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Chapter 9 of 10
NCERT Solutions

आदमी का अनुपात (कविता)-गिरिजा कुमार माथुर — NCERT Solutions

CBSE · Class 8 · Hindi

NCERT Solutions for आदमी का अनुपात (कविता)-गिरिजा कुमार माथुर, CBSE Class 8 Hindi: 44 textbook questions solved step by step.

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44 Questions Solved · 15 Sections

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पाठ से — मेरी समझ से

(क)(1)कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?Show solution

सही उत्तर: ★ ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म

स्पष्टीकरण: कविता में कवि ने स्पष्ट किया है कि मानव जिस पृथ्वी पर रहता है, वह स्वयं अनगिनत नक्षत्रों में से एक छोटी-सी पृथ्वी है। इस प्रकार ब्रह्मांड की विशालता के सामने मानव का स्थान अत्यंत सूक्ष्म और नगण्य है।

(क)(2)कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?Show solution

सही उत्तर: ★ मानव और ब्रह्मांड

स्पष्टीकरण: कविता का शीर्षक ही 'आदमी का अनुपात' है। कवि ने मानव (आदमी) और ब्रह्मांड (विराट सृष्टि) के बीच के अनुपात को दिखाया है — यह बताते हुए कि मानव ब्रह्मांड की तुलना में कितना छोटा है, फिर भी वह अहंकार में डूबा रहता है।

(क)(3)कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?Show solution

सही उत्तर: ★ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में

स्पष्टीकरण: कविता में कवि ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि मानव ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक भावनाओं में लिप्त रहता है। वह दीवारें खींचता है, दूसरों पर स्वामित्व जताता है और एक ही कमरे में दो दुनिया बना लेता है।

(क)(4)कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?Show solution

सही उत्तर: ★ वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।

स्पष्टीकरण: कविता का केंद्रीय भाव यही है कि मानव ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत लघु है, परंतु वह इस सत्य को भूलकर अहंकार में डूब जाता है, दूसरों पर शासन करने की कोशिश करता है और कृत्रिम दीवारें खड़ी करता है। यही उसका सबसे बड़ा दोष है।

(ख)हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution

यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। इसके लिए संकेत:

  • प्रत्येक विद्यार्थी अपने चुने हुए उत्तर के पक्ष में कविता की पंक्तियाँ प्रस्तुत करे।
  • उदाहरण के लिए, प्रश्न (1) में 'ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म' उत्तर चुनने का कारण यह है कि कविता में 'अनगिन नक्षत्रों में पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक ही' जैसी पंक्तियाँ इसी भाव को व्यक्त करती हैं।
  • समूह में चर्चा करने से कविता की गहरी समझ विकसित होती है और विभिन्न दृष्टिकोण सामने आते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

(क)"अनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटी / करोड़ों में एक ही।" — इन पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution

दिया गया है: कविता 'आदमी का अनुपात' की उपर्युक्त पंक्तियाँ।

अर्थ एवं व्याख्या:
इन पंक्तियों में कवि ने ब्रह्मांड की विशालता और पृथ्वी की लघुता को दर्शाया है। ब्रह्मांड में अनगिनत (असंख्य) नक्षत्र (तारे और ग्रह) हैं। उन करोड़ों नक्षत्रों में हमारी पृथ्वी मात्र एक छोटा-सा ग्रह है। 'करोड़ों में एक ही' कहकर कवि यह बताना चाहता है कि पृथ्वी का अस्तित्व ब्रह्मांड में बहुत ही नगण्य है।

भाव: यदि पृथ्वी इतनी छोटी है, तो उस पर रहने वाला मानव कितना सूक्ष्म होगा — यह सोचकर मनुष्य को अहंकार छोड़ देना चाहिए।

(ख)"संख्यातित शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।" — इन पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution

दिया गया है: कविता की उपर्युक्त पंक्तियाँ।

अर्थ एवं व्याख्या:
'संख्यातीत' का अर्थ है — जिसे गिना न जा सके, असंख्य। 'शंख' भारतीय संख्या प्रणाली में एक बहुत बड़ी संख्या है (10¹⁷)। इन पंक्तियों में कवि कहता है कि मानव अनगिनत दीवारें खड़ी करता है — ये दीवारें केवल ईंट-पत्थर की नहीं, बल्कि जाति, धर्म, भाषा, देश, वर्ग आदि के आधार पर खींची गई कृत्रिम सीमाएँ हैं। इतना ही नहीं, वह स्वयं को दूसरों का स्वामी (मालिक) भी बताता है।

भाव: मनुष्य का अहंकार और वर्चस्व की भावना उसे बाँटती है और समाज में विभाजन पैदा करती है।

(ग)"देशों की कौन कहे / एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है।" — इन पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution

दिया गया है: कविता की उपर्युक्त पंक्तियाँ।

अर्थ एवं व्याख्या:
इन पंक्तियों में कवि व्यंग्यपूर्वक कहता है कि मनुष्य की संकीर्णता इतनी अधिक है कि देशों के बीच तो वह दीवारें खींचता ही है, परंतु एक छोटे से कमरे में रहने वाले दो व्यक्ति भी आपस में दो अलग-अलग दुनिया बना लेते हैं — अर्थात् वे एक-दूसरे से मनमुटाव, ईर्ष्या और अहंकार के कारण अलग-थलग रहते हैं।

भाव: मनुष्य की विभाजनकारी प्रवृत्ति इतनी गहरी है कि वह सीमित स्थान में भी अलगाव पैदा कर लेता है। यह उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।

मिलकर करें मिलान

1स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए।Show solution

दिया गया है: दो स्तंभ — स्तंभ 1 में कविता की पंक्तियाँ और स्तंभ 2 में उनके अर्थ।

सही मिलान:

  1. संख्यातित शंख सी दीवारें → 3. मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ
  1. पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक → 5. पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत
  1. ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा → 6. मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ
  1. दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे → 2. आदमी के संकुचित होने का प्रतीक
  1. परिधि नभ गंगा की → 1. ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक
  1. एक कमरे में दो दुनिया रचाता → 4. सीमित स्थान में भी और अलगाव की प्रवृत्ति

अनुपात

1मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्यों चुने, यह भी साझा कीजिए।Show solution

दिए गए शब्दों में से उपयुक्त गुण:

मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए निम्नलिखित गुणों की आवश्यकता होगी:

  1. सहअस्तित्व — ब्रह्मांड में सभी ग्रह, तारे और आकाशगंगाएँ एक-दूसरे के साथ मिलकर अस्तित्व में हैं। मनुष्य को भी सबके साथ मिलकर रहना चाहिए।
  1. सौहार्द — आपसी प्रेम और मित्रता से समाज में एकता आती है।
  1. समावेशिता — सभी को समान महत्व देना, किसी को बाहर न करना।
  1. सहनशीलता — दूसरों के विचारों और मतभेदों को सहन करने की शक्ति।
  1. संतुलन — जैसे ब्रह्मांड में सब कुछ संतुलित है, वैसे ही मनुष्य को अपने जीवन में संतुलन बनाए रखना चाहिए।
  1. विस्तार — अपनी सोच को संकीर्ण न रखकर विशाल बनाना।
  1. शांति — आंतरिक और बाह्य शांति से ही विराटता प्राप्त होती है।
  1. स्वतंत्रता — सबको स्वतंत्र रूप से जीने का अधिकार देना।

ये गुण इसलिए चुने क्योंकि ब्रह्मांड में कोई भेदभाव नहीं है — सूर्य सबको समान रूप से प्रकाश देता है, वायु सबके लिए है। मनुष्य यदि इन्हीं गुणों को अपनाए तो वह भी ब्रह्मांड जैसी विशालता प्राप्त कर सकता है।

जो शब्द उचित नहीं हैं (त्यागने योग्य): वर्चस्व, ईर्ष्या, सीमाबद्धता, विरोध, लघुता, अहंकार, मतभेद, स्वार्थ, अविश्वास — ये सभी मनुष्य को संकुचित बनाते हैं।

सोच-विचार के लिए

(क)कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?Show solution

दिया गया है: कविता 'आदमी का अनुपात'।

उत्तर:
कविता के अनुसार मानव निम्नलिखित कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है:

  1. अहंकार (अहं): मनुष्य स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझता है और दूसरों को हीन मानता है। इससे वह अपनी एक अलग दुनिया बना लेता है।
  1. ईर्ष्या: दूसरों की उन्नति देखकर जलन की भावना उसे दूसरों से अलग कर देती है।
  1. स्वार्थ: केवल अपने हित की सोचने के कारण वह दूसरों से दूरी बना लेता है।
  1. घृणा: जाति, धर्म, भाषा, रंग आदि के आधार पर घृणा करने से वह कृत्रिम दीवारें खड़ी करता है।
  1. वर्चस्व की भावना: 'अपने को दूजे का स्वामी बताने' की प्रवृत्ति उसे दूसरों पर शासन करने के लिए प्रेरित करती है, जिससे संघर्ष और विभाजन होता है।
  1. संकीर्ण दृष्टिकोण: मनुष्य अपने छोटेपन को नहीं पहचानता, इसलिए वह छोटी-छोटी बातों पर दीवारें खड़ी करता रहता है।

निष्कर्ष: ये सभी नकारात्मक भावनाएँ मिलकर मनुष्य को सीमाओं में जकड़ देती हैं।

(ख)यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?Show solution

चुनी गई पंक्ति:
"यह है अनुपात आदमी का विराट से"

कारण:
मैं इस पंक्ति को दीवार पर लिखना चाहूँगा/चाहूँगी क्योंकि यह पंक्ति प्रतिदिन मुझे याद दिलाएगी कि मैं इस विशाल ब्रह्मांड में कितना/कितनी छोटा/छोटी हूँ। जब भी मेरे मन में अहंकार, ईर्ष्या या स्वार्थ की भावना आए, यह पंक्ति मुझे विनम्र बनाएगी। यह पंक्ति मुझे प्रेरित करेगी कि मैं अपनी सोच को विशाल बनाऊँ, दूसरों से प्रेम करूँ और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाऊँ।

(नोट: विद्यार्थी अपनी पसंद की कोई भी पंक्ति चुन सकते हैं, बशर्ते उसका उचित कारण दिया जाए।)

(ग)कवि ने मानव की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा— व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?Show solution

उत्तर:
इस कविता का भाव मुझे मुख्यतः चिंता और व्यंग्य का मिश्रण लगा।

व्यंग्य इसलिए: जब कवि कहता है — 'देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है' — तो यह मनुष्य की संकीर्णता पर तीखा व्यंग्य है। कवि बिना क्रोध के, शांत भाव से मनुष्य की मूर्खता को उजागर करता है।

चिंता इसलिए: कवि को मानव की दशा की चिंता है। वह देखता है कि इतने विशाल ब्रह्मांड में रहते हुए भी मनुष्य छोटी-छोटी बातों पर लड़ता है, दीवारें खींचता है। यह चिंता उसकी पंक्तियों में झलकती है।

करुणा भी है: मनुष्य की इस अज्ञानता पर कवि को करुणा भी आती है कि वह अपनी लघुता को नहीं समझता।

निष्कर्ष: कविता का समग्र भाव एक सहृदय शिक्षक जैसा है जो बिना डाँटे, प्रेम से समझाता है।

(घ)आपके अनुसार 'दीवारें उठाना' केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने विचारानुसार समझाइए।Show solution

उत्तर:
'दीवारें उठाना' केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम नहीं है। इसके अनेक अर्थ हो सकते हैं:

  1. मानसिक दीवारें: जब हम किसी से बात करना बंद कर देते हैं, उसे अनदेखा करते हैं — यह एक अदृश्य दीवार है।
  1. सामाजिक दीवारें: जाति, धर्म, भाषा, रंग के आधार पर भेदभाव करना — ये सामाजिक दीवारें हैं।
  1. भावनात्मक दीवारें: ईर्ष्या, घृणा और अहंकार के कारण दिलों के बीच जो दूरी बनती है — वह भावनात्मक दीवार है।
  1. राजनीतिक दीवारें: देशों के बीच सीमाएँ, युद्ध और संघर्ष — ये राजनीतिक दीवारें हैं।
  1. आर्थिक दीवारें: अमीर-गरीब के बीच की खाई भी एक प्रकार की दीवार है।

निष्कर्ष: कविता में 'दीवारें उठाना' मनुष्य की उस प्रवृत्ति का प्रतीक है जिसमें वह हर स्तर पर विभाजन और अलगाव पैदा करता है। ये दीवारें ईंट-पत्थर से नहीं, बल्कि नकारात्मक भावनाओं से बनती हैं।

(ङ)मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?Show solution

उत्तर:
सहिष्णुता और सहयोग से समाज में परिवर्तन के उदाहरण:

  1. महात्मा गांधी और अहिंसा आंदोलन:

गांधीजी ने सहिष्णुता और अहिंसा के बल पर भारत को अंग्रेजों से आजाद कराया। उन्होंने घृणा और हिंसा का सहारा नहीं लिया, बल्कि प्रेम और सत्य से लड़ाई लड़ी। इससे पूरे विश्व में शांतिपूर्ण आंदोलन की प्रेरणा मिली।

  1. COVID-19 महामारी में सहयोग:

कोरोना महामारी के दौरान विश्व के वैज्ञानिकों ने मिलकर वैक्सीन बनाई। देशों ने एक-दूसरे की सहायता की। इस सहयोग से लाखों जीवन बचाए गए।

  1. भारत की विविधता में एकता:

भारत में अनेक धर्म, भाषाएँ और संस्कृतियाँ हैं। सहिष्णुता के कारण ही ये सब मिलकर एक राष्ट्र के रूप में जीते हैं।

  1. नेल्सन मंडेला:

दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के विरुद्ध मंडेला ने सहिष्णुता और क्षमा का मार्ग अपनाया, जिससे वहाँ शांति और समानता स्थापित हुई।

निष्कर्ष: इतिहास गवाह है कि जहाँ सहयोग और सहिष्णुता रही, वहाँ समाज का विकास हुआ। नकारात्मक प्रवृत्तियाँ केवल विनाश लाती हैं।

अनुमान और कल्पना

(क)मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहेंगे? क्यों?Show solution

उत्तर:
यदि मैं एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकता/सकती, तो मैं मानव की निम्नलिखित आदतों को बदलना चाहूँगा/चाहूँगी:

  1. अहंकार की आदत: मैं चाहूँगा/चाहूँगी कि हर मनुष्य एक बार ब्रह्मांड की विशालता को देखे और अपनी लघुता को समझे, ताकि उसका अहंकार समाप्त हो।
  1. भेदभाव की आदत: जाति, धर्म, रंग के आधार पर भेदभाव करने की आदत बदलना चाहूँगा/चाहूँगी। सभी मनुष्य एक ही पृथ्वी के निवासी हैं।
  1. पर्यावरण को नष्ट करने की आदत: मनुष्य प्रकृति का दोहन करता है। मैं इसे बदलकर पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाना चाहूँगा/चाहूँगी।
  1. युद्ध और हिंसा की आदत: देशों के बीच युद्ध की बजाय संवाद और शांति को बढ़ावा देना चाहूँगा/चाहूँगी।
  1. स्वार्थ की आदत: 'केवल मेरा' की सोच बदलकर 'सबका' की सोच लाना चाहूँगा/चाहूँगी।

कारण: ये आदतें मनुष्य को छोटा बनाती हैं और समाज को कमजोर करती हैं।

(ख)यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएं और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाएं तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों?Show solution

उत्तर:
यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाऊँ, तो मैं सबसे अधिक अपने घर को याद करूँगा/करूँगी।

कारण:
घर केवल एक इमारत नहीं है — वह माँ की ममता, पिता का आशीर्वाद, भाई-बहन का प्यार और परिवार की गर्माहट का प्रतीक है। ब्रह्मांड की विशालता में जब मैं अकेला/अकेली होऊँगा/होऊँगी, तब घर की छोटी-छोटी बातें — माँ के हाथ का खाना, घर की खुशबू, परिवार की हँसी — सबसे अधिक याद आएंगी।

इसके अलावा, मैं अपने विद्यालय और मित्रों को भी याद करूँगा/करूँगी क्योंकि वहाँ बिताए पल जीवन की सबसे अनमोल यादें हैं।

निष्कर्ष: ब्रह्मांड की विशालता में भी मनुष्य का दिल अपने छोटे से घर में ही बसता है।

(ग)मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है— वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।Show solution

कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत:

'सीमाओं से परे'

आज आर्यन ने तय किया कि वह सभी सीमाओं को पार करेगा। पहले उसने अपने कमरे की दीवारें पार कीं — और देखा कि घर में सब एक-दूसरे से प्यार करते हैं। फिर उसने मोहल्ले की सीमा पार की — वहाँ अलग-अलग धर्म और जाति के लोग मिलकर त्योहार मना रहे थे।

नगर की सीमा पार करने पर उसने देखा कि देश में अनेक भाषाएँ, संस्कृतियाँ और परंपराएँ हैं — सब मिलकर एक सुंदर माला बनाती हैं। देश की सीमा पार करने पर उसने पाया कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।

फिर वह पृथ्वी से ऊपर उठा — अंतरिक्ष में। वहाँ से पृथ्वी एक छोटी-सी नीली गेंद जैसी दिखी। उसे समझ आया कि जिन सीमाओं के लिए मनुष्य लड़ते हैं, वे ऊपर से दिखती भी नहीं।

आगे बढ़ते-बढ़ते वह आकाशगंगा तक पहुँचा — करोड़ों तारों की रोशनी में नहाया। और फिर ब्रह्मांड के छोर पर जाकर उसने देखा — अनंत शांति, अनंत विस्तार।

आर्यन वापस लौटा — एक नई समझ लेकर: 'सभी सीमाएँ मनुष्य ने बनाई हैं, प्रकृति ने नहीं।'

(घ)इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए— "मैं ब्रह्मांड में एक... हूँ।"Show solution

अनुच्छेद:

"मैं ब्रह्मांड में एक... हूँ।"

मैं ब्रह्मांड में एक छोटी-सी चिंगारी हूँ। जब मैं इस कविता को पढ़ता/पढ़ती हूँ, तो मुझे अहसास होता है कि यह विशाल ब्रह्मांड — जिसमें अनगिनत आकाशगंगाएँ हैं, करोड़ों तारे हैं, अनेक ग्रह हैं — उसमें हमारी पृथ्वी एक छोटा-सा कण है। और उस पृथ्वी पर मैं और भी छोटा/छोटी हूँ।

यह सोचकर मेरा अहंकार पिघल जाता है। मुझे लगता है कि जिन छोटी-छोटी बातों पर मैं दुखी होता/होती हूँ, जिन लोगों से मैं ईर्ष्या करता/करती हूँ — वे सब कितनी नगण्य बातें हैं! ब्रह्मांड की इस विशालता के सामने मेरी सारी समस्याएँ धूल के कण जैसी हैं।

लेकिन साथ ही मुझे गर्व भी होता है — कि इस विशाल ब्रह्मांड में मैं एक सोचने-समझने वाला/वाली प्राणी हूँ। मेरे पास प्रेम करने की, सपने देखने की और दुनिया को बेहतर बनाने की शक्ति है। यही मेरी विशेषता है।

(ङ)मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों?Show solution

उत्तर:
यदि किसी दूसरे संसार से पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता हो, तो मैं एक ऐसे व्यक्ति को भेजना चाहूँगा/चाहूँगी जिसमें निम्नलिखित गुण हों:

मैं किसी महान वैज्ञानिक जैसे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को भेजना चाहूँगा/चाहूँगी।

कारण:

  1. वे एक महान वैज्ञानिक थे जो पृथ्वी का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान उस संसार तक पहुँचा सकते थे।
  2. वे अत्यंत विनम्र और सहिष्णु थे — अहंकार से मुक्त।
  3. उनमें सभी के प्रति प्रेम और सम्मान था — वे पृथ्वी के सच्चे प्रतिनिधि हो सकते थे।
  4. उनका सपना था कि पूरी दुनिया शांति और प्रगति के मार्ग पर चले।

निष्कर्ष: पृथ्वी का प्रतिनिधि वह होना चाहिए जो ज्ञान, प्रेम और विनम्रता का प्रतीक हो — न कि अहंकार और स्वार्थ का।

(च)कविता में 'ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ' जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन के लिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा?Show solution

उत्तर:
यदि एक दिन के लिए ईर्ष्या, अहंकार और स्वार्थ सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ, तो समाज में निम्नलिखित परिवर्तन होंगे:

  1. युद्ध और झगड़े बंद: देशों के बीच युद्ध नहीं होगा। पड़ोसियों में झगड़े नहीं होंगे। परिवारों में कलह नहीं होगी।
  1. सहयोग और प्रेम: सभी लोग एक-दूसरे की सहायता करेंगे। गरीबों को अमीर लोग स्वेच्छा से सहायता देंगे।
  1. पर्यावरण की रक्षा: स्वार्थ न होने से लोग प्रकृति का दोहन नहीं करेंगे, बल्कि उसकी रक्षा करेंगे।
  1. समानता: जाति, धर्म, रंग के आधार पर भेदभाव समाप्त हो जाएगा।
  1. खुशहाली: बिना ईर्ष्या के सभी एक-दूसरे की सफलता में खुश होंगे।
  1. न्याय: न्यायालयों में मुकदमे कम होंगे क्योंकि स्वार्थ के कारण होने वाले अपराध नहीं होंगे।

निष्कर्ष: वह एक दिन स्वर्ग जैसा होगा — और यही कविता का संदेश है कि हम ऐसे समाज की ओर बढ़ें।

(छ)यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो जिसमें इसके मूल भाव— 'विराटता और लघुता' तथा 'मनुष्य का भ्रम'— दर्शाया जाए तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए।Show solution

पोस्टर की योजना:

चित्र:

  • पृष्ठभूमि में विशाल ब्रह्मांड — आकाशगंगाएँ, तारे, ग्रह।
  • बीच में एक छोटी-सी पृथ्वी।
  • पृथ्वी पर एक अत्यंत छोटा मनुष्य — जो बड़े गर्व से खड़ा है और अपनी छाती ठोक रहा है।
  • मनुष्य के चारों ओर छोटी-छोटी दीवारें।

प्रतीक:

  • ब्रह्मांड — विराटता का प्रतीक
  • छोटा मनुष्य — लघुता का प्रतीक
  • दीवारें — मनुष्य के भ्रम और अहंकार का प्रतीक
  • टूटी हुई दीवार — आशा और परिवर्तन का प्रतीक

शब्द/नारे:

  • 'करोड़ों में एक पृथ्वी — फिर भी अहंकार क्यों?'
  • 'यह है अनुपात आदमी का विराट से'
  • 'दीवारें तोड़ो, दिल जोड़ो'

रंग: गहरा नीला (ब्रह्मांड के लिए), हरा (पृथ्वी के लिए), लाल (अहंकार के लिए), सफेद (शांति के लिए)।

शब्द से जुड़े शब्द

1'सृष्टि' से जुड़े शब्द लिखिए।

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सृजन

(क)कविता में कमरे से लेकर ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को अपनी तरह से एक रेखाचित्र, सीढ़ी या 'मानसिक-चित्रण' (माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए। प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ लिखिए। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए— "मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?"

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(ख)अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो जिसका नाम हो 'ब्रह्मांड में मानव' तो उसको आरंभ कैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।

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(ग)'एक कमरे में दो दुनिया रचाता है' पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए जिसमें कोई दीवार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।

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(घ)एक चित्र शृंखला बनाइए जिसमें ये क्रम दिखे— आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड। प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए।

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कविता की रचना

(क)अपने समूह के साथ मिलकर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।

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(ख)कविता की विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।

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कविता का सौंदर्य

(क)कविता में अलग-अलग प्रकार से ब्रह्मांड की विशालता को व्यक्त किया गया है। उनकी पहचान कीजिए।

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(ख)कविता में मनुष्य के लिए आई क्रियाओं की तरह नई क्रियाओं का प्रयोग करके कविता की रचना कीजिए।

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आपके शब्द

1'नभ गंगा' की तरह दो शब्दों को मिलाकर नए शब्द बनाइए।

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आपके प्रश्न

1'हर ब्रह्मांड में कितनी ही पृथ्वियाँ, कितनी ही भूमियाँ, कितनी ही सृष्टियाँ' — इस प्रकार के प्रश्नों की सूची बनाइए और उत्तर ढूँढ़ने का प्रयास कीजिए।

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विशेषण और विशेष्य

1नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों को पहचानकर लिखिए।

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पाठ से आगे — आपकी बात

(क)कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ 'अनुपात' बिगड़ गया हो — जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम।

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(ख)आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में 'विराटता' (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए।

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(ग)'करोड़ों में एक ही पृथ्वी' — इस पंक्ति को पढ़कर आपके मन में क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करेंगे?

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(घ)कविता हमें 'अपने को दूजे का स्वामी बताने' के प्रति सचेत करती है। आप अपने किन-किन गुणों को प्रबल करेंगे ताकि आपमें ऐसा भाव न आए?

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(ड)अपने जीवन में ऐसी तीन 'दीवारों' के विषय में सोचिए जो आपने स्वयं खड़ी की हैं। फिर एक योजना बनाइए कि आप उन्हें कैसे तोड़ेंगे? क्या समाज में भी ऐसी दीवारें होती हैं? उन्हें गिराने में हम कैसे सहायता कर सकते हैं?

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संख्यातीत शंख — तालिका पर आधारित प्रश्न

1जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?

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2महाशंख में कितने शून्य होते हैं?

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3एक लाख में कितने हजार होते हैं?

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4उपर्युक्त तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?

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5दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?

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22 more solved questions in आदमी का अनुपात (कविता)-गिरिजा कुमार माथुर

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Frequently Asked Questions

What are the important topics in आदमी का अनुपात (कविता)-गिरिजा कुमार माथुर for CBSE Class 8 Hindi?
Key topics in आदमी का अनुपात (कविता)-गिरिजा कुमार माथुर include कवि परिचय, कविता का मुख्य भाव, मुख्य पंक्तियों का आशय, साहित्यिक विशेषताएँ. Study these first, then practise questions on each for Class 8 exams.
Are these NCERT Solutions for आदमी का अनुपात (कविता)-गिरिजा कुमार माथुर free?
The first 22 of the 44 solutions on this page are open to read. The other 22 are free with a Super Tutor account — signing up is free and needs no card.
How should I revise आदमी का अनुपात (कविता)-गिरिजा कुमार माथुर for Class 8 exams?
Learn the core ideas first, then work through the 42 practice questions on आदमी का अनुपात (कविता)-गिरिजा कुमार माथुर. Revise definitions regularly and use flashcards for quick recall before the exam.

Sources & Official References

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