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Chapter 8 of 10
NCERT Solutions

नए मेहमान (एकांकी)-उदयशंकर भट्ट

CBSE · Class 8 · Hindi

NCERT Solutions for नए मेहमान (एकांकी)-उदयशंकर भट्ट — CBSE Class 8 Hindi.

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44 Questions Solved · 16 Sections

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पाठ से — मेरी समझ से

1आगंतुकों ने विश्वनाथ के बच्चों को 'सीधे लड़के' किस संदर्भ में कहा?
- अतिथियों की सेवा करने के कारण
- किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण
- आज्ञाकारिता के भाव के कारण
- गरमी को चुपचाप सहने के कारण
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सही उत्तर: ★ किसी तरह का प्रश्न न करने के कारण तथा ★ आज्ञाकारिता के भाव के कारण

स्पष्टीकरण: आगंतुक नन्हेमल और बाबूलाल जब विश्वनाथ के घर आए तो विश्वनाथ के बच्चों ने उनसे कोई प्रश्न नहीं किया — न यह पूछा कि आप कौन हैं, न यह कि क्यों आए हैं। उन्होंने बड़ों की आज्ञा का पालन करते हुए चुपचाप पानी लाकर दिया। इसी आज्ञाकारिता और प्रश्न न करने के स्वभाव के कारण आगंतुकों ने उन्हें 'सीधे लड़के' कहा।

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2"एक ये पड़ोसी हैं, निर्दयी..." विश्वनाथ ने अपने पड़ोसी को निर्दयी क्यों कहा?
- उन्हें कष्ट में देखकर प्रसन्न होते हैं
- पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं
- लड़ने-झगड़ने के अवसर ढूँढ़ते हैं
- अतिथियों का अपमान करते हैं
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सही उत्तर: ★ पड़ोसी किसी प्रकार का सहयोग नहीं करते हैं

स्पष्टीकरण: विश्वनाथ के घर में अचानक मेहमान आ गए। घर में पानी की कमी थी और गरमी भी भीषण थी। ऐसे कठिन समय में पड़ोसी से सहयोग की अपेक्षा स्वाभाविक थी, किंतु पड़ोसी ने किसी भी प्रकार की सहायता नहीं की। इसीलिए विश्वनाथ ने उन्हें 'निर्दयी' कहा।

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3"ईश्वर करें इन दिनों कोई मेहमान न आए।" रेवती इस तरह की कामना क्यों कर रही है?
- मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण
- रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण
- अतिथियों के आने से घर का कार्य बढ़ जाने के कारण
- उसे अतिथियों का आना-जाना पसंद न होने के कारण
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सही उत्तर: ★ मेहमान के ठहरने की उचित व्यवस्था न होने के कारण तथा ★ रेवती का स्वास्थ्य कुछ समय से ठीक न होने के कारण

स्पष्टीकरण: रेवती का स्वास्थ्य ठीक नहीं था — उसके सिर में दर्द था और भीषण गरमी के कारण वह पहले से ही परेशान थी। इसके अतिरिक्त घर में पानी की कमी थी और मेहमानों के ठहरने की उचित व्यवस्था भी नहीं थी। इन्हीं कारणों से रेवती ने ऐसी कामना की। यह उसकी अतिथि-विरोधी भावना नहीं, बल्कि परिस्थितियों की विवशता थी।

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4"हे भगवान! कोई मुसीबत न आ जाए।" रेवती कौन-सी मुसीबत नहीं आने के लिए कहती है?
- पानी की कमी होने की
- पड़ोसियों के चिल्लाने की
- मेहमानों के आने की
- गरमी के कारण बीमारी की
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सही उत्तर: ★ मेहमानों के आने की

स्पष्टीकरण: रेवती पहले से ही अस्वस्थ थी और घर में पानी की कमी तथा भीषण गरमी से परेशान थी। ऐसे में उसे डर था कि कहीं कोई मेहमान न आ जाए क्योंकि उनकी उचित आवभगत करना उसके लिए संभव नहीं था। इसीलिए उसने ईश्वर से प्रार्थना की कि मेहमान आने की मुसीबत न आए।

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5इस एकांकी के आधार पर बताएँ कि मुख्य रूप से कौन-सी बात किसी रचना को नाटक का रूप देती है?
- संवाद
- कथा
- वर्णन
- मंचन
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सही उत्तर: ★ संवाद

स्पष्टीकरण: किसी भी नाटक या एकांकी में कहानी मुख्य रूप से पात्रों के आपसी संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है। 'नए मेहमान' एकांकी में भी विश्वनाथ, रेवती, नन्हेमल, बाबूलाल आदि पात्रों के संवादों से ही पूरी कहानी सामने आती है। संवाद ही नाटक की आत्मा होते हैं।

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पंक्तियों पर चर्चा

1निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए:
(i) "पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।"
(ii) "सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।"
(iii) "यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।"
(iv) "आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।"
Show solution
(i) "पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।"
अर्थ: इस पंक्ति में भीषण गरमी का वर्णन है। गरमी इतनी अधिक है कि बहुत पानी पीने के बाद भी प्यास नहीं बुझती। पेट पानी से भर गया है, फिर भी गला सूखता रहता है। यह पंक्ति गरमी की प्रचंडता को अतिशयोक्तिपूर्ण ढंग से व्यक्त करती है।

(ii) "सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।"
अर्थ: इस पंक्ति में उपमा अलंकार का प्रयोग करते हुए बताया गया है कि शहर में इतनी भीषण गरमी है, मानो आकाश से आग की वर्षा हो रही हो। सूरज की तपन इतनी तीव्र है कि वातावरण जलता हुआ प्रतीत होता है।

(iii) "यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।"
अर्थ: इस पंक्ति में वक्ता अपनी विवशता और दुर्भाग्य पर व्यंग्य कर रहा है। जिस प्रकार चने को भाड़ (भट्टी) में भूना जाता है, उसी प्रकार वे लोग भी इस भीषण गरमी में तपते रहते हैं। यह उनकी नियति बन गई है।

(iv) "आह, अब जान में जान आई। सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है।"
अर्थ: इस पंक्ति में ठंडा पानी पीने के बाद मिली राहत का वर्णन है। भीषण गरमी में जब ठंडा पानी मिलता है तो ऐसा लगता है जैसे प्राण लौट आए हों। गरमी में पानी ही जीवन का आधार है — यह भाव इस पंक्ति में व्यक्त हुआ है।

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मिलकर करें मिलान

1स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 के सही भाव से मिलाइए।Show solution
सही मिलान इस प्रकार है:

1. लाखों के आदमी खाक में मिल गए। → 3. बहुत ही समृद्ध व्यक्ति थे पर अब उनके पास कुछ भी नहीं है।

स्पष्टीकरण: 'खाक में मिलना' का अर्थ है — सब कुछ नष्ट हो जाना। जो व्यक्ति लाखों का मालिक था, वह अब कंगाल हो गया।

2. धोती ऐसी चरों रही है, जैसे पुरानी हो। → 4. कपड़ा पसीने से भीगकर पुराने जैसा हो गया है।

स्पष्टीकरण: भीषण गरमी में पसीने से धोती इतनी भीग गई है कि वह पुरानी और मैली लगने लगी है।

3. माल-मसाला तो अंटी में है न? → 5. धनराशि सुरक्षित तो है न!

स्पष्टीकरण: 'अंटी में होना' का अर्थ है — पैसा या जरूरी सामान अपने पास सुरक्षित रखना।

4. खाने में क्या देर-दार है। → 1. भोजन की व्यवस्था कब तक हो जाएगी।

स्पष्टीकरण: यह पंक्ति भोजन बनने में लगने वाले समय के बारे में है।

5. पहले आत्मा फिर परमात्मा → 2. पहले अपना ध्यान फिर दूसरा काम।

स्पष्टीकरण: इस मुहावरे का अर्थ है — पहले अपनी जरूरत पूरी करो, फिर दूसरों के बारे में सोचो।

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सोच-विचार के लिए

"शहर में तो ऐसे ही मकान होते हैं।" नन्हेमल का 'ऐसे ही मकान' से क्या आशय है?Show solution
नन्हेमल का 'ऐसे ही मकान' से आशय है — शहर के छोटे, बंद और तंग मकान जिनमें हवा का उचित प्रवाह नहीं होता। शहरों में मकान एक-दूसरे से सटे हुए होते हैं, खिड़कियाँ और दरवाजे कम होते हैं, आँगन नहीं होता। ऐसे मकानों में गरमी के दिनों में बहुत घुटन होती है और तापमान बाहर से भी अधिक महसूस होता है। नन्हेमल यह कहकर विश्वनाथ के मकान की तंगी और गरमी को सामान्य बात बता रहे हैं — जैसे शहर के सभी मकान ऐसे ही होते हैं।

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पड़ोसी को विश्वनाथ से किस तरह की शिकायत है? आपके विचार से पड़ोसी का व्यवहार उचित है या अनुचित? तर्क सहित उत्तर दीजिए।Show solution
एकांकी में पड़ोसी को विश्वनाथ से यह शिकायत है कि उनके घर में आए मेहमानों के कारण शोर-शराबा होता है और पड़ोसी को असुविधा होती है। पड़ोसी इस बात पर नाराज है कि उसकी नींद और चैन में खलल पड़ रहा है।

पड़ोसी का व्यवहार अनुचित है — इसके पक्ष में तर्क:
1. भारतीय संस्कृति में 'अतिथि देवो भव' की परंपरा है। ऐसे में पड़ोसी को सहयोग करना चाहिए था।
2. विश्वनाथ के घर में अचानक मेहमान आ गए — यह उनके वश में नहीं था। पड़ोसी को इस परिस्थिति को समझना चाहिए था।
3. एक अच्छे पड़ोसी का कर्तव्य है कि वह मुसीबत में सहायता करे, न कि शिकायत करे।
4. थोड़ी-बहुत असुविधा को सहन करना पड़ोसी-धर्म का हिस्सा है।

निष्कर्ष: पड़ोसी का व्यवहार अनुचित है। उसे विश्वनाथ की परिस्थिति को समझकर सहयोग करना चाहिए था।

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एकांकी में विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को नहीं जानता है, फिर भी उन्हें अपने घर में आने देता है। क्यों?Show solution
विश्वनाथ नन्हेमल और बाबूलाल को अपने घर में आने देता है, इसके निम्नलिखित कारण हैं:

1. भारतीय आतिथ्य परंपरा: भारत में 'अतिथि देवो भव' की परंपरा है। द्वार पर आए अतिथि को बिना कारण लौटाना अशिष्टता मानी जाती है।

2. रेवती के भाई का संदर्भ: नन्हेमल और बाबूलाल ने स्वयं को रेवती के भाई का परिचित बताया। विश्वनाथ ने सोचा कि वे उसकी पत्नी के संबंधी या परिचित हो सकते हैं।

3. भीषण गरमी: बाहर भीषण गरमी थी। ऐसे में किसी को दरवाजे पर खड़ा रखना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं था।

4. सामाजिक दबाव: पड़ोसी और समाज के सामने किसी को दरवाजे से लौटाना विश्वनाथ को उचित नहीं लगा।

इस प्रकार विश्वनाथ की सज्जनता, आतिथ्य-भावना और मानवीय संवेदना के कारण उसने अपरिचितों को भी घर में आने दिया।

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एकांकी के उन संवादों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं।Show solution
निम्नलिखित संवादों से स्पष्ट होता है कि बाबूलाल और नन्हेमल विश्वनाथ के परिचित नहीं हैं:

1. रेवती का संवाद: "ये लोग कौन हैं? जान-पहचान के तो मालूम नहीं पड़ते।"

2. विश्वनाथ का संवाद: "क्या पूछ लूँ? दो-तीन बार पूछा, ठीक-ठीक उत्तर ही नहीं देते।"

3. नन्हेमल और बाबूलाल का अपना परिचय देने में टालमटोल करना — वे सीधे नहीं बताते कि वे कौन हैं और कहाँ से आए हैं।

4. विश्वनाथ का यह कहना कि उसे इन लोगों के बारे में कुछ भी पता नहीं है — यह भी उनके अपरिचित होने का प्रमाण है।

इन संवादों से स्पष्ट है कि विश्वनाथ इन दोनों को नहीं जानता था।

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एकांकी के उन वाक्यों को ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता है कि शहर में भीषण गरमी पड़ रही है।Show solution
निम्नलिखित वाक्यों से शहर में भीषण गरमी का पता चलता है:

1. "उफ, बड़ी गरमी है" (विश्वनाथ का संवाद)

2. "पता तक नहीं हिल रहा है। जैसे साँस बंद हो जाएगी। सिर फटा जा रहा है।" (रेवती)

3. "सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो।"

4. "चारों तरफ दीवारें तप रही हैं।"

5. "यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं।"

6. "पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है, और प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती।"

7. "तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है।"

8. "फिर भी पसीने से नहा गया हूँ।"

9. "ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं।"

ये सभी वाक्य शहर में पड़ रही भीषण गरमी को दर्शाते हैं।

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अनुमान और कल्पना से

एकांकी में विश्वनाथ अपनी पत्नी को अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए कहता है। साथ ही रेवती की अस्वस्थता का विचार करके भोजन बाजार से माँगवाने का सुझाव भी देता है। लेकिन उसने स्वयं अतिथियों के लिए भोजन बनाने के विषय में क्यों नहीं सोचा?Show solution
विश्वनाथ ने स्वयं भोजन बनाने के बारे में नहीं सोचा, इसके संभावित कारण निम्नलिखित हैं:

1. सामाजिक और पारिवारिक परंपरा: उस समय की सामाजिक व्यवस्था में घर का खाना बनाना महिलाओं का काम माना जाता था। पुरुष रसोई में काम नहीं करते थे।

2. पुरुष की भूमिका: विश्वनाथ अतिथियों के साथ बैठकर बातचीत करना, उनकी देखभाल करना और बाहर से व्यवस्था करना अपना कर्तव्य समझता था।

3. रूढ़िवादी सोच: उस युग में यह सोच प्रचलित थी कि पुरुष रसोई में नहीं जाते। इसलिए विश्वनाथ के मन में यह विचार ही नहीं आया।

4. बाजार का विकल्प: विश्वनाथ ने बाजार से खाना मँगवाने का व्यावहारिक सुझाव दिया, जो उसे अपनी भूमिका के अनुकूल लगा।

नोट: आज के समय में यह सोच बदल रही है और घर के काम में पुरुषों की भागीदारी आवश्यक और उचित मानी जाती है।

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एकांकी में विश्वनाथ का बेटा प्रमोद अतिथियों के पेयजल की व्यवस्था करता है और छोटी बहन का भी ध्यान रखता है। प्रमोद को इस तरह के उत्तरदायित्व क्यों दिए गए होंगे?Show solution
प्रमोद को ये उत्तरदायित्व निम्नलिखित कारणों से दिए गए होंगे:

1. माँ की अस्वस्थता: रेवती का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। ऐसे में घर के छोटे-छोटे काम प्रमोद को सौंपे गए होंगे।

2. बड़े बच्चे की जिम्मेदारी: प्रमोद घर का बड़ा बच्चा था। बड़े बच्चों को परिवार में जिम्मेदारी का एहसास कराना भारतीय परंपरा का हिस्सा है।

3. संस्कार और शिक्षा: विश्वनाथ और रेवती ने प्रमोद को अतिथि-सत्कार और परिवार की देखभाल के संस्कार दिए होंगे।

4. व्यावहारिक कारण: पिता अतिथियों के साथ व्यस्त थे और माँ अस्वस्थ थी। ऐसे में प्रमोद ही एकमात्र व्यक्ति था जो ये काम कर सकता था।

5. बच्चों में उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना: इस प्रकार के छोटे-छोटे काम देने से बच्चों में जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का भाव विकसित होता है।

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"कैसी बातें करते हो, भैया! मैं अभी खाना बनाती हूँ" भीषण गरमी और सिर में दर्द के बावजूद भी रेवती भोजन की व्यवस्था करने के लिए क्यों तैयार हो गई होगी?Show solution
भीषण गरमी और सिर दर्द के बावजूद रेवती के भोजन बनाने के लिए तैयार होने के संभावित कारण:

1. आतिथ्य-भावना: भारतीय संस्कृति में अतिथि को भूखा नहीं जाने देना गृहिणी का धर्म माना जाता है। रेवती इस परंपरा का पालन करना चाहती थी।

2. पारिवारिक सम्मान: यदि अतिथि भूखे रहते तो परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचती। रेवती यह नहीं चाहती थी।

3. पति की इच्छा का सम्मान: विश्वनाथ ने अतिथियों को घर में बुलाया था। पत्नी के रूप में रेवती ने पति की इच्छा का सम्मान किया।

4. स्त्री का त्याग और समर्पण: उस युग की स्त्रियाँ अपनी तकलीफ को भूलकर परिवार और अतिथियों की सेवा को प्राथमिकता देती थीं।

5. बाजार से खाना मँगवाने में संकोच: रेवती को लगा होगा कि बाजार से खाना मँगवाना उचित नहीं है और घर का बना खाना ही अतिथि-सत्कार का सही तरीका है।

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एकांकी से गरमी की भीषणता दर्शाने वाली पंक्तियाँ दी जा रही हैं। अपनी कल्पना और अनुमान से बताइए कि सर्दी और वर्षा की भीषणता के लिए आप इनके स्थान पर क्या-क्या वाक्य प्रयोग करते हैं?Show solution
नीचे गरमी की पंक्तियों के समानांतर सर्दी और वर्षा की भीषणता दर्शाने वाले वाक्य दिए गए हैं:

| गरमी की भीषणता | सर्दी की भीषणता | वर्षा की भीषणता |
|---|---|---|
| 1. यह गरमी में भुन रहा है। | यह सर्दी में जम गया। | यह वर्षा में भीग रहा है। |
| 2. पर बरफ भी कोई कहाँ तक पिए। | पर कंबल भी कोई कहाँ तक ओढ़े। | पर छाता भी कोई कहाँ तक तानें। |
| 3. सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो। | सारे शहर में जैसे बर्फ की चादर बिछ गई हो। | सारे शहर में जैसे आसमान फट पड़ा हो। |
| 4. प्यास है कि बुझने का नाम नहीं लेती। | ठंड है कि जाने का नाम नहीं लेती। | बारिश है कि रुकने का नाम नहीं लेती। |
| 5. चारों तरफ दीवारें तप रही हैं। | चारों तरफ दीवारें बर्फ की तरह ठंडी हैं। | चारों तरफ पानी ही पानी भर गया है। |
| 6. ठंडा-ठंडा पानी पिलाओ दोस्त, प्राण सूखे जा रहे हैं। | गरम-गरम चाय पिलाओ दोस्त, हड्डियाँ जमी जा रही हैं। | सूखे कपड़े दो दोस्त, पूरा बदन भीगा जा रहा है। |
| 7. सचमुच गरमी में पानी ही तो जान है। | सचमुच सर्दी में धूप ही तो जान है। | सचमुच वर्षा में छत ही तो जान है। |
| 8. यह तो हमारा ही भाग्य है कि चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं। | यह तो हमारा ही भाग्य है कि बर्फ की तरह ठिठुरते रहते हैं। | यह तो हमारा ही भाग्य है कि मछली की तरह पानी में डूबते रहते हैं। |
| 9. फिर भी पसीने से नहा गया हूँ। | फिर भी ठंड से काँप रहा हूँ। | फिर भी बारिश से सिर से पाँव तक भीग गया हूँ। |

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एकांकी की रचना

अपने समूह में मिलकर इस एकांकी की विशेषताओं की सूची बनाइए।Show solution
'नए मेहमान' एकांकी की प्रमुख विशेषताएँ:

1. एक अंक: यह एकांकी केवल एक ही अंक में पूरी होती है — इसमें कोई अलग-अलग अंक या दृश्य नहीं हैं।

2. सीमित पात्र: इसमें पात्रों की संख्या सीमित है — विश्वनाथ, रेवती, प्रमोद, नन्हेमल, बाबूलाल आदि।

3. एक स्थान: पूरी कहानी एक ही स्थान — विश्वनाथ के घर में — घटित होती है।

4. सीमित समय: एकांकी की घटनाएँ एक ही रात में घटती हैं।

5. रंगमंच-निर्देश: कोष्ठक में अभिनय संकेत दिए गए हैं, जैसे — '(पंखा जोर-जोर से करने लगता है)', '(आँचल से मुँह का पसीना पोंछती हुई)'।

6. पात्र-परिचय: एकांकी के आरंभ में पात्रों का परिचय दिया गया है।

7. संवाद-प्रधान: कहानी मुख्यतः संवादों के माध्यम से आगे बढ़ती है।

8. वेशभूषा और मंच-सज्जा संबंधी निर्देश: मंच की सजावट और पात्रों की वेशभूषा के बारे में संकेत दिए गए हैं।

9. सामाजिक विषय: एकांकी में आतिथ्य, पारिवारिक जीवन और सामाजिक व्यवहार जैसे विषयों को उठाया गया है।

10. हास्य और व्यंग्य: एकांकी में हल्के हास्य और व्यंग्य का भी समावेश है।

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आगे कुछ वाक्य दिए गए हैं। एकांकी के बारे में जो वाक्य सही लग रहे हैं, उनके सामने 'हाँ' लिखिए और जो सही नहीं हैं, उनके सामने 'नहीं' लिखिए।Show solution
1. 'नए मेहमान' एकांकी में पूरी कहानी एक ही स्थान, घर में घटित होती दिखाई गई है। → हाँ
(पूरी एकांकी विश्वनाथ के घर में ही घटित होती है।)

2. एकांकी में पात्रों की संख्या बहुत अधिक है। → नहीं
(एकांकी में पात्रों की संख्या सीमित होती है। इस एकांकी में भी केवल कुछ ही पात्र हैं।)

3. एकांकी में एक कहानी छिपी है। → हाँ
(एकांकी में अचानक आए अपरिचित मेहमानों और उनकी आवभगत की कहानी है।)

4. एकांकी और कहानी में कोई अंतर नहीं है। → नहीं
(एकांकी और कहानी में अंतर है। एकांकी में संवाद, रंगमंच-निर्देश और अभिनय होता है, जबकि कहानी में वर्णन प्रमुख होता है।)

5. एकांकी में कहानी की घटनाएँ अलग-अलग दिनों या महीनों में हो रही हैं। → नहीं
(एकांकी की सभी घटनाएँ एक ही रात में घटती हैं।)

6. एकांकी में कहानी मुख्य रूप से संवादों से आगे बढ़ती है। → हाँ
(एकांकी में पात्रों के संवादों से ही कहानी आगे बढ़ती है।)

7. एकांकी में पात्रों को अभिनय के लिए निर्देश दिए गए हैं। → हाँ
(कोष्ठक में अभिनय संकेत दिए गए हैं जो पात्रों को निर्देश देते हैं।)

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अभिनय की बारी

यदि आपको अपने विद्यालय में 'नए मेहमान' एकांकी का मंचन करना हो तो आप क्या-क्या तैयारियाँ करेंगे?Show solution
'नए मेहमान' एकांकी के मंचन के लिए निम्नलिखित तैयारियाँ की जाएँगी:

पात्रों का चयन:
- विश्वनाथ, रेवती, प्रमोद, नन्हेमल, बाबूलाल और छोटी बच्ची के लिए उपयुक्त विद्यार्थियों का चयन।

वेशभूषा:
- विश्वनाथ: धोती-कुर्ता
- रेवती: साड़ी
- नन्हेमल और बाबूलाल: पुराने जमाने के कपड़े
- प्रमोद: सामान्य कपड़े

मंच-सज्जा:
- एक कमरे का दृश्य — कुर्सियाँ, मेज, पंखा (हाथ का)
- गरमी का माहौल दर्शाने के लिए पीले-नारंगी रंग की रोशनी

संवाद याद करना:
- सभी पात्र अपने-अपने संवाद याद करेंगे।

अतिरिक्त जोड़:
- पड़ोसी का एक दृश्य जोड़ा जा सकता है।
- पृष्ठभूमि में गरमी का संगीत या आवाज़ें जोड़ी जा सकती हैं।

अभ्यास:
- मंचन से पहले कई बार रिहर्सल की जाएगी।

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अपने समूह में मिलकर एकांकी प्रस्तुत करने की तैयारी कीजिए।Show solution
यह एक गतिविधि-आधारित प्रश्न है जिसे कक्षा में समूह में करना है। इसके लिए निम्नलिखित सुझाव हैं:

1. भूमिका वितरण: समूह के सदस्यों में पात्रों की भूमिकाएँ बाँटें।
2. संवाद: एकांकी के संवाद ध्यान से पढ़ें और याद करें।
3. समय प्रबंधन: 10-15 मिनट में एकांकी प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक संवाद चुनें।
4. मंच: कक्षा में उपलब्ध कुर्सी, मेज आदि का उपयोग करें।
5. अभिनय: संवाद बोलते समय उचित हाव-भाव और आवाज़ का उपयोग करें।
6. रिकॉर्डिंग: शिक्षक की सहायता से अभिनय रिकॉर्ड करके परिवार के साथ साझा करें।

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भाषा की बात

1एकांकी में शब्दों के माध्यम से विशेष प्रभाव उत्पन्न करने वाले प्रयोगों को छाँटकर लिखिए।Show solution
एकांकी 'नए मेहमान' में शब्दों के माध्यम से विशेष प्रभाव उत्पन्न करने वाले प्रयोग:

1. "सारे शहर में जैसे आग बरस रही हो" — यहाँ 'आग बरसना' से भीषण गरमी का प्रभाव उत्पन्न हुआ है।

2. "चारों तरफ दीवारें तप रही हैं" — 'दीवारें तपना' से गरमी की तीव्रता का बोध होता है।

3. "चने की तरह भाड़ में भुनते रहते हैं" — उपमा द्वारा गरमी में झुलसने का प्रभाव।

4. "पानी पीते-पीते पेट फूला जा रहा है" — अतिशयोक्ति द्वारा प्यास की तीव्रता का वर्णन।

5. "तमाम शरीर मारे गरमी के उबल उठा है" — 'उबलना' शब्द से शरीर की तपन का प्रभाव।

6. "पसीने से नहा गया हूँ" — अत्यधिक पसीने का अतिशयोक्तिपूर्ण वर्णन।

7. "प्राण सूखे जा रहे हैं" — प्यास की तीव्रता का भावपूर्ण वर्णन।

8. "जान में जान आई" — राहत मिलने का प्रभावशाली वर्णन।

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2एकांकी में आए मुहावरों की पहचान करके लिखिए और उनके अर्थ समझते हुए उनका अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए।Show solution
एकांकी 'नए मेहमान' में आए प्रमुख मुहावरे, उनके अर्थ और वाक्य-प्रयोग:

1. दिन-रात एक करना
अर्थ: बहुत अधिक परिश्रम करना, बिना आराम किए काम करना।
वाक्य: राम ने परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए दिन-रात एक कर दिया।

2. खाक में मिलना
अर्थ: सब कुछ नष्ट हो जाना, बर्बाद हो जाना।
वाक्य: बाढ़ में किसान की सारी फसल खाक में मिल गई।

3. जान में जान आना
अर्थ: राहत मिलना, चिंता दूर होना।
वाक्य: बीमार बच्चे को ठीक होते देख माँ की जान में जान आई।

4. भाड़ में भुनना
अर्थ: बहुत अधिक कष्ट सहना।
वाक्य: इस भीषण गरमी में बाहर काम करने वाले मजदूर भाड़ में भुनते रहते हैं।

5. पसीने से नहाना
अर्थ: बहुत अधिक पसीना आना।
वाक्य: मैदान में दौड़ने के बाद वह पसीने से नहा गया।

6. प्राण सूखना
अर्थ: बहुत अधिक प्यास लगना या भय से घबरा जाना।
वाक्य: रेगिस्तान में घंटों चलने के बाद यात्री के प्राण सूख गए।

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3(क)वाक्य में 'ही' के प्रयोग से किस बात को बल मिल रहा था और 'ही' हटा देने से क्या कमी आई?
3(ख)नीचे लिखे वाक्यों में ऐसे स्थान पर 'ही' का प्रयोग कीजिए कि वे सामने लिखा अर्थ देने लगें।
3(ग)'तो' का स्थान बदलकर अर्थ में आए परिवर्तन पर ध्यान दें और 'ही' तथा 'तो' के ऐसे और प्रयोग करके वाक्य बनाइए।

पाठ से आगे — आपकी बात

क्या आपके सामने कभी कोई ऐसी दुविधापूर्ण स्थिति आई है जब आपको यह समझने में समय लगा हो कि क्या सही है और क्या गलत? अपने अनुभव साझा कीजिए।
एकांकी से ऐसा लगता है कि नन्हेमल और बाबूलाल सगे संबंधी ही नहीं, अच्छे मित्र भी हैं। आपके अच्छे मित्र कौन-कौन हैं? वे आपको क्यों प्रिय हैं?
आप अपने किसी संबंधी या मित्र के घर जाने से पहले क्या-क्या तैयारी करते हैं?
विश्वनाथ के पड़ोसी उनका किसी प्रकार से भी सहयोग नहीं करते हैं। आप अपने पड़ोसियों का किस प्रकार से सहयोग करते हैं?
नन्हेमल और बाबूलाल का व्यवहार सामान्य अतिथियों जैसा नहीं है। आपके अनुसार सामान्य अतिथियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए?

सावधानी और सुरक्षा

विश्वनाथ ने नन्हेमल और बाबूलाल से उनका परिचय नहीं पूछा और उन्हें घर के भीतर ले आए। यदि आप उनके स्थान पर होते तो क्या करते?
आपके माता-पिता या अभिभावक की अनुपस्थिति में यदि कोई अपरिचित व्यक्ति आए तो आप क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?

सृजन

इस एकांकी में एक कहानी कही गई है। उस कहानी को अपने शब्दों में लिखिए।

गरमी का प्रकोप

1गरमी के प्रकोप से बचने के लिए क्या-क्या सावधानियाँ बरतेंगे?

तार से संदेश

तार भेजने के आधार पर अनुमान लगाएँ कि यह एकांकी लगभग कितने वर्ष पहले लिखी गई होगी?
आजकल संदेश भेजने के कौन-कौन से साधन सुलभ हैं?
आप किसी को संदेश भेजने के लिए किस माध्यम का सर्वाधिक उपयोग करते हैं?
अपने किसी प्रिय व्यक्ति को एक पत्र लिखकर भारतीय डाक द्वारा भेजिए।

नाप, तौल और मुद्राएँ

पता लगाइए कि एक रुपये में कितने आने होते हैं?
चार आने में कितने पैसे होते हैं?
आपके आस-पास गज शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में किया जाता है?
बताइए कि एक गज में कितनी फीट होती हैं?

झरोखे से (निराला जी का आतिथ्य)

1'झरोखे से' अंश को पढ़कर निराला जी के आतिथ्य-भाव को समझिए और 'अतिथि देवो भव' की परंपरा पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।

खोजबीन के लिए

1इस एकांकी में 'आने', 'गज' और 'तार' शब्द आए हैं। इनके विषय में विस्तार से जानकारी इकट्ठी कीजिए।

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