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Chapter 4 of 10
NCERT Solutions

हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र

CBSE · Class 8 · Hindi

NCERT Solutions for हरिद्वार (पत्र)-भारतेंदु हरिश्चंद्र — CBSE Class 8 Hindi.

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82 Questions Solved · 25 Sections

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मेरी समझ से — (क) बहुविकल्पीय प्रश्न

1"सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं" का क्या अर्थ है?Show solution
सही उत्तर: ★ लेखक फलदार वृक्षों की उदारता को मानवीय रूप में व्यक्त कर रहे हैं।

स्पष्टीकरण: लेखक यहाँ वृक्षों की उदारता का वर्णन कर रहे हैं। जिस प्रकार सज्जन व्यक्ति बुरा व्यवहार किए जाने पर भी भला करते हैं, उसी प्रकार फलदार वृक्ष पत्थर मारने पर भी फल देते हैं। यह एक मानवीकरण (personification) है जिसमें वृक्षों की उदारता को सज्जनता से जोड़ा गया है।

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2"वैराग्य और भक्ति का उदय होता था" इस कथन से लेखक का कौन-सा भाव प्रकट होता है?Show solution
सही उत्तर: ★ मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव

स्पष्टीकरण: हरिद्वार की पवित्र भूमि, गंगा का पावन जल और प्राकृतिक वातावरण लेखक के मन में वैराग्य और भक्ति जगाते थे। यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव का प्रतीक है, न कि शारीरिक थकान या आर्थिक संतोष का।

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3"पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल से बढ़कर था" इस वाक्य का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष क्या है?Show solution
सही उत्तर: ★ संतुष्टि में सुख होता है।

स्पष्टीकरण: लेखक यह बताना चाहते हैं कि सुख वस्तुओं की कीमत या भव्यता में नहीं, बल्कि मन की संतुष्टि और परिस्थितियों में होता है। गंगा के तट पर पत्थर पर बैठकर किया गया साधारण भोजन सोने की थाल में परोसे गए भोजन से अधिक सुखद था क्योंकि वहाँ मन प्रसन्न और संतुष्ट था।

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4"एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।" यह प्रसंग किस मूल्य को बढ़ावा देता है?Show solution
सही उत्तर: ★ सादगी और आत्मनिर्भरता
★ स्वच्छता और प्रकृति प्रेम

स्पष्टीकरण: इस प्रसंग में दो मूल्य प्रकट होते हैं। पहला — लेखक ने स्वयं रसोई बनाई और पत्थर पर भोजन किया, जो सादगी और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। दूसरा — गंगा के तट पर प्रकृति के निकट भोजन करना प्रकृति प्रेम को दर्शाता है।

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5लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यत: किस प्रकार का था?Show solution
सही उत्तर: ★ आध्यात्मिक
★ प्राकृतिक

स्पष्टीकरण: लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यतः आध्यात्मिक और प्राकृतिक था। उन्होंने गंगा स्नान, भागवत पारायण, वैराग्य और भक्ति के उदय का वर्णन किया है (आध्यात्मिक अनुभव), साथ ही पर्वतों, वृक्षों, पक्षियों और नदी की सुंदरता का भी विस्तृत वर्णन किया है (प्राकृतिक अनुभव)।

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6पत्र की भाषा का एक मुख्य लक्षण क्या है?Show solution
सही उत्तर: ★ सरलता और चित्रात्मकता

स्पष्टीकरण: भारतेंदु हरिश्चंद्र ने इस पत्र में सरल, स्वाभाविक और चित्रात्मक भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने दृश्यों का इतना सजीव वर्णन किया है कि पाठक के मन में हरिद्वार का चित्र उभर आता है। भाषा न तो बोझिल है, न ही अत्यधिक कठिन।

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मेरी समझ से — (ख) समूह चर्चा

हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution
यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। इसके लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करें:

1. प्रत्येक विद्यार्थी अपने चुने हुए उत्तर का कारण बताए।
2. पाठ से प्रमाण देकर अपने उत्तर को सही सिद्ध करें।
3. यदि किसी प्रश्न के एक से अधिक सही उत्तर हों, तो उन सभी पर विचार करें।
4. दूसरे साथियों के तर्कों को ध्यान से सुनें और उन पर विचार करें।

उदाहरण: प्रश्न 4 में 'सादगी और आत्मनिर्भरता' तथा 'स्वच्छता और प्रकृति प्रेम' — दोनों उत्तर सही हो सकते हैं। इस पर समूह में चर्चा करें।

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मिलकर करें मिलान

1पाठ से चुनकर दिए गए शब्दों का उनके उपयुक्त संदर्भों से मिलान कीजिए।Show solution
सही मिलान इस प्रकार है:

1. हरिद्वार → 3. यह भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। यहाँ से गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है।

2. गंगा → 5. यह भारतवर्ष की एक प्रधान नदी है जो हिमालय से निकलकर लगभग 1560 मील पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसके अनेक नाम हैं, जैसे— भागीरथी, त्रिपथगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, सुरनदी आदि।

3. भगीरथ → 6. ये अयोध्या के प्रसिद्ध सूर्यवंशी राजा थे। कहा जाता है कि ये घोर तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर लाए थे। इसीलिए गंगा का एक नाम 'भागीरथी' भी है।

4. चण्डका → 1. मान्यताओं के अनुसार दुर्गा का एक रूप।

5. भागवत → 2. यह अठारह पुराणों में से सर्वप्रसिद्ध एक पुराण है। इसमें अधिकांश श्री कृष्ण संबंधी कथाएँ हैं।

6. दालचीनी → 4. यह एक पेड़ का नाम है। यह दक्षिण भारत में बहुतायत से मिलता है। इस पेड़ की सुगंधित छाल दवा और मसाले के काम में आती है। इसे दारचीनी भी कहते हैं।

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मिलकर करें चयन — (क) उपयुक्त निष्कर्ष

1पर्वतों पर अनेक प्रकार की वल्ली हरी-भरी सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है।Show solution
सही निष्कर्ष: ✓ लताओं का फैलना सज्जनों की शुभ इच्छाओं की तरह सौम्यता और सुंदरता को दर्शाता है।

स्पष्टीकरण: लेखक यहाँ लताओं की सुंदरता और सौम्यता की तुलना सज्जनों की शुभ इच्छाओं से कर रहे हैं। दोनों में सौम्यता, सुंदरता और विस्तार का भाव है। दूसरा निष्कर्ष भ्रामक है क्योंकि वह उपमा को उलट देता है।

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2बड़े-बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं।Show solution
सही निष्कर्ष: ✓ वृक्षों की स्थिति साधुओं जैसी है जो हर मौसम को सहते हुए तपस्या करते हैं।

स्पष्टीकरण: लेखक वृक्षों की स्थिरता और सहनशीलता की तुलना तपस्वी साधुओं से कर रहे हैं। साधु स्वेच्छा से कठिनाइयाँ सहते हैं, विवश होकर नहीं। अतः 'विवश' वाला निष्कर्ष भ्रामक है।

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3इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।Show solution
सही निष्कर्ष: ✓ यहाँ के पक्षी प्रकृति में सुरक्षित अनुभव करते हैं, इसलिए वे निडर होकर कल्लोल करते हैं।

स्पष्टीकरण: हरिद्वार की पवित्र भूमि पर पक्षी सुरक्षित हैं क्योंकि यहाँ शिकारी (बधिक) नहीं आते। इसलिए वे निडर होकर कल्लोल करते हैं। दूसरा निष्कर्ष भ्रामक है — पक्षी डरकर नहीं, बल्कि सुरक्षित होने के कारण यहाँ हैं।

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4जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिट्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है।Show solution
सही निष्कर्ष: ✓ गंगाजल की ठंडक और मिठास का अनुभव बहुत मनोहारी है।

स्पष्टीकरण: लेखक गंगाजल की शीतलता और मिठास का काव्यात्मक वर्णन कर रहे हैं। 'चीनी के पने को बरफ में जमाना' एक उपमा है जो जल की ठंडक और मिठास को दर्शाती है। दूसरा निष्कर्ष व्यावहारिक रूप से भ्रामक है।

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5एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।Show solution
सही निष्कर्ष: ✓ लेखक ने गंगा के समीप बैठकर भोजन किया, जिससे उनकी प्रकृति से निकटता झलकती है।

स्पष्टीकरण: लेखक ने गंगा के तट पर स्वयं भोजन बनाया और प्रकृति के निकट बैठकर खाया। यह उनके प्रकृति-प्रेम और सादगी को दर्शाता है। पहला निष्कर्ष पूर्णतः भ्रामक है।

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6निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।Show solution
सही निष्कर्ष: ✓ लेखक चाहता है कि पत्र को महत्व देकर कहीं स्थान दिया जाए, यानी इसे पढ़ा और सँजोया जाए।

स्पष्टीकरण: 'स्थानदान' का अर्थ है — पत्र को अपनी पत्रिका में स्थान देना अर्थात प्रकाशित करना। लेखक संपादक से विनम्र निवेदन कर रहे हैं कि वे इस पत्र को अपनी पत्रिका 'कविवचन सुधा' में प्रकाशित करें। दोनों निष्कर्ष लगभग सही हैं, किंतु पहला अधिक व्यापक है।

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पंक्तियों पर चर्चा

"यहाँ की कुशा सबसे विलक्षण होती है जिसमें से दालचीनी, जावित्री इत्यादि की अच्छी सुगंध आती है। मानो यह प्रत्यक्ष प्रगट होता है कि यह ऐसी पुण्यभूमि है कि यहाँ की घास भी ऐसी सुगंधमय है।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।Show solution
इन पंक्तियों का अर्थ:

लेखक हरिद्वार की पवित्रता और विशेषता का वर्णन करते हुए कह रहे हैं कि यहाँ की कुशा (एक प्रकार की पवित्र घास जो धार्मिक कार्यों में प्रयुक्त होती है) अत्यंत विलक्षण है। इस घास से दालचीनी और जावित्री जैसी सुगंधित मसालों की खुशबू आती है।

लेखक इसे हरिद्वार की पुण्यभूमि का प्रमाण मानते हैं। उनका भाव यह है कि जो भूमि इतनी पवित्र हो, उसकी साधारण घास भी असाधारण सुगंध से भरी होती है। यह पंक्तियाँ हरिद्वार की भूमि के प्रति लेखक की गहरी श्रद्धा और आस्था को व्यक्त करती हैं।

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"अहा! इनके जन्म भी धन्य हैं जिनसे अर्थी विमुख जाते ही नहीं। फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।Show solution
इन पंक्तियों का अर्थ:

लेखक वृक्षों की परोपकारिता की प्रशंसा करते हुए कह रहे हैं कि वृक्षों का जन्म धन्य है क्योंकि उनके पास जो भी माँगने आता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता।

वृक्ष अपने जीवन के हर अंग से मनुष्य की सेवा करते हैं:
- फल — भोजन के लिए
- फूल — सुंदरता और पूजा के लिए
- गंध — सुगंध के लिए
- छाया — विश्राम के लिए
- पत्ते — औषधि और भोजन के लिए
- छाल — दवा और मसाले के लिए
- बीज — नए पौधे उगाने के लिए
- लकड़ी — ईंधन और निर्माण के लिए
- जड़ — औषधि के लिए
- और जलने के बाद भी कोयले और राख से मनुष्य का काम आते हैं।

ये पंक्तियाँ वृक्षों के निःस्वार्थ परोपकार का सुंदर चित्रण हैं और हमें प्रेरणा देती हैं कि हम भी वृक्षों की तरह दूसरों के काम आएँ।

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सोच-विचार के लिए

"और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ..." — लेखक का यह वाक्य क्या दर्शाता है? क्या आपने कभी किसी स्थान को छोड़कर ऐसा अनुभव किया है?Show solution
लेखक का यह वाक्य दर्शाता है:

यह वाक्य लेखक के हरिद्वार के प्रति गहरे लगाव और आत्मीयता को व्यक्त करता है। हरिद्वार से शारीरिक रूप से लौट आने के बाद भी उनका मन वहीं रमा हुआ है। वे हरिद्वार की पवित्रता, प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण को भुला नहीं पाए हैं।

यह भाव दर्शाता है कि कुछ स्थान हमारे मन पर इतनी गहरी छाप छोड़ते हैं कि हम वहाँ से लौटने के बाद भी उन्हीं के बारे में सोचते रहते हैं।

व्यक्तिगत अनुभव (उदाहरण के रूप में):
जब हम किसी पहाड़ी स्थान, नानी-दादी के घर, या किसी प्रिय स्थान से लौटते हैं, तो कई दिनों तक उसी की यादें मन में घूमती रहती हैं। जैसे — किसी विद्यार्थी ने यदि शिमला या मनाली की यात्रा की हो, तो वहाँ की बर्फ, पहाड़ और ठंडी हवा की यादें लंबे समय तक मन में बनी रहती हैं।

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"पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।" — लेखक का यह कथन आज के समाज में कितना सच है?Show solution
लेखक के कथन का आशय:

लेखक कह रहे हैं कि हरिद्वार के पंडे (पुजारी) अत्यंत संतोषी हैं। वे थोड़े में भी संतुष्ट रहते हैं और एक पैसे को भी लाख के बराबर मानकर कृतज्ञ रहते हैं।

आज के संदर्भ में विचार:

आज के समाज में यह कथन पूरी तरह सच नहीं है। आज अधिकांश तीर्थस्थानों पर पंडे और पुजारी अधिक धन की माँग करते हैं। पर्यटकों और श्रद्धालुओं से अनुचित शुल्क लिया जाता है।

हालाँकि, आज भी समाज में कुछ संतोषी लोग मिलते हैं:
- गाँव के किसान जो थोड़ी फसल में भी संतुष्ट रहते हैं।
- कुछ सेवाभावी शिक्षक जो कम वेतन में भी पूरी लगन से पढ़ाते हैं।
- समाजसेवी जो बिना किसी लाभ के दूसरों की सेवा करते हैं।

निष्कर्ष: संतोष एक दुर्लभ गुण है जो आज भी कुछ लोगों में मिलता है, परंतु भौतिकवादी युग में यह कम होता जा रहा है।

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"मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। यह स्थान भी उस क्षेत्र में टिकने योग्य ही है।" — आपके विचार से लेखक ने उस स्थान को 'टिकने योग्य' क्यों कहा है?Show solution
लेखक ने उस स्थान को 'टिकने योग्य' कहने के संभावित कारण:

1. प्राकृतिक सौंदर्य: बंगला ऊँचाई पर स्थित था, जहाँ से हरे-भरे पर्वतों और गंगा का सुंदर दृश्य दिखाई देता होगा।

2. शांत वातावरण: हरिद्वार की पवित्र भूमि पर स्थित होने के कारण वहाँ का वातावरण शांत और आध्यात्मिक रहा होगा।

3. स्वच्छ वायु: ऊँचाई पर स्थित होने से वहाँ शुद्ध और शीतल वायु मिलती होगी।

4. आध्यात्मिक महत्व: हरिद्वार जैसे तीर्थ क्षेत्र में रहना स्वयं में एक विशेष अनुभव है।

5. सुविधाजनक स्थिति: दीवान कृपा राम के घर का बंगला होने से वहाँ रहने की उचित व्यवस्था भी रही होगी।

निष्कर्ष: 'टिकने योग्य' केवल आराम और सुविधा के कारण नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक वातावरण और मानसिक शांति के कारण भी था।

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"फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।" — इस वाक्य से वृक्षों के महत्व के बारे में कौन-कौन सी बातें सूझती हैं?Show solution
इस वाक्य से वृक्षों के महत्व के बारे में निम्नलिखित बातें सूझती हैं:

1. भोजन का स्रोत: वृक्षों के फल हमें पोषण देते हैं।

2. सौंदर्य और पूजा: फूल सुंदरता बढ़ाते हैं और धार्मिक कार्यों में उपयोगी हैं।

3. सुगंध: वृक्षों की गंध वातावरण को सुगंधित और स्वास्थ्यवर्धक बनाती है।

4. विश्राम: छाया में थके-हारे यात्री विश्राम करते हैं।

5. औषधि: पत्ते, छाल और जड़ें अनेक रोगों की दवा बनाने में काम आती हैं।

6. मसाले और खाद्य पदार्थ: छाल (जैसे दालचीनी) मसाले के रूप में उपयोगी है।

7. नए पौधे: बीजों से नए वृक्ष उगते हैं, जिससे वनों का विस्तार होता है।

8. निर्माण और ईंधन: लकड़ी घर बनाने और ईंधन के काम आती है।

9. मृत्यु के बाद भी उपयोगी: जलने के बाद कोयला और राख भी उपयोगी हैं।

सार: वृक्ष जन्म से मृत्यु तक, हर अवस्था में मनुष्य के काम आते हैं। इसीलिए वृक्षों को 'परोपकारी' कहा जाता है।

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अनुमान और कल्पना से

"यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।" — कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार में हैं। आप वहाँ क्या-क्या करना चाहेंगे?Show solution
यदि मैं हरिद्वार में होता/होती, तो मैं निम्नलिखित कार्य करना चाहता/चाहती:

1. गंगा स्नान: सबसे पहले हरि की पैड़ी पर जाकर पवित्र गंगा में स्नान करता/करती।

2. हर की पैड़ी की गंगा आरती: संध्याकाल में गंगा आरती देखता/देखती जो अत्यंत मनोरम होती है।

3. प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद: हरे-भरे पर्वतों के बीच घूमता/घूमती और प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेता/लेती।

4. गंगा के तट पर बैठना: पत्थरों पर बैठकर गंगा की शीतल लहरों का स्पर्श अनुभव करता/करती।

5. ध्यान और योग: इस पवित्र भूमि पर ध्यान लगाता/लगाती।

6. स्थानीय भोजन: यहाँ के प्रसिद्ध भोजन का आनंद लेता/लेती।

7. मंदिर दर्शन: मनसा देवी और चंडी देवी मंदिर के दर्शन करता/करती।

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"जल के छलके पास ही ठंडे-ठंडे आते थे।" — कल्पना कीजिए कि आप गंगा के तट पर हैं और पानी के छींटे आपके मुँह पर आ रहे हैं। अपने अनुभवों को अपनी कल्पना से लिखिए।Show solution
कल्पनात्मक वर्णन:

मैं गंगा के तट पर एक बड़े पत्थर पर बैठा/बैठी हूँ। सामने गंगा की धारा तेज़ी से बह रही है। पानी का रंग नीला-हरा है और उसमें सूर्य की किरणें चमक रही हैं।

अचानक एक बड़ी लहर आती है और उसके छींटे मेरे चेहरे पर पड़ते हैं। ओह! कितना ठंडा और ताज़ा पानी है! जैसे किसी ने बर्फ के टुकड़े मेरे गालों पर रख दिए हों। मेरी आँखें बंद हो जाती हैं और मन में एक अजीब-सी शांति छा जाती है।

पानी की बूँदें मेरे होठों पर आती हैं — हल्की-सी मिठास है उनमें। चारों ओर से पानी की कलकल ध्वनि सुनाई दे रही है। पहाड़ों से आती शीतल हवा और गंगाजल के छींटे मिलकर ऐसा अनुभव देते हैं जैसे सारी थकान और चिंताएँ बह गई हों।

मन करता है कि यहीं बैठा/बैठी रहूँ, घंटों, दिनों तक।

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"सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।" — यदि पेड़-पौधे सच में मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगें तो क्या होगा?Show solution
यदि पेड़-पौधे मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगें:

कल्पनात्मक परिदृश्य:

1. यदि पेड़ बोलने लगें: वे हमसे कहेंगे — "हमें मत काटो, हम तुम्हें छाया और फल देते हैं।"

2. यदि पेड़ चलने लगें: वे प्रदूषित स्थानों से दूर भाग जाएँगे और स्वच्छ स्थानों पर जाकर रहेंगे।

3. यदि पेड़ भावनाएँ व्यक्त करें: जब कोई उन्हें काटने आएगा, वे रोएँगे और विरोध करेंगे।

4. यदि पेड़ माँग करने लगें: वे कहेंगे — "हमें पानी दो, हमारी देखभाल करो, तभी हम फल देंगे।"

5. मज़ेदार स्थिति: आम का पेड़ कहेगा — "मुझे पत्थर मत मारो, मैं खुद फल दूँगा जब पकेंगे!"

निष्कर्ष: यदि पेड़ मनुष्यों की तरह व्यवहार करते, तो शायद हम उनकी भावनाओं को समझकर उनकी अधिक देखभाल करते और पर्यावरण का विनाश नहीं होता।

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"यहाँ पर श्री गंगा जी दो धारा हो गई हैं— एक का नाम नील धारा, दूसरी श्री गंगा जी ही के नाम से।" — इस पाठ में 'गंगा' शब्द के साथ 'श्री' और 'जी' लगाया गया है। आपके अनुसार उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा?Show solution
'श्री' और 'जी' लगाने के कारण:

1. श्रद्धा और आदर: लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र गंगा को केवल एक नदी नहीं, बल्कि एक देवी के रूप में मानते थे। 'श्री' और 'जी' आदर और श्रद्धा के प्रतीक हैं।

2. धार्मिक मान्यता: हिंदू धर्म में गंगा को 'गंगा माता' या 'देवनदी' माना जाता है। इसलिए उनके नाम के साथ सम्मानसूचक शब्द लगाना स्वाभाविक है।

3. सांस्कृतिक परंपरा: भारतीय संस्कृति में पवित्र नदियों, देवी-देवताओं और बड़े-बुजुर्गों के नाम के साथ 'जी' या 'श्री' लगाने की परंपरा है।

4. भावनात्मक जुड़ाव: लेखक का गंगा से गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव था, इसलिए वे उन्हें सम्मान देते हुए 'श्री गंगा जी' लिखते हैं।

5. आदरार्थ बहुवचन: जैसे बड़ों के लिए 'आप' का प्रयोग होता है, वैसे ही गंगा के लिए 'जी' का प्रयोग उनके प्रति आदर दर्शाता है।

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कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार एक श्रवणबाधित या दृष्टिबाधित व्यक्ति के साथ गए हैं। उसकी यात्रा को अच्छा बनाने के लिए कुछ सुझाव दीजिए।Show solution
श्रवणबाधित व्यक्ति के लिए सुझाव:

1. सांकेतिक भाषा (Sign Language) का उपयोग करें या लिखकर जानकारी दें।
2. दृश्य जानकारी — नक्शे, चित्र और लिखित निर्देश उपलब्ध कराएँ।
3. गंगा आरती के दौरान उन्हें आगे की पंक्ति में बैठाएँ ताकि वे दृश्य का पूरा आनंद ले सकें।
4. कंपन (vibration) के माध्यम से संगीत का अनुभव कराएँ।
5. हर स्थान पर लिखित सूचनाएँ और संकेत बोर्ड हों।

दृष्टिबाधित व्यक्ति के लिए सुझाव:

1. उनका हाथ थामकर या बाँह पकड़कर सुरक्षित मार्गदर्शन करें।
2. गंगाजल का स्पर्श, उसकी शीतलता और ध्वनि का अनुभव कराएँ।
3. फूलों की सुगंध, पत्थरों की बनावट और वातावरण की ध्वनियों का वर्णन करें।
4. ऑडियो गाइड की व्यवस्था करें।
5. घाट की सीढ़ियों पर सावधानी से चलाएँ और हर कदम पर सूचित करें।
6. प्रसाद और भोजन का स्वाद और सुगंध बताएँ।

सामान्य सुझाव: धैर्य रखें, जल्दबाज़ी न करें और उनकी आवश्यकताओं को प्राथमिकता दें।

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लिखें संवाद

"मेरे संग कल्लू जी मित्र भी परमानंदी थे।" — लेखक और कल्लू जी के बीच हरिद्वार यात्रा पर एक काल्पनिक संवाद लिखिए।Show solution
काल्पनिक संवाद — लेखक और कल्लू जी:

लेखक: कल्लू जी, देखिए! ये हरे-भरे पर्वत कितने सुंदर लग रहे हैं। मन प्रसन्न हो गया।

कल्लू जी: सच कह रहे हैं आप! ऐसा लग रहा है जैसे स्वर्ग में आ गए हों। और यह गंगा की कलकल ध्वनि — कितनी मधुर है!

लेखक: मित्र, मैं तो इस पुण्यभूमि का वर्णन करने में असमर्थ हूँ। यहाँ आते ही मन शुद्ध हो जाता है।

कल्लू जी: हाँ, और देखिए — ये वृक्ष कितने उदार हैं! पत्थर मारने पर भी फल देते हैं। सच्चे सज्जन हैं ये!

लेखक: आज मैं गंगा के तट पर ही रसोई बनाकर भोजन करूँगा। क्या आप भी साथ चलेंगे?

कल्लू जी: अवश्य! पत्थर पर बैठकर गंगा के किनारे भोजन करने का सुख तो सोने की थाल से भी बढ़कर होगा।

लेखक: बिल्कुल सही कहा। आज रात ग्रहण भी है। गंगा स्नान का पुण्य मिलेगा।

कल्लू जी: तो फिर देर किस बात की! चलिए, पहले हरि की पैड़ी पर स्नान करते हैं।

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"यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।" — लेखक और प्रकृति के बीच एक कल्पनात्मक संवाद तैयार कीजिए — जैसे पर्वत बोल रहे हों।Show solution
काल्पनिक संवाद — लेखक और पर्वत:

लेखक: (पर्वतों को देखकर) अहा! आप कितने विशाल और सुंदर हैं! आपकी हरियाली देखकर मन प्रसन्न हो जाता है।

पर्वत: (गंभीर स्वर में) आओ, यात्री! हम युगों से यहाँ खड़े हैं। न धूप से डरते हैं, न वर्षा से। हम साधुओं की भाँति तपस्या करते हैं।

लेखक: आपकी लताएँ और वृक्ष कितने सुंदर हैं! ये हरी-भरी वल्लियाँ सज्जनों के शुभ मनोरथों की तरह फैली हुई हैं।

पर्वत: हाँ, हम अपनी गोद में गंगा को धारण करते हैं। हमारी छाया में पक्षी निडर होकर कल्लोल करते हैं।

लेखक: आपके पास आकर मन में वैराग्य और भक्ति का उदय होता है।

पर्वत: यही हमारा उपहार है। जो भी यहाँ आता है, शांति और पवित्रता लेकर जाता है। हम सदा यहाँ रहेंगे — तुम्हारी प्रतीक्षा में।

लेखक: मैं जाऊँगा, पर मेरा चित्त यहीं रहेगा।

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'है' और 'हैं' का उपयोग — आदरार्थ बहुवचन

1प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं ______________, वे अभी सभा में उपस्थित ______________।Show solution
प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं हैं, वे अभी सभा में उपस्थित हैं

स्पष्टीकरण: 'प्रधानाचार्य जी' एकवचन हैं, परंतु आदर प्रकट करने के लिए आदरार्थ बहुवचन 'हैं' का प्रयोग किया गया है।

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2माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते ______________, हमें उनका कहना मानना चाहिए।Show solution
माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं, हमें उनका कहना मानना चाहिए।

स्पष्टीकरण: 'माता-पिता' बहुवचन हैं, अतः 'हैं' का प्रयोग उचित है।

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3मेरी बहन बाजार जा रही ______________ वहाँ से किताबें ले आएगी।Show solution
मेरी बहन बाजार जा रही है, वहाँ से किताबें ले आएगी।

स्पष्टीकरण: 'बहन' एकवचन है और यहाँ आदरार्थ बहुवचन की आवश्यकता नहीं है (छोटी बहन के लिए), अतः 'है' का प्रयोग होगा।

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4बाहर फेरीवाला ______________ ______________ | ______________ बुला लाओ।Show solution
बाहर फेरीवाला हैउसे बुला लाओ।

स्पष्टीकरण: 'फेरीवाला' सामान्य व्यक्ति है, आदरार्थ बहुवचन की आवश्यकता नहीं, अतः 'है' और 'उसे' का प्रयोग होगा।

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5डाकिया जी आए ______________। उन्हें भी बुला लाओ।Show solution
डाकिया जी आए हैं। उन्हें भी बुला लाओ।

स्पष्टीकरण: 'डाकिया जी' — 'जी' लगाने से आदर प्रकट होता है, अतः आदरार्थ बहुवचन 'हैं' का प्रयोग होगा।

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6आप तो बहुत दिन बाद ______________, ______________ का स्वागत है।Show solution
आप तो बहुत दिन बाद आए हैं, आपका स्वागत है।

स्पष्टीकरण: 'आप' आदरसूचक सर्वनाम है, अतः 'हैं' और 'आपका' का प्रयोग होगा।

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7डॉक्टर साहब बहुत विद्वान ______________, ______________ से परामर्श लेना चाहिए।Show solution
डॉक्टर साहब बहुत विद्वान हैं, उनसे परामर्श लेना चाहिए।

स्पष्टीकरण: 'डॉक्टर साहब' — 'साहब' आदरसूचक शब्द है, अतः आदरार्थ बहुवचन 'हैं' और 'उनसे' का प्रयोग होगा।

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8आपके माता-पिता कहाँ ______________? क्या मैं ______________ से मिल सकता हूँ?Show solution
आपके माता-पिता कहाँ हैं? क्या मैं उनसे मिल सकता हूँ?

स्पष्टीकरण: 'माता-पिता' बहुवचन हैं और आदरणीय हैं, अतः 'हैं' और 'उनसे' का प्रयोग होगा।

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9ये हमारे हिंदी के अध्यापक ______________, हम ______________ से बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं।Show solution
ये हमारे हिंदी के अध्यापक हैं, हम उनसे बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं।

स्पष्टीकरण: 'अध्यापक' आदरणीय हैं और 'ये' बहुवचन संकेत करता है, अतः 'हैं' और 'उनसे' का प्रयोग होगा।

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10बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर ______________ ______________।Show solution
बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर रहे हैं

स्पष्टीकरण: 'बंदर' यहाँ बहुवचन में प्रयुक्त है (अनेक बंदर), अतः 'हैं' का प्रयोग होगा। यहाँ आदरार्थ बहुवचन नहीं है।

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भावों की पहचान

1उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।Show solution
इस पंक्ति में संतोष का भाव प्रकट हो रहा है।

स्पष्टीकरण: लेखक को गंगा के तट पर पत्थर पर बैठकर किया गया साधारण भोजन सोने की थाल के भोजन से अधिक सुखद लगा। यह संतोष का भाव है — जब मन संतुष्ट हो तो साधारण वस्तु भी असाधारण सुख देती है।

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2चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।Show solution
इस पंक्ति में वैराग्य और भक्ति का भाव प्रकट हो रहा है।

स्पष्टीकरण: हरिद्वार की पवित्र भूमि पर लेखक के मन में बार-बार सांसारिक मोह से विरक्ति (वैराग्य) और ईश्वर के प्रति समर्पण (भक्ति) का भाव उत्पन्न होता था।

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3पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं।Show solution
इस पंक्ति में संतोष का भाव प्रकट हो रहा है।

स्पष्टीकरण: लेखक हरिद्वार के पंडों की संतोषी प्रवृत्ति की प्रशंसा कर रहे हैं। वे थोड़े में भी संतुष्ट रहते हैं — यह संतोष का भाव है।

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4हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी।Show solution
इस पंक्ति में शांति और आनंद (प्रेम) का भाव प्रकट हो रहा है।

स्पष्टीकरण: हरिद्वार के वातावरण में चारों ओर पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव लेखक को मानसिक शांति और आनंद दे रहा था।

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5सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।

काल की पहचान — (क)

1निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।
2यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।
3वृक्ष ऐसे हैं कि पत्थर मारने से फल देते हैं।
4चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।
5मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था।

काल की पहचान — (ख) काल परिवर्तन

1"निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।" — इस वाक्य के काल को अन्य कालों में बदलकर लिखिए।
2"यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।" — इस वाक्य के काल को अन्य कालों में बदलकर लिखिए।
3"वृक्ष ऐसे हैं कि पत्थर मारने से फल देते हैं।" — इस वाक्य के काल को अन्य कालों में बदलकर लिखिए।
4"चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।" — इस वाक्य के काल को अन्य कालों में बदलकर लिखिए।
5"मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था।" — इस वाक्य के काल को अन्य कालों में बदलकर लिखिए।

पत्र की रचना — विशेषताओं का मिलान

1पत्र की विशेषताओं का पत्र से उदाहरणों से मिलान कीजिए।
2आप भी अपनी किसी यात्रा के विषय में अपने किसी परिचित को पत्र लिखकर बताइए।

लेखन के अनोखे तरीके — (क) तुलनात्मक वाक्य

1वृक्षों की तुलना साधुओं से की गई है — पाठ में इसे किस प्रकार विशिष्ट तरीके से लिखा गया है?
2गंगाजल की मिठास की तुलना चीनी से की गई है — पाठ में इसे किस प्रकार विशिष्ट तरीके से लिखा गया है?
3हरियाली की तुलना गलीचे से की गई है — पाठ में इसे किस प्रकार विशिष्ट तरीके से लिखा गया है?
4नदी की धारा की तुलना राजा भगीरथ के यश (कीर्ति) से की गई है — पाठ में इसे किस प्रकार विशिष्ट तरीके से लिखा गया है?

लेखन के अनोखे तरीके — (ख) आधुनिक हिंदी में रूपांतरण

1"इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।" — इसे आज की हिंदी में लिखिए।
2"वर्ष के कारण सब ओर हरियाली ही दृष्टि पड़ती थी मानो हरे गलीचा की जात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी।" — इसे आज की हिंदी में लिखिए।
3"यह ऐसा निर्मल तीर्थ है कि इच्छा क्रोध की खानि जो मनुष्य हैं सो वहाँ रहते ही नहीं।" — इसे आज की हिंदी में लिखिए।
4"मेरा तो चित्त वहाँ जाते ही ऐसा प्रसन्न और निर्मल हुआ कि वर्णन के बाहर है।" — इसे आज की हिंदी में लिखिए।
5"यहाँ रात्रि को ग्रहण हुआ और हम लोगों ने ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया और दिन में श्री भागवत का पारायण भी किया।" — इसे आज की हिंदी में लिखिए।
6"उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।" — इसे आज की हिंदी में लिखिए।
7"निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।" — इसे आज की हिंदी में लिखिए।

लेखन के अनोखे तरीके — (ग) प्राचीन वर्तनी

इस रचना में हरिश्चंद्र जी ने कहीं-कहीं प्राचीन वर्तनी का प्रयोग किया है, जैसे— शिखर के लिए शिष्य, यात्रियों के लिए जात्रियों। ऐसे शब्दों की सूची बनाइए।

पाठ से आगे — आपकी बात

1"मैंने गंगा जी के तट पर रसोई करके... भोजन किया।" — क्या आपने कभी खुले वातावरण में या प्रकृति के पास भोजन किया है? वह अनुभव घर के खाने से कैसे भिन्न था?
2"उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।" — आपके जीवन में ऐसा कोई क्षण आया, जब किसी सामान्य-सी वस्तु ने आपको गहरा सुख दिया हो?
3"हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी।" — आपको किस स्थान पर पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव होता है?
4पाठ में वर्णित है, यहाँ के वृक्ष "फल, फूल, गंध... जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोर्थ पूर्ण करते हैं।" — क्या आपके जीवन में कोई पेड़, फूल या प्राकृतिक वस्तु है जिससे आप विशेष जुड़ाव महसूस करते हैं?

प्रकृति का सौंदर्य और संरक्षण — पोस्टर

1"यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है..." — "तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो!" विषय पर जन-जागरूकता पोस्टर बनाइए।

स्वास्थ्य और योग

5 मिनट ध्यान लगाकर या मौन बैठकर अपने आस-पास की ध्वनियों को सुनिए, अपनी श्वास पर ध्यान दीजिए तथा ध्यान को केंद्रित करने का प्रयास कीजिए। इस अनुभव के विषय में एक अनुच्छेद लिखिए।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में अपने विद्यालय के कार्यक्रमों को बताने के लिए एक 'सूचना' लिखिए जिसे सूचना-पट पर लगाया जा सके।

अपने शब्द — शब्द-चित्र

1'शीतल' शब्द को केंद्र में रखकर उसके चारों ओर अर्थ, विपरीतार्थक शब्द, समानार्थी शब्द और वाक्य प्रयोग लिखिए।

यात्रा के व्यय की गणना

मान लीजिए कि यात्रा के लिए आपको ₹1000 दिए गए हैं। यात्रा, खाना आदि सब मिलाकर एक व्यय विवरण बनाइए।
मान लीजिए कि आप इस यात्रा में एक छोटी वस्तु (स्मृति चिह्न) खरीदना चाहते हैं। आप क्या खरीदेंगे और क्यों?

यात्रा सबके लिए

कल्पना कीजिए कि कुछ मित्रों का समूह एक यात्रा पर जा रहा है। आप एक मार्गदर्शक या टूरिस्ट गाइड हैं। आप इन सबकी यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखेंगे?
अपने किसी मित्र के साथ बिना बोले संवाद कीजिए — संकेतों से। अब सोचिए कि यात्रा में श्रवणबाधित व्यक्ति के लिए क्या-क्या आवश्यक होगा?
यात्रा करते हुए ऐतिहासिक धरोहरों या भवनों की सुरक्षा के लिए आप किन-किन बातों का ध्यान रखेंगे?

आज की पहेली

1पाठ में से शब्द खोजिए — 1. एक मसाले का नाम, 2. कपास से जुड़ा एक शब्द, 3. जहाँ स्नान होता है, 4. वृक्ष के किसी अंग का नाम, 5. एक नगर या तीर्थ का नाम, 6. व्यापार से जुड़ा स्थान, 7. एक नदी का नाम, 8. एक पर्वत का नाम, 9. एक धार्मिक ग्रंथ का नाम।

झरोखे से — हरिद्वार के मार्ग में (अतिरिक्त पठन)

1भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखे 'हरिद्वार के मार्ग में' अंश को पढ़कर आपस में विचार कीजिए।

खोजबीन के लिए

1भारतेंदु हरिश्चंद्र का एक प्रसिद्ध नाटक है — अंधेर नगरी। इसे पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।

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