स्वदेश (कविता)-गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' — NCERT Solutions
CBSE · Class 8 · Hindi
NCERT Solutions for स्वदेश (कविता)-गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही', CBSE Class 8 Hindi: 30 textbook questions solved step by step.
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मेरी समझ से — (क) बहुविकल्पीय प्रश्न
1"वह हृदय नहीं है पत्थर है" इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है—
- सामाजिकता से
- संवेदनहीनता से
- कठोरता से
- नैतिकता सेShow solution
सही उत्तर: संवेदनहीनता से तथा कठोरता से (दोनों विकल्पों पर ★)
स्पष्टीकरण: कवि ने हृदय की तुलना पत्थर से की है। पत्थर में न कोई भावना होती है, न कोई कोमलता। जिस व्यक्ति के मन में देश के प्रति प्रेम नहीं है, वह संवेदनहीन भी है और कठोर भी। इसलिए ये दोनों विकल्प सही हैं।
2निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
- देश की प्रगति
- देश के प्रति प्रेम
- देश की सुरक्षा
- देश की स्वतंत्रताShow solution
सही उत्तर: देश के प्रति प्रेम (★)
स्पष्टीकरण: 'स्वदेश' कविता का केंद्रीय भाव देश-प्रेम है। कवि गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' ने पूरी कविता में यही संदेश दिया है कि जिस हृदय में स्वदेश का प्यार नहीं, वह हृदय पत्थर के समान है। कविता नागरिकों को देश से प्रेम करने के लिए प्रेरित करती है।
3"हम हैं जिसके राजा-रानी" — इस पंक्ति में 'हम' शब्द किसके लिए आया है?
- देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
- देश की शासन व्यवस्था के लिए
- देश के समस्त नागरिकों के लिए
- देश के सभी प्राणियों के लिएShow solution
सही उत्तर: देश के समस्त नागरिकों के लिए (★)
स्पष्टीकरण: कवि ने 'हम' शब्द का प्रयोग देश के सभी नागरिकों के लिए किया है। कवि कहते हैं कि यह वही देश है जिसकी मिट्टी में हम पले-बढ़े हैं, जहाँ हमारे माता-पिता और बंधु हैं — इस देश के हम सब नागरिक ही राजा-रानी अर्थात् स्वामी हैं।
4कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
- जिसमें साहस की कमी है
- जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
- जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
- जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं हैShow solution
सही उत्तर: जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है (★)
स्पष्टीकरण: कवि ने स्पष्ट शब्दों में कहा है — "वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।" अतः जिस हृदय में देश-प्रेम की भावना नहीं है, वही हृदय पत्थर के समान है।
मिलकर करें मिलान
1स्तंभ 1 और स्तंभ 2 का सही मिलान कीजिए:
1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।
3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।
4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।Show solution
सही मिलान:
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। | 3. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। |
| 2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। | 4. जो स्वयं के साथ ही दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है। |
| 3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। | 1. जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। |
| 4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। | 2. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। |
पंक्तियों पर चर्चा
क"निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।Show solution
अर्थ: कवि कहते हैं कि यह बात बिल्कुल निश्चित और संदेह से परे है कि एक न एक दिन इस जीवन (जान) को जाना ही है — अर्थात् मृत्यु अटल है। जिस प्रकार काल रूपी दीपक सदा जलता रहता है, उसी प्रकार परवाने (पतंगे) का उस दीपक की लौ में जल जाना भी निश्चित है।
भाव: कवि देशवासियों को प्रेरित करते हैं कि मृत्यु से भयभीत न हों। जब मृत्यु अवश्यंभावी है, तो देश के लिए बलिदान देने में संकोच कैसा? जैसे पतंगा दीपक की लौ पर न्योछावर हो जाता है, वैसे ही देशभक्त को देश पर अपना सर्वस्व अर्पित कर देना चाहिए।
ख"सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।Show solution
अर्थ: कवि कहते हैं कि हमारे पास सब कुछ है — तोप भी है, तलवार भी है अर्थात् हमारे पास शक्ति, साहस और संसाधन सभी उपलब्ध हैं। हमें किसी भी चीज़ की कमी नहीं है। फिर भी जो व्यक्ति अपने देश से प्रेम नहीं करता, उसका हृदय हृदय नहीं बल्कि पत्थर के समान है।
भाव: कवि का संदेश है कि देश की रक्षा और उन्नति के लिए सभी साधन हमारे पास हैं, बस आवश्यकता है तो देश-प्रेम की भावना की। जिसमें यह भावना नहीं, वह संवेदनहीन और निर्जीव है।
ग"जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।Show solution
अर्थ: कवि कहते हैं कि जो हृदय भावनाओं से भरा हुआ नहीं है, जिसमें संवेदना और प्रेम की धारा नहीं बहती — वह हृदय नहीं, पत्थर है। और ऐसा हृदय वही है जिसमें अपने देश के प्रति प्रेम की भावना नहीं है।
भाव: कवि का मानना है कि सच्चा हृदय वही है जो भावनाओं से परिपूर्ण हो, जिसमें देश-प्रेम का रस बहता हो। देश-प्रेम से रहित व्यक्ति भावशून्य और निर्जीव पत्थर के समान है।
सोच-विचार के लिए
क"हम हैं जिसके राजा-रानी" पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?Show solution
उत्तर: इस पंक्ति में 'राजा-रानी' देश के समस्त नागरिकों को कहा गया है।
कारण: कवि का भाव है कि यह देश हमारा अपना है — इसकी मिट्टी में हम पले-बढ़े हैं, इसने हमें दाना-पानी दिया है, इसमें हमारे माता-पिता और बंधु-बांधव हैं। इसलिए इस देश पर हम सबका समान अधिकार है। हम सब इस देश के स्वामी हैं — ठीक उसी प्रकार जैसे राजा-रानी अपने राज्य के स्वामी होते हैं। कवि ने 'राजा-रानी' शब्द का प्रयोग यह बताने के लिए किया है कि प्रत्येक नागरिक इस देश का मालिक है और उसे अपने देश पर गर्व होना चाहिए।
ख'संसार-संग' चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति 'संसार-संग' नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?Show solution
'संसार-संग' चलने का अर्थ: 'संसार-संग' चलने का अर्थ है — समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना, सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदारी करना, दूसरों के सुख-दुख में शामिल होना और समाज की प्रगति में योगदान देना।
संसार का न होना: जो व्यक्ति समाज से कटकर, अकेले और स्वार्थी होकर जीता है, वह न तो समाज को कुछ दे पाता है और न ही समाज उसे अपनाता है। ऐसे व्यक्ति का न कोई मित्र होता है, न कोई सहयोगी। वह न देश की उन्नति में भाग ले पाता है और न ही समाज उसे याद रखता है। इसीलिए जो 'संसार-संग' नहीं चलता, संसार उसका नहीं हो पाता।
ग"उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।" पंक्ति से आप क्या समझते हैं?Show solution
अर्थ एवं भाव: इस पंक्ति में कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति देश की दुर्दशा, दुख और पीड़ा को देखकर भी द्रवित नहीं होता — जिसका हृदय पिघलता नहीं — वह व्यक्ति इस धरती पर बोझ के समान है।
'पसीजना' का अर्थ है — पिघलना, द्रवित होना। जो व्यक्ति अपने देश की तकलीफ देखकर भी संवेदनशील नहीं होता, जो देश के लिए कुछ करने की इच्छा नहीं रखता, वह समाज और देश के लिए किसी काम का नहीं है। ऐसा व्यक्ति पृथ्वी पर केवल भार (बोझ) है।
घकविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप 'देश-प्रेम' से क्या समझते हैं?Show solution
देश-प्रेम का अर्थ: देश-प्रेम का अर्थ है अपने देश के प्रति सच्ची निष्ठा, समर्पण और लगाव की भावना रखना।
देश-प्रेम केवल सीमा पर लड़ने तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित बातें आती हैं:
- देश की संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करना।
- देश के नागरिकों के सुख-दुख में भागीदार होना।
- देश की प्रगति में अपना योगदान देना।
- देश के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना।
- ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से अपना काम करना।
- देश की एकता और अखंडता बनाए रखना।
सच्चा देश-प्रेमी वही है जो अपने देश को अपनी माँ के समान मानता है और उसकी सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
डयह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।Show solution
'स्वदेश' कविता की प्रमुख विशेषताएँ:
- आह्वान गीत: यह कविता देशवासियों को देश-प्रेम के लिए जागृत और प्रेरित करती है।
- तुकबंदी: कविता में 'दाना-पानी/राजा-रानी', 'पार नहीं/सार नहीं' जैसी सुंदर तुकबंदी है जो इसे लयात्मक बनाती है।
- अनुप्रास अलंकार: 'निश्चित है निस्संशय निश्चित' जैसी पंक्तियों में 'न' ध्वनि की पुनरावृत्ति से संगीतात्मकता आई है।
- उपमा अलंकार: हृदय की तुलना पत्थर से की गई है — 'वह हृदय नहीं है पत्थर है।'
- प्रश्नालंकार: 'क्या तोप नहीं तलवार नहीं' जैसे प्रश्नों से भावों की तीव्रता बढ़ी है।
- सरल एवं प्रभावशाली भाषा: खड़ी बोली में लिखी यह कविता सरल, स्पष्ट और हृदयस्पर्शी है।
- राष्ट्रीय चेतना: कविता में बलिदान, साहस, जोश और देश-प्रेम की भावना कूट-कूटकर भरी है।
- टेक (Refrain): 'वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं' पंक्ति बार-बार आकर कविता के मूल भाव को दृढ़ करती है।
अनुमान और कल्पना से
क"जिसने कि खजाने खोले हैं" — अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?Show solution
उत्तर: इस पंक्ति में मुख्यतः निम्नलिखित खजानों की बात की गई होगी:
- ज्ञान का खजाना: भारत ने वेद, उपनिषद, गीता, रामायण जैसे ज्ञान-ग्रंथों के माध्यम से विश्व को ज्ञान का अमूल्य खजाना दिया है।
- प्राकृतिक संसाधनों का खजाना: भारत की भूमि खनिज, वन, नदियाँ, उपजाऊ मिट्टी आदि प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर है।
- सांस्कृतिक खजाना: भारत की समृद्ध संस्कृति, कला, संगीत, नृत्य और साहित्य एक अनमोल खजाना है।
- आध्यात्मिक खजाना: भारत ने योग, ध्यान और अध्यात्म के माध्यम से विश्व को आत्मिक शांति का मार्ग दिखाया है।
इन सभी खजानों के कारण ही 'जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी' कहा गया है।
ख"जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े" — पंक्ति में 'उगे-बढ़े' किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?Show solution
उत्तर: 'उगे-बढ़े' शब्द देश के नागरिकों (हम सबके) लिए कहा गया है।
कारण: जिस प्रकार एक बीज मिट्टी में बोया जाता है और उसी मिट्टी से पोषण पाकर अंकुरित होकर वृक्ष बनता है, उसी प्रकार हम सब भी इस देश की मिट्टी में जन्मे हैं और यहीं पले-बढ़े हैं। इस देश की हवा, पानी, अन्न और संस्कारों ने हमें बड़ा किया है। इसीलिए 'उगे-बढ़े' शब्द का प्रयोग किया गया है — यह हमारे और इस देश के बीच के गहरे, जैविक संबंध को दर्शाता है।
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कविता की रचना
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भाषा की बात
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1. जो चल न सका संसार-संग
2. बहती जिसमें रस-धार नहीं
3. पाया जिसमें दाना-पानी
4. हैं माता-पिता बंधु जिसमें
5. हम हैं जिसके राजा-रानी
6. जिससे न जाति-उड़ार हुआ
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"जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।"
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कविता का शीर्षक
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पाठ से आगे — आपकी बात
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झरोखे से — सारी समझ
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in स्वदेश (कविता)-गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' for CBSE Class 8 Hindi?
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How should I revise स्वदेश (कविता)-गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही' for Class 8 exams?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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