माँ, कह एक कहानी (कविता)-मैथिलीशरण गुप्त — NCERT Solutions
CBSE · Class 7 · Hindi
NCERT Solutions for माँ, कह एक कहानी (कविता)-मैथिलीशरण गुप्त, CBSE Class 7 Hindi: 32 textbook questions solved step by step.
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पाठ से — मेरी समझ से
1(1)माँ अपने बेटे को करुणा और न्याय की कहानी क्यों सुनाती है?
- राजाओं की कहानियों से उसका मनोरंजन करने के लिए।
- उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए।
- उसे परिवार की विरासत और पूर्वजों के बारे में बताने के लिए।
- उसे प्रकृति और जानवरों के बारे में जानकारी देने के लिए।Show solution
सही उत्तर: ☀ उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए।
कारण: कविता में माँ अपने पुत्र राहुल को उसके पिता (सिद्धार्थ/गौतम बुद्ध) की वह कहानी सुनाती है जिसमें एक घायल हंस को बचाने और न्याय दिलाने का प्रसंग है। इस कहानी के माध्यम से माँ बच्चे में यह समझ विकसित करना चाहती है कि निर्दोष की रक्षा करना उचित है और न्याय सदा करुणा के साथ होना चाहिए — अर्थात् सही और गलत की पहचान करना।
1(2)कविता में घायल पक्षी की कहानी का उपयोग किस लिए किया गया है?
- निर्दोष पक्षी के प्रति आखेटक की क्रूरता दिखाने के लिए।
- पिता की वीरता और साहस पर ध्यान दिलाने के लिए।
- करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए।
- मित्रता और निष्ठा के महत्व को उजागर करने के लिए।Show solution
सही उत्तर: ☀ करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए।
कारण: कविता में एक ओर आखेटक (तीर चलाने वाला) है जो हिंसा का प्रतीक है और दूसरी ओर सिद्धार्थ (बच्चे के पिता) हैं जो करुणावश घायल हंस की रक्षा करते हैं। दोनों के बीच विवाद होता है और न्यायालय में निर्णय होता है। इस प्रकार यह प्रसंग करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
1(3)कविता के अंत तक पहुँचते-पहुँचते बच्चे को क्या समझ में आने लगता है?
- न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए।
- निर्णय लेते समय सदैव निडर रहना चाहिए।
- आखेटकों का सदैव विरोध करना चाहिए।
- जानवरों की हर स्थिति में रक्षा करनी चाहिए।Show solution
सही उत्तर: ☀ न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए।
कारण: कविता के अंत में बच्चा स्वयं कहता है — 'कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे? रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!' इससे स्पष्ट होता है कि बच्चे को यह समझ आ जाती है कि सच्चा न्याय वही है जिसमें करुणा (दया) भी हो — अर्थात् न्याय और करुणा साथ-साथ चलते हैं।
1(ख)हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?Show solution
संकेत (समूह चर्चा के लिए):
यह प्रश्न समूह-चर्चा पर आधारित है। विद्यार्थी अपने-अपने उत्तरों के पक्ष में कविता की पंक्तियों का उदाहरण देकर तर्क प्रस्तुत करें। उदाहरण के लिए —
- प्रश्न (1) के लिए: माँ ने कहानी में न्याय और करुणा का पाठ पढ़ाया, इसलिए 'सही और गलत की समझ विकसित करना' सबसे उपयुक्त उत्तर है।
- प्रश्न (2) के लिए: घायल हंस का प्रसंग हिंसा (आखेटक) और करुणा (सिद्धार्थ) के बीच के संघर्ष को दर्शाता है।
- प्रश्न (3) के लिए: बच्चे का अंतिम कथन 'न्याय दया का दानी' यह सिद्ध करता है कि उसे न्याय और करुणा का संबंध समझ आ गया।
समूह में सभी विद्यार्थी अपने-अपने तर्क साझा करें और सर्वसम्मति से सही उत्तर तय करें।
मिलकर करें मिलान
2कविता में माँ, पुत्र और पिता कौन हैं? पात्रों को सुमेलित कीजिए।
| पात्र | ये शब्द किनके लिए आए हैं |
|---|---|
| 1. बेटा | 1. यशोधरा, एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी |
| 2. माँ | 2. सिद्धार्थ, एक राजकुमार जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए |
| 3. तात (पिता) | 3. सिद्धार्थ और यशोधरा के पुत्र राहुल |Show solution
सही सुमेलन:
| पात्र | ये शब्द किनके लिए आए हैं |
|---|---|
| 1. बेटा | 3. सिद्धार्थ और यशोधरा के पुत्र राहुल |
| 2. माँ | 1. यशोधरा, एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी |
| 3. तात (पिता) | 2. सिद्धार्थ, एक राजकुमार जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए |
स्पष्टीकरण: यह कविता मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित है। इसमें यशोधरा अपने पुत्र राहुल को उसके पिता सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) की कहानी सुना रही हैं। सिद्धार्थ ने बचपन में एक घायल हंस की रक्षा की थी और न्याय के लिए संघर्ष किया था।
पंक्तियों पर चर्चा
3(क)निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए:
"कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!"Show solution
अर्थ:
इन पंक्तियों में बालक राहुल अपनी माँ की कहानी सुनकर स्वयं न्याय का निर्णय सुनाता है।
- 'कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे?' — यदि कोई किसी निर्दोष प्राणी को मारे, तो दूसरे व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह उस निर्दोष की रक्षा करे। अर्थात् निर्दोष की सहायता करना हमारा धर्म है।
- 'रक्षक पर भक्षक को वारे' — न्याय उस व्यक्ति का पक्ष लेता है जो रक्षा करता है, न कि उसका जो मारता (भक्षण करता) है। अर्थात् न्याय रक्षक के विरुद्ध भक्षक का साथ नहीं देता।
- 'न्याय दया का दानी!' — सच्चा न्याय वही है जिसमें दया (करुणा) भी हो। न्याय और करुणा एक-दूसरे के पूरक हैं।
सारांश: ये पंक्तियाँ यह संदेश देती हैं कि सच्चा न्याय निर्दोष की रक्षा करता है और उसमें करुणा का भाव अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
3(ख)निम्नलिखित पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट कीजिए:
"हुआ विवाद सद्य-निर्दय में,
उभय आग्रही थे स्वविषय में,
गई बात तब न्यायालय में,
सुनी सभी ने जानी!"Show solution
अर्थ:
- 'हुआ विवाद सद्य-निर्दय में' — दयालु व्यक्ति (सिद्धार्थ) और निर्दयी व्यक्ति (आखेटक/तीर चलाने वाले) के बीच विवाद हो गया। 'सद्य' का अर्थ है दयालु और 'निर्दय' का अर्थ है क्रूर/निर्दयी।
- 'उभय आग्रही थे स्वविषय में' — दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। आखेटक का कहना था कि हंस उसका है क्योंकि उसने तीर मारा, और सिद्धार्थ का कहना था कि हंस उनका है क्योंकि उन्होंने उसकी जान बचाई।
- 'गई बात तब न्यायालय में' — जब दोनों में से कोई भी अपनी बात से पीछे नहीं हटा, तो यह विवाद न्यायालय में पहुँचा।
- 'सुनी सभी ने जानी!' — न्यायालय में सभी ने यह कहानी सुनी और जानी।
सारांश: ये पंक्तियाँ बताती हैं कि करुणा और हिंसा के बीच जब विवाद बढ़ा और दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे, तो न्याय के लिए न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
सोच-विचार के लिए
4(क)आपके विचार से इस कविता में कौन-सी पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है? आप उसे ही सबसे महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?Show solution
सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति:
"कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!"
कारण:
ये पंक्तियाँ इस कविता का केंद्रीय संदेश हैं। पूरी कविता इसी भाव के इर्द-गिर्द बुनी गई है। माँ ने जो कहानी सुनाई, उसका सार इन्हीं पंक्तियों में है। इनमें यह बताया गया है कि —
- निर्दोष की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
- न्याय सदा रक्षक का पक्ष लेता है, भक्षक का नहीं।
- सच्चे न्याय में करुणा (दया) का होना अनिवार्य है।
ये पंक्तियाँ न केवल कविता का निष्कर्ष हैं, बल्कि जीवन का एक महत्वपूर्ण नैतिक पाठ भी हैं। इसीलिए ये सबसे महत्वपूर्ण हैं।
(नोट: विद्यार्थी अपनी पसंद की कोई अन्य पंक्ति भी चुन सकते हैं, बशर्ते उसका उचित कारण दें।)
4(ख)आखेटक और बच्चे के पिता के बीच तर्क-वितर्क क्यों हुआ था?Show solution
उत्तर:
आखेटक (तीर चलाने वाले) और बच्चे के पिता (सिद्धार्थ) के बीच तर्क-वितर्क घायल हंस के स्वामित्व को लेकर हुआ था।
आखेटक का तर्क: उसने हंस पर तीर चलाया था, इसलिए वह हंस उसका शिकार है और उस पर उसका अधिकार है।
सिद्धार्थ का तर्क: उन्होंने घायल हंस को उठाकर उसकी जान बचाई थी। जो प्राणी की जान लेता है, उसका उस पर अधिकार नहीं हो सकता। जो जान बचाता है, वही उसका सच्चा स्वामी है।
दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे और कोई समझौता नहीं हुआ। इसीलिए यह विवाद न्यायालय तक पहुँचा। न्यायालय ने सिद्धार्थ के पक्ष में निर्णय दिया क्योंकि जीवन देने वाला, जीवन लेने वाले से बड़ा होता है।
4(ग)माँ ने पुत्र से 'राहुल, तू निर्णय कर इसका' क्यों कहा?Show solution
उत्तर:
माँ (यशोधरा) ने पुत्र राहुल से 'तू निर्णय कर इसका' इसलिए कहा क्योंकि —
- बच्चे की सोचने-समझने की शक्ति को जगाना: माँ चाहती थी कि राहुल केवल कहानी सुनकर मनोरंजन न करे, बल्कि उसमें सही-गलत की पहचान करने की क्षमता विकसित हो।
- स्वतंत्र निर्णय लेने की आदत डालना: माँ ने जानबूझकर कहानी का अंत स्वयं नहीं बताया ताकि बच्चा स्वयं सोचे और निर्भय होकर अपना निर्णय सुनाए।
- न्याय और करुणा का पाठ सिखाना: माँ चाहती थी कि राहुल स्वयं यह समझे कि न्याय किसके पक्ष में होना चाहिए — उसके जो जीवन लेता है या उसके जो जीवन बचाता है।
- बच्चे की परीक्षा लेना: माँ यह देखना चाहती थी कि उसके पुत्र ने कहानी का सार समझा या नहीं।
इस प्रकार माँ का यह कथन बच्चे को एक जिम्मेदार और विवेकशील व्यक्ति बनाने की दिशा में उठाया गया कदम था।
4(घ)यदि कहानी में आप उपवन में होते तो घायल हंस की सहायता के लिए क्या करते? आपके अनुसार न्याय कैसे किया जा सकता था?Show solution
उत्तर:
यदि मैं उपवन में होता/होती:
यदि मैं उस उपवन में होता/होती जहाँ हंस तीर से घायल होकर गिरा, तो मैं भी सिद्धार्थ की तरह सबसे पहले उस घायल हंस को उठाता/उठाती और उसके घाव पर पत्तियाँ या कपड़ा बाँधकर उसे राहत देने की कोशिश करता/करती। मैं आखेटक को समझाने का प्रयास करता/करती कि निर्दोष प्राणी को मारना उचित नहीं है।
न्याय कैसे होता:
मेरे अनुसार न्याय इस प्रकार किया जा सकता था —
- जो व्यक्ति किसी प्राणी की जान बचाता है, उसका उस प्राणी पर अधिकार होना चाहिए, न कि उसका जो उसे मारना चाहता था।
- हंस को उसी के पास रहने देना चाहिए जो उसकी देखभाल कर सके और उसे स्वस्थ कर सके।
- आखेटक को यह समझाना चाहिए कि शिकार करना हिंसा है और निर्दोष प्राणियों को कष्ट देना अनुचित है।
इस प्रकार न्याय में करुणा का समावेश होना चाहिए।
4(ड)कविता में माँ और बेटे के बीच बातचीत से उनके बारे में क्या-क्या पता चलता है?Show solution
उत्तर:
माँ (यशोधरा) के बारे में:
- माँ अपने पुत्र से बहुत प्रेम करती है और उसे अच्छे संस्कार देना चाहती है।
- वह धैर्यवान और बुद्धिमान है — वह कहानी के बीच में प्रश्न पूछकर बच्चे की समझ परखती है।
- वह अपने पति (सिद्धार्थ) के गुणों — करुणा, साहस और न्यायप्रियता — से बच्चे को परिचित कराना चाहती है।
- वह बच्चे को स्वतंत्र रूप से सोचने और निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती है।
- उसमें हास्य-भाव भी है — जब वह कहती है 'समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?'
बेटे (राहुल) के बारे में:
- वह जिज्ञासु और कहानियों में रुचि रखने वाला बालक है।
- वह हठी स्वभाव का है — बार-बार वही कहानी सुनने की जिद करता है।
- वह समझदार है — कहानी सुनकर स्वयं न्याय का निर्णय सुना देता है।
- उसमें करुणा और न्याय की भावना है।
- वह अपनी माँ से बहुत घनिष्ठ है और उनसे बेझिझक बात करता है।
माँ-बेटे के संबंध के बारे में:
दोनों के बीच प्रेम, विश्वास और खुलेपन का सुंदर संबंध है। माँ बच्चे की हर बात को ध्यान से सुनती है और बच्चा माँ पर पूरा भरोसा करता है।
अनुमान और कल्पना से
5(क)माँ ने अपने बेटे को कहानी सुनाते समय अंत में कहानी को स्वयं पूरा नहीं किया, बल्कि उसी से निर्णय करने के लिए कहा। यदि आप किसी को यह कहानी सुना रहे होते तो कहानी को आगे कैसे बढ़ाते?Show solution
उत्तर (कल्पना पर आधारित):
यदि मैं यह कहानी सुना रहा/रही होता/होती, तो कहानी को इस प्रकार आगे बढ़ाता/बढ़ाती —
जब सिद्धार्थ और आखेटक दोनों न्यायालय पहुँचे, तो न्यायाधीश ने दोनों की बात ध्यान से सुनी। आखेटक ने कहा — 'यह हंस मेरा शिकार है, मैंने इस पर तीर चलाया।' सिद्धार्थ ने कहा — 'मैंने इसे मरने से बचाया, इसलिए यह मेरे पास रहेगा।'
न्यायाधीश ने गंभीरता से विचार किया और कहा — 'जो जीवन देता है वह जीवन लेने वाले से बड़ा होता है। जिसने इस हंस की जान बचाई, उसी का इस पर अधिकार है। यह हंस सिद्धार्थ के पास रहेगा।'
आखेटक को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने भविष्य में निर्दोष प्राणियों को न मारने का संकल्प लिया। सिद्धार्थ ने हंस की देखभाल की और जब वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया, तो उसे आकाश में उड़ा दिया।
5(ख)मान लीजिए कि कहानी में हंस और तीर चलाने वाले के बीच बातचीत हो रही है। कल्पना से बताइए कि जब उसने हंस को तीर से घायल किया तो उसमें और हंस में क्या-क्या बातचीत हुई होगी? उन्होंने एक-दूसरे को क्या-क्या तर्क दिए होंगे?Show solution
उत्तर (कल्पना पर आधारित संवाद):
हंस: (दर्द से कराहते हुए) तुमने मुझे क्यों मारा? मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था? मैं तो बस इस सुंदर उपवन में उड़ रहा था।
आखेटक: तुम मेरा शिकार हो। शिकार करना मेरा काम है। तुम्हें पकड़ना मेरा अधिकार है।
हंस: क्या किसी निर्दोष को मारना अधिकार हो सकता है? मैंने तुम्हारी फसल नहीं खाई, तुम्हारे घर को नुकसान नहीं पहुँचाया। मैं तो प्रकृति का एक हिस्सा हूँ।
आखेटक: यह जंगल का नियम है — बड़ा छोटे को खाता है।
हंस: लेकिन तुम मनुष्य हो, पशु नहीं। मनुष्य को विवेक मिला है। क्या तुम्हारा विवेक यह नहीं कहता कि निर्दोष को कष्ट देना पाप है? मेरे भी बच्चे हैं जो मेरी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
आखेटक: (कुछ सोचते हुए) ...
हंस: यदि तुम मुझे छोड़ दो, तो मैं तुम्हें आशीर्वाद दूँगा। करुणा ही सबसे बड़ा धर्म है।
इस प्रकार हंस के तर्कों ने आखेटक के मन में करुणा का बीज बोने की कोशिश की।
5(ग)मान लीजिए कि माँ ने जो कहानी सुनाई है, आप भी उसके एक पात्र हैं। आप कौन-सा पात्र बनना चाहेंगे? और क्यों?
- तीर चलाने वाला
- पक्षी
- पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति
- न्यायाधीश
- कोई अन्य पात्र जो आप कहानी में जोड़ना चाहेंShow solution
उत्तर (व्यक्तिगत विचार पर आधारित):
मैं पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति (सिद्धार्थ) बनना चाहूँगा/चाहूँगी।
कारण:
- करुणा का भाव: घायल और असहाय प्राणी की सहायता करना सबसे बड़ा मानवीय गुण है। मैं भी किसी पीड़ित की सहायता करना चाहूँगा/चाहूँगी।
- साहस: आखेटक जैसे शक्तिशाली व्यक्ति के सामने खड़े होकर न्याय की माँग करना साहस का काम है। यह साहस मुझे प्रेरित करता है।
- न्याय के लिए संघर्ष: सिद्धार्थ ने हार नहीं मानी और न्यायालय तक गए। यह दृढ़ता मुझे पसंद है।
- सकारात्मक भूमिका: यह पात्र कहानी का नायक है और उसके कार्य से एक अच्छा संदेश मिलता है।
(नोट: विद्यार्थी अपनी पसंद का कोई भी पात्र चुन सकते हैं और उचित कारण दे सकते हैं।)
संवाद
6कविता में दिए गए संवादों को पहचानिए कि कौन-सा कथन किसने कहा है और उसे दिए गए उचित स्थान पर लिखिए।Show solution
पुत्र (राहुल) द्वारा कहे गए कथन:
- "माँ, कह एक कहानी!"
- "राजा था या रानी? राजा था या रानी? माँ, कह एक कहानी।"
- "माँ मेरी क्या बानी? मैं सुन रहा कहानी।"
- "कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे? रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!"
माँ (यशोधरा) द्वारा कहे गए कथन:
- "बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?"
- "तू है हठी मानधन मेरे, सुन, उपवन में बड़े सबेरे..."
- "कहती है मुझसे यह चेटी, तू मेरी नानी की बेटी!"
- "राहुल, तू निर्णय कर इसका — न्याय पक्ष लेता है किसका? कह दे निर्भय, जय हो जिसका, सुन लूँ तेरी बानी।"
- "तूने गुनी कहानी।"
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1. खेलते समय आप देखते हैं कि एक मित्र ने भूल से एक नियम तोड़ा है।
2. एक सहपाठी को कक्षा में दूसरों द्वारा चिढ़ाया जा रहा है।
3. एक समूह परियोजना के बीच एक सहपाठी अपने भाग का कार्य नहीं कर रहा है।
4. आपके दो मित्रों के बीच एक छोटी-सी बात पर तर्क-वितर्क हो रहा है।
5. एक सहपाठी को कुछ ऐसा करने के लिए अनुचित रूप से दंडित किया जा रहा है जिसे उसने नहीं किया।
6. एक सहपाठी प्रतियोगिता में हार जाने पर उदास है।
7. कक्षा में चर्चा के बीच एक सहपाठी संकोच कर रहा है और बोलने का अवसर नहीं पा रहा है।
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Sources & Official References
- NCERT Official — ncert.nic.in
- CBSE Academic — cbseacademic.nic.in
- CBSE Official — cbse.gov.in
- National Education Policy 2020 — education.gov.in
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