हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र
CBSE · Class 8 · Hindi
NCERT Solutions for हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र — CBSE Class 8 Hindi.
Interactive on Super Tutor
Studying हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र? Get the full interactive chapter.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan — built for ncert solutions and more.
1,000+ Class 8 students started this chapter today
41 worked solutions below. Unlock all 82 free in Super Tutor
मेरी समझ से — (क) बहुविकल्पीय प्रश्न
1"सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं" का क्या अर्थ है?Show solution
स्पष्टीकरण: लेखक यहाँ वृक्षों की उदारता का वर्णन कर रहे हैं। जिस प्रकार सज्जन व्यक्ति बुरा व्यवहार किए जाने पर भी भला करते हैं, उसी प्रकार फलदार वृक्ष पत्थर मारने पर भी फल देते हैं। यह एक मानवीकरण (personification) है जिसमें वृक्षों की उदारता को सज्जनता से जोड़ा गया है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
2"वैराग्य और भक्ति का उदय होता था" इस कथन से लेखक का कौन-सा भाव प्रकट होता है?Show solution
स्पष्टीकरण: हरिद्वार की पवित्र भूमि, गंगा का पावन जल और प्राकृतिक वातावरण लेखक के मन में वैराग्य और भक्ति जगाते थे। यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव का प्रतीक है, न कि शारीरिक थकान या आर्थिक संतोष का।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
3"पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल से बढ़कर था" इस वाक्य का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष क्या है?Show solution
स्पष्टीकरण: लेखक यह बताना चाहते हैं कि सुख वस्तुओं की कीमत या भव्यता में नहीं, बल्कि मन की संतुष्टि और परिस्थितियों में होता है। गंगा के तट पर पत्थर पर बैठकर किया गया साधारण भोजन सोने की थाल में परोसे गए भोजन से अधिक सुखद था क्योंकि वहाँ मन प्रसन्न और संतुष्ट था।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
4"एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।" यह प्रसंग किस मूल्य को बढ़ावा देता है?Show solution
★ स्वच्छता और प्रकृति प्रेम
स्पष्टीकरण: इस प्रसंग में दो मूल्य प्रकट होते हैं। पहला — लेखक ने स्वयं रसोई बनाई और पत्थर पर भोजन किया, जो सादगी और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। दूसरा — गंगा के तट पर प्रकृति के निकट भोजन करना प्रकृति प्रेम को दर्शाता है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
5लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यत: किस प्रकार का था?Show solution
★ प्राकृतिक
स्पष्टीकरण: लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यतः आध्यात्मिक और प्राकृतिक था। उन्होंने गंगा स्नान, भागवत पारायण, वैराग्य और भक्ति के उदय का वर्णन किया है (आध्यात्मिक अनुभव), साथ ही पर्वतों, वृक्षों, पक्षियों और नदी की सुंदरता का भी विस्तृत वर्णन किया है (प्राकृतिक अनुभव)।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
6पत्र की भाषा का एक मुख्य लक्षण क्या है?Show solution
स्पष्टीकरण: भारतेंदु हरिश्चंद्र ने इस पत्र में सरल, स्वाभाविक और चित्रात्मक भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने दृश्यों का इतना सजीव वर्णन किया है कि पाठक के मन में हरिद्वार का चित्र उभर आता है। भाषा न तो बोझिल है, न ही अत्यधिक कठिन।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
मेरी समझ से — (ख) समूह चर्चा
खहो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution
1. प्रत्येक विद्यार्थी अपने चुने हुए उत्तर का कारण बताए।
2. पाठ से प्रमाण देकर अपने उत्तर को सही सिद्ध करें।
3. यदि किसी प्रश्न के एक से अधिक सही उत्तर हों, तो उन सभी पर विचार करें।
4. दूसरे साथियों के तर्कों को ध्यान से सुनें और उन पर विचार करें।
उदाहरण: प्रश्न 4 में 'सादगी और आत्मनिर्भरता' तथा 'स्वच्छता और प्रकृति प्रेम' — दोनों उत्तर सही हो सकते हैं। इस पर समूह में चर्चा करें।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
मिलकर करें मिलान
1पाठ से चुनकर दिए गए शब्दों का उनके उपयुक्त संदर्भों से मिलान कीजिए।Show solution
1. हरिद्वार → 3. यह भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। यहाँ से गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है।
2. गंगा → 5. यह भारतवर्ष की एक प्रधान नदी है जो हिमालय से निकलकर लगभग 1560 मील पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके अनेक नाम हैं, जैसे— भागीरथी, त्रिपथगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, सुरनदी आदि।
3. भगीरथ → 6. ये अयोध्या के प्रसिद्ध सूर्यवंशी राजा थे। कहा जाता है कि ये घोर तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर लाए थे। इसीलिए गंगा का एक नाम 'भागीरथी' भी है।
4. चण्डका → 1. मान्यताओं के अनुसार दुर्गा का एक रूप।
5. भागवत → 2. यह अठारह पुराणों में से सर्वप्रसिद्ध एक पुराण है। इसमें अधिकांश श्री कृष्ण संबंधी कथाएँ हैं।
6. दालचीनी → 4. यह एक पेड़ का नाम है। यह दक्षिण भारत में बहुतायत से मिलता है। इस पेड़ की सुगंधित छाल दवा और मसाले के काम में आती है। इसे दारचीनी भी कहते हैं।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
मिलकर करें चयन — (क) उपयुक्त निष्कर्ष
1पर्वतों पर अनेक प्रकार की वल्ली हरी-भरी सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है।Show solution
स्पष्टीकरण: लेखक यहाँ लताओं की सुंदरता और सौम्यता की तुलना सज्जनों की शुभ इच्छाओं से कर रहे हैं। दोनों में सौम्यता, सुंदरता और विस्तार का भाव है। दूसरा निष्कर्ष भ्रामक है क्योंकि वह उपमा को उलट देता है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
2बड़े-बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं।Show solution
स्पष्टीकरण: लेखक वृक्षों की स्थिरता और सहनशीलता की तुलना तपस्वी साधुओं से कर रहे हैं। साधु स्वेच्छा से कठिनाइयाँ सहते हैं, विवश होकर नहीं। अतः 'विवश' वाला निष्कर्ष भ्रामक है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
3इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।Show solution
स्पष्टीकरण: हरिद्वार की पवित्र भूमि पर पक्षी सुरक्षित हैं क्योंकि यहाँ शिकारी (बधिक) नहीं आते। इसलिए वे निडर होकर कल्लोल करते हैं। दूसरा निष्कर्ष भ्रामक है — पक्षी डरकर नहीं, बल्कि सुरक्षित होने के कारण यहाँ हैं।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
4जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिट्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है।Show solution
स्पष्टीकरण: लेखक गंगाजल की शीतलता और मिठास का काव्यात्मक वर्णन कर रहे हैं। 'चीनी के पने को बरफ में जमाना' एक उपमा है जो जल की ठंडक और मिठास को दर्शाती है। दूसरा निष्कर्ष व्यावहारिक रूप से भ्रामक है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
5एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।Show solution
स्पष्टीकरण: लेखक ने गंगा के तट पर स्वयं भोजन बनाया और प्रकृति के निकट बैठकर खाया। यह उनके प्रकृति-प्रेम और सादगी को दर्शाता है। पहला निष्कर्ष पूर्णतः भ्रामक है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
6निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।Show solution
स्पष्टीकरण: 'स्थानदान' का अर्थ है — पत्र को अपनी पत्रिका में स्थान देना अर्थात प्रकाशित करना। लेखक संपादक से विनम्र निवेदन कर रहे हैं कि वे इस पत्र को अपनी पत्रिका 'कविवचन सुधा' में प्रकाशित करें। दोनों निष्कर्ष लगभग सही हैं, किंतु पहला अधिक व्यापक है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
पंक्तियों पर चर्चा
क"यहाँ की कुशा सबसे विलक्षण होती है जिसमें से दालचीनी, जावित्री इत्यादि की अच्छी सुगंध आती है। मानो यह प्रत्यक्ष प्रगट होता है कि यह ऐसी पुण्यभूमि है कि यहाँ की घास भी ऐसी सुगंधमय है।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।Show solution
लेखक हरिद्वार की पवित्रता और विशेषता का वर्णन करते हुए कह रहे हैं कि यहाँ की कुशा (एक प्रकार की पवित्र घास जो धार्मिक कार्यों में प्रयुक्त होती है) अत्यंत विलक्षण है। इस घास से दालचीनी और जावित्री जैसी सुगंधित मसालों की खुशबू आती है।
लेखक इसे हरिद्वार की पुण्यभूमि का प्रमाण मानते हैं। उनका भाव यह है कि जो भूमि इतनी पवित्र हो, उसकी साधारण घास भी असाधारण सुगंध से भरी होती है। यह पंक्तियाँ हरिद्वार की भूमि के प्रति लेखक की गहरी श्रद्धा और आस्था को व्यक्त करती हैं।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
ख"अहा! इनके जन्म भी धन्य हैं जिनसे अर्थी विमुख जाते ही नहीं। फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।Show solution
लेखक वृक्षों की परोपकारिता की प्रशंसा करते हुए कह रहे हैं कि वृक्षों का जन्म धन्य है क्योंकि उनके पास जो भी माँगने आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता।
वृक्ष अपने जीवन के हर अंग से मनुष्य की सेवा करते हैं:
- फल — भोजन के लिए
- फूल — सुंदरता और पूजा के लिए
- गंध — सुगंध के लिए
- छाया — विश्राम के लिए
- पत्ते — औषधि और भोजन के लिए
- छाल — दवा और मसाले के लिए
- बीज — नए पौधे उगाने के लिए
- लकड़ी — ईंधन और निर्माण के लिए
- जड़ — औषधि के लिए
- और जलने के बाद भी कोयले और राख से मनुष्य का काम आते हैं।
ये पंक्तियाँ वृक्षों के निःस्वार्थ परोपकार का सुंदर चित्रण हैं और हमें प्रेरणा देती हैं कि हम भी वृक्षों की तरह दूसरों के काम आएँ।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
सोच-विचार के लिए
क"और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ..." — लेखक का यह वाक्य क्या दर्शाता है? क्या आपने कभी किसी स्थान को छोड़कर ऐसा अनुभव किया है?Show solution
यह वाक्य लेखक के हरिद्वार के प्रति गहरे लगाव और आत्मीयता को व्यक्त करता है। हरिद्वार से शारीरिक रूप से लौट आने के बाद भी उनका मन वहीं रमा हुआ है। वे हरिद्वार की पवित्रता, प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण को भुला नहीं पाए हैं।
यह भाव दर्शाता है कि कुछ स्थान हमारे मन पर इतनी गहरी छाप छोड़ते हैं कि हम वहाँ से लौटने के बाद भी उन्हीं के बारे में सोचते रहते हैं।
व्यक्तिगत अनुभव (उदाहरण के रूप में):
जब हम किसी पहाड़ी स्थान, नानी-दादी के घर, या किसी प्रिय स्थान से लौटते हैं, तो कई दिनों तक उसी की यादें मन में घूमती रहती हैं। जैसे — किसी विद्यार्थी ने यदि शिमला या मनाली की यात्रा की हो, तो वहाँ की बर्फ, पहाड़ और ठंडी हवा की यादें लंबे समय तक मन में बनी रहती हैं।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
ख"पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।" — लेखक का यह कथन आज के समाज में कितना सच है?Show solution
लेखक कह रहे हैं कि हरिद्वार के पंडे (पुजारी) अत्यंत संतोषी हैं। वे थोड़े में भी संतुष्ट रहते हैं और एक पैसे को भी लाख के बराबर मानकर कृतज्ञ रहते हैं।
आज के संदर्भ में विचार:
आज के समाज में यह कथन पूरी तरह सच नहीं है। आज अधिकांश तीर्थस्थानों पर पंडे और पुजारी अधिक धन की माँग करते हैं। पर्यटकों और श्रद्धालुओं से अनुचित शुल्क लिया जाता है।
हालाँकि, आज भी समाज में कुछ संतोषी लोग मिलते हैं:
- गाँव के किसान जो थोड़ी फसल में भी संतुष्ट रहते हैं।
- कुछ सेवाभावी शिक्षक जो कम वेतन में भी पूरी लगन से पढ़ाते हैं।
- समाजसेवी जो बिना किसी लाभ के दूसरों की सेवा करते हैं।
निष्कर्ष: संतोष एक दुर्लभ गुण है जो आज भी कुछ लोगों में मिलता है, परंतु भौतिकवादी युग में यह कम होता जा रहा है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
ग"मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। यह स्थान भी उस क्षेत्र में टिकने योग्य ही है।" — आपके विचार से लेखक ने उस स्थान को 'टिकने योग्य' क्यों कहा है?Show solution
1. प्राकृतिक सौंदर्य: बंगला ऊँचाई पर स्थित था, जहाँ से हरे-भरे पर्वतों और गंगा का सुंदर दृश्य दिखाई देता होगा।
2. शांत वातावरण: हरिद्वार की पवित्र भूमि पर स्थित होने के कारण वहाँ का वातावरण शांत और आध्यात्मिक रहा होगा।
3. स्वच्छ वायु: ऊँचाई पर स्थित होने से वहाँ शुद्ध और शीतल वायु मिलती होगी।
4. आध्यात्मिक महत्व: हरिद्वार जैसे तीर्थ क्षेत्र में रहना स्वयं में एक विशेष अनुभव है।
5. सुविधाजनक स्थिति: दीवान कृपा राम के घर का बंगला होने से वहाँ रहने की उचित व्यवस्था भी रही होगी।
निष्कर्ष: 'टिकने योग्य' केवल आराम और सुविधा के कारण नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक वातावरण और मानसिक शांति के कारण भी था।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
घ"फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।" — इस वाक्य से वृक्षों के महत्व के बारे में कौन-कौन सी बातें सूझती हैं?Show solution
1. भोजन का स्रोत: वृक्षों के फल हमें पोषण देते हैं।
2. सौंदर्य और पूजा: फूल सुंदरता बढ़ाते हैं और धार्मिक कार्यों में उपयोगी हैं।
3. सुगंध: वृक्षों की गंध वातावरण को सुगंधित और स्वास्थ्यवर्धक बनाती है।
4. विश्राम: छाया में थके-हारे यात्री विश्राम करते हैं।
5. औषधि: पत्ते, छाल और जड़ें अनेक रोगों की दवा बनाने में काम आती हैं।
6. मसाले और खाद्य पदार्थ: छाल (जैसे दालचीनी) मसाले के रूप में उपयोगी है।
7. नए पौधे: बीजों से नए वृक्ष उगते हैं, जिससे वनों का विस्तार होता है।
8. निर्माण और ईंधन: लकड़ी घर बनाने और ईंधन के काम आती है।
9. मृत्यु के बाद भी उपयोगी: जलने के बाद कोयला और राख भी उपयोगी हैं।
सार: वृक्ष जन्म से मृत्यु तक, हर अवस्था में मनुष्य के काम आते हैं। इसीलिए वृक्षों को 'परोपकारी' कहा जाता है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
अनुमान और कल्पना से
क"यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।" — कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार में हैं। आप वहाँ क्या-क्या करना चाहेंगे?Show solution
1. गंगा स्नान: सबसे पहले हरि की पैड़ी पर जाकर पवित्र गंगा में स्नान करता/करती।
2. हर की पैड़ी की गंगा आरती: संध्याकाल में गंगा आरती देखता/देखती जो अत्यंत मनोरम होती है।
3. प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद: हरे-भरे पर्वतों के बीच घूमता/घूमती और प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेता/लेती।
4. गंगा के तट पर बैठना: पत्थरों पर बैठकर गंगा की शीतल लहरों का स्पर्श अनुभव करता/करती।
5. ध्यान और योग: इस पवित्र भूमि पर ध्यान लगाता/लगाती।
6. स्थानीय भोजन: यहाँ के प्रसिद्ध भोजन का आनंद लेता/लेती।
7. मंदिर दर्शन: मनसा देवी और चंडी देवी मंदिर के दर्शन करता/करती।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
ख"जल के छलके पास ही ठंडे-ठंडे आते थे।" — कल्पना कीजिए कि आप गंगा के तट पर हैं और पानी के छींटे आपके मुँह पर आ रहे हैं। अपने अनुभवों को अपनी कल्पना से लिखिए।Show solution
मैं गंगा के तट पर एक बड़े पत्थर पर बैठा/बैठी हूँ। सामने गंगा की धारा तेज़ी से बह रही है। पानी का रंग नीला-हरा है और उसमें सूर्य की किरणें चमक रही हैं।
अचानक एक बड़ी लहर आती है और उसके छींटे मेरे चेहरे पर पड़ते हैं। ओह! कितना ठंडा और ताज़ा पानी है! जैसे किसी ने बर्फ के टुकड़े मेरे गालों पर रख दिए हों। मेरी आँखें बंद हो जाती हैं और मन में एक अजीब-सी शांति छा जाती है।
पानी की बूँदें मेरे होठों पर आती हैं — हल्की-सी मिठास है उनमें। चारों ओर से पानी की कलकल ध्वनि सुनाई दे रही है। पहाड़ों से आती शीतल हवा और गंगाजल के छींटे मिलकर ऐसा अनुभव देते हैं जैसे सारी थकान और चिंताएँ बह गई हों।
मन करता है कि यहीं बैठा/बैठी रहूँ, घंटों, दिनों तक।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
ग"सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।" — यदि पेड़-पौधे सच में मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगें तो क्या होगा?Show solution
कल्पनात्मक परिदृश्य:
1. यदि पेड़ बोलने लगें: वे हमसे कहेंगे — "हमें मत काटो, हम तुम्हें छाया और फल देते हैं।"
2. यदि पेड़ चलने लगें: वे प्रदूषित स्थानों से दूर भाग जाएँगे और स्वच्छ स्थानों पर जाकर रहेंगे।
3. यदि पेड़ भावनाएँ व्यक्त करें: जब कोई उन्हें काटने आएगा, वे रोएँगे और विरोध करेंगे।
4. यदि पेड़ माँग करने लगें: वे कहेंगे — "हमें पानी दो, हमारी देखभाल करो, तभी हम फल देंगे।"
5. मज़ेदार स्थिति: आम का पेड़ कहेगा — "मुझे पत्थर मत मारो, मैं खुद फल दूँगा जब पकेंगे!"
निष्कर्ष: यदि पेड़ मनुष्यों की तरह व्यवहार करते, तो शायद हम उनकी भावनाओं को समझकर उनकी अधिक देखभाल करते और पर्यावरण का विनाश नहीं होता।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
घ"यहाँ पर श्री गंगा जी दो धारा हो गई हैं— एक का नाम नील धारा, दूसरी श्री गंगा जी ही के नाम से।" — इस पाठ में 'गंगा' शब्द के साथ 'श्री' और 'जी' लगाया गया है। आपके अनुसार उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा?Show solution
1. श्रद्धा और आदर: लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि एक देवी के रूप में मानते थे। 'श्री' और 'जी' आदर और श्रद्धा के प्रतीक हैं।
2. धार्मिक मान्यता: हिंदू धर्म में गंगा को 'गंगा माता' या 'देवनदी' माना जाता है। इसलिए उनके नाम के साथ सम्मानसूचक शब्द लगाना स्वाभाविक है।
3. सांस्कृतिक परंपरा: भारतीय संस्कृति में पवित्र नदियों, देवी-देवताओं और बड़े-बुजुर्गों के नाम के साथ 'जी' या 'श्री' लगाने की परंपरा है।
4. भावनात्मक जुड़ाव: लेखक का गंगा से गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव था, इसलिए वे उन्हें सम्मान देते हुए 'श्री गंगा जी' लिखते हैं।
5. आदरार्थ बहुवचन: जैसे बड़ों के लिए 'आप' का प्रयोग होता है, वैसे ही गंगा के लिए 'जी' का प्रयोग उनके प्रति आदर दर्शाता है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
डकल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार एक श्रवणबाधित या दृष्टिबाधित व्यक्ति के साथ गए हैं। उसकी यात्रा को अच्छा बनाने के लिए कुछ सुझाव दीजिए।Show solution
1. सांकेतिक भाषा (Sign Language) का उपयोग करें या लिखकर जानकारी दें।
2. दृश्य जानकारी — नक्शे, चित्र और लिखित निर्देश उपलब्ध कराएँ।
3. गंगा आरती के दौरान उन्हें आगे की पंक्ति में बैठाएँ ताकि वे दृश्य का पूरा आनंद ले सकें।
4. कंपन (vibration) के माध्यम से संगीत का अनुभव कराएँ।
5. हर स्थान पर लिखित सूचनाएँ और संकेत बोर्ड हों।
दृष्टिबाधित व्यक्ति के लिए सुझाव:
1. उनका हाथ थामकर या बाँह पकड़कर सुरक्षित मार्गदर्शन करें।
2. गंगाजल का स्पर्श, उसकी शीतलता और ध्वनि का अनुभव कराएँ।
3. फूलों की सुगंध, पत्थरों की बनावट और वातावरण की ध्वनियों का वर्णन करें।
4. ऑडियो गाइड की व्यवस्था करें।
5. घाट की सीढ़ियों पर सावधानी से चलाएँ और हर कदम पर सूचित करें।
6. प्रसाद और भोजन का स्वाद और सुगंध बताएँ।
सामान्य सुझाव: धैर्य रखें, जल्दबाज़ी न करें और उनकी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दें।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
लिखें संवाद
क"मेरे संग कल्लू जी मित्र भी परमानंदी थे।" — लेखक और कल्लू जी के बीच हरिद्वार यात्रा पर एक काल्पनिक संवाद लिखिए।Show solution
लेखक: कल्लू जी, देखिए! ये हरे-भरे पर्वत कितने सुंदर लग रहे हैं। मन प्रसन्न हो गया।
कल्लू जी: सच कह रहे हैं आप! ऐसा लग रहा है जैसे स्वर्ग में आ गए हों। और यह गंगा की कलकल ध्वनि — कितनी मधुर है!
लेखक: मित्र, मैं तो इस पुण्यभूमि का वर्णन करने में असमर्थ हूँ। यहाँ आते ही मन शुद्ध हो जाता है।
कल्लू जी: हाँ, और देखिए — ये वृक्ष कितने उदार हैं! पत्थर मारने पर भी फल देते हैं। सच्चे सज्जन हैं ये!
लेखक: आज मैं गंगा के तट पर ही रसोई बनाकर भोजन करूँगा। क्या आप भी साथ चलेंगे?
कल्लू जी: अवश्य! पत्थर पर बैठकर गंगा के किनारे भोजन करने का सुख तो सोने की थाल से भी बढ़कर होगा।
लेखक: बिल्कुल सही कहा। आज रात ग्रहण भी है। गंगा स्नान का पुण्य मिलेगा।
कल्लू जी: तो फिर देर किस बात की! चलिए, पहले हरि की पैड़ी पर स्नान करते हैं।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
ख"यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।" — लेखक और प्रकृति के बीच एक कल्पनात्मक संवाद तैयार कीजिए — जैसे पर्वत बोल रहे हों।Show solution
लेखक: (पर्वतों को देखकर) अहा! आप कितने विशाल और सुंदर हैं! आपकी हरियाली देखकर मन प्रसन्न हो जाता है।
पर्वत: (गंभीर स्वर में) आओ, यात्री! हम युगों से यहाँ खड़े हैं। न धूप से डरते हैं, न वर्षा से। हम साधुओं की भाँति तपस्या करते हैं।
लेखक: आपकी लताएँ और वृक्ष कितने सुंदर हैं! ये हरी-भरी वल्लियाँ सज्जनों के शुभ मनोरथों की तरह फैली हुई हैं।
पर्वत: हाँ, हम अपनी गोद में गंगा को धारण करते हैं। हमारी छाया में पक्षी निडर होकर कल्लोल करते हैं।
लेखक: आपके पास आकर मन में वैराग्य और भक्ति का उदय होता है।
पर्वत: यही हमारा उपहार है। जो भी यहाँ आता है, शांति और पवित्रता लेकर जाता है। हम सदा यहाँ रहेंगे — तुम्हारी प्रतीक्षा में।
लेखक: मैं जाऊँगा, पर मेरा चित्त यहीं रहेगा।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
'है' और 'हैं' का उपयोग — आदरार्थ बहुवचन
1प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं ______________, वे अभी सभा में उपस्थित ______________।Show solution
स्पष्टीकरण: 'प्रधानाचार्य जी' एकवचन हैं, परंतु आदर प्रकट करने के लिए आदरार्थ बहुवचन 'हैं' का प्रयोग किया गया है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
2माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते ______________, हमें उनका कहना मानना चाहिए।Show solution
स्पष्टीकरण: 'माता-पिता' बहुवचन हैं, अतः 'हैं' का प्रयोग उचित है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
3मेरी बहन बाजार जा रही ______________ वहाँ से किताबें ले आएगी।Show solution
स्पष्टीकरण: 'बहन' एकवचन है और यहाँ आदरार्थ बहुवचन की आवश्यकता नहीं है (छोटी बहन के लिए), अतः 'है' का प्रयोग होगा।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
4बाहर फेरीवाला ______________ ______________ | ______________ बुला लाओ।Show solution
स्पष्टीकरण: 'फेरीवाला' सामान्य व्यक्ति है, आदरार्थ बहुवचन की आवश्यकता नहीं, अतः 'है' और 'उसे' का प्रयोग होगा।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
5डाकिया जी आए ______________। उन्हें भी बुला लाओ।Show solution
स्पष्टीकरण: 'डाकिया जी' — 'जी' लगाने से आदर प्रकट होता है, अतः आदरार्थ बहुवचन 'हैं' का प्रयोग होगा।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
6आप तो बहुत दिन बाद ______________, ______________ का स्वागत है।Show solution
स्पष्टीकरण: 'आप' आदरसूचक सर्वनाम है, अतः 'हैं' और 'आपका' का प्रयोग होगा।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
7डॉक्टर साहब बहुत विद्वान ______________, ______________ से परामर्श लेना चाहिए।Show solution
स्पष्टीकरण: 'डॉक्टर साहब' — 'साहब' आदरसूचक शब्द है, अतः आदरार्थ बहुवचन 'हैं' और 'उनसे' का प्रयोग होगा।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
8आपके माता-पिता कहाँ ______________? क्या मैं ______________ से मिल सकता हूँ?Show solution
स्पष्टीकरण: 'माता-पिता' बहुवचन हैं और आदरणीय हैं, अतः 'हैं' और 'उनसे' का प्रयोग होगा।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
9ये हमारे हिंदी के अध्यापक ______________, हम ______________ से बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं।Show solution
स्पष्टीकरण: 'अध्यापक' आदरणीय हैं और 'ये' बहुवचन संकेत करता है, अतः 'हैं' और 'उनसे' का प्रयोग होगा।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
10बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर ______________ ______________।Show solution
स्पष्टीकरण: 'बंदर' यहाँ बहुवचन में प्रयुक्त है (अनेक बंदर), अतः 'हैं' का प्रयोग होगा। यहाँ आदरार्थ बहुवचन नहीं है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
भावों की पहचान
1उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।Show solution
स्पष्टीकरण: लेखक को गंगा के तट पर पत्थर पर बैठकर किया गया साधारण भोजन सोने की थाल के भोजन से अधिक सुखद लगा। यह संतोष का भाव है — जब मन संतुष्ट हो तो साधारण वस्तु भी असाधारण सुख देती है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
2चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।Show solution
स्पष्टीकरण: हरिद्वार की पवित्र भूमि पर लेखक के मन में बार-बार सांसारिक मोह से विरक्ति (वैराग्य) और ईश्वर के प्रति समर्पण (भक्ति) का भाव उत्पन्न होता था।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
3पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं।Show solution
स्पष्टीकरण: लेखक हरिद्वार के पंडों की संतोषी प्रवृत्ति की प्रशंसा कर रहे हैं। वे थोड़े में भी संतुष्ट रहते हैं — यह संतोष का भाव है।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
4हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी।Show solution
स्पष्टीकरण: हरिद्वार के वातावरण में चारों ओर पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव लेखक को मानसिक शांति और आनंद दे रहा था।
Not sure why a step works? check your working in Super Tutor
काल की पहचान — (क)
काल की पहचान — (ख) काल परिवर्तन
पत्र की रचना — विशेषताओं का मिलान
लेखन के अनोखे तरीके — (क) तुलनात्मक वाक्य
लेखन के अनोखे तरीके — (ख) आधुनिक हिंदी में रूपांतरण
लेखन के अनोखे तरीके — (ग) प्राचीन वर्तनी
पाठ से आगे — आपकी बात
प्रकृति का सौंदर्य और संरक्षण — पोस्टर
स्वास्थ्य और योग
अपने शब्द — शब्द-चित्र
यात्रा के व्यय की गणना
यात्रा सबके लिए
आज की पहेली
झरोखे से — हरिद्वार के मार्ग में (अतिरिक्त पठन)
खोजबीन के लिए
41 more solved questions in हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र
Every remaining exercise is solved step by step in Super Tutor, plus practice quizzes and flashcards for this chapter. Free to start.
Stuck on a step?
Ask Super Tutor AI to explain any solution on this page in a simpler way — free, 24x7.
Ask a Doubt FreeFrequently Asked Questions
What are the important topics in हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र for CBSE Class 8 Hindi?
How to score full marks in हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र — CBSE Class 8 Hindi?
Where can I get free NCERT Solutions for हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र Class 8 Hindi?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
More resources for हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र
Practice Quiz
Test yourself with a quick quiz
Important Questions
Practice with board exam-style questions
Revision Notes
Key points for last-minute revision
Formula Sheet
All formulas in one place
Chapter Summary
Understand the chapter at a glance
Concept Maps
See how topics connect visually
Study Plan
Step-by-step plan to ace this chapter
Flashcards
Quick-fire cards for active recall
Syllabus
What topics to cover
For serious students
Get the full हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र chapter — for free.
Quizzes, flashcards, AI doubt-solver and a step-by-step study plan for CBSE Class 8 Hindi.