हार की जीत — NCERT Solutions
CBSE · Class 6 · Hindi
NCERT Solutions for हार की जीत, CBSE Class 6 Hindi: 25 textbook questions solved step by step. Part of the CBSE Class 6 Hindi syllabus.
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पाठ से — मेरी समझ से
क(1)सुल्तान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?
- बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।
- बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया।
- बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।
- बाबा भारती असावधान हो गए।Show solution
सही उत्तर: ✗ बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।
कारण: जब खड़गसिंह ने सुलतान लौटाते हुए बाबा भारती से वचन लिया कि वे इस घटना को किसी को न बताएँ, तो बाबा भारती ने सोचा कि यदि लोगों को पता चला कि एक डाकू ने घोड़ा लौटा दिया तो लोगों का विश्वास डाकुओं पर से उठ जाएगा। इसके साथ ही बाबा भारती के मन में यह भाव आया कि जब एक डाकू का हृदय इतना बड़ा हो सकता है तो उन्हें अब किसी से डरने की आवश्यकता नहीं। इसलिए उन्होंने अपने द्वार बंद करना छोड़ दिया।
क(2)"बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।" इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?
- बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया।
- बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।
- बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था।
- बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।Show solution
सही उत्तर: ✗ बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।
कारण: लेखक ने बताया है कि बाबा भारती संत-स्वभाव के व्यक्ति थे, परंतु सुलतान घोड़े के प्रति उनका मोह इतना अधिक था कि वे चाहते थे कि लोग उनके घोड़े की प्रशंसा करें। जब खड़गसिंह ने घोड़े की तारीफ की तो बाबा भारती प्रसन्नता से फूले नहीं समाए। यही मानवीय दुर्बलता — प्रशंसा सुनने की लालसा — यह सिद्ध करती है कि 'बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।'
खअब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution
यह एक चर्चा-आधारित गतिविधि है। विद्यार्थी अपने मित्रों के साथ निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा कर सकते हैं:
- पहले प्रश्न के लिए — कहानी के अंत में बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया, क्योंकि खड़गसिंह के हृदय-परिवर्तन ने उनके मन से भय और संदेह दूर कर दिया।
- दूसरे प्रश्न के लिए — बाबा भारती एक साधु थे, फिर भी घोड़े की प्रशंसा सुनने की उनकी इच्छा यह दर्शाती है कि वे भी एक सामान्य मनुष्य की तरह भावनाओं से बँधे थे। यही उनकी मानवीय दुर्बलता थी।
शैक्षिक प्रश्न
कइस कहानी का नाम सुदर्शन ने 'हार की जीत' रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।Show solution
'हार की जीत' नाम अत्यंत सार्थक है।
कहानी में बाबा भारती का प्रिय घोड़ा सुलतान डाकू खड़गसिंह छल से छीन लेता है। इस प्रकार बाहर से देखने पर बाबा भारती 'हार' जाते हैं — उनका घोड़ा चला जाता है।
परंतु वास्तव में यही उनकी 'जीत' बन जाती है, क्योंकि:
- बाबा भारती ने खड़गसिंह से वचन लिया कि वह इस घटना को किसी को न बताए, ताकि गरीबों का विश्वास न टूटे।
- इस निःस्वार्थ भाव ने खड़गसिंह के पत्थर-हृदय को पिघला दिया।
- खड़गसिंह ने रात को चुपचाप घोड़ा वापस लौटा दिया।
इस प्रकार बाबा भारती की 'हार' ही उनकी असली 'जीत' बन गई — उन्होंने घोड़ा भी पाया और एक डाकू का हृदय-परिवर्तन भी किया। इसीलिए लेखक ने इस कहानी का नाम 'हार की जीत' रखा।
खयदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।Show solution
यदि मुझे इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो मैं इसे 'हृदय-परिवर्तन' नाम दूँगा।
कारण: इस कहानी का मूल भाव यह है कि बाबा भारती की निःस्वार्थता और करुणा ने एक कठोर डाकू खड़गसिंह के हृदय को बदल दिया। खड़गसिंह जो पहले दूसरों की वस्तुएँ छीनने में विश्वास रखता था, वही बाबा भारती के उदार व्यवहार से प्रभावित होकर घोड़ा वापस लौटा देता है। यह हृदय-परिवर्तन ही कहानी का केंद्रीय विषय है, इसलिए 'हृदय-परिवर्तन' इस कहानी के लिए उचित नाम होगा।
(नोट: विद्यार्थी अपनी कल्पना से अन्य नाम भी सोच सकते हैं, जैसे — 'सच्ची जीत', 'डाकू का पश्चाताप', 'करुणा की शक्ति' आदि।)
गबाबा भारती ने डाकू खड़गसिंह से कौन-सा वचन लिया?Show solution
दिया गया: कहानी 'हार की जीत' में बाबा भारती और खड़गसिंह का प्रसंग।
उत्तर:
जब खड़गसिंह ने छल से बाबा भारती का प्रिय घोड़ा सुलतान छीन लिया, तब बाबा भारती ने उससे केवल एक वचन माँगा — "इस घटना को किसी के सामने प्रकट मत करना।"
बाबा भारती ने यह वचन इसलिए लिया क्योंकि उन्हें डर था कि यदि लोगों को पता चला कि एक डाकू ने उनका घोड़ा छल से छीन लिया, तो गरीब और असहाय लोगों का विश्वास उठ जाएगा और वे किसी की सहायता के लिए आगे नहीं आएँगे। बाबा भारती अपने घोड़े से अधिक समाज के विश्वास की रक्षा करना चाहते थे।
पंक्तियों पर चर्चा
1"भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता!" — इस पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution
अर्थ: इस पंक्ति से लेखक यह बताना चाहते हैं कि बाबा भारती एक धार्मिक व्यक्ति थे और उनका अधिकांश समय भगवान की भक्ति में बीतता था। परंतु जो थोड़ा-बहुत समय भजन-पूजन के बाद बचता था, वह सारा समय वे अपने प्रिय घोड़े सुलतान की देखभाल और सेवा में लगा देते थे।
इस पंक्ति से यह भी स्पष्ट होता है कि सुलतान बाबा भारती के जीवन में ईश्वर-भक्ति के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण स्थान रखता था। घोड़े के प्रति उनका यह अगाध प्रेम और समर्पण उनकी एकमात्र सांसारिक आसक्ति थी।
2"बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड़गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से!" — इस पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution
अर्थ: इस पंक्ति में दो भावों का सुंदर चित्रण है।
- बाबा भारती का घमंड: बाबा भारती एक संत थे, परंतु सुलतान के प्रति उनका मोह इतना गहरा था कि जब खड़गसिंह ने घोड़े की प्रशंसा की, तो वे गर्व और घमंड से भर गए। वे चाहते थे कि लोग उनके घोड़े की तारीफ करें — यह उनकी मानवीय दुर्बलता थी।
- खड़गसिंह का आश्चर्य: खड़गसिंह एक अनुभवी डाकू था जिसने अनेक घोड़े देखे होंगे, परंतु सुलतान की सुंदरता, शक्ति और चाल देखकर वह भी आश्चर्यचकित रह गया।
इस पंक्ति से कहानी में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ आता है — बाबा का यही घमंड उनकी हार का कारण बना।
3"वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था!" — इस पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution
अर्थ: इस पंक्ति से खड़गसिंह के स्वभाव और चरित्र का परिचय मिलता है। वह एक निर्दयी और स्वार्थी डाकू था जो बल और छल से दूसरों की वस्तुएँ हड़प लेता था। उसके लिए नैतिकता और दूसरों के अधिकारों का कोई महत्त्व नहीं था।
जब उसने सुलतान को देखा तो उसके मन में लालच जाग उठा और उसने ठान लिया कि यह घोड़ा उसे हर हाल में प्राप्त करना है। यह पंक्ति यह भी दर्शाती है कि डाकू का जीवन लालच और अहंकार पर टिका होता है।
4"बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है!" — इस पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution
अर्थ: इस पंक्ति में एक मार्मिक उपमा का प्रयोग किया गया है। जिस प्रकार एक बकरा कसाई को देखकर भयभीत और असहाय हो जाता है — जानता है कि उसका अंत निकट है, फिर भी कुछ नहीं कर सकता — ठीक उसी प्रकार बाबा भारती की स्थिति थी।
जब खड़गसिंह ने छल से अपाहिज बनकर घोड़े पर चढ़ने की माँग की, तो बाबा भारती समझ गए कि अब घोड़ा जाएगा। वे जानते थे कि खड़गसिंह एक खतरनाक डाकू है और वे उसका विरोध नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने विवश होकर कहा — 'यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।' यह पंक्ति बाबा भारती की असहायता और वेदना को बहुत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करती है।
5"उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।" — इस पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।Show solution
अर्थ: यह पंक्ति उस क्षण की है जब खड़गसिंह सुलतान को लेकर चला गया था। बाबा भारती की आदत थी कि वे प्रतिदिन अस्तबल में जाकर सुलतान को देखते थे। उस दिन भी उनके पाँव स्वाभाविक रूप से अस्तबल की ओर मुड़ गए।
परंतु फाटक पर पहुँचते ही उन्हें याद आया कि अब सुलतान वहाँ नहीं है — वह जा चुका है। यह पंक्ति बाबा भारती के गहरे दुख और सुलतान के प्रति उनके अटूट प्रेम को दर्शाती है। यह आदत और वास्तविकता के बीच का दर्दनाक टकराव है जो पाठक के हृदय को छू जाता है।
सोच-विचार के लिए
क"दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।" — किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?Show solution
उत्तर: इस पंक्ति में बाबा भारती और डाकू खड़गसिंह — इन दोनों के आँसुओं का मेल हुआ था।
जब खड़गसिंह रात के अँधेरे में चुपचाप सुलतान को वापस लाया और अस्तबल में बाँध दिया, तब बाबा भारती ने घोड़े को देखा। उनकी आँखों से खुशी और भावुकता के आँसू बह निकले। उसी समय खड़गसिंह भी वहाँ था और उसकी आँखों से भी आँसू बह रहे थे — पश्चाताप और हृदय-परिवर्तन के आँसू। इस प्रकार दोनों के आँसू उस भूमि की मिट्टी पर मिल गए।
ख"दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।" — दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?Show solution
उत्तर: दोनों के आँसुओं में निम्नलिखित अंतर था:
| बाबा भारती के आँसू | खड़गसिंह के आँसू |
|---|---|
| ये खुशी और कृतज्ञता के आँसू थे। | ये पश्चाताप और लज्जा के आँसू थे। |
| बाबा भारती अपना प्रिय घोड़ा सुलतान वापस पाकर भावुक हो गए थे। | खड़गसिंह को अपने किए पर पछतावा हो रहा था कि उसने एक निर्दोष संत के साथ छल किया। |
| उनके आँसुओं में संतोष और प्रेम था। | उनके आँसुओं में हृदय-परिवर्तन और नई शुरुआत का भाव था। |
इस प्रकार दोनों के आँसू अलग-अलग भावों से उत्पन्न हुए थे, परंतु मिट्टी पर मिलकर वे एक हो गए — यह मानवता की एकता का प्रतीक है।
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in हार की जीत for CBSE Class 6 Hindi?
Are these NCERT Solutions for हार की जीत free?
How should I revise हार की जीत for Class 6 exams?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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