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Chapter 10 of 10
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तरुण के स्वप्न (उद्बोधन)-सुभाषचंद्र बोस — NCERT Solutions

CBSE · Class 8 · Hindi

NCERT Solutions for तरुण के स्वप्न (उद्बोधन)-सुभाषचंद्र बोस, CBSE Class 8 Hindi: 36 textbook questions solved step by step.

44 questions30 flashcards5 concepts

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36 Questions Solved · 16 Sections

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मेरी समझ से

(क)(1)"उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।" इस कथन में रेखांकित शब्द 'हम' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?Show solution

सही उत्तर: देश के तरुण वर्ग के लिए (★) तथा भारतवासियों के लिए (★)

स्पष्टीकरण: सुभाषचंद्र बोस अपने भाषण में देश के युवाओं और समस्त भारतवासियों को संबोधित कर रहे हैं। वे कह रहे हैं कि नेताजी ने जो स्वप्न देखा था — एक स्वाधीन, समृद्ध और समतामूलक राष्ट्र का — उसे पूरा करने की जिम्मेदारी आज के तरुण वर्ग और भारतवासियों पर है। अतः 'हम' शब्द इन्हीं दोनों के लिए प्रयुक्त हुआ है।

(क)(2)स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा?Show solution

सही उत्तर: श्रम और कर्म की मर्यादा से (★)

स्पष्टीकरण: नेताजी के अनुसार स्वाधीन राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करे। आर्थिक असमानता, स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकार और जातिभेद तो स्वप्न के मार्ग में बाधाएँ हैं, न कि उसे साकार करने के साधन।

(क)(3)"उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।" 'उत्तराधिकारी' होने से क्या अभिप्राय है?Show solution

सही उत्तर: उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है (★) तथा हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है (★)

स्पष्टीकरण: 'उत्तराधिकारी' का अर्थ है — किसी के कार्य या विरासत को आगे बढ़ाने वाला। नेताजी के स्वप्नों का उत्तराधिकारी होने का अर्थ है कि हम उनके स्वप्नों को न केवल संजोकर रखें, बल्कि उन्हें साकार करने के लिए सक्रिय रूप से कर्म भी करें।

(क)(4)जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब—Show solution

सही उत्तर: राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी (★)

स्पष्टीकरण: जब समाज के प्रत्येक व्यक्ति को — चाहे वह किसी भी जाति, वर्ग या लिंग का हो — शिक्षा और उन्नति के समान अवसर मिलेंगे, तो सभी लोग अपनी क्षमता के अनुसार राष्ट्र-निर्माण में योगदान दे सकेंगे। इससे राष्ट्र की सामूहिक श्रम-शक्ति में वृद्धि होगी।

(ख)हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution

यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। विद्यार्थी अपने-अपने उत्तरों के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करें।

सुझाव: चर्चा करते समय पाठ की उन पंक्तियों का संदर्भ लें जिनके आधार पर आपने उत्तर चुना। उदाहरण के लिए —

  • प्रश्न 1 में 'हम' शब्द के लिए पाठ में नेताजी के संबोधन 'हे मेरे तरुण भाइयो!' को आधार बनाया जा सकता है।
  • प्रश्न 2 में 'श्रम और कर्म की मर्यादा' को आधार बनाया जा सकता है क्योंकि नेताजी ने आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई स्थान न होने की बात कही है।

मिलकर करें मिलान

1स्तंभ 1 में दी गई पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव-विचार से सही मिलान कीजिए।Show solution

सही मिलान इस प्रकार है:

क्रमस्तंभ 1स्तंभ 2
1."इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं"2. हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं।
2."जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा"3. जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा।
3."उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं"1. समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो।

स्पष्टीकरण:

  • पंक्ति 1 में 'उठना-बैठना-चलना-फिरना-लिखना-भाषण देना-काम करना' — ये सब दिनचर्या के कार्य हैं जो स्वप्न की प्रेरणा से होते हैं, इसलिए भाव 2 से मेल खाती है।
  • पंक्ति 2 में 'स्वदेशी समाज के यंत्र' और 'अभाव मिटाना' — यह भाव 3 से मेल खाती है।
  • पंक्ति 3 में 'सब दृष्टियों से मुक्त' और 'समाज के दबाव से न मरे' — यह भाव 1 से मेल खाती है।

पंक्तियों पर चर्चा

(क)"उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।" — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?Show solution

अर्थ: इस पंक्ति में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने आर्थिक समानता की बात की है। 'अर्थ की विषमता' का अर्थ है — धन-संपत्ति में असमानता। नेताजी का स्वप्न था कि उनके आदर्श समाज में कुछ लोग अत्यधिक धनी और कुछ अत्यंत गरीब न हों। समाज के सभी वर्गों को जीवन-यापन के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध हों। आर्थिक असमानता समाज में वर्ग-संघर्ष और शोषण को जन्म देती है, इसलिए नेताजी ऐसे समाज की कल्पना करते थे जहाँ सभी को समान आर्थिक अवसर और न्याय मिले।

(ख)"वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।" — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?Show solution

अर्थ: इस पंक्ति में 'उत्स' का अर्थ है — स्रोत या उद्गम, और 'निर्झर' का अर्थ है — झरना या अविरल धारा।

नेताजी कह रहे हैं कि जो स्वप्न उन्होंने देखा — एक स्वाधीन, समृद्ध और समतामूलक भारत का — वही स्वप्न उनकी शक्ति का स्रोत था। इसी स्वप्न से उन्हें संघर्ष करने की ऊर्जा और प्रेरणा मिलती थी। साथ ही यही स्वप्न उनके जीवन में आनंद का अविरल झरने की तरह था — अर्थात् इस स्वप्न ने उनके जीवन को सार्थक और आनंदमय बनाए रखा, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न रही हों।

(ग)"उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।" — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?Show solution

अर्थ: नेताजी के आदर्श समाज में प्रत्येक व्यक्ति को सर्वांगीण स्वतंत्रता प्राप्त होनी चाहिए। 'सब दृष्टियों से मुक्त' का अर्थ है —

  • सामाजिक दृष्टि से: जाति, धर्म, वर्ग के भेदभाव से मुक्ति
  • आर्थिक दृष्टि से: गरीबी और शोषण से मुक्ति
  • राजनीतिक दृष्टि से: विदेशी शासन और दमन से मुक्ति
  • मानसिक दृष्टि से: भय, अंधविश्वास और रूढ़ियों से मुक्ति

नेताजी चाहते थे कि समाज का कोई भी दबाव व्यक्ति के विकास में बाधक न बने और प्रत्येक व्यक्ति अपनी पूर्ण क्षमता के साथ जी सके।

सोच-विचार के लिए

(क)नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?Show solution

नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने निम्नलिखित विशेषताओं वाले राष्ट्र के निर्माण का स्वप्न देखा था:

  1. स्वाधीन राष्ट्र: वे चाहते थे कि भारत अँग्रेजी शासन से पूर्णतः मुक्त हो और एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित हो।
  1. आर्थिक समानता: उस राष्ट्र में अर्थ की विषमता न हो — अर्थात् कोई अत्यधिक धनी और कोई अत्यंत निर्धन न हो।
  1. सामाजिक समानता: जातिभेद, ऊँच-नीच और छुआछूत से मुक्त समाज हो।
  1. स्त्री-पुरुष समानता: नारी को पुरुष के समान अधिकार प्राप्त हों और वह समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में बराबर की भागीदार हो।
  1. शिक्षा और उन्नति के समान अवसर: प्रत्येक व्यक्ति को — चाहे वह किसी भी वर्ग का हो — शिक्षा और प्रगति के समान अवसर मिलें।
  1. श्रम की मर्यादा: समाज में परिश्रम और कर्तव्यनिष्ठा को सम्मान मिले; आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई स्थान न हो।
  1. व्यक्तिगत स्वतंत्रता: प्रत्येक व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो और समाज के दबाव से उसका विकास न रुके।
  1. स्वदेशी समाज केंद्रित राष्ट्र: राष्ट्र की नीतियाँ और योजनाएँ अपने समाज की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई जाएँ।
(ख)नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा?Show solution

नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने भारत की पूर्ण स्वाधीनता को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा।

विस्तार से:

  • उनका मुख्य लक्ष्य था — भारत को अँग्रेजी शासन की दासता से मुक्त कराना।
  • इसके साथ ही वे एक ऐसे समाज की स्थापना करना चाहते थे जो आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से समतामूलक हो।
  • उन्होंने इसी स्वप्न को अपनी शक्ति का स्रोत और आनंद का झरना माना।
  • 'आजाद हिंद फौज' का नेतृत्व, 'दिल्ली चलो' और 'जय हिंद' के नारे — ये सब इसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए थे।
  • उन्होंने कहा — "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा" — यह नारा उनके जीवन के एकमात्र लक्ष्य को दर्शाता है।

संक्षेप में, एक स्वाधीन, समृद्ध और समतामूलक भारत का निर्माण ही उनके जीवन की सार्थकता थी।

(ग)"आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा" — सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?Show solution

नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने यह बात निम्नलिखित कारणों से कही होगी:

  1. राष्ट्र-निर्माण के लिए परिश्रम आवश्यक है: एक स्वाधीन और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब उसके प्रत्येक नागरिक परिश्रम और लगन से कार्य करें। आलसी व्यक्ति राष्ट्र की प्रगति में बाधक होते हैं।
  1. स्वतंत्रता संग्राम की माँग: उस समय देश को अँग्रेजों से मुक्त कराने के लिए प्रत्येक व्यक्ति का सक्रिय योगदान आवश्यक था। जो व्यक्ति आलसी और अकर्मण्य है, वह न तो स्वतंत्रता संग्राम में भाग ले सकता है और न ही राष्ट्र-निर्माण में।
  1. श्रम की मर्यादा: नेताजी श्रम को सर्वोच्च मूल्य मानते थे। उनके आदर्श समाज में प्रत्येक व्यक्ति को अपना कर्तव्य निभाना होगा।
  1. युवाओं को प्रेरित करना: वे देश के तरुण वर्ग को संबोधित कर रहे थे। उन्हें यह संदेश देना था कि यदि वे सच में स्वप्न के उत्तराधिकारी बनना चाहते हैं तो उन्हें कर्मठ और परिश्रमी बनना होगा।
  1. सामाजिक न्याय: जब सभी लोग परिश्रम करेंगे तो समाज में आर्थिक असमानता कम होगी और सभी को उनके श्रम का उचित फल मिलेगा।
(घ)नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?Show solution

नेताजी के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी निम्नलिखित कार्य कर सकती है:

  1. शिक्षा ग्रहण करना और दूसरों को शिक्षित करना: स्वयं शिक्षित होकर और समाज के वंचित वर्गों को शिक्षित करके ज्ञान का प्रसार करें।
  1. सामाजिक भेदभाव का विरोध: जाति, धर्म, लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव का विरोध करें और समानता को बढ़ावा दें।
  1. स्त्री-पुरुष समानता: महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करें और उन्हें समान अवसर दिलाने में सहयोग करें।
  1. परिश्रम और ईमानदारी: अपने कार्य में पूरी लगन और ईमानदारी से जुटें; भ्रष्टाचार का विरोध करें।
  1. स्वदेशी अपनाना: भारतीय उत्पादों और उद्योगों को प्रोत्साहन दें।
  1. पर्यावरण संरक्षण: देश की प्राकृतिक संपदा की रक्षा करें।
  1. राष्ट्रीय एकता: देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में योगदान दें।
  1. सामाजिक सेवा: गरीब और वंचित वर्गों की सहायता करें ताकि आर्थिक असमानता कम हो।
  1. लोकतंत्र में भागीदारी: मतदान करें और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लें।
  1. नेताजी के विचारों का प्रचार-प्रसार: उनके विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाएँ।

अनुमान और कल्पना से

(क)"उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो" — सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?Show solution

सुभाषचंद्र बोस ने निम्नलिखित दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी:

  1. राजनीतिक मुक्ति: विदेशी शासन और दमन से मुक्ति — अर्थात् अँग्रेजी शासन से स्वतंत्रता।
  1. सामाजिक मुक्ति: जाति-प्रथा, छुआछूत, ऊँच-नीच के भेदभाव से मुक्ति।
  1. आर्थिक मुक्ति: गरीबी, शोषण और आर्थिक असमानता से मुक्ति।
  1. धार्मिक मुक्ति: धार्मिक कट्टरता, अंधविश्वास और रूढ़िवादिता से मुक्ति।
  1. लैंगिक मुक्ति: स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार और स्वतंत्रता।
  1. मानसिक मुक्ति: भय, दासता की मानसिकता और हीनभावना से मुक्ति।
  1. शैक्षिक मुक्ति: शिक्षा से वंचित रहने की स्थिति से मुक्ति — सभी को शिक्षा का समान अधिकार।
  1. सांस्कृतिक मुक्ति: विदेशी संस्कृति के अंधानुकरण से मुक्ति और अपनी संस्कृति पर गर्व।
(ख)"उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे" — सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात क्यों कहनी पड़ी?Show solution

सुभाषचंद्र बोस को नारी के लिए समान अधिकारों की बात इसलिए कहनी पड़ी क्योंकि:

  1. तत्कालीन सामाजिक स्थिति: उस समय भारतीय समाज में स्त्रियों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उन्हें पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त नहीं थे।
  1. शिक्षा से वंचित: अधिकांश स्त्रियाँ शिक्षा से वंचित थीं। उन्हें घर की चारदीवारी तक सीमित रखा जाता था।
  1. सामाजिक बंधन: पर्दा-प्रथा, बाल-विवाह, विधवा-प्रथा जैसी कुरीतियाँ स्त्रियों की स्वतंत्रता में बाधक थीं।
  1. राजनीतिक भागीदारी का अभाव: स्त्रियों को राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में भाग लेने का अवसर नहीं दिया जाता था।
  1. राष्ट्र-निर्माण में योगदान: नेताजी जानते थे कि जब तक देश की आधी आबादी (स्त्रियाँ) पिछड़ी रहेगी, तब तक राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
  1. स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी: वे चाहते थे कि स्त्रियाँ भी स्वतंत्रता संग्राम में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर लड़ें — जैसा कि उनकी 'आजाद हिंद फौज' की 'रानी झाँसी रेजिमेंट' ने किया।
(ग)आपके विचार से हमारे समाज में और कौन-कौन से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?Show solution

हमारे समाज में निम्नलिखित वर्गों को विशेष अधिकार और सुरक्षा दिए जाने की आवश्यकता है:

  1. दिव्यांग (विकलांग) व्यक्ति: उन्हें शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष सुविधाएँ मिलनी चाहिए।
  1. वृद्ध नागरिक: उन्हें स्वास्थ्य सेवाएँ, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।
  1. बच्चे: उन्हें बाल-श्रम से मुक्ति, शिक्षा का अधिकार और सुरक्षित बचपन का अधिकार मिलना चाहिए।
  1. आदिवासी और वनवासी समुदाय: उन्हें अपनी भूमि, संस्कृति और जीवन-शैली की रक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।
  1. अल्पसंख्यक वर्ग: उन्हें अपनी भाषा, धर्म और संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार मिलना चाहिए।
  1. प्रवासी मजदूर: उन्हें उचित वेतन, सुरक्षित कार्य-परिस्थितियाँ और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए।
  1. निराश्रित और बेघर लोग: उन्हें आश्रय, भोजन और पुनर्वास का अधिकार मिलना चाहिए।
(घ)सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं— "हे मेरे तरुण भाइयो!" उनका संबोधन केवल 'भाइयो' शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?Show solution

सुभाषचंद्र बोस का संबोधन 'भाइयो' तक सीमित रहने के संभावित कारण:

  1. तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियाँ: उस समय सार्वजनिक सभाओं में मुख्यतः पुरुष ही भाग लेते थे। स्त्रियाँ सार्वजनिक जीवन में कम सक्रिय थीं।
  1. परंपरागत संबोधन: उस युग में सार्वजनिक भाषणों में 'भाइयो और बहनो' की जगह केवल 'भाइयो' कहने की परंपरा अधिक प्रचलित थी।
  1. अनजाने में हुई चूक: यह भी संभव है कि नेताजी ने अनजाने में ही 'बहनो' शब्द छोड़ दिया हो, जो उस समय की सामाजिक सोच का प्रतिबिंब है।
  1. विचारणीय बात: यह ध्यान देने योग्य है कि इसी भाषण में नेताजी ने नारी के समान अधिकारों की बात की है। इससे स्पष्ट होता है कि वे स्त्रियों को भी समान महत्त्व देते थे, भले ही संबोधन में यह प्रतिबिंबित न हो सका।

निष्कर्ष: यह उस समय की सामाजिक सीमाओं का परिचायक है। आज के युग में हम 'भाइयो और बहनो' या 'साथियो' जैसे समावेशी संबोधन का प्रयोग करते हैं।

(ड)"यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ — स्वीकार करो।" सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं (युवा वर्ग) की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?Show solution

सुभाषचंद्र बोस के इस भावपूर्ण आह्वान पर युवा वर्ग की संभावित प्रतिक्रिया:

  1. उत्साह और जोश: नेताजी के ओजस्वी भाषण को सुनकर युवाओं में देशभक्ति का जोश उमड़ पड़ा होगा। वे 'जय हिंद' और 'वंदे मातरम्' के नारे लगाते हुए उठ खड़े हुए होंगे।
  1. भावनात्मक प्रतिक्रिया: नेताजी के शब्दों ने युवाओं के हृदय को गहराई से छुआ होगा। कई युवाओं की आँखें भर आई होंगी।
  1. संकल्प: युवाओं ने मन ही मन यह संकल्प लिया होगा कि वे नेताजी के स्वप्न को साकार करने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देंगे।
  1. 'आजाद हिंद फौज' में भर्ती: अनेक युवाओं ने प्रेरित होकर 'आजाद हिंद फौज' में भर्ती होने का निर्णय लिया होगा।
  1. स्वप्न को स्वीकार करना: युवाओं ने नेताजी के इस 'उपहार' को — अर्थात् स्वाधीन, समृद्ध और समतामूलक भारत के स्वप्न को — पूरे उत्साह से स्वीकार किया होगा और उसे पूरा करने का प्रण लिया होगा।

शीर्षक

(क)इस पाठ को 'तरुण के स्वप्न' शीर्षक क्यों दिया गया होगा?

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(ख)यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा?

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(ग)सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रखेंगे?

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भाषा की बात

(क)सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए।

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(ख)सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।

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विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग

(क)रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए।

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(ख)अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर लिखिए।

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आपकी बात

(क)आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।

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(ख)हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।

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मिलान कीजिए (स्वतंत्रता सेनानी)

(क)स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित तथ्यों का स्तंभ 2 में दिए गए स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से सही मिलान कीजिए।

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(ख)इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम 'तरुण के स्वप्न' पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए।

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सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास

1स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए हैं?

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स्त्री सशक्तीकरण

(क)सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधिकार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?

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(ख)सुभाषचंद्र बोस ने 'आजाद हिंद फौज' का नेतृत्व किया था। उसमें एक टुकड़ी स्त्रियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी?

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आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी

1आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं? कारण सहित लिखिए।

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स्वतंत्रता संग्राम के नारे

1नीचे दिए गए नारों के सामने लिखिए कि यह किसके द्वारा दिया गया?

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परियोजना कार्य

1सभी राज्यों के स्वतंत्रता सेनानियों में से 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों का संग्रह करके एक संग्रहिका तैयार कीजिए।

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झरोखे से — साझी समझ

1नेताजी सुभाषचंद्र बोस के पत्र में गृह एवं कुटीर उद्योग की बात की गई है। अपने आस-पास के गृह एवं कुटीर उद्योगों के विषय में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।

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18 more solved questions in तरुण के स्वप्न (उद्बोधन)-सुभाषचंद्र बोस

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in तरुण के स्वप्न (उद्बोधन)-सुभाषचंद्र बोस for CBSE Class 8 Hindi?
Key topics in तरुण के स्वप्न (उद्बोधन)-सुभाषचंद्र बोस include उद्बोधन का मुख्य भाव, आदर्श समाज की विशेषताएँ, त्याग, बलिदान और प्रेरणा, लेखक परिचय और ऐतिहासिक संदर्भ. Study these first, then practise questions on each for Class 8 exams.
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Sources & Official References

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