जलाते चलो — NCERT Solutions
CBSE · Class 6 · Hindi
NCERT Solutions for जलाते चलो, CBSE Class 6 Hindi: 32 textbook questions solved step by step. Part of the CBSE Class 6 Hindi syllabus.
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पाठ से — मेरी समझ से
(क)(1)निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?
- भलाई के कार्य करते रहना
- दीपावली के दीपक जलाना
- बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना
- तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहनाShow solution
सही उत्तर: ✗ भलाई के कार्य करते रहना
कारण: इस कविता में कवि ने दीपक और तूफान के प्रतीकों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि मनुष्य को निराश हुए बिना, स्नेह और प्रेम से भरकर भलाई के कार्य करते रहने चाहिए। कविता की मुख्य भावना यही है कि अँधेरे (बुराई, निराशा) से डरे बिना दीपक (अच्छाई, प्रेम) जलाते रहो।
(क)(2)"जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी" यह वाक्य किससे कहा गया है?
- तूफान से
- मनुष्यों से
- दीपकों से
- तिमिर सेShow solution
सही उत्तर: ✗ मनुष्यों से
कारण: कवि इन पंक्तियों में मनुष्यों को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि तुमने ही सबसे पहले दीपक जलाकर अँधेरे (तिमिर) की चुनौती स्वीकार की थी। यह मनुष्य की उस शक्ति और साहस की बात है जिससे उसने अज्ञान, बुराई और निराशा के अँधेरे को चुनौती दी।
(ख)अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution
कारण (चर्चा के लिए):
(1) पहले प्रश्न में 'भलाई के कार्य करते रहना' सही उत्तर है क्योंकि कविता में 'दिये जलाना' और 'नाव बहाना' वास्तव में भलाई के कार्य करते रहने के प्रतीक हैं। कवि का उद्देश्य दीपावली के दीपक जलाना या बल्ब जलाना नहीं, बल्कि प्रेम और अच्छाई का प्रकाश फैलाना है।
(2) दूसरे प्रश्न में 'मनुष्यों से' सही उत्तर है क्योंकि पूरी कविता में कवि मनुष्यों को 'तुम' कहकर संबोधित करते हैं और उन्हें प्रेरित करते हैं कि वे अँधेरे से न डरें और भलाई का दीपक जलाते रहें।
मिलकर करें मिलान
1कविता में से चुने गए शब्दों को उनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए:
1. अमावस
2. पूर्णिमा
3. विद्युत-दिये
4. युगShow solution
सही मिलान:
- अमावस → 4. अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता।
- पूर्णिमा → 1. पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है।
- विद्युत-दिये → 2. विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण।
- युग → 3. समय, काल, युग — संख्या में चार माने गए हैं — सत्ययुग, त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग।
पंक्तियों पर चर्चा
1"दिये और तूफान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी, जली जो प्रथम बार लौ दीप की स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी।। रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।।" — इन पंक्तियों का अर्थ अपने शब्दों में लिखिए।Show solution
इन पंक्तियों का अर्थ:
कवि कहते हैं कि अच्छाई और बुराई का, प्रकाश और अँधेरे का, आशा और निराशा का संघर्ष सदा से चला आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा। जब से मनुष्य ने पहली बार अँधेरे को चुनौती देते हुए दीपक जलाया, तब से वह सोने जैसी चमकदार लौ — अर्थात् भलाई, प्रेम और आशा की भावना — जलती आ रही है और जलती रहेगी।
कवि आशा व्यक्त करते हैं कि यदि इस धरती पर एक भी व्यक्ति भलाई का दीपक जलाए रखेगा, तो एक न एक दिन अँधेरा (बुराई, निराशा, दुख) अवश्य दूर होगा और सवेरा (सुख, शांति, उजाला) आएगा।
संदेश: निराश न हों, भलाई का प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।
सोच-विचार के लिए
(क)कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?Show solution
कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए निम्नलिखित उदाहरण दिए गए हैं:
- अमावस (अमावस्या की रात) — जब आकाश में चंद्रमा नहीं दिखता, चारों ओर घना अँधेरा होता है।
- निशा (रात) — रात का अँधेरा तिमिर का प्रतीक है।
- तूफान — जो दीपक की लौ को बुझाने की कोशिश करता है, अर्थात् बुराई और विपत्तियाँ।
- दिवस में घिरी अमावस निशा — दिन में भी छाया अँधेरा, अर्थात् आज के युग में फैली बुराई, अज्ञान और निराशा।
इन सभी उदाहरणों के माध्यम से कवि ने जीवन में आने वाली कठिनाइयों, बुराइयों और निराशा को 'तिमिर' के रूप में दर्शाया है।
(ख)यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?Show solution
कविता में की गई आशा:
कवि ने इस कविता में यह आशा की है कि —
- एक न एक दिन धरती का अँधेरा (बुराई, दुख, निराशा) अवश्य मिटेगा।
- अमावस जैसी निशा (घोर अँधेरा) पूर्णिमा जैसी (उजली, सुंदर) बन जाएगी।
- तिमिर (अँधेरे) का किनारा अवश्य मिलेगा।
- निशा को सवेरा अवश्य मिलेगा।
यह आशा क्यों की गई है:
यह आशा इसलिए की गई है क्योंकि —
- मनुष्य ने सदा से अँधेरे को चुनौती दी है और दीपक जलाए हैं।
- भलाई की लौ सदा से जलती आ रही है और कभी पूरी तरह बुझी नहीं।
- यदि एक भी व्यक्ति भलाई का कार्य करता रहे तो परिवर्तन अवश्य आएगा।
- निरंतर प्रयास और स्नेह से बड़ी से बड़ी बुराई को दूर किया जा सकता है।
(ग)कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है?Show solution
जलाने की बात:
कविता में स्नेह (प्रेम) से भरे दीपक जलाने की बात कही गई है। ये दीपक प्रेम, भलाई, आशा और अच्छाई के प्रतीक हैं। कवि कहते हैं — 'जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर' अर्थात् प्रेम और करुणा से भरकर भलाई के कार्य करते रहो।
बुझाने की बात:
कविता में उन विद्युत-दीयों (बल्बों) को बुझाने की बात कही गई है जो बिना स्नेह (प्रेम, करुणा) के जल रहे हैं। इनसे सही रास्ता नहीं मिल सकता। अर्थात् वे कार्य जो केवल दिखावे के लिए किए जाते हैं, जिनमें सच्चा प्रेम और भलाई की भावना नहीं होती — उन्हें बंद करना चाहिए।
संक्षेप में: सच्चे प्रेम और भलाई के दीपक जलाओ, और दिखावे व स्वार्थ के दीपक बुझाओ।
कविता की रचना
(क)इस कविता को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए।Show solution
इस कविता की प्रमुख विशेषताएँ:
- लय और ताल: कविता की प्रत्येक पंक्ति को बोलने या गाने में लगभग समान समय लगता है, जिससे कविता में एक सुंदर लय बनती है।
- पंक्तियों का विभाजन: कविता की पंक्तियों को 2–4, 2–4 के क्रम में बाँटा गया है — पहले दो छोटी पंक्तियाँ, फिर चार पंक्तियाँ।
- प्रतीकात्मकता: दीपक, तूफान, अमावस, पूर्णिमा, निशा, सवेरा आदि शब्दों का प्रयोग प्रतीक के रूप में किया गया है।
- तुकबंदी: कविता में तुकबंदी का सुंदर प्रयोग है, जैसे — 'चलती रहेगी / जलती रहेगी', 'मिलेगा / मिलेगा'।
- प्रेरणादायक भाव: पूरी कविता में आशा, उत्साह और प्रेरणा का भाव है।
- पुनरावृत्ति: 'चलती रहेगी', 'जलती रहेगी' जैसे शब्दों की पुनरावृत्ति से निरंतरता का भाव उत्पन्न होता है।
- सरल और प्रभावशाली भाषा: कविता की भाषा सरल है किंतु भाव गहरे हैं।
(ख)अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।Show solution
(यह एक कक्षा-गतिविधि है। विद्यार्थी अपने समूह में बनाई गई सूची को कक्षा में प्रस्तुत करें।)
प्रस्तुति के समय ध्यान रखें:
- स्पष्ट और आत्मविश्वास से बोलें।
- कविता की पंक्तियों के उदाहरण देकर अपनी बात समझाएँ।
- दूसरे समूहों की विशेषताओं को भी ध्यान से सुनें और अपनी सूची में जोड़ें।
मिलान — स्तंभ 1 और स्तंभ 2
1स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए।Show solution
सही मिलान:
- कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा। → 3. विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा।
- जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर। → 4. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।
- मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। → 2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है?
- बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा। → 1. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा।
अनुमान या कल्पना से
(क)"दिये और तूफान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी" — दीपक और तूफान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?Show solution
दीपक और तूफान की कहानी:
दीपक और तूफान की यह कहानी वास्तव में अच्छाई और बुराई के बीच के संघर्ष की कहानी है जो सृष्टि के आरंभ से चली आ रही है।
- दीपक — प्रेम, भलाई, आशा, ज्ञान और साहस का प्रतीक है।
- तूफान — बुराई, अत्याचार, निराशा, अज्ञान और विपत्तियों का प्रतीक है।
यह कहानी यह है कि जब-जब दुनिया में बुराई (तूफान) बढ़ी है, तब-तब किसी न किसी अच्छे इंसान (दीपक) ने उसका सामना किया है। तूफान ने दीपक को बुझाने की कोशिश की, लेकिन दीपक जलता रहा। यह संघर्ष सदा से चला आ रहा है और आगे भी चलता रहेगा। परंतु अच्छाई की लौ कभी पूरी तरह नहीं बुझती।
(ख)"जली जो प्रथम बार लौ दीप की स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी" — दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?Show solution
दीपक की सोने जैसी लौ:
दीपक की यह सोने जैसी (स्वर्ण-सी) लौ वास्तव में मनुष्य के मन में जलने वाली भलाई, प्रेम और आशा की भावना है।
यह लौ हो सकती है —
- मनुष्य की अच्छाई करने की इच्छा जो आदिकाल से चली आ रही है।
- ज्ञान और विवेक की रोशनी जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है।
- प्रेम और करुणा की भावना जो हर युग में किसी न किसी महान व्यक्ति में जलती रही है।
- सत्य और न्याय की आस्था जो कभी पूरी तरह नहीं बुझी।
यह लौ इसलिए सोने जैसी है क्योंकि यह अत्यंत मूल्यवान है और इसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ती।
शब्दों के रूप
1'अमावस' और 'अमावस्या' जैसे मिलते-जुलते शब्दों की तरह नीचे दिए गए शब्दों से मिलते-जुलते दूसरे शब्द कविता से खोजकर लिखिए:
1. दिया
2. उजेला
3. अनगिनShow solution
मिलते-जुलते शब्द:
- दिया → दीप / दीपक
(कविता में 'दिया' और 'दीप' दोनों का प्रयोग हुआ है — दोनों का अर्थ एक ही है।)
- उजेला → उजाला / प्रकाश / ज्योति
(कविता में 'उजेला' शब्द का प्रयोग हुआ है जो 'उजाला' का ही दूसरा रूप है।)
- अनगिन → अनगिनत / असंख्य
(कविता में 'अनगिन' शब्द का प्रयोग हुआ है जो 'अनगिनत' का संक्षिप्त रूप है।)
कुछ अन्य उदाहरण (चर्चा से):
- पवन → हवा / वायु / समीर / अनिल
- निशा → रात / रात्रि / रजनी
- सवेरा → प्रभात / भोर / प्रातः
अर्थ की बात
(क)"जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर" — इस पंक्ति में 'चलो' के स्थान पर 'रहो' शब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आ रहा है?Show solution
'चलो' और 'रहो' में अंतर:
मूल पंक्ति: "जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर"
बदली हुई पंक्ति: "जलाते रहो ये दिये स्नेह भर-भर"
अंतर:
- 'चलो' शब्द में गति और आगे बढ़ने का भाव है। इसमें यह संदेश है कि केवल एक जगह रुककर नहीं, बल्कि चलते-चलते, आगे बढ़ते हुए भलाई के कार्य करते रहो। इसमें उत्साह, सक्रियता और निरंतर प्रगति का भाव है।
- 'रहो' शब्द में केवल निरंतरता का भाव है — अर्थात् जलाते रहो, बंद मत करो। इसमें गति का भाव नहीं है।
निष्कर्ष: 'चलो' शब्द अधिक प्रभावशाली है क्योंकि इसमें आगे बढ़ने, सक्रिय रहने और उत्साह के साथ कार्य करने का भाव है। 'रहो' से केवल ठहरकर काम करने का भाव आता है।
(ख)नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। पंक्तियों के सामने लगभग समान अर्थों वाले कुछ शब्द दिए गए हैं। उनमें से वह शब्द चुनिए जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा:
1. बहाते चलो ___ तुम वह निरंतर (नैया, नाव, नौका) / कभी तो तिमिर का ___ मिलेगा। (तट, तीर, किनारा)
2. रहेगा ___ पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि) / कभी तो निशा को ___ मिलेगा। (प्रातः, सुबह, सवेरा)
3. जला दीप पहला तुम्हीं ने ___ की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे) / चुनौती ___ बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली)Show solution
सबसे उपयुक्त शब्दों का चयन:
- बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर।
कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।
(कारण: 'नाव' शब्द सरल, प्रचलित और कविता की लय के अनुकूल है। 'किनारा' शब्द में व्यापक अर्थ है — मंजिल, छुटकारा — जो कविता के भाव से मेल खाता है।)
- रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि।
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।
(कारण: 'धरा' शब्द काव्यात्मक है और कविता की भाषा-शैली के अनुरूप है। 'सवेरा' शब्द में उजाले और नई शुरुआत का भाव है जो 'प्रातः' और 'सुबह' से अधिक काव्यात्मक है।)
- जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की।
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।
(कारण: 'तिमिर' शब्द काव्यात्मक है और कविता में पहले से प्रयुक्त है। 'प्रथम' शब्द 'पहली' और 'अव्वल' की तुलना में अधिक काव्यात्मक और लय के अनुकूल है।)
प्रतीक
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दिये, अँधेरा, अमावस, पूर्णिमा, दिवस, तिमिर, नाव, किनारा, शिला, ज्योति, उजेला, तूफान, लौ, स्वर्ण, जलना, बुझना
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पंक्ति से पंक्ति
1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।
3. बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।
4. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
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Frequently Asked Questions
What are the important topics in जलाते चलो for CBSE Class 6 Hindi?
Are these NCERT Solutions for जलाते चलो free?
How should I revise जलाते चलो for Class 6 exams?
Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
Content is aligned to the official syllabus. Refer to the board website for the latest curriculum.
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