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Chapter 9 of 10
NCERT Solutions

आदमी का अनुपात

CBSE · Class 8 · Hindi

NCERT Solutions for आदमी का अनुपात — CBSE Class 8 Hindi.

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44 Questions Solved · 15 Sections

पाठ से — मेरी समझ से

(क)(1)कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?Show solution
सही उत्तर: ★ ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म

स्पष्टीकरण: कविता में कवि ने स्पष्ट किया है कि मानव जिस पृथ्वी पर रहता है, वह स्वयं अनगिनत नक्षत्रों में से एक छोटी-सी पृथ्वी है। इस प्रकार ब्रह्मांड की विशालता के सामने मानव का स्थान अत्यंत सूक्ष्म और नगण्य है।
(क)(2)कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?Show solution
सही उत्तर: ★ मानव और ब्रह्मांड

स्पष्टीकरण: कविता का शीर्षक ही 'आदमी का अनुपात' है। कवि ने मानव (आदमी) और ब्रह्मांड (विराट सृष्टि) के बीच के अनुपात को दिखाया है — यह बताते हुए कि मानव ब्रह्मांड की तुलना में कितना छोटा है, फिर भी वह अहंकार में डूबा रहता है।
(क)(3)कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?Show solution
सही उत्तर: ★ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में

स्पष्टीकरण: कविता में कवि ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि मानव ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक भावनाओं में लिप्त रहता है। वह दीवारें खींचता है, दूसरों पर स्वामित्व जताता है और एक ही कमरे में दो दुनिया बना लेता है।
(क)(4)कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?Show solution
सही उत्तर: ★ वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।

स्पष्टीकरण: कविता का केंद्रीय भाव यही है कि मानव ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत लघु है, परंतु वह इस सत्य को भूलकर अहंकार में डूब जाता है, दूसरों पर शासन करने की कोशिश करता है और कृत्रिम दीवारें खड़ी करता है। यही उसका सबसे बड़ा दोष है।
(ख)हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution
यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। इसके लिए संकेत:

• प्रत्येक विद्यार्थी अपने चुने हुए उत्तर के पक्ष में कविता की पंक्तियाँ प्रस्तुत करे।
• उदाहरण के लिए, प्रश्न (1) में 'ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म' उत्तर चुनने का कारण यह है कि कविता में 'अनगिन नक्षत्रों में पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक ही' जैसी पंक्तियाँ इसी भाव को व्यक्त करती हैं।
• समूह में चर्चा करने से कविता की गहरी समझ विकसित होती है और विभिन्न दृष्टिकोण सामने आते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

(क)"अनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटी / करोड़ों में एक ही।" — इन पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया है: कविता 'आदमी का अनुपात' की उपर्युक्त पंक्तियाँ।

अर्थ एवं व्याख्या:
इन पंक्तियों में कवि ने ब्रह्मांड की विशालता और पृथ्वी की लघुता को दर्शाया है। ब्रह्मांड में अनगिनत (असंख्य) नक्षत्र (तारे और ग्रह) हैं। उन करोड़ों नक्षत्रों में हमारी पृथ्वी मात्र एक छोटा-सा ग्रह है। 'करोड़ों में एक ही' कहकर कवि यह बताना चाहता है कि पृथ्वी का अस्तित्व ब्रह्मांड में बहुत ही नगण्य है।

भाव: यदि पृथ्वी इतनी छोटी है, तो उस पर रहने वाला मानव कितना सूक्ष्म होगा — यह सोचकर मनुष्य को अहंकार छोड़ देना चाहिए।
(ख)"संख्यातित शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।" — इन पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया है: कविता की उपर्युक्त पंक्तियाँ।

अर्थ एवं व्याख्या:
'संख्यातीत' का अर्थ है — जिसे गिना न जा सके, असंख्य। 'शंख' भारतीय संख्या प्रणाली में एक बहुत बड़ी संख्या है (10¹⁷)। इन पंक्तियों में कवि कहता है कि मानव अनगिनत दीवारें खड़ी करता है — ये दीवारें केवल ईंट-पत्थर की नहीं, बल्कि जाति, धर्म, भाषा, देश, वर्ग आदि के आधार पर खींची गई कृत्रिम सीमाएँ हैं। इतना ही नहीं, वह स्वयं को दूसरों का स्वामी (मालिक) भी बताता है।

भाव: मनुष्य का अहंकार और वर्चस्व की भावना उसे बाँटती है और समाज में विभाजन पैदा करती है।
(ग)"देशों की कौन कहे / एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है।" — इन पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution
दिया गया है: कविता की उपर्युक्त पंक्तियाँ।

अर्थ एवं व्याख्या:
इन पंक्तियों में कवि व्यंग्यपूर्वक कहता है कि मनुष्य की संकीर्णता इतनी अधिक है कि देशों के बीच तो वह दीवारें खींचता ही है, परंतु एक छोटे से कमरे में रहने वाले दो व्यक्ति भी आपस में दो अलग-अलग दुनिया बना लेते हैं — अर्थात् वे एक-दूसरे से मनमुटाव, ईर्ष्या और अहंकार के कारण अलग-थलग रहते हैं।

भाव: मनुष्य की विभाजनकारी प्रवृत्ति इतनी गहरी है कि वह सीमित स्थान में भी अलगाव पैदा कर लेता है। यह उसकी सबसे बड़ी कमजोरी है।

मिलकर करें मिलान

1स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए।Show solution
दिया गया है: दो स्तंभ — स्तंभ 1 में कविता की पंक्तियाँ और स्तंभ 2 में उनके अर्थ।

सही मिलान:

1. संख्यातित शंख सी दीवारें → 3. मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ

2. पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक → 5. पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत

3. ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा → 6. मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ

4. दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे → 2. आदमी के संकुचित होने का प्रतीक

5. परिधि नभ गंगा की → 1. ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक

6. एक कमरे में दो दुनिया रचाता → 4. सीमित स्थान में भी और अलगाव की प्रवृत्ति

अनुपात

1मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्यों चुने, यह भी साझा कीजिए।Show solution
दिए गए शब्दों में से उपयुक्त गुण:

मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए निम्नलिखित गुणों की आवश्यकता होगी:

1. सहअस्तित्व — ब्रह्मांड में सभी ग्रह, तारे और आकाशगंगाएँ एक-दूसरे के साथ मिलकर अस्तित्व में हैं। मनुष्य को भी सबके साथ मिलकर रहना चाहिए।

2. सौहार्द — आपसी प्रेम और मित्रता से समाज में एकता आती है।

3. समावेशिता — सभी को समान महत्व देना, किसी को बाहर न करना।

4. सहनशीलता — दूसरों के विचारों और मतभेदों को सहन करने की शक्ति।

5. संतुलन — जैसे ब्रह्मांड में सब कुछ संतुलित है, वैसे ही मनुष्य को अपने जीवन में संतुलन बनाए रखना चाहिए।

6. विस्तार — अपनी सोच को संकीर्ण न रखकर विशाल बनाना।

7. शांति — आंतरिक और बाह्य शांति से ही विराटता प्राप्त होती है।

8. स्वतंत्रता — सबको स्वतंत्र रूप से जीने का अधिकार देना।

ये गुण इसलिए चुने क्योंकि ब्रह्मांड में कोई भेदभाव नहीं है — सूर्य सबको समान रूप से प्रकाश देता है, वायु सबके लिए है। मनुष्य यदि इन्हीं गुणों को अपनाए तो वह भी ब्रह्मांड जैसी विशालता प्राप्त कर सकता है।

जो शब्द उचित नहीं हैं (त्यागने योग्य): वर्चस्व, ईर्ष्या, सीमाबद्धता, विरोध, लघुता, अहंकार, मतभेद, स्वार्थ, अविश्वास — ये सभी मनुष्य को संकुचित बनाते हैं।

सोच-विचार के लिए

(क)कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?Show solution
दिया गया है: कविता 'आदमी का अनुपात'।

उत्तर:
कविता के अनुसार मानव निम्नलिखित कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है:

1. अहंकार (अहं): मनुष्य स्वयं को सर्वश्रेष्ठ समझता है और दूसरों को हीन मानता है। इससे वह अपनी एक अलग दुनिया बना लेता है।

2. ईर्ष्या: दूसरों की उन्नति देखकर जलन की भावना उसे दूसरों से अलग कर देती है।

3. स्वार्थ: केवल अपने हित की सोचने के कारण वह दूसरों से दूरी बना लेता है।

4. घृणा: जाति, धर्म, भाषा, रंग आदि के आधार पर घृणा करने से वह कृत्रिम दीवारें खड़ी करता है।

5. वर्चस्व की भावना: 'अपने को दूजे का स्वामी बताने' की प्रवृत्ति उसे दूसरों पर शासन करने के लिए प्रेरित करती है, जिससे संघर्ष और विभाजन होता है।

6. संकीर्ण दृष्टिकोण: मनुष्य अपने छोटेपन को नहीं पहचानता, इसलिए वह छोटी-छोटी बातों पर दीवारें खड़ी करता रहता है।

निष्कर्ष: ये सभी नकारात्मक भावनाएँ मिलकर मनुष्य को सीमाओं में जकड़ देती हैं।
(ख)यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?Show solution
चुनी गई पंक्ति:
"यह है अनुपात आदमी का विराट से"

कारण:
मैं इस पंक्ति को दीवार पर लिखना चाहूँगा/चाहूँगी क्योंकि यह पंक्ति प्रतिदिन मुझे याद दिलाएगी कि मैं इस विशाल ब्रह्मांड में कितना/कितनी छोटा/छोटी हूँ। जब भी मेरे मन में अहंकार, ईर्ष्या या स्वार्थ की भावना आए, यह पंक्ति मुझे विनम्र बनाएगी। यह पंक्ति मुझे प्रेरित करेगी कि मैं अपनी सोच को विशाल बनाऊँ, दूसरों से प्रेम करूँ और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाऊँ।

(नोट: विद्यार्थी अपनी पसंद की कोई भी पंक्ति चुन सकते हैं, बशर्ते उसका उचित कारण दिया जाए।)
(ग)कवि ने मानव की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा— व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?Show solution
उत्तर:
इस कविता का भाव मुझे मुख्यतः चिंता और व्यंग्य का मिश्रण लगा।

व्यंग्य इसलिए: जब कवि कहता है — 'देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है' — तो यह मनुष्य की संकीर्णता पर तीखा व्यंग्य है। कवि बिना क्रोध के, शांत भाव से मनुष्य की मूर्खता को उजागर करता है।

चिंता इसलिए: कवि को मानव की दशा की चिंता है। वह देखता है कि इतने विशाल ब्रह्मांड में रहते हुए भी मनुष्य छोटी-छोटी बातों पर लड़ता है, दीवारें खींचता है। यह चिंता उसकी पंक्तियों में झलकती है।

करुणा भी है: मनुष्य की इस अज्ञानता पर कवि को करुणा भी आती है कि वह अपनी लघुता को नहीं समझता।

निष्कर्ष: कविता का समग्र भाव एक सहृदय शिक्षक जैसा है जो बिना डाँटे, प्रेम से समझाता है।
(घ)आपके अनुसार 'दीवारें उठाना' केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने विचारानुसार समझाइए।Show solution
उत्तर:
'दीवारें उठाना' केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम नहीं है। इसके अनेक अर्थ हो सकते हैं:

1. मानसिक दीवारें: जब हम किसी से बात करना बंद कर देते हैं, उसे अनदेखा करते हैं — यह एक अदृश्य दीवार है।

2. सामाजिक दीवारें: जाति, धर्म, भाषा, रंग के आधार पर भेदभाव करना — ये सामाजिक दीवारें हैं।

3. भावनात्मक दीवारें: ईर्ष्या, घृणा और अहंकार के कारण दिलों के बीच जो दूरी बनती है — वह भावनात्मक दीवार है।

4. राजनीतिक दीवारें: देशों के बीच सीमाएँ, युद्ध और संघर्ष — ये राजनीतिक दीवारें हैं।

5. आर्थिक दीवारें: अमीर-गरीब के बीच की खाई भी एक प्रकार की दीवार है।

निष्कर्ष: कविता में 'दीवारें उठाना' मनुष्य की उस प्रवृत्ति का प्रतीक है जिसमें वह हर स्तर पर विभाजन और अलगाव पैदा करता है। ये दीवारें ईंट-पत्थर से नहीं, बल्कि नकारात्मक भावनाओं से बनती हैं।
(ङ)मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?Show solution
उत्तर:
सहिष्णुता और सहयोग से समाज में परिवर्तन के उदाहरण:

1. महात्मा गांधी और अहिंसा आंदोलन:
गांधीजी ने सहिष्णुता और अहिंसा के बल पर भारत को अंग्रेजों से आजाद कराया। उन्होंने घृणा और हिंसा का सहारा नहीं लिया, बल्कि प्रेम और सत्य से लड़ाई लड़ी। इससे पूरे विश्व में शांतिपूर्ण आंदोलन की प्रेरणा मिली।

2. COVID-19 महामारी में सहयोग:
कोरोना महामारी के दौरान विश्व के वैज्ञानिकों ने मिलकर वैक्सीन बनाई। देशों ने एक-दूसरे की सहायता की। इस सहयोग से लाखों जीवन बचाए गए।

3. भारत की विविधता में एकता:
भारत में अनेक धर्म, भाषाएँ और संस्कृतियाँ हैं। सहिष्णुता के कारण ही ये सब मिलकर एक राष्ट्र के रूप में जीते हैं।

4. नेल्सन मंडेला:
दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के विरुद्ध मंडेला ने सहिष्णुता और क्षमा का मार्ग अपनाया, जिससे वहाँ शांति और समानता स्थापित हुई।

निष्कर्ष: इतिहास गवाह है कि जहाँ सहयोग और सहिष्णुता रही, वहाँ समाज का विकास हुआ। नकारात्मक प्रवृत्तियाँ केवल विनाश लाती हैं।

अनुमान और कल्पना

(क)मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहेंगे? क्यों?Show solution
उत्तर:
यदि मैं एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकता/सकती, तो मैं मानव की निम्नलिखित आदतों को बदलना चाहूँगा/चाहूँगी:

1. अहंकार की आदत: मैं चाहूँगा/चाहूँगी कि हर मनुष्य एक बार ब्रह्मांड की विशालता को देखे और अपनी लघुता को समझे, ताकि उसका अहंकार समाप्त हो।

2. भेदभाव की आदत: जाति, धर्म, रंग के आधार पर भेदभाव करने की आदत बदलना चाहूँगा/चाहूँगी। सभी मनुष्य एक ही पृथ्वी के निवासी हैं।

3. पर्यावरण को नष्ट करने की आदत: मनुष्य प्रकृति का दोहन करता है। मैं इसे बदलकर पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाना चाहूँगा/चाहूँगी।

4. युद्ध और हिंसा की आदत: देशों के बीच युद्ध की बजाय संवाद और शांति को बढ़ावा देना चाहूँगा/चाहूँगी।

5. स्वार्थ की आदत: 'केवल मेरा' की सोच बदलकर 'सबका' की सोच लाना चाहूँगा/चाहूँगी।

कारण: ये आदतें मनुष्य को छोटा बनाती हैं और समाज को कमजोर करती हैं।
(ख)यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएं और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाएं तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों?Show solution
उत्तर:
यदि मैं अंतरिक्ष यात्री बन जाऊँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाऊँ, तो मैं सबसे अधिक अपने घर को याद करूँगा/करूँगी।

कारण:
घर केवल एक इमारत नहीं है — वह माँ की ममता, पिता का आशीर्वाद, भाई-बहन का प्यार और परिवार की गर्माहट का प्रतीक है। ब्रह्मांड की विशालता में जब मैं अकेला/अकेली होऊँगा/होऊँगी, तब घर की छोटी-छोटी बातें — माँ के हाथ का खाना, घर की खुशबू, परिवार की हँसी — सबसे अधिक याद आएंगी।

इसके अलावा, मैं अपने विद्यालय और मित्रों को भी याद करूँगा/करूँगी क्योंकि वहाँ बिताए पल जीवन की सबसे अनमोल यादें हैं।

निष्कर्ष: ब्रह्मांड की विशालता में भी मनुष्य का दिल अपने छोटे से घर में ही बसता है।
(ग)मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है— वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।Show solution
कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत:

'सीमाओं से परे'

आज आर्यन ने तय किया कि वह सभी सीमाओं को पार करेगा। पहले उसने अपने कमरे की दीवारें पार कीं — और देखा कि घर में सब एक-दूसरे से प्यार करते हैं। फिर उसने मोहल्ले की सीमा पार की — वहाँ अलग-अलग धर्म और जाति के लोग मिलकर त्योहार मना रहे थे।

नगर की सीमा पार करने पर उसने देखा कि देश में अनेक भाषाएँ, संस्कृतियाँ और परंपराएँ हैं — सब मिलकर एक सुंदर माला बनाती हैं। देश की सीमा पार करने पर उसने पाया कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है।

फिर वह पृथ्वी से ऊपर उठा — अंतरिक्ष में। वहाँ से पृथ्वी एक छोटी-सी नीली गेंद जैसी दिखी। उसे समझ आया कि जिन सीमाओं के लिए मनुष्य लड़ते हैं, वे ऊपर से दिखती भी नहीं।

आगे बढ़ते-बढ़ते वह आकाशगंगा तक पहुँचा — करोड़ों तारों की रोशनी में नहाया। और फिर ब्रह्मांड के छोर पर जाकर उसने देखा — अनंत शांति, अनंत विस्तार।

आर्यन वापस लौटा — एक नई समझ लेकर: 'सभी सीमाएँ मनुष्य ने बनाई हैं, प्रकृति ने नहीं।'
(घ)इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए— "मैं ब्रह्मांड में एक... हूँ।"Show solution
अनुच्छेद:

"मैं ब्रह्मांड में एक... हूँ।"

मैं ब्रह्मांड में एक छोटी-सी चिंगारी हूँ। जब मैं इस कविता को पढ़ता/पढ़ती हूँ, तो मुझे अहसास होता है कि यह विशाल ब्रह्मांड — जिसमें अनगिनत आकाशगंगाएँ हैं, करोड़ों तारे हैं, अनेक ग्रह हैं — उसमें हमारी पृथ्वी एक छोटा-सा कण है। और उस पृथ्वी पर मैं और भी छोटा/छोटी हूँ।

यह सोचकर मेरा अहंकार पिघल जाता है। मुझे लगता है कि जिन छोटी-छोटी बातों पर मैं दुखी होता/होती हूँ, जिन लोगों से मैं ईर्ष्या करता/करती हूँ — वे सब कितनी नगण्य बातें हैं! ब्रह्मांड की इस विशालता के सामने मेरी सारी समस्याएँ धूल के कण जैसी हैं।

लेकिन साथ ही मुझे गर्व भी होता है — कि इस विशाल ब्रह्मांड में मैं एक सोचने-समझने वाला/वाली प्राणी हूँ। मेरे पास प्रेम करने की, सपने देखने की और दुनिया को बेहतर बनाने की शक्ति है। यही मेरी विशेषता है।
(ङ)मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों?Show solution
उत्तर:
यदि किसी दूसरे संसार से पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता हो, तो मैं एक ऐसे व्यक्ति को भेजना चाहूँगा/चाहूँगी जिसमें निम्नलिखित गुण हों:

मैं किसी महान वैज्ञानिक जैसे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को भेजना चाहूँगा/चाहूँगी।

कारण:
1. वे एक महान वैज्ञानिक थे जो पृथ्वी का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान उस संसार तक पहुँचा सकते थे।
2. वे अत्यंत विनम्र और सहिष्णु थे — अहंकार से मुक्त।
3. उनमें सभी के प्रति प्रेम और सम्मान था — वे पृथ्वी के सच्चे प्रतिनिधि हो सकते थे।
4. उनका सपना था कि पूरी दुनिया शांति और प्रगति के मार्ग पर चले।

निष्कर्ष: पृथ्वी का प्रतिनिधि वह होना चाहिए जो ज्ञान, प्रेम और विनम्रता का प्रतीक हो — न कि अहंकार और स्वार्थ का।
(च)कविता में 'ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ' जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन के लिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा?Show solution
उत्तर:
यदि एक दिन के लिए ईर्ष्या, अहंकार और स्वार्थ सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ, तो समाज में निम्नलिखित परिवर्तन होंगे:

1. युद्ध और झगड़े बंद: देशों के बीच युद्ध नहीं होगा। पड़ोसियों में झगड़े नहीं होंगे। परिवारों में कलह नहीं होगी।

2. सहयोग और प्रेम: सभी लोग एक-दूसरे की सहायता करेंगे। गरीबों को अमीर लोग स्वेच्छा से सहायता देंगे।

3. पर्यावरण की रक्षा: स्वार्थ न होने से लोग प्रकृति का दोहन नहीं करेंगे, बल्कि उसकी रक्षा करेंगे।

4. समानता: जाति, धर्म, रंग के आधार पर भेदभाव समाप्त हो जाएगा।

5. खुशहाली: बिना ईर्ष्या के सभी एक-दूसरे की सफलता में खुश होंगे।

6. न्याय: न्यायालयों में मुकदमे कम होंगे क्योंकि स्वार्थ के कारण होने वाले अपराध नहीं होंगे।

निष्कर्ष: वह एक दिन स्वर्ग जैसा होगा — और यही कविता का संदेश है कि हम ऐसे समाज की ओर बढ़ें।
(छ)यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो जिसमें इसके मूल भाव— 'विराटता और लघुता' तथा 'मनुष्य का भ्रम'— दर्शाया जाए तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए।Show solution
पोस्टर की योजना:

चित्र:
• पृष्ठभूमि में विशाल ब्रह्मांड — आकाशगंगाएँ, तारे, ग्रह।
• बीच में एक छोटी-सी पृथ्वी।
• पृथ्वी पर एक अत्यंत छोटा मनुष्य — जो बड़े गर्व से खड़ा है और अपनी छाती ठोक रहा है।
• मनुष्य के चारों ओर छोटी-छोटी दीवारें।

प्रतीक:
• ब्रह्मांड — विराटता का प्रतीक
• छोटा मनुष्य — लघुता का प्रतीक
• दीवारें — मनुष्य के भ्रम और अहंकार का प्रतीक
• टूटी हुई दीवार — आशा और परिवर्तन का प्रतीक

शब्द/नारे:
• 'करोड़ों में एक पृथ्वी — फिर भी अहंकार क्यों?'
• 'यह है अनुपात आदमी का विराट से'
• 'दीवारें तोड़ो, दिल जोड़ो'

रंग: गहरा नीला (ब्रह्मांड के लिए), हरा (पृथ्वी के लिए), लाल (अहंकार के लिए), सफेद (शांति के लिए)।

शब्द से जुड़े शब्द

1'सृष्टि' से जुड़े शब्द लिखिए।Show solution
'सृष्टि' से जुड़े शब्द:

1. सृष्टिकर्ता — सृष्टि बनाने वाला (ईश्वर)
2. सृष्टिक्रम — सृष्टि का क्रम
3. सृष्टिरचना — सृष्टि की रचना
4. सृजन — नई रचना करना
5. सृजनशील — रचनात्मक
6. सृष्टिनाश — सृष्टि का विनाश
7. सृष्टिविज्ञान — सृष्टि का विज्ञान
8. सृष्टिकाल — सृष्टि का समय

(नोट: यह गतिविधि समूह में चर्चा करके की जानी है। विद्यार्थी और अधिक शब्द जोड़ सकते हैं।)

सृजन

(क)कविता में कमरे से लेकर ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को अपनी तरह से एक रेखाचित्र, सीढ़ी या 'मानसिक-चित्रण' (माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए। प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ लिखिए। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए— "मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?"Show solution
सीढ़ी के रूप में मानसिक-चित्रण:

(सबसे ऊपर)
8. ब्रह्मांड — अनंत, असीमित, अनगिनत आकाशगंगाएँ
7. आकाशगंगा — करोड़ों तारों का समूह, 'नभ गंगा'
6. सौरमंडल — सूर्य और उसके ग्रह
5. पृथ्वी — करोड़ों में एक, जीवन से भरपूर
4. देश — विविध संस्कृतियाँ, भाषाएँ, परंपराएँ
3. नगर — बाजार, विद्यालय, अस्पताल, सड़कें
2. मोहल्ला/पड़ोस — परिचित चेहरे, आपसी सहयोग
1. घर — परिवार, प्रेम, सुरक्षा
0. कमरा — व्यक्तिगत स्थान, एकांत
(सबसे नीचे)

"मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?"
मैं इस चित्र में 'घर' और 'नगर' के बीच हूँ — क्योंकि मेरी दुनिया अभी परिवार और विद्यालय के इर्द-गिर्द है। लेकिन मेरे सपने ब्रह्मांड तक पहुँचने के हैं।
(ख)अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो जिसका नाम हो 'ब्रह्मांड में मानव' तो उसको आरंभ कैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।Show solution
कहानी का आरंभ:

'ब्रह्मांड में मानव'

एक बार की बात है — रात के अँधेरे में जब सारी दुनिया सो रही थी, तब एक छोटे से गाँव में रहने वाला अर्जुन अपनी छत पर लेटकर तारों को देख रहा था। उसके मन में एक अजीब-सा सवाल उठा — 'ये तारे कितने बड़े होंगे? और मैं इनके सामने कितना छोटा हूँ?'

तभी आसमान से एक रोशनी उतरी और एक आवाज़ आई — 'क्या तुम जानना चाहते हो कि ब्रह्मांड में तुम्हारा स्थान कहाँ है?' अर्जुन ने हाँ कहा — और उसकी यात्रा शुरू हुई...

इस यात्रा में उसने देखा कि उसका कमरा, उसका घर, उसका गाँव, उसका देश — सब कितने छोटे हैं। और फिर उसे समझ आया कि इतने छोटे होते हुए भी मनुष्य क्यों इतना अहंकारी है?
(ग)'एक कमरे में दो दुनिया रचाता है' पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए जिसमें कोई दीवार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।Show solution
बिना दीवार की दुनिया का वर्णन:

मेरी कल्पना की दुनिया में कोई दीवार नहीं होगी — न ईंट-पत्थर की, न मन की।

इस दुनिया में:
• सभी लोग एक-दूसरे के घर बिना रोक-टोक आ-जा सकेंगे।
• कोई जाति, धर्म, भाषा या रंग के आधार पर भेदभाव नहीं होगा।
• देशों के बीच कोई सीमा नहीं होगी — सब एक परिवार की तरह रहेंगे।
• बच्चे मिलकर खेलेंगे, बड़े मिलकर काम करेंगे।
• किसी के मन में ईर्ष्या, घृणा या स्वार्थ नहीं होगा।
• प्रकृति और मनुष्य मिलकर रहेंगे — पेड़, नदियाँ, पहाड़ सब सुरक्षित होंगे।
• हर व्यक्ति दूसरे की खुशी में खुश होगा।

यह दुनिया ब्रह्मांड जैसी होगी — जहाँ सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ा है, कोई अलगाव नहीं।
(घ)एक चित्र शृंखला बनाइए जिसमें ये क्रम दिखे— आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड। प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए।Show solution
चित्र शृंखला की योजना (वर्णन):

यह एक रचनात्मक गतिविधि है। चित्र बनाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

1. आदमी — सबसे छोटा चित्र (एक छोटी-सी आकृति)
2. कमरा — आदमी से थोड़ा बड़ा (चार दीवारें, एक दरवाजा)
3. घर — कमरे से बड़ा (कई कमरे, छत)
4. पड़ोसी क्षेत्र — घर से बड़ा (कई घर, गलियाँ)
5. नगर — और बड़ा (बाजार, सड़कें, इमारतें)
6. देश — नगर से बड़ा (नक्शे के रूप में)
7. पृथ्वी — गोल ग्रह (नीला-हरा)
8. ब्रह्मांड — सबसे बड़ा (अनंत तारे, आकाशगंगाएँ)

प्रत्येक चित्र के नीचे उसका नाम और एक विशेषता लिखें। आदमी की आकृति ब्रह्मांड के सामने एक बिंदु जितनी छोटी दिखनी चाहिए।

कविता की रचना

(क)अपने समूह के साथ मिलकर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।Show solution
कविता की विशेषताएँ:

1. अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द 'में' है — जो एक विशेष लय और प्रवाह बनाता है।
2. बहुत छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं — जो पाठक को रुककर सोचने पर मजबूर करती हैं।
3. निदेशक चिह्न (—) का प्रयोग — ठहराव और महत्वपूर्ण विचार की ओर संकेत के लिए।
4. छोटे से बड़े की ओर क्रमिक विस्तार — कमरे से ब्रह्मांड तक।
5. व्यंग्यात्मक शैली — बिना क्रोध के मनुष्य की कमियाँ उजागर करना।
6. अतिशयोक्ति का प्रयोग — 'संख्यातीत शंख सी दीवारें'।
7. प्रश्न शैली — 'देशों की कौन कहे'।
8. मुहावरे का प्रयोग — 'दुनिया रचाना'।
9. शब्दों की पुनरावृत्ति — 'कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में...'।
10. सरल और बोधगम्य भाषा — जो सीधे हृदय तक पहुँचती है।
(ख)कविता की विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।Show solution
सही मिलान:

1. सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है → 4. कमरा है घर में
(सामान्य क्रम होता: 'घर में कमरा है' — यहाँ विशेष काव्य-क्रम अपनाया गया है।)

2. मुहावरे का प्रयोग किया गया है → 3. देशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है
('दुनिया रचाना' एक मुहावरे की तरह प्रयुक्त है।)

3. छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है → 2. कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में...
(यहाँ पिछली पंक्ति का अंतिम शब्द अगली पंक्ति में दोहराया गया है।)

4. प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है → 6. अपने को दूजे का स्वामी बताता है
(यह व्यंग्यात्मक कथन है जो प्रश्न उठाता है।)

5. अतिशयोक्ति से भरा कथन है → 1. संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है
(असंख्य शंख जितनी दीवारें — यह बढ़ा-चढ़ाकर कहना है।)

6. मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है → 5. यह है अनुपात आदमी का विराट से
(इस पंक्ति में कवि ने मनुष्य की लघुता और उसके अहंकार पर सबसे तीखा व्यंग्य किया है।)

कविता का सौंदर्य

(क)कविता में अलग-अलग प्रकार से ब्रह्मांड की विशालता को व्यक्त किया गया है। उनकी पहचान कीजिए।Show solution
कविता में ब्रह्मांड की विशालता को व्यक्त करने के तरीके:

1. संख्यात्मक विशालता: 'अनगिन नक्षत्रों में', 'करोड़ों में एक ही', 'लाखों ब्रह्मांडों में' — इन शब्दों से ब्रह्मांड की असीमित संख्या का बोध होता है।

2. आकाशगंगा का प्रतीक: 'परिधि नभ गंगा की' — आकाशगंगा की परिधि का उल्लेख ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक है।

3. क्रमिक विस्तार: कमरे से शुरू होकर ब्रह्मांड तक का क्रमिक विस्तार — यह दिखाता है कि ब्रह्मांड कितना विशाल है।

4. पृथ्वी की लघुता के माध्यम से: पृथ्वी को 'एक छोटी' बताकर कवि ने परोक्ष रूप से ब्रह्मांड की विशालता दर्शाई है।

5. 'हर ब्रह्मांड में कितनी ही पृथ्वियाँ': यह पंक्ति बताती है कि ब्रह्मांड में अनेक पृथ्वियाँ हो सकती हैं — यह विशालता की चरम अभिव्यक्ति है।

6. 'विराट' शब्द का प्रयोग: 'यह है अनुपात आदमी का विराट से' — 'विराट' शब्द ब्रह्मांड की असीमितता को एक शब्द में व्यक्त करता है।
(ख)कविता में मनुष्य के लिए आई क्रियाओं की तरह नई क्रियाओं का प्रयोग करके कविता की रचना कीजिए।Show solution
नई कविता:

आदमी —
सपने बुनता है
आसमान छूना चाहता है
पर पाँव जमीन पर नहीं टिकाता है।

दूसरों की राह में
काँटे बिछाता है
खुद को सबसे होशियार बताता है।

प्रेम की बातें करता है
पर दिल में नफरत छुपाता है
एक मुँह से दो बातें कहता है।

पृथ्वी को माँ कहता है
पर उसे रोज़ तकलीफ देता है
पेड़ काटता है, नदी गंदी करता है।

यह है स्वभाव आदमी का —
जो विराट बनना चाहता है
पर लघुता से बाहर नहीं निकल पाता है।

आपके शब्द

1'नभ गंगा' की तरह दो शब्दों को मिलाकर नए शब्द बनाइए।Show solution
दो शब्दों को मिलाकर बने नए शब्द:

1. नभ + गंगा = नभगंगा (आकाशगंगा)
2. जल + धारा = जलधारा
3. वायु + मंडल = वायुमंडल
4. सूर्य + प्रकाश = सूर्यप्रकाश
5. चंद्र + मा = चंद्रमा
6. पृथ्वी + लोक = पृथ्वीलोक
7. तारा + मंडल = तारामंडल
8. अग्नि + पथ = अग्निपथ
9. मेघ + दूत = मेघदूत
10. नभ + चर = नभचर (आकाश में विचरण करने वाला)

(नोट: विद्यार्थी अपनी कल्पना से और अधिक शब्द बना सकते हैं।)

आपके प्रश्न

1'हर ब्रह्मांड में कितनी ही पृथ्वियाँ, कितनी ही भूमियाँ, कितनी ही सृष्टियाँ' — इस प्रकार के प्रश्नों की सूची बनाइए और उत्तर ढूँढ़ने का प्रयास कीजिए।Show solution
मन में आने वाले प्रश्न और उनके संभावित उत्तर:

1. प्रश्न: क्या ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे और ग्रह हैं?
उत्तर: वैज्ञानिकों ने अनेक 'एक्सोप्लैनेट' खोजे हैं जो पृथ्वी जैसे हो सकते हैं। केपलर-452b को 'पृथ्वी का चचेरा भाई' कहा जाता है।

2. प्रश्न: ब्रह्मांड कितना बड़ा है?
उत्तर: वैज्ञानिकों के अनुसार दृश्यमान ब्रह्मांड का व्यास लगभग 93 अरब प्रकाश-वर्ष है।

3. प्रश्न: क्या ब्रह्मांड में जीवन केवल पृथ्वी पर है?
उत्तर: अभी तक केवल पृथ्वी पर जीवन की पुष्टि हुई है, परंतु वैज्ञानिक अन्य ग्रहों पर जीवन की संभावना खोज रहे हैं।

4. प्रश्न: आकाशगंगा में कितने तारे हैं?
उत्तर: हमारी आकाशगंगा (मिल्की वे) में लगभग 100-400 अरब तारे हैं।

5. प्रश्न: क्या अनेक ब्रह्मांड हो सकते हैं?
उत्तर: 'मल्टीवर्स' सिद्धांत के अनुसार अनेक ब्रह्मांड हो सकते हैं, परंतु यह अभी भी एक परिकल्पना है।

(नोट: विद्यार्थी शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता से और प्रश्न तथा उत्तर खोज सकते हैं।)

विशेषण और विशेष्य

1नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों को पहचानकर लिखिए।Show solution
दिया गया है: कविता की पंक्तियाँ।

विशेषण और विशेष्य की पहचान:

| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| 1. दो व्यक्ति कमरे में | दो | व्यक्ति |
| 2. अनगिन नक्षत्रों में | अनगिन | नक्षत्रों |
| 3. लाखों ब्रह्मांडों में | लाखों | ब्रह्मांडों |
| 4. अपना एक ब्रह्मांड | अपना, एक | ब्रह्मांड |
| 5. संख्यातीत शंख सी | संख्यातीत | शंख |
| 6. एक कमरे में | एक | कमरे |
| 7. दो दुनिया रचाता है | दो | दुनिया |

स्पष्टीकरण:
• विशेषण वह शब्द है जो संज्ञा (विशेष्य) की विशेषता बताता है।
• 'अनगिन' — नक्षत्रों की संख्या की विशेषता बताता है।
• 'लाखों' — ब्रह्मांडों की संख्या बताता है।
• 'संख्यातीत' — शंख की विशेषता (असंख्य) बताता है।

पाठ से आगे — आपकी बात

(क)कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ 'अनुपात' बिगड़ गया हो — जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम।Show solution
उत्तर:
ऐसी स्थितियाँ जहाँ 'अनुपात' बिगड़ गया:

1. परीक्षा का समय: परीक्षा के दिनों में पढ़ाई का बोझ बहुत अधिक होता है और समय बहुत कम। यहाँ काम और समय का अनुपात बिगड़ जाता है।

2. पर्यावरण असंतुलन: मनुष्य ने इतने अधिक पेड़ काटे और इतना प्रदूषण फैलाया कि प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया। यहाँ विकास और पर्यावरण का अनुपात बिगड़ा।

3. अमीर-गरीब की खाई: समाज में कुछ लोगों के पास बहुत अधिक धन है और बहुत से लोगों के पास बहुत कम। यह आर्थिक अनुपात का बिगड़ना है।

4. खेल और पढ़ाई: जब बच्चा केवल खेलता रहे और पढ़ाई बिल्कुल न करे — यह भी अनुपात का बिगड़ना है।

5. भोजन और व्यायाम: अधिक खाना और बिल्कुल व्यायाम न करना — स्वास्थ्य का अनुपात बिगड़ जाता है।
(ख)आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में 'विराटता' (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए।Show solution
उत्तर:
विराटता (विशाल दृष्टिकोण) लाने के उपाय:

परिवार में:
• सभी सदस्यों की बात ध्यान से सुनना और उनके विचारों का सम्मान करना।
• छोटे-बड़े का भेद किए बिना सबको महत्व देना।
• घर के काम में सबका सहयोग करना।

विद्यालय में:
• सभी सहपाठियों के साथ मित्रता करना — जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति का भेद न करना।
• कमजोर विद्यार्थियों की पढ़ाई में सहायता करना।
• विद्यालय की सफाई और सुंदरता में योगदान देना।

मोहल्ले में:
• पड़ोसियों की सहायता करना।
• मोहल्ले में पेड़-पौधे लगाना।
• सभी त्योहार मिलकर मनाना।
• किसी को अनदेखा न करना।

सामान्य उपाय:
• दूसरों की सफलता में खुश होना।
• अपनी गलती स्वीकार करना।
• बड़ी सोच रखना — 'मेरा' नहीं, 'हमारा' सोचना।
(ग)'करोड़ों में एक ही पृथ्वी' — इस पंक्ति को पढ़कर आपके मन में क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करेंगे?Show solution
उत्तर:
भाव:
इस पंक्ति को पढ़कर मन में एक अद्भुत अनुभूति होती है — गर्व और जिम्मेदारी का। करोड़ों ग्रहों में यह पृथ्वी अकेली ऐसी है जहाँ जीवन है, जहाँ हरियाली है, जहाँ नदियाँ बहती हैं, जहाँ पक्षी गाते हैं। यह सोचकर मन भर आता है कि हम कितने भाग्यशाली हैं।

पृथ्वी को सुरक्षित रखने के उपाय:
1. पेड़-पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना।
2. पानी की बर्बादी न करना।
3. प्लास्टिक का उपयोग कम करना।
4. बिजली की बचत करना।
5. कूड़ा सही जगह फेंकना — नदियों और सड़कों पर नहीं।
6. साइकिल या पैदल चलना — वाहनों का कम उपयोग।
7. दूसरों को भी पर्यावरण के प्रति जागरूक करना।
8. जल-संरक्षण के उपाय अपनाना।
(घ)कविता हमें 'अपने को दूजे का स्वामी बताने' के प्रति सचेत करती है। आप अपने किन-किन गुणों को प्रबल करेंगे ताकि आपमें ऐसा भाव न आए?Show solution
उत्तर:
मैं निम्नलिखित गुणों को प्रबल करूँगा/करूँगी:

1. विनम्रता: मैं हमेशा विनम्र रहूँगा/रहूँगी और दूसरों को अपने से कम नहीं समझूँगा/समझूँगी।

2. सहानुभूति: दूसरों की भावनाओं को समझने की कोशिश करूँगा/करूँगी।

3. सहयोग की भावना: 'मैं' की जगह 'हम' की सोच विकसित करूँगा/करूँगी।

4. कृतज्ञता: जो कुछ मेरे पास है, उसके लिए आभारी रहूँगा/रहूँगी — यह सोचकर कि दूसरों पर शासन करने की आवश्यकता नहीं।

5. सुनने की आदत: दूसरों की बात ध्यान से सुनूँगा/सुनूँगी — यह मानकर कि उनके विचार भी महत्वपूर्ण हैं।

6. आत्म-जागरूकता: जब भी मन में अहंकार आए, कविता की पंक्ति याद करूँगा/करूँगी — 'यह है अनुपात आदमी का विराट से।'

7. सेवा भाव: दूसरों की सेवा करने में आनंद लेना — स्वामी बनने की बजाय सेवक बनना।
(ड)अपने जीवन में ऐसी तीन 'दीवारों' के विषय में सोचिए जो आपने स्वयं खड़ी की हैं। फिर एक योजना बनाइए कि आप उन्हें कैसे तोड़ेंगे? क्या समाज में भी ऐसी दीवारें होती हैं? उन्हें गिराने में हम कैसे सहायता कर सकते हैं?Show solution
उत्तर:
मेरी तीन 'दीवारें':

1. डर की दीवार: मुझे कक्षा में प्रश्न पूछने में डर लगता है — कि लोग हँसेंगे।
तोड़ने की योजना: मैं प्रतिदिन कम से कम एक प्रश्न पूछूँगा/पूछूँगी। धीरे-धीरे यह डर दूर होगा।

2. संकोच की दीवार: नए लोगों से बात करने में संकोच होता है।
तोड़ने की योजना: मैं हर दिन एक नए व्यक्ति से बात करने की कोशिश करूँगा/करूँगी।

3. असफलता के डर की दीवार: नई चीजें सीखने में डर लगता है कि असफल हो जाऊँगा/जाऊँगी।
तोड़ने की योजना: मैं याद रखूँगा/रखूँगी कि असफलता सीखने का हिस्सा है।

समाज की दीवारें और उन्हें गिराने के उपाय:
हाँ, समाज में भी अनेक दीवारें हैं — जाति, धर्म, अमीर-गरीब, स्त्री-पुरुष भेद।

इन्हें गिराने के उपाय:
• सभी के साथ समान व्यवहार करना।
• भेदभाव का विरोध करना।
• शिक्षा और जागरूकता फैलाना।
• मिलकर त्योहार मनाना और एक-दूसरे की संस्कृति को समझना।

संख्यातीत शंख — तालिका पर आधारित प्रश्न

1जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?Show solution
दिया गया है: भारतीय संख्या प्रणाली की तालिका।

हल:
तालिका के अनुसार:
• पद्म = 101510^{15} = 1,00,00,00,00,00,00,000

इस संख्या में 15 शून्य होते हैं।

उत्तर: जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे पद्म कहते हैं।
2महाशंख में कितने शून्य होते हैं?Show solution
दिया गया है: भारतीय संख्या प्रणाली की तालिका।

हल:
तालिका के अनुसार:
• महाशंख = 101910^{19} = 1,00,00,00,00,00,00,00,000

उत्तर: महाशंख में 19 शून्य होते हैं।
3एक लाख में कितने हजार होते हैं?Show solution
दिया गया है: भारतीय संख्या प्रणाली की तालिका।

हल:
• एक लाख = 1,00,000 = 10510^5
• एक हजार = 1,000 = 10310^3

1,00,0001,000=100\frac{1,00,000}{1,000} = 100

उत्तर: एक लाख में 100 हजार होते हैं।
4उपर्युक्त तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?Show solution
दिया गया है: भारतीय संख्या प्रणाली की तालिका।

हल:
• तालिका में सबसे छोटी संख्या: एक (इकाई) = 1 = 10010^0
• तालिका में सबसे बड़ी संख्या: महाशंख = 101910^{19} = 1,00,00,00,00,00,00,00,000

उत्तर: सबसे छोटी संख्या एक (1) और सबसे बड़ी संख्या महाशंख (101910^{19}) है।
5दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?Show solution
दिया गया है: भारतीय संख्या प्रणाली की तालिका।

हल:
• दस करोड़ = 10,00,00,000 = 10810^8
• एक अरब = 1,00,00,00,000 = 10910^9

10,00,00,000+1,00,00,00,000=1,10,00,00,00010,00,00,000 + 1,00,00,00,000 = 1,10,00,00,000

यह संख्या = 110 करोड़ = 1 अरब 10 करोड़

तालिका में इस संख्या का कोई विशेष नाम नहीं दिया गया है। यह एक अरब दस करोड़ (1,10,00,00,000) है।

उत्तर: दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर 1,10,00,00,000 (एक अरब दस करोड़) आएगा।

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What are the important topics in आदमी का अनुपात for CBSE Class 8 Hindi?
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