृत्यु अटल है। जिस प्रकार काल रूपी दीपक सदा जलता रहता है, उसी प्रकार परवाने (पतंगे) का उस दीपक की लौ में जल जाना भी निश्चित है।

भाव: कवि देशवासियों को प्रेरित करते हैं कि मृत्यु से भयभीत न हों। जब मृत्यु अवश्यंभावी है, तो देश के लिए बलिदान देने में संकोच कैसा? जैसे पतंगा दीपक की लौ पर न्योछावर हो जाता है, वैसे ही देशभक्त को देश पर अपना सर्वस्व अर्पित कर देना चाहिए।
"सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।
Show solution
अर्थ: कवि कहते हैं कि हमारे पास सब कुछ है — तोप भी है, तलवार भी है अर्थात् हमारे पास शक्ति, साहस और संसाधन सभी उपलब्ध हैं। हमें किसी भी चीज़ की कमी नहीं है। फिर भी जो व्यक्ति अपने देश से प्रेम नहीं करता, उसका हृदय हृदय नहीं बल्कि पत्थर के समान है।

भाव: कवि का संदेश है कि देश की रक्षा और उन्नति के लिए सभी साधन हमारे पास हैं, बस आवश्यकता है तो देश-प्रेम की भावना की। जिसमें यह भावना नहीं, वह संवेदनहीन और निर्जीव है।
"जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।
Show solution
अर्थ: कवि कहते हैं कि जो हृदय भावनाओं से भरा हुआ नहीं है, जिसमें संवेदना और प्रेम की धारा नहीं बहती — वह हृदय नहीं, पत्थर है। और ऐसा हृदय वही है जिसमें अपने देश के प्रति प्रेम की भावना नहीं है।

भाव: कवि का मानना है कि सच्चा हृदय वही है जो भावनाओं से परिपूर्ण हो, जिसमें देश-प्रेम का रस बहता हो। देश-प्रेम से रहित व्यक्ति भावशून्य और निर्जीव पत्थर के समान है।

सोच-विचार के लिए

"हम हैं जिसके राजा-रानी" पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?Show solution
उत्तर: इस पंक्ति में 'राजा-रानी' देश के समस्त नागरिकों को कहा गया है।

कारण: कवि का भाव है कि यह देश हमारा अपना है — इसकी मिट्टी में हम पले-बढ़े हैं, इसने हमें दाना-पानी दिया है, इसमें हमारे माता-पिता और बंधु-बांधव हैं। इसलिए इस देश पर हम सबका समान अधिकार है। हम सब इस देश के स्वामी हैं — ठीक उसी प्रकार जैसे राजा-रानी अपने राज्य के स्वामी होते हैं। कवि ने 'राजा-रानी' शब्द का प्रयोग यह बताने के लिए किया है कि प्रत्येक नागरिक इस देश का मालिक है और उसे अपने देश पर गर्व होना चाहिए।
'संसार-संग' चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति 'संसार-संग' नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?Show solution
'संसार-संग' चलने का अर्थ: 'संसार-संग' चलने का अर्थ है — समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना, सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदारी करना, दूसरों के सुख-दुख में शामिल होना और समाज की प्रगति में योगदान देना।

संसार का न होना: जो व्यक्ति समाज से कटकर, अकेले और स्वार्थी होकर जीता है, वह न तो समाज को कुछ दे पाता है और न ही समाज उसे अपनाता है। ऐसे व्यक्ति का न कोई मित्र होता है, न कोई सहयोगी। वह न देश की उन्नति में भाग ले पाता है और न ही समाज उसे याद रखता है। इसीलिए जो 'संसार-संग' नहीं चलता, संसार उसका नहीं हो पाता।
"उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।" पंक्ति से आप क्या समझते हैं?Show solution
अर्थ एवं भाव: इस पंक्ति में कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति देश की दुर्दशा, दुख और पीड़ा को देखकर भी द्रवित नहीं होता — जिसका हृदय पिघलता नहीं — वह व्यक्ति इस धरती पर बोझ के समान है।

'पसीजना' का अर्थ है — पिघलना, द्रवित होना। जो व्यक्ति अपने देश की तकलीफ देखकर भी संवेदनशील नहीं होता, जो देश के लिए कुछ करने की इच्छा नहीं रखता, वह समाज और देश के लिए किसी काम का नहीं है। ऐसा व्यक्ति पृथ्वी पर केवल भार (बोझ) है।
कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप 'देश-प्रेम' से क्या समझते हैं?Show solution
देश-प्रेम का अर्थ: देश-प्रेम का अर्थ है अपने देश के प्रति सच्ची निष्ठा, समर्पण और लगाव की भावना रखना।

देश-प्रेम केवल सीमा पर लड़ने तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित बातें आती हैं:
- देश की संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करना।
- देश के नागरिकों के सुख-दुख में भागीदार होना।
- देश की प्रगति में अपना योगदान देना।
- देश के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना।
- ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से अपना काम करना।
- देश की एकता और अखंडता बनाए रखना।

सच्चा देश-प्रेमी वही है जो अपने देश को अपनी माँ के समान मानता है और उसकी सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।Show solution
'स्वदेश' कविता की प्रमुख विशेषताएँ:

1. आह्वान गीत: यह कविता देशवासियों को देश-प्रेम के लिए जागृत और प्रेरित करती है।

2. तुकबंदी: कविता में 'दाना-पानी/राजा-रानी', 'पार नहीं/सार नहीं' जैसी सुंदर तुकबंदी है जो इसे लयात्मक बनाती है।

3. अनुप्रास अलंकार: 'निश्चित है निस्संशय निश्चित' जैसी पंक्तियों में 'न' ध्वनि की पुनरावृत्ति से संगीतात्मकता आई है।

4. उपमा अलंकार: हृदय की तुलना पत्थर से की गई है — 'वह हृदय नहीं है पत्थर है।'

5. प्रश्नालंकार: 'क्या तोप नहीं तलवार नहीं' जैसे प्रश्नों से भावों की तीव्रता बढ़ी है।

6. सरल एवं प्रभावशाली भाषा: खड़ी बोली में लिखी यह कविता सरल, स्पष्ट और हृदयस्पर्शी है।

7. राष्ट्रीय चेतना: कविता में बलिदान, साहस, जोश और देश-प्रेम की भावना कूट-कूटकर भरी है।

8. टेक (Refrain): 'वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं' पंक्ति बार-बार आकर कविता के मूल भाव को दृढ़ करती है।

अनुमान और कल्पना से

"जिसने कि खजाने खोले हैं" — अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?Show solution
उत्तर: इस पंक्ति में मुख्यतः निम्नलिखित खजानों की बात की गई होगी:

1. ज्ञान का खजाना: भारत ने वेद, उपनिषद, गीता, रामायण जैसे ज्ञान-ग्रंथों के माध्यम से विश्व को ज्ञान का अमूल्य खजाना दिया है।

2. प्राकृतिक संसाधनों का खजाना: भारत की भूमि खनिज, वन, नदियाँ, उपजाऊ मिट्टी आदि प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर है।

3. सांस्कृतिक खजाना: भारत की समृद्ध संस्कृति, कला, संगीत, नृत्य और साहित्य एक अनमोल खजाना है।

4. आध्यात्मिक खजाना: भारत ने योग, ध्यान और अध्यात्म के माध्यम से विश्व को आत्मिक शांति का मार्ग दिखाया है।

इन सभी खजानों के कारण ही 'जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी' कहा गया है।
"जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े" — पंक्ति में 'उगे-बढ़े' किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?Show solution
उत्तर: 'उगे-बढ़े' शब्द देश के नागरिकों (हम सबके) लिए कहा गया है।

कारण: जिस प्रकार एक बीज मिट्टी में बोया जाता है और उसी मिट्टी से पोषण पाकर अंकुरित होकर वृक्ष बनता है, उसी प्रकार हम सब भी इस देश की मिट्टी में जन्मे हैं और यहीं पले-बढ़े हैं। इस देश की हवा, पानी, अन्न और संस्कारों ने हमें बड़ा किया है। इसीलिए 'उगे-बढ़े' शब्द का प्रयोग किया गया है — यह हमारे और इस देश के बीच के गहरे, जैविक संबंध को दर्शाता है।
"वह हृदय नहीं है पत्थर है" — पंक्ति में 'हृदय' के लिए 'पत्थर' शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?Show solution
उत्तर: कवि ने 'हृदय' के लिए 'पत्थर' शब्द का प्रयोग निम्नलिखित कारणों से किया होगा:

1. पत्थर में भावना नहीं होती: पत्थर निर्जीव होता है, उसमें कोई संवेदना नहीं होती। जिस व्यक्ति में देश-प्रेम नहीं है, वह भी उतना ही भावशून्य है।

2. पत्थर कठोर होता है: पत्थर पर किसी भी बात का असर नहीं होता। देश की पीड़ा देखकर भी जो नहीं पिघलता, वह पत्थर जैसा कठोर है।

3. पत्थर निष्क्रिय होता है: पत्थर स्वयं कुछ नहीं करता। जो व्यक्ति देश के लिए कुछ नहीं करता, वह भी पत्थर के समान निष्क्रिय है।

4. विरोधाभास से प्रभाव: 'हृदय' और 'पत्थर' दो विपरीत चीजें हैं — एक जीवंत, दूसरा निर्जीव। इस विरोधाभास से कविता में तीव्र प्रभाव उत्पन्न होता है।
कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे?Show solution
पत्थर की कथा (कल्पना):

पत्थर: जब मैं नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी — मेरे कोने घिसती थी, मुझे चिकना और गोल बनाती थी। मुझे भी महसूस होता था कि मैं बदल रहा हूँ। फिर एक दिन किसी ने मुझे उठाकर सड़क पर फेंक दिया। अब मैं यहाँ पड़ा हूँ — न कोई मुझे देखता है, न कोई मेरी परवाह करता है। लोग मुझ पर ठोकर खाते हैं और आगे बढ़ जाते हैं।

मैं: पत्थर भाई, तुम्हारी बात सुनकर मन दुखी हो गया। लेकिन तुम्हें पता है — तुम्हारे जैसे पत्थरों से ही मंदिर बनते हैं, मूर्तियाँ बनती हैं, घर बनते हैं। तुम्हारे बिना यह दुनिया अधूरी है। लेकिन जो इंसान पत्थर-दिल हो जाता है — जिसमें देश-प्रेम, संवेदना और भावना नहीं होती — वह तुमसे भी बुरा है। क्योंकि तुम तो निर्जीव हो, पर वह इंसान होकर भी निर्जीव जैसा है।
देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?Show solution
उत्तर: देश के निम्नलिखित संसाधनों और वस्तुओं को संरक्षण की आवश्यकता है:

1. वन और वन्यजीव: वनों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण असंतुलित हो रहा है। वन्यजीव विलुप्त हो रहे हैं। इनका संरक्षण आवश्यक है।

2. जल संसाधन: नदियाँ, तालाब और भूजल प्रदूषित हो रहे हैं। जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

3. ऐतिहासिक धरोहर: किले, मंदिर, स्मारक आदि हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। इनका संरक्षण जरूरी है।

4. कृषि भूमि: उपजाऊ भूमि का क्षरण हो रहा है। इसे बचाना आवश्यक है।

5. भाषा और संस्कृति: हमारी लोक भाषाएँ, लोक कलाएँ और परंपराएँ विलुप्त हो रही हैं। इनका संरक्षण जरूरी है।

6. खनिज संपदा: कोयला, लोहा, तेल आदि सीमित हैं। इनका विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है।

इन सभी का संरक्षण ही सच्चा देश-प्रेम है।

कविता की रचना

शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?Show solution
उत्तर: शब्दों के तुक मिलाने से कविता में निम्नलिखित विशेष प्रभाव पड़े हैं:

1. लयात्मकता: तुकबंदी से कविता में एक विशेष लय और ताल उत्पन्न होती है जो इसे संगीतमय बनाती है।

2. स्मरणीयता: तुकबंदी वाली पंक्तियाँ आसानी से याद हो जाती हैं। जैसे 'दाना-पानी/राजा-रानी' सुनते ही मन में बैठ जाता है।

3. श्रवण-सुख: तुकबंदी से कविता सुनने में मधुर और आनंददायक लगती है।

4. भावों की तीव्रता: तुकबंदी से एक पंक्ति दूसरी पंक्ति को बल देती है और भाव और अधिक प्रभावशाली हो जाते हैं।

5. गेयता: तुकबंदी के कारण यह कविता गाई जा सकती है, जिससे यह आह्वान गीत के रूप में और अधिक प्रभावी बन जाती है।
कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?Show solution
उत्तर: कवि ने कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए निम्नलिखित काव्य-युक्तियों का प्रयोग किया है:

1. अनुप्रास अलंकार: 'निश्चित है निस्संशय निश्चित' में 'न' ध्वनि की पुनरावृत्ति से संगीतात्मकता आई है।

2. उपमा अलंकार: 'वह हृदय नहीं है पत्थर है' में हृदय की तुलना पत्थर से की गई है।

3. प्रश्नालंकार: 'क्या तोप नहीं तलवार नहीं' जैसे प्रश्नों से भावों में तीव्रता आई है।

4. टेक (Refrain): 'वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं' पंक्ति की पुनरावृत्ति से मूल भाव दृढ़ होता है।

5. योजक चिह्न: 'दाना-पानी', 'राजा-रानी', 'काल-दीप' जैसे युग्म शब्दों से भाषा में सौंदर्य आया है।

6. 'है' का पूर्व प्रयोग: 'है जान एक दिन जाने को' जैसी पंक्तियों में 'है' को पहले रखने से लयात्मकता बढ़ी है।

7. सरल एवं प्रवाहमयी भाषा: खड़ी बोली में सरल शब्दों का प्रयोग कविता को सर्वसुलभ बनाता है।

आपकी कविता

1देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए — 'वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।'Show solution
कविता का विस्तार (नमूना):

वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

जो देख न सका दुख देश का,
जिसमें कोई उपकार नहीं।
जो भूल गया माटी अपनी,
उसका कोई आधार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

जो झंडे को सम्मान न दे,
जिसमें देश का अभिमान नहीं।
जो बोले झूठ, करे भ्रष्टाचार,
उसमें सच्चाई की शान नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।

*(नोट: यह एक नमूना कविता है। विद्यार्थी अपनी कल्पना और भावनाओं के अनुसार इसे और आगे बढ़ा सकते हैं।)*

भाषा की बात

'स्वदेश' से जुड़े शब्द लिखिए।Show solution
'स्वदेश' से जुड़े शब्द:

स्वदेश से जुड़े प्रमुख शब्द निम्नलिखित हैं:

- स्वदेशी
- देशभक्ति
- देशप्रेम
- राष्ट्रभक्त
- राष्ट्रीयता
- स्वतंत्रता
- मातृभूमि
- जन्मभूमि
- देशसेवा
- राष्ट्रध्वज
- राष्ट्रगान
- देशवासी
- स्वराज
- देशरक्षा
- राष्ट्रप्रेम

*(विद्यार्थी अपने समूह में चर्चा करके इस सूची को और बढ़ा सकते हैं।)*
कविता में आई पंक्तियों में योजक चिह्न (-) के स्थान पर 'का, की, के, में' में से उचित शब्द जोड़कर लिखिए:
1. जो चल न सका संसार-संग
2. बहती जिसमें रस-धार नहीं
3. पाया जिसमें दाना-पानी
4. हैं माता-पिता बंधु जिसमें
5. हम हैं जिसके राजा-रानी
6. जिससे न जाति-उड़ार हुआ
Show solution
उत्तर:

1. जो चल न सका संसार के संग (के)
2. बहती जिसमें रस की धार नहीं (की)
3. पाया जिसमें दाना और पानी (और / में)
4. हैं माता-पिता और बंधु जिसमें (और)
5. हम हैं जिसके राजा और रानी (और)
6. जिससे न जाति का उद्धार हुआ (का)

स्पष्टीकरण: योजक चिह्न (-) दो शब्दों के बीच संबंध दर्शाता है। जब इसे हटाकर शब्दों को जोड़ा जाता है तो 'का, की, के, में, और' में से उचित शब्द का प्रयोग किया जाता है।
कविता में से ऐसी पंक्तियाँ चुनिए जिनमें 'है' शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए। साथ ही नीचे दी गई पंक्तियों में 'है, हैं' शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए:
"जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।"
Show solution
कविता से 'है' पहले वाली पंक्तियाँ और उनके परिवर्तित रूप:

| मूल पंक्ति | परिवर्तित रूप (गद्य जैसी) |
|---|---|
| है जान एक दिन जाने को | जान एक दिन जाने को है। |
| है काल-दीप जलता हरदम | काल-दीप हरदम जलता है। |
| है जोश जगाना जीवन में | जीवन में जोश जगाना है। |

दी गई पंक्तियों में 'है/हैं' पहले करके:

मूल पंक्तियाँ:
"जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।"

परिवर्तित रूप:
"जिस पर हैं ज्ञानी भी मरते,
है जिस पर दुनिया दीवानी।"

परिवर्तन का प्रभाव: 'है/हैं' को पंक्ति के आरंभ में रखने से कविता में लय और संगीतात्मकता आती है। पंक्ति के अंत में 'है' रखने से वाक्य गद्य जैसा लगने लगता है और काव्य-सौंदर्य कम हो जाता है।
कविता से चुनकर दिए गए शब्दों के समानार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए।Show solution
समानार्थी शब्द:

(नोट: तालिका में दिए गए शब्द OCR में स्पष्ट नहीं हैं, अतः कविता के आधार पर सामान्य समानार्थी शब्द दिए जा रहे हैं।)

| शब्द | समानार्थी शब्द |
|---|---|
| स्वदेश | मातृभूमि, जन्मभूमि, देश |
| हृदय | मन, दिल, अंतःकरण |
| जीवन | जिंदगी, जान, प्राण |
| संसार | दुनिया, जगत, विश्व |
| साहस | हिम्मत, शौर्य, वीरता |
| ज्ञान | विद्या, बुद्धि, जानकारी |
| काल | समय, मृत्यु, वक्त |
| जोश | उत्साह, उमंग, जज्बा |

कविता का शीर्षक

1यदि आपको इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?Show solution
उत्तर: मैं इस कविता का नया शीर्षक चुनूँगा/चुनूँगी — "वह हृदय नहीं है पत्थर है"

कारण:

1. यह पंक्ति कविता का केंद्रीय भाव व्यक्त करती है। पूरी कविता इसी विचार के इर्द-गिर्द बुनी गई है।

2. यह पंक्ति पाठक के मन में तुरंत जिज्ञासा जगाती है — 'कौन-सा हृदय पत्थर है?' — और पाठक कविता पढ़ने के लिए प्रेरित होता है।

3. इस पंक्ति में 'हृदय' और 'पत्थर' का विरोधाभास बहुत प्रभावशाली है जो शीर्षक को यादगार बनाता है।

4. यह पंक्ति कविता की टेक (Refrain) है जो बार-बार आती है, इसलिए यह पूरी कविता का प्रतिनिधित्व करती है।

*(नोट: विद्यार्थी अपनी पसंद की कोई भी पंक्ति चुन सकते हैं, बशर्ते उसके पक्ष में उचित तर्क दिए जाएँ।)*

पाठ से आगे — आपकी बात

नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए जिन्हें आप 'स्वदेश प्रेम' की श्रेणी में रखना चाहेंगे।Show solution
उत्तर: (नोट: चित्र OCR में दिखाई नहीं दे रहे हैं, अतः सामान्य मार्गदर्शन दिया जा रहा है।)

निम्नलिखित प्रकार के चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाया जाना चाहिए जो 'स्वदेश प्रेम' की श्रेणी में आते हैं:

- राष्ट्रीय ध्वज फहराना
- सैनिकों का देश की रक्षा करना
- पेड़-पौधे लगाना (पर्यावरण संरक्षण)
- स्वच्छता अभियान में भाग लेना
- किसान का खेत में काम करना
- विद्यार्थी का पढ़ाई करना
- नदियों की सफाई करना
- ऐतिहासिक धरोहरों की देखभाल करना
अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।Show solution
तर्क: देश-प्रेम केवल युद्ध के मैदान में लड़ने तक सीमित नहीं है। देश-प्रेम के अनेक रूप हैं:

1. राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान — तिरंगे का सम्मान करना देश के प्रति हमारी श्रद्धा का प्रतीक है।

2. पर्यावरण संरक्षण — पेड़ लगाना और नदियाँ साफ रखना देश की प्राकृतिक संपदा की रक्षा करना है।

3. स्वच्छता — अपने आसपास सफाई रखना देश को सुंदर और स्वस्थ बनाना है।

4. कृषि — किसान का परिश्रम देश को अन्न देता है — यह भी देश-सेवा है।

5. शिक्षा — विद्यार्थी का पढ़ना देश के भविष्य को उज्ज्वल बनाना है।

इन सभी कार्यों से देश की प्रगति होती है, इसलिए ये सभी देश-प्रेम के रूप हैं।

हमारे अस्त्र-शास्त्र

1निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शास्त्र क्या होंगे? — विद्यार्थी, अध्यापक, कृषक, चिकित्सक, वैज्ञानिक, श्रमिक, पत्रकारShow solution
उत्तर:

| स्वदेश प्रेमी | अस्त्र-शास्त्र |
|---|---|
| विद्यार्थी | पुस्तक, कलम, ज्ञान, परिश्रम और लगन — ये उसके अस्त्र हैं। शिक्षा ही उसका सबसे बड़ा हथियार है जिससे वह देश का भविष्य उज्ज्वल बनाता है। |
| अध्यापक | ज्ञान, विवेक, धैर्य और प्रेरणा — ये उसके अस्त्र हैं। वह अपनी शिक्षा से देश के नागरिकों को सुयोग्य बनाता है। |
| कृषक | हल, बीज, परिश्रम और धरती — ये उसके अस्त्र हैं। वह अपने पसीने से देश को अन्न देता है। |
| चिकित्सक | दवाइयाँ, चिकित्सा-उपकरण, सेवा-भाव और ज्ञान — ये उसके अस्त्र हैं। वह देशवासियों को स्वस्थ रखकर देश की सेवा करता है। |
| वैज्ञानिक | अनुसंधान, प्रयोगशाला, जिज्ञासा और बुद्धि — ये उसके अस्त्र हैं। वह नई खोजों से देश को आत्मनिर्भर बनाता है। |
| श्रमिक | हाथ, औजार, परिश्रम और लगन — ये उसके अस्त्र हैं। वह अपने श्रम से देश का निर्माण करता है। |
| पत्रकार | कलम, सत्य, निर्भीकता और जागरूकता — ये उसके अस्त्र हैं। वह सच्ची खबरें देकर देश के नागरिकों को जागरूक करता है। |

झरोखे से — सारी समझ

1'स्वदेश' कविता और 'खादी गीत' — दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? चर्चा कीजिए।Show solution
उत्तर:

'स्वदेश' कविता में देश-प्रेम की अभिव्यक्ति:
गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' ने 'स्वदेश' कविता में देश-प्रेम को एक आह्वान गीत के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने देशवासियों को साहस, जोश और बलिदान के लिए प्रेरित किया है। कवि कहते हैं कि जिसमें देश-प्रेम नहीं, वह पत्थर-दिल है। देश की मिट्टी, माता-पिता, बंधु-बांधव — सब इसी देश में हैं, इसलिए इससे प्रेम करना हमारा कर्तव्य है।

'खादी गीत' में देश-प्रेम की अभिव्यक्ति:
सोहनलाल द्विवेदी ने 'खादी गीत' में देश-प्रेम को खादी के धागों के माध्यम से व्यक्त किया है। खादी स्वदेशी आंदोलन का प्रतीक थी। कवि कहते हैं कि खादी के हर धागे में अपनेपन का अभिमान, माँ का मान और अन्यायी का अपमान भरा है। खादी पहनना ही देश-प्रेम का प्रतीक था।

समानता:
दोनों कविताएँ स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई हैं। दोनों में देशवासियों को जागृत करने का प्रयास है। दोनों में देश के प्रति समर्पण और गर्व की भावना है। अंतर यह है कि 'स्वदेश' में प्रत्यक्ष आह्वान है जबकि 'खादी गीत' में खादी के प्रतीक के माध्यम से देश-प्रेम व्यक्त हुआ है।

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